कई बार करदाता को अतिरिक्त धन की वापसी प्रदान की जाती है ऐसा हो सकता है धारा 234 डी करदाता को प्रदान की गयी अतिरिक्त वापसी पर ब्याज की बसूली के लिये लगाई जाती है। इस भाग में आप करदाता को प्रदान अतिरिक्त वापसी पर ब्याज से सम्बन्धित प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

अधिक वापसी पर ब्याज

 

कभी-कभी हो सकता है कि करदाता को अतिरिक्त धन वापसी की अदायगी हो जाए। धारा 234घ करदाता के लिए दी गई अतिरिक्त धन की वापसी पर ब्याज की वसूली प्रदान करता है। इस भाग में आप करदाता को दिए गए अतिरिक्त धनवापसी पर ब्याज से संबंधित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

आयकर अधिनियम के तहत ब्याज की गणना के तरीके

धारा 234घ के प्रावधानों को समझने से पहले, नियम 119क के प्रावधानों को समझना जरुरी है जो आयकर अधिनियम के तहत ब्याज की गणना प्रणाली प्रदान करता है।

नियम 119क के अनुसार, करदाता द्वारा देय ब्याज या अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत करदाता को केन्द्र सरकार द्वारा देय ब्याज की गणना:

क) जहां ब्याज की गणना वार्षिक आधार पर की जानी है जिस अवधि के लिए एक पूरे महीने या महीनो के लिए समाप्त किया जाएगा इस प्रयोजन के लिए एक महीने के किसी भी अंश को नजरअंदाज किया जाएगा और इतने अवधि के लिए ब्याज की गणना की जाएगी जिनके संबंध में अवधि होना समझा जाएगा;

ख) जहां ब्याज परिकलित करने के लिए हर महीने या एक महीने की एक अवधि में, शामिल भाग के लिए एक महीने के किसी भी अंश के एक पूरे माह के लिए समझा जाएगा;

ग) इस तरह के ब्याज की गणना की जानी है जिनके संबंध में कर, दंड या अन्य राशि की राशि एक सौ रुपए के निकटतम गुणज तक पूर्णांकित किया जाएगा इस प्रयोजन के लिए एक सौ रुपए के किसी भी अंश को नजरअंदाज किया जायेगा और जिनके संबंध में राशि की पूर्णांकित राशि की ब्याज की गणना की जानी है ।

उदाहरण के लिए, हम 8,489 रुपये पर धारा 234घ के तहत ब्याज की गणना 3 महीने और 10 दिन के लिए करना चाहते हैं तो ऊपर चर्चा नियम 119क के अनुसार, ब्याज के लिए उत्तरदायी राशि की गणना करते समय, 100 के किसी भी अंश, के लिए ध्यान नहीं दिया जाना है इसलिए हम 8,489 रुपये से 89 रुपये को अनदेखा करेंगे। हम 8,400 रुपये पर धारा 234घ के तहत ब्याज की गणना करेंगे। इसके अलावा, 10 दिन की अवधि को पूरे महीने के रूप में विचार किया जाएगा और, इसलिए, ब्याज 4 महीने के लिए परिकलित हो जायेगा। यही नियम भी अन्य धाराओं के तहत ब्याज की गणना के लिए लागू होंगें।

मूल प्रावधान

यदि करदाता द्वारा अतिरिक्त कर भुगतान किया है,तो वह उनकी आय के बदले में उसी की वापसी का दावा करेंगे और यह उसे वापस किया जाएगा कई बार यह हो सकता है कि करदाता प्रारंभिक चरण में एक वापसी प्रदान करता हो, यानी, सूचना के समय धारा 143 के तहत (1) और बाद की अवस्था में (अर्थात, नियमित मूल्यांकन पर) धनवापसी कम कर देता है खंड 234घ तहत ऐसे एक मामले में अतिरिक्त धन वापसी ब्याज के साथ करदाता से बरामद किया है ।

धारा 234 घ के अंतर्गत ब्याज वसूला जाएगा यदि धारा 143(1) के अंतर्गत करदाता को किसी प्रकार की धन वापसी होती है तथा

(क) नियमित मूल्यांकन पर कोई धन वापसी देय नही है; अथवा

(ख) धारा 143(1) के अंतर्गत संदर्भित राशि नियमित मूल्यांकन पर देय योग्य राशि से अधिक है।

नियमित निर्धारण का सामान्यत: अर्थ है धारा 143(3) के अंतर्गत मूल्यांकन अर्थात् धारा 144 के अंतर्गत संवीक्षा मूल्यांकन अथवा एक मूल्यांकन अर्थात् सर्वोत्तम निर्णय मूल्यांकन। धारा 147 अथवा धारा 153क के अंतर्गत पहली बार किया गया मूल्यांकन को नियमित मूल्यांकन के तौर पर भी समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण

श्री राजा 84,000 रुपये की वापसी की घोषणा करते हुए आय वापसी दाखिल की उसकी वापसी धारा 143(1) के तहत कार्रवाई की गई थी और धनवापसी करने के लिए उसे दी गई थी इसके बाद उसके मामले की धारा 143 (3) के तहत जांच के लिए चुना गया था और एक नियमित मूल्यांकन धारा 143(3) के तहत किया गया था नियमित आकलन में, अपने धन की वापसी 50,000 रुपए तक कम गयी क्या वह खंड 234घ के तहत किसी भी ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा?

**

खंड 234घ के तहत ब्याज लगाया जाता है तो धारा 143(1) के तहत किसी भी करदाता को वापसी दी जाती है और (क) नियमित मूल्यांकन पर वापसी नहीं है; या

(ख) धारा 143(1) के तहत वापस कर राशि नियमित मूल्यांकन पर वापसी कर राशि प्रतिदेय राशि से अधिक है

नियमित मूल्यांकन का सामान्यत अर्थ धारा 143(3) के अंतर्गत एक मूल्यांकन है यानी धारा 144 के अंतर्गत संवीक्षा मूल्यांकन या एक मूल्यांकन यानी सबसे सर्वोत्तम मूल्यांकन। धारा 147 या धारा 153क के अंतर्गत पहली बार किए गए मूल्यांकन को नियमित मूल्यांकन के तौर पर भी समझा जाएगा।

इस मामले में धारा 143(1) के तहत प्रारंभिक वापसी 84,000 रुपये की और, बाद में, नियमित मूल्यांकन पर वापसी 50,000 रुपए तक कम हो गयी इसलिए, इस मामले में श्री राजा को 34,000 रुपये की अतिरिक्त धन की वापसी दी गई थी वह खंड 234घ के तहत ब्याज के साथ पहले प्राप्त अतिरिक्त धन वापसी राशि (अर्थात् रु. 34,000) का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा दूसरे शब्दों में, श्री राजा 34,000 रुपये की अतिरिक्त धन की वापसी पर खंड 234घ के तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगें (ब्याज की दर तथा ब्याज की अवधि संबधी प्रावधानों पर बाद में चर्चा की जाएगी)

ब्याज की दर

खंड 234घ के तहत ब्याज @ 1/2% प्रति महीने या आंशिक महीने पर लगाया जाता है।

ब्याज वसूली की अवधि

ब्याज धारा 143 (1) के अंतर्गत नियमित रूप से मूल्यांकन करने की तारीख तक धन की वापसी के अनुदान की तारीख से लगाया जाता है ।

नियमित मूल्यांकन का अर्थ धारा 143 (3) या धारा 144 के तहत एक आकलन है। आकलन खंड 147 या धारा 153क के तहत पहली बार के लिए भी एक नियमित मूल्यांकन के रूप में माना जाएगा ।

