आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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अध्याय शीर्षक

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अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2015

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(धारा 2 देखिए)

भाग 1

आय-कर

पैरा क

(I) इस पैरा की मद (II) और मद (III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो ऐसी दशा नहीं है, जिसमें इस भाग का कोर्इ अन्य पैरा लागू होता है,-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 2,50,000 रु. से अधिक नहीं है   कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 2,50,000 रु. से अधिक है, किंतु 5,00,000 रु. से अधिक नहीं है   उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 2,50,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(3) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु. से अधिक नहीं है   2,50,000 रु. धन उस रकम का 20 प्रतिशत् जिससे कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक है   1,25,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत् जिससे कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;

 

(II) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक आयु का, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 3,00,000 रु. से अधिक नहीं है   कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 3,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 5,00,000 रु. से अधिक नहीं है   उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(3) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु. से अधिक नहीं है   20,000 रु. धन उस रकम का 20 प्रतिशत जिससे कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक है   1,20,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत् जिससे कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;

(III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक नहीं है   कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु. से अधिक नहीं है   उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(3) जहां कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक है   1,00,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत् जिससे कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;

आय-कर पर अधिकार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दु अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

पैरा ख

प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में,-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 10,000 रु. से अधिक नहीं है   कुल आय का 10 प्रतिशत;
(2) जहां कुल आय 10,000 रु. से अधिक है, किंतु 20,000 रु. से अधिक नहीं है   1,000 रु. धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(3) जहां कुल आय 20,000 रु. से अधिक है   3,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत जिससे कुल आय 20,000 रु. से अधिक हो जाती है;

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है ऐसी आय पर आयकर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम १ करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

पैरा ग

प्रत्येक फर्म की दशा में,-

आय-कर की दर

संपूर्ण कुल आय पर   30 प्रतिशत।

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

पैरा घ

प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में,-

आय-कर की दर

संपूर्ण कुल आय पर   30 प्रतिशत।

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112  के उपबधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दस प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

पैरा ड़

किसी कंपनी की दशा में,-

आय-कर की दर

I. देशी कंपनी की दशा में   कुल आय का 30 प्रतिशत।
II. देशी कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में,-    
  (i) कुल आय क उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में है,-    
    (क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व; अथवा    
    (ख) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान से तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए प्राप्त फीस,    
  और जहां, ऐसा करार दोनों में से किसी भी दशा में, केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है   50 प्रतिशत;
   (i) कुल आय के अतिशेष पर, यदि कोर्इ हो   40 प्रतिशत।

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में निम्नलिखित दर से,-

(i) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,-

(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से ; और

(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के दश प्रतिशत की दर से;

(ii) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-

(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से ; और

(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से,

परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी:

परंतु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से, जो दस करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

भाग 2

कतिपय दशाओं में स्रोत पर कर की कटौती की दरें

ऐसी प्रत्येक दशा में, जिसमें आय-कर अधिनियम की धारा 193, धारा 194, धारा 194क, धारा 194ख, धारा 194खख, धारा 194घ, धारा 194ठखक और धारा 195 के उपबंधों के अधीन कर की कटौती प्रवृत्त दरों से की जानी है, आय में से कटौती निम्नलिखित दरों पर कटौती के अधीन रहते हुए की जाएगी:-

      आय-कर की दर
1. कंपनी से भिन्न व्यक्ति की दशा में,-    
  (क) जहां व्यक्ति भारत में निवासी है,-    
    (i)  "प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
    (ii) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
    (iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
    (iv) बीमा कमीशन के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
    (v)  निम्ललिखित पर संदेय ब्याज के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
      (अ) किसी केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी स्थानीय प्राधिकरण या निगम द्वारा या उसकी ओर से धन के लिए पुरोधृत किए गए कोर्इ डिबेंचर या प्रतिभूतियां;    
      (आ) किसी कंपनी द्वारा पुरोधृत किए गए कोर्इ डिबेंचर, जहां ऐसे डिबेंचर, भारत में मान्यताप्राप्त किसी स्टाक एक्सचेंज में प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसार सूचीबद्ध हैं;    
      (इ) केंद्रीय या राज्य सरकार की कोर्इ प्रतिभूति    
    (vi) किसी अन्य आय पर   10 प्रतिशत;
  (ख)  जहां व्यक्ति भारत में निवासी नहीं है,-    
    (i) किसी अनिवासी भारतीय की दशा में,-    
      (अ) विनिधान से किसी आय पर   20 प्रतिशत;
      (आ) धारा 115ड़ या धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
      (इ) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर   15 प्रतिशत;
      (र्इ) दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर (जो धारा 10 के खंड (36), (33) खंड और खंड (38) निर्दिष्ट अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं हैं)   20 प्रतिशत;
      (उ) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा उधार लिए गए धन या सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उपगत ऋण पर संदेय व्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं हैं)   20 प्रतिशत;
     

