परिपत्र सं. 9/2020 : प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 से संबंधित प्रावधानो पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 9/2020
परिपत्र की तिथि
22/04/2020
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
22/04/2020
परिपत्र सं. 9/2020
एफ.नं. आईटी(ए)/1/2020/टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
****
नई दिल्ली, 22 अप्रैल, 2020
विषय : प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 से संबंधित प्रावधानो पर स्पष्टीकरण
केंद्रीय बजट, 2020 को प्रस्तुत करने के दौरान, 'विवाद से विश्वास' योजना को लंबित आयकर मुकद्मेबाजी के संदर्भ में विवाद का समाधान करने के लिए प्रस्तुत किया गया था। बजट घोषणा के अनुसार, केंद्रीय कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 (विधेयक) को 5 फरवरी, 2020 को लोक सभा में पेशन किया गया था। तत्पश्चात्, इसके विभिन्न प्रावधानों के संबंध में हितधारकों से प्राप्त प्रतिनिधित्व के आधार पर विधेयक में आधिकारिक संशोधनों को प्रस्तावित किया गया है। इस संशोधन से विवाद से विश्वास का कार्यक्षेत्र बढ़ेगा और करदाताओं पर अनुपालन बोझ कम होगा।
2. लोकसभा में विवाद से विधेयक की प्रस्तावना के बाद से उसमें शामिल विभिन्न प्रावधानों के संदर्भ में स्पष्टीकरण के लिए हितधारकों की ओर से कई सवाल पूछे गए थे। सरकार ने इन प्रश्नों पर विचार किया था और 2020 की परिपत्र सं. 7 दिनांक 4 मार्च, 2020 के द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के रूप में उत्तर देकर इसे स्पष्ट करने का प्रयास किया था। यह स्पष्टीकरण, हालांकि, अनुमोदन संसद द्वारा विवाद से विश्वास की अनुमति और पारित करने और भारत के माननीय राष्ट्रपति की सहमति प्राप्ति का विषय है।
3. विधेयक तब संसद द्वारा पारित किया गया और उसे भारत के माननीय राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है और अब वह प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 (विवाद से विश्वास) के तौर पर अधिनियमित किया जा चुका है। विवाद से विश्वास का उद्देश्य, परस्पर, लंबित आयकर मुकद्मेबाजी को कम करना, सरकार के लिए समय से राजस्व जुटाना और करदाताओं को मन की शांति देकर लाभ देना, निश्चितता और समय की बचत और संसाधन देना जो अन्यथा विलंबित और कष्टकर मुकद्मेबाजी प्रक्रिया पर व्यय हुए हैं।
4. 2020 की परिपत्र सं. 7 में शामिल 55 प्रश्नों को निम्नलिखित संशोधनों के साथ इस परिपत्र के अंतर्गत दुबारा जारी किया गया है
(i) परिपत्र सं. 7 में प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 हेतु निर्दिष्ट विवाद से विश्वास। हालांकि, इस परिपत्र में यह प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास अधिनियम, 2020 के तौर पर संदर्भित है
(ii) चूंकि विधेयक के वाक्यांश अब विवाद से विश्वास में धाराए बन चुकी है, परिपत्र सं. 7 में "वाक्यांश" हेतु संदर्भ को "धारा" के साथ प्रतिस्थापित किया जा चुका है
(iii) परिपत्र सं. 7 में घोषणा पत्र हेतु संदर्भ को प्रासंगिक प्रपत्र के संदर्भ के साथ प्रतिस्थापित किया गया है चूंकि नियम और प्रपत्र संशोधित हो चुक हैं और
(iv) प्रश्न सं. 22 का उत्तर कानून के सही उद्देश्य को दर्शाने के लिए संशोधित किया गया है। अब यह स्पष्ट किया गया है कि जहां अभियोजन की सूचना के लिए ही नोटिस अभियोजन किए बिना जारी किया जाएगा, निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा करने के योग्य है। हालांकि, जहां अभियोजन एक निर्धारण वर्ष के संदर्भ में किया गया हो तो निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत उस निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा करने के योग्य नही होगा जबतक अभियोजन घोषणा करने से पहले न हो।
5. विवाद से विश्वास की धारा 10 और 11 बोर्ड या केंद्र सरकार को जनहित में या समस्याओं को दूर करने के लिए निर्देश या आदेश जारी करने का अधिकार देती है। यह परिपत्र विवाद से विश्वास की धारा 10 और 11 के अंतर्गत जारी ऐसा निर्देश/आदेश है। इसलिए इस परिपत्र में कुछ प्रश्नों के उत्तरों से विवाद से विश्वास की धारा 10 और धारा 11 के अंतर्गत जनहित में या समस्याओं को दूर करने के लिए विवाद से विश्वास के आवदेन का विस्तार किया गया है।
"कार्यक्षेत्र/पात्रता पर प्रश्न (प्रश्न सं. 1-24)"
| प्रश्न सं. | 1 | कौनसी अपीलें विवाद से विश्वास के अंतर्गत शामिल हैं ? |
| उत्तर : | अपीलीय फोरम [आयुक्त (अपील), आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी), उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय] और 31 जनवरी, 2020 (विशेष तिथि) तक उच्च न्यायालय (एचसी) या उच्चतम न्यायालय (एससी) के समक्ष लंबित रिट याचिका या एससी के समक्ष लंबित विशेष अवकाश याचिका (एसएलपी) शामिल है। मामले जहां आदेश पारित किया गया हो लेकिन आदेश के समक्ष आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) के अंतर्गत अपील को दाखिल करने की समय सीमा निर्दिष्ट तिथि तक समाप्त न हुई हो, भी शामिल है। इसी प्रकार, मामले जहां मसौदा आदेश के समक्ष निर्धारिती द्वारा दाखिल आपत्तियां विवाद समाधान पैनल (डीआरपी) के पास लंबित हो या जहां डीआरपी ने निर्देश दिए हो लेकिन निर्धारण अधिकारी ने अभी तक निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले निर्दिष्ट अंतिम आदेश पारित न किया हो, भी शामिल है। मामले जहां अधिनियम की धारा 264 के अंतर्गत संशोधन आवेदन प्रधान आयुक्त या आयुक्त के समक्ष लंबित हो, भी शामिल है। आगे, जहां एक घोषणाकर्ता ने किसी कार्यवाही को प्रारंभ किया हो या विधेयक के वाक्यांश 4 में संदर्भित मध्यस्थता, समझौता या संशोधन के लिए कोई नोटिस दिया हो, भी शामिल है। | |
| प्रश्न सं. | 2 | यदि कोई अपील लंबित न हो लेकिन मामला मध्यस्थता के लिए लंबित हो तो क्या करदाता विवाद से विश्वास के अंतर्गत आवेदन करने के योग्य होगा ? यदि हां तो विवादित कर क्या होगा ? |
| उत्तर : | एक निर्धारिती जिसका मामला मध्यस्थता के लिए लंबित है वह विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटान के लिए आवेदन हेतु योग्य होगा भले ही कोई अपील लंबित न हो। ऐसे मामले में निर्धारिती को घोषणा प्रपत्र में उसके मामले में लागू होने वाले प्रासंगिक ब्यौरे को दाखिल करना चाहिए। इस मामले में विवादित कर उसके संदर्भ में विवादित आय पर कर (अधिभार और अधिकर सहित) होगा जिसके संदर्भ में मध्यस्थता की गई है। | |
