हॉगकॉग : व्यापक करार
हस्ताक्षर तिथि
2018
लागू होना
30/11/2018
प्रस्तावना
चूंकि, आय पर करों के संबंध में वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए तथा दोहरे कराधान के परिहार के लिए भारतीय गणराज्य सरकार तथा चीनी जनवादी गणराज्य के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हांगकांग के बीच एक समझौता 19 मार्र्च, 2018 को किया गया था जैसा इस अधिसूचना के परिशिष्ट में वर्णित है (तत्पश्चात् समझौते के तौर पर संदर्भित)
तथा चूंकि समझौते के अनुच्छेद 29 के पैराग्राफ 2 के अनुसार कथित समझौते को प्रभावी करने के लिए संबंधित कानूनों द्वारा आपेक्षित प्रक्रिया की समाप्ति की अधिसूचना के पश्चात् की तिथि के तौर पर चूंकि, कथित समझौता 30 नवंबर, 2018 को प्रभावी हुआ था
तथा चूंकि, कथित समझौते के अनुच्छेद 29 के पैराग्राफ 3 के उप-पैराग्राफ (ख) प्रदान कराता हैं कि समझौते के प्रावधान तिथि जिस पर समझौता प्रभावी हुआ, के बाद के अप्रैल के पहले दिन को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्तीय वर्ष में प्राप्त आय के संबंध में भारत में प्रभावी होगा
अब, इसलिए, आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 90 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा निर्देश देती हैं कि कथित समझौते के सभी प्रावधान साथ ही परिशिष्ट में वर्णितानुसार, भारतीय संघ में प्रभावी होंगे।
परिशिष्ट
आय पर करों के संबंध में वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए
तथा
दोहरे कराधान से बचने के लिए
भारतीय गणराज्य की सरकार
तथा
चीनी जनवादी गणराज्य
के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हांगकांग
के बीच
समझौता
भारतीय गणराज्य सरकार तथा चीनी जनवादी गणराज्य के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हांगकांग सरकार, आय पर करों के संबंध में वित्तीय अपवंचन की रोकथाम तथा दोहरे कराधान के परिहार के लिए समझौता करने की इच्छुक है जो इस प्रकार सहमत हुए हैं :
अनुच्छेद 1
अंतर्निहित व्यक्ति
यह समझौता उन व्यक्तियों के लिए लागू होगा जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है|
अनुच्छेद 2
अंतर्निहित कर
1. यह समझौता संविदाकारी पक्षो अथवा इसके राजनीतिक उप-प्रभागो अथवा स्थानीय प्राधिकारी की ओर से लागू आय पर कर हेतु लागू होगा, लेकिन उस प्रणाली को छोड़कर जिसमें यह लागू होते हैं
2. उघम द्वारा दिए गए वेतन अथवा पारिश्रमिक की कुल राशि पर करों के साथ ही साथ चल अथवा अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति पर कर सहित आय के अवयवों पर अथवा कुल आय पर लागू सभी कर आय पर करों के रूप में माना जाएगा
3. मौजूदा कर जिस पर समझौता लागू होता है :
(क) हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में, (i) लाभ कर
(ii) वेतन कर; और
(iii) संपत्ति कर;
निजी मूल्यांकन के अंतर्गत वसूला गया हो या नहीं
4. समझौता किसी एकसमान या वास्तविक समान करों जो मौजूदा करों के स्थान पर या उसके अतिरिक्त समझौते के हस्ताक्षर की तिथि के बाद अधिरोपित होता है, के लिए साथ ही साथ पैराग्राफ 1 और 2 के अंदर आने वाले अन्य करों जो एक संविदाकारी पक्ष भविष्य में लागू कर सकता है, के लिए भी लागू होगा। संविदाकारी पक्षों के सक्षम प्राधिकारी एक दूसरे को किसी महत्वपूर्ण परिवर्तनों को अधिसूचित करेंगे जिसे उनके संबंधित कराधान कानूनों में बनाया गया है।
5. मौजूदा कर, समझौते के हस्ताक्षर के बाद अधिरोपित करों के साथ, इसके बाद "हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र" या "भारतीय कर" के तौर पर संदर्भित हैं जैसा संदर्भ आपेक्षित हो। हालांकि, शब्द "हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र""भारतीय कर" करों, जिसके लिए समझौता लागू होता है, से संबंधित किसी भी संविदाकारी पक्ष के कानूनों के अंतर्गत किसी जुर्माने या ब्याज या अधिरोपित जुर्माने में शामिल नहीं होगा|
अनुच्छेद 3
सामान्य परिभाषाएं
1. इस समझौते के उद्देश्य के लिए जबतक प्रसंग अन्यथा आपेक्षित हो
(क) (i) शब्द "हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र" का अर्थ कोर्इ भी स्थान जहां चीनी जनवादी गणराज्य के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के कर कानून लागू होते हैं
(ii) "भारत" शब्द का अर्थ भारतीय क्षेत्र हैं जिसमें उसका क्षेत्रीय समुद्र तथा हवार्इ क्षेत्र शामिल हैं साथ ही साथ समुद्री कानून पर राष्ट्र संघ सम्मेलन सहित भारतीय कानून के अनुसार तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, अन्य कोर्इ समुद्री क्षेत्र शामिल हैं जिसमें भारत का स्वायत्त अधिकार, अन्य अधिकार तथा क्षेत्राधिकार शामिल हैं;
(ख) शब्द "कंपनी" का अर्थ कोर्इ निकाय निगमित अथवा कोर्इ उद्यम जिसे कर उद्देश्यों के लिए निकाय निगमति के तौर पर समझा जाता है;
(ग) शब्द "संविदाकारी प्राधिकारी" का अर्थ
(i) हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र की स्थिति में : अंतर्देशीय राजस्व आयुक्त या उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि
(ii) भारत की स्थिति में : वित्त मंत्री, भारत सरकार या उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि;
(घ) शब्द "संविदाकारी पक्ष " या "अन्य संविदाकारी राष्ट्र" का अर्थ है हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र या भारत, जो संदर्भ आपेक्षित हो;
(ड़) हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के संबंध में शब्द "घरेलू कानून" का अर्थ हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र का आंतरिक कानून
(च) शब्द "संविदात्मक पक्ष के उद्यम" और "अन्य संविदात्मक पक्ष के उद्यम" का अर्थ क्रमश: संविदात्मक पक्ष के निवासी द्वारा संचालित उद्यम तथा अन्य संविदात्मक पक्ष के निवासी द्वारा निष्पादित एक उद्यम हैं।
(छ) शब्द "अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक " का अर्थ संविदात्मक पक्ष के उद्यम द्वारा संचालित जहाज अथवा एयरक्राफ्ट द्वारा कोर्इ परिवहन हैं केवल तब छोड़कर जब एयरक्राफ्ट तथा जहाज अन्य संविदात्मक राज्य में स्थानों के बीच एकमात्र रूप से संचालित होता है;
(ज) शब्द "राष्ट्रीय", भारत के संबंध में
(i) भारत की नागरिकता रखने वाला कोर्इ व्यक्ति;
(ii) भारत में प्रभावी कानूनों से अपनी स्थिति को प्राप्त करने वाला कोर्इ कानूनी व्यक्ति, सांझेदारी अथवा संघ
(झ) शब्द "व्यक्ति" में एक व्यक्ति, एक कंपनी, एक न्यास, एक सांझेदारी और अन्य कोर्इ व्यक्तियों की निकाय जिसे संबंधित संविदात्मक पक्षों में प्रभावी कराधान कानूनों के अंतर्गत कर मुक्त इकार्इ के तौर पर समझा जाता हैं, शामिल है
(ञ) शब्द "कर" का अर्थ है हांग कांग प्रशासनिक क्षेत्र कर या भारतीय कर, जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक हो
(ट) (i) हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में, शब्द "वित्तीय वर्ष" का अर्थ है किसी वर्ष में 1 अप्रैल को प्रारंभ होने वाली 12 महीनों की अवधि
(ii) भारत के मामले में, शब्द "वित्त वर्ष" का अर्थ एक कैलेंडर वर्ष में 1 अप्रैल को प्रारंभ होने वाला वित्त वर्ष और अगले कैलेंडर वर्ष में 31 मार्च को समाप्त होने वाला वित्त वर्ष|
2. संविदात्मक पक्ष द्वारा किसी समय समझौते के आवेदन के संबंध में, उसमें निर्दिष्ट न होने वाली कोर्इ शर्त, जबतक संदर्भ अन्यथा आपेक्षित न हो, का अर्थ होगा कि करों के उद्देश्य के लिए उस राष्ट्र के कानून के अंतर्गत उस समय जब समझौता लागू होता हैं, उस पक्ष के प्रयोज्य कर कानूनों के अंतर्गत कोर्इ अर्थ उस राष्ट्र के अन्य कानूनों के अंतर्गत अवधि हेतु दिए गए अर्थ पर प्रचलित है।
अनुच्छेद 4
निवासी
1. इस समझौते के लिए, शब्द "संविदाकारी पक्ष का निवासी" का अर्थ है
(a) हॉंग कॉंग विशेष प्रशाशनिक क्षेत्र के मामले में ,
(i) कोर्इ व्यक्ति जो हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में सामान्य रूप से रहता है
(ii) कोर्इ व्यक्ति जो निर्धारण वर्ष के दौरान 180 दिनों से अधिक के लिए या दो निरंतर निर्धारण वर्ष में 300 से अधिक दिनों के लिए, जिसमें से एक वर्ष प्रासंगिक निर्धारण वर्ष हो, हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में रहता है;
(iii) हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में निगमित एक कंपनी या यदि हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र से बाहर निगमित हो तो हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में सामान्य तौर पर प्रबंधित या नियंत्रित हो
(iv) हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के कानूनों के अंतर्गत संस्थापित कोर्इ अन्य व्यक्ति या यदि यदि हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र से बाहर निगमित हो तो हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में सामान्य तौर पर प्रबंधित या नियंत्रित हो
(ख) भारत की स्थिति में, कोर्इ व्यक्ति जो भारत के कानूनों के अंतर्गत अपने घर, निवास, प्रबंधन के स्थान या एक ही प्रकार अन्य मापदंड द्वारा उसमें कर देने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि इस शब्द में वह व्यक्ति शामिल नहीं है जो भारत में स्त्रोत से आय के संबंध में ही भारत में कर देने के लिए उत्तरदायी है;
