आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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रिलीज़ दिनांक

08/12/2016

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भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 8 दिसंबर, 2016

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

विषय : आयकर अधिकारियों द्वारा मुंबर्इ, नागपुर और अहमदाबाद में नगद के परिवहन और काले धन को वैध करने की नर्इ विधि की खोज

 

आयकर जांचकर्ताओं ने मुंबर्इ में कमीशन के लिए बंद किए गए नोट को वैध मुद्रा में परिवर्तित करने में सक्रिय जमीनी स्तर के ऑपरेटरों के गिरोह का पर्दाफाश किया। अपराधियों की धरपकड़ के लिए ऑपरेशन के भाग के तौर पर, आयकर निदेशालय ने बंद मुद्रा को नए नोट में परिवर्तित करने के लिए कुछ नकली ग्राहकों को भेजा। अपने मध्यस्त के माध्यम से कार्य करने वाला यह गिरोह 35 प्रतिशत कमीशन के लिए विनिमय के लिए सहमत हो गया। रूपांतरण मध्यस्त के घर पर किया गया था। मध्यस्त को रंगे हाथों पकड़ा गया और रू. 29.5 लाख की नर्इ मुद्रा को जब्त किया गया।

अब यह सामने आया है कि गिरोह ने कर्इ जमीनी स्तर के ऑपरेटरों (जीएलओ) को शामिल किया विशेषकर स्थानीय युवाओं को जिनका नेतृत्व राशि इकट्ठा करने वाले प्रमुख व्यक्तियों और मध्यस्तों द्वारा किया गया। मध्यस्त ग्राहकों का पता लगाता था। जीएलओ अपने नाम से अथवा अपने दोस्तों के नाम से तथा अपने परिवार के नाम से निर्धारित साप्ताहिक सीमा के अंदर नर्इ मुद्रा निकालता था, उनको कमीशन के लिए जमाकर्ताओं के पास भेजता था और छोटी राशि में अपने खाते अथवा परिवार व दोस्तों के खातों पुराने नोट जमा करा देता था।

अन्य जांच में नागपुर में भी एक बैंक खाते में नगद जमा में यह बात सामने आर्इ कि खाताधारक को अपने खाते की मौजूदगी के बारे में जानकारी नहीं थी जहां 8 नवंबर, 2016 के बाद रू. 3.29 करोड़ जमा किए गए थे। विभाग द्वारा जांच में उनके नाम अथवा माता-पिता के नाम से 6 अन्य खातों के बारे में भी जानकारी मिली। 7 खातों को रू. 4.25 करोड़ के नगद को वैध बनाने के लिए अज्ञात व्यक्तियों द्वारा खोला और संचालित किया गया। एकत्र हुए प्रमाण से पता चला कि पैन की प्रतियां और अन्य निजी दस्तावेज जो उसने कुछ साल पहले दिए थे, उनको कोलकाता में इन खातों को धोखे से खोलने के लिए प्रयोग किया गया था जिसे 8 लाभार्थियों के संदेहास्पद कोष को ठिकाने लगाने के लिए संचालित किया गया था, जिसकी जांच अभी चल रही है।

अहमदाबाद के दिलचस्प मामले में 3 दिसंबर, 2016 को देर रात परिवाहकों के परिसर में सर्वेक्षण करने के लिए आयकर अन्वेषण की टीम अलग अलग सूचना के आधार पर गर्इ। परिवाहक के गोदाम में 24 डिब्बे मिले जिनको दिल्ली पहुंचाना था। लॉरी की रसीद में लिखा गया कि इन डिब्बों में पटाखे हैं। जब डिब्बों को खोला गया और जांच की गर्इ तो रू. 100 की मुद्रा में छिपी हुर्इ मुद्रा मिला जिनकी कुल कीमत 27 लाख रूपए थी। पूछताछ करने पर कंसार्इनर ने दावा किया कि नगद को पटाखें को बेचने से संबंधित है जिसे खरीद के लिए दिल्ली भेजा जा रहा है। नगद को 5 दिसंबर, 2016 को जब्त किया गया।

 

(मीनाक्षी जे. गोस्वामी)

आयकर आयुक्त

(मीडिया और तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड