परिपत्र सं. 22/2016 : वित्त अधिनियम 2016 के मार्फत धारा 206ग में संशोधन - स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 22/2016
परिपत्र की तिथि
08/06/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
08/06/2016
परिपत्र सं. 22/2016
एफ.नं. 370142/17/2016-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
***
दिनांक 8, जून, 2016
विषय : वित्त अधिनियम 2016 के मार्फत धारा 206ग में संशोधन - स्पष्टीकरण संबंधित
वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधन से पूर्व आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् 'अधिनियम' के तौर पर संदर्भित) की धारा 206ग मुहैया कराता है कि विक्रेता निर्दिष्ट मदों जैसे व्यक्ति के प्रयोग के लिए मादक पेय, कोमल पत्तियां, कोयला अथवा कच्चे लोहे के तौर पर खनिज आदि की बिक्री के समय खरीददार से निर्दिष्ट दर पर स्रोत पर कर एकत्रित करेगा। इसे 2 लाख रूपए से अधिक के सोने-चांदी तथा 5 लाख रूपए से अधिक के आभूषण में के नगद में बिक्री पर एक प्रतिशत पर स्रोत पर कर के एकत्रीकरण के लिए भी मुहैया कराया गया है।
उत्पाद तथा सेवाओं की बिक्री में नगद लेनदेन की कटौती के लिए, वित्त अधिनियम 2016 को मुहैया कराने के लिए धारा 206ग(1घ) के कार्यक्षेत्र को विस्तारित किया गया है कि विक्रेता किसी उत्पाद (सोने-चांदी तथा आभूषण को छोड़कर) के नगद में बिक्री पर खरीद से एक प्रतिशत की दर पर कर एकत्रित करेगा अथवा दो लाख रूपए से अधिक की किसी सेवा (भुगतान को छोड़कर जिस पर कर अध्याय XVII-ख के अंतर्गत स्रोत पर काटा जाता है) को मुहैया कराएगा। अभी तक आभूषण तथा सोने चांदी की बिक्री संबंद्ध है। वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा इसके संशोधन से पूर्व धारा 206ग की उप-धारा (1घ) के प्रावधान लागू होने तक जारी रहेंगे। आगे, निविल कर के भीतर उच्च राशि लेनदेन लाने को देखते हुए, अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1च) में मुहैया कराया गया है कि विक्रेता जो दस लाख से अधिक के वाहन की बिक्री के प्रतिफल को प्राप्त करता है, विक्रेता से कर के तौर बिक्री प्रतिफल का एक प्रतिशत एकत्रित करेगा। कोर्इ व्यक्ति जो किसी बिक्री में धारा 206ग की उप-धारा (1घ) अथवा (1च) में निर्दिष्ट प्रकार के उत्पाद को प्राप्त करता है, खरीददार है। धारा 206ग के अंतर्गत कर के एकत्रीकरण के उद्देश्य के लिए विक्रेता निम्न होगा -
(i) एक केंद्र सरकार अथवा एक राज्य सरकार
(ii) किसी केंद्र राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के अंतर्गत संस्थापित एक स्थानीय प्राधिकारी अथवा निगम अथवा प्राधिकरण
(iii) कोर्इ कंपनी , फर्म अथवा सहकारी संस्था
(iv) एक व्यक्ति अथवा हिंदु अविभाजित परिवार जो वित्त वर्ष जिसमें उत्पाद बेचे जाते है अथवा सेवाएं मुहैया करार्इ जाती है, के तुरंत उत्तरगामी वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के प्रावधानों के अनुसार लेखांकन हेतु उत्तरदायी है
वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा धारा 206ग में लाए गए संशोधन 1 जून, 2016 से प्रयोज्य है।
