आयकर विवरणी दाखिल करना
करदाता को आयकर विभाग को उसकी कर योग्य आय/हानि के ब्यौरे का संवाद करना होगा। ये ब्यौरे आयकर विभाग को आय की विवरणी के रूप् में संवादित हैं। इस भाग में, आप आय की विवरणी सुसज्जित करने (अर्थात दाखिल करने) की प्रक्रिया से सम्बंधित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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आयकर विवरणी दाखिल करना
करदाता को अपनी कर योग्य आय/हानि का विवरण आयकर विभाग को बताना होगा। ये विवरण आय की विवरणी के रूप में आयकर विभाग को सूचित किए जाते हैं। इस भाग में आप आय की विवरणी प्रस्तुत करने (यानी दाखिल करने) से संबंधित विभिन्न प्रावधानों और प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस भाग में चर्चा किए गए प्रावधान निर्धारण वर्ष 2026-27, यानी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आय की विवरणी प्रस्तुत करने के लिए लागू हैं।
आयकर कानून के तहत कौन-कौन से निर्धारित विवरणी प्रपत्र हैं?
आयकर कानून के तहत, विभिन्न श्रेणी के करदाताओं के लिए आयकर विवरणी के विभिन्न फार्म निर्धारित किए गये हैं। इन विवरणी फार्म को आईटीआर फार्म (आयकर विवरणी फार्म) के रूप में जाना जाता है।
निम्न तालिका विवरणी प्रपत्रों का एक संक्षिप्त विवरण देती है और यह विवरणी प्रपत्रों पर विस्तृत चर्चा नहीं है। आईटीआर प्रपत्रों की प्रयोज्यता/अनुप्रयोज्यता के अधिक प्रावधानों के लिए, पाठकों को बाद के भाग में इस विषय में शामिल प्रत्येक आईटीआर प्रपत्र पर चर्चा को पढ़ना चाहिए।
निर्धारण वर्ष 2025-26 के लिए आयकर कानून के तहत निर्धारित विवरणी के फॉर्म
| विवरणी फार्म | संक्षिप्त विवरण |
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आईटीआर-1 |
सहज के रूप में भी जाना जाता है, एक सामान्य रूप से निवासी व्यक्ति के लिए लागू होता है जिसकी वेतन या पेंशन आय या एक घर की संपत्ति से आय होती है (अग्रणी हानि या हानि को आगे ले जाने का मामला नहीं) या अन्य स्रोतों से आय (लॉटरी जीत और आय से आय नहीं) दौड़ के घोड़े और विशेष दरों पर कर के दायरे में आने वाली आय)। हालांकि, एक व्यक्ति जो किसी कंपनी में निदेशक है या किसी गैर-सूचीबद्ध कंपनी के इक्विटी शेयर रखता है, आईटीआर -1 का उपयोग करने के लिए पात्र नहीं होगा। इसके अलावा, आईटीआर-1 उस करदाता के लिए उपलब्ध नहीं होगा, जिसके मामले में धारा 194ढ के तहत नकद निकासी पर कर काटा गया हो या योग्य स्टार्ट-अप द्वारा आवंटित ईएसओपी के संबंध में कर को स्थगित कर दिया गया हो। टिप्पणी : आईटीआर-1 को दाखिल किया जा सकता है यदि निर्धारिती को धारा 112क के अंतर्गत रू. 1.25 लाख तक की दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति होती हो और कोई अग्रेषित या आगे लाई गई पूंजीगत हानि न हो। |
| आईटीआर-2 | यह शीर्षक 'व्यापार या पेशे से लाभ व धनप्राप्ति' के अंतर्गत आयकर हेतु वसूले जाने वाली आय न रखने वाले व्यक्ति या हिंदु अविभाजित परिवार के लिए है। |
| आईटीआर-3 | यह एक व्यक्ति या एक हिंदू अविभाजित परिवार पर लागू होता है जिनकी शीर्षक व्यपार या पेशे के अंतर्गत कर हेतु कोई वसूलनीय आय है |
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आईटीआर-4 |
इसे सुगम के नाम से भी जाना जाता है, यह धारा 44कघ/44कघक/ 44कड़ की प्रकल्पित कराधान योजना चुनने वाले व्यक्तियों और एचयूएफ पर लागू होता है। टिप्पणी : आईटीआर-1 को दाखिल किया जा सकता है यदि निर्धारिती के पास रू. 1.25 लाख तक धारा 112क के अंतर्गत दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्तियां हैं
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| आईटीआर-5 | यह फार्म ऐसे व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है जो एक फर्म, एलएलपी, एओपी, बीओआई, धारा 2 (31)(vii) में संदर्भित कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति, सहकारी समिति व स्थानीय प्राधिकरण निजी स्वनिर्णयगत न्यास, सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत सोसाइटी, आईटीआर 7 को दाखिल करने के योग्य न्यासों को छोड़कर न्यास, मृतक व्यक्ति की संपत्ति, एक दिवालिया व्यक्ति की संपत्ति, व्यपारिक न्यास और निवेश कोष है। हालांकि, जिस व्यक्ति को धारा 139(4क)="javascript:ShowMainContent('अधिनियम', 'CMSID', '102520000000140374', '');">139(4क) या 139 (4ख) या 139 (4ग) या 139 (4घ) के तहत (अर्थात, ट्रस्ट, राजनीतिक दल, संस्थाएं, कॉलेज आदि) आयकर विवरणी दाखिल करना आवश्यक है, इस फार्म का उपयोग नहीं करेगा। |
| आईटीआर-6 | यह एक कंपनी, धारा 11 के तहत छूट का दावा करने वाली कंपनी के अलावा (धर्मार्थ/धार्मिक न्यास धारा 11 के तहत छूट का दावा कर सकते हैं) के लिए लागू है। |
| आईटीआर-7 | यह कंपनियों सहित उन व्यक्तियों पर लागू है जिनके लिए धारा 139(4क) या धारा 139(4ख) या धारा 139(4ग) या धारा 139(4घ) (अर्थात, ट्रस्ट, राजनीतिक दल, संस्थान, कॉलेज आदि) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक है। |
| आईटीआर-यू | यह किसी व्यक्ति के लिए प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अंत से चौबीस महीने के भीतर आय को अद्यतन करने के लिए लागू होता है |
| आईटीआर-V | यह आयकर विवरणी दाखिल करने की पावती है। |
• आयकर विवरणी दाखिल करने की विधाएं
आयकर विवरणी निम्न विधाओं में से किसी के भी द्वारा आयकर विभाग को प्रस्तुत की जा सकती है:-
• एक कागज फार्म में विवरणी प्रस्तुत करने के द्वारा
• डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करने के द्वारा,।
• इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक रूप से विवरणी में डाटा के हस्तांतरण द्वारा
• इलेक्ट्रॉनिक रूप में विवरणी प्रस्तुत करने और उसके बाद विवरणी पत्र आईटीआर-V में विवरणी के सत्यापन को जमा करना।
टिप्पणी :
जहां आय की विवरणी डिजिटल हस्ताक्षर के बिना दिए गए तरीके में प्रस्तुत की जाती है तो करदाता को प्रपत्र - V की दो मुद्रित प्रतियां भेजनी चाहिए। आईटीआर की एक प्रति जो करदाता द्वारा विधिवत तौर पर हस्ताक्षरित हो आयकर विभाग-सीपीसी, पोस्ट बॉक्स नं. 1, इलैक्ट्रानिक सिटि पोस्ट ऑफिस, बैंगलौर-560100 (कर्नाटक) को समान्य डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाना है (इस संबंध में निर्दिष्ट अवधि के अंदर यानी 30 दिन)। अन्य प्रति करदाता अपने रिकॉर्ड के लिए अपने पास रख सकता है।
• विवरणी को प्रस्तुत करने की कौनसी विधि किसके लिए लागू होती है ?
