परिपत्र सं. 5/2019 : 2018 के परिपत्र 3 - मुकद्मेबाजी को कम करने के उपाय के कार्यक्षेत्र को व्यापक करने के माध्यम से उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपील/आर्इटीएटी, एचसी और एसएलपी के समक्ष विभाग द्वारा संपत्ति कर अपीलों को दाखिल करने/निरस्त करने के लिए मौद्रिक सीमा
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 5/2019
परिपत्र की तिथि
05/02/2019
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
05/02/2019
परिपत्र सं. 5/2019
एफ.नं. 279/विविध/एम-84/2018-आर्इटीजे
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
न्यायिक प्रभाग
नर्इ दिल्ली, 5 फरवरी, 2019
विषय : 2018 के परिपत्र 3 - मुकद्मेबाजी को कम करने के उपाय के कार्यक्षेत्र को व्यापक करने के माध्यम से उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपील/आर्इटीएटी, एचसी और एसएलपी के समक्ष विभाग द्वारा संपत्ति कर अपीलों को दाखिल करने/निरस्त करने के लिए मौद्रिक सीमा
बोर्ड के 2018 के परिपत्र सं. 3 (तत्पश्चात् इसे "परिपत्र" के तौर पर संदर्भित किया जाए) हेतु संदर्भ आमंत्रित है जिसके द्वारा आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय और एलएलपी के समक्ष विभाग द्वारा आयकर अपीलों को दाखिल करने की मौद्रिक सीमा/उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपील निर्दिष्ट थी। परिपत्र का पैरा 11 निर्दिष्ट करता है कि पैरा 3 में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा रिट मामलों के लिए लागू नहीं होगी और आयकर को छोड़कर प्रत्यक्ष कर मामले और ऐसे मामलों में अपीलों को दाखिल करना स्थिति और नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होना जारी रहेगा।
2. संपत्ति कर अधिनियम, 1957 प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2016 के अंतर्गत कोर्इ प्रभार नहीं है। इसलिए, मुकद्मेबाजी प्रबंधन के लिए एक कदम के तौर पर बोर्ड द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि परिपत्र के पैरा 3 में निर्दिष्टानुसार आयकर मामलों में अपीलों को दाखिल करने के लिए मौद्रिक सीमा यथोचित परिवर्तनों के तरीके में संपत्ति कर मामलों हेतु परिपत्र के विस्तार के माध्यम से और निम्नानुसार निर्धारितानुसार संशोधन के साथ संपत्ति कर अपीलों के लिए लागू होगा।
3. संपत्ति कर अपीलों के लिए:
क. परिपत्र का पैरा 4 निम्नानुसार पढ़ा जाएगा :
"इस उद्देश्य के लिए, प्रभावी कर का अर्थ शुद्ध मूल्यांकित संपत्ति और कर जो वसूलनीय होता के बीच का अंतर है जो मुद्दे जिसके विरूद्ध अपील को दाखिल किया जाना है, के संबंध में संपत्ति की राशि द्वारा कम किया गया था। हालांकि, कर में उसपर कोर्इ ब्याज शामिल नहीं होगा केवल वहां छोड़कर जहां खुद ब्याज की वसूलनीयता विवादित हो। यदि ब्याज की वसूलनीयता का मुद्दा विवादित हो तो ब्याज की राशि कर प्रभावी होगी। जुर्माना आदेश की स्थिति में, प्रभावी कर का अर्थ विरूद्धात्मक अपील के आदेश में हटाए या कम किए गए जुर्माने की मात्रा होगी"
ख परिपत्र का पैरा 11 निम्नानुसार पढ़ा जाएगा
"उक्त पैरा 3 में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा रिट मामलों हेतु लागू नहीं होगी"
4. संपत्ति कर अपील हेतु परिपत्र का कथित विस्तारण इस परिपत्र के निगर्मन की तिथि से प्रभावी होगा।
5. इसे सभी संबंधितों के ध्यान में लाया जा सकता है।
6. हिंदी संस्करण का अनुसरण होगा
(अभिषेक गौतम)
डीसीआर्इटी (ओएसडी)-आर्इटीजे, सीबीडीटी
निम्न को प्रति
1. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी मे अन्य समस्त अधिकारी
2. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक -सभी अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए
3. एडीजी(पीआर, पीपी व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली मेलिंग लिस्ट के अनुसार वितरण तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन के मुद्रण के लिए (100 प्रतियां)
4. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
5. अपर महानिदेशक (सर्तकता), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली
6. संयुक्त सचिव व कानूनी सलाहकार, विधि व न्याय मंत्रालय, नर्इ दिल्ली
7. सभी प्रधान आयकर महानिदेशक, नर्इ दिल्ली और डीजीआर्इटी(एनएडीटी), नागपुर
8. आर्इटीसीसी (3 प्रतियां)
9. विभागीय वेबसाइट पर प्रकाशित करने के लिए एडीजी (पद्धति)-4
10. Irsofficersonline.gov.in पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ
11. एनजेआरएस पर अपलोडिंग के लिए njrs_support@nsdl.co.in
12. अनुवाद के लिए हिन्दी प्रकोष्ठ
13. गार्ड फाइल
(अभिषेक गौतम)
डीसीआर्इटी (ओएसडी)-आर्इटीजे, सीबीडीटी