स्पष्टीकरण

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए श्री सोहम की कर देयता 84,000 रुपए पर आ गयी उन्होंने 1,00,000 रुपये का अग्रिम कर तथा उसके खाते में 4,000 रुपए कर का टीडीएस ऋण था। उन्होंने 20,000 रुपए की वापसी के लिए 15 जुलाई 2026 को आयकर रिटर्न दाखिल किया उनका आंकलन धारा 143(1) के तहत पूरा किया गया और उनको 15 जनवरी 2027 को 20,000रुपये की वापसी की गई इसके बाद उनके मामले की जांच का मूल्यांकन आय धारा 143(3) के तहत किया गया था। दिनांक 29 अगस्त, 2027 को आदेश के अनुसार, उनकी आय की पुनः गणना का आंकलन किया और उनके संशोधित कर देयता 1,00,000 रुपए की गयी वह किस अवधि के लिए, धारा 234घ तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा?

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यदि कोई वापसी करदाता को अनुभाग 143(1) के तहत दी जाती है, तो कर 234घ के तहत ब्याज लगया जाता है और

(क) नियमित आकलन पर कोई वापसी नही है; या

(ख) धारा 143(1) के तहत वापस कर राशि नियमित मूल्यांकन पर प्रतिदेय राशि से अधिक है

आमतौर पर नियमित आकलन का मतलब धारा 143(3) के तहत एक आकलन यानी जांच आकलन है या धारा 144, के तहत एक आकलन सबसे अच्छा मूल्यांकित आकलन है धारा 147 या धारा 153क के तहत पहली बार किया गया मूल्यांकन एक नियमित मूल्यांकन के रूप में माना जाएगा

इस मामले में, आयकर रिटर्न के अनुसार श्री सोहम की कर देयता 84,000 रुपये थी और उसने 1,04,000 रुपये का कर भुगतान किया (रुपए 1,00,000 अग्रिम कर + रु. 4,000 टीडीएस)। प्रारंभ में, उसे 20,000 रुपये धारा 143(1) के तहत वापसी प्रसंस्करण के बाद वापसी दिया गया इसके बाद उसका कर दायित्व नियमित मूल्यांकन 1,00,000 रुपये पर निर्धारित किया गया था और, इसलिए, उसकी धन की वापसी 4000 रुपए तक कम हो गयी (यानी, कर दायित्व नियमित मूल्यांकन पर 1,00,000 रुपये और उसके द्वारा 1,04,000 रुपए कर भुगतान निर्धारित किया इसलिए, संशोधित धन वापसी 4000 रुपये तक आ जाएगी)।

यह देखा जा सकता है कि मूल रूप से उसको 20,000 रुपये की वापसी दी गई थी लेकिन नियमित मूल्यांकन पर उसके धन की वापसी 4,000 रुपए तक कम हो गयी थी इस प्रकार, इस मामले में श्री सोहम 16,000 रुपये की अतिरिक्त धन की वापसी दी गई थी. (यानी, 20,000 रु. - 4,000 रु.)। वह खंड 234घ के तहत ब्याज के साथ पहले से प्राप्त अतिरिक्त धन वापसी का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।

20,000 रुपये की वापसी 15-1-2027 को दी गई थी और 29 अगस्त 2027 को नियमित मूल्यांकन पूरा किया गया, इसलिए, धारा 234घ के तहत 15 जनवरी 2027 से 29 अगस्त, 2027 तक ब्याज @ 1/2% प्रति माह लगाया जाएगा; यानी, 8 महीने (महीने का हिस्सा पूरे महीने के रूप में लिया जाएगा)।

ब्याज के लिए उत्तरदायी राशि

धारा 234घ के तहत ब्याज पूरे या वापसी की अतिरिक्त राशि (जैसा की मामले में हो ) पर लगाया है

स्पष्टीकरण

श्री कपूर 1,84,000 रुपये की आय की वापसी की घोषणा के बारे में वापसी दायर की उनकी वापसी धारा 143(1) के तहत कार्रवाई की गई थी और उन्हें धन की वापसी दी गई थी इसके बाद उसके मामले को धारा 143 (3) के तहत जांच के लिए चुना गया था और एक नियमित मूल्यांकन धारा 143(3) के तहत बनाया गया था नियमित आकलन में उनके धन की वापसी 1,00,000 रुपए तक कम हो गयी थी यदि हाँ , तो वह किस राशि पर, अनुभाग 234घ के तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा?