लागू होने वाली आय की विवरणी नीचे तालिका के कॉलम (ii) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की जाएगी जिसके लिए कॉलम (iii) में निर्दिष्ट शर्तें लागू होती है, वहां कॉलम (iv) में निर्दिष्ट तरीके में
तालिका
| क्र.सं. | व्यक्ति | शर्ते | आय की विवरणी की प्रस्तुति का तरीका |
| (i) | (ii) | (iii) | (iv) |
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1 |
व्यक्ति या हिंदु अवभिजित परिवार |
(क) अधिनिमय की धारा 44कख के अंतर्गत अंकेक्षित किए जाने वाले खाते |
(क) डिजिटल हस्ताक्षर के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप से; या (ख) इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड के तहत रिटर्न में डेटा को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित करना |
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(ख) एक अति वरिष्ठ नागरिक (जिसकी आयु पिछले वर्श के दौरान किसी भी समय 80 वर्ष या उससे अधिक है) जो आईटीआर 1 या आईटीआर 4 में विवरणी प्रस्तुत करता है |
(क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर या (ख) इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत विवरणी में इलैक्ट्रानिक तौर पर डेटा का हस्तांतरण (ग) इलैक्ट्रानिक तौर पर विवरणी में डेटा का हस्तांतरण और उसके बाद प्रपत्र आईटीआर-V में विवरणी का सत्यापन प्रस्तुत करना या (घ) कागजी प्रारूप
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(ग) किसी अन्य मामले में |
(क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर या (ख) इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत विवरणी में इलैक्ट्रानिक तौर पर डेटा का हस्तांतरण (ग) इलैक्ट्रानिक तौर पर विवरणी में डेटा का हस्तांतरण और उसके बाद प्रपत्र आईटीआर-V में विवरणी का सत्यापन प्रस्तुत करना |
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| 2 | कंपनी | सभी मामलों में | डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर |
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3 |
प्रपत्र आईटीआर-7 में विवरणी की प्रस्तुति करने वाला व्यक्ति |
(क) राजनीतिक दल के मामले में (ख) किसी अन्य मामले में
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डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर
(क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर या (ख) इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत विवरणी में इलैक्ट्रानिक तौर पर डेटा का हस्तांतरण (ग) इलैक्ट्रानिक तौर पर विवरणी में डेटा का हस्तांतरण और उसके बाद प्रपत्र आईटीआर-V में विवरणी का सत्यापन प्रस्तुत करना |
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4 |
फर्म या सीमित देयता सांझेदारी या कोई अन्य व्यक्ति (उक्त क्र.सं. 1 से 3 में निर्दिष्ट व्यक्ति को छोड़कर) जिसे आईटीआर-5 में विवरणी को प्रस्तुत करना आवश्यक है |
(क) खाते जिनको अधिनियम की धारा 44कख के अंतर्गत अंकेक्षित किया जाना आवश्यक है
(ख) किसी अन्य मामले में |
डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर
(क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक तौर पर या (ख) इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत विवरणी में इलैक्ट्रानिक तौर पर डेटा का हस्तांतरण (ग) इलैक्ट्रानिक तौर पर विवरणी में डेटा का हस्तांतरण और उसके बाद प्रपत्र आईटीआर-V में विवरणी का सत्यापन प्रस्तुत करना |
• क्या आय की विवरणी के साथ किसी दस्तावेज को संलग्न करना आवश्यक है ?
आईटीआर विवरणी फार्म में कम संलग्नक लगाने होते हैं और, इसलिए, करदाता को आय विवरणी (चाहे मानविक रूप में दाखिल किया जाय या इलेक्ट्रॉनिक रूप में) के साथ किसी भी तरह का दस्तावेज (निवेश प्रमाण, टीडीएस सर्टिफिकेट आदि) संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, इन दस्तावेजों को करदाता द्वारा सुरक्षित रखा जाना चाहिए और जांच, निर्धारण आदि जैसी स्थितियों में कर अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
जैसा कि ऊपर चर्चा की गई है, आयकर विवरणी के साथ कोई दस्तावेज संलग्न किया जाना आवश्यक नहीं है, हालांकि उन मामलों में जिनमें, एक करदाता जिसके लिए धारा 10(23ग)(iv), 10(23ग)(v), 10(23ग)(vi), 10(23ग)(viक), 10क, 10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक, 80-झख, 80-झग, 80-झघ, 80ञञकक, 80ठक, 92ड़, 115ञख या 115फब के तहत लेखापरीक्षा की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है, इलेक्ट्रॉनिक रूप से आयकर विवरणी इलेक्ट्रॉनिक रूप में आयकर विवरणी दाखिल करने की तारीख को या उससे पहले प्रस्तुत करेगा।
• कौन आईटीआर - 1 (सहज) का प्रयोग कर सकता है ?
विवरणी फॉर्म आईटीआर-1 (सहज) उस व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है जिसकी कुल आय में निम्न शामिल है:
(1) वेतन/पेंशन से आय; या
(2) एक गृह संपत्ति से आय, (उन मामलों को छोड़कर जहां नुकसान पिछले साल से आगे लाया जाता है या हानि अग्रेषित की जाती है); या
(3) अन्य स्रोतों से आय (लॉटरी जीत व घुड़दौड़ से आय को छोड़कर) विशेष दर पर कर हेतु वसूलनीय है।
इसके अलावा, उन मामलों में जहां पति/पत्नी, नाबालिग बच्चे आदि जैसे अन्य व्यक्ति की आय को, करदाता की आय के साथ जोड़ जाना है, यह विवरणी फॉर्म में केवल तभी प्रयोग किया जा सकता है जब ऐसी आय उपरोक्त श्रेणियों में से किसी एक के तहत आती हो।
• आईटीआर ब्यौरा
• आईटीआर-1 (सहज) वेतन से आय, एक गृह संपत्ति, अन्य स्त्रोतों (ब्याज आदि) से आय वाले व्यक्तियों के लिए और जिसकी रू. 50 लाख तक कुल आय हो
आईटीआर-1 (सहज) कौन प्रयोग नही कर सकता ?