इस संबंध में कर्इ पूछताछों को प्रावधानों के कार्यक्षेत्र के बारे में प्राप्त किया गया है तथा प्रक्रिया को अनुसरित किया जाना है। बोर्ड ने इस पर विचार किया है तथा निम्नानुसार प्रश्नों तथा उत्तर के रूप में परिपत्र को जारी करके उठाए गए बिंदुओं को स्पष्ट करने का निर्णय लिया है:
प्रश्न 1 : क्या 1 प्रतिशत की दर पर स्रोत पर कर संग्रहण ('टीसीएस') डीलर/वितरकों हेतु विनिर्माताओं द्वारा खुदरा स्तर पर वाहन की बिक्री अथवा साथ ही मोटर वाहन की बिक्री पर 1 प्रतिशत की दर पर है।
उत्तर : कर शुद्धता के अंतर्गत उच्च राशि लेनदेन करने के लिए, अधिनियम की धारा 206ग को मुहैया कराने के लिए संशोधित किया गया है कि विक्रेता दस लाख रूपए से अधिक की राशि के मोटर वाहन की बिक्री पर खरीददार से एक प्रतिशत की दर पर कर को एकत्रित करेगा। इसे खुदरा बिक्री के समस्त लेनदेनों को कवर करने के लिए लाया गया है तथा तद्नुसार यह डीलर/वितरकों को विनिर्माताओं द्वारा मोटर वाहन की बिक्री पर लागू नहीं होगा।
प्रश्न 2 : क्या टीसीएस मोटर वाहन की बिक्री पर 1 प्रतिशत की दर पर केवल लग्जरी गाड़ियों के लिए ही लागू है ?
उत्तर : नहीं, अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1च) के अनुसार विक्रेता दस लाख रूपए से अधिक की राशि के किसी मोटर वाहन की बिक्री पर खरीददार से एक प्रतिशत की दर पर कर को एकत्रित करेगा।
प्रश्न 3 : क्या 1 प्रतिशत की दर पर टीसीएस मोटर वाहन अथवा अन्य कोर्इ उत्पाद अथवा सेवाओं के प्रावधानों की बिक्री के लिए सरकारी विभागों, दूतावास, वाणिज्य दूतावास तथा संयुक्त राष्ट्र संस्थानों की बिक्री की स्थिति में लागू है ?
उत्तर : संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार तथा प्रतिरक्षा) अधिनियम, 1947 तथा दूतावास, उच्चायोग, दूतावास, आयोग तथा विदेशी राष्ट्र के व्यापार प्रतिनिधि के अंतर्गत अधिसूचित सरकारी संस्थान तथा अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1घ) तथा (1च) के अंतर्गत 1 प्रतिशत की दर पर टीसीएस के उदग्रहण हेतु उत्तरदायी नहीं होगा।
प्रश्न 4 : क्या टीसीएस वर्ष की बिक्री के दौरान कुल राशि पर अथवा मोटर वाहन की बिक्री पर प्रयोज्य है ?
उत्तर : कर दस लाख रूपए से अधिक के मोटर वाहन के बिक्री प्रतिफल पर 1 प्रतिशत की दर पर स्रोत पर एकत्रित होना है। यह वर्ष के दौरान की गर्इ बिक्री की कुल लागत हेतु नहीं है। इसे एक उदाहरण के रूप में बताया जा सकता है :
उदाहरण : 20 लाख की कीमत वाले मोटर वाहन को बेचा जाता है तथा जिसके लिए भुगतान किश्तों में किया जाता है, एक बुकिंग के समय तथा दूसरा सुपुर्दगी के समय। बुकिंग के समय 5 लाख रूपए का भुगतान किया जाता है तथा सुपुर्दगी के समय 15 लाख रूपए का भुगतान किया जाता है। बुकिंग के समय 5 लाख रूपए की दर पर कर तथा सुपुर्दगी के समय 15 लाख रूपए के शेष पर 1 प्रतिशत स्रोत पर एकत्रित होगा।
यह धारा 206ग की उप-धारा (1घ) के अंतर्गत स्रोत पर कर के एकत्रीकरण के संबंध में स्थित होगा।
प्रश्न 5 : क्या मोटर वाहन की बिक्री पर 1 प्रतिशत की दर पर टीसीएस व्यक्ति की स्थिति में प्रयोज्य है ?
