आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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हस्ताक्षर तिथि

2022

लागू होना

-

संश्लेषित पाठ

आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण (एमएलआई) को रोकने के लिए कर संधि संबधी उपायों को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते का संश्लेषित विषय और आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतांत्रिक सरकार और एस्टोनिया गणतंत्र के बीच समझौता

इस दस्तावेज को भारत और एस्टोनिया के सक्षम प्राधिकारी के द्वारा संयुक्त तौर पर तैयार किया गया है और यह एमएलआई द्वारा समझौते हेतु किए गए संशोधनों के बारे में उनकी समझ को दर्शाता है।

यह दस्तावेज 19 सितंबर, 2011 (समझौता) को हस्ताक्षर किए गए आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतंत्र सरकार और एस्टोनिया सरकार के बीच समझौते को लागू करने के लिए संश्लेषित विषय को प्रस्तुत करता है जिसे 7 जून, 2017 ("एमएलआई") को भारत और एस्टोनिया द्वारा हस्ताक्षर किए गए आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण को रोकने के उपायों से संबंधित कर संधि को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते द्वारा संशोधित किया गया था।

दस्तावेज को 25 जून, 2019 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा किए गए भारत की एमएलआई स्थिति और 15 जनवरी 2021  को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा एस्टोनिया की एमएलआई स्थिति के आधार पर तैयार किया गया था। यह एमएलआई की स्थितियां संशोधनों के अनुसार है जैसा एमएलआई में बताया गया है। एमएलआई स्थितियों हेतु किए गए संशोधन इस समझौते पर एमएलआई के प्रभावों को संशोधित कर सकते हैं।

समझौते और एमएलआई के प्रमाणिक कानूनी विषय प्रधानता लेंगे और शेष कानूनी विषय लागू रहेंगे।

एमएलआई के प्रावधान जो समझौते के प्रावधानों के संबंध में लागू होते हैं वह समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के संदर्भ में इस दस्तावेज के संपूर्ण विषय में बॉक्स में शामिल है। एमएलआई के प्रावधानों वाले बॉक्स को दोहरे कराधान परिहार समझौते के प्रावधानों के आदेश के अनुसार सामान्य रूप से शामिल किया जा चुका है।

एमएलआई के प्रावधानों के विषय में परिवर्तन एमएलआई के प्रावधानों की समझ को सुविधाजनक बनाने के लिए समझौते (जैसे "अंतर्निहित कर समझौता" और "समझौते", "संविदाकारी क्षेत्राधिकार" और "संविदाकारी राष्ट्र") में प्रयोग की गई शब्दावली हेतु एमएलआई में प्रयोग शब्दावली के अनुरूप बनाई गई है। शब्दावली में परिवर्तन का मकसद दस्तावेज की पठनीयता को बढ़ाना है नाकि एमएलआई के प्रावधानों के अर्थ को परिवर्तित करना। इसी प्रकार, एमएलआई के प्रावधानों के अंशों में भी परिवर्तन किए गए हैं। इसी प्रकार, एमएलआई के प्रावधानों के हिस्सों के लिए किए गए परिवर्तन जो समझौते के प्रावधानों का वर्णन करते हैं, वर्णनात्मक भाषा को पठनीयता को सुविधाजनक बनाने के लिए मौजूदा प्रावधानों के कानूनी संदर्भों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।

सभी मामलों में, समझौते के प्रावधानों हेतु संदर्भ किए गए हैं या समझौते को समझा जाना चाहिए जैसा समझौते में संदर्भित है जैसा एमएलआई के प्रावधानों द्वारा संशोधित है, बशर्ते कि एमएलआई के ऐसे प्रावधान प्रभावी हो चुके हों।

संदर्भ

एमएलआई के वास्तविक कानूनी विषय (अंग्रेजी में) को एमएलआई निक्षेपागार (ओईसीडी) वेबपेज के निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है

http://www.oecd.org/tax/treaties/multilateral-convention-to-implement-tax-treaty-related-measures-to-prevent-BEPS.pdf

समझौते (अंग्रेजी में) के वास्तविक कानूनी विषय निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है :

भारत में :

https://www.incometaxindia.gov.in/Pages/international-taxation/dtaa.aspx

एस्टोनिया में :

https://www.rahandusministeerioum.ee/en

25 जून, 2019 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा किए गए भारत की एमएलआई स्थिति और 15 जनवरी,2021 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा एस्टोनिया की एमएलआई स्थिति को MLI Depositary (OECD) webpage पर देखा जा सकता है।

 

एमएलआई प्रावधानों का प्रभावी होना

समझौते पर लागू होने वाले एमएलआई के प्रावधान उसी तिथि को प्रभावी नहीं होगे जिस दिन समझौते के मूल प्रावधान प्रभावी हुए। एमएलआई के प्रत्येक प्रावधान विभिन्न तिथियों पर प्रभावी हो सकते हैं जो शामिल करों के प्रकार पर (स्रोत पर कर हटाया गया या अन्य कर लगाए गए) और भारत और एस्टोनिया के एमएलआई प्रावधानों में उनके द्वारा की गई विकल्पों पर निर्भर करता है।

संशोधनों के दस्तावेजों को जमा करने की तिथियां : भारत के लिए 25 जून और एस्टोनिया के लिए 15 जनवरी, 2021

एमएलआई के प्रभावी होने की तिथि : भारत के लिए 1 अक्टूबर, 2019 और एस्टोनिया के लिए 1 मई, 2021

जबतक इस दस्तावेज में अन्यथा कहीं निर्दिष्ट न हो, एमएलआई के अनुच्छेद 35 के पैराग्राफ 1, 2, 3 और 7 के अनुसार, एमएलआई के प्रावधान समझौते के संदर्भ प्रभावी होगा :

  •  भारत में

 ➢  अनिवासी को दी गई या जमा की गई राशि पर स्रोत पर करों पर कटौती करने के लिए, जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 जनवरी 2022 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाली करयोग्य अवधि के पहले दिन या उसके बाद होती हो

 ➢  भारत द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संदर्भ में, 1 जुलाई, 2022 से छह कैलेंडर महीने की अवधि की समाप्ति को या उसके बाद प्रारंभ होने की करयोग्य अवधि के संबंध में लगाए गए अन्य सभी करों के लिए

  •  एस्टोंनिया में

 ➢  अनिवासी को दी गई या जमा की गई राशि पर स्रोत पर करों पर कटौती करने के लिए, जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 जनवरी 2023 को या उसके बाद होती हो और

 ➢  एस्टोनिया द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संदर्भ में, 1 जुलाई, 2023 से छह कैलेंडर महीने की अवधि की समाप्ति को या उसके बाद प्रारंभ होने की करयोग्य अवधि के संबंध में लगाए गए अन्य सभी करों के लिए

एस्टोनिया के साथ दोहरे कराधान को रोकने और राजकोषीय चोरी की रोकथाम के लिए समझौता

चूंकि दोहरे कराधान को रोकने और आय पर करों के संबंध में राजकोषीय चोरी की रोकथाम भारतीय गणतांत्रिक सरकार और एस्टोनिया गणतंत्र के बीच एक समझौता या प्रोटोकॉल 19 सितंबर, 2011 को टेलिन, एस्टोनिया में हस्ताक्षरित हुआ।

और चूंकि उक्त समझौते के प्रभावी होने की तिथि 20 जून, 2012 है, प्रक्रियाओं के पूरा होने की अधिसूचना की बाद की तिथि के तौर पर जैसा कथित समझौते के अनुच्छेद 30 के पैराग्राफ 2 के अनुसार कथित समझौते के प्रभावी होने के लिए संबंधित कानूनों द्वारा आवश्यक है

और चूंकि उक्त समझौते के अनुच्छेद 30 के पैराग्राफ 3 के उप-पैराग्राफ (क) बताता है कि उक्त समझौते के प्रावधान कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ के बाद के 1 अप्रैल को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में भारत में प्रभावी होगा।

अब, इसलिए, आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 90 द्वारा दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा निर्देश देता है कि कथित समझौते के सभी प्रावधान जैसा साथ अनुलग्नक में वर्णित है, 1 अप्रैल, 2013 से प्रभावी भारतीय संघ में प्रभावी होगा।

अधिसूचना : सं. 27/2012 [एफ.नं 503/02/1997-एफटीडी-1]/एसओ 1677(ई), दिनांक 25.07.2012

अनुलग्नक

आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतांत्रिक सरकार और एस्टोनिया गणतंत्र के बीच समझौता

भारतीय गणतांत्रिक और एस्टोनिया गणतंत्र आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए समझौता करने और दोनों देशों के बीच आर्थिक समन्वय को प्रोत्साहित करने की इच्छुक हैं

एमएलआई के अनुच्छेद 6 के निम्नलिखित पैराग्राफ 1 को इस समझौते की प्रस्तावना में शामिल किया जाता है

एमएलआई का अनुच्छेद 6 - एक अंतर्निहित कर समझौते का उद्देश्य

कर परिहार या अपवंचन (तीसरे क्षेत्राधिकार के निवासी के प्रत्यक्ष लाभ के लिए समझौते में मुहैया कराए गए राहत को प्राप्त के उद्देश्य से ट्रीटी-शॉपिंग व्यवस्था के माध्यम सहित) के माध्यम से कम किए गए कर या गैर-कराधान के लिए अवसर बनाए बिना इस समझौते द्वारा अंनर्निहित करों के संबंध में दोहरे कराधान को समाप्त करने के लिए

निम्नानुसार सहमत हुए हैं :

अनुच्छेद 1

शामिल व्यक्ति

यह समझौता उन व्यक्तियों पर लागू होता है जो एक या दो संविदाकारी राष्ट्रों के निवासी हैं।

अनुच्छेद 2

अंतर्निहित कर

1. यह समझौता एक संविदात्मक राष्ट्र अथवा उसके राजनीतिक उपसंभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण की ओर से आय पर करों के लिए लागू होगा, उस प्रणाली के बावजूद जिसमें यह लगाए गए हैं।

2. माना जाएगा कि आय पर कुल आय पर अथवा आय के हिस्सों या पर अधिरोपित समस्त कर लगेगा जिसमें चल तथा अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति पर कर शामिल हैं और उद्यम द्वारा दिए गए पारिश्रमिक अथवा वेतन की कुल राशि पर कर लगेगा

