आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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अधिसूचना सं.

एफ.नं. 370142/21/016-टीपीएल

अधिसूचना तिथि

24/10/2016

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

24/10/2016

एफ.नं. 370142/21/016-टीपीएल

एफ.नं. 370142/21/016-टीपीएल

 

एफ.नं. 370142/21/2016-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

***

नर्इ दिल्ली, दिनांक 24 अक्टूबर, 2016

 

विषय : न्यास अथवा संस्थान के संबंध में उचित बाजार कीमत के मूल्यांकन की विधि को निर्धारित करने के लिए मसौदा नियम - आयकर अधिनियम, 1961 का अध्याय XII-ड़ख - संबंधित

 

वित्त अधिनियम, 2016, अन्य बातों के साथ-साथ, ने आयकर अधिनियम, 1961 (द एक्ट) में धारा 115नघ, 115नड़ तथा115नच सहित एक नए अध्याय XII-ड़ख को शामिल किया है। इस अध्याय में अतिरिक्त आयकर के उदग्रहण से संबंधित विशिष्ट प्रावधान शामिल हैं जहां अधिनियम के अंतर्गत छूट प्राप्त धर्मांर्थ संस्थान एक गैर-धर्मांर्थ संगठन मे रूपांतरित अथवा धर्मांर्थ संगठनों के तौर पर मौजूद रहता है।

2. नर्इ शामिल धारा 115नघ की उप-धारा (2) मुहैया कराती है कि उसकी उप-धारा (1) के लिए अभिवृद्ध आय का अर्थ है राशि जिसके द्वारा न्याय अथवा संगठन की कुल परिसंपत्तियों की कुल उचित बाजार कीमत, निर्दिष्ट तिथि के अनुसार, मूल्यांकन की विधि, जिसे निर्धारित किया जा सके, के अनुसार आंके गए ऐसे न्यास अथवा संस्थान की कुल देयता से अधिक है। इसलिए, संवृद्ध आय के निर्धारण के लिए निर्दिष्ट तिथि के अनुसार न्यास अथवा संस्थान के संबंध में उचित बाजार कीमत के मूल्यांकन की विधि को नियमों में निर्धारित किए जाने की आवश्यकता है।

3. तद्नुसार, आयकर नियम, 1962 में नियम 17गख को शामिल किये जाने का प्रस्ताव किया गया है। मसौदा नियम 17गख, जिस पर हितधारकों तथा सामान्य जन की टिप्पणियां तथा सुझाव को इस संबंध मे र्इमेल पते dirtpl1@nic.in पर 31 अक्टूबर, 2016 तक इलैक्ट्रानिक रूप से भेजा जा सकता है, निम्नानुसार है :

"17गख धारा 115नघ की उप-धारा (2) के लिए मूल्यांकन की विधि (1) अधिनियम की धारा 115नघ की उप-धारा (2) के लिए, न्यास अथवा संस्थान की कुल परिसंपत्तियों की कुल उचित बाजार कीमत निम्न को कम कर बैलेंस शीट में समस्त परिसंपत्तियों की उचित बाजार कीमत का कुल होगी -

  (i) अधिनियम के अंतर्गत प्रतिदाय के तौर पर दावा किए गए कर की राशि को कम करके अग्रिम कर भुगतान के तौर पर अथवा स्त्रोत पर संग्रहण अथवा कटौती के तौर पर दिए गए कर की कोर्इ राशि तथा

 (ii) स्थगित व्यय की अमूर्त राशि सहित परिसंपत्ति के तौर पर दशार्इ गर्इ कोर्इ राशि जो किसी परिसंपत्ति की राशि का प्रतिनिधित्व न करती हो

(2) उप-नियम (1) के लिए, एक परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत निम्नलिखित तरीके से निर्धारित होगी, जिनके नाम हैं :—0