(ऊ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्याधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय-कर अधिनियम की धारा 155क की उपधारा (1क) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्ही अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है

  10 प्रतिशत;
     

(ऋ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [जो उपमद (ख)(i)(ऊ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है], आय पर

  10 प्रतिशत;
     

(ए) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर

  10 प्रतिशत;
      (ऐ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के खेल से जीत के रूप में आय पर 30 प्रतिशत; (ओ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
      (औ) अन्य सम्पूर्ण आय पर   30 प्रतिशत;
    (ii) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में,-    
     

(अ) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है)

  20 प्रतिशत;
      (आ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्ही अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है,   10 प्रतिशत;
      (इ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां यह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [जो उपमद (ख)(ii)(आ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है], आय पर   10 प्रतिशत;
      (र्इ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, वहां उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा प्रत्येक तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
      (उ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर 30 प्रतिशत   30 प्रतिशत;
      (ऊ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
      (ऋ) धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर   15 प्रतिशत;
      (ए) धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
      (ऐ) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [जो धारा 10 के खंड (33), खंड (36) और खंड (38) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है]    20 प्रतिशत;
      (ओ) अन्य सम्पूर्ण आय पर   30 प्रतिशत;
2. किसी कंपनी की दशा में,-    
  (क) जहां कंपनी देशी कंपनी है,-    
    (i)  "प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
    (ii) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
    (iii)  घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
    (iv)  किसी अन्य आय पर   10 प्रतिशत;
  (ख) जहां कंपनी देशी कंपनी नहीं है,-    
    (i)  लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
    (ii)  घुड़दोड़ से जीत के रूप में आय पर   30 प्रतिशत;
    (iii) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर (जो धारा 194ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है)   20 प्रतिशत;
    (iv)

 

उसके द्वारा 31 मार्च, 1976 मे पश्चात् सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामित्त्व के रूप में आय पर जहां भारत में निवासी किसी व्यक्ति को ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्याधिकार के संबंध में अथवा आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा (1क) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट किसी कंप्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है

  10 प्रतिशत;
    (v)

 

 उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर [जो उपमद (ख)(iv) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है]-

   
      (अ) जहां करार 31 मार्च, 1961 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है   50 प्रतिशत;
      (आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है   10 प्रतिशत;
    (vi)

 उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा, तकनीकी सेवाओं के लिए, संदेय फीस के रूप में आय पर-

   
      (अ) जहां करार 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है   50 प्रतिशत;
      (आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है   10 प्रतिशत;
    (vii)  धारा 111क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर    15 प्रतिशत;
    (viii) धारा 112 की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर   10 प्रतिशत;
    (ix) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [जो धारा 10 के खंड (33), खंड (36) और खंड (38) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है]-    20 प्रतिशत;
    (x)  किसी अन्य आय पर    40 प्रतिशत;

 स्पष्टीकरण - इस भाग की मद 1(ख)(i) के प्रयोजन के लिए, "विनिधान से आय" और "अनिवासी भारतीय" के वही अर्थ हैं, जो आय-कर अधिनियम के अध्याय 12क में उनके हैं।

आय-कर पर अधिभार

निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कटौती की गर्इ आय-कर की रकम में,-

(i) इस भाग की मद 1 के उपबंधों के अनुसार, संघ के प्रयोजनों के लिए, प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दु अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति या सहकारी सोसाइटी या फर्म या स्थानीय प्राधिकारी, जो अनिवासी है, की दशा में, जहां सदन या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग, एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से;

(ii) इस भाग की मद 2 के उपबंधों के अनुसार, संघ के प्रयोजनों के लिए, किसी देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-

(क) जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग, एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से;

(ख) जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से, परिकलित पिछले योग में।