3. मौजूदा कर, जिसके लिए समझौता लागू होगा, विशेष तौर पर निम्न है :

(क) भारत में, आयकर, उसपर किसी अधिभार सहित (इसके बाद "भारतीय कर' के तौर पर संदर्भित)

(ख) एस्टोनिया में, आयकर

(तत्पश्चात् "एस्टोनिया कर' के तौर पर संदर्भित)

4. समझौता किसी समान अथवा महत्वपूर्ण समान करों पर भी लागू होगा जो मौजूदा करों के स्थान पर अथवा के अतिरिक्त समझौते के हस्ताक्षर करने की तिथि के पश्चात् लागू होते हैं। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी एक-दूसरे के महत्वपूर्ण परिवर्तनों जो कि संबंधित कराधान कानूनों में किये गए हैं, को अधिसूचित करेंगे।

अनुच्छेद 3

सामान्य परिभाषाएं

1. इस समझौते के लिए, जबतक संदर्भ अन्यथा आवश्यक है :

(क) ख) "भारत" शब्द का अर्थ भारतीय क्षेत्र हैं जिसमें उसका क्षेत्रीय समुद्र तथा हवाई क्षेत्र शामिल हैं साथ ही साथ समुद्री कानून पर राष्ट्र संघ समुद्री समझौता, सहित भारतीय कानून के अनुसार तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, अन्य कोई समुद्री क्षेत्र शामिल हैं जिसमें भारत का स्वायत्त अधिकार, अन्य अधिकार तथा क्षेत्राधिकार शामिल हैं

(ख) शब्द "एस्टोनिया" का अर्थ एस्टोनिया गणतंत्र और जब भौगोलिक अर्थ में प्रयोग किया गया हो तो उसका अर्थ है एस्टोनिया का क्षेत्र और एस्टोनिया के प्रादेशिक जलक्षेत्र से सटा कोई अन्य क्षेत्र जिसके अंतर्गत एस्टोनिया के कानूनों के अंतर्गत और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार एस्टोनिया के अधिकार समुद्री तल, उसकी अधोभूमि और उनके प्राकृति संसाधनों के संबंध में प्रयोग किए जा सकते हैं

(ग) शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र" का अर्थ है भारतीय गणतंत्र या एस्टोनिया गणतंत्र जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक हो

(घ) शब्द "व्यक्ति" में शामिल है एक व्यक्ति, एक कंपनी, व्यक्तियों की एक निकाय और अन्य कोई उद्यम जिसे एक संबंधित संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कराधान कानूरों के अंतर्गत एक करयोग्य यूनिट के तौर पर समझा जाता है

(ड़) शब्द "कंपनी" का अर्थ कोई निकाय निगमित या कोई उद्यम जिसे कर उद्देश्यों के लिए निकाय कार्पोरेट के तौर पर समझा जाता है

(च) शब्द "उद्यम" किसी व्यापार को करने वाले पर लागू होता है

(छ) शब्द "संविदाकारी राष्ट्र का एक उद्यम" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र का उद्यम" का अर्थ क्रमश: एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा चलाए जा रहे उद्यम से है

(ज) शब्द "अंतर्राष्ट्रीय यातायात" का अर्थ एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा संचालित किए गए समुद्री जहाज या वायुयान द्वारा कोई परिवहन है केवल तब छोड़कर जब समुद्री जहाज या वायुयान अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थानों के बीच ही संचालित किया जाता है

(झ) शब्द "सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ :

(i) भारत में : वित्त मंत्री, भारत सरकार या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि

(ii) एस्टोनिया में : वित्त मंत्री या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि

(ञ) शब्द "राष्ट्रीय" का अर्थ :

(i) कोई व्यक्ति जिसके पास एक संविदाकारी राष्ट्र की राष्ट्रीयता है

(ii) कोई कानूनी व्यक्ति, सांझेदार या संघ जो एक संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानूनों से ऐसे अपनी स्थिति को प्राप्त करता है

(ट) शब्द "कर" का अर्थ भारतीय या एस्टोनिया कर, जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक हो लेकिन इसमें वह राशि शामिल नही है जो उन करों के संबंध में किसी गलती या चूक के संदर्भ में दी जानी हो जिस पर यह समझौता लागू होता हो या जो उन करों के संबंध में लगाए गए जुर्माने या दंड को दर्शाता हो।

(ठ) शब्द "वित्त वर्ष" का अर्थ

(i) भारत के मामले में : 1 अप्रैल को प्रारंभ होने वाला वित्त वर्ष

(ii) एस्टोनिया के मामले में : कराधान अवधि जैसा आयकर से संबंधित एस्टोनियन कराधान कानूनों में परिभाषित है।

2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा किसी भी समय समझौते को लागू करने के संदर्भ में, उसमें निर्दिष्ट न होने वाला किसी शब्द का वही अर्थ होगा, जबतक संदर्भ के लिए अन्यथा आवश्यकता न हो, जैसा उन करों के लिए उस राष्ट्र के कानून के अंतर्गत उस समय हो जिस पर समझौता लागू होता है, उस राष्ट्र के अन्य कानूनों के अंतर्गत शब्द हेतु दिए गए अर्थ पर प्रचलित उस राष्ट्र के लागू होने वाले कर कानूनों के अंतर्गत कोई भी अर्थ है।

अनुच्छेद 4

निवासी

1. इस करार के लिए शब्द ''एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी'' का अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति से है जिस पर उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत उसके अधिवास, निवास, प्रबंधन-स्थान, निगमन का स्थान अथवा किसी ऐसे ही अन्य कारण से कर लगाया जा सकता है। इस शब्द में, हालांकि, कोई ऐसा व्यक्ति शामिल नही है जो उस राष्ट्र में ही कर देने के लिए उत्तरदायी है उस राष्ट्र में स्रोतों से आय के संदर्भ में ही।

2. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण से दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का एक निवासी एक व्यक्ति है तो उसकी स्थिति निम्नानुसार निर्धारित होगी :

(क) उसे केवल उस राष्ट्र में ही निवासी होना समझा जाएगा जिसमें उसके लिए स्थाई आवास उपलब्ध है, यदि उसको दोनों राष्ट्रों में उसके लिए स्थाई गृह हो, उसे उसी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा जिसके साथ उसके निजी और आर्थिक संबंध घनिष्ठ हैं (महत्पूर्ण हितों का केंद्र)

(ख) यदि राष्ट्र जिसमें उसके महत्वपूर्ण हितों का केंद्र निर्धारित न किया जा सके या उसके पास किसी भी राष्ट्र में कोई स्थाई आवास उपलब्ध न हो तो उसी राष्ट्र में निवासी के तौर पर समझा जाएगा जिसका वह आदतन निवासी है

(ग) यदि वह आदतन दोनों राष्ट्रों में रहता हो या दोनों में से किसी में न रहता हो तो उसे उसी राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जिसका वह नागरिक है

(घ) यदि वह दोनों राष्ट्रों का नागरिक है या किसी का नागरिक नहीं है तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी सहमति द्वारा विवाद का निपटारा करेंगे

3. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण से एक व्यक्ति को छोड़कर एक आदमी दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी व्यक्ति इसके प्रभावी प्रबंधन पर विचार करते हुए आपसी समझौते की मदद से मामले को सुलझाने का प्रयास करेंगे। ऐसे समझौते की अनुपस्थिति में, ऐसे व्यक्ति को समझौते के अंतर्गत लाभ लेने के लिए किसी भी संविदाकारी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

अनुच्छेद 5

स्थायी प्रतिष्ठान

1. इस समझौते के लिए, शब्द "स्थायी स्थापना" का अर्थ एक व्यापार जिसके माध्यम से एक उद्यम के व्यापार आंशिक या पूर्ण रूप से चलता है, का एक निश्चित स्थान है

2. शब्द "स्थायी स्थापना" में विशेष रूप से शामिल हैं:

(क) प्रबंधन का एक स्थान

(ख) एक शाखा

(ग) एक कार्यालय

(घ) एक फैक्ट्री

(ड़) एक कार्यशाला;

(च) एक बिक्री आउटलेट

(छ) दूसरों के लिए भंडारण सुविधाएं देने के लिए एक व्यक्ति से संबंधित एक वेयरहाउस

(ज) एक खेत, वृक्षारोपण या अन्य जगह. जहां कृषि, वानिकी, वृक्षारोपण या संबंधित गतिविधियां की जाती हैं और

(झ) एक खान, एक तेल या गैंस का कुआँ से, एक खदान या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए अन्य कोई जगह

3. (क) कोई भवन-स्थल अथवा निर्माण, प्रस्थापन अथवा संयोजन परियोजना अथवा उससे संबंधित पर्यवेक्षी कार्यकलाप केवल तब स्थाई प्रतिष्ठान बनाती है जब ऐसा स्थल, परियोजना या गतिविधि 9 महीनों से अधिक हो

(ख) कर्मचारियों की मदद से एक उद्यम द्वारा या एक स्थाई प्रतिष्ठान को गठित करने के ऐसे उद्देश्य के लिए उद्यम द्वारा भर्ती अन्य कर्मियों की ओर से सेवा देना जिसमें परामर्शकारी सेवाएं शामिल हैं लेकिन केवल वहां जहां किसी 12 महीनों की अवधि के अंदर छह महीनों से अधिक की कुल अवधि के लिए राष्ट्र के अंदर उस प्रकार की गतिविधियां (उसी या संबंधित परियोजना के लिए) जारी रहती हैं।

4. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के होते हुए भी शब्द "स्थाई संस्थापन" निम्न को शामिल न करने के लिए समझा जाएगा

(क) सुविधा का प्रयोग केवल उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल के भंडारण, प्रस्तुति या कभी-कभार की सुपुर्दगी के लिए ही है

(ख) उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल के भंडार का रखरखाव केवल भंडारण या प्रदर्शन के लिए ही है

(ग) अन्य उद्यम द्वारा प्रसंस्करण के एकमात्र उद्देश्य के लिए ही उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल का रखरखाव

(घ) उद्यम के लिए सूचना को एकत्रित करने के या उत्पाद या व्यापारिक माल की खरीद के एकमात्र उद्देश्य के लिए व्यापार के निश्चित स्थान का अनुरक्षण