  (i) शेयर तथा प्रतिभूतियों का मूल्यांकन -

(क) उद्धृत शेयर तथा प्रतिभूतियों की उचित बाजार कीमत निम्नलिखित होगी —

   I. निर्दिष्ट तिथि के अनुसार प्राधिकृत शेयर बाजार पर उद्धृत ऐसे शेयर तथा प्रतिभूतियों का न्यूनतम तथा उच्चतम औसत राशि अथवा

  II. जहां निर्दिष्ट तिथि पर, प्राधिकृत शेयर बाजार पर ऐसे शेयर तथा प्रतिभूतियों मे कोर्इ व्यापार न हो, निर्दिष्ट तिथि जब ऐसे शेयर तथा प्रतिभूतियां एक प्राधिकृत शेयर बाजार पर विक्रय हुर्इ, के तुरंत उत्तरगामी तिथि पर प्राधिकृत शेयर बाजार पर ऐसे शेयर तथा प्रतिभूतियों के न्यूनतम तथा उच्चतम मूल्य का औसत

(ख) गैर-उद्धृत इक्विटी शेयरों की उचित बाजार कीमत निम्नलिखित फार्मूले के अनुसार निर्धारितानुसार ऐसे गैर-उद्धृत इक्विटी शेयर की निर्दिष्ट तिथि पर आंकी जाएगी। जिनके नाम है :—

  उचित बाजार कीमत = (A + B - L) X (PV)  
    (PE)  

जहां,

A = निम्न को कम कर बैलेंस शीट (बुलियन, आभूषण, बेशकीमती पत्थर, कलात्मक कार्य, प्रतिभूतियां तथा अचल संपत्ति) मे परिसंपत्ति की बही कीमत है,

   (i) अधिनियम के अंतर्गत प्रतिदाय के तौर पर किए गए कर दावे पर राशि को कम करके अग्रिम कर भुगतान के तौर पर अथवा स्त्रोत पर संग्रहण अथवा कटौती के तौर पर दी गर्इ कोर्इ राशि

  (ii) स्थगित व्यय जो किसी परिसंपत्ति की कीमत को न दर्शाती हो, की अमूर्त राशि सहित परिसंपत्ति के तौर पर बैलेंस शीट में दर्शार्इ गर्इ कोर्इ राशि

B= इस नियम में उपलब्ध कराए गए तरीके में निर्धारितानुसार बुलियन, आभूषण, बेशकीमती पत्थर, कलात्मक कार्य, प्रतिभूतियां तथा अचल संपत्ति की उचित बाजार कीमत

L= बैलेंस शीट में दशार्इ गर्इ देयता की बही राशि लेकिन निम्नलिखित राशियां शामिल नहीं है जिनके नाम है :—

    I. र्इक्विटी शेयरों के संबंध में प्रदत्त पूंजी

   II. वरीयता शेयर तथा इक्विटी शेयर पर लाभांश के भुगतान के लिए पृथक राशि ;

 III. आरक्षित तथा अतिरिक्त राशि, चाहे जिस भी नाम से बुलाया जाए, भले ही परिणामी आंकड़ा ऋणात्मक हो, मूल्यह्रास की उस राशि को छोड़कर ;

 IV. कराधान के लिए कोर्इ प्रतिनिधित्व राशि, अधिनियम के अंतर्गत प्रतिदाय के तौर पर दावा किए गए कर की राशि को कम करके अग्रिम कर भुगतान के तौर पर अथवा स्त्रोत पर संग्रहण अथवा कटौती के तौर पर दिए गए कर की राशि को छोड़कर, वहां प्रयोज्नीय कानून के अनुसार बही लाभों के संदर्भ में देययोग्य कर के अतिरिक्त की सीमा तक;

 V. अनिश्चित देयताओं को छोड़कर देयता को पूरा करने के लिए किए गए प्रावधानों का प्रतिनिधित्व करने वाली कोर्इ राशि;

 VI. संचयी वरीयता शेयरों के संबंध में देययोग्य लाभांशों के बकाए को छोड़कर आकस्मिक देयताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली कोर्इ राशि;