विवरणी फॉर्म आईटीआर - 1 (सहज) व्यक्तियों द्वारा प्रयोग नहीं किया जा सकता :
• जो एक अनिवासी है या सामान्य निवासी नहीं है
• जो एक कंपनी का निदेशक है
• जिसकी कुल आय रू. 50 लाख से अधिक है
• जो एक से अधिक गृह संपत्ति से आय प्राप्त करता है
• जिसने पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय असूचीबद्ध ईक्विटी शेयरों को प्राप्त किया है
• जो पेटेंट या बही खातों से रॉयल्टी के संदर्भ में धारा 80थथख या धारा धधख के अंतर्गत कटौती का दावा करता है
• वह एक व्यक्ति जिसके मामले में कर धारा 194द के अंतर्गत काटा गया है
• वह एक व्यक्ति जिसके मामले में कर का भुगतान या कटौती धारा 191(2) या धारा 192(1ग) के अंतर्गत रोका गया हो
• जो धारा 10कक या अध्याय VI-क के भाग-ग के अंतर्गत कटौती का दावा करता है
• जो किसी शीर्षक के अंतर्गत अग्रेषित की जाने वाली हानि या हानि का अग्रेषण किया हो
• शीर्षक अन्य स्त्रोतों (पारिवारिक पेंशन से स्वीकृत कटौती को छोड़कर) के अंतर्गत करयोग्य आय से धारा 57 के अंतर्गत कटौती का दावा करने वाले व्यक्ति
• जो धारा 90 या 91 के अंतर्गत राहत का दावा करना चाहता है
• जो अन्य व्यक्ति के हाथों स्त्रोत पर कर कटौती के ऋण का दावा करना चाहता है
• जिसके पास भारत के बाहर कोई परिसंपत्ति (एक उद्यम में वित्तीय हित सहित) स्थित हो
• जिसके पास भारत से बाहर किसी खाते में हस्ताक्षरी प्राधिकारी हो
• जिसके पास धारा 5क के प्रावधानों के अनुसार विभाजित की जाने वाली आय हो
• जिसके पास निम्नलिखित में से कोई भी आय हो :
क) व्यापार या पेशे से आय
ख) पूजी प्राप्ति
ग) शीर्षक "अन्य स्त्रोत" के अंतर्गत करयोग्य आय जो विशेष दर पर करयोग्य है
घ) धारा 115खखघक के अंतर्गत करयोग्य रू. 10 लाख से अधिक की लाभांश आय
ड़) अस्पष्ट आय (यानी नगद क्रेडिट, अस्पष्ट निवेश आदि जो धारा 115खखड़ के अंतर्गत 60 प्रतिशत की दर पर करयोग्य है)
च) रू. 5000 से अधिक की करयोग्य आय
छ) भारत के बाहर किसी स्त्रोत से आय
• आईटीआर-2 कौन प्रयोग कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-2 उस व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार द्वारा प्रयोग किया जा सकता है जो आईटीआर-1 सहज को दाखिल करने के लिए योग्य नही है और जिसकी ष्व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति" से आय नही है और ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, के रूप में "लाभ या पेशे के लाभ या प्राप्ति" नही है जो एक सांझेदारी फर्म द्वारा उसकी ओर से प्राप्त हुआ हो
आगे, यदि जहां अन्य व्यक्ति जैसे जीवनसाथी, नाबालिग बालक आदि की आय को करदाता की आय के साथ मिलाया जाना है, इस विवरणी प्रपत्र को प्रयोग किया जा सकता है यदि मिलाए जाने वाली आय उक्त किसी भी श्रेणियों में से एक में आती है
• आईटीआर ब्यौरा
• प्रपत्र आईटीआर-2 यह उस व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार पर लागू होता है जिसकी शीर्षक "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति" के अंर्तगत आयकर हेतु वसूले जाने वाली आय ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, के रूप में के रूप में है जो एक सांझेदारी फर्म द्वारा उसकी ओर से प्राप्त हुआ हो
• आईटीआर-2 कौन प्रयोग नही कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-2 उस व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार द्वारा प्रयोग नही किया जा सकता है जिसकी वर्ष के लिए कुल आय में व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति से आय शामिल है और साथ ही ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे जिस भी नाम से जाना जाए, के रूप में आय शामिल है जो एक सांझेदारी फर्म द्वारा उसकी ओर से प्राप्त हुआ हो
• आईटीआर-3 कौन प्रयोग कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-3 एक व्यक्ति या एक हिंदु अवभिजित परिवार जिसकी व्यापार या पेशे से लाभ और प्राप्ति से आय है, द्वारा प्रयोग किया जा सकता है। आईटीआर-3 उस एक व्यक्ति द्वारा दाखिल की जानी है जिसकी आय ब्याज, वेतन, बोनस, कमीशन या पारिश्रमिक, चाहे जिस नाम से जाना जाए, के रूप में शीर्षक व्यापार या पेशे से लाभ और प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय है जोकि एक सांझेदारी फर्म की ओर से उसके द्वारा प्राप्त हो
• आईटीआर-3 कौन प्रयोग नही कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-3 व्यक्ति या एचयूएफ को छोड़कर किसी व्यक्ति द्वारा प्रयोग नही किया जा सकता। आगे, एक व्यक्ति या एचयूएफ जिसकी व्यापार या पेशे से आय न हो, वह आईटीआर-3 का प्रयेग नही कर सकता।
• आईटीआर-4(सुगम) कौन प्रयोग कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर- 4 (सुगम) एक व्यक्ति/एचयूएफ द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है जिसकी वर्ष के लिए कुल आय में शामिल है:
(क) धारा 44कघ या 44कड़ के प्रावधानों के अनुसार परिकलित व्यापार आय, या
(ख) धारा 44कघक के प्रावधानों के अनुसार आंकी गई पेशवर आय या
(ग) वेतन/पेंशन से आय, या
(घ) एक गृह संपत्ति से आय (उन मामलों को छोड़कर जहां नुकसान पिछले साल से आगे लाया जाता है या अग्रेषित की जाने वाली हानि), या
(ड) अन्य स्रोतों से आय रू. (लॉटरी से जीत और घुड़ दौड़ से आय)
(च) धारा 112क के अंतर्गत करयोग्य दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्ति और जो रू. 1.25 लाख से अधिक न हो (पूंजीगत प्राप्ति को अग्रेषित या आगे नही ले जाना चाहिए)
आगे, यदि जहां अन्य व्यक्ति जैसे जीवन साथी, नाबालिग, बच्चे आदि की आय, करदाता की आय के साथ जोड़ी जाती है तो यह विवरणी प्रपत्र वहां प्रयोग किया जा सकता है जहां संयोजित आय निम्नलिखित किसी भी श्रेणी में आती हो।
आईटीआर-4 (सुगम) कौन प्रयोग नही कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर- 4(सुगम) एक व्यक्ति द्वारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है:
1. जो एक अनिवासी है या सामान्य निवासी नहीं है