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यदि कोई वापसी करदाता को अनुभाग 143(1) के तहत दी जाती है, तो कर 234घ के तहत ब्याज लगया जाता है और

(क) नियमित आकलन पर कोई वापसी नही है; या

(ख) धारा 143(1) के तहत वापस कर राशि नियमित मूल्यांकन पर प्रतिदेय राशि से अधिक है

आमतौर पर नियमित आकलन का मतलब धारा 143(3) के तहत एक आकलन यानी जांच आकलन है या धारा 144, के तहत एक आकलन सबसे अच्छा मूल्यांकित आकलन है धारा 147 या धारा 153क के तहत पहली बार किया गया मूल्यांकन एक नियमित मूल्यांकन के रूप में माना ।

इस मामले में 1,84,000 रुपये की प्रारंभिक वापसी. धारा 143(1) के तहत वापसी प्रसंस्करण के बाद दी गई थी और, बाद में, वापसी 1,00,000 रुपए तक कम हो गयी थी इसलिए, इस मामले में श्री कपूर 84,000 रुपये की अतिरिक्त धन वापसी हो गयी वह 84,000 रुपये की अतिरिक्त धन की वापसी पर खंड 234घ तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा दूसरे शब्दों में, वह मूल रूप से 1,84,000 रुपये की वापसी के लिए दी गई थी और, बाद में, वापसी 1,00,000 रुपए तक कम हो गयी थी, इसलिए अतिरिक्त वापसी 84,000 रुपये तक आ जाएगी और ब्याज 84,000 रुपये की अतिरिक्त धन की वापसी पर लगाया जाएगा ।

स्पष्टीकरण

श्री विपुल 18,400 रुपये की आय की वापसी की घोषणा के बारे में वापसी दायर की उनकी वापसी धारा 143(1) के तहत कार्रवाई की गई थी और उन्हें धन की वापसी दी गई थी इसके बाद उसके मामले को धारा 143 (3) के तहत जांच के लिए चुना गया था और एक नियमित मूल्यांकन धारा 143(3) के तहत बनाया गया था नियमित आकलन में धन की वापसी के बजाय मांग 20,000 रुपये का उठायी गयी यदि हाँ , तो वह किस राशि पर, अनुभाग 234घ के तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा?

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यदि कोई वापसी करदाता को अनुभाग 143(1) के तहत दी जाती है, तो कर 234घ के तहत ब्याज लगया जाता है और

(क) नियमित आकलन पर कोई वापसी नही है; या

(ख) धारा 143(1) के तहत वापस कर राशि नियमित मूल्यांकन पर प्रतिदेय राशि से अधिक है

आमतौर पर नियमित आकलन का मतलब धारा 143(3) के तहत एक आकलन यानी जांच आकलन है या धारा 144, के तहत एक आकलन सबसे अच्छा मूल्यांकित आकलन है धारा 147 या धारा 153क के तहत पहली बार किया गया मूल्यांकन एक नियमित मूल्यांकन के रूप में माना ।

इस मामले में 18,400 रुपये की प्रारंभिक वापसी. धारा 143(1) के तहत वापसी प्रसंस्करण के बाद दी गई थी और, बाद में धन वापसी नहीं के बराबर कम करने के लिए मांग 20,000 रुपये उठायी गयी थी।