| प्रश्न सं. | 3 | क्या विवाद से विश्वास का लाभ अग्रिम निर्णय प्राधिकारी (एएआर) के समक्ष लंबित कार्यवाही के लिए लिया जा सकता है ? यदि एक रिट एचसी में एएआर द्वारा पारित आदेश के समक्ष लंबित है तो उस मामले को शामिल किया जाएगा और किस प्रकार विवादित कर की गणना की जाएगी? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास एएआर के समक्ष लंबित विवादों के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि, यदि एएआर द्वारा पारित आदेश एक निर्धारण वर्ष की कुल आय को निर्धारित कर चुका हो और ऐसे आदेश के समक्ष रिट एचसी में लंबित हो तो अपीलार्थी विवाद से विश्वास के लिए आवेदन के योग्य होगा। उस मामले में विवादित कर एएआर के आदेश अनुसार आंका जाएगा और तद्नुसार, जब कभी भी आवश्यक हो, अहम आदेश निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किया जाएगा। हालांकि, यदि एएआर का आदेश कुल आय को निर्धारित न कर पाए तो विवादित कर की गणना कर पाना संभव नही और इसलिए ऐसे मामलों को शामिल नही किया जाएगा। उदाहरण देकर स्पष्ट करने के लिए, यदि एएआर ने निर्णय दिया हो कि भारत में स्थाई प्रतिष्ठान (पीई) मौजूद है लेकिन एओ ने ऐसे पीई हेतु निर्दिष्ट किए जाने वाली राशि को अभी तक निर्धारित न किया हो तो ऐसे मामलों को शामिल नहीं किया जा सकता चूंकि कुल आय को अभी तक निर्धारित नहीं किया जा सका है। | |
| प्रश्न सं. प्रश्न सं. | 4 | एक अपील को निर्धारिती कर पर लगाए गए ब्याज के समक्ष दाखिल किया गया है हालांकि, निर्धारिती कर की राशि के समक्ष कोई विवाद नहीं है। क्या विवाद से विश्वास का लाभ लिया जा सकता है ? |
| उत्तर : | विवादित ब्याज (जहां ऐसे ब्याज के अनुरूप कर पर कोई विवाद नहीं है) को शामिल करते हुए घोषणाएं विवाद से विश्वास के अंतर्गत योग्य है। यह स्पष्ट किया जा सकता है कि यदि कर की राशि पर विवाद हो और विवादित कर के लिए घोषणा की गई हो तो विवादित कर से संबंधित लागू या लागू होने वाली ब्याज की राशि पर राहत दी जाएगी। | |
| प्रश्न सं. | 5 | क्या हो यदि ब्याज सहित विवादित मांग को अपील करने के दौरान अपीलार्थी द्वारा भुगतान किया गया हो ? |
| उत्तर : | अपील जिसमें अपीलार्थी ने आंशिक या पूर्ण विवादित मांग का भुगतान पहले से किया हो, भी शामिल हैं। यदि दिए गए कर की राशि विवाद से विश्वास के अंतर्गत दी गई राशि से अधिक हो तो अपीलार्थी अधिनियम की धारा 244 क के अंतर्गत ब्याज के बिना प्रतिदाय का हकदार होगा। | |
| प्रश्न सं. | 6 | क्या विवाद से विश्वास का लाभ लिया जा सकता है यदि एक करदाता के विरूद्ध आयकर विभाग द्वारा जांच और जब्ती कार्रवाई को की गई हो ? |
उत्तर : |
मामला जहां अधिनियम की धारा 132 या धारा 132क के अंतर्गत की गई जांच के आधार पर अधिनियम की धारा 143(3) या धारा 144 या धारा 153क या 153ग कर बकाया शामिल न हो यदि विवादित कर की राशि उस निर्धारण वर्ष में पांच करोड़ रूपए से अधिक हो। इसलिए, यदि जांच व जब्ती से संबंधित निर्धारिती के 7 मूल्यांक न हों, जिसमें से 4 मूल्यांकन, विवादित कर प्रत्येक वर्ष में पांच करोड़ या उससे कम हो और शेष 3 निर्धारण, विवादित कर प्रत्येक वर्ष में पांच करोड़ से अधिक हो तो 4 मूल्यांकनों के लिए घोषणा की जा सकती है जहां विवादित कर प्रत्येक वर्ष में पांच करोड़ या उससे कम का है। |
|
| प्रश्न सं. | 7 | यदि निर्धारण को निर्धारण अधिकारी द्वारा किए गए परिवर्धन पर एक निर्धारिती को उचित अवसर देने के लिए रद्द किया गया हो तो क्या वह ऐसी परिवर्धन के संदर्भ में विवाद से विश्वास का लाभ लिया जा सकता है? |
उत्तर : |
यदि एक अपीलीय प्राधिकारी ने विशेष निर्देश के साथ मुद्दे की नई जांच करने के लिए या उचित अवसर देते हुए निर्धारण अधिकारी को दाखिल करने के लिए आदेश (वहां छोड़कर जहां निर्धारण इस निर्देश के साथ रद्द किया है कि निर्धारण को नए सिरे से तैयार किया जाना है) को रद्द किया हो तो निर्धारिती विवाद से विश्वास का लाभ लेने के योग्य होगा। यद्यपि, अपीलार्थी को अन्य मुद्दों, यदि हो, का निपटान करना आवश्यक होगा जिसको उस निर्धारण और उसके संदर्भ में रद्द नहीं किया गया है जहां या तो अपील लंबित है या अपील करने का समय समाप्त न हुआ हो। ऐसे मामले में विवादित कर, वह कर होगा (अधिभार और अधिकर सहित) जिसको उस परिवर्धन के संदर्भ में दिया गया होता जिसके संदर्भ में आदेश को अपीलार्थी प्राधिकारी द्वारा रद्द किया गया था, निर्धारण अधिकारी द्वारा वापस दिया जाना था। ऐसे मामलों में घोषणा प्रपत्र नं. 1 को दाखिल करने के दौरान, घोंषणा कर्ता इंगित कर सकता है कि उपयुक्त सूचि के संदर्भ में जारी अपील आयुक्त (अपील) के पास लंबित है। |
|
| प्रश्न सं. | 8 | एक मामले की कल्पना कीजिए जहां एक अपीलार्थी क्वांटम अपील, जो उच्च अपीलीय फोरम के पास गई हो, की मुकद्मेबाजी को जारी रखने के दौरान आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष छुपाई गई लंबित जुर्माना अपील को निपटाना चाहता है। इन दो स्वतंत्र और विभिन्न अपीलों पर विचार करते हुए, क्या अपीलार्थी दूसरी अपील को बाहर रखने के लिए एक अपील का निपटान कर सकता है? यदि हां, तो क्या जुर्माना अपील के निपटान का प्रभाव क्वांटम अपील पर होगा ? |
| उत्तर : | यदि दोनों क्वांटम अपील में विवादित कर शामिल हो और एक निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे विवादित कर की वसूली पर जुर्माने के समक्ष अपील लंबित हो तो घोषणाकर्ता को दोनों विवादित कर अपील और जुर्माना अपील का ब्यौरा देते हुए घोषणाकर्ता प्रपत्र को दाखिल करना आवश्यक है। हालांकि, उसे केवल विवादित कर के प्रासंगिक प्रतिशत को देना आवश्यक होगा। आगे, यह अपीलार्थी के लिए यह संभव नहीं कि वह केवल तभी जुर्माना अपील के निपटान के लिए आवेदन करें जब ऐसे जुर्माने से संबंधित विवादित कर पर अपील लंबित हो। | |
| प्रश्न सं. | 9 | क्या विवाद से विश्वास के अंतर्गत अर्हता प्राप्त करना आवश्यक है, अपीलार्थी के पास घोषणा को दाखिल करने की तिथि के अनुसार बकाया कर मांग होनी चाहिए ? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास का लाभ कर बकाए का भुगतान आंशिक तौर पर या पूर्ण रूप से किया गया है या शेष है, के बावजूद अपीलार्थी द्वारा लिया जा सकता है। | |