(ग) किसी भी संविदाकारी पक्ष के मामले में, भारत सरकार या उसका कोर्इ राजनीतिक उप-प्रभाग या स्थानीय प्राधिकारी
2. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण द्वारा एक व्यक्ति दोनो संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है, तो उसकी स्थिति निम्नानुसार निर्धारित होगी :
(क) उसे केवल उस राष्ट्र का निवासी समझा जाएगा जिसमें उसका स्थार्इ निवास है, यदि उसके पास दोनों राष्ट्रों में स्थार्इ निवास है तो उसे केवल उस राष्ट्र का निवासी होना समझा जाएगा जिसके साथ उसके निजी और आर्थिक रिश्ते घनिष्ठ है (महत्वूपर्ण हितों का केंद्र)
(ख) यदि राष्ट्र जिसमें उसके महत्वपूर्ण केंद्रीय हितों को निर्धारित नहीं किया जा सकता या उसके पास किसी भी संविदाकारी राष्ट्र में कोर्इ स्थार्इ निवास मौजूद नहीं है तो उसे केवल उस राष्ट्र का निवासी समझा जाएगा जिसमें वह आदतन रहता है
(ग) यदि वह आदतन दोनो राष्ट्रों में निवास करता है या दोनों में से किसी में भी नहीं रहता तो उसे केवल उसी राष्ट्र का निवासी समझा जाएगा जिसमें उसे रहने का अधिकार है (हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में) या जिसका वह निवासी है (भारत के मामले में)
(घ) यदि उसे हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में रहने का अधिकार है और भारत का नागरिक है या यदि ना तो उसे हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में रहने का अधिकार है ना ही भारत का नागरिक है तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी समझौते द्वारा मुद्दे को हल करने काप प्रयास करना चाहिए। ऐसा समझौता न होने पर, वह समझौते द्वारा मुहैया कराए गए कर से छूट या किसी राहत का हकदार नहीं होगा केवल उस सीमा और उस प्रणाली को छोड़कर जिसे संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा सहमत किया जा सकता है|
3. जहाँ पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण किसी व्यक्ति से भिन्न कोर्इ व्यक्ति दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी हो, तो उस संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी सहमति से प्रश्न को हल करने का प्रयास करेंगे जिसका ऐसा व्यक्ति समझौते के लिए निवासी होना समझा जाएगा, प्रभावी प्रबंधन के स्थान के संदर्भ में, वह स्थान जहां यह निगमित हुआ हो या अन्यथा संस्थापित हुआ हो और अन्य कोर्इ प्रासंगिक पहलू। ऐसे समझौते की अनुपस्थिति में, ऐसा व्यक्ति समझौते के अंतर्गत लाभों को प्राप्त करने के उद्देश्य से किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होना नहीं समझा जाएगा उस सीमा और ऐसे तरीके को छोड़कर जिसे संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा सहमत हुआ जा सकता है|
अनुच्छेद-5
स्थायी संस्थापन
1. इस करार के प्रयोजनार्थ ''स्थायी संस्थापन'' शब्द का आशय कारोबार के उस निश्चित स्थान से है, जिसके द्वारा किसी उद्यम का कारोबार सम्पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से किया जाता है।
2. ''स्थायी संस्थापन'' शब्द में विशेषतया निम्नलिखित शामिल होंगे :
(क) प्रबंधन का एक स्थान;
(ख) एक शाखा;
(ग) एक कार्यालय;
(घ) एक कारखाना;
(ड़) एक कार्यशाला;
(च) एक बिक्री केन्द्र;
(छ) किसी व्यक्ति से संबंधित कोर्इ भण्डागार, जो दूसरों को भण्डारण सुविधाएं मुहैया कराता हो;
(ज) कोर्इ फार्म, बागवानी अथवा अन्य स्थान जहां कृषि, वानिकी, बागवानी अथवा इससे संबंधित कार्यकलाप किए जाते हों; और
(झ) खनन, एक तेल या गैस का कुंआ या प्राकृतिक संसाधनों को निकालने का अन्य कोर्इ स्थान
3. शब्द "स्थायी संस्थापन" में निम्न भी शामिल हैं :
(क) कोर्इ भवन-स्थल अथवा निर्माण, प्रस्थापन अथवा संयोजन परियोजना अथवा उससे संबंधित पर्यवेक्षी कार्यकलाप केवल तब स्थार्इ प्रतिष्ठान बनेगी यदि ऐसा भवन स्थल, परियोजना अथवा कार्यकलाप छह महीने से अधिक समय तक चले;
(ख) ऐसे उद्देश्य के लिए उद्यम द्वारा संलग्न अन्य कर्मचारियों अथवा अन्य कर्मियों के माध्यम से एक उद्यम द्वारा परामर्श सेवाओं सहित सेवाओं की प्रस्तुति करता हैं लेकिन केवल वहां जहां उस प्रकार की गतिविधियां (उसी अथवा संबंधित परियोजना के लिए) अवधि अथवा किसी बारह माह की अवधि के भीतर अधिक से अधिक कुल 183 दिनों के लिए जारी रहती हैं।
4. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के होते हुए भी "स्थायी संस्थापन" शब्द में निम्नलिखित को शामिल नहीं समझा जाएगा
(क) उद्यम से संबंधित माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के केवल भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ सुविधाओं का इस्तेमाल करना;
(ख) एक भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ उद्यम से संबंधित माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के किसी स्टॉक का रख-रखाव करना;
(ग) किसी अन्य उद्यम द्वारा केवल प्रसंस्करित किए जाने के प्रयोजनार्थ उद्यम के माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के स्टॉक का रख-रखाव करना;
(घ) उद्यम के लिए माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं को केवल क्रय करने के लिए अथवा सूचना एकत्र करने के लिए कारोबार के किसी निश्चित स्थान का रख-रखाव करना;
(ड़) उद्यम के लिए केवल प्रारम्भिक अथवा सहायक स्वरूप के किसी अन्य कार्यकलाप को चलाने के प्रयोजनार्थ कारोबार के लिए निश्चित स्थान का रख-रखाव करना;
(च) केवल उप-पैराग्राफ (क) से (ड़) में निर्दिष्ट गतिविधियों के किसी संयोजन के लिए व्यापार के निश्चित स्थान का रखरखाव, बशर्ते इस संयोजन के परिणामस्वरूप व्यापार के निश्चित स्थान की समग्र गतिविधि सहायक अथवा प्राथमिक प्रकृति का संयोजन हैं ।
5. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान के होते हुए भी, जहां स्वतंत्र हैसियत के किसी अभिकर्ता, जिस पर पैराग्राफ 6 लागू होता हो, से भिन्न कोर्इ व्यक्ति अन्य संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम की ओर से एक संविदाकारी राष्ट्र में कार्य करता है, वहां किन्हीं उन कार्यकलापों के संबंध में, जिन्हें उक्त व्यक्ति उद्यम के लिए करता है, प्रथमोल्लिखित संविदाकारी राष्ट्र में उस उद्यम के स्थायी संस्थापन का होना माना जाएगा, यदि ऐसे व्यक्ति
(क) उस उद्यम के नाम से उस प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में संविदाएं सम्पन्न करने का प्राधिकार प्राप्त हो और वह आदतन उस प्राधिकार का प्रयोग भी करता हो, जब तक कि ऐसे व्यक्ति की गतिविधियां पैराग्राफ 4 में उल्लिखित उन गतिविधियों तक सीमित न हों, जिन्हें यदि वह कारोबार के एक निश्चित स्थान के माध्यम से प्रयोग करता है, को उस पैराग्राफ के प्रावधानों के अधीन कारोबार के इस निश्चित स्थान को एक स्थायी संस्थापन नहीं बनाएगा; अथवा
(ख) ऐसा कोर्इ अधिकार प्राप्त नहीं हो, किन्तु वह फिर भी आदतन प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में ऐसे माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं का स्टॉक रखता हो जिसमें से वह उद्यम की ओर से माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं की नियमित रूप से सुपुर्दगी करता; अथवा हो
(ग) ऐसा कोर्इ अधिकार नहीं हो लेकिन पहले निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में आदतन आदेश सुरक्षित रखता हो उद्यम या इसे संबद्ध उद्यम के लिए पूरी तरह से या लगभग पूरी तरह से
6. किसी उद्यम का किसी संविदाकारी राष्ट्र में मात्र इस कारण कोर्इ स्थायी संस्थापन का होना नहीं माना जाएगा कि वह उस राष्ट्र में किसी दलाल, सामान्य कमीशन एजेंट अथवा स्वतंत्र हैसियत वाले किसी अन्य एजेंट के माध्यम से कारोबार करता है, बशर्ते कि ऐसे व्यक्ति अपने कारोबार का काम सामान्य रूप से कर रहे हों। तथापि, जब ऐसे किसी एजेंट के कार्यकलाप पूर्णतरू अथवा लगभग पूर्णत: उस उद्यम की ओर से किए जाते हों, तो उसे इस पैराग्राफ के अभिप्राय के अंतर्गत स्वतंत्र हैसियत का एजेंट नहीं समझा जाएगा।
7. यह तथ्य कि कोर्इ कम्पनी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है, किसी ऐसी कम्पनी को नियंत्रित करती है अथवा किसी ऐसी कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती है, जो दूसरे संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है अथवा जो उस दूसरे राष्ट्र में (चाहे किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से अथवा अन्यथा) कारोबार करती है, को उन दोनों में से कोर्इ भी कम्पनी स्वत: ही दूसरे की स्थायी संस्थापन नहीं बन जाएगी।
अनुच्छेद-6
अचल सम्पत्ति से आय
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल सम्पत्ति (कृषि अथवा वानिकी से आय सहित) से प्राप्त आय पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जाएगा।