दूसरे शब्दों में, इस मामले में कोई वापसी नहीं थी हालाँकि प्रारंभिक चरण में उसे 18,400 रुपये की वापसी दी गयी और बाद में वही, नहीं के बराबर कम की गयी जो मांग उठायी गयी थी इसलिए, इस मामले में श्री विपुल को 18,400 रुपये की अतिरिक्त धन वापसी हो गयी वह 18,400 रुपये की अतिरिक्त धन की वापसी पर खंड 234घ के तहत ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगें।

धारा 234घ(2) के अंतर्गत समायोजन

जहां, धारा 154 अथवा धारा 155 अथवा 250 अथवा 254 अथवा धारा 260 अथवा धारा 262 अथवा धारा 263 धारा 264 धारा 254 घ की उप-धारा (4) के अंतर्गत निपटान आयोग के आदेश के परिणाम स्वरूप धारा 143 की उप-धारा (1) के अंतर्गत स्वीकृत धन वापसी की राशि उचित रूप से स्वीकृति हेतु रखी जाएगी, चाहे पूरी अथवा उसका भाग, जो भी स्थिति हो, इसके बाद धारा 234 की उप-धारा (1) के अंतर्गत देय योग्य ब्याज, यदि हो, तदनुसार कम किया जाएगा।

अतिरिक्त धन वापसी पर एमसीक्यू

प्रश्न 1. धारा................................करदाता को अतिरिक्त धन वापसी पर ब्याज की स्वीकृति देती है

(क) 234 क (ख) 234 ख

(ग) 234 ग (घ) 234 घ

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज लगया जाता हैं यदि कोई धनवापसी धारा 143 (1) के अंतर्गत करदाता को स्वीकृत की जाती हैं तथा

(क) कोई धन वापसी नियमित मूल्यांकन पर देय नहीं है अथवा

(ख) धारा 143 (1) के अंतर्गत दिया गया धन नियमित मूल्यांकन पर दिए जाने वाले धने से अधिक है नियमित मूल्यांकन का सामान्य अर्थ हैं कि धारा 143 (3) के अंतर्गत मूल्यांकन अर्थात् धारा 144 के अंतर्गत समीक्षा मूल्यांकन अथवा मूल्यांकन अर्थात् सर्वोत्तम निर्णय मूल्यांकन। धारा 147 अथवा धारा 153क के अंतर्गत पहली बार किया जा रहा मूल्यांकन भी नियमित मूल्यांकन के तौर पर समझा जाएगा

इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है

प्रश्न 2. नियम................................आयकर अधिनियम के अंतर्गत ब्याज की गणना प्रणाली की स्वीकृति देती है

(क) 234 घ (ख) 119 क

(क) 191 क (ख) 119

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

नियम 119क आयकर अधिनियम के अंतर्गत ब्याज की गणना प्रणाली की स्वीकृति देती हैं

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 3. नियम 119 क के अनुसार जब ब्याज की गणना वार्षिक आधार पर होती हैं तो ऐसे ब्याज के लिए अवधि की गणना पूरे महीने अथवा महीने में पूर्ण कर दी जाती हैं। इस उद्देश्य के लिए, महीने का भाग नजरअंदाज कर दिया जाता हैं।

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

नियम 119 क के अनुसार जब ब्याज की गणना वार्षिक आधार पर होती हैं तो ऐसे ब्याज के लिए अवधि की गणना पूरे महीने अथवा महीने में पूर्ण कर दी जाती हैं। इस उद्देश्य के लिए, महीने का भाग नजरअंदाज कर दिया जाता हैं तथा ऐसे पूरी की गई अवधि को उस ब्याज की अवधि को तौर पर समझा जाता हैं जिसके लिए इसकी गणना की गई है।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 4. नियम 119 क के अनुसार जब ब्याज की गणना अवधि में सन्निहित प्रति माह अथवा माह के किसी भाग के आधार पर होती हैं तो माह का कोई भाग पूरा महीना समझा जाएगा तथा ब्याज की गणना की जाएगी।

