इंडोनेशिया : व्यापक करार
हस्ताक्षर तिथि
2016
लागू होना
05/02/2016
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 90 - दोहरा कराधान समझौता - विदेशी राष्ट्रों के साथ दोहरे कराधान के परिहार तथा राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए समझौता - इंडोनेशिया - अधिसूचना सं. जीएसआर 77(र्इ), दिनांक 4-2-1988 का निरस्तीकरण
अधिसूचना सं. एस.ओ. 1144(र्इ) (नं. 17/2016 [एफ. नं. 503/4/2005-एफटीडी-II)], दिनांक 18.3.2016
चूंकि, आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार तथा राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणराज्य सरकार तथा इंडोनेशिया गणराज्य सरकार के बीच एक समझौता 27 जुलार्इ, 2012 को हस्ताक्षरित हुआ (तत्पश्चात् कथित समझौते के तौर पर संदर्भित)
तथा चूंकि कथित समझौते के प्रभावी होने की तिथि 5 फरवरी, 2016 है, कथित समझौते के अनुच्छेद 30 के पैराग्राफ 2 के अनुसार कथित समझौते के प्रभावी होने के लिए संबंधित कानूनों द्वारा आपेक्षितानुसार प्रक्रियाओं की समाप्ति की अधिसूचना के बाद की तिथि के तौर पर
तथा चूंकि, कथित समझौते के अनुच्छेद 30 के पैराग्राफ 3 के उप-पैराग्राफ (क) मुहैया कराता है कि कथित समझौते के प्रावधान पंचांग वर्ष जिसमें कथित समझौता प्रभावी हुआ के उत्तरगामी अगले वर्ष के प्रथम दिन के को अथवा उसके पश्चात् प्रारंभि किसी वित्तीय वर्ष में व्युत्पन्न आय के संबंध में भारत में प्रभावी होंगे।
अब, इसलिए, आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 90 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा अधिसूचित करती है कि इसके साथ परिशिष्टानुसार कथित समझौते के समस्त प्रावधान भारतीय संघ में प्रभावी होंगे।
परिशिष्ट
आय पर करों के संबंध में
दोहरे कराधान के परिहार तथा राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए
भारतीय गणतंत्र सरकार
तथा
इंडोनेशिया गणतंत्र सरकार
के बीच
समझौता
भारतीय गणतंत्र सरकार तथा इंडोनेशिया गणतंत्र सरकार, दोनों देशों के बीच आर्थिक समन्वय को प्रोत्साहित करने के लिए आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार तथा राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए समझौते को अंतिम रूप से तय करने की इच्छुक हैं जो निम्नानुसार सहमत हुए हैं :
अध्याय 1
समझौते का क्षेत्र
अनुच्छेद-1
अंतर्निहित व्यक्ति
यह समझौता उस व्यक्ति के लिए लागू होगा जो एक अथवा दोनों अनुबंधात्मक देशों के निवासी हैं।
अनुच्छेद-2
अंतर्निहित कर
1. यह समझौता संविदात्मक राष्ट्र अथवा उसके राजनीतिक उपसंभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण की ओर से आय पर करों के लिए लागू होगा, उस प्रणाली के बावजूद जिसमें यह लगाए गए हैं।
2. माना जाएगा कि आय पर अथवा आय के तत्वों पर अधिरोपित समस्त कर, चल तथा अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति पर कर तथा उद्यम द्वारा पारिश्रमिक अथवा वेतन की कुल राशि सहित
3. मौजूदा कर जिसके लिए समझौता लागू होगा विशेषकर :
(क) भारतीय गणतंत्र की स्थिति में;
आयकर, उसपर किसी अधिभार सहित
(तत्पश्चात् "भारतीय कर के तौर पर संदर्भित")
(ख) इंडोनेशिया गणतंत्र की स्थिति में
आयकर कर,
(तत्पश्चात् "इंडोनेशियार्इ कर के तौर पर संदर्भित")
4. समझौता किसी अभिज्ञात अथवा वस्तुत समकक्ष करों के लिए भी लागू होगा जो मौजूदा करों के स्थान पर, के अतिरिक्त समझौते के हस्ताक्षर की तिथि के पश्चात् लागू होता है। अनुबंधात्मक राष्ट्र के समक्ष प्राधिकारी किसी महत्वपूर्ण परिवर्तनों को एक-दूसरे को अधिसूचित करेंगे जिसे इनके संबंधित कराधान कानूनों में किया गया है।
अध्याय II
परिभाषाएं
अनुच्छेद 3
सामान्य परिभाषाएं
1. इस समझौते के उद्देश्य के लिए, जब तक संदर्भ अन्यथा आपेक्षित न हो :
(क) शब्द "भारत" का अर्थ भारतीय क्षेत्र से है तथा अंतर्देशीय जल क्षेत्र तथा उसपर वायु क्षेत्र, साथ ही साथ अन्य समुद्री क्षेत्र जिसमें भारत का संप्रभु अधिकार, अन्य अधिकार तथा क्षेत्राधिकार है, शामिल है, समुद्री कानून 1982 पर संयुक्त राष्ट्र समझौते सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार तथा भारत कानून के अनुसार;
(ख) शब्द "इंडोनेशिया गणतंत्र" का अर्थ इंडोनेशिया के कानून में परिभाषितानुसार इंडोनेशिया गणतंत्र तथा महाद्वीपीय जलसीमा, विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा आसन्न समुद्र जिस पर इंडोनेशिया गणतंत्र की प्रभुता अधिकार अथवा क्षेत्राधिकार से है, समुद्री कानून 1982 पर संयुक्त राष्ट्र समझौते सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार
(ग) एक शब्द "एक संविदात्मक राष्ट्र" तथा "अन्य संविदात्मक राज्य" का अर्थ, भारतीय गणतंत्र अथवा इंडोनेशिया गणतंत्र है, जैसा प्रसंग आपेक्षित समझे;
(घ) शब्द "व्यक्ति" में एक व्यक्ति, एक कंपनी, व्यक्तियों की निकाय तथा अन्य कोर्इ उद्यम शामिल है जिसे संबंधित संविदात्मक राष्ट्रों में प्रभावी कराधान कानूनों के अंतर्गत कराधान इकार्इ के तौर पर समझा जाता है।
(ड़) शब्द "कंपनी" का अर्थ कोर्इ निकाय निगमित अथवा अन्य उद्यम जिसे कर उद्देश्यों के लिए निकाय निगमित के तौर पर समझा जाता है;
(च) शब्द "उद्यम" किसी व्यापार करने वाले पर लागू होता है;
(छ) शब्द "संविदात्मक राष्ट्र के उद्यम" अथवा " अन्य संविदात्मक राष्ट्र के उद्यम" का अर्थ क्रमश: संविदात्मक राज्य के निवासी द्वारा संचालित उद्यम तथा अन्य संविदात्मक राज्य के निवासी द्वारा निष्पादित एक उद्यम है;
(ज) शब्द "अंतर्राष्ट्रीय ट्रेफिक" का अर्थ संविदात्मक राष्ट्र के उद्यम द्वारा संचालित जहाज अथवा एयरक्राफ्ट द्वारा कोर्इ परिवहन है केवल तब छोड़कर जब एयरक्राफ्ट तथा जहाज अन्य संविदात्मक राज्य में स्थानों के बीच एकमात्र रूप से संचालित होता है;
(झ) शब्द "राष्ट्रीय" का अर्थ:
(1) संविदाकारी राष्ट्र की राष्ट्रीयता के प्रसंस्करण वाला कोर्इ व्यक्ति
(2) कोर्इ कानूनी व्यक्ति, इसकी स्थिति से व्युत्पन्न भागीदार अथवा संघ जैसे संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानून
(ञ) शब्द "सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ :
(1) भारतीय गणतंत्र की स्थिति में वित्त मंत्रालय अथवा इसके प्राधिकृत प्रतिनिधि;
(2) इंडोनेशिया गणतंत्र की स्थिति में, वित्त मंत्री अथवा इसके प्राधिकृत प्रतिनिधि;
(ट) शब्द "कर" का अर्थ भारतीय अथवा इंडोनेशिया कर, जैसा संदर्भ आपेक्षित करें, है लेकिन ऐसी कोर्इ राशि शामिल नहीं होगी जो करों के संबंध में किसी चूक अथवा छूट के संबंध में देययोग्य है जिस पर यह समझौता लागू होता है अथवा जो उन करों से संबंधित अधिरोपित जुर्माना अथवा अर्थदंड का प्रतिनिधित्व करता है।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा किसी समय समझौते के प्रयोग के संबंध में, यहां परिभाषित न होने वाली कोर्इ अवधि, जबतक संदर्भ अन्यथा आपेक्षित हो, का अर्थ होगा कि उन करों जिस पर समझौता लागू होता है, के उद्देश्यों के लिए उस राष्ट्र के कानून के अंतर्गत उस समय उस राष्ट्र के कर कानूनों पर प्रयोज्य कानूनों के अंतर्गत कोर्इ अर्थ होगा जो उस राष्ट्र के अन्य कानूनों के अंतर्गत अवधि हेतु दिए गए अर्थ पर प्रचलित है।
अनुच्छेद 4
निवासी
1. इस करार के प्रयोजनार्थ ''एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी'' शब्द का अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति से है जिस पर उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत उसके अधिवास, निवास, प्रबन्ध-स्थान, निगमन स्थान अथवा किसी ऐसे ही अन्य कारण से कर लगाया जा सकता है तथा साथ ही वह राष्ट्र तथा उसका कोर्इ राजनीतिक उपसंभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण शामिल हैं। हालांकि, इस शब्द में कोर्इ ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं होगा जिस पर केवल उस राष्ट्र अथवा उसमें स्थित स्रोतों से होने वाली आय पर उस राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।
2. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण यदि कोर्इ व्यक्ति दोनों ही संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी हो, वहां उसकी हैसियत निम्नानुसार तय की जाएगी
(क) उसे केवल उसी राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जहां उसे एक स्थायी निवास-गृह उपलब्ध हो, यदि उसे दोनों ही राष्ट्रों में कोर्इ स्थायी निवास उपलब्ध हो, तो वह उस राष्ट्र का एक निवासी माना जाएगा, जिसके साथ उसके व्यक्तिगत और आर्थिक संबंध घनिष्ठ हैं (महत्वपूर्ण हितों का केन्द्र)
(ख) यदि उस राष्ट्र का जिसमें उसके महत्वपूर्ण हित निहित हैं, निर्धारित नहीं किए जा सकते हों अथवा यदि उसे किसी भी राष्ट्र में कोर्इ स्थायी निवास-गृह उपलब्ध नहीं हो, तो वह केवल उस राष्ट्र का एक निवासी माना जाएगा जिसमें वह आदतन रहता हो
(ग) यदि उसके पास आदतन दोनों ही राष्ट्रों में आवास हो अथवा उनमें से किसी भी राष्ट्र में आवास नहीं हो, तो वह उस राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जिसका वह एक नागरिक है;
(घ) यदि उसकी आवासीय स्थिति को उस क्रम में उप-पैराग्राफ (क) से (ग) के कारणों द्वारा निर्धारित न किया जा सके तो सेविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी समझोते द्वारा प्रश्न को हल करने का प्रयास करेंगें।