| प्रश्न सं. | 10. | क्या धारा 234ड़ और 234च में अपील शामिल हैं? |
उत्तर : |
यदि अपील अधिनियम की धारा 234ड़ या 234ड़ के अंतर्गत शुल्क लगाने के विरूद्ध की गई हो तो अपीलार्थी विवादित शुल्क के लिए घोषणा करने के योग्य होगा और विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि विवादित शुल्क का 25 प्रतिशत या 30 प्रतिशत, यदि हो, होगी। यदि धारा 234ड़ या 234च के अंतर्गत लगाया गया शुल्क उस वर्ष से संबंधित है जिसमें विवादित कर है तो विवादित कर का निपटान विवादित शुल्क का निपटान नहीं करेगा। यदि निर्धारिती विवादित शुल्क का समाधान चाहता है तो उसे इसे 25 प्रतिशत या 30 प्रतिशत, जो भी हो, विवादित शुल्क का अलग से भुगतान करके समाधान करना होगा। |
|
प्रश्न सं. |
11 |
यदि जहां विवादित कर में योग्य कर बकाया साथ ही गैर-योग्य कर बकाया शामिल है (जैसे अघोषित विदेशी आय के संदर्भ में किए गए निर्धारण के संबंध में कर बकाया) (i) क्या निर्धारिती विवाद से विश्वास के लिए खुद योग्य है ? (ii) यदि योग्य है तो क्या विवादित कर की परिमाणन गैर-योग्य कर बकाए को बाहर/नजरअंदाज कर सकता है ? |
| उत्तर : | यदि कर बकाए में इस मुद्दे पर कर शामिल है जो विवाद से विश्वास से बाहर है तो ऐसे मामले विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा करने के योग्य नही हैं। विवाद से विश्वास के अंतर्गत एक निर्धारण वर्ष के लिए एक अपील या रिट या एसएलपी के संबंध में एक लंबित विवाद के हिस्से के समाधान का कोई प्रावधान नहीं है। एक लंबित अपील के लिए, सभी मुद्दों का समाधान किया जाना आवश्यक है और इनमें से कोई भी मुद्दा घोषणा को अमान्य बनाता हो तो कोई घोषणा नहीं की जा सकती। | |
| प्रश्न सं. | 12 | यदि एक याचिका रिट अधिनियम की धारा 148 के अंतर्गत जारी किए गए नोटिस के विरूद्ध की गई हो और उस धारा 148 नोटिस के परिणामस्वरूप कोई निर्धारण आदेश पारित न किया गया हो तो क्या ऐसा मामला विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा करने के योग्य होगा ? |
| उत्तर : | निर्धारिती विवाद से विश्वास के योग्य नहीं होगा क्योंकि कथित नोटिस के समक्ष आय का कोई निर्धारण नहीं है। | |
| प्रश्न सं. | 13 | धारा 234क, 234ख या 234ग के अंतर्गत ब्याज के संदर्भ में, कोई अपील नहीं है लेकिन निर्धारिती ने उस सक्षम प्राधिकारी के समक्ष छूट संबंधी आवेदन किया है जो 31 जनवरी, 2020 तक लंबित है ? क्या ऐसे मामलों को विवाद से विश्वास के अंतर्गत शामिल किया जाएगा ? |
| उत्तर : | नहीं, ऐसे मामले शामिल नहीं हैं। छूट आवेदन विवाद से विश्वास के अर्थ के अंतर्गत अपील नहीं है। | |
| प्रश्न सं | 14 | क्या निर्धारिती कुछ मुद्दों के लिए विवाद से विश्वास का लाभ ले सकते हैं और अन्य मुद्ददों को स्वीकार न करने का विकल्प है ? |
| उत्तर : | प्रश्न सं. 11 के उत्तर को संदर्भित करें। एक अपील के निपटान के लिए मुद्दों को चुनने और पसंद करने की अनुमति नहीं है। एक आदेश के संदर्भ में, अपीलार्थी को सभी मुद्दों के निपटान करने को चुनना चाहिए और फिर वह घोषणा दाखिल करने के योग्य होगा। | |
| प्रश्न सं. | 15 | क्या टीडीएस/टीसीएस को जमा करने में देरी भी विवाद से विश्वास के अंतर्गत शामिल है ? |
|
उत्तर :
|
विवादित कर में स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर कर एकत्रीकरण (टीसीएस) से संबंधित कर शामिल है जो विवादित और लंबित अपील है। हालांकि, यदि टीडीएस या टीसीएस से संबंधित कोई विवाद नहीं है और ऐसे टीडीएस/टीसीएस को जमा करने में देरी है तो ऐसी देरी के कारण लगाए गए ब्याज से संबंधित विवादित लंबित अपील विवाद से विश्वास के अंतर्गत शामिल होगी। | |
|
प्रश्न सं.
|
16 | क्या डीआरपी के समक्ष लंबित मामले शामिल है? क्या हो यदि निर्धारिती ने डीआरपी को आपत्ति दर्ज नहीं कराई और एओ ने अंतिम आदेश अभी तक न दिया हो ? |
उत्तर : |
हां, एक व्यक्ति जिसने अधिनियम की धारा 144ग के अंतर्गत डीआरपी के समक्ष आपत्ति दर्ज की हो और डीआरपी ने निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले कोई निर्देश न दिया हो साथ ही साथ एक व्यक्ति जिसके मामले में डीआरपी ने निर्देश जारी किए हों लेकिन निर्धारण अधिकारी ने निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले अंतिम निर्धारण आदेश पारित न किया हो तो वह विवाद से विश्वास के अंतर्गत योग्य है। आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसी स्थिति हो सकती है जहां निर्धारण अधिकारी ने निर्दिष्ट तिथि से पहले मसौदा निर्धारण आदेश पारित न किया हो। निर्धारिती ने डीआरपी को आपत्ति दर्ज न करने का निर्णय लिया हो और उस निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किए जाने वाले अंतिम आदेश का इंतजार कर रहा हो जिसके समक्ष वह आयुक्त (अपील) को अपील कर सकता है। इस मामले में भले ही अंतिम आदेश निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले पारित न किया गया हो, निर्धारिती को अपीलार्थी के तौर पर समझा जाएगा और विवाद से विश्वास के अंतर्गत अपने विवाद के निपटान के योग्य होगा। ऐसे मामले में विवादित कर मसौदा आदेश के आधार पर आंका जाएगा। घोषणा प्रपत्र नं. 1 में, इस स्थिति में अपीलार्थी को इंगित करना चाहिए कि डीआरपी को आपत्ति करने का समय समाप्त नहीं हुआ है। |
|
| प्रश्न सं. | 17. | यदि आयकर आयुक्त(अपील) ने एक वृद्धि नोटिस दिया हो तो क्या अपीलार्थी कुल निर्धारिती आय में प्रस्तावित संवृद्ध आय को शामिल करने के बाद विवाद से विश्वास का लाभ ले सकता है? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास में प्रस्तावित संशोधन घोषणाकर्ता को उन मामलों में भी अनुमति देता है जहां आयकर आयुक्त (अपील) ने 31 जनवरी, 2020 को या उससे पहले वृद्धि नोटिस जारी किया हो। हालांकि, ऐसे मामलों में विवादित कर को उन मुद्दों से संबंधित कर की राशि द्वारा बढ़ाया जाएगा जिसके लिए वृद्धि संबंधी नोटिस दिया गया है। | |
| प्रश्न सं. | 18 | संपत्ति कर, प्रतिभूति लेनदेन कर, वस्तु लेनदेन कर और समकरण उदग्रहण से संबंधित कोई विवाद शामिल है ? |
| उत्तर : | नहीं, केवल आयकर से संबंधित विवाद शामिल हैं। | |
|
प्रश्न सं.
