परिपत्र सं. 07/2017 : आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत जीएएआर प्रावधानों के क्रियान्वयन पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 07/2017
परिपत्र की तिथि
27/01/2017
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
27/01/2017
2017 की परिपत्र सं. 7
एफ.नं. 500/43/2016-एफटीएंडटीआर-IV
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
दिनांक : 27/01/2017
आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत जीएएआर प्रावधानों के क्रियान्वयन पर स्पष्टीकरण
जनरल एंटी एवार्इडेंस रूल से संबंधित आयकर अधिनियम, 1961 के अध्याय X-क के प्रावधान 1 अप्रैल, 2017 से प्रभावी होंगे। बोर्ड द्वारा जीएएआर प्रावधानों के क्रियान्वयन के बारे में कुछ प्रश्न प्राप्त किए गए हैं। बोर्ड ने इस उद्देश्य के लिए जून, 2015 में एक कार्यरत समूह को संस्थापित किया था। बोर्ड ने कार्यरत् समूह की टिप्पणियों पर विचार किया और निम्नलिखित स्पष्टीकरणों को जारी किया :
| प्रश्न सं. 1 : | क्या जीएएआर उपयोग होगा यदि एसएएआर लागू हो ? |
| उत्तर : | यह अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत है कि हो सकता है कि विशिष्ट एंटी एवार्इडेंस प्रावधान दुरूपयोग की सभी स्थितियों को संबोधित न करें और घरेलू कानून में सामान्य गैर-दुरूपयोगी प्रावधानों की आवश्यकता है। जीएएआर और एसएएआर के प्रावधान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में एक साथ मौजूद और प्रयुक्त हो सकते हैं, जो भी आवश्यक हो। |
| प्रश्न सं. 2 : | क्या जीएएआर, संधि पात्रता को अस्वीकार करने के लिए लागू होंगे यदि जहां संधि के एलओबी परीक्षण के साथ अनुपालन हो ? |
| उत्तर : | कर संधियों में गैर-दुरूपयोग का प्रयोग सभी कर परिहार संधियों को संबोधित करने के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता और इसे घरेलू गैर-परिहार नियमों के माध्यम से निपटाए जाने की आवश्यकता है। यदि परिहार संधि में एलओबी द्वारा उपयुक्त रूप से संबोधित होता है तो जीएएआर का प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है। |
| प्रश्न सं. 3 : | क्या जीएएआर, लेनदेन को कार्यान्वित करने की विधि के चुनाव अथवा उसे चुनने के लिए करदाता के अधिकार को पारस्परिक रूप से प्रभावी करेगा ? |
| उत्तर : | जीएएआर लेनदेन को कार्यान्वित करने की विधि के चुनाव अथवा उसे चुनने के लिए करदाता के अधिकार को पारस्परिक रूप से प्रभावी नहीं करेगा। |
| प्रश्न सं. 4 : | क्या जीएएआर प्रावधान वहां लागू होगे जहां एफपीआर्इ के क्षेत्राधिकार को गैर-कर वाणिज्यिक सिफारिशों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया हो और ऐसे एफपीआर्इ को भारतीय प्रतिभूतियों को संदर्भ देते हुए पी-नोट्स जारी किए हों ? आगे, क्या जीएएआर विशेष उद्देश्य साधन (एसपीवी) के साथ उपयोग होगा, या तो इस आधार पर कि यह कर अनुकूल क्षेत्राधिकार में स्थित है अथवा इस आधार पर कि इसके पास कर्मचारी के तौर पर स्वयं अपने कुशल पेशेवर अथवा स्वयं अपना परिसर नहीं है। |
| उत्तर : | जीएएआर आवेदन के लिए निगर्मन, जो उद्यम, स्थिति आदि के विकल्प के संबंध में उत्पन्न हो सकता है, को अधिनियम की धारा 96 के अंतर्गत मुहैया कराए गए मुख्य उद्देश्य और अन्य शर्तों के आधार पर प्राप्त करना है। जीएएआर केवल इस आधार पर उपयोगी नहीं होगा कि उद्यम कर योग्य क्षेत्राधिकार में स्थित है। यदि एफपीआर्इ का क्षेत्राधिकार गैर-कर वाणिज्यिक सिफारिशों के आधार पर अंतिम रूप दिया जाता है और व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना नहीं है तो जीएएआर लागू नहीं होगा। |
| प्रश्न सं 5 : | क्या जीएएआर प्रावधान (i) बोनस निगर्मन के रूप में जारी किसी प्रतिभूति जबतक कि मूल प्रतिभूतियां 01 अप्रैल 2017 से पहले प्राप्त नहीं की जाती हों (ii) 31 मार्च के बाद जारी शेयरों के लिए अनिवार्य परिवर्तनीय डिबेंचर के रूपांतरण, अनिवार्य परिवर्तनीय वरीयता शेयर (सीसीपीएस), विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (एफसीसीबी), वैश्विक निक्षेपागार प्राप्तियां (जीडीआर), 01 अप्रैल, 2017 से पहले प्राप्त (iii) शेयर जो ऐसी मुक्त शेयरधारक के समेकन अथवा विभाजन पर बाद में जारी किये हैं, के लिए लागू होंगे ? |
