आयकर विभाग
वित्त मंत्रालय, भारत सरकार
सामान्य कर बचाव नियम (जीएएआर)
परिचय
आयकर अधिनियम के अध्याय X-क में जीएएआर से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जिसका उद्देश्य आक्रामक कर से बचने की रणनीतियों पर अंकुश लगाना है। जीएएआर अन्य कर प्रावधानों के अलावा या उनके स्थान पर लागू होता है और यह मूल्यांकन वर्ष 2018-19 से प्रभावी है।
जीएएआर की प्रयोज्यता
धारा 95 कर अधिकारियों को यह अधिकार देती है कि वे किसी व्यवस्था को अनुचित परिहार व्यवस्था (आईएए) के रूप में घोषित कर सकते हैं, यदि इसका मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना है। जीएएआर वित्तीय वर्ष 2018-19 से लागू होता है और इसे किसी भी चरण या व्यवस्था के किसी भी हिस्से के लिए लागू किया जा सकता है।
अनुमेय परिहार व्यवस्था (धारा 96)
एक व्यवस्था एक अनुमेय परिहार व्यवस्था है यदि इसका मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना है, और यह:
यदि, किसी व्यवस्था का कोई भी कदम/हिस्सा मुख्य रूप से कर लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से है, तो पूरी व्यवस्था को कर लाभ के लिए माना जाएगा, जब तक कि निर्धारिती द्वारा इसके विपरीत साबित नहीं किया जाता है।
वाणिज्यिक सार का अभाव (धारा 97)
एक व्यवस्था को वाणिज्यिक सार की कमी माना जाता है यदि वह:
ध्यान दें : यह निर्धारित करते समय कि क्या किसी व्यवस्था में वाणिज्यिक सामग्री की कमी है, इसकी अवधि, कर भुगतान, या निकास मार्ग जैसे कारक प्रासंगिक हो सकते हैं लेकिन निर्णायक नहीं हैं।
आईएए (धारा 98) के परिणाम
यदि, कोई व्यवस्था आईएए के रूप में आयोजित की जाती है, तो कर परिणामों का निर्धारण उचित समझे जाने के अनुसार किया जाएगा, और इसमें शामिल हो सकते हैंः
उपरोक्त उद्देश्य के लिए, (1) इक्विटी को ऋण के रूप में माना जा सकता है या इसके विपरीत, (2) पूंजी प्राप्तियों/संचय को राजस्व के रूप में माना जा सकता है या इसके विपरीत, और (3) किसी भी व्यय, कटौती, राहत, या छूट को फिर से वर्गीकृत किया जा सकता है।
संबद्ध व्यक्ति एवं आश्रयदाता पक्ष का व्यवहार (धारा 99)
कर लाभ के निर्धारण हेतु, (i) संबद्ध व्यक्तियों को एक माना जा सकता है; (ii) किसी भी समायोजित पक्षकार को अनदेखा किया जा सकता है; (iii) समायोजित और अन्य पक्षकारों को एक माना जा सकता है; (iv) निगमित संरचना को नजरअंदाज किया जा सकता है (आर-पार दृष्टिकोण)।
जीएएआर लागू करने की प्रक्रिया (धारा 144खक)
आयकर नियमों के तहत प्रासंगिक नियम