|
19. | अधिनियम की धारा 143(3) के अंतर्गत निर्धारण आदेश निर्धारण वर्ष 2015-16 के लिए एक निर्धारिती के मामले में पारित किया गया था। कथित निर्धारण आदेश आईटीएटी के पास लंबित है। तद्नुसार धारा 147/143(3) के अंतर्गत अन्य आदेश उसी निर्धारण वर्ष के लिए पारित किया गया था और जो आयकर आयुक्त(अपील) के पास लंबित है? क्या दोनों या एक आदेश विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटान किया जा सकता है? |
| उत्तर : | इस मामले में अपीलार्थी के पास उसी निर्धारण वर्ष के लिए या तो दोनों में से एक अपील या दोनों अपील को निपटाने का विकल्प है। यदि वह दोनों अपील को निपटाने का निर्णय लेता है तो उसे केवल एक घोषणा प्रपत्र सं. 1 दाखिल करना होगा। इस मामले में विवादित कर दोनों अपीलों में विवादित कर की कुल राशि होगी। | |
| प्रश्न सं. | 20 | यदि किसी मामले में कोई विवादित कर न हो। हालांकि, उस विवादित जुर्माने के लिए अपील की गई हो जिसको 1 जनवरी, 2020 को आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा निपटाया गया हो। आयुक्त (अपील) के आदेश के समक्ष आईटीएटी में अपील करने का समय अभी भी हो लेकिन अपील अभी तक दाखित न की गई हो। क्या ऐसे मामलों में लाभ लिया जा सकता है? |
| उत्तर : | हां, इस मामले में अपीलार्थी विवाद से विश्वास का लाभ लेने के योग्य होगा। इस मामले में, विवादित जुर्माने/ब्याज/शुल्क के मामले में विवाद से विश्वास के लाभ लेने की शर्तें विवादित कर के मामले में एकसमान है। इसलिए, यदि अपील करने की समय सीमा निर्दिष्ट तिथि पर समाप्त न हुई हो तो अपीलार्थी विवाद से विश्वास का लाभ लेने के योग्य है। इस मामले में, अपीलार्थी घोषणा पत्र सं. 1 में दर्शाना चाहिए कि आईटीएटी में अपील दाखिल करने की समय सीमा घोषणाकर्ता उक्त सूची मे समाप्त नहीं हुई है। | |
| प्रश्न सं. | 21 | यदि आईटीएटी ने निर्धारण अधिकारी द्वारा अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर निर्धारण आदेश को खारिज कर दिया हो। विभाग ने उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की हो जो लंबित हो। क्या निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत इस विवाद को निपटाने के योग्य है और यदि हां तो विवादित कर की गणना कैसे की जाएगी जहां कोई निर्धारण आदेश न हो ? |
| उत्तर : | इस मामले में निर्धारिती उच्च न्यायालय में अपील का निपटान करने के योग्य है। देययोग्य राशि उस विवादित कर पर 100 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 125 प्रतिशत या 135 प्रतिशत, जो भी स्थिति हो, की आधी दर पर आंकी जाएगी जिसको वापस लिया जा सकता है यदि विभाग को उच्च न्यायालय में अपील जीतनी थी। | |
| प्रश्न सं. | 22 | एक निर्धारिती के मामले में अभियोग संस्थापित किया गया हो और न्यायालय में लंबित हो। क्या निर्धारिती विवाद से विश्वास के योग्य है? आगे, जहां अभियोजन प्रारंभ न हुआ हो लेकिन नोटिस जारी कर दिया गया हो तो क्या निर्धारिती विवाद से विश्वास के लिए योग्य है? |
| उत्तर : | जहां अभियोजन के लिए नोटिस अभियोजन दिए बिना ही जारी कर दिया गया हो तो निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा दाखिल करने के योग्य है। हालांकि, जहां अभियोजन एक निर्धारण वर्ष के संबंध में प्रारंभ हो गया हो तो निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत उस निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा करने के योग्य नही हैं जबतक अभियोजन घोषणा करने से पहले तय न किया गया हो | |
| प्रश्न सं. | 23 | यदि अपील को दाखिल करने की नियत तिथि 31.01.2020 के बाद है, अपील दाखिल न की गई हो तो क्या ऐसा मामला विवाद से विश्वास के योग्य होगा ? |
| उत्तर : | हां | |
| प्रश्न सं. | 24 | यदि अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की गई हो और 31.01.2020 के अनुसार प्रवेश के लिए लंबित हो, क्या मामला विवाद से विश्वास के योग्य है ? |
| उत्तर : | हां | |
| "गणना से संबंधित प्रश्न (प्रश्न सं. 25-40)" | ||
| प्रश्न सं. | 25 | यदि अपील या मध्यस्थता निर्दिष्ट तिथि को लंबित हो लेकिन एक संशोधन निर्धारण अधिकारी के पास भी लंबित हो जिसको यदि स्वीकृत किया गया हो तो कुल निर्धारित आय को कम करेगा। क्या विवादित कर की गणना संशोधित कुल मूल्यांकित आय पर आंकी जाएगी ? |
| उत्तर : | निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित संशोधन आदेश का विवादित कर के निर्धारण पर प्रभाव हो सकता है यदि संशोधन के परिणामस्वरूप निर्धारिती की आय और कर देयता में कमी या बढ़ोत्तरी हो। ऐसे मामलों में विवादित कर पारित संशोधन आदेश, यदि हो, को प्रभावी करने के बाद आंकी जाएगी। | |
| प्रश्न सं. | 26 | प्रश्न संख्या 5 को संदर्भित करें। विवादित कर को उस एक मामले में कैसे आंका जाना है जहां ब्याज सहित विवादित मांग अपील के दौरान निर्धारिती द्वारा दिया गया हो? |
| उत्तर : | कृपया प्रश्न सं. 5 के उत्तर को संदर्भित करें। उदाहरण के लिए, एक गैर-खोज मामले पर विचार करें जहां एक निर्धारिती आयुक्त(अपील) के समक्ष अपील करता है। लौटाई गई राशि (अधिभार और अधिकर सहित) पर कर रू. 30,000 है और धारा 234ख के अंतर्गत ब्याज रू. 1000 है। निर्धारिती ने अपनी कर विवरणी को दाखिल करने के समय रू. 31,000 की राशि का भुगतान किया है। निर्धारण के दौरान वृद्धि की गई और रू. 16,000 की अतिरिक्त मांग की गई जिसमें रू. 10,000 का विवादित कर (अधिभार और अधिकर सहित) और ऐसे विवादित कर पर रू. 6000 का ब्याज शामिल है। निर्धारिती ने मांग के रू. 1400 दिए अलग से जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, अधिनियम की धारा 220 के अंतर्गत ब्याज की गणना अभी भी की जानी है। निर्धारिती ने घोषणा की है जिसको स्वीकृत किया गया है और प्रमाणपत्र नामित प्राधिकारी (डीए) द्वारा जारी किया गया है। रू. 10,000 का विवादित कर (100 प्रतिशत पर) 31 मार्च 2020 को या उससे पहले दिया जाना है। चूंकि वह रू. 14,000 पहले की दे चुका है वह रू. 4,000 (धारा 244क ब्याज के बिना) के प्रतिदाय का हकदार होगा। आगे, धारा 220 के अंतर्गत लगाए जाने वाला ब्याज और जुर्माने की भी छूट दी जाएगी। | |
| प्रश्न सं. | 27 | प्रश्न सं. 7 को संदर्भित करें। उस मामले में विवादित कर की गणना कैसे करें जहां निर्धारण, निर्धारण अधिकारी द्वारा की गई वृद्धि पर एक निर्धारिती को उचित अवसर देते हुए रद्द किया गया हो ? |
उत्तर : |