3. जहाँ पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण किसी व्यक्ति से भिन्न कोर्इ व्यक्ति दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी हो, तब उसे केवल उस राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जहां उसका प्रभावी प्रबंध का स्थान स्थित है। यदि वह राष्ट्र जहां उसका प्रभावी प्रबंध का स्थान स्थित है, को निर्धारण नहीं किया जा सकता हो, संविदाकारी राष्ट्रों प्रयास होगा कि सक्षम प्राधिकारी पारस्परिक सहमति द्वारा इस प्रश्न का निर्णय करें।
अनुच्छेद-5
स्थायी संस्थापन
1. इस करार के प्रयोजनार्थ ''स्थायी संस्थापन'' शब्द का आशय कारोबार के उस निश्चित स्थान से है, जिसके द्वारा उद्यम का कारोबार सम्पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से किया जाता है।
2. ''स्थायी संस्थापन'' शब्द का आशय विशेषत: शामिल होंगे :
(क) प्रबंधन का एक स्थानl;
(ख) एक शाखा;
(ग) एक कार्यालय;
(घ) एक कारखाना;
(ड़) एक कार्यशाला;
(च) किसी व्यक्ति से संबंधित कोर्इ भण्डागार, जो दूसरों को भण्डारण सुविधाएं मुहैया कराता हो;
(छ) एक बिक्री केंद्र;
(ज) कोर्इ फार्म अथवा अन्य स्थान जहां कृषि, वानिकी, बागवानी अथवा इससे संबंधित कार्यकलाप किए जाते हों; और
(झ) एक खान, तेल अथवा गैस का कुआँ, खदान अथवा प्राकृतिक संसाधनों के निष्कर्षण का कोर्इ अन्य स्थान
3. ''स्थायी संस्थापन'' शब्द में कर्इ पहलू शामिल होंगे :
(क) कोर्इ भवन-स्थल अथवा निर्माण, अधिष्ठापन अथवा संयोजन परियोजना अथवा उससे संबंधित पर्यवेक्षी कार्यकलाप केवल तब स्थार्इ प्रतिष्ठान बनेगी यदि ऐसा भवन स्थल, परियोजना अथवा कार्यकलाप 183 दिनों से अधिक समय तक चले;
(ख) प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण अथवा दोहन के लिए प्रयुक्त एक ड्रिलिंग रिग अथवा कार्यरत जहाज लेकिन केवल यदि ऐसे स्थल, परियोजना अथवा गतिविधियों के लिए जो 183 दिनों से अधिक की अवधि के लिए बनी रहती है।
(ग) ऐसे उद्देश्य के लिए उद्यम द्वारा संलग्न कर्मचारियों अथवा अन्य कर्मियों के माध्यम से एक उद्यम द्वारा परामर्श सेवाओं सहित सेवाओं की प्रस्तुति लेकिन केवल तभी यदि बिक्री बारह माह की अवधि के भीतर 91 दिनों से अधिक की कुल अवधि अथवा अवधियों के लिए संविदाकारी राष्ट्र के भीतर उस प्रकार की गतिविधियां (उसी अथवा संबंधित परियोजना के लिए) जारी रहती है।
4. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के होते हुए भी ''स्थायी संस्थापन'' शब्द में निम्नलिखित को शामिल नहीं समझा जाएगा :
(क) उद्यम से संबंधित माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के केवल भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ सुविधाओं का इस्तेमाल करना
(ख) मात्र भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ उद्यम से संबंधित माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के किसी स्टॉक का रख-रखाव करना
(ग) किसी अन्य उद्यम द्वारा केवल प्रसंस्करित किए जाने के प्रयोजनार्थ उद्यम के माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के स्टॉक का रख-रखाव करना
(घ) उद्यम के लिए माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं को केवल क्रय करने के लिए अथवा सूचना एकत्र करने के लिए कारोबार के किसी निश्चित स्थान का रख-रखाव करना
(ड़) उद्यम के लिए केवल प्रारम्भिक अथवा सहायक स्वरूप के किसी अन्य कार्यकलाप को चलाने के प्रयोजनार्थ कारोबार के लिए निश्चित स्थान का रख-रखाव करना
(च) केवल उप-पैराग्राफ (क) से (ड़) में निर्दिष्ट गतिविधियों के किसी संयोजन के लिए व्यापार के निश्चित स्थान का रखरखाव, बशर्ते इस संयोजन के परिणामस्वरूप व्यापर के निश्चित स्थान की समग्र गतिविधि सहायक अथवा प्राथमिक प्रकृति का संयोजन है।
5. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानें के होते हुए भी, जहां स्वतंत्र हैसियत के किसी अभिकर्ता, जिस पर पैराग्राफ 7 लागू होता हो, से भिन्न कोर्इ व्यक्ति अन्य संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम की ओर से एक संविदाकारी राष्ट्र में कार्य करता है, वहां किन्हीं उन कार्यकलापों के संबंध में, जिन्हें उक्त व्यक्ति उद्यम के लिए करता है, प्रथमोल्लिखित संविदाकारी राष्ट्र में उस उद्यम के स्थायी संस्थापन का होना माना जाएगा, यदि ऐसे व्यक्ति
(क) उस उद्यम के नाम से उस राष्ट्र में संविदाएं सम्पन्न करने का प्राधिकार प्राप्त हो और वह आदतन उस प्राधिकार का प्रयोग भी करता हो, जब तक कि ऐसे व्यक्ति की गतिविधियां पैराग्राफ 4 में उल्लिखित उन गतिविधियों तक सीमित न हों, जिन्हें यदि वह कारोबार के एक निश्चित स्थान के माध्यम से प्रयोग करता है, को उस पैराग्राफ के प्रावधानों के अधीन कारोबार के इस निश्चित स्थान को एक स्थायी संस्थापन नहीं बनाएगा अथवा
(ख) ऐसा कोर्इ प्राधिकार प्राप्त नहीं हो, किन्तु वह फिर भी आदतन प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में ऐसे माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं का स्टॉक रखता हो जिसमें से वह उद्यम की ओर से माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं की नियमित रूप से सुपुर्दगी करता हो;
(ग) स्वयं उद्यम के लिए पूर्णतया अथवा लगभग पूर्णतया प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में आदतन आदेश को सुरक्षित करता हो
6. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी बीमा उद्यम को पुन: बीमा करने के मामले को छोड़कर, दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थायी संस्थापन का होना तभी माना जाएगा, यदि वह स्वतंत्र हैसियत वाले किसी एजेंट, जिस पर पैराग्राफ 7 लागू होता हों, से भिन्न किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से उस अन्य राष्ट्र के क्षेत्र में बीमे का प्रीमियम एकत्र करता है अथवा वहां स्थित जोखिमों का बीमा करता है।
7. एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम को किसी अन्य संविदाकारी राष्ट्र में मात्र इस कारण कोर्इ स्थायी संस्थापन का होना नहीं माना जाएगा कि वह उस अन्य राष्ट्र में किसी दलाल, सामान्य कमीशन एजेंट अथवा स्वतंत्र हैसियत वाले किसी अन्य एजेंट के माध्यम से कारोबार करता है, बशर्ते कि ऐसे व्यक्ति अपने कारोबार का काम सामान्य रूप से कर रहे हों। तथापि, जब ऐसे किसी एजेंट के कार्यकलाप पूर्णत: अथवा लगभग पूर्णत: उस उद्यम की ओर से किए जाते हों, तो उसे इस पैराग्राफ के अभिप्राय के अंतर्गत स्वतंत्र हैसियत का एजेंट नहीं समझा जाएगा।
8. यह तथ्य कि कोर्इ कम्पनी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है, किसी ऐसी कम्पनी को नियंत्रित करती है अथवा किसी ऐसी कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती है, जो दूसरे संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है अथवा जो उस दूसरे राष्ट्र में (चाहे किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से अथवा अन्यथा) कारोबार करती है, को उन दोनों में से कोर्इ भी कम्पनी स्वत: ही दूसरे की स्थायी संस्थापन नहीं बन जाएगी।
अध्याय III
आय पर कराधान
अनुच्छेद-6
अचल सम्पत्ति से आय
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल सम्पत्ति, कृषि अथवा वानिकी से आय सहित, से प्राप्त आय पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जाएगा।
2. ''अचल सम्पत्ति'' शब्द का अर्थ वही होगा जो उस संविदाकारी राष्ट्र के कानून के अंतर्गत उसका अर्थ है, जिसमें विचाराधीन सम्पत्ति स्थित है। इस पद में, किसी भी हालत में, ये शामिल होंगे - अचल सम्पत्ति के अवसाधन के रूप में सम्पत्ति, कृषि और वानिकी में प्रयुक्त पशुधन और उपस्कर, ऐसे अधिकार जिन पर भू-सम्पत्ति संबंधी सामान्य कानून के उपबंध लागू होते हों, खनिज भण्डार, स्रोत तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए अथवा दोहन के अधिकार के प्रतिफल के रूप में परिवर्तनीय अथवा नियत अदायगियों के अधिकार, जलयान, नौकाएं और वायुयान और सड़क परिवहन वाहन अचल सम्पत्ति के रूप में नहीं माने जाएंगे।
3. पैराग्राफ 1 के प्रावधान, अचल सम्पत्ति के प्रत्यक्ष उपयोग, उसे किराये पर देने अथवा इसके किसी अन्य प्रकार के प्रयोग से उद्भूत होने वाली आय पर भी लागू होंगे।
4. पैराग्राफ 1 और 3 के प्रावधान, किसी उद्यम की अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय पर तथा स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाओं के निपादन के लिए प्रयुक्त अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय पर भी लागू होंगे।
अनुच्छेद-7
कारोबार से लाभ
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के लाभों पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगाया जाएगा जब तक कि वह उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से उस राष्ट्र में कारोबार नहीं करता हो। यदि उक्त उद्यम उपर्युक्त तरीके से कारोबार करता हो तो उस उद्यम के लाभों पर दूसरे राष्ट्र में भी कर लगाया जा सकता है, किन्तु उसके लाभों के केवल उतने अंश पर ही कर लगेगा जो उस स्थायी संस्थापन को प्राप्त हुए माने जाएंगे।
2. पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के अनुसार, जहां एक संविदाकारी राष्ट्र का कोर्इ उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो, वहां प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में ऐसे स्थायी संस्थापन के कारण हुए लाभ, वे लाभ माने जाएंगे जिनके होने की संभावना तब होगी जब एक समान या उससे मिलती-जुलती परिस्थितियों में एक समान या मिलते-जुलते कार्यकलापों में लगे हुए कोर्इ और भिन्न उद्यम हो और वे उस उद्यम के साथ पूर्णतरू स्वतंत्र रूप से कारोबार करता है जिसका वह एक स्थासी संस्थापन है।