PE= बैलेंस शीट में दर्शाए गए अनुसार प्रदत्त इक्विटी शेयर पूंजी की कुल राशि;

PV= ऐसे इक्विटी शेयर की प्रदत्त राशि;

 (ग) र्इक्विटी शेयरों को छोड़कर शेयर तथा प्रतिभूतियों की उचित बाजार कीमत मूल्य के अनुमानित होगी जिस पर वसूली जाती है यदि ऐसे मूल्यांकन के संबंध में एक लेखाकार अथवा मचेंट बैंकर से मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर निर्दिष्ट तिथि पर खुले बाजार में बेची जाती है।

 (ii) एक अचल संपत्ति की उचित बाजार कीमत निम्नलिखित की उच्चतम होगी :

(क) मूल्य जो उचित रूप से सामान्यत वसूला जाएगा यदि प्राधिकृत मूल्यांकनकर्ता द्वारा मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर निर्दिष्ट तिथि पर खुले बाजार में बेची जाती है, तथा

(ख) निर्दिष्ट तिथि के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी राशि,

 (iii) व्यापारिक उपक्रम, न्यास अथवा संगठन द्वारा संघटित, की उचित बाजार कीमत इसकी निविल परिसंपत्ति होगी :-

(A + B - L)

जो उप-नियम(2) के वाक्यांश (i) के उप-वाक्यांश में मुहैया करार्इ गर्इ प्रणाली को लागू करके यथोचित परिवर्तन को निर्धारित करेगा

(iv) किसी परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत, उक्त वाक्यांश (i), (ii) तथा (iii) हेतु संदर्भित को छोड़कर, मूल्य होगा जिस पर परिसंपत्ति सामान्यत वसूली जाती है यदि पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता से प्राप्त मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर निर्दिष्ट तिथि पर खुले बाजार में बेची जाती है :

बशर्ते कि यदि कोर्इ मूल्यांकनकर्ता ऐसी परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के लिए पंजीकृत न हो, मूल्यांकन रिपोर्ट एक मूल्यांकनकर्ता से प्राप्त की जाएगी जो एक पेशेवर मूल्यांकनकर्ता निकाय अर्थात् इंस्टीट्यूट ऑफ वैल्यूर्स, इंस्टीटयूट ऑफ सर्वेयर्स (वैल्यूऐशन ब्रांच), सरकार से अनुमोदित वैल्यूयर्स इंस्टीट्यूट, प्रैक्टिसाइजिंग वैल्यूर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वैल्यूर्स, सेंटर फॉर वैल्यूऐशन स्टडी, रिसर्च एंड टे्रनिंग, रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड सर्वेयर्स, इंडिया चैप्टर, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ अप्प्रैसर, यूएसए, अप्रीजल इंस्टीट्यूट यूएसए अथवा एक वैल्यूयर जो मूल्यांकन उद्देश्य के लिए किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम द्वारा नियुक्त होता है, का सदस्य होना चाहिए।

(3) अधिनियम की धारा 115घ की उप-धारा (2) के उद्देश्य के लिए, न्यास अथवा संस्थान की कुल देयता निर्दिष्ट तिथि पर तुलन पत्र में देयता की बही राशि होगी लेकिन जिसमें निम्नलिखित राशि शामिल नहीं होगी, जिनके नाम हैं :—

  (i) न्यास अथवा संस्थान का पूंजीगत कोष अथवा संचय राशि अथवा निधि, जिस भी नाम से बुलाया जाए

 (ii) व्यय पर आरक्षित अथवा अतिरिक्त अथवा अधिक कोष, जिस भी नाम से जाना जाए

 (iii) आकस्मिक देयता का प्रतिनिधित्व करने वाली कोर्इ राशि

(iv) अनिश्चित देयताओं को छोड़कर सम्मिलित देयता के लिए बनाए गए प्रावधानों का प्रतिनिधित्व करने वाली कोर्इ राशि