कृपया प्रश्न सं. 7 के उत्तर को संदर्भित करें। उदाहरण के लिए, आय की विवरणी निर्धारिती द्वारा दाखिल की गई थी। प्रतिदाय आय पर कर रू. 10,000 था और ब्याज रू. 1,000। रू. 11,000 की राशि विवरणी को दाखिल करने से पहले दी गई थी। निर्धारण अधिकारी ने रू. 20,000/- और रू. 30,000/- की दो अतिरिक्त वृद्धि की है। इस पर कर (अधिभार और अधिकर सहित) रू. 6,240/- और रू. 9,360/- है और ब्याज क्रमश: रू. 2,500 और रू. 3,500 है। आयुक्त (अपील) ने दो वृद्धियों की पुष्टि की है। आईटीएटी ने प्रथम वृद्धि (रू. 20,000/-) की पुष्टि की है और विशिष्ट निर्देश के साथ सत्यापन के लिए निर्धारण अधिकारी को दाखिल करने के लिए दूसरी वृद्धि (रू. 30,000) को पुष्ट किया है। प्रथम वृद्धि (या अपील न की हो चूंकि आदेश के समक्ष अपील को दाखिल करने की समय सीमा समाप्त न हुई हो) के संदर्भ में आईटीएटी आदेश के समक्ष निर्धारिती अपील करता है। निर्धारिती विवाद से विश्वास का लाभ ले सकता है यदि घोषणा दोनों वृद्धियों को शामिल करती है। इस मामले में विवादित कर दोनों वृद्धियों यानी रू. 6240/- साथ ही रू. 9360/- पर विवादित कर की राशि का जोड़ होगी। ऐसे मामलों में घोषणा प्रपत्र सं. 1 में भरने के दौरान, घोषणाकर्ता इंगित कर सकता है कि रद्द किए गए मुद्दों के संदर्भ में आयुक्त सूची में अपील आयुक्त (अपील) के पास लंबित है। |
|
| प्रश्न सं. | 28 | कर की कितनी राशि का भुगतान किया जाना आवश्यक है, यदि निर्धारिती विवाद से विश्वास का लाभ लेना चाहता है ? |
उत्तर : |
विवाद से विश्वास के अंतर्गत, घोषणाकर्ता को विवाद का निपटारा करने के लिए निम्नलिखित भुगतान करना आवश्यक है : क. धारा 264/ निर्धारिती द्वारा दाखिल मध्यस्थता के अंतर्गत अपील/रिट/एसएलपी/डीआरपी आपत्ति/संशोधन में - (क) यदि भुगतान 31 मार्च, 2020 तक किया जाता है (i) विवादित कर (खोज मामलों में 125 प्रतिशत) का 100 प्रतिशत जहां विवाद विवादित कर (100 प्रतिशत से अधिक राशि ब्याज की राशि या लगाए गए या लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि तक सीमित है) से संबंधित है या (ii) 25 प्रतिशत विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क जहां विवाद विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क से ही संबंधित हो (ख) यदि भुगतान 31 मार्च, 2020 के बाद किया जाता है - (i) विवादित कर का 110 प्रतिशत (खोज मामलों में 135 प्रतिशत) जहां विवाद विवादित कर (100 प्रतिशत से अधिक राशि ब्याज और जुर्माने की राशि तक सीमित है) से संबंधित है या (ii) 30 प्रतिशत विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क जहां विवाद विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क से ही संबंधित हो हालांकि, यदि एक अपील आयुक्त (अपील) के समक्ष की जाती हो या आपत्ति में डीआरपी के समक्ष लंबित हो तो ऐसा मुद्दा हो सकता है जिस पर अपीलार्थी पूर्व के वर्षों में आईटीएटी (उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द नही) या उच्च न्यायालय द्वारा (उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द नहीं) पसंदीदा निर्णय प्राप्त नहीं करता तो देययोग्य राशि उक्त राशि का आधा या 50 प्रतिशत होगी। ख. विभाग द्वारा दाखिल की गई अपील/रिट/एसएलपी में - (क) यदि भुगतान 31 मार्च, 2020 तक किया जाता है (i) विवादित कर (खोज मामलों में 62.5 प्रतिशत) का 50 प्रतिशत यदि विवाद विवादित कर से संबंधित हो या (ii) 12.5 प्रतिशत विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क जहां विवाद विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क से ही संबंधित हो (ख) यदि भुगतान 31 मार्च, 2020 के बाद किया जाता है - (i) विवादित कर का 55 प्रतिशत (खोज मामलों में 67.5 प्रतिशत) जहां विवाद विवादित कर से संबंधित है या (ii) 15 प्रतिशत विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क जहां विवाद विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क से ही संबंधित हो |
|
| प्रश्न सं. | 29 | क्या विवादित कर के समक्ष दिए गए पूर्व कर के लिए ऋण विवाद से विश्वास के अंतर्गत किए जाने वाले भुगतान के समक्ष उपलब्ध होगा? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणाकर्ता द्वारा देययोग्य राशि वाक्यांश 5 के अंतर्गत डीए द्वारा निर्धारित होगी। घोषणा दाखिल करने से पहले विवादित कर के समझ दिए गए कर के लिए ऋण घोषणाकर्ता के लिए उपलब्ध होगी। कृपया उक्त प्रश्न सं. 26 के उदाहरण को संदर्भित करें। यदि रू. 10,000 के विवादित कर के विवादित कर के समझ उस उदाहरण में रु. 8,000 /- की राशि पहले ही दी जा चुकी हो तो अपीलार्थी को 31 मार्च 2020 तक रु. 2,000 तक की शेष राशि देना आवश्यक है। | |
| प्रश्न सं. | 30 | जहां निर्धारिती टीडीएस अपील का निपटान करता है या टीडीएस के डिडक्टर के तौर पर मध्यस्थता (धारा 201 के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध) को वापस लेता है तो क्या ऐसे कर का क्रेडिट डिडक्टी के लिए स्वीकृत होगा ? |
| उत्तर : | ऐसे मामलों में, डिडक्टी को उसके संदर्भ में करों के ऋण का दावा करने की अनुमति होगी जिसके संदर्भ में डिडक्टर ने विवाद से विश्वास के अंतगत विवाद के समाधान को निपटाने का लाभ लिया है। हालांकि, ऋण डिडक्टर द्वारा विवाद के निपटान की तिथि के अनुसार स्वीकृत होगा और इसलिए डिडक्टर के लिए लागू होने वाला ब्याज लागू होगा। | |
| प्रश्न सं. | 31 | जहां निर्धारिती विवाद से विश्वास (यानी धारा 201 के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध) के अंतर्गत टीडीएस के डिडक्टर के तौर पर टीडीएस देयता का निपटान करता है तो कब वह धारा 40(क)(i)/(iक) के परंतुक के अंतर्गत व्यय राहत संबंधी महत्वपूर्ण छूट प्राप्त करेगा? |
उत्तर : |
ऐसे मामलों में, डिडक्टर उस वर्ष में धारा 40(क)(i)/(iक) के परंतुक के अंतर्गत स्वीकार्य व्यय की महत्वपूर्ण राहत को प्राप्त करने का हकदार होगा जिसमें कर कटौती की जानी आवश्यक थी। उदाहरण के लिए, कल्पना कीजिए कि दो अपील लंबित है, एक टीडीएस की गैर-कटौती के लिए अधिनियम की धारा 201 के अंतर्गत आदेश के समक्ष और दूसरी अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत अस्वीकृति के लिए अधिनियम की धारा 143(3) के अंतर्गत आदेश के समक्ष। धारा 40 के अंतर्गत अस्वीकृति उस मुद्दे के संदर्भ में है जिस पर धारा 201 के अंतर्गत आदेश दिया गया है। यदि विवाद धारा 201 के अंतर्गत आदेश के संदर्भ में निपटाया जाता है तो निर्धारिती को अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के प्रावधानों के अनुसार अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत अस्वीकृति से संबंधित मुद्दों पर किसी कर का भुगतान करना आवश्यक नहीं है। यदि, धारा 143(3) के अंतर्गत आदेश में, अन्य मुद्दे भी हो और अपीलार्थी धारा 143(3) के अंतर्गत भी आदेश के संदर्भ में विवाद का समाधान करना