(ड़) एक प्रारंभिक या सहायक स्वरूप की अन्य कोई गतिविधि करने के एकमात्र उद्देश्य, उद्यम हेतु, के लिए ही व्यापार का एक निश्चित स्थान

(च) उप पैराग्राफ (क) से (ड़) में निर्दिष्ट गतिविधियों के किसी संयोजन के लिए ही व्यापार के निश्चित स्थान का अनुरक्षण बशर्ते कि इस संयोजन के परिणामस्वरूप व्यापार के निश्चित स्थान की कुल गतिविधि प्रारंभिक या सहायक प्रकार की हो

5. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों के न होते हुए भी, जहां एक व्यक्ति - एक स्वतंत्र स्थिति के एजेंट को छोड़कर जिस पर पैराग्राफ 7 लागू होता है - अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम की ओर से एक संविदाकारी राष्ट्र में कार्य करता है तो उस उद्यम को किसी गतिविधि जो वह व्यक्ति उद्यम के लिए करता है, के संबंध में प्रथम-निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई प्रतिष्ठापन होने के तौर पर समझा जाता है यदि एक व्यक्ति -

(क) उद्यम की ओर से अनुबंध को अंतिम रूप देने के लिए उस संविदाकारी राष्ट्र में अधिकार हो या आदतन कार्य करता हो जबतक उसकी गतिविधियां पैराग्राफ 4 में निर्दिष्ट तक सीमित हो जो, व्यापार के निश्चित स्थान के माध्यम से की जाती है, उस पैराग्राफ के प्रावधानों के अंतर्गत एक स्थाई प्रतिष्ठापन को निश्चित स्थान नही बनाएगा या

(ख) उसके पास ऐसा कोई अधिकार न हो लेकिन आदतन प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में वह उत्पाद या करोबारी माल का स्टॉक रखता हो जिसे वह उद्यम की ओर से उस उत्पाद या कारोबार माल की सुपुर्दगी करता हो।

(ग) आदतन पूर्ण रूप से या लगभग पूर्ण रूप से खुद उद्यम के लिए प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ऑर्डर को सुरक्षित करता है

6. एक उद्यम केवल इसलिए ही एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई संस्थापन होने के तौर पर नहीं समझा जाएगा क्योंकि ब्रोकर, साधारण कमीशन एजेंट या अन्य किसी स्वतंत्र स्वरूप के अन्य एजेंट के माध्यम से उस राष्ट्र में व्यापार करता है बशर्ते कि ऐसा व्यक्ति अपना साधारण व्यापार करता हो। हालांकि ऐसा एक एजेंट उद्यम की ओर से पूर्णता या लगभग पूर्ण रूप से की गतिविधियां करता हो तो उसे इस पैराग्राफ के अर्थ के अंतर्गत एक स्वतंत्र एजेंट के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

7. तथ्य है कि एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है जो नियंत्रण करती है य एक कंपनी द्वारा नियंत्रित होती है जो अन्य संविदाकारी राष्ट की एक घरेलू कपंनी है या जो उस अन्य राष्ट्र (या तो स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से या अन्यथा) में व्यापार करती है तो कोई कंपनी अपनी ओर से वह अन्य स्थाई प्रतिष्ठान गठित नहीं करेगी।

अनुच्छेद 6

अचल संपत्ति से आय

1 अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति (कृषि या वानिकी से आय सहित) से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त आय उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।

2. शब्द "अचल संपत्ति" का अर्थ वही होगा जैसा राष्ट्र जिसमें संपत्ति का सवाल मौजूद है, के कानून के अंतर्गत है। शब्द किसी भी मामले में अचल संपत्ति, अचल संपत्ति के संबंध में दावे का कोई अधिकार, पशुधन और कृषि और वानिकी में प्रयोग उपकरण हेतु सहायक संपत्ति, अधिकार जिसके लिए संबंधित भूमि-संपत्ति के सामान्य कानून के प्रावधान लागू होते हैं, अचल संपत्ति का उपभोग और परिवर्तशील या निश्चित भुगतान के अधिकार जिसे खनिज निक्षेप, स्रोत और अन्य प्राकृतिक संसाधन, समुद्री जहाज, बोट, मोटर वाहन और वायुयान के कार्य करने या कार्य करने के अधिकार को अचल संपत्ति के तौर पर नहीं समझा जाएगा, को शामिल करेगा।

3. पैराग्राफ 1 के प्रावधान अचल संपत्ति के प्रत्यक्ष प्रयोग, या भाड़े पर देने या किसी अन्य रूप में प्रयोग करने से प्राप्त आय के तौर पर लागू नहीं होंगे।

4 पैराग्राफ 1 और 3 के प्रावधान भी एक उद्यम की अचल संपत्ति से आय और स्वतंत्र निजी सेवाओं देने के लिए प्रयोग की गई अचल संपत्ति से आय के लिए लागू होंगे।

अनुच्छेद 7

व्यापारिक लाभ

1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के लाभों पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगाया जाएगा जब तक कि वह उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से उस राष्ट्र में कारोबार नहीं करता हो। यदि उक्त उद्यम उपर्युक्त तरीके से कारोबार करता हो तो उस उद्यम के लाभों पर दूसरे राष्ट्र में भी कर लगाया जा सकता है, किन्तु उसके लाभों के केवल उतने अंश पर ही कर लगेगा जो उस स्थायी संस्थापन को प्राप्त हुए माने जाएंगे।

2. पैराग्राफ 3  के प्रावधानों के अनुसार, जहां एक संविदाकारी राष्ट्र का कोई उद्यम दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो, उस स्थाई प्रतिष्ठान के कारण प्रत्येक संविदकारी राष्ट्र में लाभ होगा जिसके प्राप्त होने की संभावना बन सकती है यदि यह एक समान या उससे मिलती-जुलती परिस्थितियों में एक समान या मिलते-जुलते कार्यों में लगे हुए अलग और भिन्न उद्यम होते और वे उस उद्यम के साथ पूर्णत: स्वतंत्र रूप से कारोबार करते जिसका वह एक स्थासी संस्थापन है।

3. एक स्थायी प्रतिष्ठान के मुनाफे का निर्धारण करने में, कटौती खर्च के रूप में वहां की अनुमति दी जाएगी जो स्थायी प्रतिष्ठान के व्यापार के लिए व्यय हुए, जिसमें ऐसे किए गए कार्यपालिका और सामान्य प्रशासनिक व्यय शामिल हैं, चाहे यह उस राज्य में किए गए हो जहां स्थाई प्रतिष्ठापन स्थित है या कही और। एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा कटौती के तौर पर स्वीकार्य किया जाने वाला व्यय में केवल वही व्यय शामिल होंगे जो उस राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत कटौतीपूर्ण है। हालांकि, विशिष्ट सेवाएं देने के लिए या प्रबंधन के लिए, या, एक बैंकिंग उद्यम के मामले में को छोड़कर, स्थायी प्रतिष्ठान को दी गई राशि के ब्याज के रूप में, रॉयल्टी के रूप में, फीस के माध्यम से, पेटेंट या अन्य अधिकारों के उपयोग के बदले में अन्य इसी तरह के भुगतान या या कमीशन के रूप में उद्यम के मुख्यालय या इसके अन्य किसी कार्यालयों को स्थायी प्रतिष्ठान द्वारा दी गई राशि, यदि हो (वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति को छोड़कर), के संबंध में कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह, उद्यम के मुख्यालय या इसके अन्य कार्यालयों को दी गई राशि के रूप में, एक बैंकिंग उद्यम के मामले को छोड़कर, या प्रबंधन के लिए या दी गई विशिष्ट सेवाओं के लिए कमीशन के रूप में या पेटेट या अन्य अधिकार के प्रयोग के लिए बदले में रॉयल्टी शुल्क या अन्य इसी प्रकार के भुगतान के रूप में उद्यम के मुख्यालय या अन्य किसी कार्यालय को स्थाई प्रतिष्ठान द्वारा वसूली गई राशि (वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति को छोड़कर) के लिए स्थाई प्रतिष्ठान के लाभ के निर्धारण में, विचारनीय नहीं होगा।

4. जहां तक कि उद्यम के विभिन्न भागों हेतु उद्यम के कुल लाभ के विभाजन के आधार पर एक स्थाई प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभ को निर्धारित करने के लिए एक संविदाकारी राष्ट्र में इसे प्रथागत किया गया है पैराग्राफ 2 में कुछ भी ऐसे एक विभाजन, जिसे प्रथागत किया जा सकता है, द्वारा करारोपित किए जाने वाला लाभ को निर्धारित करने से उस संविदाकारी राष्ट्र को नहीं रोक सकेगा, हालांकि विभाजन की विधि ऐसी हो कि परिणाम इस अनुच्छेद में शामिल सिद्धांतों के अनुसार होगा।

5. कोई लाभ उद्यम के लिए उत्पाद या व्यापारिक माल उसे स्थायी प्रतिष्ठान द्वारा मात्र खरीद की वजह से एक स्थायी स्थापना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।

6. पूर्ववर्ती पैराग्राफ के लिए, स्थाई प्रतिष्ठान हेतु निर्दिष्ट लाभों को वर्ष दर वर्ष उसी विधि द्वारा निर्धारित किया जाएगा जबतक विरोध करने का कोई सही या उचित कारण न हो ।

7. जहां लाभ में आय की मद शामिल हो जो इस समझौते के अन्य अनुच्छेद में पृथक रूप से व्यावहारित होती है तो इस अनुच्छेदों के प्रावधान इस अनुच्छेद के प्रावधानों द्वारा प्रभावित नहीं होंगे।

अनुच्छेद 8

नौ परिवहन और हवाई परिवहन

1. अंतरराष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाजों या विमान के संचालन से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा प्राप्त लाभ केवल उस राष्ट्र में कर योग्य होगा।

2. अंतर्राष्ट्रीय यातायात में उत्पाद या करोबारी माल के परिवहन के लिए प्रयुक्त कंटेनरों (कंटेनरों के परिवहन के लिए ट्रेलर, नौका और संबंधित उपकरण) के प्रयोग, अनुरक्षण या किराये से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम का लाभ उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा वहां छोड़कर जहां ऐसे कंटेनरों को अन्य संविदाकारी राष्ट्र के अंतर्गत स्थानों के बीच उत्पाद या करोबारी माले के परिवहन के लिए प्रयोग किया जाता है।