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

नियम 119 क के अनुसार जब ब्याज की गणना अवधि में सन्निहित प्रति माह अथवा माह के किसी भाग के आधार पर होती हैं तो माह का कोई भाग पूरा महीना समझा जाएगा तथा ब्याज की गणना की जाएगी।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 5. नियम 119 क के अनुसार कर, जुर्माने अथवा अन्य राशि जिसके संबंध में ब्याज की गणना होनी हैं, की एक सौ रूपए के नजदीकी गुणज तक परिपूरित की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए एक सौ रूपए का कोई भाग नजरअंदाज कर दिया जाएगा

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

नियम 119 क के अनुसार कर, जुर्माने अथवा अन्य राशि जिसके संबंध में ब्याज की गणना होनी हैं, की एक सौ रूपए के नजदीकी गुणज तक परिपूरित की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए एक सौ रूपए का कोई भाग नजरअंदाज कर दिया जाएगा तथा पूर्ण की गई राशि को उस राशि के संबंध में समझा जाएगा जिसके लिए ब्याज की गणना की जानी है।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 6. धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज @..................... प्रतिशत .की दर से प्रति माह अथवा माह के भाग पर वसूला जाएगा

(क) 1/2 (ख) 1

(ग) 1.5 (घ) 2

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज @ 1/2. प्रतिशत .की दर से प्रति माह अथवा माह के भाग पर वसूला जाएगा

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 7. धारा 143(1) के अंतर्गत ब्याज धनवापसी की स्वीकृति की तिथि से ........................की तिथि तक वसूला जाएगा

(क) कर की वसूली (ख) नियमित मूल्यांकन

(ग) सूचना की प्राप्ति (घ) कर का भुगतान

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 143(1) के अंतर्गत ब्याज धनवापसी की स्वीकृति की तिथि से नियमित मूल्यांकन .की तिथि तक वसूला जाएगा

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 8. धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज के वसूली के उद्देश्य के लिए नियमित मूल्यांकन का अर्थ धारा 143(3) अथवा धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन हैं। धारा 147 अथवा 153 क के अंतर्गत पहली बार किया गया मूल्यांकन भी नियमित मूल्यांकन के तौर पर समझा जाएगा

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 143(1) के अंतर्गत धनवापसी की स्वीकृति की तिथि से नियमित मूल्यांकन .की तिथि तक वसूला जाएगा

नियमित मूल्यांकन का अर्थ धारा 143(3) अथवा धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन हैं। धारा 147 अथवा 153 क के अंतर्गत पहली बार किया गया मूल्यांकन भी नियमित मूल्यांकन के तौर पर समझा जाएगा

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 9. अतिरिक्त धनवापसी के लिए धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज धनवापसी की अतिरिक्त राशि अथवा पूरी राशि पर लगाया जाता है (जो भी स्थिति हो)

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज धनवापसी की अतिरिक्त राशि अथवा पूरी राशि पर लगाया जाता है (जो भी स्थिति हो)। अन्य शब्दों में, यदि संपूर्ण धनवापसी अतिरिक्त हैं तो ब्याज धनवापसी की संपूर्ण राशि पर लगाया जाएगा तथा यदि धनवापसी कम है तो ब्याज धनवापसी की अतिरिक्त राशि पर लगाया जाएगा

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (ख) गलत विकल्प है

प्रश्न 10. धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज @ 1/2. प्रतिशत .की दर से वसूला जाएगा जबकि महीने के भाग का ब्याज नजरअंदाज किया जाएगा

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

ब्याज धारा 234घ के अंतर्गत धनवापसी स्वीकृति की तिथि से नियमित मूल्यांकन की तिथि तक वसूला जाएगा। धारा 234घ के अंतर्गत ब्याज @ 1/2. प्रतिशत की दर से प्रति माह अथवा महीने के किसी भाग.वसूला जाएगा। अन्य शब्दों में महीने का भाग पूरे महीने के तौर पर समझा जाएगा

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत हैं तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है