उत्तर : नीचे धारा 206ग की उप-धारा (11) स्पष्टीकरण के वाक्यांश (ग) में दिए गए अनुसार "विक्रेता" की परिभाषा तद्नुसार मोटर वाहन की बिक्री की स्थिति में प्रयोज्य होगी तदनुसार, एक व्यक्ति जो वित्त वर्ष जिसमें मोटर वाहन बेचा जाता है के तुरंत उत्तरगामी वित्त वर्ष के दौरान अधिनियम की धारा 44कख के प्रावधानों के अनुसार लेखांकन हेतु उत्तरदायी है, उसके द्वारा मोटर वाहन की बिक्री पर स्रोत पर कर संग्रहण के लिए उत्तरदायी होगा।
प्रश्न 6 : मोटर वाहन की बिक्री पर टीसीएस के प्रावधान उन मामलों में प्रयोज्य कैसे होंगे जहाँ भुगतान के एक भाग नगद में दिया जाता है तथा एक भाग चेक के रूप में।
उत्तर : दस लाख रूपए से अधिक की मोटर वाहन की बिक्री पर टीसीएस के प्रावधान भुगतान की विधि पर आश्रित नहीं होता। दस लाख रूपए से अधिक के वाहन 1 प्रतिशत की दर पर टीसीएस को आकर्षित करेगा
प्रश्न 7 : धारा 206ग(1घ) के अनुसार, कर को 1 प्रतिशत की दर पर स्रोत पर एकत्रित किया जाना है यदि नगद में प्राप्त बिक्री प्रतिफल 2 लाख रूपए से अधिक होता है जहाँ तक धारा 206ग(1च) के अनुसार 10 लाख रूपए से अधिक के मोटर वाहन के बिक्री प्रतिफल के 1 प्रतिशत की दर पर स्रोत पर कर एकत्रीकरण होना है। चाहे टीसीएस को 2 प्रतिशत की दर पर धारा 206ग की दोनों उप-धारा (1घ) तथा (1च) के अंतर्गत किया जाएगा, जहाँ मोटर वाहन की खरीद के लिए भुगतान नगद में 2 लाख रूपए से अधिक होता है ?
उत्तर : अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1च) को दस लाख रूपए से अधिक की राशि के मोटर वाहन की बिक्री पर 1 प्रतिशत की दर से टीसीएस को मुहैया कराता है। यह भुगतान की विधि के बावजूद है। इसलिए, यदि मोटर वाहन की राशि 20 लाख रूपए है जिसमें से 5 लाख रूपए नगद में दे दिया गया है तथा शेष राशि चेक के माध्यम से तो कर को अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1च) के अंर्तगत ही 20 लाख रूपए के कुल बिक्री प्रतिफल पर 1 प्रतिशत की दर पर स्रोत पर एकत्रित किया जाएगा। हालांकि, यदि वाहन 8 लाख रूपए के लिए बेचा जाता है तथा प्रतिफल नगद में दिया जाता है तो कर अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1घ) के अनुसार 8 लाख रूपए पर 1 प्रतिशत की दर पर स्रोत पर एकत्रित किया जाएगा।
लक्ष्मी नारायण
अवर सचिव टीपीएल-III
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
निम्न को प्रति :
1. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अधिकारी
2. ओएसडी से राजस्व सचिव
3. समस्त अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए अनुरोध के साथ समस्त प्रधान आयकर आयुक्त एवं समस्त आयकर महानिदेशक
4. राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी के प्रधान महानिदेशक, नागपुर
5. प्रधान पद्धति महानिदेशक, एआरए, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली
6. प्रधान सर्तकता महानिदेशक
7. मेलिंग सूची के अनुसार वितरण के लिए तथा बुलेटिन में त्रैमासिक कर में मुद्रण के लिए अपर महानिदेशक (पीआर, पीपी एवं ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली
8. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
9. आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए अपर महानिदेशक (पद्धति)
10. गार्ड फाइल
लक्ष्मी नारायण
अवर सचिव, टीपीएल-III
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