3. इस अनुच्छेद के लिए अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाजों या वायुयानों के संचालन से सीधे संबंधित फंड पर ब्याज को ऐसे समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन से प्राप्त लाभ के तौर पर समझा जाएगा यदि वह ऐसे व्यापार करने का अभिन्न हिस्सा है और अनुच्छेद 11 के प्रावधान ऐसे ब्याज के संबंध में लागू नहीं होंगे।

4. पैराग्राफ 1 के प्रावधान एक पूल, एक संयुक्त व्यापार या एक अंतर्राष्ट्रीय संचालन एजेंसी में भागीदारी से लाभ हेतु लागू होगा।

अनुच्छेद 9

संबंधित उद्यम

1. जहां

(क) एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम प्रबंधन, नियंत्रण या अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेता है, या

(ख) एक ही व्यक्ति, प्रबंधन, नियंत्रण या एक संविदकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाग लेते हैं

और किसी भी मामले में शर्तें बनाई गई हों या उनके वाणिज्यिक या वित्तीय संबंधों में दो उद्यमों के बीच अधिरोपित होती हों जो उनसे अलग हैं जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच बनाई गई हो तो कोई लाभ जो, लेकिन उन शर्तों के लिए, एक उद्यमों हेतु उपार्जित हो जाता लेकिन उन शर्तों की वजह से उपार्जित नहीं हों सका, उसे उस उद्यम के लाभ में शामिल किया जा सकता है और तद्नुसार करारोपित हो सकती है।

2. जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उस राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ में शामिल हो और तद्नुसार कर - लाभ जिस पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम को उस अन्य राष्ट्र में कर देना पड़ा हो और ऐसा शामिल लाभ वह लाभ हो जो प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र के उद्यम हेतु प्राप्त किया गया होता यदि दोनों उद्यमों के बीच की गई शर्तें वह थी जिनको निजी उद्यमों के बीच किया गया होता तो अन्य राष्ट्र उन लाभों पर उसमें लगाए गए करों की राशि का उपयुक्त समायोजन करेगा। ऐसे समायोजन को निर्धारित करने के लिए इस समझौते के अन्य प्रावधानों हेतु यथोचित संबंध होना चाहिए था और संविदाकारी राष्ट्र यदि आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे।

अनुच्छेद 10

लाभांश

1.  एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी है द्वारा अन्य संविदाकारी राष्ट्र को दिया गया लाभांश उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।

2.  हालांकि, ऐसे लाभांश तद्नुसार उस राष्ट्र के कानून के अनुसार उस एक संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकता है जिसकी लाभांश देने वाली कंपनी एक घरेलू कंपनी है लेकिन यदि लाभांश के लाभार्थी मालिक अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी है तो ऐसा लगाया गया कर लाभांश की कुल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यह प्रावधान उस लाभ के संबंध में कंपनी के कराधान को प्रभावित नहीं करेगा जिसमें से लाभांश दिया जाता है।

3.  शब्द "लाभांश" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग हुआ है का अर्थ शेयर या अन्य अधिकार, ऋण-दावे के तौर पर नहीं, लाभ में भागीदारी साथ ही साथ अन्य निगमित अधिकार से आय जो उसी कराधान उपचार के अनुसार है जैसे राष्ट्र जिसकी वितरण करने वाली कंपनी घरेलू हैं, के कानून द्वारा शेयरों से आय के तौर पर होती है, है।

4.  पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि लाभांश के लाभार्थी स्वामी, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर, उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसका लाभांश देने वाली कंपनी निवासी है, वहां स्थित एक स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से, या वहां स्थित एक निश्चित आधार से उस अन्य राष्ट्र की स्वतंत्र सेवाओं में निष्पादित करता हो और स्वामित्व जिसके संबंध में दिए गए लाभांश ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान या निश्चित बेस से प्रभावी रूप् से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 और अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधन लागू होंगे।

5.  जहां एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है अन्य संविदाकारी राष्ट्र से आय या लाभ प्राप्त करता है तो वह राष्ट्र कंपनी द्वारा दिए गए लाभांश पर कोई कर अधिरोपित नहीं कर सकता, केवल जहां तक ऐसे लाभांश उस अन्य राष्ट्र के निवासी को दिए गए हों या जहां तक घारण जिसके संबंध में दिए गए लाभांश एक स्थाई प्रतिष्ठापन से प्रभावी रूप से संबंधित हो या उस अन्य राष्ट्र में स्थित निश्चित बेस, ना तो कंपनी के अविभाजित लाभ का विषय है ना ही कंपनी के अविभाजित लाभ पर कर का विषय, भले ही लाभांश दिया गया हो या अवितरित लाभ में ऐसे अन्य राष्ट्र में उत्पन्न आय या लाभ के पूर्ण या आंशिक लाभ शामिल हो।

अनुच्छेद 11

ब्याज

1.  एक संविदाकारी राष्ट्र में अर्जित ब्याज और अन्य संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।

2.  हालांकि, ऐसे ब्याज पर उस संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है जिसमें यह लगाया जाता है और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार लेकिन यदि ब्याज का लाभार्थी मालिक अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है तो ऐसा लगाया कर ब्याज की कुल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नही होना चाहिए।

3.  पैराग्राफ 2 के प्रावधान होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र में अर्जित ब्याज उस राष्ट्र में करमुक्त होगा बशर्ते कि यह निम्न द्वारा अर्जित या लाभकारी तौर पर नियंत्रित हो

(क) सरकार, एक राजनीतिक उप-प्रभाग या एक अन्य संविदाकारी राष्ट्र के स्थानीय प्राधिकारी

(ख) (i) भारत के मामले में, भारतीय रिजर्व बैंक और

(ii) एस्टोनिया के मामले में, एस्टोनिया बैंक या

(ग) अन्य कोई संस्थान जिस पर पत्रों के माध्यम से संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों के बीच समय समय पर सहमति हो सकती है

4 शब्द "ब्याज" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है का अर्थ है प्रत्येक प्रकार के ऋण दावों से आय, चाहे गिरवी राशि द्वारा सुरक्षित हो या नही और चाहे ऋणी के लाभ में भागीदार होने का अधिकार हो या नही और विशेषकर सरकारी प्रतिभूतियों से आय और प्रीमियम सहित बांड या डिबेंचर से आय और ऐसी प्रतिभूतियों, बांड या डिबेंचर से संबंधित पुरस्कार। विलंबित भुगतान के लिए जुर्माना शुल्क को इस अनुच्छेद के लिए ब्याज के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

5 पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर ब्याज के लाभार्थी मालिक उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसमें वहां स्थित एक स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से ब्याज उत्पन्न होता हो या वहां स्थित एक निश्चित स्थान से उस अन्य राष्ट्र में स्वतंत्र निजी सेवाएं देता हो और ऋण दावा जिसके संबंध में दिया गया ब्याज प्रभावी रूप से ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान या निश्चित आधार से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी मामला हो, के प्रावधान लागू होंगे।

6. ब्याज को एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जब अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो जहां हालांकि ब्याज देने वाला व्यक्ति चाहे वह एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो या नहीं, का एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई प्रतिष्ठान हो या उसके संबंध में निश्चित आधार है जिसके संबंध में ऋणग्रस्तता जिस पर दिया गया ब्याज व्यय किया गया है और ऐसे ब्याज ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान द्वारा वहन किए गए हों और ऐसे ब्याज ऐसा स्थाई प्रतिष्ठान या निश्चित आधार द्वारा वहन किए जाते हों तो ऐसे ब्याज उस राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जिसमें स्थाई प्रतिष्ठान या निश्चित आधार स्थित है।

7 जहां, अदाता और लाभार्थी मालिक के बीच या दोनों के बीच या कुछ व्यक्तियों के बीच एक विशेष संबंध के कारण ब्याज की राशि, ऋण-दावे जिसके लिए यह दिया जाता है, को ध्यान में रखते हुए ब्याज की राशि के उस राशि से अधिक होने पर, जो ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता और लाभार्थी मालिक द्वारा सहमति हो जाती, इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होंगे। ऐसे मामले में भुगतान का अतिरिक्त हिस्सा प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों को देखते हुए।

अनुच्छेद 12

तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टी तथा शुल्क

1.  एक संविदाकारी राष्ट्र में अर्जित होने वाले और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा की गई रायल्टियों या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस पर उस दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।

2.  हालांकि, इस प्रकार की रायल्टियां या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क पर उस संविदाकारी राष्ट्र में भी, जिसमें वे उद्भूत हुई या, उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा, लेकिन यदि रायल्टियों अथवा तकनीकी अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क का लाभार्थी स्वामी दूसरे संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है तो इस प्रकार लगाया गया कर तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी अथवा शुल्क की सकल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

3.  (क) इस अनुच्छेद में यथा-प्रयुक्त ''रायल्टियां'' शब्द का अभिप्राय किसी साहित्यिक, कलात्मक अथवा वैज्ञानिक कृति के किसी कापीराइट, जिसमें सिनेमेटोग्राफिक फिल्में अथवा टेलीविजन अथवा रेडियो प्रसारण के लिए प्रयुक्त फिल्में अथवा टेपें, किसी पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन अथवा मॉडल, प्लान, गुप्त फार्मूला अथवा प्रक्रिया या किसी औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक उपकरण के प्रयोग हेतु अथवा प्रयोगाधिकार हेतु अथवा औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक अनुभव से संबंधित सूचना सहित प्रतिफल के रूप में प्राप्त की गई किसी भी प्रकार की अदायगियां हैं।

(ख) शब्द ''तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क'' जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है,  का अर्थ प्रबंधकीय अथवा तकनीकी अथवा परामर्श सेवाओं अथवा तकनीकी सहायता के लिए प्रतिफल के तौर पर इस समझौते के अनुच्छेद 14 तथा 15 में निर्दिष्ट को छोड़कर किसी प्रकार का भुगतान है, तकनीकी अथवा अन्य कर्मी के सेवा के प्रावधान सहित