2. ''अचल सम्पत्ति'' शब्द का अर्थ वही होगा जो उस संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत उसका अर्थ है, जिसमें विचाराधीन सम्पत्ति स्थित है। इस पद में, किसी भी हालत में, ये शामिल होंगे - अचल सम्पत्ति के अवसाधन के रूप में सम्पत्ति, कृषि और वानिकी में प्रयुक्त पशुधन और उपस्कर, ऐसे अधिकार जिन पर भू-सम्पत्ति संबंधी सामान्य कानून के उपबंध लागू होते हों, खनिज भण्डार, स्रोत तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए अथवा दोहन के अधिकार के प्रतिफल के रूप में परिवर्तनीय अथवा नियत अदायगियों के अधिकार, जलयान, नौकाएं और वायुयान और सड़क परिवहन वाहन अचल सम्पत्ति के रूप में नहीं माने जाएंगे।
3. पैराग्राफ 2 में संदर्भित कोर्इ संपत्ति या अधिकार वहां स्थित होने के संबंध में होगा जहां भूमि, स्थार्इ टिंबर, खनिज भंडार, खदान, स्त्रोत या अन्य स्त्रोत, जो भी मामला हो, स्थित हो या जहां कार्य किया जा रहा हो
4. पैराग्राफ 1 के प्रावधान, अचल सम्पत्ति के प्रत्यक्ष उपयोग, उसे किराये पर देने अथवा इसके किसी अन्य प्रकार के प्रयोग से उद्भूत होने वाली आय पर भी लागू होंगे।
5. पैराग्राफ 1 और 4 के प्रावधान, किसी उद्यम की अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय पर तथा स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाओं के निपादन के लिए प्रयुक्त अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय पर भी लागू होंगे।
अनुच्छेद-7
व्यापारिक लाभ
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के लाभों पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगाया जाएगा जब तक कि वह उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से उस राष्ट्र में कारोबार नहीं करता हो। यदि उक्त उद्यम उपर्युक्त तरीके से व्यापार करता हो तो उस उद्यम के लाभों पर दूसरे राष्ट्र में भी कर लगाया जा सकता है, किन्तु उसके लाभों के केवल उतने अंश पर ही कर लगेगा जो उस स्थायी संस्थापन को प्राप्त हुए माने जाएंगे।
2. पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के अनुसार, जहां एक संविदाकारी राष्ट्र का कोर्इ उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से व्यापार करता हो, वहां प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में ऐसे स्थायी संस्थापन के कारण हुए लाभ, वे लाभ माने जाएंगे जिनके होने की संभावना तब होगी जब एक समान या उससे मिलती-जुलती परिस्थितियों में एक समान या मिलते-जुलते कार्यकलापों में लगे हुए कोर्इ और भिन्न उद्यम हो और वे उस उद्यम के साथ पूर्णत: स्वतंत्र रूप से व्यापार करता है जिसका वह एक स्थासी संस्थापन है।
3. किसी स्थायी संस्थापन के लाभों के निर्धारण करने में, उस राष्ट्र के कर कानूनों के प्रावधानों और उसकी सीमाओं के अनुसार ऐसे कार्यकारी तथा सामान्य प्रशासन पर किए गए खर्चो, चाहे राष्ट्र में जहां स्थार्इ संस्थापन स्थित हैं अथवा किसी अन्य स्थान पर, सहित खर्चे जो स्थार्इ प्रतिष्ठान के लिए किए गए हो, की कटौतीनुसार स्वीकार्य होंगे।
4. जहां तक उद्यमों के विभिन्न भागों हेतु उसके कुल लाभों के विभाजन के आधार पर स्थार्इ संस्थापन हेतु रोप्य किए जाने वाले लाभों को निर्धारित करने के लिए संविदात्मक राष्ट्र में प्रथा की गर्इ हैं कि पैराग्राफ 2 में कुछ भी ऐसे विभाजन द्वारा करारोपित किए जाने के लिए लाभों के निर्धारण से संविदात्मक राज्य को अलग करेगा जैसी प्रथा हो सकती हैं : हालांकि, अपनार्इ गर्इ विभाजन की विधि इस तरह होगी कि परिणाम इस अनुच्छेद में शामिल सिद्धांतों के अनुसार होगा।
5. कोर्इ लाभ, केवल इस कारण से किसी स्थायी संस्थापन को हुआ नहीं माना जाएगा कि उस स्थायी संस्थापन ने उद्यम के लिए माल अथवा व्यापारिक-वस्तुएं खरीदी हैं।
6. पूर्ववर्ती पैराग्राफों के प्रयोजनार्थ स्थायी संस्थापन के कारण हुए लाभों को तब तक साल दर साल उसी पद्धति से निर्धारित किया जाता रहेगा, जब तक कि उसके विपरीत कोर्इ ठोस तथा पर्याप्त कारण हो।
7. जहां लाभों में आय की ऐसी मदें शामिल होती हैं जिनका इस करार के अन्य अनुच्छेदों में अलग से विवेचन किया गया है, वहां उन अनुच्छेदों के उपबंध इस अनुच्छेद के प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे।
अनुच्छेद-8
नौपरिवहन तथा वायु परिवहन
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय यातायात में जलयानों अथवा वायुयानों के प्रचालन से प्राप्त होने वाले लाभों पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगाया जाएगा
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान होने के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक में जलयानों के संचालन से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम का लाभ अन्य संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकता है लेकिन उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अधिरोपित कर उसके 50 प्रतिशत के बराबर राशि द्वारा कम की जाएगी
3. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान किसी समूह में भागीदारी, किसी संयुक्त व्यापार अथवा किसी अन्तरराष्ट्रीय प्रचालन एजेंसी में प्राप्त लाभों पर भी लागू होंगे।
4. इस अनुच्छेद के लिए, अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक में जलयानों या वायुयान के संचालन से लाभ में शामिल होगा विशेषकर:
(क) अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक में व्यक्तियों, जानवरो, उत्पाद, मेल या व्यापार के स्थानांतरण के लिए जलयानों या वायुयान के संचालन से राजस्व और कुल प्राप्तियां, टिकटों की बिक्री से प्राप्त आय सहित और ऐसे परिवहन से संबंधित सेवा के प्रावधान सहित चाहे खुद उद्यम के लिए हो या अन्य किसी उद्यम के लिए हो, बशर्ते कि सेवाओं के प्रावधान के मामले में ऐसे प्रावधान अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक में समुद्री जलयानों या वायुयान प्रासंगिक है
(ख) अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक में जलयानों या वायुयान के संचालन से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित कोष पर ब्याज
(ग) उद्यम द्वारा कंटेनरों के पट्टेदारी से लाभ जब ऐसा पट्टा अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिक में समुद्री जलयानों या वायुयान के संचालन हेतु प्रासंगिक है|
अनुच्छेद-9
सहयोगी उद्यम
1. जहां
(क) एक संविदाकारी राष्ट्र का कोर्इ उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के प्रबंधन, नियंत्रण अथवा पूंजी में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेता है, अथवा
(ख) वे ही व्यक्ति, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के प्रबंध, नियंत्रण अथवा पूंजी में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं
और दोनों में से किसी भी अवस्था में दोनों उद्यमों के बीच उनके वाणिज्यिक अथवा वित्तीय संबंधों में ऐसी शर्तें रखी अथवा लगार्इ जाती हैं जो उन शर्तों से भिन्न हैं, जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच रखी जातीं तो ऐसा कोर्इ भी लाभ जो उन शर्तों के नहीं होने की स्थिति में उन उद्यमों में से एक उद्यम को प्राप्त हुआ होता, किन्तु उन शर्तों के कारण इस प्रकार प्राप्त नहीं हुआ, तो वे लाभ उस उद्यम के लाभों में शामिल किए जा सकेंगे और उन पर तद्नुसार कर लगाया जा सकेगा।
2. जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उस राष्ट्र के किसी उद्यम के लाभों में लाभों को सम्मिलित करता है और तद्नुसार कर लगाता है जिस पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया गया है और उसमें सम्मिलित किए गए लाभ ऐसे लाभ हैं जो प्रथमोल्लिखित राष्ट्र के उद्यम को उस स्थिति में प्राप्त हुए होते यदि दोनों उद्यमों के बीच लगार्इ गर्इ शर्तों उस तरह की होतीं जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच लगार्इ जाती है, तब वह दूसरा राष्ट्र उन लाभों पर उसमें प्रभारित कर की राशि के बराबर समुचित समायोजन करेगा। इस प्रकार के समायोजन को निश्चित करने में इस करार के अन्य प्रावधान को यथोचित रूप से ध्यान में रखना होगा और यदि आवश्यक हो, तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी एक दूसरे के साथ परामर्श करेंगे।
अनुच्छेद-10
लाभांश
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी किसी कम्पनी द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए गए लाभांश उस दूसरे राष्ट्र में कराधेय होंगे।
2. हालांकि, ऐसे लाभांश उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करयोग्य होगा जिसमें लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी एक निवासी हो तथा उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार हो लेकिन यदि प्राप्तकर्ता लाभांश का लाभकारी स्वामी हो तो ऐसा प्रभारित कर लाभांश की सकल राशि के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
यह पैराग्राफ लाभ के संबंध में कंपनी के उस कराधान को प्रभावित नहीं करेगा जिसमें से लाभांश दिया गया हैं।
3. इस अनुच्छेद में यथा प्रयुक्त ''लाभांश'' पद का अभिप्राय शेयरों अथवा अन्य अधिकारों से प्राप्त आय से है जो लाभ की भागीदारिता, ऋण के दावे न हों, साथ ही साथ अन्य निगमित अधिकारों से प्राप्त आय से है जिस पर वही कराधान व्यवस्था लागू होती है जो उस राष्ट्र के कानूनों के अन्तर्गत शेयरों से प्राप्त आय पर लागू होती है, जिसकी वितरण करने वाली कम्पनी एक निवासी है।
4. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर लाभांश के लाभार्थी स्वामी वहां स्थित स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार चलता हैं जिसमें से लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी एक निवासी हैं अथवा वहां स्थित निश्चित स्थान से स्वतंत्र निजी सेवाओं को अन्य राष्ट्रों में निष्पादित करती हैं तथा उसके संबंध में जिसमें दिया गया लाभांश ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान अथवा निश्चित स्थान के प्रभावी रूप से संबंधित हैं, धारित की जाएगी। ऐसे मामलों में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 15 के प्रावधान, जो भी स्थिति हो, लागू होंगे
5. जहां कोर्इ कम्पनी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है, दूसरे संविदाकारी राष्ट्र से लाभ अथवा आय प्राप्त करती है, तो वह दूसरा राष्ट्र कम्पनी द्वारा अदा किए गए लाभांशों पर किसी भी प्रकार का कर नहीं लगाए, जब तक कि ऐसे लाभांश उस दूसरे राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए जाते हों, अथवा जब तक कि जिन धारिताओं के बारे में लाभांशों की अदायगी की जाती हो, वह उस दूसरे राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन से प्रभावी रूप से संबद्ध हो और न ही कम्पनी के अवितरित लाभों पर कर लगाया जाएगा, चाहे अदा किए गए लाभांश अथवा वितरित लाभपूर्ण रूप से या आंशिक रूप से उस दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत होने वाले लाभ अथवा आय के रूप में हों।
6. इस अनुच्छेद के लाभ उपलब्ध नहीं होंगे यदि शेयर या अन्य अधिकार, जिसके संबंध में लाभांश दिया गया है, बनाने या सौंपने के संबंध में किसी व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य या एक मुख्य उद्देश्य उसे बनाने या सौंपने के माध्यम द्वारा इस अनुच्छेद का फायदा लेना है|
अनुच्छेद 11
ब्याज
1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होने वाले तथा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए गए ब्याज पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।
2. हालांकि, इस प्रकार के ब्याज पर उस संविदाकारी राष्ट्र में भी और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा जिस राष्ट्र में वह उद्भूत होता है, किन्तु यदि प्राप्तकर्ता ब्याज का लाभार्थी स्वामी हैं तो इस प्रकार प्रभारित कर, ब्याज की सकल रकम के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
3. पैराग्राफ 2 के होते हुए भी, एक संविदाकारी देश में उत्पन्न ब्याज उस राष्ट्र में कर से मुक्त होगा बशर्ते कि यह निम्न द्वारा प्राप्त और लाभकारी हो
(क) सरकार, एक राजनीतिक उप प्रभाग या अन्य संविदाकारी राष्ट्र का स्थानीय प्राधिकारी; या
(ख) (i) हांग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में, हांग कांग मौद्रिक प्राधिकारी और विनिमय कोष
या
(ii) भारत के मामले में, भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय आयात-निर्यात बैंक; या
(ग) अन्य कोर्इ संस्थान जिसे संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों के बीच समय समय पर सहमत किया जा सके
4. इस अनुच्छेद में यथा - प्रयुक्त ''ब्याज'' शब्द से अभिप्रेत है - प्रत्येक प्रकार के ऋण संबंधी दावों से प्राप्त आय, चाहे वह बंधक द्वारा प्रतिभूत हों अथवा नहीं और चाहे उन्हें ऋण-दाता के लाभ में भागीदारी का कोर्इ अधिकार प्राप्त हो अथवा नहीं हो और विशेष रूप से सरकारी प्रतिभूतियों से, प्राप्त आय और जमा, बंधपत्रों अथवा ऋण-पत्रों से प्राप्त आय जिसमें ऐसी प्रतिभूतियों, बंधपत्रों अथवा ऋण-पत्रों से संबंधित प्रीमियम और पुरस्कार के साथ-साथ आय शामिल हों। विलम्बित अदायगी के लिए अर्थदंड संबंधी प्रभारों को इस अनुच्छेद के प्रयोजन के लिए ब्याज नहीं समझा जाएगा।
5. पैराग्राफ 1 और 2 और 3 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि ब्याज का हितभागी स्वामी, संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने से दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में, जिसमें ब्याज उद्भूत हुआ हो, उसमें स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो तथा जिस ऋण-दावे के बारे में ब्याज अदा किया गया हो वह इस प्रकार के स्थायी संस्थापन प्रभावी रूप से सम्बद्ध हो। ऐसे मामले में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 15, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।
6. ब्याज किसी संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत हुआ माना जाएगा, यदि अदाता वह संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी हो। तथापि, जहां ब्याज अदा करने वाले व्यक्ति, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं किसी संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थायी संस्थापन है और इस संबंध में ऋण जिस पर ब्याज प्रदत्त किया गया था, इस प्रकार का ब्याज इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन किया जाता है, तो इस प्रकार का ब्याज उस संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत हुआ माना जाएगा जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।
7. जहां, अदा करने वाले और हितभागी स्वामी अथवा उन दोनों के बीच तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच विशेष संबंध होने के कारण अदा की गर्इ ब्याज की रकम, उस ऋणदावे को ध्यान में रखते हुए जिसके लिए यह रकम अदा की गर्इ है, उस रकम से बढ़ जाती है, जिसके संबंध में इस प्रकार के संबंध होने की स्थिति में अदा करने वाले और हितभागी स्वामी के बीच सहमति हो गर्इ होती, वहां इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम रूप से वर्णित रकम पर ही लागू होंगे। ऐसे मामले में अदायगियों के आधिक्य भाग पर इस करार के अन्य प्रावधान को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जाएगा।
8. इस अनुच्छेद के लाभ उपलब्ध नहीं होंगे यदि ऋण दावे, जिसके संबंध में ब्याज दिया गया है, बनाने या सौंपने के संबंध में किसी व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य या एक मुख्य उद्देश्य उसे बनाने या सौंपने के माध्यम द्वारा इस अनुच्छेद का फायदा लेना है|
अनुच्छेद 12
रॉयल्टी
1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होने वाली रायल्टी तथा अन्य संविदाकारी राष्ट्रों के निवासी को दी गर्इ रॉयल्टी अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।
2. हालांकि, इस प्रकार की रायल्टियाँ उस संविदाकारी राष्ट्र में भी, जिसमें वे उद्भूत हुर्इ एवं, उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा, लेकिन यदि रायल्टियों का लाभार्थी स्वामी दूसरे संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है तो इस प्रकार लगाया गया कर रॉयल्टी की सकल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
3. इस अनुच्छेद में प्रयुक्त "रॉयल्टी" शब्द का अर्थ किसी साहित्यिक, कलात्मक अथवा वैज्ञानिक कृति के किसी कापीराइट, जिसमें सिनेमेटोग्राफिक फिल्में अथवा टेलीविजन अथवा रेडियो प्रसारण के लिए प्रयुक्त फिल्में अथवा टेपें, किसी पेटेंट, ट्रेडमार्क, तकनीकी डिजाइन अथवा मॉडल, प्लान, गुप्त फार्मूला अथवा प्रक्रिया या किसी औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक उपकरण के प्रयोग हेतु अथवा प्रयोगाधिकार हेतु अथवा औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक अनुभव से संबंधित सूचना सहित प्रतिफल के रूप में प्राप्त की गर्इ किसी भी प्रकार की अदायगियां हैं।
4. पैराग्राफ (1) और (2) के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि रायल्टी का लाभार्थी स्वामी, संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर, अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हैं जिसमें रायल्टी उत्पन्न होती हैं, वहां स्थित एक स्थार्इ संस्थापन के माध्यम से, अथवा उस अन्य राष्ट्र में वहां स्थित निश्चित आधार से अन्य राष्ट्र स्वतंत्र निजी सेवा का निष्पादन करता हैं तथा उसके संबंध में संपत्ति अथवा अधिकार जिसके संबंध में दी गर्इ रायल्टी स्थार्इ संस्थापन अथवा निश्चित आधार से संबंधित हैं। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 15, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।
5. रायल्टी एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होने के तौर पर समझी जाएगी जब अदाता उस राष्ट्र्र का निवासी हो। जहां, तथापि, रायल्टी अदा करने वाले व्यक्ति, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं किसी संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थायी संस्थापन है अथवा निश्चित आधार है जिसके साथ रॉयल्टी की देयता समझी गयी थी| इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन किया जाता है, तो इस प्रकार की रायल्टी उस राष्ट्र में उद्भूत हुआ माना जाएगा जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।