भाग 3

कतिपय दशाओं में आय-कर के प्रभारण, "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय से आय-कर की कटौती और "अग्रिम कर" की संगणना के लिए दरें

उन दशाओं में, जिनमें आय-कर प्रवृत्त दर या दरों से, आय-कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है अथवा "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय में से उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन काटा जाना है या उस पर संदाय किया जाना है अथवा जिसमें उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना की जानी है, यथास्थिति, ऐसा आय-कर या "अग्रिम कर" (जो आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115´ञख या धारा 115´ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चख या धारा 161 की उपधारा (1क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167ख के अधीन, उस अध्याय या धारा में विनिर्दिष्ट दरों पर कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में "अग्रिम कर" नहीं है या धारा 115क या धारा 115कख या धारा 115कग या धारा 115कगक या धारा 115कघ या धारा 115ख या धारा 115खख या धारा 115खखक या धारा 115खखग या धारा 115खखघ या धारा 115खखड़ या धारा 115ड़ या धारा 115´ञख या धारा 115´ञग के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में ऐसे "अग्रिम कर" पर अधिभार नहीं है) निम्नलिखित दर या दरों स प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगा:-

पैरा क

(I) इस पैरा की मद (II) और मद (III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो ऐसी दशा नहीं है, जिसे इस भाग का कोर्इ अन्य पैरा लागू होता है,-

आय-कर की दरें    
(1) जहां कुल आय 2,50,000 रु. से अधिक नहीं है   कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 2,50,000 रु. से अधिक है, किंतु 5,00,000 रु. से अधिक नहीं है   उस रकम का 10 प्रतिशत, जिसके कुल आय 2,50,000 रु. से अधिक हो जाती है;
 (3) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु. से अधिक नहीं है   25,000 रु. धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक है   1,25,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक हो जाती है।

(II) प्रत्येक ऐऐ व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक का, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 3,00,000 रु. से अधिक नहीं है   कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 3,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 5,00,000 रु. से अधिक नहीं है   उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
 (3) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु. से अधिक नहीं है   20,000 रु. धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक है   1,20,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक हो जाती है!

(III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक का है-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है   कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक है, किन्तु 10,00,000 रु. से अधिक नहीं है   उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु. से अधिक हो जाती है;
(3) जहां कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक है   1,00,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु. से अधिक हो जाती है।

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम को, ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

पैरा ख

प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में,-

आय-कर की दरें

(1) जहां कुल आय 10,000 रु. से अधिक है   कुल आय का 10 प्रतिशत;
(2) जहां कुल आय 10,000 रु. से अधिक है, किन्तु 20,000 रु. से अधिक नहीं है   1,000 रु. धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,000 रु. से अधिक हो जाती है।
(3) जहां कुल आय 20,000 रु. से अधिक है   3,000 रु. धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 20,000 रु. से अधिक हो जाती है।

आय-कर पर अधिकार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगी।

पैरा ग

प्रत्येक फर्म की दशा में,-

आय-कर की दर

संपूर्ण कुल आय पर   30 प्रतिशत।

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम को, ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड, रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगीे।

पैरा घ

प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में,-

आय-कर की दर

संपूर्ण कुल आय पर   30 प्रतिशत।

 आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु ऊपर उल्लिखित स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड, रुपए की कुल रकम पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, अधिक नहीं होगीे।

पैरा ड़

कंपनी की दशा में-

आय-कर की दरें

I.  देशी कंपनी की दशा में   कुल आय का 30 प्रतिशत;
II.  देशी कंमनी से भिन्न कंपनी की दशा में,-    
  (i)  कुल आय के उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में हैं,-     
   

 (क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व; या

   
   

(ख) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए फीस,

  50 प्रतिशत
और जहां, ऐसा करार दोनों में से प्रत्येक दशा में, केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है    
(ii) कुल आय के अतिशेष पर यदि कोर्इ हो   40 प्रतिशत

आय-कर पर अधिभार

इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, निम्नलिखित दर से,-

(i) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,-

(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर से सात प्रतिशत की दर से; और

(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के बारह प्रतिशत की दर से;

(ii) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-

(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के दो प्रतिशत की दर से; और

(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:

परंतु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो एक करोड़ रुपए से अधिक है:

परंतु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी जो दस करोड़ रुपए से अधिक है।