चाहते हो तो उस मुद्दे से संबंधित अधिनियम की धारा 40(क)(i)(iक) के अंतर्गत अस्वीकृति जिस पर वह पहले से ही धारा 201 के अंतर्गत देयता का निपटान पहले ही कर चुका है, उसे विवादित कर की गणना के लिए नजरअंदाज किया जाएगा। यदि निर्धारिती ने योग्यता के आधार पर धारा 201 के अंतर्गत आदेश को चुनौती दी हो और उच्चतम न्यायालय में जीत गया हो या निर्धारिती के पक्ष में इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय से नीचे के किसी अपीलीय प्राधिकारी के आदेश योग्यता के आधार विभाग द्वारा चुनौती (इसलिए नहीं कि अपील लागू होने वाले सीबीडीटी परिपत्र के अनुसार अपील को दाखिल करने के लिए मौद्रिक सीमा के कारण दाखिल नहीं की गई थी) न दी गई हो तो एक मामले में जहां अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत अस्वीकृति धारा 201 के अंतर्गत ऐसे आदेश के परिणामस्वरूप है और उसके मामले में धारा 143(3) के अंतर्गत आदेश के अनुसार विवादित आय का हिस्सा है तो ऐसी अस्वीकृति को अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के परंतुक के अनुसार विवादित कर की गणना के लिए नजरअंदाज किया जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि निर्धारिती ने धारा 40(क)(i)/(iक) को प्रदर्शित करने वाली वृद्धि के समक्ष भुगतान किया हो तो निर्धारिती विवाद से विश्वास के अंतर्गत प्रतिदाय राशि, यदि हो, को अधिनियम की धारा 244क के अंतर्गत ब्याज का हकदार नही होगा। |
|
| प्रश्न सं. | 32 | जब निर्धारिती अपनी खुद की अपील या मध्यस्थता को विवाद से विश्वास के अंतर्गत निपटाने का प्रयास करता है तो क्या धारा 201 के अंतर्गत टीडीएस आदेश के अंतर्गत निर्धारित देयता में चूक के लिए डिडक्टर के लिए महत्वपूर्ण राहत उपलब्ध होगी? |
| उत्तर : | जब एक निर्धारिती (आय प्राप्त करने वाले एक व्यक्ति के तौर पर) विवाद से विश्वास के अंतर्गत अपनी खुद की अपील या मध्यस्थता का समाधान करता है और ऐसी अपील या मध्यस्थता एक ऐसी आय के निर्धारण से संबंधित हो जो ऐसी आय (गलती करने वाला डिडक्टर) के अदाता द्वारा टीडीएस का विषय नहीं थी और अधिनियम की धारा 201 के अंतर्गत एक ऐसे आदेश के विरूद्ध आदेश पारित किया गया हो तो ऐसी गलती करने वाले डिडक्टर को इसी प्रकार की टीडीएस राशि का भुगतान करना आवश्यक नहीं है। हालांकि, उसे अधिनियम की धारा 201 की उप-धारा (1क) के अंतर्गत ब्याज का भुगतान करना आवश्यक होगा। यदि धारा 201 की उप-धारा (1क) के अंतर्गत ब्याज की ऐसी वसूली विवाद से विश्वास के लिए आवश्यक हो तो गलती करने वाला डिडक्टर विवादित ब्याज की प्रासंगिक अनुसूची को भरकर विवादित ब्याज, जो भी मामला हो, के 25 प्रतिशत या 30 प्रतिशत की दर पर इस विवाद का निपटारा कर सकता है। | |
| प्रश्न सं. | 33 | जहां डीआरपी को 1 जुलाई, 2012 को या उसके बाद पारित किया गया हो और 1 जून, 2016 से पहले निर्धारिती को राहत दी गई हो और विभाग ने अपील दाखिल कर दी हो तो आंकलित कर की गणना कैसे की जानी है? |
| उत्तर : | यदि विभागीय अपील का निपटान किया जाना आवश्यक हो तो उस अपील के विरूद्ध अपीलार्थी को राशि का केवल 50 प्रतिशत ही दिया जाना आवश्यक है जो अन्यथा भी देययोग्य होती यदि वह उसकी अपील होती। | |
| प्रश्न सं. | 34 | मूल्यांकन आदेश के खिलाफ और जुर्माना आदेश के खिलाफ अपील एक ही मुद्दे पर अलग से की गई है। इसलिए, दोनों के लिए अलग अपील है। ऐसे मामले में विवादित कर को किसी प्रकार गणना की जानी है? |
| उत्तर : | कृपया प्रश्न सं. 8 देखें। आगे, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि अपीलार्थी की एक ही निर्धारण वर्ष के लिए लंबित एक ही निर्धारण के संबंध में अपील के खिलाफ अपील और निर्धारण आदेश के खिलाफ अपील है और वह निर्धारण आदेश (जुर्माना अपील के साथ जो अपने आप इसमें शामिल है) के खिलाफ अपील को निपटाने का इरादा रखता है, उसे उस वर्ष के लिए एक घोषणा प्रपत्र (प्रपत्र सं. 1) में दोनों अपीलों का ब्यौरा देना आवश्यक है | |
|
प्रश्न सं.
|
35 | यदि विभिन्न निर्धारण वर्ष के लिए एक ही निर्धारिती के मामले में मौलिक वृद्धि हो साथ ही साथ रक्षात्मक वृद्धि हो तो उसे कैसे शामिल किया जाएगा? इसी प्रकार, यदि एक निर्धारिती के मामले में मौलिक वृद्धि हो और अन्य निर्धारिती के मामले में उसी मुद्दे पर रक्षात्मक वृद्धि हो तो विवाद से विश्वास के अंतर्गत उसे कैसे शामिल किया जाएगा ? |
| उत्तर : | यदि मौलिक वृद्धि विवाद से विश्वास के अंतर्गत शामिल करने योग्य हो तो मौलिक वृद्धि से संबंधित विवाद के निपटारे पर निर्धारण अधिकारी निर्धारिती या अन्य निर्धारिती के मामले में उसी मुद्दे के संबंध में रक्षात्मक वृद्धि को हटाते हुए संशोधन आदेश पारित कर सकते हैं। | |
| प्रश्न सं. | 36 | एक मामले में आईटीएटी ने दो मुद्दों पर राहत देते हुए और तीन मुद्दों को पुष्ट करते हुए आदेश पारित किया हो। निर्दिष्ट तिथि तक अपील करने का समय समाप्त न हुआ हो। करदाता उन तीन मुद्दों के लिए घोषणा करना चाहता हो जो उसके खिलाफ गए हैं। अन्य दो मुद्दों के बारे में क्या होगा चूंकि करदाता निश्चित नहीं है कि क्या विभाग अपील करेगा या नहीं? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास तब भी घोषणा करने की अनुमति देता है जब उनको डीम्ड अपील मानते हुए भी अपील करने का समय समाप्त न हुआ हो। विवाद से विश्वास निर्धारिती को विभागीय अपील के लिए केवल अपनी अपील या घोषणा या दोनों के लिए अपील या घोषणा करने के विकल्प का भी विचार करती है। इसलिए, दी गई स्थिति में, अपीलार्थी के पास विकल्प है कि वह तीन मुद्दों पर केवल अपनी डीम्ड अपील का निपटान करें या दो मुद्दों पर विभागीय डीम्ड अपील का निपटान कर सके या दोनों का निपटान करें। यदि वह केवल अपनी डीम्ड अपील का ही निपटान करने का निर्णय करता है तो विभाग सीबीडीटी द्वारा जारी किए गए निर्देशों और निर्दिष्ट वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार दो मुद्दों (जहां निर्धारिती को राहत मिली हो) पर अपील करने के लिए स्वतत्रं होगा। | |
| प्रश्न सं. | 37 | क्या ऐसे मुद्दे पर उच्च न्यायालय में लंबित अपील में 50 प्रतिशत की राहत का प्रावधान नहीं है जहां निर्धारिती को उच्चतम न्यायालय से उस मुद्दे पर राहत मिली हो? |
| उत्तर : | यदि अपीलार्थी को एक मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय से अपने पक्ष में निर्णय मिला हो, उस मुद्दे के संदर्भ में अब कोई विवाद न हो और उसे उस मुद्दे को निपटाने की जरूरत न हो। यदि वह मुद्दा कई मुद्दों का हिस्सा हो तो विवादित कर उसी मुद्दे पर शून्य कर पर विचार करते हुए अन्य मुद्दों पर आंका जा सकता है। | |