6. जहां, अदाकर्ता तथा हितभागी स्वामी के बीच अथवा उन दोनों और किसी अन्य व्यक्ति के बीच किसी विशेष प्रकार का संबंध होने के कारण प्रयोग, अधिकार अथवा सूचना के संबंध में रायल्टी की राशि जिसके लिए वह अदा की जाती है, किसी भी कारण से उस राशि से अधिक हो जाती है जिस पर ऐसे संबंधों की अनुपस्थिति में अदाकर्ता तथा हितभागी स्वामी द्वारा सहमति हो गर्इ होती, वहां इस अनुच्छेद के प्रावधान केवल अंतिम वर्णित रकम पर लागू होंगे। ऐसे मामले में, अदायगियों का आधिक्य भाग इस करार के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कराधेय होगा।
7. इस अनुच्छेद के लाभ उपलब्ध नहीं होंगे यदि अधिकार, जिसके संबंध में रॉयल्टी दी गर्इ है, बनाने या सौंपने के संबंध में किसी व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य या एक मुख्य उद्देश्य उसे बनाने या सौंपने के माध्यम द्वारा इस अनुच्छेद का फायदा लेना है
अनुच्छेद 13
तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क
1. संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न तकनीकी शुल्क तथा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को उसका भुगतान उस राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।
2. हालांकि, ऐसा तकनीकी सेवाओं के लिए ऐसा शुल्क उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकता हैं जिसमें वह उत्पन्न होते हैं तथा उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार, लेकिन यदि तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के लाभार्थी स्वामी अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हैं तो ऐसा तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क की सकल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना होगी।
3. शब्द "तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है, का अर्थ किसी भी प्रकार का भुगतान है तकनीकी या अन्य कार्मिक सेवाओं के प्रावधान के माध्यम सहित प्रबंधकीय, तकनीकी या परामर्शदात्री सेवाओं के लिए प्रतिफल के तौर पर लेकिन स्वतंत्र निजी सेवाओं के लिए भुगतान और आश्रित निजी सेवाओं केलिए भुगतान शामिल नहीं है जैसा इस समझौते के क्रमश: अनुच्छेद 15 और 16 में निर्दिष्ट है
4. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर तकनीकी सेवाओं का शुल्क का लाभकारी स्वामी उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हैं जिसमें वहां स्थित स्थार्इ संस्थापन के माध्यम से तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क उत्पन्न होता हैं अथवा वहां स्थित निश्चित आधार से अन्य राष्ट्र की स्वतंत्र निजी सेवाओं को निष्पादित करता हैं तथा अधिकार या संपत्ति जिसके संबंध में तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क ऐसे स्थार्इ संस्थापन अथवा निश्चित आधार के साथ प्रभावी रूप से संबंधित हैं। ऐसे मामले में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 15, जो भी हो, के प्रावधान लागू होंगे।
5. तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जब अदाता उसे राष्ट्र का निवासी हो। जहां, हालांकि, व्यक्ति तकनीकी सेवाओं के शुल्क का भुगतान करता हैं, चाहे वह संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं, उसके संबंध में एक संविदाकारी राष्ट्र में स्थार्इ संस्थापन हो जिसके लिए तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क देने के लिए दायित्व उठाया था तथा ऐसी तकनीकी सेवाओं के लिए राशि उस स्थार्इ संस्थापन द्वारा वहन अथवा निश्चित आधार होती हैं तो ऐसा तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क उस राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जिसमें स्थार्इ संस्थापन अथवा निश्चित आधार स्थित हैं।
6. जहां अदाता तथा लाभार्थी स्वामी के बीच अथवा दोनो के बीच तथा कुछ अन्य व्यक्ति के विशेष संबंध के कारण तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क की राशि को जिसके किए अधकारी या सुचना द्वारा दिए गए तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क की राशि उस राशि से अधिक होती हैं जिसे ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता लाभार्थी स्वामी द्वारा स्वीकार्य किया गया होता तो इस अनुच्छेद के प्रावधान केवल अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होगी। ऐसी स्थिति में, भुगतान का अतिरिक्त भाग प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनो के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों के संबंध होने के कारण
7. इस अनुच्छेद के लाभ उपलब्ध नहीं होंगे यदि सेवाओं का निष्पादन, जिसके संबंध में तकनीकी शुल्क दिया गया है, के संबंध में किसी व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य या एक मुख्य उद्देश्य ऐसी सेवाओं के निष्पादन के माध्यम द्वारा इस अनुच्छेद का फायदा लेना है
अनुच्छेद 14
पूंजी प्राप्ति
1. अनुच्छेद 6 में उल्लिखित और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल सम्पत्ति के अंतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त अभिलाभों पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।
2. स्थार्इ संस्थापन की व्यापारिक संपत्ति के भाग से बनी चल संपत्ति के हस्तांरण से प्राप्ति जिसमें संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में हेैं अथवा निश्चित स्थान से संबंधित चल संपत्ति ऐसे निश्चित स्थान अथवा ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान (अकेल अथवा पूर्ण उद्यम सहित) के हस्तांतरण से ऐसी प्राप्ति सहित स्वतंत्र निजी सेवाओं के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्रों में संविदाकारी राष्ट्र के निवासी हेतु उपलब्घ हैं, उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता हैं|
3. अन्तरराष्ट्रीय यातायात में चलाए जाने वाले जलयानों अथवा वायुयानों के हस्तांतरण से अथवा इस प्रकार के जलयानों अथवा वायुयानों के प्रचालन से संबंधित, चल सम्पत्ति के अंतरण से प्राप्ति केवल उस राष्ट्र में करयोग्य होगी जिसमें संक्रांता निवासी है।
4. कंपनी के 50% से अधिक पूंजीगत स्टाक के शेयरों के हस्तांतरण से प्राप्ति, उसकी संपत्ति जिसमें एक संविदकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष सिद्धांत शामिल हैं, उस राष्ट्र में करारोपित हो सकता हैं
5. कंपनी में पैराग्राफ 4 में निर्दिष्ट को छोड़कर शेयरों के हस्तांतरण से प्राप्ति जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हैं, उस राष्ट्र में करारोपित हो सकता हैं
6. पैराग्राफ 1,2,3,4 तथा 5 में संदर्भित को छोड़कर किसी संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति घरेलू कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित है|
7. इस अनुच्छेद के लाभ उपलब्ध नहीं होंगे यदि संपत्ति का हस्तांतरण, जिसके संबंध में पूंजी प्राप्ति हुर्इ है, किसी व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य या एक मुख्य उद्देश्य उसे हस्तांतरण के माध्यम द्वारा इस अनुच्छेद का फायदा लेना है
अनुच्छेद-15
स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाएं
1. व्यक्ति जो व्यवसायिक सेवाओं अथवा इसी प्रकार की स्वतंत्र गतिविधियों के प्रदर्शन से संविदात्मक राष्ट्र का निवासी हैं, द्वारा प्राप्त आय केवल उस राष्ट्र में करयोग्य होगी केवल निम्नलिखित अवस्थाओं को छोड़कर, जब ऐसी आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में भी करयोग्य हो सकती होः
(क) यदि वह अपनी गतिविधियों के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके लिए उपलब्घ निश्चित स्थान रखता हैं तो इस स्थिति में आय का उतना जैसा उस निश्चित स्थान आरोप्य हैं अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता हैः अथवा
(ख) यदि वह अन्य संविदाकारी राष्ट्र में संबंधित निर्धारण वर्ष (हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र) या वित्त वर्ष (भारत की स्थिति में) को प्रारंभ या समाप्त होने वाली किसी बारह महीनों की अवधि में कुल 183 दिनों या उससे अधिक की अवधि के लिए रहता है तो इस मामले में इतनी आय जैसा उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में की गर्इ उसकी गतिविधि से प्राप्त होती है उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है
2. शब्द "व्यवसायिक सेवा" में विशेषकर स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षिक अथवा शिक्षण गतिविधियां साथ ही साथ चिकित्सक, वकील, अभियंता, वास्तुशास्त्री, दंत चिकित्सक तथा लेखाकार शामिल हैं।
अनुच्छेद-16
आश्रित व्यक्तिगत सेवाएं
1. अनुच्छेद 17, 19, 20, 21 तथा 22 के प्रावधानों के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारां प्राप्त वेतनों, मजदूरियों और इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगेगा, जब तक कि नियोजन का निष्पादन दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में नहीं किया गया हो। यदि ऐसा नियोजन किया गया है, तो जो पारिश्रमिक वहां से प्राप्त होता है, उस पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लग सकेगा।