4.  पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे यदि तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियों का हितभागी स्वामी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने के कारण दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में, जिसमें तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियां उद्भूत होती हैं, वहां पर स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता है तथा जिस अधिकार, संपत्ति अथवा अनुबंध के संबंध में तकनीकी अथवा व्यावसायिक सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियां अदा की जाती हैं, वे ऐसे स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से सम्बद्ध हैं। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।

5.  (क) एक संविदाकारी राष्ट्र में तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टियां तथा शुल्क तब अर्जित हुई मानी जाएंगी, जब अदाकर्ता स्वयं उस संविदाकारी राष्ट्र की सरकार, एक राजनैतिक उप-प्रभाग, स्थानीय प्राधिकारी अथवा उस राष्ट्र का कोई निवासी हो। तथापि, जहां तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियां अदा करने वाले व्यक्ति का, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं, उस संविदाकारी राष्ट्र में ऐसा कोई स्थायी संस्थापन हो, जिनके संबंध में तकनीकी सेवाओं के लिए फीस तथा रायल्टियां अदा करने की जिम्मेदारी निभाई गई हो, और ऐसी तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियां उस संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत हुई मानी जाएगी जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।

(ख) जहां उप-पैराग्राफ (क) के अंतर्गत तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी अथवा शुल्क किसी भी संविदात्मक राष्ट्रों में उत्पन्न नहीं होता तथा किसी एक संविदात्मक राष्ट्रों में निष्पादित सेवाओं से संबंधित तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क अथवा संपत्ति अथवा अधिकार, प्रयोग का अधिकार अथवा प्रयोग से संबंधित रॉयल्टी, तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी अथवा शुल्क उस संविदात्मक राष्ट्र में उत्पन्न होनी समझी जाएगी।

6.  जहां, अदाकर्ता तथा हितभागी स्वामी के बीच अथवा उन दोनों और किसी अन्य व्यक्ति के बीच किसी विशेष प्रकार का संबंध होने के कारण प्रयोग, अधिकार अथवा सूचना के संबंध में रायल्टी की राशि जिसके लिए वह अदा की जाती है, किसी भी कारण से उस राशि से अधिक हो जाती है जिस पर ऐसे संबंधों की अनुपस्थिति में अदाकर्ता तथा हितभागी स्वामी द्वारा सहमति हो गई होती, वहां इस अनुच्छेद के प्रावधान केवल अंतिम वर्णित रकम पर लागू होंगे। ऐसे मामले में, अदायगियों का अधिकतर भाग इस करार के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कराधेय होगा।

अनुच्छेद 13

पूंजीगत लाभ

1.  अनुच्छेद 6 में उल्लिखित और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति के अंतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त अभिलाभों पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।

2.  [एमएलआई के अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 4 के पैराग्राफ द्वारा प्रतिस्थापित] [एक अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर उसके 50 प्रतिशत से अधिक के शेयरों के हस्तांतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त लाभ उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकती है]

एमएलआई के अनुच्छेद 9 के निम्नलिखित पैराग्राफ 4 इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 2 को प्रतिस्थापित करता है :

एमएलआई का अनुच्छेद 9 - मुख्यत: अचल संपत्ति से उसकी राशि की प्राप्ति वाले उद्यमों के शेयर या ब्याज के हस्तांतरण से पूंजी प्राप्ति

[इस समझौते]1 के लिए शेयर या तुलनीय ब्याज के हस्तांतरण से एक [संविदाकारी राष्ट्र] के निवासी द्वारा प्राप्ति जैसे एक सहभागी या न्यास, को अन्य [संविदाकारी राष्ट्र] में करारोपित किया जा सकता है यदि, हस्तांतरण के पूर्ववर्ती 365 दिनों के दौरान किसी भी समय, यह शेयर या तुलनीय ब्याज अन्य उस [संविदाकारी राष्ट्र] में स्थित अचल संपत्ति (वास्तविक संपत्ति) से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राशि के 50 प्रतिशत से अधिक प्राप्त होता हो

3.  स्थाई संस्थापन की व्यापारिक संपत्ति के भाग से बनी चल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति जिसमें संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में हेैं अथवा निश्चित स्थान से संबंधित चल संपत्ति ऐसे निश्चित स्थान अथवा ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान (अकेले अथवा पूर्ण उद्यम सहित) के हस्तांतरण से ऐसी प्राप्ति सहित स्वतंत्र निजी सेवाओं के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्रों में संविदाकारी राष्ट्र के निवासी हेतु उपलब्ध हैं, उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता है।

4.  अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित समुद्री जहाज या वायुयान के हस्तांतरण से अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाजों या वायुयानों का संचालन करने वाले एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्राप्त लाभ या ऐसे समुद्री जहाजों या वायुयानों के संचालन से संबंधित अचल संपत्ति उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा।

5.  कंपनी जो संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है, में पैराग्राफ 2 में निर्दिष्ट को छोड़कर शेयरों के हस्तांतरण से प्राप्ति उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।

6. बाद के पैराग्राफ में संदर्भ को छोड़कर किसी संपत्ति के अंतरण से प्राप्ति केवल उसी संविदाकारी राष्ट्र में करयोग्य होगी जिसका संक्रांता एक निवासी है।

अनुच्छेद-14

स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाएं

1.  व्यक्ति जो व्यावसायिक सेवाओं अथवा इसी प्रकार की स्वतंत्र गतिविधियों के प्रदर्शन से संविदात्मक राज्य का निवासी हैं, द्वारा प्राप्त आय केवल उस राष्ट्र में करयोग्य होगी केवल निम्नलिखित स्थितियों को छोड़कर, जब ऐसी आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में भी करयोग्य हो सकती हो:

(क) यदि वह अपनी गतिविधियों के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके लिए उपलब्ध निश्चित स्थान रखता हैं तो इस स्थिति में आय का उतना जैसा उस निश्चित स्थान आरोप्य हैं अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता हैं अथवा

(ख) यदि अन्य राष्ट्रों में उसका निवास संबंधित वित्तीय वर्ष को समाप्त होने वाले अथवा प्रांरभ होने वाली किसी 12 माह की अवधि में अवधि अथवा कुल 183 दिनों की अवधि अथवा इससे अधिक होती है तो इस स्थिति में केवल उतनी आय जितनी उस अन्य राष्ट्र में निष्पादित गतिविधियों से अर्जित होती है उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकती है

2.  शब्द "व्यावसायिक सेवा" में विशेषकर स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षिक अथवा शिक्षण गतिविधियां साथ ही साथ चिकित्सक, वकील, अभियंता, वास्तुशास्त्री, शल्य-चिकित्सक, दंत चिकित्सक तथा लेखाकार शामिल हैं।

अनुच्छेद 15

आश्रित निजी सेवाएं

1.  अनुच्छेद 16, 18, 19, 20 और 21 के प्रावधानों के अनुसार वेतन, मजदूरी और अन्य इसी प्रकार के पारिश्रमिक जिनको एक रोजगार के संदर्भ में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी की ओर से प्राप्त किया गया हो वह केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा जबतक कि रोजगार अन्य संविदकारी राष्ट्र में नहीं किया जाता। यदि रोजगार किया जाता है तो ऐसा पारिश्रमिक जिसे वहां से प्राप्त किया गया है वह उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता है।

2.  पैराग्राफ 1 के प्रावधान होते हुए भी, अन्य संविदाकारी राष्ट्र में किए गए रोजगार के संदर्भ में एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक केवल पहले बताए गए राष्ट्र में करयोग्य होगा यदि :

(क) प्राप्तकर्ता संबंधित वित्त वर्ष के प्रारंभ या समाप्त होने की किसी बारह महीने की अवधि में कुल 183 दिनों की अवधि या अवधियों के लिए अन्य राष्ट्र में मौजूद रहा हो।

(ख) एक नियोक्ता जो अन्य राष्ट्र का निवासी नही है, की ओर से या उसके द्वारा दिया गया पारिश्रमिक और

(ग) एक स्थाई प्रतिष्ठान या एक निश्चित बेस जिसका नियोक्ता अन्य राष्ट्र में हो, द्वारा वहन न किया गया पारिश्रमिक

3.  इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के होते हुए भी एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम द्वारा अंतर्राष्ट्रीय परिवहन में संचालित एक जहाज या वायुयान जो विदेश जाता हो में किए गए कार्य के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक।

अनुच्छेद 16

निदेशक शुल्क

एक कंपनी जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है में निदेशक मंडल के एक सदस्य के तौर पर अपनी हैसियत के अनुसार एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त निदेशक शुल्क और अन्य समकक्ष भुगतान अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकते हैं।

अनुच्छेद 17

कलाकार और खेलकर्मी

1.  अनुच्छेद 7, 14 और 15 के प्रावधानों के होते हुए भी एक मनोरंजनकर्ता जैसे थियेटर, मोशन पिक्चर, रेडियो और टेलीविजन कलाकार या एक संगीतकार या खेलकर्मी के तौर पर, निजी गतिविधियों से जैसे अन्य संविदाकारी राष्ट्र में की गई होती के तौर पर एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त आय, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।

2.  जहां एक मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी की क्षमता में उनके द्वारा किए गए निजी कार्य के संबंध में आय जैसे कि मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी अपने लिए उपार्जित नहीं करता लेकिन दूसरे व्यक्ति के लिए करता है तो अनुच्छेद 7, 14 और 15 के प्रावधान होते हुए भी वह आय उस संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है जिसमें मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी गतिविधियां करता है।

3.  पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान एक मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी द्वारा एक संविदाकारी राष्ट्र में की गई गतिविधियों से प्राप्त आय के लिए लागू नही होगा यदि गतिविधियां एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों या उसके राजनीतिक उप-संभाग या स्थानीय प्राधिकारी के सार्वजनिक फंड द्वारा वास्तव में समर्थित है। ऐसे मामले में आय उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसका मनोरंजकर्ता या खेलकर्मी एक निवासी है।

अनुच्छेद 18

पेंशन

1.  अनुच्छेद 19 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अनुसार, पिछले रोजगार के प्रतिफल में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को दिया गया अन्य समकक्ष पारिश्रमिक केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगी।