3. किसी स्थायी संस्थापन के लाभों के निर्धारण करने में, उस राष्ट्र के कर कानूनों के प्रावधानों और उसकी सीमाओं के अनुसार ऐसे कार्यकारी तथा सामान्य प्रशासन पर किए गए खर्चों, चाहे राष्ट्र में जहां स्थार्इ संस्थापन स्थित है अथवा किसी अन्य स्थान पर, सहित खर्चे जो स्थार्इ प्रतिष्ठान के लिए किए गए हों, की कटौतीनुसार स्वीकार्य होंगे हालांकि ऐसी कोर्इ कटौती स्थार्इ संस्थापन को दी गर्इ राशि पर ब्याज के रूप में, बैंकिंग उद्यम की स्थिति में छूट , अथवा, प्रबंधन के लिए अथवा निष्पादित विशिष्ट सेवा के लिए पेटेंट अथवा तकनीकी जानकारी अथवा अन्य अधिकारों के प्रयोग के लिए विवरणी में रायल्टी, शुल्क अथवा अन्य समकक्ष शुल्कों के रूप में उद्यम के मुख्यालय अथवा इसके अन्य किसी कार्यालयों हेतु स्थार्इ संस्थापन (अन्यथा वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए) द्वारा दी गर्इ राशि, यदि हो, के संबंध में स्वीकृत होगी। इसी तरह, कोर्इ खाता उद्यम के मुख्यालय अथवा इसके अन्य किसी कार्यालयों को दी गर्इ राशि पर ब्याज के रूप में, बैंकिंग उद्यम की स्थिति में छूट, अथवा, प्रबंधन के लिए अथवा निष्पादित विशिष्ट सेवा के लिए पेटेंट अथवा तकनीकी जानकारी अथवा अन्य अधिकारों के प्रयोग के लिए विवरणी में रायल्टी, शुल्क अथवा अन्य समकक्ष शुल्कों के रूप में उद्यम के मुख्यालय अथवा इसके अन्य कार्यालयों द्वारा वसूली राशि (अन्यथा वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए) के लिए स्थार्इ संस्थापन के लाभ के निर्धारण में विचारनीय नहीं होगा।
4. जहां तक उद्यमों के विभिन्न भागों हेतु उसके कुल लाभों के विभाजन के आधार पर स्थार्इ संस्थापन हेतु रोप्य किए जाने वाले लाभों को निर्धारित करने के लिए संविदात्मक राष्ट्र में प्रथा की गर्इ है कि पैराग्राफ 2 में कुछ भी ऐसे विभाजन द्वारा करारोपित किए जाने के लिए लाभों के निर्धारण से संविदात्मक राज्य को अलग करेगा जैसी प्रथा हो सकती हैं : हालांकि, अपनार्इ गर्इ विभाजन की विधि इस तरह होगी कि परिणाम इस अनुच्छेद में शामिल सिद्धांतों के अनुसार होगा।
5. कोर्इ लाभ, केवल इस कारण से किसी स्थायी संस्थापन को हुआ नहीं माना जाएगा कि उस स्थायी संस्थापन ने उद्यम के लिए माल अथवा व्यापारिक-वस्तुएं खरीदी है।
6. पूर्ववर्ती पैराग्राफों के प्रयोजनार्थ स्थायी संस्थापन के कारण हुए लाभों को तब तक साल दर साल उसी पद्धति से निर्धारित किया जाता रहेगा, जब तक कि उसके विपरीत कोर्इ ठोस तथा पर्याप्त कारण हो।
7. जहां लाभों में आय की ऐसी मदें शामिल होती हैं जिनका इस करार के अन्य अनुच्छेदों में अलग से विवेचन किया गया है, वहां उन अनुच्छेदों के उपबंध इस अनुच्छेद के प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे।
अनुच्छेद-8
समुद्री जहाज तथा वायुयान परिवहन
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय यातायात में जलयानों अथवा वायुयानों के प्रचालन से प्राप्त होने वाले लाभों पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगाया जाएगा जिसमें उद्यम के प्रभावी प्रबंधन का स्थान स्थित है।
2. यदि जहाज उद्यम के प्रभावी प्रबंधन बाहर जहाज भेजता है तो वह उस संविदात्मक राज्य में स्थित होना समझा जाएगा जिसमें जहाज का गृह बंदरगाह स्थित है अथवा यदि उस संविदात्मक राज्य में ऐसा कोर्इ गृह बंदरगाह स्थित नहीं हैं, जहां जहाज का संचालक निवासी है।
3. "समुद्री जहाज अथवा वायुयान के संचालन" शब्द का अर्थ ऐसे परिवहन से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित किसी अन्य गतिविधि तथा समुद्री जहाज अथवा वायुयान के आकस्मिक पट्टेदारी, अन्य उद्यमों की ओर से ऐसे परिवहन के लिए टिकटों की बिक्री सहित समुद्री जहाज अथवा वायुयान के स्वरूप, पट्टे अथवा स्वामी द्वारा किए गए यात्री, डाक, पशु अथवा उत्पाद पर समुद्री जहाज अथवा वायुयान द्वारा परिवहन का व्यापार है।
4. पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाजों के संचालन से अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा व्युत्पन्न संविदाकारी राष्ट्र के भीतर स्रोतों से लाभ प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में करारोपित हो सकता है लेकिन उस संविदाकारी राष्ट्र में अधिरोपित कर उसके 50 प्रतिशत के समान की राशि द्वारा सीमित होगा।
5. परिवहन उद्यम द्वारा प्राप्त लाभ जो अंतर्राष्ट्रीय यातायात में माल द्वारा अथवा व्यपारिक माल के परिवहन के लिए प्रयुक्त कंटेनरों (कंटेनरों के परिवहन के लिए ट्रेलर तथा अन्य उपकरण सहित) के प्रयोग, रख-रखाव अथवा किराए द्वारा केवल उस संविदाकारी राष्ट्र में कराधेय होंगे जब तक कि कंटेनर्स केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के भीतर प्रयोग किए जाते हैं।
6. इस अनुच्छेद के प्रयोजनार्थ अंतर्राष्ट्रीय यातायात में जलयान अथवा वायुयान के संचालन से संबंधित कोष पर ब्याज ऐसे जलयानों अथवा वायुयान के संचालन से प्राप्त लाभ के रूप में माना जाएगा तथा ऐसे ब्याज के संदर्भ में अनुच्छेद 11 के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
7. पैराग्राफ 1 के उपबंध किसी पूल में भागीदारी, किसी संयुक्त उद्यम अथवा किसी अन्तर्राष्ट्रीय प्रचालन एजेंसी में प्राप्त लाभों पर भी लागू होंगे।
अनुच्छेद-9
सहयोगी उद्यम
1. जहां
(क) एक संविदाकारी राष्ट्र का कोर्इ उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के प्रबंधन, नियंत्रण अथवा पूंजी में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेता है; अथवा
(ख) वे ही व्यक्ति, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के प्रबंधन, नियंत्रण अथवा पूंजी में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं;
और दोनों में से किसी भी अवस्था में दोनों उद्यमों के बीच उनके वाणिज्यिक अथवा वित्तीय संबंधों में ऐसी शर्तें रखी अथवा लगार्इ जाती हैं जो उन शर्तों से भिन्न हैं, जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच रखी जातीं तो ऐसा कोर्इ भी लाभ जो उन शर्तों के नहीं होने की स्थिति में उन उद्यमों में से एक उद्यम को प्राप्त हुआ होता, किन्तु उन शर्तों के कारण इस प्रकार प्राप्त नहीं हुआ, तो वे लाभ उस उद्यम के लाभों में शामिल किए जा सकेंगे और उन पर तद्नुसार कर लगाया जा सकेगा।
2. जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उस राष्ट्र के किसी उद्यम के लाभों में लाभों को सम्मिलित करता है और तद्नुसार कर लगाता है जिस पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया गया है और उसमें सम्मिलित किए गए लाभ ऐसे लाभ हैं जो प्रथमोल्लिखित राष्ट्र के उद्यम को उस स्थिति में प्राप्त हुए होते यदि दोनों उद्यमों के बीच लगार्इ गर्इ शर्तें उस तरह की होतीं जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच लगार्इ जाती हैं, तब वह दूसरा राष्ट्र उन लाभों पर उसमें प्रभारित कर की राशि के बराबर समुचित समायोजन करेगा। इस प्रकार के समायोजन को निश्चित करने में इस करार के अन्य प्रावधान को यथोचित रूप से ध्यान में रखना होगा और यदि आवश्यक हो, तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी एक दूसरे के साथ परामर्श करेंगे।
3. पैराग्राफ 2 के प्रावधान वहां लागू नहीं होंगे जहां न्यायिक, प्रशासनिक अथवा अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अंतिम निर्णय का परिणाम हैं जो पैराग्राफ 1 के अंतर्गत लाभों के समायोजन को वृद्धि देता है। एक संबंधित उद्यम जालसाजी, घोर लापहरवाही अथवा जानबूझकर की गर्इ चूक के संबंध में जुर्माने के लिए उत्तरदायी है।
अनुच्छेद-10
लाभांश
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी किसी कम्पनी द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए गए लाभांश उस दूसरे राष्ट्र में कराधेय होंगे।
2. हालांकि, ऐसे लाभांश उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करयोग्य होगा जिसमें लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी एक निवासी हो तथा उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार हो लेकिन यदि प्राप्तकर्ता लाभांश का लाभकारी स्वामी हो तो ऐसा प्रभारित कर लाभांश की सकल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
यह पैराग्राफ लाभ के संबंध में कंपनी के कराधान को प्रभावित नहीं करेगा जिनमें से लाभांश दिये गये हैं।
3. इस अनुच्छेद में यथा प्रयुक्त ''लाभांश'' पद का अभिप्राय शेयरों अथवा अन्य अधिकारों से प्राप्त आय से है जो लाभ की भागीदारिता, ऋण के दावे न हों, साथ ही साथ अन्य निगमित अधिकारों से प्राप्त आय से है जिस पर वही कराधान व्यवस्था लागू होती है जो उस राष्ट्र के कानूनों के अन्तर्गत शेयरों से प्राप्त आय पर लागू होती है, जिसकी वितरण करने वाली कम्पनी एक निवासी है।
4. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर लाभांश के लाभार्थी स्वामी वहां स्थित स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार चलता है जिसमें से लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी एक निवासी है अथवा वहां स्थित निश्चित स्थान से स्वतंत्र निजी सेवाओं को अन्य राष्ट्रों में निष्पादित करती है तथा उसके संबंध में जिसमें दिया गया लाभांश ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान अथवा निश्चित स्थान के प्रभावी रूप से संबंधित हैं, धारित की जाएगी। ऐसे मामलों में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14 के प्रावधान, जो भी स्थिति हो, लागू होंगे