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान होते हुए भी, अन्य संविदाकारी राष्ट्र में किए गए रोजगार के संदर्भ में एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ही करयोग्य होगा यदि
(क) प्राप्तकर्ता अन्य संविदाकारी राष्ट्र में संबंधित निर्धारण वर्ष (हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र) या वित्त वर्ष (भारत की स्थिति में) को प्रारंभ या समाप्त होने वाली किसी बारह महीनों की अवधि में कुल 183 दिनों या उससे अधिक की अवधि के लिए रहता है
(ख) उस एक नियोक्ता की ओर से दिया गया पारिश्रमिक जो अन्य देश का निवासी नहीं है
(ग) ऐसा पारिश्रमिक ऐसे किसी स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन नहीं किया जाता है, जो नियोजक का दूसरे राष्ट्र में हो।
3. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के बावजूद, एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम द्वारा अन्तरराष्ट्रीय यातायात में संचालित किसी पोत अथवा वायुयान पर किए गए नियोजन के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक पर, उसी संविदाकारी राष्ट्र में कर करयोग्य हो सकता है।
अनुच्छेद 17
निदेशक शुल्क
कंपनी के निदेशक मंडल दल के सदस्य के तौर पर उसकी क्षमता अनुसार संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा व्युत्पन्न निदेशक शुल्क तथा अन्य समकक्ष प्रकार के भुगतान उस अन्य राष्ट्र में भी करयोग्य हो सकते हैं।
अनुच्छेद-18
कलाकार और खिलाड़ी
1. अनुच्छेद 15 तथा 16 के प्रावधानों के बावजूद भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा मनोरंजनकर्ता, जैसे कि कोर्इ थियेटर, चलचित्र, रेडियो या दूरदर्शन कलाकार अथवा किसी संगीतकार अथवा किसी खिलाड़ी के रूप में दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में किए गए इस प्रकार के अपने व्यक्गित कार्य-कलापों से प्राप्त आय पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।
2. जहां किसी मनोरंजनकर्ता अथवा किसी खिलाड़ी द्वारा अपने इस प्रकार की हैसियत में किए गए व्यक्तिगत कार्य-कलापों के संबंध में प्राप्त आय स्वयं मनोरंजनकर्ता या खिलाड़ी को प्राप्त नहीं हो, अपितु किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त हो, ऐसी आय पर अनुच्छेद 7, 15 तथा 16 के प्रावधानों के बावजूद, उस संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा, जिसमें मनोरंजनकर्ता अथवा खिलाड़ी के कार्य-कलाप किए जाते हों।
3. पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधान मनोरंजनकर्ता अथवा खिलाड़ी द्वारा की गर्इ गतिविधियों से संविदाकारी राष्ट्र में की गर्इ गतिविधियों से आय हेतु लागू नहीं होगी यदि गतिविधियां एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों अथवा राजनीतिक उप-संभाग अथवा उसके स्थानीय प्राधिकारी में सार्वजनिक कोष से वास्तविक रूप से समर्थित हो। इस मामले में आय उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसका मनोरंजकर्ता या खेलकर्मी निवासी है
अनुच्छेद 19
पेंशन
1. अनुच्छेद 20 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को दिए गए पेंशन और अन्य समकक्ष पारिश्रमिक (एकमुश्त भुगतान सहित), ऐसे पेंशन या पारिश्रमिक के रोजगार के बाद प्रतिफल में दिए जाने के बावजूद, उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा|
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान होते हुए भी पेंशन या, सेवानिवृत्ति योजना, जो एक योजना है जिसके अंतर्गत व्यक्ति सुरक्षित सेवानिवृत्ति लाभ हेतु भाग ले सकता है और जिसे एक संविदकारी राष्ट्र में कर उद्देश्य के लिए स्वीकृत किया गया है, के अंतर्गत पेंशन किए गए और अन्य समकक्ष पारिश्रमिक (एकमुश्त भुगतान सहित), उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगा|
अनुच्छेद-20
सरकारी सेवा
1. (क) किसी संविदाकारी राष्ट्र की सरकार अथवा उसके किसी राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किसी व्यक्ति को उस राष्ट्र अथवा उप-प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए की गर्इ सेवाओं के संबंध में अदा किए गए पेंशन से भिन्न इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में ही कर लगेगा ।
(ख) हालांकि, वेतन, मजदूरी एवं अन्य ऐसे पारिश्रमिक पर केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में तभी कर लग सकेगा, यदि सेवाएं उस राष्ट्र में की जाती हैं, और व्यक्ति उस राष्ट्र का एक निवासी हो, जोः
(i) हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में, वहां रहने का अधिकार हो और भारत के मामले में भारत का नागरिक हो; या
(ii) सेवाओं के प्रतिपादन के उद्देश्य मात्र के लिए उस राष्ट्र का निवासी नहीं बना हो।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र या उसके राजनीतिक उप-प्रभाग या स्थानीय प्राधिकारी को दी गर्इ सेवाओं के संबंध में एक व्यक्ति को एक संविदकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उप-प्रभाग या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा दिए गए या उनके द्वारा बनाए या वितरित किए गए कोषों में से दी गर्इ कोर्इ पेंशन (एकमुश्त राशि सहित) केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगी|
3. अनुच्छेद 16, 17 18 तथा 19 के प्रावधान संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके एक राजनीतिक उप-प्रभाग अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा किए गए व्यापार के संबंध में दी गर्इ सेवाओं के संबंध में वेतन, मजदूरी और अन्य पारिश्रमिक हेतु लागू होगा।
अनुच्छेद 21
विद्यार्थी
भुगतान जो एक विद्यार्थी जो एक संविदाकारी राष्ट्र जाने से तुरंत पहले अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी था या है और जो अपने अनुरक्षण या शिक्षा के लिए अपनी शिक्षा प्राप्त करने के लिए ही प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में स्थित है, बशर्ते कि ऐसा भुगतान उस राष्ट्र के बाहर से प्राप्त होता हो|
अनुच्छेद-22
अन्य आय
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी की ऐसी मदें, जहां-कहीं वे उद्भूत होती हों, जिन पर इस करार के पूर्वोक्त अनुच्छेदों में विचार नहीं किया गया है, केवल उस राष्ट्र में कराधेय होंगी।
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान, अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 2 में यथा-परिभाषित अचल सम्पत्ति से प्राप्त आय से भिन्न आय पर लागू नहीं होंगे, यदि ऐसी आय का प्राप्तकर्ता एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने के नाते दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है वहां स्थित किसी स्थायी संस्थापन से प्रभावी रूप से सम्बद्ध है अथवा वहां स्थिति निश्चित स्थान से अन्य राष्ट्र में स्वतंत्र निजि सेवाओं का निष्पादन करता हो तथा जिसके संबंध में अधिकार तथा संपत्ति ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से संबंधित हो। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 15, जो भी स्थिति हो, के उपबंध लागू होंगे।
3. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी की मद समझौते के पूर्ववर्ती अनुच्छेदों के साथ व्यवहार नहीं करती और अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न उस अन्य राष्ट्र में भी करारोपित हो सकती है।
अनुच्छेद 23
दोहरे कराधान की निष्काषन विधि
दोहरा कराधान निम्नानुसार निष्काषित होगा
1. हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में
हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के बाहर के क्षेत्राधिकार में दिए गए कर के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र क्षेत्रीय कर के समक्ष ऋण की अनुमति से संबंधित हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के कानूनों के प्रावधान के अनुसार (जो इस अनुच्छेद के सामान्य प्रावधान को प्रभावित नहीं करेगा) भारत के कानूनों के अंतर्गत और समझौते के अनुसार दिए गए भारतीय कर, चाहे प्रत्यक्ष हो या कटौती द्वारा, एक व्यक्ति जो भारत में स्त्रोत से हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र का निवासी है, के संदर्भ में उस आय के देययोग्य कर हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के समक्ष ऋण के तौर पर स्वीकृत है, बशर्ते कि ऐसा स्वीकृत ऋण हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के कर कानूनों के अनुसार उस आय के संदर्भ में ओके गए हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्रीय कर की राशि से अधिक न हो
2. भारत में
(क) जहां एक भारत का निवासी आय प्राप्त करता हो जो इस समझौते के अनुसार
हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में करारोपित हो सकता है, भारत उस निवासी की आय पर कर से कटौती के तौर पर हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में दिए गए कर के बराबर राशि को स्वीकृत करेगा
हालांकि, ऐसी कटौती कर के उस भाग से अधिक नहीं होगी जिसे आय के लिए कटौती से पहले आंका गया हैं, जो रोप्य हैं, जैसी भी स्थिति हो, जो हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में करारोपित हो सकती हैं।