अनुच्छेद 19

सरकारी सेवा

1. (क) किसी संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके किसी राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किसी व्यक्ति को उस राष्ट्र अथवा उप-प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए की गई सेवाओं के संबंध में अदा किए गए पेंशन से भिन्न इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में ही कर लगेगा ।

(ख) हालांकि, ऐसे पारिश्रमिक पर केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में तभी कर लग सकेगा, यदि सेवाएं उस राष्ट्र में की जाती हैं, और व्यक्ति उस राष्ट्र का एक निवासी हो, जो

 (i) उस राष्ट्र का एक निवासी है अथवा

(ii) सेवाओं के प्रतिपादन के उद्देश्य मात्र के लिए उस राष्ट्र का निवासी नहीं बना हो।

2. (क) किसी संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके किसी राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अथवा उनके द्वारा सृजित निधियों में से किसी व्यक्ति को उस राष्ट्र अथवा उप-प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए प्रदान की गई सेवाओं के संबंध में अदा की गई किसी पेंशन पर केवल उस राष्ट्र में कर लगेगा।

(ख) हालांकि, ऐसी पेंशन पर केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में कर लगेगा, यदि व्यक्ति उस राष्ट्र का निवासी तथा नागरिक हो या

3. अनुच्छेद 15, 16 17 तथा 18 के प्रावधान संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके एक राजनीतिक उप-संभाग अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा निष्पादित व्यापार के संबंध में प्रतिपदित सेवाओं के संबंध में पारिश्रमिक तथा पेंशन हेतु लागू होगा।

अनुच्छेद 20

प्रोफेसर, अध्यापक और अनुसंधानकर्ता

1.  एक व्यक्ति जो किसी एक संविदाकारी राष्ट्र में उस राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविधालय, महाविद्यालय या अन्य प्राधिकृत शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षण या अनुसंधान करने के लिए जाता है और जो जाने से तुरंत पहले अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है या था तो ऐसे शिक्षण या अनुसंधान के लिए किसी पारिश्रमिक पर अन्य राष्ट्र में ही करयोग्य होगा। हालांकि, यह पैराग्राफ पहले निर्दिष्ट राष्ट्र में पहले जाने वाले व्यक्ति के जाने की तिथि से दो वर्षों से अधिक के लिए लागू नहीं होगा।

2.  यह अनुच्छेद केवल अनुसंधान से आय पर लागू होगा यदि ऐसा अनुसंधान लोक हित में व्यक्ति द्वारा किया जाता है तथा नाकि कुछ निजी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के लाभ के लिए।

3. इस अनुच्छेद के उद्देश्य के लिए, एक व्यक्ति संविदात्मक राज्य के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा यदि वह उस वित्त वर्ष में उस राज्य का निवासी हो जिसमें वह अन्य संविदात्मक राज्य जाता हैं अथवा तुरंत उत्तरगामी वित्त वर्ष में।

अनुच्छेद 21

विधार्थी

1.  एक विधार्थी जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र जाने से तुरंत पहले एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है या था और जो अपनी शिक्षा या प्रशिक्षण के उद्देश्य से ही उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में मौजूद है, अनुदान, ऋण और छात्रवृत्ति के अलावा अपने रखरखाव, शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए उस उसको किया गया भुगतान वह निम्न पर उस अन्य राष्ट्र में कर से मुक्त होगा बशर्ते कि ऐसा भुगतान उस राष्ट्र के बाहर स्रोत से अर्जित हुआ हो।

2.  पैराग्राफ 1 में शामिल न होने वाले रोजगार से अपने अनुरक्षण, छात्रवृत्ति और पारिश्रमिक के संदर्भ में पैराग्राफ 1 में संदर्भित एक विधार्थी उस संविदाकारी राष्ट्र के निवासियों के लिए उपलब्ध करों के संदर्भ में उसी छूट, राहत या कटौतियों के लिए ऐसे शिक्षण या प्रशिक्षण के दौरान हकदार होगा जहां वह जा रहा है।

3. इस अनुच्छेद के लाभ केवल ऐसी समयावधि तक उपलब्ध होंगे जो ऐसी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए तर्कसंगत हो अथवा प्रथागत रूप से अपेक्षित है परन्तु किसी भी हाल में किसी व्यक्ति को इस अनुच्छेद के लाभ उस दूसरे राष्ट्र में उसके प्रथम आगमन की तिथि से लगातार चार वर्षों की अवधि से अधिक नहीं मिलेगा।

अनुच्छेद 22

अन्य आय

1.  एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी की आय के मद, जहां भी उत्पन्न हो, जो इस समझौते के पूर्ववर्ती अनुच्छेदों के साथ व्यावहारित न हो केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगी।

2.  पैराग्राफ 1 के प्रावधान अचल संपत्ति, जैसी अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 2 में परिभाषित है, से आय को छोड़कर आय हेतु लागू नहीं होंगे यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर, ऐसी आय के प्राप्तकर्ता वहां स्थित एक स्थाई प्रतिष्ठापन के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो या अन्य संविदाकारी राष्ट्र में वहां स्थित एक निश्चित बेस से स्वतंत्र निजी सेवाएं देता हो और अधिकार या संपत्ति जिसके संबंध में दी गई आय ऐसे स्थाई प्रतिष्ठापन या निश्चित बेस से प्रभावी रूप से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।

3.  पैराग्राफ 1 के प्रावधान होते हुए भी, यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी लाटरी, क्रासवर्ड पहेली, घुड़दौड़ सहित रेस, कार्ड गेम और किसी भी प्रकार के सट्टे या जुएं के किसी अन्य खेल से जीत के रूप में आय प्राप्त करता है तो ऐसी आय पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।

अनुच्छेद 23

दोहरे कराधान के परिहार के लिए विधि

दोहरे कराधान को निम्नानुसार समाप्त किया जाएगा :

1.  भारत में :

(क) जहां भारत का एक निवासी आय प्राप्त करता है जिस पर इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार एस्टोनिया में कर लगाया जा सकता है भारत उस निवासी की आय पर कर से कटौती के तौर पर एस्टोनिया में दिए गए कर के बराबर राशि की कटौती की अनुमति देगा।

हालांकि ऐसी कटौती कर के उस हिस्से से अधिक नही होगी जिसको कटौती की जाने से पहले आंका गया जो उस आय हेतु निर्दिष्ट हो सकती है, जो भी मामला हो जिस पर एस्टोनिया में कर लगाया जा सकता है।

(ख) जहां समझौते के किसी प्रावधान के अनुसार भारत के निवासी द्वारा प्राप्त आय या भारत में कर से मुक्त होती है तो भारत फिर भी ऐसे निवासी की शेष आय पर कर की राशि की गणना करने में, छूट आय पर विचार कर सकता है।

2.  एस्टोनिया में :

(क) जहां एस्टोनिया का एक निवासी इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार आय प्राप्त करता है जिस पर भारत में कर लगाया जा सकता है एस्टोनिया उप-पैराग्राफ (ख) और (ग) के प्रावधानों के अनुसार कर से ऐसी आय की छूट देगा।

(ख) जहां एस्टोनिया का एक निवासी ऐसी आय को प्राप्त करता है जो अनुच्छेद 10, 11 और 12 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अनुसार है तो भारत में करयोग्य हो सकती है, एस्टोनिया भारत में दिए गए कर के बराबर राशि को उस निवासी की आय पर कर से कटौती के तौर पर अनुमति देगा। हालांकि ऐसी कटौती उस कर के हिस्से से अधिक नही होगी जिसको कटौती दिए जाने से पहले आंका गया जो उस हेतु निर्दिष्ट है जिस पर भारत में कर लगाया जा सकता है।

(ग) जहां समझौते के किसी प्रावधान के अनुसार एस्टोनिया के निवासी द्वारा प्राप्त आय एस्टोनिया में कर से मुक्त होती है तो एस्टोनिया फिर भी ऐसे निवासी की शेष आय पर कर की राशि की गणना करने में, छूट आय पर विचार कर सकते हैं।

अनुच्छेद 24

गैर-भेदभाव

1.  एक संविदाकारी राष्ट्र के नागरिक किसी कराधान या उससे संबंधित किसी अनिवार्यता के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र का विषय नहीं होगा, जोकि कराधान और संबंधित अनिवार्यताओं की तुलना में अन्य या और अधिक कष्टदायक है जिसके लिए उसी परिस्थिति में उस अन्य राष्ट्र के नागरिक, निवास के संबंध में विशेषकर, विषय हैं या हो सकते हैं। यह प्रावधान अनुच्छेद 1 के प्रावधान होते हुए भी उन व्यक्तियों के लिए भी लागू होंगे जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्र के निवासी नहीं है।

2.  एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित स्थायी संस्थापन पर उस दूसरे राष्ट्र में ऐसा कोई कराधान लागू नहीं किया जाएगा जो उस दूसरे राष्ट्र के उद्यमों पर समरूप कार्यकलापों को करने हेतु लागू होने वाले कराधान से अपेक्षाकृत कम अनुकूल हो। इस प्रावधान की व्याख्या ना तो ऐसे की जाएगी चूंकि एक स्थाई प्रतिष्ठापन जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की एक कंपनी उस कर की दर पर प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में वसूल सकती है जो प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र की समकक्ष कंपनी के लाभ पर अधिरोपण से दस प्रतिशत अधिक है, ना ही इस समझौते के अनुच्छेद 7 के पैराग्रॉफ 3 के प्रावधानों के साथ विवाद के तौर पर, के लाभ को वसूलने से संविदाकारी राष्ट्र को रोक सकता है।

3.  केवल उस स्थिति को छोड़कर जहां अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 1, अनुच्छेद 11 के पैराग्राफ 7 या अनुच्छेद 12 के अनुच्छेद 6 के प्रावधान लागू होते हैं अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी को एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा दिए गए ब्याज, रॉयल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क और अन्य अदायगी, ऐसे उद्यम के करयोग्य लाभों को निर्धारित करने के लिए, उन्हीं शर्तों के अंतर्गत कटौतीयोग्य है जैसे यह प्रथम-निर्दिष्ट राष्ट्र के निवासी को दिए गए थे।

4.  एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम, जिसकी पूंजी अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक या एक से अधिक निवासियों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण या आंशिक तौर पर स्वागत या नियंत्रित है, उससे संबंधित किसी कराधान या किसी अनिवार्यता के लिए प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र का विषय नहीं होगें जो कराधान की तुलना में अधिक कष्दायक है और उससे संबंधित अनिवार्यता जिसके प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र के अन्य वही उद्यम विषय है या हो सकते हैं।