भाग 4

[धारा 2(13)(ग) देखिए]

शुद्ध कृषि-आय की संगणना के नियम

नियम 1-आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1क) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि-आय इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन "अन्य स्रोतों से आय" शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय हो और उस अधिनियम की धारा 57 से धारा 59 के उपबंध, जहां तक हो सके, तदनुसार लागू होंगे:

परंतु धारा 58 की उपधारा (2) इस उपांतरण के साथ लागू होगी कि उसमें धारा 40क के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत धारा 40क की उपधारा (3) और उपधारा (4) के प्रति निर्देश नहीं हैं।

नियम 2-आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1क) के उपखंड (ख) या उपखंड (ग) में निर्दिष्ट भाटक या आमदनी के पाने वाले को या खेतिहर को या वस्तु रूप में भाटक के पाने को निवास-गृह के रूप में आवश्यकता हो) इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय हो और आय-कर अधिनिमय की धारा 30, धारा 31, धारा 36, धारा 37, धारा 38, धारा 40, धारा 40क (उसकी उपधारा (3) और उपधारा (4) से भिन्न) धारा 41, धारा 43, धारा 43क, धारा 43ख, और धारा 43ग के उपबंध, जहां तक हो सके तदनुसार लागू होंगे।

नियम 3-आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1क) के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि-आय, जो ऐसी आय है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्न होती है, जिसकी उक्त उपखंड (ग) में निर्दिष्ट भाटक या आमदनी के पाने वाले को या खेतिहर को या वस्तु रूप में भाटक के पाने वाले को निवास-गृह के रूप में आवश्यकता हो, इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन "गृह-संपत्ति से आय" शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय हो और उस अधिनियम की धारा 23 से धारा 27 के उपबंध, जहां तक हो सके, तदनुसार लागू होंगे।

नियम 4-इन नियमों के किन्हीं अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, उस दशा में-

(क) जहां निर्धारिती को भारत में उसके द्वारा उपजार्इ गर्इ और विनिर्मित चाय के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय, आय-कर नियम, 1962 के नियम 8 के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के साठ प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि-आय, समझा जाएगा;

(ख) जहां निर्धारिती को, भारत में उसके द्वारा उगाए गए रबड़ के पौधों से उसके द्वारा विनिर्मित या प्रसंस्कृत तकनीकी रूप से विनिर्दिष्ट ब्लाक रबड़ के संेंट्रीफ्यूज लेटेक्स या सिनेक्स या क्रेप्स पर आधारित लेटेक्स (जैसे पेल लेटेक्स क्रेप) या ब्राउन क्रेप (जैसे एस्टेट ब्राउन क्रेप, रिमिल्ड क्रेप, रिमिल्ड क्रेप, स्माक्ड ब्लेन्केट क्रेप बार्क क्रेप) के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय, आय-कर नियम, 1962 के नियम 7क के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के पैंसठ प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि-आय, समझा जाएगा;

(ग) जहां निर्धारिती को, भारत में उसके द्वारा उपजार्इ गर्इ और विनिर्मित कॉफी के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय, आय-कर नियम, 1962 के नियम 7ख के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के, यथास्थिति, साठ प्रतिशत या पचहत्तर प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि-आय, समझा जाएगा।

नियम 5-जहां निर्धारिती किसी ऐसे व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय (हिन्दू अविभक्त कुटुंब, कंपनी या फर्म से भिन्न) का सदस्य है, जिसकी पूर्ववर्ष में आय-कर अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य या तो कोर्इ आय नहीं है या जिसकी कुल आय किसी व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय (हिंदू अविभक्त कुटुंब, कंपनी या फर्म से भिन्न) की दशा में कर से प्रभार्य न होने वाली अधिकतम रकम से अधिक नहीं है किंतु जिसकी कोर्इ कृषि-आय भी है वहां उस संगम या निकाय की कृर्षि-आय या हानि, इन नियमों के अनुसार संगणित की जाएगी और इस प्रकार संगणित कृर्षि-आय या हानि में निर्धारिती के अंश को, निर्धारिती की कृर्षि-आय या हानि समझा जाएगा।

नियम 6-जहां कृर्षि-आय के किसी óोत के संबंध में पूर्ववर्ष के लिए संगणना का परिणाम हानि है, वहां ऐसी हानि, कृर्षि-आय के किसी अन्य óोत से उस पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की आय के प्रति, यदि कोर्इ हो, मुजरा की जाएगी:

परंतु जहां निर्धारिती किसी व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय का सदस्य है और, यथास्थिति, संगम या निकाय की कृर्षि-आय में निर्धारिती का अंश हानि है, वहां ऐसी हानि, कृर्षि-आय के किसी अन्य óोत से निर्धारिती की किसी आय के प्रति मुजरा नहीं की जाएगी।

नियम 7-राज्य सरकार द्वारा कृर्षि-आय पर उद्गृहीत किसी कर मद्धे निर्धारिती द्वारा संदेय राशि की, कृर्षि-आय की संगणना करने में, कटौती की जाएगी।

नियम 8-(1) जहां निर्धारिती की, 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के सुसंगत पूर्ववर्ष में कोर्इ कृषि-आय है और 2007 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2009 के अपै्रल के प्रथम दिन या 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अपै्रल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वषार्ैं में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि-आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि हैं, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए,-

(i) 2007 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(ii) 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(iii) 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(iv) 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(v) 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(vi) 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(vii) 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(viii) 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि-आय के प्रति मुजरा की जाएगी।

(2) जहां निर्धारिती की, 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के सुसंगत पूर्ववर्ष में या, यदि आय-कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर, आय-कर उस पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है तो, ऐसी अन्य अवधि में, कोर्इ कृषि-आय है और 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2010 के अपै्रल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अपै्रल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वषार्ैं से सुसंगत प्रर्ववषार्ैं में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि-आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि हैं, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (10) के प्रयोजनों के लिए,-

(i) 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(ii) 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(iii) 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(iv) 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(v) 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(vi) 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(vii) 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिणाम तक, यदि कोर्इ हो, जिस तक ऐसी हानि 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गर्इ है;

(viii) 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि,

2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा की जायगी।

(3) जहां किसी óोत से कृषि-आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति का, कोर्इ अन्य व्यक्ति, विरासत से भिन्न रीति से, उसी हैसियत में उत्तराधिकारी हो गया है, वहां उपनियम (1) या उपनियम (2) की कोर्इ बात, हानि उठाने वाल व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को, यथास्थिति, उपनियम (1) या उपनियम (2) के अधीन मुजरा का हकदार नहीं बनाएगी।

(4) इस नियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी हानि, जिसे निर्धारण अधिकारी द्वारा इन नियमों के या या वित्त अधिनियम, 2007 (2007 का 22) की पहली अनुसुची या वित्त अधिनियम, 2008 (2008 का 18) की पहली अनुसुची या वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2009 (2009 का 33) की पहली अनुसुची या वित्त अधिनियम, 2010 (2010 का 14) की पहली अनुसुची या वित्त अधिनियम, 2011 (2011 का 8) की पहली अनुसुची या वित्त अधिनियम, 2012 (2012 का 23) की पहली अनुसुची या वित्त अधिनियम, 2013 (2013 का 17) की पहली अनुसुची या वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2014 (2014 का 25) की पहली अनुसुची में अंतर्विष्ट नियमों के उपबंधों के अधीन अवधारित नहीं किया गया है, यथास्थिति, उपनियम (1) या उपनियम (2) के अधीन मुजरा नहीं की जाएगी।

नियम 9-जहां इन नियमों के अनुसार की गर्इ संगणना का अंतिम परिणाम हानि है, वहां इस प्रकार संगणित हानि पर ध्यान नहीं दिया जाएगा और शुद्ध कृषि-आय को शून्य समझा जाएगा।

नियम 10-आय-कर अधिनियम के निर्धारण कीे प्रक्रिया से संबंधित उपबंध (जिनके अंतर्गत आय के पूर्णांकन से संबंधित हानि धारा 288क के उपबंध भी है) आवश्यक उपांतरणों सहित, निर्धारिती की शुद्ध कृषि-आय की संगणना के संबध में उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे वे कुल आय के निर्धारण के संबंध में लागू होते हैं।

नियम 11-निर्धारिती की शुद्ध कृषि-आय की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, निर्धारण अधिकारी को वही शक्तियां होंगी, जो उसे कुल आय के निर्धारण के प्रयोजनों के लिए आय-कर अधिनियम के अधीन हैं।

फ़ुटनोट