(ख) जहां समझौते के किसी प्रावधान के अनुसार भारत के निवासी द्वारा प्राप्त आय राष्ट्र में कर से मुक्त हैं तो वह राष्ट्र फिर भी ऐसे व्यक्ति की शेष आय पर कर की राशि की गणना में मुक्त ऐसे निवासी भी आय को विचार में ले सकते हैं।
अनुच्छेद 24
गैर-पक्षपात
1. व्यक्ति जो, हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में, को रहने या निगमित या वहां अन्यथा संस्थापित होने का अधिकार है और भारत के मामले में, निवासी इसके अतिरिक्त संबंधित किसी करदेयता या किसी अनिवार्यता हेतु अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अधीन नहीं होगा, जो उन व्यक्तियों के लिए कराधान और संबंधित अनिवार्यताओं की तुलना में अधिक कष्टकारी होगा जिसके पास उस अन्य राष्ट्र में रहने या निगमित या वहां अन्यथा संस्थापित होने का अधिकार है (जहां अन्य पक्ष हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है) या उस अन्य राष्ट्र का निवासी (जहां अन्य पक्ष भारत है), उन्ही परिस्थितियों में, विशेषकर निवास के संदर्भ में, का विषय है या हो सकता है। यह प्रावधान, अनुच्छेद 1 के प्रावधान न होते हुए उस व्यक्ति के लिए लागू होंगे जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी नहीं है|
2. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित स्थायी संस्थापन पर उस दूसरे राष्ट्र में ऐसा कोर्इ कराधान लागू नहीं किया जाएगा जो उस दूसरे राष्ट्र के उद्यमों पर समरूप कार्यकलापों को करने हेतु लागू होने वाले कराधान से अपेक्षाकृत कम अनुकूल हो। यह प्रावधान सिविल स्टेटस अथवा पारिवारिक उत्तरदायित्वों जो यह अपने निवासी को देता हैं, के कारण कराधान उद्देश्य के लिए किसी निजी भत्ते, राहत तथा कमी अन्य संविदात्मक राष्ट्र के निवासी को देने के लिए संविदात्मक राष्ट्र के दायित्व के तौर पर नहीं लगाया जाएगा। यह प्रावधान स्थार्इ संस्थापन के लाभ के उदग्रहण से संविदात्मक राष्ट्र को रोकने के लिए नहीं बनाया गया हैं जो अन्य संविदात्मक राष्ट्र की कंपनी कर की दर, जो प्रथम निर्दिष्ट संविदात्मक राष्ट्र की समकक्ष कंपनी के लाभ पर अधिरोपित से अधिक हैं, नाकि अनुच्छेद 7 के पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के साथ संघर्ष के तौर पर, प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में हैं।
3. ऐसे मामले को छोड़कर जहां अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 1, अनुच्छेद 11 के पैराग्राफ 7 या अनुच्छेद 12 के पैराग्राफ 6, अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 3 के उपबंध लागू होते हैं, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किये गए ब्याज, रायल्टी, तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा अन्य भुगतान, ऐसे उद्यम के कराधेय लाभों का निर्धारण करने के प्रयोजनार्थ उन्हीं शर्तों के अनुसार कटौती-योग्य होंगे मानो उनका भुगतान प्रथमोल्लिखित राष्ट्र के किसी निवासी को किया गया हो।
4. संविदात्मक राष्ट्र के उद्यम, जिसकी पूंजी अन्य संविदात्मक राष्ट्र के एक अथवा एक से अधिक निवासी द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पूर्णता अथवा आंशिक रूप से खरीदी अथवा नियंत्रित होती हैं, किसी कराधान अथवा उसके साथ संबंधित किसी अनिवार्यताये का विषय नही होगा जो कराधान से अन्य अथवा अधिक बोझ हैं तथा संबंधित अनिवार्यता जिसके लिए प्रथम-निर्दिष्ट राष्ट्र के अन्य समकक्ष उद्यम का विषय हैं अथवा हो सकता है।
अनुच्छेद-25
पारस्परिक करार विधि
1. जहां कोर्इ व्यक्ति यह समझता है कि एक अथवा दोनों संविदाकारी राष्ट्रों की कार्रवार्इयों के कारण उस पर इस प्रकार कर लगाया जाता है अथवा लगाया जाएगा जो इस करार के प्रावधान के अनुरूप नहीं है तो वह उन राष्ट्रों के स्वदेशी कानूनों द्वारा उपलब्ध कराए गए उपायों के होते हुए भी अपना मामला उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत कर सकता है, जिसका कि वह एक निवासी है अथवा यदि उसका मामला अनुच्छेद 24 के पैराग्राफ 1 के अंतर्गत आता है तो वह अपना मामला उस संविदाकारी राष्ट्र को प्रस्तुत कर सकता है जहाँ उसे रखने का अधिकार है या निगमन या अन्यया संस्थापना (होग कांग विशेष प्रसाशनिक क्षेत्र के मामले में) का अधिकार है या जिसका वह नागरिक है (भारत के मामले में) इस मामले को उस कार्रवार्इ की प्रथम अधिसूचना से तीन वषोर्ं के भीतर अवश्य प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप ऐसा कराधान लगाया गया है जो इस करार के प्रावधान के अनुरूप नहीं है।
2. यदि सक्षम प्राधिकारी को आपत्ति उचित लगे और यदि वह स्वयं किसी संतोषजनक हल पर पहुंचने में असमर्थ हो, तो वह ऐसे कराधान के परिहार की दृष्टि से जो इस करार के अनुरूप नहीं है, दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के साथ पारस्परिक सहमति द्वारा उस मामले को हल करने का प्रयास करेगा। इस प्रकार किए गए किसी करार को संविदाकारी राष्ट्रों के स्वदेशी कानूनों में किसी समय सीमा के होते हुए भी क्रियान्वित किया जाएगा।
3. इस करार की व्याख्या करने अथवा इसे लागू करने में कोर्इ कठिनाइयां अथवा शंकाएं हों, तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी उन्हें पारस्परिक सहमति से हल करने का प्रयास करेंगे। वे उन मामलों में भी दोहरे कराधान को दूर करने के लिए परस्पर विचार-विमर्श कर सकते हैं जिनकी इस करार में व्यवस्था नहीं की गर्इ हो।
4. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, खुद सवं या अपने प्रतिनिधि के साथ संयुक्त आयुक्त के माध्यम सहित, पूर्ववर्ती पैराग्राफ के अर्थ में एक समझौते को करने के लिए प्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे के साथ संपर्क कर सकते हैं।
अनुच्छेद-26
सूचना का आदान-प्रदान
1. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना का आदान-प्रदान करेंगे जो कि इस करार के प्रावधान को लागू करने के लिए आनुमानिक रूप से संगत हो अथवा संविदाकारी राष्ट्रों या उनके राजनीतिक उप-प्रभागों या स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से लगाए गए सभी प्रकार एवं विवरण के उन करों से संबंधित आंतरिक कानूनों के प्रशासन अथवा प्रवर्तन के लिए आवश्यक हों, जहां तक कि उनके अधीन कराधान व्यवस्था इस करार के प्रतिकूल नहीं है। सूचना का आदान-प्रदान अनुच्छेद 1 द्वारा प्रतिबंधित नहीं है।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त की गर्इ कोर्इ सूचना उस राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त सूचना के समान ही गुप्त समझी जाएगी और उसे केवल उन व्यक्तियों अथवा प्राधिकारियों (न्यायालयों और प्रशासनिक निकाय सहित) को प्रकट किया जाएगा जो पैराग्राफ-1 में संदर्भित करों के संबंध में अपील के निर्धारण के संबंध में करों के मूल्यांकन अथवा एकत्रीकरण अथवा प्रवर्तन से संबंधित अथवा उक्त के पर्यवेक्षण हैं। ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी सूचना का उपयोग केवल ऐसे ही प्रयोजन के लिए करेंगे। वे इस सूचना को सार्वजनिक न्यायालय की कार्यवाहियों अथवा न्यायिक निर्णयों में इसे प्रकट कर सकेंगे। एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्राप्त पूर्वगामी, सूचना के होते हुए भी एक संविदाकारी राष्ट्र अन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग कर सकते हैं जब ऐसी सूचना को ऐसे प्रयोग को प्राधिकृत करने वाले आपूर्तिकर्ता राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों तथा दोनो राष्ट्रों के अंतर्गत ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता हैं।
3. किसी भी स्थिति में पैराग्राफ 1 तथा 2 के प्रावधान का अर्थ किसी संविदाकारी राष्ट्र पर निम्नलिखित दायित्व डालना नहीं होगा :
(क) उस अथवा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों और प्रशासनिक प्रथा से हट कर प्रशासनिक उपाय करना
(ख) ऐसी सूचना देना जो उस अथवा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत अथवा प्रशासन की सामान्य स्थिति में प्राप्य नहीं है
(ग) ऐसी सूचना देना जिससे कोर्इ व्यापार, पेशा, औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा व्यावसायिक, गुप्त अथवा व्यापार प्रक्रिया अथवा सूचना प्रकट होती हो, जिसको प्रकट करना सार्वजनिक नीति (लोक आदेश) के प्रतिकूल हो।
4. इस अनुच्छेद के अनुसरण में यदि किसी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा किसी जानकारी को प्राप्त करने के लिए अनुरोध किया जाता है तो दूसरा संविदाकारी राष्ट्र अनुरोध की गर्इ जानकारी को प्राप्त करने के लिए अपनी सूचना एकत्र करने वाले उपायों का उपयोग करेगा, चाहे उस दूसरे राष्ट्र को अपने स्वयं के कर प्रयोजनों के लिए ऐसी सूचना की कोर्इ आवश्यकता न हो। पिछले वाक्य में अन्तर्निहित दायित्व पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अधीन है किन्तु किसी भी स्थिति में ऐसी सीमाओं का यह अर्थ नहीं होगा कि संविदाकारी राष्ट्र केवल इसलिए सूचना आपूर्ति करने से मना करते हैं कि ऐसी सूचना में उसका कोर्इ आंतरिक हित नहीं है।