 (v) कराधान के लिए प्रावधान का प्रतिनिधित्व करने वाली कोर्इ राशि, आयकर अधिनियम के अंतर्गत प्रतिदाय के तौर पर दावा किए गए कर की राशि को कम करके अग्रिम कर भुगतान के तौर पर अथवा स्त्रोत पर कर कटौती अथवा संग्रहण के तौर पर दिए गए कर की राशि को छोड़कर, इस सीमा तक उसके लागू कानून के अनुसार आय के संदर्भ में देययोग्य कर पर अतिरिक्त

स्पष्टीकरण - इस नियम के उद्देश्यों लिए -

(क) "लेखापाल" का अर्थ चार्टड अकाउंटेंट अधिनियम, 1949 (1949 का 38) के अर्थ के भीतर भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंड संस्थान का सदस्य होगा जिसे ऑडिटर के तौर पर न्यास अथवा संस्थान द्वारा नियुक्त न किया गया हो ;

(ख) किसी न्यास अथवा संस्थान के संबंध में "तुलन पत्र" का अर्थ होगा निर्दिष्ट तिथि पर आहरित ऐसे न्यास अथवा संस्थान (उसका परिशिठट नोट तथा खाते के अभिन्न अंग सहित) की बैलेंस शीट जिसे लेखापाल द्वारा अंकेक्षित किया गया है ;

(ग) मर्चेंट बैंकर का अर्थ भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड, 1992 (1992 की 15) की धारा 3 के अंतर्गत संस्थापित भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड के साथ पंजीकृत श्रेणी I का मर्चेंट बैंकर ;

(घ) शेयर अथवा प्रतिभूति के संबंध में 'उद्धृत शेयर अथवा प्रतिभूति' का अर्थ समय-समय पर नियमितीकरण के साथ किसी पंजीकृत शेयर बाजार पर उद्धृत शेयर अथवा प्रतिभूति है, जहां ऐसे शेयर अथवा प्रतिभूतियों का उद्धृतीकरण व्यापार के सामान्य अवधि में किए गए वर्तमान लेनदेन पर आधारित है;

(ड़) "प्राधिकृत शेयर बाजार" का अर्थ वही होगा जैसा प्रतिभूति अनुबंध (नियामक) अधिनियम, 1956 (1956 की 42) की धारा 25 के वाक्यांश में निर्दिष्ट है;

(च) 'पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता' का वही अर्थ होगा जैसा संपत्ति कर नियम, 1957 के नियम 8क के साथ पठित संपत्ति कर अधिनियम, 1957 (1957 की 27) की धारा 34कख में निर्दिष्ट है;

(छ) "प्रतिभूति" का अर्थ वही होगा जैसा प्रतिभूति अनुबंध (नियामक) अधिनियम, 1956 (1956 की 42) की धारा 2 के वाक्यांश (ज) में निर्दिष्ट है;

(ज) "निर्दिष्ट तिथि" का अर्थ वह तिथि होगा जैसा अधिनियम की धारा 115नघ के स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट है;

(झ) "स्टाम्प ड्यूटी की राशि" का अर्थ एक अचल संपत्ति के संबंध में स्टॉम्प ड्यूटी के भुगतान के लिए केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा अपनार्इ अथवा आंकी अथवा मूल्यांकनीय राशि है;

(ञ) "गैर-उद्धृत शेयर तथा प्रतिभूति", शेयर अथवा प्रतिभूतियों के संबंध में, का अर्थ शेयर तथा प्रतिभूति है जो उद्धृत शेयर अथवा प्रतिभूति नहीं है"।

 

(राजेश कुमार केडिया)

निदेशक (टीपीएल-I)

दूरभाष सं: 011-23095446