5. जहां कोर्इ कम्पनी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है, दूसरे संविदाकारी राष्ट्र से लाभ अथवा आय प्राप्त करती है, तो वह दूसरा राष्ट्र कम्पनी द्वारा अदा किए गए लाभांशों पर किसी भी प्रकार का कर नहीं लगाए, जब तक कि ऐसे लाभांश उस दूसरे राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए जाते हों, अथवा जब तक कि जिन धारिताओं के बारे में लाभांशों की अदायगी की जाती हो, वह उस दूसरे राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन से प्रभावी रूप से संबद्ध हो और न ही कम्पनी के अवितरित लाभों पर कर लगाया जाएगा, चाहे अदा किए गए लाभांश अथवा वितरित लाभपूर्ण रूप से या आंशिक रूप से उस दूसरे राष्ट्र में उद्भूत होने वाले लाभ अथवा आय के रूप में हो।
अनुच्छेद-11
ब्याज
1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होने वाले तथा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए गए ब्याज पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।
2. हालांकि, इस प्रकार के ब्याज पर उस संविदाकारी राष्ट्र में भी और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा जिस राष्ट्र में वह उद्भूत होता है, किन्तु यदि ब्याज का लाभार्थी स्वामी अन्य संविदात्मक राज्य का निवासी है तो इस प्रकार प्रभारित कर, ब्याज की सकल रकम के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
3. पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत ब्याज उस राष्ट्र में कर से छूट प्राप्त होगी बशर्ते कि वह निम्नलिखित के द्वारा प्राप्त किया गया हो और हितभागी रूप से अपने स्वामित्व में रखा गया हो :
(क) दूसरे संविदाकारी राष्ट्र की सरकार, उसका कोर्इ राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा कोर्इ स्थानीय प्राधिकरण अथवा
(ख) (i) भारत की स्थिति में;
(1) भारतीय रिजर्व बैंक;
(2) भारतीय आयात-निर्यात बैंक; तथा
(3) राष्ट्रीय हाउसिंग बैंक;
(ii) इंडोनेशिया गणराज्य की स्थिति में :
(1) बैंक ऑफ इंडोनेशिया (द सेंट्रल बैंक ऑफ इंडानेशिया)
(2) pusat investasi pemerinath (द सेंटर फॉर गर्वेमेंट इनवेस्टमेंट); तथा
(3) lembaga pemboayaan ekspor indonesia (द इंडोनेशिया एक्सिमबैंक); अथवा
(ग) संविदाकारी राष्ट्रों की सरकार द्वारा पूर्ण रूप से खरीदे एक सैवाधानिक निकाय अथवा कोर्इ संस्थान, जैसे संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों के बीच समय-सयम पर सहमत हो सकता है।
4. इस अनुच्छेद में यथा - प्रयुक्त ''ब्याज'' शब्द से अभिप्रेत है - प्रत्येक प्रकार के ऋण संबंधी दावों से प्राप्त आय, चाहे वह बंधक द्वारा प्रतिभूत हों अथवा नहीं और चाहे उन्हें ऋण-दाता के लाभ में भागीदारी का कोर्इ अधिकार प्राप्त हो अथवा नहीं हो और विशेष रूप से सरकारी प्रतिभूतियों से, प्राप्त आय और जमा, बंधपत्रों अथवा ऋण-पत्रों से प्राप्त आय जिसमें ऐसी प्रतिभूतियों, बंधपत्रों अथवा ऋण-पत्रों से संबंधित प्रीमियम और पुरस्कार के साथ-साथ आय शामिल हों। विलम्बित अदायगी के लिए अर्थदंड संबंधी प्रभारों को इस अनुच्छेद के प्रयोजन के लिए ब्याज नहीं समझा जाएगा।
5. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि ब्याज का हितभागी स्वामी, संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने से दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में, जिसमें ब्याज उद्भूत हुआ हो, उसमें स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो तथा जिस ऋण-दावे के बारे में ब्याज अदा किया गया हो वह इस प्रकार के स्थायी संस्थापन प्रभावी रूप से सम्बद्ध हो। ऐसे मामले में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।
6. ब्याज किसी संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत हुआ माना जाएगा, यदि अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो। तथापि, जहां ब्याज अदा करने वाले व्यक्ति, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं किसी संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थायी संस्थापन है और इस संबंध में ऋण जिस पर ब्याज प्रदत्त किया गया था, इस प्रकार का ब्याज इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन किया जाता है, तो इस प्रकार का ब्याज उस राष्ट्र में उद्भूत हुआ माना जाएगा जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।
7. जहां, अदा करने वाले और हितभागी स्वामी अथवा उन दोनों के बीच तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच विशेष संबंध होने के कारण अदा की गर्इ ब्याज की रकम, उस ऋणदावे को ध्यान में रखते हुए जिसके लिए यह रकम अदा की गर्इ है, उस रकम से बढ़ जाती है, जिसके संबंध में इस प्रकार के संबंध होने की स्थिति में अदा करने वाले और हितभागी स्वामी के बीच सहमति हो गर्इ होती, वहां इस अनुच्छेद के उपबंध अंतिम रूप से वर्णित रकम पर ही लागू होंगे। ऐसे मामले में अदायगियों के आधिक्य भाग पर इस करार के अन्य प्रावधान को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जाएगा।
अनुच्छेद-12
तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क एवं रायल्टियाँ
1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत होने वाले और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा की गर्इ रायल्टियों या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस पर उस दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।
2. हालांकि, इस प्रकार की रायल्टियाँ या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क पर उस संविदाकारी राष्ट्र में भी, जिसमें वे उद्भूत हुर्इ या, उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा, लेकिन यदि रायल्टियों अथवा तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क का लाभार्थी स्वामी दूसरे संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है तो इस प्रकार लगाया गया कर तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी अथवा शुल्क की सकल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
3. (क) इस अनुच्छेद में यथा-प्रयुक्त ''रायल्टियां'' शब्द का अभिप्राय किसी साहित्यिक, कलात्मक अथवा वैज्ञानिक कृति के किसी कापीराइट, जिसमें सिनेमेटोग्राफिक फिल्में अथवा टेलीविजन अथवा रेडियो प्रसारण के लिए प्रयुक्त फिल्में अथवा टेपें, किसी पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन अथवा मॉडल, प्लान, गुप्त फार्मूला अथवा प्रक्रिया या किसी औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक उपकरण के प्रयोग हेतु अथवा प्रयोगाधिकार हेतु अथवा औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक अनुभव से संबंधित सूचना सहित प्रतिफल के रूप में प्राप्त की गर्इ किसी भी प्रकार की अदायगियां हैं।
(ख) शब्द ''तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क'' जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है, का अर्थ तकनीकी अथवा अन्य कर्मियों की सेवाओं के प्रावधान सहित प्रबंधकीय अथवा तकनीकी अथवा परामर्श सेवाओं के लिए प्रतिफल के तौर पर इस समझौते के अनुच्छेद 14 तथा 15 में निर्दिष्ट उनको छोड़कर किसी प्रकार का भुगतान शामिल है।
4. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे यदि तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियों का हितभागी स्वामी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने के कारण दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में, जिसमें तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियाँ उद्भूत होती हैं, वहां पर स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता है तथा जिस अधिकार अथवा सम्पत्ति के संबंध में तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियाँ अदा की जाती हैं, वे ऐसे स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से सम्बद्ध हैं। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।
5. (क) एक संविदाकारी राष्ट्र में तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियाँ तब उद्भूत हुर्इ मानी जाएंगी, जब अदाकर्ता स्वयं वह राष्ट्र, एक राजनैतिक उप-प्रभाग, स्थानीय प्राधिकारी अथवा उस राष्ट्र का कोर्इ निवासी हो। तथापि, जहां तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियाँ अदा करने वाले व्यक्ति का, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं, उस संविदाकारी राष्ट्र में ऐसा कोर्इ स्थायी संस्थापन हो, जिनके संबंध में तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए फीस तथा रायल्टियाँ अदा करने की जिम्मेदारी निभार्इ गर्इ हो, और ऐसी तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियाँ उस राष्ट्र में उद्भूत हुर्इ मानी जाएगी जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।
(ख) जहां उप-पैराग्राफ (क) के अंतर्गत तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी अथवा शुल्क किसी भी संविदात्मक राष्ट्रों में उत्पन्न नहीं होता तथा किसी एक संविदात्मक राष्ट्र में निष्पादित सेवाओं से संबंधित तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क अथवा संपत्ति अथवा अधिकार, प्रयोग का अधिकार अथवा प्रयोग से संबंधित रॉयल्टी, तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी अथवा शुल्क उस संविदात्मक राष्ट्र में उत्पन्न होनी समझी जाएगी।