5.  इस अनुच्छेद के प्रावधानों की व्याख्या सिविल स्थिति या पारिवारिक उत्तरदायित्वों जो अपने खुद के निवासियों को दी जाती है, के कारण कराधान उद्देश्य के लिए किसी निजी भत्ते, राहत और कटौतियों को अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को देने के लिए संविदाकारी राष्ट्र के दायित्व के तौर पर व्याख्या नहीं की जाएगी।

6.  इस अनुच्छेद के प्रावधान, अनुच्छेद 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, प्रत्येक प्रकार के और तरह के करों के लिए लागू होगा।

अनुच्छेद 25

आपसी समझौता प्रक्रिया

1.  जहां एक व्यक्ति को लगता है कि एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के कार्य का परिणाम या कराधान में उसके परिणाम इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार नहीं हैं तो वह उन राष्ट्रों के घरेलू कानून द्वारा मुहैया कराए गए उपायों के बावजूद,  उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को अपने मामले प्रस्तुत करेगा जिसका वह निवासी है या यदि उसका मामला अनुच्छेद 24 के पैराग्राफ 1 के अंतर्गत आता है तो उस संविदाकारी राष्ट्र को जिसका वह नागरिक है। मामले को समझौते के प्रावधानों के अनुसार कराधान न होने के परिणामस्वरूप कार्य के प्रथम अधिसूचना से तीन वर्षों के अंदर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

2.  सक्षम प्राधिकारी, यदि उपस्थित आपत्ति न्यायसंगत हो और यदि यह अपने आप संतोषजनक समाधान पर पहुंच पाने में अक्षम हो, अन्य संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के आपसी समझौते द्वारा कराधान जो समझौते के अनुसार नहीं हैं,  के परिहार को देखते हुए मामले को सुलझाने का प्रयास करेगा। किए गए किसी समझौते को संविदाकारी राष्ट्रों के घरेलू कानून की समय सीमा होते हुए भी कार्यान्वित किया जाएगा।

3.  संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी समझौते को लागू करने या व्याख्या के कारण उत्पन्न होने वाले संदेहों या किसी परेशानी के लिए आपसी समझौते द्वारा समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। वह दोहरे कराधान को दूर करने के लिए साथ विचार-विमर्श करेंगे यदि समझौते में न दिया गया हो।

4.  संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी पूर्ववर्ती पैराग्राफ के अर्थ में एक समझौता करने के लिए सीधे एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। जब समझौता करने के लिए विचारों के मौखिक आदान-प्रदान करना उपयुक्त लगे तो ऐसे परिवर्तन संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों के प्रतिनिधियों वाले एक आयोग के माध्यम से किया जा सकता है।

अनुच्छेद 26

सूचना का आदान-प्रदान

1.  संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना (सूचना में दस्तावेज या दस्तावेज की प्रमाणित प्रतियां शामिल हैं) का आदान-प्रदान करेंगे जो इस समझौते के प्रावधानों के लिए आवश्यक हो या संविदाकारी राष्ट्र या उनके राजनीतिक उपप्रभाग या स्थानीय प्राधिकारी की ओर से अधिरोपित प्रत्येक प्रकार और विवरण के कर से संबंधित घरेलू कानूनों के लिए आवश्यक हो जहां तक यह आधार पर कराधान समझौते के विपरीत नहीं है। सूचना का आदान-प्रदान अनुच्छेद 1 और 2 द्वारा सीमित नहीं है।

2.  एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त किसी सूचना को उसी तरीके में गोपनीय समझा जाएगा जैसे उस राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत सूचना प्राप्त की जाती है और पैराग्राफ 1 में संदर्भित किए गए करों के संबंध में अपील के निर्धारण, संबंधित अभियोजन या प्रवर्तन, निर्धारण या संग्रहण से संबंधित व्यक्तियों या प्राधिकारियों (न्यायालय या प्रशासनिक निकायों सहित) को ही प्रकट की जाएगी। ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी ऐसे उद्देश्यों के लिए ही सूचना का प्रयोग करेंगे। वह लोक अदालत कार्यवाही या न्यायिक निर्णयों में सूचना को प्रस्तुत कर सकता है। पूर्वगामी चीजों के होते हुए भी एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्राप्त सूचना को तब अन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है जब ऐसी सूचना को दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के कानूनों के अंतर्गत ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग की जा सकती है और संविदाकारी राष्ट्रों को देने वाले सक्षम प्राधिकारियों ऐसा प्रयोग कर सकते हैं।

3.  किसी भी मामले पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान निर्मित नहीं होंगे ताकि एक संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकार पर निम्न बाध्यताएं अधिरोपित की जा सके :

(क) उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के परिवर्तनशील कानूनों और प्रशासनिक अभ्यास पर प्रशासनिक उपाय करने के लिए

(ख) सूचना की आपूर्ति जो कानून के अंतर्गत या उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के प्रशासन की सामान्य अवधि में प्राप्तनीय नहीं है

(ग) सूचना की आपूर्ति के लिए जो किसी व्यापार, कारोबार, औधोगिक, वाणिज्यिक या पेशेवर राज या कारोबार प्रक्रिया या सूचना हो उसका प्रकटीकरण लोक नीति के विपरीत होगा (सार्वजनिक अध्यादेश)

4.  यदि सूचना इस अनुच्छेद के अनुसार एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा मांगी जाती है तो अन्य संविदाकारी राष्ट्र मांगी गई सूचना को प्राप्त करने के लिए अपनी सूचना एकत्रीकरण उपायों को इस्तेमाल करेगा, भले ही उस संविदाकारी राष्ट्र को अपने स्वयं के कर उद्देश्य के लिए ऐसी सूचना की जरूरत न हो। पूर्ववर्ती वाक्य में शामिल बाध्यता पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अनुसार है लेकिन किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि उसका ऐसी सूचना में कोई घरेलू हित नहीं है।

5.  किसी भी मामले में पैराग्राफ 3 के प्रावधान का अर्थ केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि सूचना बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, नामांकित व्यक्ति या एजेंसी के तौर पर कार्य करने वाले व्यक्ति या जिम्मेदार व्यक्ति के पास है या इसलिए क्योंकि यह एक व्यक्ति में स्वामित्व हितों से संबंधित है।

अनुच्छेद 27

करों की वसूली में सहायता

1. संविदाकारी राष्ट्र राजस्व दावों की वसूली में एक दूसरे की सहायता करेंगे। यह सहायता अनुच्छेद 1 और 2 द्वारा प्रतिबंधित नहीं है। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी इस अनुच्छेद के अनुप्रयोग की विधि परस्पर सहमति द्वारा तय कर सकते हैं।

2. इस अनुच्छेद में यथा प्रयुक्त शब्द ''राजस्व दावा'' का तात्पर्य संविदाकारी राष्ट्रों, अथवा उनके राजनीतिक उप-प्रभागों अथवा स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से लगाए गए सभी किस्म के करों और विवरण से है, जहां तक उनके अंतर्गत कराधान इस करार अथवा कोई अन्य साधन जिसके लिए संविदाकारी राष्ट्र पक्ष हैं के साथ-साथ ऐसी राशि से संबंधित ब्याज, प्रशासनिक अर्थ-दंड और वसूली अथवा संरक्षण के संबंध में देय राशि है।

3. जब किसी संविदाकारी राष्ट्र का राजस्व दावा उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत प्रवर्तनीय होता है और यह किसी व्यक्ति द्वारा देय होता है और उस समय उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत इसकी वसूली को रोक नहीं सकता तब उस राजस्व दावे को उस राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के अनुरोध पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा वसूली के प्रयोजनार्थ स्वीकार किया जाएगा। उस राजस्व दावे को उस राष्ट्र द्वारा अपने स्वयं के करों के प्रवर्तन और वसूली, मानो कि राजस्व दावा उस दूसरे राष्ट्र का राजस्व दावा था, के लिए प्रयोज्य इसके कानूनों के प्रावधान के अनुसार उस दूसरे संविदाकारी राष्ट्र द्वारा वसूल किया जाएगा।

4. जब किसी संविदाकारी राष्ट्र का राजस्व दावा वह दावा है जिसके संबंध में वह राष्ट्र, अपने कानून के अंतर्गत, इसकी वसूली को सुनिश्चित करने के लिए संरक्षण के उपाय करता है तब उस राजस्व दावे को उस राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के अनुरोध पर दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा संरक्षण के उपाय करने के प्रयोजनार्थ स्वीकार कर लिया जाएगा। वह दूसरा राष्ट्र उस राजस्व दावे के संबंध में अपने कानूनों, मानो कि राजस्व दावे उस दूसरे राष्ट्र के राजस्व दावे हों, के प्रावधान के अनुसार संरक्षण के उपाय करेगा यहां तक कि जब ऐसे उपायों का प्रयोग किया जाता है, राजस्व दावा प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में प्रवर्तनीय नहीं है अथवा उस व्यक्ति द्वारा देय है जिसे उसकी वसूली रोकने का अधिकार है।

5. पैराग्राफ 3 और 4 के प्रावधान के होते हुए भी इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 अथवा 4 के प्रयोजनार्थ किसी संविदाकारी दल द्वारा स्वीकार किया गया दावा उस दल में किसी समय सीमा के अध्यधीन नहीं होगा अथवा उसी रूप में उसे इसके स्वरूप के कारण उस दल के कानूनों के अंतर्गत किसी कर दावे को प्रयोज्य कोई प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 अथवा 4 के प्रयोजनार्थ किसी संविदाकारी दल द्वारा स्वीकार किए गए कर दावे को उस दल में दूसरे संविदाकारी दल के कानूनों के अंतर्गत उस कर दावे को प्रयोज्य कोई प्राथमिकता नहीं होगी।

6. किसी संविदाकारी राष्ट्र के राजस्व दावे के अस्तित्व, वैधता अथवा राशि के संबंध में कार्यवाही को केवल उस राष्ट्र के न्यायालयों अथवा प्रशासनिक निकायों के समक्ष लाया जाएगा। इस अनुच्छेद में ऐसा कुछ नहीं है जिसका अर्थ दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी न्यायालय अथवा प्रशासनिक निकाय के समक्ष ऐसी कार्यवाही के लिए किसी अधिकार का सृजन करना अथवा प्रदान करना लगाया जाएगा।