2. जो एक कंपनी का निदेशक है
3. जिसकी कुल आय रू. 50 लाख से अधिक है
4. जो एक से अधिक गृह संपत्ति से आय प्राप्त करता है
5. जिसने पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय असूचीबद्ध ईक्विटी शेयरों को प्राप्त किया है
6. जो पेटेंट या बही खातों से रॉयल्टी के संदर्भ में धारा 80थथख या धारा धधख के अंतर्गत कटौती का दावा करता है
7. जो अध्याय VI-क के भाग-ग या धारा 10कक के अंतर्गत कटौती का दावा करता है
8. जो किसी शीर्षक के अंतर्गत अग्रेषित की जाने वाली हानि या हानि का अग्रेषण किया हो
9. शीर्षक अन्य स्त्रोतों (पारिवारिक पेंशन से स्वीकृत कटौती को छोड़कर) के अंतर्गत करयोग्य आय से धारा 57 के अंतर्गत कटौती का दावा करने वाले व्यक्ति
10. जो धारा 90 या 91 के अंतर्गत राहत का दावा करना चाहता है
11. जो अन्य व्यक्ति के हाथों स्त्रोत पर कर कटौती के ऋण का दावा करना चाहता है
12. जिसके पास भारत के बाहर कोई परिसंपत्ति (एक उद्यम में वित्तीय हित सहित) स्थित हो
13. जिसके पास भारत से बाहर किसी खाते में हस्ताक्षरी प्राधिकारी हो
14. जिसके पास धारा 5क के प्रावधानों के अनुसार विभाजित की जाने वाली आय हो
15. जिसके पास निम्नलिखित में से कोई भी आय हो :
क) व्यापार या पेशे से आय
ख) पूजी प्राप्ति या हानि
ग) शीर्षक "अन्य स्त्रोत" के अंतर्गत करयोग्य आय जो विशेष दर पर करयोग्य है
घ) धारा 115खखघक के अंतर्गत करयोग्य रू. 10 लाख से अधिक की लाभांश आय
ड़) अस्पष्ट आय (यानी नगद क्रेडिट, अस्पष्ट निवेश आदि जो धारा 115खखड़ के अंतर्गत 60 प्रतिशत की दर पर करयोग्य है)
च) रू. 5000 से अधिक की करयोग्य आय
छ) भारत के बाहर किसी स्त्रोत से आय
ज) सट्टा व्यापार से आय और अन्य विशेष आय
झ) एजेंसी व्यापार या कमीशन या ब्रोकेज से आय
16. जिसकी धारा 17(2)(vi) में निर्दिष्ट प्रकार की आय है जिस पर कर धारा 191(2) या धारा 192(1ग) के अंतर्गत देययोग्य या कटौतीपूर्ण है
यदि निर्धारिती सभी बही खातों और अन्य दस्तावेजों को अनुरक्षित और सुरक्षित रखता है जो धारा 44कक में संदर्भित है और अपने खातों को अंकेक्षित करता है और धारा 44कख के अनुसार अंकेक्षण रिपोर्ट प्राप्त करता है, प्रपत्र-4 (सुगम) को दाखिल करना आवश्यक नहीं है। ऐसे मामले में, अन्य नियमित विवरणी प्रपत्र अर्थात् आईटीआर-3 या आईटीआर-5, जो भी लागू हो, प्रयोग किया जाना चाहिए।
• आईटीआर-5 कौन प्रयोग कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-5 फर्म, एलएलपी, एओपी, बीओआई, धारा 2(31)(vii) में संदर्भित कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति (एजेपी), धारा 2(31)(vi) में संदर्भित स्थानीय प्राधिकारी, धारा 160(1)(iii) या (iv) में संदर्भित प्रतिनिधि निर्धारिती, सहकारी संस्थान, सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 या किस राज्य के किसी अन्य के अंतर्गत पंजीकृत सोसाइटी, प्रपत्र-7 को दाखिल करने के योग्य न्यासों को छोड़कर, मृतक व्यक्ति का एस्टेट, एक दिवालिया व्यक्ति का एस्टेट, धारा 139(4ड़) में संदर्भित व्यपारिक न्यास और धारा 139(4च)में संदर्भित निवेश फंड द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
• आईटीआर-5 कौन प्रयोग नही कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-5 ऐसे व्यक्तियों द्वारा प्रयोग नहीं किया जा सकता जिनको धारा 139(4क)="javascript:ShowMainContent('अधिनियम', 'CMSID', '102520000000140374', '');">139(4क) या 139 (4ख) या 139 (4ग) या 139 (4घ) के तहत (अर्थात, ट्रस्ट, राजनीतिक दल, संस्थाएं, कॉलेज आदि) आयकर विवरणी दाखिल करना आवश्यक है।
• आईटीआर-6 कौन प्रयोग कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-6, एक कंपनी, धारा 11 के तहत छूट का दावा करने वाली कंपनी के अलावा (धर्मार्थ/धार्मिक न्यास धारा 11 के तहत छूट का दावा कर सकते हैं) के द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
• आईटीआर-6 कौन प्रयोग नही कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-6, धारा 11 के तहत छूट का दावा करने वाली कंपनी (धर्मार्थ/धार्मिक न्यास धारा 11 के तहत छूट का दावा कर सकते हैं) के द्वारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
• आईटीआर-7 कौन प्रयोग कर सकता है ?
फार्म आईटीआर-7 कंपनियों सहित उन व्यक्तियों द्वारा प्रयोग किया जा सकता है जिनके लिए धारा 139(4क) या धारा 139(4ख) या धारा 139(4ग) या धारा 139(4घ) (अर्थात, ट्रस्ट, राजनीतिक दल, संस्थान, कॉलेज आदि) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक है।
• आईटीआर-7 कौन प्रयोग नही कर सकता है ?
प्रपत्र आईटीआर-7 उन व्यक्तियों द्वारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है जिनके लिए धारा 139(4क) या धारा 139(4ख) या धारा 139(4ग) या धारा 139(4घ) (अर्थात, ट्रस्ट, राजनीतिक दल, संस्थान, कॉलेज आदि) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है।
• आय की विवरणी को इलैक्ट्रानिक तौर पर कैसे प्रस्तुत करें
आयकर विभाग ने आयकर विवरणी की ई-फाइलिंग के लिए एक स्वतंत्र पोर्टल की स्थापना की है। आयकर विवरणी की ई-फाइलिंग के लिए करदाता www.incometaxindiaefiling.gov.in पर लॉग आन कर सकते हैं।
आयकर विवरणी को ऑनलइन प्रस्तुत करने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया को देखने के लिए यहां क्लिक करें
• आयकर विभाग द्वारा प्रदत्त ई-फाइलिंग उपयोगिता
आयकर विभाग ने ई-विवरणी उत्पन्न करने और इलेक्ट्रॉनिक रूप में विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नि:शुल्क ई-फाइलिंग उपयोगिता (अर्थात, जावा व एक्सेल) प्रदान किया है। विभाग द्वारा प्रदान की ई-फाइलिंग सुविधा का उपयोग करने में आसान व सरल है और उसमें उसका उपयोग कैसे करें यह भी शामिल है। ई-फाइलिंग सुविधा का उपयोग कर, करदाता आसानी से अपनी आय विवरणी दाखिल कर सकते हैं। यह उपयोगिता www.incometax.gov.in से डाउनलोड की जा सकती है।
• क्या आयकर विभाग द्वारा कोई ई-दाखिलीदकरण डेस्क बनाया गया है ?