| प्रश्न सं. | 38 | दो मुद्दों पर धारा 143(3) के अंतर्गत संशोधित किया गया था जबकि अपील एक वृद्धि के लिए ही की गई थी। क्या दोनों वृद्धियों के लिए ब्याज और जुर्माने की छूट दी जा सकती है। |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास के अंतर्गत, ब्याज और जुर्माना केवल उसी मुद्दे पर छोड़ा जाएगा जो विवादित है और जिसके लिए घोषणा की है। इसलिए, गैर-विवादित मुद्दे के लिए, कर, ब्याज और जुर्माना देययोग्य होगा। | |
| प्रश्न सं. | 39 | डीआरपी ने मसौदा आदेश में सभी प्रस्तावित वृद्धि को पुष्ट करते हुए निर्देश जारी किए हैं और निर्धारण अधिकारी ने तद्नुसार आदेश पारित किया है। डीआरपी द्वारा पुष्ट किए गए मुद्दों में वह मुद्दे शामिल है जिन पर करदाता ने पहले के वर्षों में आईटीएटी (उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा खिलाफ न हो) से अपने पक्ष में आदेश प्राप्त किया है। आईटीएटी में अपील करने की समय सीमा अभी भी उपलब्ध है। करदाता स्थिति को यह समझते हुए विवाद से विश्वास के योग्य है कि करदाता की डीम्ड अपील आईटीएटी में हैं। इस मामले में विवादित कर की गणना कैसे की जाएगी? क्या यह पूर्व के वर्षों में आईटीएटी द्वारा आवंटित मुद्दों पर 100 प्रतिशत होगी या 50 प्रतिशत होगी? |
| उत्तर : | इस मामले में, मुद्दे जहां करदाता को पूर्व के वर्षों (उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा खिलाफ न हो) में आईटीएटी से राहत मिली हो, विवादित कर 100 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 125 प्रतिशत या 135 प्रतिशत, जो भी मामला हो, की सामान्य दर के आधे पर आंकी जाएगी। | |
| प्रश्न सं. | 40 | जहां एक निर्धारण वर्ष के लिए दो अपील की गई हो- एक अपील अपीलार्थी द्वारा की गई हो और दूसरी विभाग द्वारा तो क्या अपीलार्थी केवल एक अपील को चुन सकेगा? यदि हां, तो विवादित कर किसी प्रकार आंका जाएगा? |
| उत्तर : | अपीलार्थी के पास उसके द्वारा या विभाग द्वारा या दोनों के द्वारा की गई अपील का निपटान को चुनने का विकल्प है। घोषणा प्रपत्र को निर्धारण वर्ष के आधार पर दाखिल किया जाना है यानी एक निर्धारण वर्ष के लिए केवल एक घोषणा। विभिन्न निर्धारण वर्षों के लिए अलग घोषणा की जानी है। इसलिए अपीलार्थी को घोषणा पत्र में यह बताना जरूरी है कि क्या वह विशेष निर्धारण वर्ष के लिए अपने मामले या दोनों में अपनी अपील या विभागीय अपील का निपटान करना चाहता है या नहीं। देययोग्य कर की गणना तद्नुसार की जाएगी। | |
| "प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न (प्रश्न सं. 41-50)" | ||
| प्रश्न सं. | 41 | विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा करने के बाद कर देने के लिए कितना समय उपलब्ध होगा? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास के वाक्यांश 5 के अनुसार, डीए को घोषणा प्राप्ति की तिथि से पंद्रह दिनों के अंदर घोषणाकर्ता द्वारा देययोग्य राशि को निर्धारित करेगा और ऐसे निर्धारण के बाद देययोग्य राशि और कर बकाया के ब्यौरे सहित घोषणाकर्ता को प्रमाणपत्र देगा। घोषणाकर्ता प्रमाणपत्र प्राप्त होने की तिथि से पंद्रह दिनों के अंदर ऐसी निर्धारित राशि का भुगतान करेगा और निर्धारित रूप में डीए को ऐसे भुगतान का ब्यौरा देगा। इसके बाद, डीए यह कहते हुए एक आदेश देगा कि घोषणाकर्ता ने राशि का भुगतान कर दिया है। यह स्पष्ट किया जा सकता है कि 15 दिन बाहरी सीमा है। डीए को जल्द से जल्द एक प्रमाणपत्र देने का निर्देश दिया जाएगा ताकि अपीलार्थी 31 मार्च, 2020 को या उससे पहले राशि का भुगतान कर सके ताकि वह विवाद के निपटारे के लिए घटाए गए भुगतान का लाभ ले सके। | |
| प्रश्न सं. | 42 | यदि विवाद से विश्वास के लाभ लेने के बाद करों का भुगतान किया जाता है और बाद में करदाता इन दिए गए करों का प्रतिदाय लेने का निर्णय लेता है तो क्या यह संभव होगा? |
| उत्तर : | नहीं, विवाद से विश्वास के अंतर्गत की गई एक घोषणा के अनुसार दी गई किसी भी राशि किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं दी जाएगी। | |
| प्रश्न सं. | 43 | जहां अपील अपीलार्थी फोरम द्वारा रद्द की जाती है और घोषणाकर्ता को धारा 5(1) के अंतर्गत देययोग्य राशि की घोषणा के स्तर पर डीए द्वारा विवाद से विश्वास के अंतर्गत अयोग्य ठहराया जाता है या डीए द्वारा निर्धारित राशि घोषणाकर्ता द्वारा बताई गई राशि से अलग है और घोषणाकर्ता डीए की देययोग्य राशि के निर्धारण से सहमत नही है तो क्या अपील अपने आप पुननियुक्त होगी या अपीलार्थी प्राधिकारियों के समक्ष अपील दुबारा करने के लिए एक अलग आवेदन करने की आवश्यकता होगी |
उत्तर : |
संशोधित प्रक्रिया के अंतर्गत डीए द्वारा प्रमाणपत्र दिए जाने से पहले किसी अपील को रद्द किए जाने की आवश्यकता नहीं है। वाक्यांश 5 के अंतर्गत डीए द्वारा प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद, अपीलार्थी को अपीलार्थी फोरम के समक्ष लंबित अपील या रिट या विशेष अवकाश याचिका को रद्द करने की आवश्यकता है और उसी वाक्यांश के अनुसार डीए को भुगतान की सूचना के साथ रद्द के प्रमाण को देना आवश्यक है और ऐसा अनुरोध प्रक्रिया के अंतर्गत है, अनुरोध का प्रमाण संलग्न किया जाएगा। इसी प्रकार, मध्यस्थता के मामले में, समझौते या मध्यस्थता, मध्यस्थता/समझौते/बीच-बचाव के निरस्ती के प्रमाण डीए के भुगतान की सूचना सहित संलग्न की जानी है। |
|
| प्रश्न सं. | 44 | वाक्यांश 5(2) घोषणाकर्ता से डीए से प्रमाणपत्र की प्राप्ति की 15 दिनों के अंदर डीए द्वारा निर्धारित राशि देने की अपेक्षा करता है। इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है कि क्या घोषणाकर्ता 15 दिनों की अवधि के अंदर घोषणा के अनुसार किए गए भुगतान के तथ्य के बारे में डीए को भी सूचित करना आवश्यक है? |
| उत्तर : | वाक्यांश 5(2) के अनुसार, घोषणाकर्ता को प्रमाणपत्र की प्राप्ति की तिथि के 15 दिनों के अंदर वाक्यांश 5(1) के अंतर्गत निर्धारित राशि देनी होगी और निर्धारित रूप में डीए को ऐसे भुगतान का ब्यौरा देना होगा और इसके बाद डीए यह कहते हुए आदेश पारित करेगा कि घोषणाकर्ता ने राशि का भुगतान कर दिया है। | |
| प्रश्न सं. | 45 | क्या डीए स्पष्ट रूप से निर्धारण अधिकारी द्वारा ब्याज और जुर्माना वसूलने से छूट साथ ही साथ अभियोजन से छूट देते हुए आदेश देगा? |
| उत्तर : | वाक्यांश 6 के अनुसार, वाक्यांश 5 के प्रावधानों के अनुसार, डीए एक उल्लंघन के संदर्भ में किसी अभियोजन को प्रारंभ नहीं करेगा या किसी जुर्माने को नहीं लगाएगा या वसूलेगा या कर बकाए के संदर्भ में आयकर अधिनियम के अंतर्गत किसी ब्याज को वसूलेगा। इसे डीए द्वारा पारित धारा 5(2) के अंतर्गत आदेश में दोहराया जाएगा। | |