6. जहां, अदाकर्ता तथा हितभागी स्वामी के बीच अथवा उन दोनों और किसी अन्य व्यक्ति के बीच किसी विशेष प्रकार का संबंध होने के कारण तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियाँ प्रयोग, अधिकार अथवा सूचना के संबंध में जिसके लिए वह अदा की जाती है, किसी भी कारण से उस राशि से अधिक हो जाती है जिस पर ऐसे संबंधों की अनुपस्थिति में अदाकर्ता तथा हितभागी स्वामी द्वारा सहमति हो गर्इ होती, वहां इस अनुच्छेद के प्रावधान केवल अंतिम वर्णित रकम पर लागू होंगे। ऐसे मामले में, अदायगियों का आधिक्य भाग इस करार के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कराधेय होगा।
अनुच्छेद-13
पूंजीगत अभिलाभ
1. अनुच्छेद 6 में उल्लिखित और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल सम्पत्ति के अंतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त अभिलाभों पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।
2. स्थार्इ संस्थापन की व्यापारिक संपत्ति के भाग से बनी चल संपत्ति के हस्तांरण से प्राप्ति जिसमें संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में हैं अथवा निश्चित स्थान से संबंधित चल संपत्ति ऐसे निश्चित स्थान अथवा ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान (अकेला अथवा पूर्ण उद्यम सहित) के हस्तांतरण से ऐसी प्राप्ति सहित स्वतंत्र निजी सेवाओं के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्रों में संविदाकारी राष्ट्र के निवासी हेतु उपलब्ध है, उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता है
3. अन्तर्राष्ट्रीय यातायात में चलाए जाने वाले जलयानों अथवा वायुयानों के हस्तांतरण से अथवा इस प्रकार के जलयानों अथवा वायुयानों के प्रचालन से संबंधित, चल सम्पत्ति के अंतरण से संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम द्वारा प्राप्ति केवल उस राष्ट्र में करयोग्य होगी जिसमें उद्यम के प्रभावी प्रबंधन का स्थान स्थित है।
4. अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति से उसकी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष राशि के 50 प्रतिशत से अधिक व्युत्पन्न शेयरों के हस्तांतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त लाभ उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।
5. उस कंपनी जो संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हैं, में पैराग्राफ 4 में निर्दिष्ट को छोड़कर शेयरों के अंतरण से प्राप्ति उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।
6. पैराग्राफ 1,2,3,4 तथा 5 हेतु संदर्भ को छोड़कर किसी सम्पत्ति के अंतरण से प्राप्ति केवल उसी संविदाकारी राष्ट्र में करयोग्य होगी जिसका संक्रांता एक निवासी है।
अनुच्छेद-14
स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाएं
1. व्यक्ति जो व्यवसायिक सेवाओं अथवा इसी प्रकार की स्वतंत्र गतिविधियों के प्रदर्शन से संविदात्मक राज्य का निवासी है, द्वारा प्राप्त आय केवल उस राष्ट्र में करयोग्य होगी केवल निम्नलिखित अवस्थाओं को छोड़कर, जब ऐसी आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में भी करयोग्य हो सकती हो
(क) यदि वह अपनी गतिविधियों के निष्पा दन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके लिए उपलब्ध निश्चित स्थान रखता है तो इस स्थिति में आय का उतना जैसा उस निश्चित स्थान आरोप्य है अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता है; अथवा
(ख) यदि अन्य राष्ट्रों में उसका निवास संबंधित वित्तीय वर्ष को समाप्त होने वाले अथवा प्रांरभ होने वाली किसी बारह माह की अवधि में अवधि अथवा कुल 91 दिनों की अवधि अथवा इससे अधिक होती है तो इस स्थिति में केवल उतनी आय जितनी उस अन्य राष्ट्र में निष्पादित गतिविधियों से अर्जित होती है उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकती है
2. शब्द "व्यवसायिक सेवा" में विशेषकर स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षिक अथवा शिक्षण गतिविधियां साथ ही साथ चिकित्सक, वकील, अभियंता, वास्तुशास्त्री, शल्य-चिकित्सक, दंत चिकित्सक तथा लेखाकार शामिल हैं
अनुच्छेद-15
आश्रित व्यक्तिगत सेवाएं
1. अनुच्छेद 16, 18, 19 तथा 20 के प्रावधानों के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त वेतनों, मजदूरियों और इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगेगा, जब तक कि नियोजन का निष्पादन दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में नहीं किया गया हो। यदि ऐसा नियोजन किया गया है, तो जो पारिश्रमिक वहां से प्राप्त होता है, उस पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लग सकेगा।
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के बावजूद, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में किए गए किसी नियोजन के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक पर केवल प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा, यदि
(क) प्राप्तकर्ता, संबंधित वित्तीय वर्ष में समाप्त अथवा प्रारंभ हुए किसी बारह महीने की ऐसी अवधि अथवा अवधियों के लिए दूसरे राष्ट्र में रह रहा है जो कुल मिलाकर 183 दिनों से अधिक नहीं है
(ख) पारिश्रमिक ऐसे किसी नियोजक द्वारा अथवा उसकी ओर से अदा किया गया है, जो दूसरे राष्ट्र का निवासी नहीं है, और
(ग) पारिश्रमिक ऐसे किसी स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन नहीं किया जाता है, जो नियोजक का दूसरे राष्ट्र में हो।
3. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के बावजूद, एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित किसी पोत अथवा वायुयान पर किए गए नियोजन के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक पर, उसी राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा जिसमें उद्यम के प्रभावी प्रबंधन का स्थान स्थित है।
अनुच्छेद-16
निदेशकों का शुल्क
कंपनी, जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है, के निदेशक मंडल अथवा कंपनी के अंग के सदस्य के तौर पर उसकी क्षमता अनुसार संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा व्युत्पन्न निदेशक शुल्क तथा अन्य समकक्ष प्रकार के भुगतान उस अन्य राष्ट्र में भी करयोग्य हो सकते हैं।
अनुच्छेद-17
कलाकार और खिलाड़ी
1. अनुच्छेद 14 तथा 15 के प्रावधानों के बावजूद भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा मनोरंजनकर्ता, जैसे कि कोर्इ थियेटर, चलचित्र, रेडियो या दूरदर्शन कलाकार अथवा किसी संगीतकार अथवा किसी खिलाड़ी के रूप में दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में किए गए इस प्रकार के अपने व्यक्गित कार्य-कलापों से प्राप्त आय पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।
2. जहां किसी मनोरंजनकर्ता अथवा किसी खिलाड़ी द्वारा अपने इस प्रकार की हैसियत में किए गए व्यक्तिगत कार्य-कलापों के संबंध में प्राप्त आय स्वयं मनोरंजनकर्ता या खिलाड़ी को प्राप्त नहीं हो, अपितु किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त हो, ऐसी आय पर अनुच्छेद 7, 14 तथा 15 के प्रावधानों के बावजूद, उस संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा, जिसमें मनोरंजनकर्ता अथवा खिलाड़ी के कार्य-कलाप किए जाते हों।
3. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान किसी मनोरंजनकर्ता अथवा किसी खिलाड़ी द्वारा, किसी संविदाकारी राष्ट्र में निष्पादित कार्य-कलापों से अर्जित आय पर लागू नहीं होंगे यदि कार्य-कलाप एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों या उनके राजनीतिक उप-प्रभागों या स्थानीय प्राधिकारियों की सार्वजनिक निधियों द्वारा पर्याप्त रूप से समर्थित हों। ऐसे मामले में उस आय पर केवल उसी संविदाकारी राष्ट्र में कर लगेगा जिसका वह मनोरंजनकर्ता या खिलाड़ी निवासी है।
अनुच्छेद-18
पेंशन तथा वार्षिकी
1. अनुच्छेद 19 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को दी गर्इ वार्षिकी तथा उसके पिछले नियोजन के प्रतिफल के रूप में अदा की गर्इ पेंशन और इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगेगा।
2. शब्छ "वार्षिकी" का अर्थ राशि अथवा राशि के लायक पूर्ण तथा उपयुक्त प्रतिफल के लिए विवरणी में भुगतान को करने के लिए दायित्व के अंतर्गत समय की निर्दिष्ट अथवा सुनिश्चित अवधि के दौरान अथवा अवधि के समय निर्दिष्ट आवधिक रूप से देययोग्य निर्दिष्ट राशि हैं।
अनुच्छेद-19
सरकारी सेवा
1. (क) किसी संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके किसी राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किसी व्यक्ति को उस राष्ट्र अथवा उप-प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए की गर्इ सेवाओं के संबंध में अदा किए गए पेंशन से भिन्न इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में ही कर लगेगा ।
(ख) हालांकि, ऐसे पारिश्रमिक पर केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में तभी कर लग सकेगा, यदि सेवाएं उस राष्ट्र में की जातीं हैं, और व्यक्ति उस राष्ट्र का एक निवासी हो, जो
(i) उस राष्ट्र का एक निवासी है, अथवा