ई-फाइलिंग विवरणी पर प्रश्नों के मामले में करदाता 1800 4250 0025 पर संपर्क कर सकते हैं।
• ई-फाइलिंग और ई-भुगतान के बीच क्या अंतर है ?
ई भुगतान कर के इलेक्ट्रॉनिक भुगतान (अर्थात्, नेट बैंकिंग या एसबीआई के डेबिट/क्रेडिट कार्ड द्वारा) की प्रक्रिया है और ई-फाइलिंग इलेक्ट्रॉनिक आयकर विवरणी प्रस्तुत करने की प्रक्रिया है। ई-भुगतान और ई-फाइलिंग सुविधा का उपयोग करके, करदाता कर का भुगतान करने और आय विवरणी दाखिल करने के अपने दायित्वों का निर्वहन आसानी से और जल्दी से कर सकते हैं।
• क्या मेरी विवरणी को प्रस्तुत करने का कोई नुकसान भी है ?
नहीं, इसके विपरीत करयोग्य आय होने पर अपनी विवरणी प्रस्तुत न करने पर आयकर अधिनियम के अंतर्गत जुर्माना लगाने और करावास के प्रावधान मौजूद हैं ।
• आय की मेरी विवरणी को प्रस्तुत करने के क्या लाभ है ?
विवरणी को प्रस्तुत करना आपका कर्त्तव्य है और राष्ट्र निर्माण में आपकी निरंतर योगदान के लिए सम्मान का सूचक है। इसके अलावा, आयकर विवरणी वित्तीय संस्थानें के सामने आपकी क्रेडिट योग्यता को भी दर्शाता है और आपके लिए कई वित्तीय लाभ जैसे बैंक क्रेडिट आदि का इस्तेमाल आसान हो जाता है।
• आयकर विवरणी की ई-फाइलिंग के लाभ
ई-फाइलिंग किसी भी समय किसी भी जगह से की जा सकती है और यह समय और प्रयास की बचत करती है। यह सरल, आसान व तेज है। मानविक रूप से दाखिल की जाने वाली विवरणी की तुलना में ई-विवरणी दाखिल करना आम तौर पर तेज होता है।
• क्या आय की विवरणी को प्रस्तुत करना आवश्यक है यदि मेरी कोई आय न हो ?
यदि आपको वित्त वर्ष में हानि हुई है जो आप बाद की धनात्मक आय के समक्ष समयोजित करने के लिए बाद के वर्ष में अग्रेषित की जानी है तो आपको अंतिम तिथि से पहले अपनी विवरणी को प्रस्तुत करके हानि का दावा करना चाहिए।
• आय/हानि की विवरणी को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि क्या है ?
आय/हानि की विवरणी को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि
| क्र.सं. | करदाता की स्थिति | देय तिथि |
| 1 | एक कंपनी जिसे धारा 92ङ (यानी नीचे 2 में शामिल को छोड़कर) के अंतर्गत प्रपत्र सं.. 3गङख में रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है, को छोड़कर अन्य कंपनी | निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर |
| 2 | कोई व्यक्ति (कार्पोरेट/गैर-कार्पोरेट हो सकता है) जिसे धारा 92ङ के अंतर्गत प्रपत्र स.ं. 3गङख में रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है | निर्धारण वर्ष का 30 नवंबर |
| 3 | कोई व्यक्ति (एक कंपनी को छोड़कर) जिसके खातो को आयकर कानून या किसी अन्य कानून के अंतर्गत अंकेक्षित किया जाना है | निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर |
| 4 | एक फर्म का एक कार्यकारी सांझेदार जिसके खातो को इस अधिनियम के अंतर्गत या किसी अन्य कानून के अंतर्गत अंकेक्षित किया जाना आवश्यक है | निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर |
| 5 | कोई अन्य निर्धारिती | निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई |
• क्या मुझ पर आईटीआर को देरी से प्रस्तुत करने के लिए जुर्माना लगाया जाएगा भले ही मैं उसके लिए जिम्मेदार नही हूं?
नही, धारा 234च के अंतर्गत देरी से दाखिलीकरण का शुल्क नही वसूला जाएगा यदि आपको धारा 139 के अनुसार आईटीआर को दाखिल करना आवश्यक नही है लेकिन इसे स्वैच्छिक तौर पर अंतिम तिथि के बाद करना आवश्यक हो।
• यदि मैं अंतिम तिथि के अंदर मेरी विवरणी को प्रस्तुत करने में विफल होता हूं तो क्या मुझ पर जुर्माना लगाया जाएगा या दंड दिया जाएगा ?
यदि एक व्यक्ति जिसे धारा 139 के अंतर्गत आय की विवरणी को प्रस्तुत करना आवश्यक हो और वह उप-धारा (1) के अंतर्गत नियत समय के अंतर्गत ऐसे ना कर पाए तो आपको देय कर पर ब्याज देना होगा। आगे, धारा 234च के अनुसार, रू. 5000 का देरी से शुल्क वसूला जाएगा यदि विवरणी को धारा 139(1) में निर्दिष्ट अंतिम तिथि के बाद प्रस्तुत किया जाता है। हालांकि, दिए जाने वाले विलंबित दाखिलीकरण शुल्क की राशि रू. 1000 होगी यदि व्यक्ति की कुल आय रू.5 लाख से अधिक नही होती।
• क्या एक विवरणी अंतिम तिथि के बाद प्रस्तुत किया जा सकता है ?
आय की विवरणी जिसे धारा 139(1) के अंतर्गत निर्दिष्ट देय तिथि को या उससे पहले प्रस्तुत न किया गय हो तो उसे विलंबित विवरणी कहते हैं। आय की विलंबित विवरणी को धारा 139(4) के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाता है।
किसी व्यक्ति जिसने धारा 139(1) के अंतर्गत दी गई अवधि में या धारा 142(1) के अंतर्गत जारी किए गए नोटिस के अंतर्गत समयावधि के अंदर आय की विवरणी प्रस्तुत न की हो तो उसे किसी पिछले वर्ष के लिए विवरणी प्रस्तुत की जा सकती है
- प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले 3 महीनों में या निर्धारण के पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो।
हालांकि, एक विलंबित विवरणी पर धारा 234च के अंतर्गत देरी से शुल्क लगाया जाएगा।
धारा 234च के अनुसार, रू. 5,000 का विलंबित शुल्क देययोग्य होगा यदि विवरणी को धारा 139(1) के अंतर्गत निर्दिष्ट अंतिम तिथि के बाद प्रस्तुत किया गया हो। हालांकि देरी से प्रस्तुति शुल्क रू. 1,000 होगा यदि व्यक्ति की कुल आय रू. 5 लाख से अधिक न हो।
• यदि मैंने अतिरिक्त कर का भुगतान कर दिया हो तो इसे मुझे कैसे वापस दिया जाएगा ?