| प्रश्न सं. | 46 | क्या डीए किसी स्पष्ट गलती को दूर करने के लिए अपने आदेश को संशोधित कर सकता है? |
| उत्तर : | हां, डीए किसी स्पष्ट गलती को संशोधित करने के लिए वाक्यांश 5 के अंतर्गत अपने आदेश को संशोधित कर सकता है। | |
| प्रश्न सं. | 47 | जहां डीए द्वारा निर्धारित कर स्वीकृत न हो तो क्या आईटीएटी, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष नामित प्राधिकारी के आदेश के विरूद्ध अपील की जा सकती है? |
| उत्तर : | नहीं, वाक्यांश 4(7) के अनुसार, कोई अपीलार्थी फोरम या मध्यस्त, समझौताकार या सुलह कराने वाला उसके संदर्भ में घोषणा में निर्दिष्ट बकाए कर से संबंधित किसी मुद्दे का निर्णय नहीं करेगा जिसके संदर्भ में डीए द्वारा आदेश पारित किया गया है या राशि का भुगतान डीए द्वारा निर्धारित किया गया है। | |
| प्रश्न सं. | 48 | क्या विवाद के निपटान पर विभाग द्वारा अपील/रिट/एसएलपी को निरस्त करने का कोई प्रावधान नहीं है? |
| उत्तर : | विभागीय अपील/रिट/एसएलपी से संबंधित अपीलार्थी द्वारा डीए के भुगतान की सूचना पर विभाग ऐसी अपील/रिट/एसएलपी को निरस्त करेगा। | |
| प्रश्न सं. | 49 | एक बार विवाद से विश्वास के अंतर्गत घोषणा किए जाने पर और वित्तीय कठिनाईयों के लिए, भुगतान तद्नुसार नहीं किया जाता है तो क्या घोषणा अमान्य हो जाएगी ? |
| उत्तर : | हां यह अमान्य हो जाएगी। | |
| प्रश्न सं. | 50 | जहां एक निर्धारिती के मामले में मांग अपीलार्थी फोरम के आदेश हेतु अपील को प्रभावी करते हुए आंशिक या पूर्ण रूप से कम की जाती हो तो विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि को कैसे समायोजित किया जाएगा ? |
| उत्तर : | ऐसे मामलों में, विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि के भुगतान के प्रमाण प्राप्त करने के बाद, निर्धारण अधिकारी निर्धारिती के मामले में मांग करने के लिए विवाद से विश्वास के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत आदेश पारित करेगा जिसके अंतर्गत देययोग्य राशि को समायोजित किया जाएगा। | |
| "परिणाम से संबंधित प्रश्न (प्रश्न सं. 51-55)" | ||
| प्रश्न सं. | 51 | क्या अभियोजन से बचने का कोई तरीका है? |
| उत्तर : | हां, वाक्यांश 6 को उन बकाए कर के संबंध में एक घोषणाकर्ता को अभियोजन से बचाव के लिए मुहैया कराया गया है जिसके संदर्भ में घोषणा विवाद से विश्वास के अंतर्गत की गई है और जिसके मामले में डीए द्वारा ऐसा आदेश दिया गया है कि विवाद से विश्वास के अंतर्गत देययोग्य राशि को घोषणाकर्ता द्वारा दिया गया है। | |
| प्रश्न सं. | 52 | क्या इस विवाद से विश्वास का परिणाम निर्धारण अधिकारी के समक्ष लंबित उसी मुद्दे पर लागू होगा? |
| उत्तर : | नहीं, केवल घोषणा में शामिल मुद्दों को ही अन्य मामलों में लंबित उन्हीं मुद्दों पर किसी पक्षपात के बिना विवाद से निपटाया जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत घोषणा करना कर स्थिति को स्वीकार करने की कीमत नहीं होगी और आयकर प्राधिकारी या एसएलपी में अपील या रिट के हिस्से के तौर पर घोषणाकर्ता के लिए इसका विरोध करना न्यायसंगत नहीं होगा कि घोषणाकर्ता या आयकर प्राधिकारी, जो भी मामला हो, की विवाद को स्थिर करते हुए विवादित मुद्दे पर निर्णय में सहमति है। | |
| प्रश्न सं. | 53 | यदि विवादित कर की गणना करते हुए हानि को समायोजित करने की अनुमति न हो तो क्या उस हानि को अग्रेषित किए जाने की अनुमति होगी ? |
| उत्तर : | विवाद से विश्वास में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि जहां एक निर्धारण वर्ष के संबंध में विवाद न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) ऋण की कमी या हानि की कमी या मूल्यह्रास से संबंधित हो तो अपीलार्थी के पास विकल्प है कि या तो वह (i) विवादित कर की राशि में ऐसे एमएटी ऋण या हानि या मूल्यह्रास से संबंधित कर की राशि को शामिल करे और एमएटी ऋण या हानि या मूल्यह्रास का अग्रेषित करे या (ii) घटाए गए कर ऋण या हानि या मूल्यह्रास को अग्रेषित करे। सीबीडीटी ऐसे मामलों में गणना की विधि को निर्धारित करेगा। | |
| प्रश्न सं. | 54 | यदि करदाता मूल्य स्थानांतरण समायोजन के लिए विवाद से विश्वास का लाभ लेता है तो क्या अधिनियम की धारा 92गड़ के प्रावधान अलग से लागू होंगे ? |
| उत्तर : | हां, धारा 92गड़ के अंतर्गत गैर-महत्वपूर्ण समायोजन किए जाऐंगे। हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि अधिनियम की धारा 92गड़ में शामिल गैर-महत्वपूर्ण समायोजन के प्रावधान 1 अप्रैल, 2016 को या उससे पहले प्रारंभ होने वाले एक निर्धारण वर्ष के संदर्भ में किए गए मुख्य समायोजन के लिए लागू नहीं होंगे। इसका अर्थ है कि यदि निर्धारण वर्ष 2016-17 या पूर्व के निर्धारण वर्ष के लिए कोई महत्वपूर्ण समायोजन किए गए हों तो यह अधिनियम की धारा 92गड़ के अंतर्गत गैर-जरूरी समायोजन का विषय नहीं होंगे। | |
| प्रश्न सं. | 55 | अपीलार्थी ने एक निर्धारण वर्ष में विवाद से विश्वास के अंतर्गत विवाद का निपटारा किया है। क्या यह इस निर्णय के लिए राजस्व हेतु मौजूद है कि अपीलार्थी द्वारा वृद्धि की जा चुकी है और इसलिए वह भविष्य के निर्धारण वर्षों में विवाद नहीं कर सकता? |
| उत्तर : | कृपया प्रश्न सं. 52 को देखें। वाक्यांश 5 के स्पष्टीकरण में यह बताया गया है कि विवाद से विश्वास के अंतर्गत एक घोषणा करना कर स्थिति को स्वीकार करने की कीमत नहीं होगी और आयकर प्राधिकारी या एसएलपी में अपील या रिट के हिस्से के तौर पर घोषणाकर्ता के लिए इसका विरोध करना न्यायसंगत नहीं होगा कि घोषणाकर्ता या आयकर प्राधिकारी, जो भी मामला हो, की विवाद को स्थिर करते हुए विवादित मुद्दे पर निर्णय में सहमति है। | |
इस परिपत्र के जारी होने पर, 2020 का परिपत्र सं. 7 दिनांक 04 मार्च, 2020 एतद्द्वारा निरस्त होता है।
(अंकुर गोयल)
अवर सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति
1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/एमओएस (एफ) का ओएसडी
2. सचिव (राजस्व) का पीपीएस
3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी
4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान आयकर निदेशक
5. सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव, सीबीडीटी
6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
7. जेएस व कानूनी सलाहकार, कानून व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली
8. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता
9. आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय
10. जेसीआईटी (डेटाबेस प्रकोष्ठ) wwww.irsofficersonline.gov.in पर अपलोडिंग के लिए