7. जहां किसी समय पैराग्राफ 3 अथवा 4 के तहत किसी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा अनुरोध किए जाने के पश्चात् और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पहले निर्दिष्ट राष्ट्र में संबंधित राजस्व दावे को दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में वसूल करने और पहले निर्दिष्ट राष्ट्र को प्रेषित करने से पहले संबंधित राजस्व दावा वहां निम्नलिखित के संबंध में समाप्त हो जाएगा

(क) पैराग्राफ 3 के अंतर्गत अनुरोध के मामले में, पहले निर्दिष्ट राष्ट्र का कोई राजस्व दावा जो उस राष्ट्र के कानूनों के तहत प्रवर्तनीय है और ऐसे व्यक्ति द्वारा देय है जो उस समय उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत इसकी वसूली रोक नहीं सकताय अथवा

(ख) पैराग्राफ 4 के अंतर्गत अनुरोध के मामले में, पहले निर्दिष्ट राष्ट्र के राजस्व दावे जिसके संबंध में वह राष्ट्र अपने कानूनों के तहत इसकी वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संरक्षण के उपाय करता है

पहले निर्दिष्ट राष्ट्र का सक्षम प्राधिकारी इस तथ्य को दूसरे राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को तत्काल अधिसूचित करेगा और दूसरे राष्ट्र के विकल्प पर प्रथमोल्लिखित राष्ट्र अपने अनुरोध को या तो आस्थगित करेगा या फिर हटा लेगा।

8. इस अनुच्छेद के किसी भी उपबंध का अर्थ दोनों में से किसी भी संविदाकारी राष्ट्र पर निम्नलिखित के लिए बाध्यता लागू करना नहीं लगाया जाएगा

(क) उस संविदाकारी राष्ट्र अथवा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों और प्रशासनिक प्रथा के असंगत प्रशासनिक उपाय करना

(ख) ऐसे उपाय करना जो लोक नीति (लोक आदेश) के विपरीत हों

(ग) सहायता प्रदान करना यदि दूसरे संविदाकारी राष्ट्र ने इसके कानूनों अथवा प्रशासनिक प्रथा के अंतर्गत उपलब्ध वसूली अथवा संरक्षण, जैसा भी मामला हो, के सभी समुचित उपायों को न किया हो

(घ) उन मामलों में सहायता प्रदान करना जहां उस राष्ट्र के लिए प्रशासनिक बोझ दूसरे संविदाकारी राष्ट्र द्वारा उद्भूत किए जाने वाले लाभ से राष्ट्र रूप से अनुपातहीन हो।

अनुच्छेद 28

लाभों की सीमितता

1.  इस समझौते में कुछ भी कर चोरी को रोकने के लिए घरेलू प्रावधान को लागू करने को प्रभावित नही करेगा।

2.[एमएलआई के अनुच्छेद 7 के पैराग्राफ 1 द्वारा प्रतिस्थापन] [इस समझौते के लाभ एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के लिए या एक ऐसे निवासी द्वारा किए गए किसी लेनदेन के संदर्भ में उपलब्ध नही होंगे यदि ऐसे एक निवासी का सृजन या उपस्थिति या उसके द्वारा किए गए लेनदेन का मुख्य उद्देश्य इस समझौते के अंतर्गत लाभ को प्राप्त करना था जो अन्यथा उपलब्ध नही होता।

3. कानूनी उद्यम जो वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नही करते के मामलों को इस अनुच्छेद के प्रावधान द्वारा कवर किया जाएगा

4. जहां इस अनुच्छेद के कारणों एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को अन्य संविदाकारी राष्ट्र में इस समझौते के लाभ से मना किया जाता है तो अन्य संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी प्रथम-निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को अधिसूचित करेगा]

एमएलआई के अनुच्छेद 7 का निम्नलिखित पैराग्राफ 1 इस समझौते के (4) के माध्यम से अनुच्छेद 28(2) को प्रतिस्थापित करता है

एमएलआई के अनुच्छेद 7 - संधि के दुरूपयोग की रोकथाम

(प्रमुख उद्देश्य परीक्षण प्रावधान)

[समझौते] के किसी प्रावधान के होते हुए भी, [समझौते] के अंतर्गत लाभ आय की एक मद के संबंध में नहीं दी जाएगी यदि यह करना उचित हो, सभी प्रासंगिक तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कि वह लाभ प्राप्त करना किसी व्यवस्था या लेनदेन का प्रमुख उद्देश्य था जो उस लाभ का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम था, जबतक यह प्रमाणित न हो कि इन परिस्थितियों में उन लाभों को देना उद्देश्य के अनुसार होगा और [समझौते] के प्रासंगिक प्रावधानों के लिए होगा।

अनुच्छेद 29

राजनायिक और कौंसुलर पदों के सदस्य

इस समझौते में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के तहत या विशेष समझौतों के प्रावधानों के तहत राजनायिक मिशन या कौंसुलर पदों के सदस्यों की राजकोषीय विशेषाधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा।

अनुच्छेद 30

प्रभावी होना

1.  संविदाकारी राष्ट्र इस समझौते में प्रभावी संबंधित कानूनों द्वारा आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा होने की सूचना लिखित में राजनायिक माध्यमों की मदद से एक-दूसरे को देंगे।

2.  यह समझौता इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 में संदर्भित अधिसूचनाओं के बाद की तिथि पर प्रभावी होगा।

3.  इस समझौते के प्रावधान प्रभावी होंगे :

(क) भारत में, कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता किया गया, के अगले अप्रैल के पहले दिन को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में

(ख) एस्टोनिया में :

 (i) वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ, की अगली 1 जनवरी को या उसके बाद प्राप्त आय पर स्रोत पर कर कटौती के संदर्भ में

(ii) वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ, के अगले कैलेंडर वर्ष के 1 जनवरी को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष के लिए वसूलनीय कर के लिए आय पर अन्य करों के संदर्भ में

अनुच्छेद 31

समापन

यह करार तब तक लागू रहेगा जब तक कि एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा इसे समाप्त नहीं कर दिया जाता। दोनों में से कोई भी संविदाकारी राष्ट्र इस समझौते के प्रभावी होने की तारीख से लेकर पांच वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद शुरू होने वाले किसी कैलेण्डर वर्ष की समाप्ति से कम से कम छह महीने पहले राजनायिक माध्यम से समापन का नोटिस देकर करार को समाप्त कर सकता है। ऐसी स्थिति में यह करार निम्न के संबंध में निष्प्रभावी हो जाएगा :

(क) भारत में, कैलेंडर वर्ष जिसमें नोटिस दिया गया, के अगले अप्रैल के पहले दिन को या उसके बाद के किसी वित्त वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में

(ख) एस्टोनिया में :

 (i) वर्ष जिसमें नोटिस दिया गया, की अगली 1 जनवरी को या उसके बाद प्राप्त आय पर स्रोत पर कर कटौती के संदर्भ में

(ii) वर्ष जिसमें नोटिस दिया गया, के अगले कैलेंडर वर्ष के 1 जनवरी को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष के लिए वसूलनीय कर के लिए आय पर अन्य करों के संदर्भ में

साक्ष्य रूप से जिसके अधोहस्ताक्षरी ने, विधिवत वहां अधिकृत किया जा रहा है, इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस 19 सितंबर 2011 को टैलिन में हिंदी, एस्टोनियन और अंग्रेजी भाषाओं में प्रतिरूपण किया गया, सभी विषय समान रूप से प्रमाणिक हैं। व्याख्या के अंतर होने पर अंग्रेजी मूल को अंतिम माना जाएगा।

प्रोटोकाल

दोहरे कराधान के परिहार और आय पर करों के संदर्भ में वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतंत्र और एस्टोनिया गणतंत्र के बीच समझौते (तत्पश्चात् समझौते के तौर पर संदर्भित) पर हस्ताक्षर करते समय अधोहस्ताक्षरी सहमत हुए हैं कि निम्नलिखित प्रावधान समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे :

1.  अनुच्छेद 5 के संदर्भ में

यह समझा गया है कि इस समझौते के हस्ताक्षर की तिथि पर एस्टोनिया द्वारा दोहरे कराधान से बचने के लिए किया गया कोई भी समझौता अन्य संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई प्रतिष्ठान होने के लिए एक संविदाकारी राष्ट्र के बीमा उद्यम के तौर पर मुहैया नही कराया गया है यदि यह एक आश्रित एजेंट के माध्यम से अन्य राष्ट्र के क्षेत्र में प्रीमियम या बीमा जोखिम को एकत्रित करता है।

हालांकि, यदि उस तिथि के बाद, ऐसे विशेष प्रावधान एस्टोनिया द्वारा किए गए दोहरे कराधान के परिहार के किसी समझौते में शामिल होते है तो एस्टोनिया के सक्षम प्राधिकारी ऐसे समावेशन के बारे में भारत के सक्षम प्राधिकारियों को सूचित करेंगे और संविदकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों के बीच विचार-विमर्श के बाद ऐसे प्रावधान पर इस समझौते के लिए भी विचार किया जा सकता है।

2.  अनुच्छेद 6 के संदर्भ में

यह समझा गया है कि अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 2 में संदर्भित अचल संपत्ति के हस्तांतरण से सभी आय और लाभ और एक संविदाकारी राष्ट्र में स्थित संपत्ति इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।

साक्ष्य रूप से जिसके अधोहस्ताक्षरी ने, विधिवत वहां अधिकृत किया जा रहा है, इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस 19 सितंबर 2011 को टैलिन में हिंदी, एस्टोनियन और अंग्रेजी भाषाओं में प्रतिरूपण किया गया, सभी विषय समान रूप से प्रमाणिक है। व्याख्या के अंतर होने पर अंग्रेजी मूल को अंतिम माना जाएगा।

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1. [स्केयर ब्रैकेट] बॉक्स और ईटैलिक्स में टैक्स्ट एमएलआई के लिए किए गए छोटे शब्दालवली परिवर्तनों को इंगित करता है।

फ़ुटनोट