अतिरिक्त कर आपकी आयकर विवरणी को प्रस्तुत करके प्रतिदाय के तौर पर दावा किया जा सकता है। यह आपके बैंक खाते में ईएससी स्थानांतरण के माध्यम से क्रेडिट करके वापस दिया जाएगा। विभाग जल्द से जल्द प्रतिदाय संबंधी दावो का निपटान करने का प्रयास कर रहा है।
• यदि मैंने मेरी मूल विवरणी में कोई गलती की हो तो क्या मुझे गलती को सही करने के लिए संशेधित विवरणी प्रस्तुत करने की अनुमति है ?
एक आय की विवरणी को निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 3 महीने पहले या निर्धारण से पहले, जो भी पहले हो, किसी भी समय संशोधित किया जा सकता है
• मैं कितनी बार विवरणी को संशोधित कर सकता हूं ?
यदि एक व्यक्ति विवरणी को प्रस्तुत करने के बाद कोई गलती, त्रुटि या गलत ब्योरा पाता है तो निर्धारित समय सीमा के अंदर विवरणी को संशोधित करना चाहिए।
एक आय की विवरणी को निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 3 महीने पहले या निर्धारण से पहले, जो भी पहले हो, किसी भी समय संशोधित किया जा सकता है
यदि मूल विवरणी कागजी प्रारूप या मैनुयली प्रस्तुत की जाती है तो तकनीकी तौर पर इसे ऑनलाइन विधि या इलैक्ट्रानिक तौर पर संशोधित नही किया जा सकता।
संशोधित विवरणी धारा 139(5) के अंतर्गत ऑनलाइन प्रस्तुत की जा सकती है।
• क्या मुझे प्रमाण के तौर पर दाखिल की गई विवरणी की एक प्रति अपने पास रखनी होगी और कितने समय के लिए ?
हां, चूंकि आयकर अधिनियम के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही पहले के वर्षों के लिए भी शुरू की जा सकती है इसलिए आपको विवरणी की प्रति संभाल कर रखनी चाहिए। ई-दाखिलीकरण सुविधा के शुरू होने के बाद, आय की विवरणी की प्रति को सुरक्षित रखना काफी आसान और साधारण है।
• ऐसी कई कटौतियां है जो कि मेरे नियोक्ता द्वारा जारी किए गए प्रपत्र 16 में प्रतिबिंबित नही होते। क्या मैं मेरी विवरणी में उनका दावा कर सकता हूं ?
हां, इसका दावा किया जा सकता है यदि आप अन्यथा इसका दावा करने के योग्य हो।
• विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य क्यों है भले ही मेरे सभी करों का भुगतान किया गया है और मेरे के लिए कोई प्रतिदाय देय नही है ?
अग्रिम कर के तौर पर दिया गया कर और टीसीएस के रूप में एकत्रित या टीडीएस के रूप में कटौती आपकी आय के स्व-निर्धारण के पूरा होने पर ही आपके नियत कर के रूप होगा। यह स्व-निर्धारण आय की विवरणी को प्रस्तुत करने के रूप में विभाग को सूचित किया जाएगा। इसके बाद ही सरकार आपके द्वारा दिए गए करों पर अधिकारों की परिकल्पना करेगा। विवरणी का दाखिलीकरण इस प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है और इसलिए अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने पा जुर्माना लगेगा।
• यदि मैं मेरी आय कर विवरणी को प्रस्तुत नही करता हूं तो क्या मैं किसी आपराधिक अभियोजन (गिरफ्तार/कारावास) आदि के लिए जिम्मेदार हूं भले ही मेरी आय करयोग्य है ?
कर का भुगतान न करने पर ब्याज, जुर्माना कारावास। अभियोजन 3 महीनों से 2 वर्षों तक का कठोर करावास हो सकता है (जब छुपाया गया कर रू. 25,00,000 से अधिक हो तो जुर्माना 6 महीनों से लेकर 7 वर्ष तक का हो सकता है)
• प्रपत्र 26 कध
यह नियम 114-झ के अंतर्गत जारी प्रपत्र है, जिसमें करदाता से संबंधित निम्नलिखित सूचना प्रकाशित है :
(1) स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस)
(2) स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस)
(3) अग्रिम कर या स्वयं निर्धारण कर या नियमित मूल्यांकन पर कर का भुगतान
फार्म 26 कध
क) स्त्रोत पर काटे गए या एकत्रित किए गए कर से संबंधित सूचना
ख) निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन (एसएफटी) से संबंधित सूचना (एसएफटी
ग) करों के भुगतान से संबंधित सूचना
घ) मांग और प्रतिदाय से संबंधित सूचना
ङ) लंबित प्रक्रियाओं से संबंधित सूचना
च) पूर्ण प्रक्रियाओं से संबंधित सूचना और
छ) किसी कानून के अंतर्गत किसी कार्य को करने के लिए किसी अधिकारी, प्राधिकारी या निकाय से प्राप्त सूचना या धारा 90="javascript:ShowMainContent('अधिनियम', 'CMSID', '102520000000140020', '');">धारा 90 या धारा 90 क के अंतर्गत संदर्भित समझौते के अंतर्गत प्राप्त सूचना या उस सीमा तक किसी अन्य व्यक्ति की ओर से प्राप्त सूचना जिसे राजस्व के हित में सही समझा जा सके।
झ) आयकर प्रतिदाय पर ब्याज
ड) प्रपत्र 61/61क में सूचना जहां पैन को पॉपुलेटिड किया जा सके
ढ) निक्षेपागार/पंजीयक और स्थानांतरण एजेंट (आरटीए) द्वारा सूचित किया गया ऑफ मार्किट लेनदेन
ण) पंजीयक और स्थानांतरण एजेंट (आरटीए) द्वारा सूचित की गई सूचना और लाभांश
प) पंजीयक और स्थानांतरण एजेंट (ारटीए) द्वारा सूचित म्यूचुयल फंड की खरीद के बारे में सूचना और
त) उस सीमा तक किसी अन्य व्यक्ति की ओर से प्राप्त सूचना जहां यह राजस्व के हित में उचित समझी जा सकती हो
• फार्म 26 कध के अनुसार वास्तविक टीडीएस और टीडीएस क्रेडिट के बीच विसंगतियों के मामले में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया
स्रोत पर कर की कटौती करने वाले हर व्यक्ति को आयकर विभाग को उसके द्वारा की गयी कर कटौती का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाना चाहिए। विवरण में कटौतीकरिती का नाम, कटौतीकरिती की स्थायी खाता संख्या, कर कटौती की राशि, कटौतीकरिती को अदा की गयी राशि, सरकार की क्रेडिट में टीडीएस के भुगतान की तिथि आदि शामिल होना चाहिए। कटौतीकर्ता द्वारा प्रदान किए गए टीडीएस विवरण के आधार पर, आयकर विभाग कटौतीकरिती का फार्म 26 कध अद्यतन करेगा।
कई बार फार्म 26 कध में प्रदर्शित होने वाली वास्तविक टीडीएस राशि और टीडीएस क्रेडिट अलग-अलग हो जाती है और यह भी हो सकता है कि फार्म 26कध में प्रदर्शित होने वाला टीडीएस क्रेडिट वास्तविक टीडीएस की तुलना में कम हो, इसका कारण कटौतीकर्ता द्वारा टीडीएस प्रस्तुत न किया जाना, गलत स्थायी खाता संख्या में कर कटौती करना आदि हो सकता है। ऐसे मामले में कटौतीकरिती को उपरोक्त कारणों से विसंगति को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कटौतीकर्ता से अनुरोध करना चाहिए।
आयकर विभाग कर कटौती करने वाले व्यक्ति (यानी, कटौतीकर्ता) द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर फार्म 26कध में टीडीएस विवरण को अद्यतन करता है, इसलिए, यदि कटौतीकर्ता की ओर से कोई चूक हुई हो जैसे कि आयकर विभाग को टीडीएस विवरणी की गैर-प्रस्तुति (यानी आयकर विभाग को टीडीएस विवरणी), गलत स्थायी खाता संख्या आदि तो फार्म 26 कध में वास्तविक टीडीएस प्रतिबिंबित नहीं होगा। ऐसे मामले में, करदाता सही टीडीएस क्रेडिट का दावा करने में सक्षम नहीं हो सकता है। इसलिए, करदाताओं को सलाह दी जाती है कि फार्म 26 कध में प्रदर्शित होने वाली कर क्रेडिट पुष्टि की कर लें और अंतर यदि कोई हो, तो उसे सही कराने का कष्ट करें।
यदि डिडक्टर के कारण कोई विसंगति होती है तो वह टीडीएस/टीसीएस संशोधन ब्यौरा दाखिल कर सकता है और इसे सही कर सकता है।
• आयकर विवरणी दाखिल करते समय बरती जाने वाली सावधानियां
आय विवरणी दाखिल करते समय कुछ महत्वपूर्ण कदमों/बिंदुओं/सावधानियों की ध्यान में रखी जाने वाली सूची निम्न प्रकार है:
• पहली और सबसे महत्वपूर्ण एहतियात नियत तारीख को या उससे पहले आयकर विवरणी दाखिल करना है। करदाताओं को विलम्बित विवरणी दाखिल करने की प्रथा से बचना चाहिए। आय विवरणी दाखिल करने में देरी के परिणाम निम्न हैं। निम्नलिखित आय/हानि (गृह संपत्ति हानि को छोड़कर) की विवरणी को दाखिल करने में देरी के परिणाम है।
हानि (गृह संपत्ति से नुकसान के अलावा अन्य) को अग्रेषित नही किया जा सकता।
धारा 234क के तहत ब्याज आरोपित किया जाना।
*धारा 234च के अंतर्गत शुल्क
**धारा 234झ के अंतर्गत शुल्क
धारा 10क, धारा 10ख के अंतर्गत छूट उपलब्ध नही है।
अध्याय VI-क के भाग-ग के तहत अनुदान उपलब्ध नहीं होगा
*आय की विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के लिए शुल्क रु. 5,000 यदि विवरणी धारा 139(1) के तहत निर्धारित नियत तारीख के बाद प्रस्तुत की गई है। हालाँकि, यह रु. 1,000 है यदि किसी निर्धारिती की कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है।
**वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित विवरणी दाखिल करने की समय-सीमा को प्रासंगिक कर वर्ष की समाप्ति से 9 महीने के स्थान पर 12 महीने तक अथवा निर्धारण की पूर्णता तक, जो भी पहले हो, बढ़ा दिया गया है। यह विस्तार करदाताओं को अपनी विवरणी संशोधित करने की अनुमति देगा, भले ही विलंबित विवरणी अनुमेय अवधि के अंतिम चरण में दाखिल की गई हो। हालांकि, संशोधित विवरणी दाखिल करने की यह विस्तारित अवधि केवल धारा 234-झ के अधीन अतिरिक्त शुल्क के भुगतान पर ही उपलब्ध होगी, जो निम्नानुसार है :
(क) रू. 1,000, जहाँ कुल आय रू 5 लाख से अधिक न हो; तथा
(ख) रू. 5,000, अन्य मामलों में
• करदाता को प्रपत्र 26कध डाउनलोड करना चाहिए और दिए गए टीडीएस/टीसीएस/कर को पुष्ट करना चाहिए। यदि कोई विसंगति पाई जाती है तो इसे ठीक करने के लिए उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
• आय की विवरणी को दाखिल करते समय प्रयोग किए जाने वाले दस्तावेजों जैसे बैंक स्टेटमेंट/पासबुक, ब्याज प्रमाणपत्र, निवेश प्रमाण जिसके लिए कटौती का दावा किया जाना है, बही खातों और बैंलेंस शीट और पीएंडएल खाता (यदि लागू हो) को ध्यानपूर्वक संलग्न करें और पढ़़ें।
• करदाता को उसके मामले में लागू होने वाली सही विवरणी की पहचान करनी चाहिए।
• सावधानीपूर्वक विवरणी प्रपत्र में सभी सूचनाएं देनी चाहिए।
• कुल आय, कटौती (यदि हो), ब्याज (यदि हो), कर देयता/प्रतिदाय आदि की गणना की पुष्टि करनी चाहिए।
• सुनिश्चित करें कि अन्य ब्यौरे जैसे पैन, पता, ई-मेल, बैंक खाता ब्यौरा आदि सही हो।
• आयकर विवरणी में सभी विवरण भरने के बाद, और सभी विवरण की पुष्टि के बाद, आयकर विवरणी दाखिल करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।
• यदि आयकर विवरणी बिना डिजिटल हस्ताक्षर के इलेक्ट्रॉनिक रूप से दायर की गयी है (जैसा कि पहले चर्चा की गयी है) सीपीसी बेंगलुरू में आयकर विवरणी दाखिल करने की पावती पोस्ट करना न भूलें।
ई फाइलिंग पर जानकारी के लिए कृपया लॉग-आन करें: https://www.incometax.gov.in/iec/foportal
आय की विवरणी को दाखिल करने पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. आय की विवरणी निम्न में प्रस्तुत किया जाना हैं..................