(ii) सेवाओं के प्रतिपादन के उद्देश्य मात्र के लिए उस राष्ट्र का निवासी नहीं बना हो।
2. (क) किसी संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके किसी राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अथवा उनके द्वारा सृजित निधियों में से किसी व्यक्ति को उस राष्ट्र अथवा उप-प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए प्रदान की गर्इ सेवाओं के संबंध में अदा की गर्इ किसी पेंशन पर केवल उस राष्ट्र में कर लगेगा।
(ख) हालांकि, ऐसी पेंशन पर केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में कर लगेगा, यदि व्यक्ति उस राष्ट्र का निवासी तथा नागरिक हो।
3. अनुच्छेद 15, 16, 17 और 18 के प्रावधान, किसी संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके किसी राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा चलाए गए किसी कारोबार के सिलसिले में प्रदान की गर्इ सेवाओं के संबंध में पारिश्रमिक तथा पेंशन पर लागू होंगे।
अनुच्छेद-20
प्राध्यापक, अध्यापक तथा शोधार्थी
1. कोर्इ प्राध्यापक, अध्यापक तथा शोधार्थी जो उस दूसरे संविदाकारी राष्ट्र की सरकार द्वारा प्राधिकृत उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय, सग्रंहालय अथवा अन्य समकक्ष संस्थान में अध्यापन में अथवा अनुसंधान में अथवा दोनों के उद्देश्य के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र का दौरा करने के तुरन्त पहले उस संविदात्मक राज्य में का एक का निवासी है अथवा था, वह उस राष्ट्र में अपने आने की तिथि से अधिक से अधिक दो वर्षों की अवधि के लिए ऐसे अध्यापन अथवा अनुसंधान के लिए किसी पारिश्रमिक पर उस अन्य राज्य में कर से छूट प्राप्त होगी।
2. यह अनुच्छेद अनुसंधान से आय के लिए लागू नहीं होगा यदि ऐसा अनुसंधान विशिष्ट व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के निजी लाभ के लिए प्रमुख रूप से हो रहा हो।
3. इस अनुच्छेद के उद्देश्य के लिए, एक व्यक्ति संविदात्मक राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा यदि वह आय के वित्त वर्ष में उस संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो जिसमें वह अन्य संविदात्मक राष्ट्र अथवा तुरंत उत्तरगामी आय के वित्त वर्ष में जाता है ।
4. पैराग्राफ 1 के उद्देश्य के लिए, "अनुमोदित संस्थान" का अर्थ एक संस्थान जिसे संबंधित संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में अनुमोदित किया गया है।
अनुच्छेद-21
विद्यार्थी तथा प्रशिक्षु
1. भुगतान जो एक संविदाकारी राष्ट्र में जाने से तुरंत पहले जो विद्यार्थी अथवा प्रशिक्षु अन्य संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी है अथवा था अथवा अपने अनुरक्षण, शिक्षा अथवा प्रशिक्षण के उद्देश्य के लिए अपनी शिक्षा अथवा प्रशिक्षण को प्राप्त करने के उद्देश्य के लिए ही प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में उपस्थित है, उस राष्ट्र में करारोपित नहीं होगा बशर्ते कि ऐसे भुगतान उस राष्ट्र के बाहर के स्रोतों से उत्पन्न हो
2. इस अनुच्छेद के लाभ ऐसी समयवधि के लिए ही विस्तारित किए जाऐंगे जो शिक्षा अथवा किए जा रहे प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त हो अथवा प्रथानुसार आपेक्षित हो, लेकिन किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति को इस अनुच्छेद के लाभ नहीं मिलेंगे
(i) विद्यार्थी की स्थिति में : संविदाकारी राष्ट्र में उसकी शिक्षा के उद्देश्य के लिए उसके प्रथम आगमन की तिथि से पांच निरंतर वर्षों से अधिक के लिए;
(ii) प्रशिक्षु की स्थिति में : संविदाकारी राष्ट्र में उसके प्रतिशक्षण के उद्देश्य के लिए उसके प्रथम आगमन की तिथि से दो निरंतर वर्षों से अधिक के लिए
अनुच्छेद-22
अन्य आय
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी की आय की ऐसी मदें, जहां-कहीं वे उद्भूत होती हों, जिन पर इस करार के पूर्वोक्त अनुच्छेदों में विचार नहीं किया गया है, केवल उस राष्ट्र में कराधेय होंगी।
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान, अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 2 में यथा-परिभाषित अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय से भिन्न आय पर लागू नहीं होंगे, यदि ऐसी आय का प्राप्तकर्ता एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने के नाते दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में वहां स्थित किसी स्थायी संस्थापन से प्रभावी रूप से सम्बद्ध है अथवा वहां स्थिति निश्चित स्थान से अन्य राष्ट्रों में स्वतंत्र निजि सेवाओं का निष्पादन रहता हो तथा जिसके संबंध में अधिकार तथा संपत्ति ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से संबंधित हो। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के उपबंध लागू होंगे।
3. पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, संविदाकारी राष्ट्र के निवासी की आय की मदें इस समझौते के पूर्वगामी अनुच्छेदों के साथ व्यवहार नहीं करते तथा अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न उस अन्य राष्ट्र में करारोपित भी नहीं हो सकते।
अध्याय IV
दोहरे कराधान के निष्काषन की विधि
अनुच्छेद-23
दोहरे कराधान के निष्काषन की विधि
1. जहां संविदाकारी राष्ट्र का कोर्इ निवासी ऐसी आय प्राप्त करता है, जिस पर इस करार के प्रावधानों के अनुसार अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है, तो प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र उस निवासी की आय पर उस अन्य राष्ट्र में अदा किए गए आय कर के बराबर के कर से वसूली करेगा। हालांकि, ऐसी कटौती कर के उस भाग से अधिक नहीं होगी जिसे आय अथवा पूंजी के लिए कटौती से पहले दिया गया है, जो रोप्य है, जैसी भी स्थिति हो, जो अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती हैं।
2. जहां समझौते के किसी प्रावधान के अनुसार संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त आय अथवा स्वीकृत पूंजी उस राष्ट्र में कर से मुक्त हैं। वह राष्ट्र फिर भी ऐसे निवासी की शेष आय अथवा पूंजी पर कर की राशि की गणना में मुक्त आय अथवा पूंजी को विचार में ले सकते हैं।
अध्याय V
विशेष प्रावधान
अनुच्छेद-24
लाभों की सीमा
1. इस समझौते के प्रावधान किसी भी स्थिति में इसके घरेलू कानून के प्रावधानों तथा कर परिहार अथवा अपवंचन, चाहे अथवा न चाहे ऐसे वर्णित हो, के विषय में परिमापों के प्रयोग से संविदाकारी राष्ट्र को बाधित नहीं करेगा
2. एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी इस समझौते के लाभ के लिए हकदार नहीं होगा यदि इसके मामले ऐसे तरीके में व्यवस्थित किए गए थे जैसे यह इस समझौते के लाभ को लेने के लिए मुख्य उद्देश्य अथवा मुख्य उद्देश्य में से एक था।
3. वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां न रखने वाली कानूनी उद्यमों की स्थिति में इस अनुच्छेद के प्रावधानों द्वारा अंतनिर्विष्ट किया जाएगा।
अनुच्छेद-25
गैर-पक्षपात
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासियों पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में ऐसा कोर्इ कराधान अथवा तत्संबंधी ऐसी कोर्इ अपेक्षा लागू नहीं की जाएगी जो उस कराधान से और तत्संबंधी अपेक्षाओं से भिन्न अथवा अधिक भारपूर्ण हो, जो उस दूसरे राष्ट्र के निवासियों पर विशेषत: निवास के संबंध में उन्हीं परिस्थितियों में लागू होती हो अथवा लागू की जा सकती हो। अनुच्छेद 1 के प्रावधानो के होते हुए भी यह उपबंध उन व्यक्तियों पर भी लागू होगा जो एक अथवा दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के निवासी नहीं हैं।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित स्थायी संस्थापन पर उस दूसरे राष्ट्र में ऐसा कोर्इ कराधान लागू नहीं किया जाएगा जो उस दूसरे राष्ट्र के उद्यमों पर समरूप कार्यकलापों को करने हेतु लागू होने वाले कराधान से अपेक्षाकृत कम अनुकूल हो। यह प्रावधान सिविल स्टेटस अथवा पारिवारिक उत्तरदायित्वों जो यह अपने निवासी को देता है, के कारण कराधान उद्देश्य के लिए किसी निजी भत्ते, राहत तथा कमी अन्य संविदात्मक राष्ट्र के निवासी को देने के लिए संविदात्मक राष्ट्र के दायित्व के तौर पर नहीं लगाया जाएगा।
3. संविदात्मक राष्ट्र के उद्यम, जिसकी पूंजी अन्य संविदात्मक राष्ट्र के एक अथवा एक से अधिक निवासी द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पूर्णता अथवा आंशिक रूप से खरीदी अथवा नियंत्रित होती है, किसी कराधान अथवा उसके साथ संबंधित किसी अनिवार्यता का विषय नहीं होगा जो कराधान से अन्य अथवा अधिक बोझ है तथा प्रथम-निर्दिष्ट राष्ट्र के अन्य समकक्ष उद्यम हेतु संबंधित अनिवार्यता विषय हैं अथवा हो सकता है।
4. ऐसे मामले को छोड़कर जहां अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 1, अनुच्छेद 11 के पैराग्राफ 7 या अनुच्छेद 12 के पैराग्राफ 6 के उपबंध लागू होते हैं, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किये गए ब्याज, रायल्टी तथा अन्य भुगतान, ऐसे उद्यम के कराधेय लाभों का निर्धारण करने के प्रयोजनार्थ उन्हीं शर्तों के अनुसार कटौती-योग्य होंगे मानो उनका भुगतान प्रथमोल्लिखित राष्ट्र के किसी निवासी को किया गया हो।
5. इस अनुच्छेद में शब्द "कराधान" का अर्थ कर हैं जो इस समझौते का विषय हैं ।
अनुच्छेद-26
पारस्परिक करार विधि
