मुकद्मेबाजी को कम करने तथा अनुपालन के बोझ से निजात देने के लिए आयकर अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का निर्णय
रिलीज़ दिनांक
03/03/2016
Document Content
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
प्रेस विज्ञप्ति
नर्इ दिल्ली, 3 मार्च, 2016
विषय : मुकद्मेबाजी को कम करने तथा अनुपालन के बोझ से निजात देने के लिए आयकर अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का निर्णय - संबंधी
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अनुपालन के बोझ से निजात दिलाने तथा मुकद्मेबाजी को कम करने के उद्देश्य से आयकर अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की प्रयोज्यता को स्पष्ट करने के लिए कर्इ निर्णय लिए हैं।
परिपत्र सं. 1/2016 के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि धारा 80झक के अंतर्गत पात्र निर्धारिती के पास प्रारंभिक वर्ष जिससे कटौती का दावा किया जा सकता है, का चुनाव करने का विकल्प है। एक बार निर्धारिती के पास प्रारंभिक वर्ष को चुनने का विकल्प हो तो वह ऐसे वर्ष से धारा के अंतर्गत कटौती के लिए पात्र होगा यदि वह धारा में निर्धारित शर्तों को पूरा करता है।
01.04.2000 से 31.05.2013 की अवधि के बीच शेयरों की पुन: खरीद पर प्राप्त प्रतिफल के निगर्मन पर, यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसा प्रतिफल प्राप्तकर्ता के हाथों में पूंजीगत प्राप्ति के तौर पर करारोपित होगा। इसलिए ऐसी राशि लाभांश (परिपत्र सं. 3/2016) के तौर पर नहीं समझी जाएगी। इस मामले पर विभाग द्वारा कोर्इ नर्इ सूचना जारी नहीं की जाएगी।
परिपत्र सं. 6 को व्यापारिक आय अथवा पूंजीगत प्राप्ति के तौर पर शेयरों तथा प्रतिभूतियों के स्थानांतरण से व्युत्पन्न आय के उपचार से संबंधित सिद्धांतों को उच्चारित करने के लिए जारी किया गया है। परिपत्र स्थितियों का स्पष्टीकरण करता है जिसमें शेयरों तथा प्रतिभूतियों की बिक्री पर अर्जित अतिरिक्त आय को व्यापारिक आय अथवा पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझा जाएगा।
एक पत्र को संयुक्त विकास समझौते संबंधी मामलों में करों के भुगतान में कठिनार्इयों को हटाने के लिए समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक के लिए जारी किया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने निर्देशों को जारी किया है कि क्षेत्राधिकारी कर प्राधिकारी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ब्याज के उदग्रहण के अनुसार तीन समान वार्षिक किश्तों में ऐसी पूंजीगत प्राप्ति पर देय करों के भुगतान हेतु संबंधित करदाता को स्वीकृति दे सकते है।
परिपत्र विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है।
(शेफाली शाह)
प्रधान आयकर आयुक्त
(मीडिया तथा तकनीकी नीति)
तथा अधिकारिक प्रवक्ता, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