(क) आईटीएनएस 281 (ख) प्रपत्र 26कध
(ग) प्रपत्र 26थ (घ) आईटीआर 1-से 7 (जो भी स्थिति हो)
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर कानून के अंतर्गत, आय विवरणी के विभिन्न रूप करदाताओं की विभिन्न श्रेणियों के लिए निर्धारित हैं। विवरणी प्रपत्र आईटीआर प्रपत्र (आयकर विवरणी प्रपत्र) के तौर पर जाने जाते हैं। इसलिए आय की विवरणी आईटीआर 1-से 7 में प्रस्तुत की जानी हैं (जो भी स्थिति हो)
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प हैं।
गलत उत्तर पर टिप्पणी : विकल्प (घ) सही विकल्प हैं क्योंकि यह सही प्रावधान प्रदान करता हैं, गलत प्रावधान देने वाले सभी अन्य विकल्प अर्थात् विकल्प (क), (ख) तथा (ग) सही नही हैं
प्रश्न 2. ........................आय विवरणी को भरने की पावती हैं
(क) आईटीआर-4 (ख) आईटीआर-V
(ग) प्रपत्र 26 कध (घ) प्रपत्र 26 थख
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आईटीआर-V आय विवरणी भरने की रसीद हैं
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : विकल्प (ख) सही विकल्प है क्योंकि यह सही प्रावधान प्रदान करता है, गलत प्रावधान देने वाले सभी अन्य विकल्प अर्थात् विकल्प (क), (ग) तथा (घ) सही नही हैं
प्रश्न 3. आय की विवरणी केवल इलैक्ट्रानिक विधि में आयकर विभाग में भरी जा सकती है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आय की विवरणी निम्नलिखित किसी भी विधि में आयकर विभाग में दाखिल की जा सकती है :-
• कागजी रूप में विवरणी की प्रस्तुति द्वारा
• डिजिटल हस्ताक्षर अर्थात् डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ई-दाखिल, के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी की प्रस्तुति द्वारा
• विवरणी के इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुति द्वारा तथा उसके बाद प्राधिकृत व्यक्ति अर्थात् डिजिटल हस्ताक्षर के बिना ई-दाखिल के हस्ताक्षर के साथ आईटीआर-V की हार्ड कॉपी को जमा करके
• बार-कोडेड विवरणी काी प्रस्तुति द्वारा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत हैं इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प नहीं है
प्रश्न 4. एक कंपनी डिजिट हस्ताक्षर के बिना इलैक्ट्रानिक रूप से अपनी विवरणी दाखिल कर सकती है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
प्रत्येक कंपनी को डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को प्रस्तुत करना चाहिए। अन्य शब्दों में, निगमित करदाताओं के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ई-दाखिल करना अनिवार्य है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प नहीं है
प्रश्न 5. एक फर्म अथवा व्यक्ति अथवा एक हिंदु अभिवाजित परिवार (एचयूएफ) जिनकी लेखा पुस्तकों को धारा 44कख के अंतर्गत अंकेक्षित किया जाना आपेक्षित हैं, डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को प्रस्तुत कर सकते हैं
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
एक फर्म अथवा व्यक्ति अथवा एक हिंदु अभिवाजित परिवार (एचयूएफ) जिनकी लेखा पुस्तकों को धारा 44कख के अंतर्गत अंकेक्षित किया जाना आपेक्षित हैं, डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को प्रस्तुत कर सकते हैं। अन्य शब्दों में, ऐसी स्थिति में डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ई-दाखिल करना अनिवार्य है ।
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प नहीं है
प्रश्न 6. भारत से बाहर किसी प्रकार की संपत्ति (किसी कंपनी में वित्तीय रूख सहित) रखने वाले व्यक्ति अथवा स्थानीय निवासी व्यक्ति/एचयूएफ अथवा भारत से बाहर किसी कारण से स्थित हस्ताक्षर प्राधिकारी को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को प्रस्तुत करना होगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
भारत से बाहर किसी प्रकार की संपत्ति (किसी कंपनी में वित्तीय रूख सहित) रखने वाले व्यक्ति अथवा स्थानीय निवासी व्यक्ति/एचयूएफ अथवा भारत से बाहर किसी कारण से स्थित हस्ताक्षर प्राधिकारी को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ इलैक्ट्रानिक रूप से अथवा डिजिटल हस्ताक्षर के बिना आय की विवरणी को प्रस्तुत करना होगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत हैं इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (क) गलत विकल्प है
प्रश्न 7. रू.............. से अधिक कुल आय वाले करदाताओं को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना आय विवरणी प्रस्तुत करनी होगी
(क) 25,00,000 (ख) 15,00,000
(ग) 10,00,000 (घ) 5,00,000
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
रू. 5,00,000 से अधिक कुल आय वाले करदाताओं को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना आय विवरणी प्रस्तुत करनी होगी
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : विकल्प (घ) सही विकल्प है क्योंकि यह सही प्रावधान प्रदान करता है, गलत प्रावधान देने वाले सभी अन्य विकल्प अर्थात् विकल्प (क), (ख) तथा (ग) सही नही हैं
प्रश्न 8. आईटीआर विवरणी प्रपत्र में कम प्रपत्र संलग्न होते हैं इसलिए करदाताओं को आय (चाहे वास्तविक रूप से दाखिल हो या इलैक्ट्रानिक रूप से) विवरणी के साथ किसी प्रपत्र (जैसे निवेश के प्रमाण, टीडीएस प्रमाणप, आदि ) को संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आईटीआर विवरणी प्रपत्र में कम प्रपत्र संलग्न होते हैं इसलिए करदाताओं को आय (चाहे वास्तविक रूप से दाखिल हो या इलैक्ट्रानिक रूप से) विवरणी के साथ किसी प्रपत्र (जैसे निवेश के प्रमाण, टीडीएस प्रमाण, आदि) को संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है। बहरहाल, इन दस्तावेजों को करदाताओं द्वारा प्रतिधारण किया जाना चाहिए तथा कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब आंकलन, पूछताछ आदि स्थिति में आपेक्षित हो
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (ख) गलत विकल्प है
प्रश्न 9. एक सहभागी फर्म जिसे अपनी लेखा पुस्तकों को अंकेक्षित करना आपेक्षित नहीं हैं, डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना इलैक्ट्रानिक रूप से रिटर्न दाखिल कर सकते हैं
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
एक व्यक्ति जिसे आईटीआर-5 को दाखिल करना आपेक्षित हैं वह इसे इलैक्ट्रानिक रूप से डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना दाखिल कर सकता हैं। बहरहाल, एक जिसको फर्म को धारा 44कख के अंतर्गत खातों को अंकेक्षित करना आपेक्षित है, डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करना होगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प नहीं है
प्रश्न 10. जहां डिजिटल हस्ताक्षर के बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय विवरणी दाखिल करना हैं वहां करदाता द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित आईटीआर-ट की प्रति "आयकर विभाग-सीपीसी, पोस्ट बॉक्स नं. 1, इलैक्ट्रानिक सिटी पोस्ट ऑफिस, बेगलूरू-560100 (कर्नाटक)" को साधारण डाक अथवा स्पीड पोस्ट अथवा कुरियर द्वारा भेजा जाना हैं ( इस संबंध में निर्दिष्ट अवधि के भीतर अर्थात् 30 दिन)
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
जहां डिजिटल हस्ताक्षर के बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय विवरणी दाखिल करना है वहां करदाता को आईटीआर-V की दो मुद्रित प्रतियां लेनी चाहिए।
करदाता द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित आईटीआर-V की प्रति "आयकर विभाग-सीपीसी, पोस्ट बॉक्स नं. 1, इलैक्ट्रानिक सिटी पोस्ट ऑफिस, बेगलूरू-560100 (कर्नाटक)" को साधारण डाक अथवा स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाना हैं ( इस संबंध में निर्दिष्ट अवधि के भीतर अर्थात् 30 दिन)। अन्य प्रति अपने रिकॉर्ड के लिए करदाता द्वारा रखी जा सकती हैं।
यह ध्यान रखना चाहिए कि उक्त कथित प्रति केवल साधारण डाक अथवा स्पीड पोस्ट द्वारा भेजी जानी हैं न कि कुरियर द्वारा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
गलत उत्तर पर टिप्पणी : चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प नहीं है