1. जहां कोर्इ व्यक्ति यह समझता है कि एक अथवा दोनों संविदाकारी राष्ट्रों की कार्रवाइयों के कारण उस पर इस प्रकार कर लगाया जाता है अथवा लगाया जाएगा जो इस करार के प्रावधान के अनुरूप नहीं है तो वह उन राष्ट्रों के स्वदेशी कानूनों द्वारा उपलब्ध कराए गए उपायों के होते हुए भी अपना मामला उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत कर सकता है, जिसका कि वह एक निवासी है अथवा यदि उसका मामला अनुच्छेद 25 के पैराग्राफ 1 के अंतर्गत आता है तो वह अपना मामला उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत कर सकता है जिसका कि वह निवासी है। इस मामले को उस कार्रवार्इ की प्रथम अधिसूचना से तीन वर्षों के भीतर अवश्य प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप ऐसा कराधान लगाया गया है जो इस करार के प्रावधान के अनुरूप नहीं है।
2. यदि सक्षम प्राधिकारी को आपत्ति उचित लगे और यदि वह स्वयं किसी संतोषजनक हल पर पहुंचने में असमर्थ हो, तो वह ऐसे कराधान के परिहार की दृष्टि से जो इस करार के अनुरूप नहीं है, दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के साथ पारस्परिक सहमति द्वारा उस मामले को हल करने का प्रयास करेगा। इस प्रकार किए गए किसी करार को संविदाकारी राष्ट्रों के स्वदेशी कानूनों में किसी समय सीमा के होते हुए भी क्रियान्वित किया जाएगा।
3. इस करार की व्याख्या करने अथवा इसे लागू करने में कोर्इ कठिनाइयां अथवा शंकाएं हों, तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी उन्हें पारस्परिक सहमति से हल करने का प्रयास करेंगे। वे उन मामलों में भी दोहरे कराधान को दूर करने के लिए परस्पर विचार-विमर्श कर सकते हैं जिनकी इस करार में व्यवस्था नहीं की गर्इ हो।
4. पिछले पैराग्राफों के अभिप्राय से कोर्इ करार करने के प्रयोजनार्थ संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी समझौता करने के लिए एक दूसरे के साथ सीधे संपर्क कर सकते हैं। सलाहाकर के माध्यम से सक्षम प्राधिकारी इस अनुच्छेद में मुहैया करार्इ गर्इ आपसी समझौता प्रक्रिया के कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त द्वि-पक्षीय प्रक्रिया, शर्त, विधियां तथा तकनीकों को विकसित करेंगे।
अनुच्छेद-27
सूचना का आदान-प्रदान
1. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना (दस्तावेजों अथवा दस्तावेजों की अधिप्रमाणित प्रतियों सहित) का आदान-प्रदान करेंगे जो कि इस करार के प्रावधान को लागू करने के लिए आनुमानिक रूप से संगत हो अथवा संविदाकारी राष्ट्रों या उनके राजनीतिक उप-प्रभागों या स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से लगाए गए सभी प्रकार एवं विवरण के उन करों से संबंधित आंतरिक कानूनों के प्रशासन अथवा प्रवर्तन के लिए आवश्यक हों, जहां तक कि उनके अधीन कराधान व्यवस्था इस करार के प्रतिकूल नहीं है। सूचना का आदान-प्रदान अनुच्छेद 1 तथा 2 द्वारा प्रतिबंधित नहीं है।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त की गर्इ कोर्इ सूचना उस राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त सूचना के समान ही गुप्त समझी जाएगी और उसे केवल उन व्यक्तियों अथवा प्राधिकारियों (न्यायालय और प्रशासनिक निकाय सहित) को प्रकट किया जाएगा जो पैराग्राफ-1 में संदर्भित करों के संबंध में अपील के निर्धारण के संबंध में करों के मूल्यांकन अथवा एकत्रीकरण अथवा प्रवर्तन से संबंधित अथवा उक्त के पर्यवेक्षण हैं। ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी सूचना का उपयोग केवल ऐसे ही प्रयोजन के लिए करेंगे। वे इस सूचना को सार्वजनिक न्यायालय की कार्यवाहियों अथवा न्यायिक निर्णयों में इसे प्रकट कर सकेंगे।
3. किसी भी स्थिति में पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधान का अर्थ किसी संविदाकारी राष्ट्र पर निम्नलिखित दायित्व डालना नहीं होगा :
(क) उस अथवा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों और प्रशासनिक प्रथा से हट कर प्रशासनिक उपाय करना
(ख) ऐसी सूचना (दस्तावेज अथवा दस्तावेजों की अधिप्रमाणित प्रतियों सहित) की आपूर्ति करना जो उस अथवा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत अथवा प्रशासन की सामान्य स्थिति में प्राप्य नहीं है
(ग) ऐसी सूचना की आपूर्ति करना जिससे कोर्इ व्यापार, कारोबार, औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा व्यावसायिक, गुप्त अथवा व्यापार प्रक्रिया अथवा सूचना प्रकट होती हो, जिसको प्रकट करना सार्वजनिक नीति (लोक आदेश) के प्रतिकूल हो।
4. इस अनुच्छेद के अनुसरण में यदि किसी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा किसी जानकारी को प्राप्त करने के लिए अनुरोध किया जाता है तो दूसरा संविदाकारी राष्ट्र अनुरोध की गर्इ जानकारी को प्राप्त करने के लिए अपनी सूचना एकत्र करने वाले उपायों का उपयोग करेगा, चाहे उस दूसरे राष्ट्र को अपने स्वयं के कर प्रयोजनों के लिए ऐसी सूचना की कोर्इ आवश्यकता न हो। पिछले वाक्य में अन्तर्निहित दायित्व पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अधीन है किन्तु किसी भी स्थिति में ऐसी सीमाओं का यह अर्थ नहीं होगा कि संविदाकारी राष्ट्र केवल इसलिए सूचना आपूर्ति करने से मना करते हैं कि ऐसी सूचना में उसका कोर्इ आंतरिक हित नहीं है।
5. किसी भी स्थिति में पैराग्राफ 3 के प्रावधान का अर्थ केवल इसलिए सूचना की आपूर्ति करने से मना करने के लिए किसी संविदाकारी राष्ट्र को अनुमति देने के लिए नहीं लगाया जाएगा कि सूचना किसी बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, किसी एजेंसी या किसी न्यासी क्षमता में कार्यरत नामिती या व्यक्ति के पास है या यह किसी व्यक्ति के स्वामित्व हित से संबंधित है।
अनुच्छेद-28
वसूली में सहायता
1. संविदाकारी राष्ट्र राजस्व दावों की वसूली में एक दूसरे की सहायता करेंगे। यह सहायता अनुच्छेद 1 और 2 द्वारा प्रतिबंधित नहीं है। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी इस अनुच्छेद के अनुप्रयोग की विधि परस्पर सहमति द्वारा तय कर सकते हैं।
2. इस अनुच्छेद में यथा प्रयुक्त शब्द ''राजस्व दावा'' का तात्पर्य संविदाकारी राष्ट्रों, अथवा उनके राजनीतिक उप-प्रभागों अथवा स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से लगाए गए सभी किस्म के करों और विवरण से है, जहां तक उनके अंतर्गत कराधान इस करार अथवा कोर्इ अन्य साधन जिसके लिए संविदाकारी राष्ट्र पक्ष हैं के साथ-साथ ऐसी राशि से संबंधित ब्याज, प्रशासनिक अर्थ-दंड और वसूली अथवा संरक्षण के संबंध में देय राशि है।
3. जब किसी संविदाकारी राष्ट्र का राजस्व दावा उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत प्रवर्तनीय होता है और यह किसी व्यक्ति द्वारा देय होता है और उस समय उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत इसकी वसूली को रोक नहीं सकता तब उस राजस्व दावे को उस राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के अनुरोध पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा वसूली के प्रयोजनार्थ स्वीकार किया जाएगा। उस राजस्व दावे को उस राष्ट्र द्वारा अपने स्वयं के करों के प्रवर्तन और वसूली, मानो कि राजस्व दावा उस दूसरे राष्ट्र का राजस्व दावा था, के लिए प्रयोज्य इसके कानूनों के प्रावधान के अनुसार उस दूसरे संविदाकारी राष्ट्र द्वारा वसूल किया जाएगा।
4. जब किसी संविदाकारी राष्ट्र का राजस्व दावा वह दावा है जिसके संबंध में वह राष्ट्र, अपने कानून के अंतर्गत, इसकी वसूली को सुनिश्चित करने के लिए संरक्षण के उपाय करता है तब उस राजस्व दावे को उस राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के अनुरोध पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा संरक्षण के उपाय करने के प्रयोजनार्थ स्वीकार कर लिया जाएगा। वह दूसरा राष्ट्र उस राजस्व दावे के संबंध में अपने कानूनों, मानो कि राजस्व दावे उस दूसरे राष्ट्र के राजस्व दावे हों, के प्रावधान के अनुसार संरक्षण के उपाय करेगा यहां तक कि जब ऐसे उपायों का प्रयोग किया जाता है, राजस्व दावा प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में प्रवर्तनीय नहीं है अथवा उस व्यक्ति द्वारा देय है जिसे उसकी वसूली रोकने का अधिकार है।
5. पैराग्राफ 3 और 4 के प्रावधान के होते हुए भी इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 अथवा 4 के प्रयोजनार्थ किसी संविदाकारी दल द्वारा स्वीकार किया गया दावा उस दल में किसी समय सीमा के अध्यधीन नहीं होगा अथवा उसी रूप में उसे इसके स्वरूप के कारण उस दल के कानूनों के अंतर्गत किसी कर दावे को प्रयोज्य कोर्इ प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 अथवा 4 के प्रयोजनार्थ किसी संविदाकारी दल द्वारा स्वीकार किए गए कर दावे को उस दल में दूसरे संविदाकारी दल के कानूनों के अंतर्गत उस कर दावे को प्रयोज्य कोर्इ प्राथमिकता नहीं होगी।
6. किसी संविदाकारी राष्ट्र के राजस्व दावे के अस्तित्व, वैधता अथवा राशि के संबंध में कार्यवाही को केवल उस राष्ट्र के न्यायालयों अथवा प्रशासनिक निकायों के समक्ष लाया जाएगा। इस अनुच्छेद में ऐसा कुछ नहीं है जिसका अर्थ दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी न्यायालय अथवा प्रशासनिक निकाय के समक्ष ऐसी कार्यवाही के लिए किसी अधिकार का सृजन करना अथवा प्रदान करना लगाया जाएगा।