5.किसी भी स्थिति में पैराग्राफ 3 के प्रावधानों का अर्थ केवल इसलिए सूचना की आपूर्ति करने से मना करने के लिए किसी संविदाकारी राष्ट्र को अनुमति देने के लिए नहीं लगाया जाएगा कि सूचना किसी बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, किसी एजेंसी या किसी न्यासी क्षमता में कार्यरत नामिती या व्यक्ति के पास है या यह किसी व्यक्ति के स्वामित्व हित से संबंधित है।
अनुच्छेद-27
राजनायिक एजेंट तथा वाणिज्यदूत संबंधी अधिकारी
इस समझौते में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के अंतर्गत अथवा विशेष करारों के प्रावधानों के अंतर्गत वाणिज्यिक अधिकारियों सहित सरकारी मिशन के सदस्यों के वित्तीय विशेषाधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 28
विविध नियम
1. इस समझौते के प्रावधान किसी भी स्थिति में घरेलू कानून और संबंधित कर परिहार या अपवंचन के उपायों के प्रावधानों को लागू करने से एक संविदाकारी राष्ट्र को नहीं रोकेंगे, चाहे निर्दिष्ट हो या नहीं।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र को समझौते के अंतर्गत लाभ लेना आवश्यक नहीं है यदि किसी संबंधित व्यक्ति का एक मुख्य उद्देश्य या मुख्य उद्देश्य कर अपवंचन या परिहार (तीसरे क्षेत्राधिकार के निवासी के अप्रत्यक्ष लाभ के लिए समझौते में मुहैया करार्इ गर्इ राहत को प्राप्त करने के उद्देश्य के साथ संधि-शॉपिंग के माध्यम से) के माध्यम से गैर-कराधान या घटाए गए कराधान के लिए है।
3. कानूनी उद्यमों के मामले जो वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां नहीं रखती, भी इस अनुच्छेद के प्रावधान के अंतर्गत आते हैं।
अनुच्छेद-29
प्रभावी प्रविष्टि
1. प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र इस समझौते की प्रभावी होने के लिए इसके कानून द्वारा आवश्यक प्रक्रिया की समाप्ति पर लिखित में अन्य को अधिसूचित करेगा।
2. यह समझौता इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 में संदर्भित अधिसूचनाओं के पत्र की तिथि पर प्रभावी होगा।
3. . समझौते के प्रावधान इसके बाद प्रभावी होंगे:
(क) हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में:
हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र कर के संदर्भ में, तिथि जिस पर समझौता प्रभावी हुआ, के बाद की 1 अप्रैल को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले निर्धारण के किसी वर्ष के लिए;
(ख) भारत में:
तिथि जिस पर समझौता प्रभावी हुआ, के बाद की 1 अप्रैल को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में।
अनुच्छेद-30
समापन
यह करार अनिश्चित समय तक लागू रहेगा जब तक कि इस करार के लागू होने की तारीख से लेकर पांच वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद शुरू होने वाले किसी कैलेण्डर वर्ष की समाप्ति से कम से कम छह महीने पहले लिखित में समापन का नोटिस देकर किसी भी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा इस करार को समाप्त किया सकता है। ऐसी स्थिति में यह करार निम्न के संबंध में निष्प्रभावी हो जाएगा:
(क) हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में:
हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के सदंर्भ में , तिथि जिस पर नोटिस दिया जाता हैं, उसके बाद की 1 अप्रैल को प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए;
(ख) भारत में;
जिस तिथि पर नोटिस दिया गया, उसके उसके बाद की 1 अप्रैल को या उसके बाद किसी वित्तीय वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में वर्ष के लिए ।
जिसके साक्ष्य में, इसके लिए विधिवत रूप से प्राधिकृत अधोहस्ताक्षरियों ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
19 मार्च, 2018 को हांगकांग में चीनी, अंग्रेजी, हिन्दी भाषाओं में प्रतिलिपि में किया गया और सभी पाठ समान रूप से प्रामाणिक हैं। अर्थ निरूपण में भिन्नता की स्थिति में अंग्रेजी पाठ प्रभावी माना जाएगा।
| कृते भारत गणराज्य सरकार | कृते हॉंग कांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र जनतांत्रिक चीन गणराज्य सरकार |
| हस्ताक्षर | हस्ताक्षर |
| गौतम बंबावले | (पॉल चॉन मो-पो) |
| भारतीय राजदूत, बीजिंग | वित्त सचिव, हांगकांग |
प्रोटोकाल
चीनी गणतंत्र की हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र की सरकार और भारतीय गणतंत्र के बीच आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान से बचने और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करते समय (समझौता) दोनों सरकारें निम्नलिखित प्रावधानों पर सहमत हुए है जो समझौते का आंतरिक भाग होगा:
1. समझौते के लिए, यह ज्ञात है कि हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के संबंध में शब्द "सामान्य निवासी" और "सामान्य प्रबंधित या नियंत्रित" का अर्थ है कि वह हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के कानून के अंतर्गत है जैसा उसके सामान्य सिद्धांतों को प्रभावित किए बिना समय समय पर संशोधित है।
उक्त के अलावा, समझौते के अनुच्छेद 4 (निवासी) के पैराग्राफ 1 के उप-पैराग्राफ (क) के वाक्यांश (i) के संदर्भ में यह ज्ञात है कि एक सामान्य निवासी हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में रहता है यदि व्यक्ति की वास्तविक उपस्थिति, स्थार्इ घर या हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में आदतन रहता है और उसके हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के साथ निजी और आर्थिक संबंध हों।
उक्त के अतिरिक्त, समझौते के अनुच्छेद 4 (निवासी) के पैराग्राफ 1 के उप-पैराग्राफ (क) के वाक्यांश (iii) और (iv) के संदर्भ में, यह समझा जाता है कि हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र से बाहर निगमित एक कंपनी या संस्थापित अन्य कोर्इ व्यक्ति हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में सामान्य रूप से प्रबंधित या नियंत्रित होता हो यदि इसके कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ प्रबंधन कर्मचारी कंपनी या व्यक्ति के लिए रणनीतिक, वित्तीय और संचलानात्मक नीतियों के लिए हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में दैनिक निर्णय लेते हो और हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में कंपनी का स्टाफ या व्यक्ति उन निर्णयों का करने के लिए आवश्यक दैनिक गतिविधियां करते हो।
2. समझौते के लिए, यह ज्ञात है कि हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के संबंध में शब्द "रहने का अधिकार" का अर्थ वह है जो हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत है जो उसके सामान्य सिद्धांतों को प्रभावित किए बिना समय समय पर संशोधित होता है।
3. समझौते के अनुच्छेद 2 (अंतनिर्हित कर) के पैराग्राफ 5 के संदर्भ में, यह ज्ञात है कि हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मामले में शब्द "जुर्माना या ब्याज" में अंतर्देशीय राजस्व अध्यादेश (हांगकांग के कानूनों का अध्याय 112) की धारा 82क के अंतर्गत "अतिरिक्त कर" और ऊपर से वसूली और गलती के कारणों द्वारा हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र कर को शामिल करते हुए कोर्इ राशि शामिल है।
4. समझौते के अनुच्छेद 3 (सामान्य परिभाषाओं) के पैराग्राफ 1 के उप-पैराग्राफ (क) के वाक्यांश (i) के संदर्भ में, यह ज्ञात है कि शब्द "कोर्इ स्थान जहां चीनी गणतंत्र के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र कर कानून लागू होते हैं" शेनझेन बे पोर्ट हांगकांग पोर्ट बे एरिया के साथ चीनी गणतंत्र के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र की सीमा के अंदर शामिल भूमि और समुद्र हेतु संदर्भित है
5. समझौते के अनुच्छेद 26 (सूचना का आदान-प्रदान) के संदर्भ में, यह समझा जाता है कि:
(क) सांझा की गर्इ सूचना किसी तीसरे क्षेत्राधिकार को नहीं बतार्इ जाएगी।
(ख) भारत के सक्षम प्राधिकारी निम्न को सूचना दे सकते हैं
(i) संसदीय समिति
(ii) सरकार द्वारा गठित विशेष जांच समूह (एसआर्इटी) और
(iii) लिखित में आपसी रूप से सहमत अन्य कोर्इ निरीक्षण निकाय
(ग) अनुरोधित संविदाकारी राष्ट्र उस तिथि के बाद किसी सूचना को प्रकट करेगा जिस पर समझौते के अंतर्गत आने वाले करों प्रभावी हुए, अभी तक सूचना उस बाद की तिथि पर एक वित्तीय वर्ष करयोग्य घटना के लिए प्रासंगिक है।
(घ) समझौते के अंतर्गत आने वाले करों के अतिरिक्त, इस अनुच्छेद के प्रावधान भी निम्नलिखित करों के लिए लागू होंगे जो भारत में प्रशासित और लागू है:
(i) संपत्ति कर
(ii) आबकारी शुल्क और कस्टम ड्यूटी
(iii) आबकारी और सेवा कर (जीएसटी) और
(iv) बिक्री और मूल्य वर्धित कर
6. यह समझा जाता है कि संविदकारी राष्ट्र किसी भी संविदकारी राष्ट्र के अनुरोध पर समझौते के प्रावधान का मूल्यांकन कर सकता है
जिसके साक्ष्य में, अधोहस्ताक्षरी, वहां विधिवत रूप से प्राधिकृत, ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस 19 मार्च, 2018 को हांगकांग में हिन्दी, चीनी और अंग्रजी भाषाओं में समान रूप से वास्तविक हैं, सभी पाठ समान रूप से प्रामाणिक हैं। अर्थ निरूपण में भिन्नता की स्थिति में अंग्रेजी पाठ प्रभावी माना जाएगा।