7. जहां किसी समय पैराग्राफ 3 अथवा 4 के तहत किसी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा अनुरोध किए जाने के पश्चात् और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में संबंधित राजस्व दावे को दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में वसूल करने और प्रथमोल्लिखित राष्ट्र को प्रेषित करने से पहले संबंधित राजस्व दावा वहां निम्नलिखित के संबंध में समाप्त हो जाएगा :
क) पैराग्राफ 3 के अंतर्गत अनुरोध के मामले में, प्रथमोल्लिखित राष्ट्र का कोर्इ राजस्व दावा जो उस राष्ट्र के कानूनों के तहत प्रवर्तनीय है और ऐसे व्यक्ति द्वारा देय है जो उस समय उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत इसकी वसूली रोक नहीं सकता; अथवा
ख) पैराग्राफ 4 के अंतर्गत अनुरोध के मामले में, प्रथमोल्लिखित राष्ट्र के राजस्व दावे जिसके संबंध में वह राष्ट्र अपने कानूनों के तहत इसकी वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संरक्षण के उपाय करता है, प्रथमोल्लिखित राष्ट्र का सक्षम प्राधिकारी इस तथ्य को दूसरे राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को तत्काल अधिसूचित करेगा और दूसरे राष्ट्र के विकल्प पर प्रथमोल्लिखित राष्ट्र अपने अनुरोध को या तो आस्थगित करेगा या फिर हटा लेगा।
8. इस अनुच्छेद के किसी भी उपबंध का अर्थ दोनों में से किसी भी संविदाकारी राष्ट्र पर निम्नलिखित के लिए बाध्यता लागू करना नहीं लगाया जाएगा :
क) उस संविदाकारी राष्ट्र अथवा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों और प्रशासनिक प्रथा के असंगत प्रशासनिक उपाय करना;
ख) ऐसे उपाय करना जो लोक नीति (आर्डर पब्लिक) के विपरीत हों;
ग) सहायता प्रदान करना यदि दूसरे संविदाकारी राष्ट्र ने इसके कानूनों अथवा प्रशासनिक प्रथा के अंतर्गत उपलब्ध वसूली अथवा संरक्षण, जैसा भी मामला हो, के सभी समुचित उपायों को न किया हो;
घ) उन मामलों में सहायता प्रदान करना जहां उस राष्ट्र के लिए प्रशासनिक बोझ दूसरे संविदाकारी राष्ट्र द्वारा उद्भूत किए जाने वाले लाभ से राष्ट्र रूप से अनुपातहीन हो।
अनुच्छेद-29
राजनयिक मिशन के सदस्य एवं दूतावास संबंधी पद
इस करार की किसी बात से अंतर्राष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के अंतर्गत अथवा विशेष करारों के उपबंधों के अंतर्गत राजनयिक मिशन के सदस्यों अथवा कौंसुल अधिकारियों के वित्तीय विशेषाधिकारों पर कोर्इ प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अध्याय VI
अंतिम प्रावधान
अनुच्छेद - 30
प्रभावी प्रविष्टि
1. संविदाकारी राष्ट्र में से प्रत्येक इस करार को लागू करने के लिए अपने-अपने कानूनों द्वारा अपेक्षित प्रक्रियाओं को पूरा करने के संबंध में राजनयिक माध्यमों के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र को अधिसूचित करेंगे।
2. यह करार इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 में संदर्भित अधिसूचनाओं की परवर्ती तारीख को प्रवृत्त होगा।
3. इस करार के उपबंधों का निम्न प्रभाव होगा:
(क) भारत में : भारत में, जिस कैलेण्डर वर्ष में करार अस्तित्व में आया, उसके अगले अनुवर्ती अप्रैल माह की पहली तारीख को अथवा उसके बाद प्रारंभ किसी वित्त वर्ष में व्युत्पन्न आय के संबंध में
(ख) इंडोनेशिया में :
(i) स्रोत पर रोके गए करों के संबंध में - वर्ष जिसमें करार अस्तित्व में आया, उसके अनुवर्ती जनवरी माह की पहली तारीख को अथवा उसके बाद दी गर्इ अथवा ऋणित आय के लिए
(ii) आय पर अन्य करों के संबंध में - वर्ष जिसमें समझौता अस्तित्व में आया, उसके अगले अनुवर्ती जनवरी माह की पहली तारीख को अथवा उसके बाद प्रारंभ किसी कर वर्ष हेतु
4. आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार तथा वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणतंत्र सरकार तथा इंडोनेशिया गणतंत्र सरकार के बीच समझौता 7 अगस्त, 1987 को जकार्ता में हस्ताक्षरित हुआ था जिसका समाप्ति प्रभाव होगा जब इस समझौते के प्रावधान इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 के अनुसार प्रभावी होंगे।
अनुच्छेद-31
समापन
यह करार अनिश्चित समय तक लागू रहेगा जब तक कि किसी भी एक संविदाकारी राष्ट्रों द्वारा इसे समाप्त नहीं कर दिया जाता। दोनों में से कोर्इ भी संविदाकारी राष्ट्र इस करार के लागू होने की तारीख से लेकर पांच वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद शुरू होने वाले किसी कैलेण्डर वर्ष की समाप्ति से कम से कम छह महीने पहले राजनयिक माध्यम से समापन का नोटिस देकर करार को समाप्त कर सकता है। ऐसी स्थिति में यह करार निम्न के संबंध में निष्प्रभावी हो जाएगा :
क) भारत में, जिस कैलेण्डर वर्ष में नोटिस दिया गया, उसके तत्काल अनुवर्ती कैलेण्डर वर्ष के अप्रैल माह की पहली तारीख को अथवा उसके बाद प्राप्त व्युत्पन्न आय के संबंध में
ख) इंडोनेशिया में :
(i) स्रोत पर रोके गए करों के संबंध में - वर्ष जिसमें नोटिस की ऐसी समाप्ति दी गर्इ, उसके अनुवर्ती कैलेण्डर वर्ष के जनवरी माह की पहली तारीख को अथवा उसके बाद जमा अथवा ऋणित राशि के लिए
(ii) आय पर अन्य करों के संबंध में - वर्ष जिसमें नोटिस की समाप्ति दी गर्इ, उसके अगले अनुवर्ती कैलेण्डर वर्ष के जनवरी माह की पहली तारीख को अथवा उसके बाद प्रारंभ किसी कर के लिए
जिसके साक्ष्य में, इसके लिए विधिवत रूप से प्राधिकृत अधोहस्ताक्षरियों ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
27 जुलार्इ, 2012 को नर्इ दिल्ली में हिन्दी, भाषा इंडोनेशिया और अंग्रजी भाषाओं में समान रूप से वास्तविक है, सभी पाठ समान रूप से प्रामाणिक हैं। अर्थ निरूपण में भिन्नता की स्थिति में अंग्रेजी पाठ प्रभावी माना जाएगा।
| भारतीय गणतंत्र सरकार के लिए | इंडोनेशिया गणतंत्र सरकार के लिए |
| (एस.एम. कृष्णा) | (डा. आर.एम. मार्टी एम. नातालेगवा) |
| विदेशी मामला मंत्री | विदेशी मामला मंत्री |
प्रोटोकॉल
आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार तथा वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणतंत्र सरकार तथा इंडोनेशिया गणतंत्र सरकार के बीच समाप्त किए गए समझौते के हस्ताक्षर करने के इस अवसर पर अधोहस्ताक्षरी निम्नलिखित प्रावधानों पर सहमत हुआ है जो समझौते का एक आंतरिक भाग होगा।
1. अनुच्छेद 7 (व्यापारिक लाभ) के अनुच्छेद 1 के संदर्भ में, यह समझा जा सकता है कि उस स्थार्इ संस्थापन के माध्यम से वही अथवा उसी प्रकार की अन्य व्यपारिक गतिविधियां जो प्रभावित होती है, से अथवा उसी अथवा समकक्ष प्रकार के उत्पादों अथवा व्यापार जो बिकता है, की बिक्री से उत्पन्न आय को उस स्थार्इ संस्थापन हेतु रोप्य समझा जा सकता है यदि साबित होता है कि :
(i) यह लेनदेन संविदाकारी राष्ट्र जहां स्थार्इ संस्थान स्थित हैं, में कराधान का परिहार करने के लिए प्रयोग किया गया है, तथा
(ii) किसी भी रूप में स्थार्इ संस्थापन इस लेनदेन में शामिल था।
2. यह समझा जाता है कि अनुच्छेद 11 (ब्याज) तथा 12 (तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टी तथा शुल्क) के पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे तथा अनुच्छेद 7 (व्यापारिक लाभ) के प्रावधान लागू होंगे यदि आय इस प्रोटोकॉल के पैराग्राफ 1 में संदर्भित व्यापारिक गतिविधियों से प्रभावी रूप से संबंधित हैं।
3. इस समझौते में कुछ भी शामिल होते हुए भी, यह समझा जाता है कि कुछ भी कर की उस दर पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम के स्थार्इ संस्थापन के लाभ को वसूलने से एक संविदाकारी राष्ट्र को नहीं रोकेगा जो प्रथम-निर्दिष्ट राष्ट्र की समकक्ष कंपनी के लाभों पर अधिरोपित से अधिक है तथा यह ना तो अनुच्छेद 25 (गैर-भेदभाव) के संबंध में भेदभावपूर्ण के तौर पर लगाया जाएगा ना ही अनुच्छेद 7 (व्यापारिक लाभ) के पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के साथ संघर्ष के तौर पर
4. अनुच्छेद 7 के उद्देश्य के लिए जहां एक कंपनी जो संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है, के पास अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थार्इ संस्थापन है, स्थार्इ संस्थापन हेतु रोप्य लाभ इसके करों के अनुसार अन्य राष्ट्र में अतिरिक्त कर अथवा शाखा लाभ कर का विषय हो सकता है, लेकिन ऐसा वसूला कर 15 प्रतिशत (पंद्रह प्रतिशत) से अधिक नहीं होगा।
5. यह समझा जाता है कि किसी प्राधिकृत व्यक्ति अथवा सरकार द्वारा किए गए संविदाकारी राष्ट्र में तेल तथा प्राकृतिक गैस के निष्कर्षण तथा उत्पादन से संबंधित इस समझौते के प्रावधानों तथा उत्पादन सांझा करने के अनुबंधों के बीच प्रयोग में विवाद की स्थिति में परवर्ती प्रचलित होगा।
6. अनुच्छेद 27 के पैराग्राफ 2 के संबंध में (सूचना का आदान-प्रदान), यह समझा जाता है कि संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्राप्त सूचना को अन्य सरकारी प्रवर्तन प्रक्रियाओं के लिए प्रयोग किया जा सकता है जब ऐसी सूचना को ऐसे प्रयोग को प्राधिकृत करने वाले आपूर्तिकर्ता राष्ट्र की सक्षम प्राधिकारी तथा दोनों राष्ट्रों कानून के अंतर्गत ऐसी अन्य सरकारी प्रवर्तन के लिए प्रयोग किया जा सकता हो।
जिसके साक्ष्य में, इसके लिए विधिवत रूप से प्राधिकृत अधोहस्ताक्षरियों ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
27 जुलार्इ, 2012 को नर्इ दिल्ली में हिन्दी, भाषा इंडोनेशियन और अंग्रजी भाषाओं में समान रूप से वास्तविक हैं, सभी पाठ समान रूप से प्रामाणिक हैं। अर्थ निरूपण में भिन्नता की स्थिति में अंग्रेजी पाठ प्रभावी माना जाएगा।