| उत्तर : | नियम 10प(1)(घ) के अंतर्गत छूट ऐसे साधानों के निगर्मन के समय अंतिम शर्तों में एक से दूसरे तक अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय साधानों के संबंध में 1 अप्रैल, 2017 से पहले किए गए साधनों के लिए उपलब्ध होगी। उसी निवेशक के हाथों 1 अप्रैल 2017 से पहले प्राप्त किए गए शेयरों के संबंध में अधिकार के विभाजन/समेकन, बोनस निगर्मन के रूप में अस्तित्व में लाए गए शेयर आयकर नियमों के नियम 10प(1)(घ) के अंतर्गत छूट के लिए भी योग्य होगी। |
| प्रश्न सं. 6 : | अभिव्यक्ति "निवेश" सभी प्रकार के साधनों में निवेश को कवर कर सकती है - चाहे भारतीय कंपनी हो अथवा विदेशी कंपनी, जबतक उसका निपटान कर हेतु वसलूनीय राशि को वृद्धि दे सके। छूट पट्टेदारी अनुबंध (कहे, वायुयान पट्टा) तथा ऋण व्यवस्था आदि सहित निवेश के सभी प्रकारों के लिए विस्तारित की जानी चाहिए। |
| उत्तर : | छूट 1 अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेशों के स्थानांतरण से आय के संबंध में उपलब्ध है। लेखांकन मानक के अनुसार निवेश लाभांश, ब्याज, किराये तथा पूंजीगत प्रशंसा के रूप में आय को अर्जित करने के लिए एक उद्यम द्वारा संघटित परिसंपत्ति है। पट्टेदारी अनुबंध और ऋण व्यवस्था, अपने आप, निवेश नहीं हैं और इसलिए छूट उपलब्ध नहीं है। |
| प्रश्न सं. 7 : | क्या जीएएआर लागू होगा यदि व्यवस्था अग्रिम निर्णय के लिए प्राधिकारी द्वारा स्वीकार्य के तौर पर संघटित होती है ? |
| उत्तर : | नहीं। एएआर निर्णय आवेदक के संबध में प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त और उसके अधीन आयकर प्राधिकारियों के लिए बाध्य होगा। |
| प्रश्न सं. 8 : | क्या जीएएआर लागू होगा यदि व्यवस्था को एक प्राधिकारी जैसे न्यायालय, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण द्वारा अथवा न्यायिक उदाहरण आदि के अनुसार स्वीकृत किया जाए ? |
| उत्तर : | जहां न्यायालय ने व्यवस्था को स्वीकृत करने के दौरान शीघ्रता से और उपयुक्त रूप से कर क्रियान्वयन पर विचार किया हो तो जीएएआरऐसी व्यवस्था के लिए लागू नहीं होगा। |
| प्रश्न सं. 9 : | क्या एक कोष दावा कर संधि एक वर्ष में लाभकारी होगी और अन्य वर्ष में अधिनियम के प्रावधानों द्वारा शासित होने के लिए चुना जाना जीएएआर प्रावधानों को लागू करेगा ? उदाहरण के तौर पर जहां एक कोष दावा संधि एक वर्ष में दूसरी वस्तु से प्राप्ति के संबंध में लाभदायक हो और अन्य वर्ष में अधिनियम के अंतर्गत शेयर से प्राप्ति के समक्ष दूसरी वस्तु के लेनदेनों से हानि को पृथक करे। |
| उत्तर : | जीएएआर प्रावधान अनुचित परिहार व्यवस्थाओं के लिए लागू होता है जैसा धारा 96 के अंतर्गत दिया गया है। जबतक विभिन्न वर्षों में संधि अथवा घरेलू कानून के अंतर्गत दावे की स्वीकार्यता का सवाल है, यह जीएएआर प्रावधानों के माध्यम से अधिनिर्णित न होने वाला मामला नहीं है। |
| प्रश्न सं. 10 : | यह कैसे सुनिश्चित होगा कि जीएएआर अति अक्रामक और कृत्रिम पूर्व निर्धारित योजनाओं के साथ और ठोस प्रमाणों के आधार पर लागू होगा और नाकि व्याख्यात्मक अंतर के आधार पर ? |
| उत्तर : | जीएएआर के अंतर्गत एक अनुचित परिहार व्यवस्था के तौर पर एक व्यवस्था की घोषणा करने के लिए प्रस्ताव प्रधान आयुक्त/आयुक्त द्वारा पहले स्तर पर और दूसरे स्तर पर अनुमोदित पैनल द्वारा पुनरीक्षित होगी जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय का एक न्यायाधीश करेगा। इसलिए, उपयुक्त रक्षा यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जीएएआर केवल योग्य मामलों में ही लागू हो। |
| प्रश्न सं. 11 : | क्या जीएएआर काल्पनिक आय अथवा वास्तविक व्यय की अस्वीकृति का कारण हो सकता है? क्या जीएएआर प्रावधान चार्जिंग प्रावधान अथवा कराधान आधार के कार्यक्षेत्र को विस्तृत करता है तथा/अथवा व्यय, जो वास्तव में किया गया है तथा जो अन्यथा अधिनियम के विविध प्रावधानों के संबंध में स्वीकार्य है, को अस्वीकृत करता है ? |
| उत्तर : | यदि व्यवस्था धारा 96 के अंतर्गत अंतनिर्हित है तो व्यवस्था जीएएआर के प्रयोग द्वारा उपेक्षित होगी और आवश्यक परिणाम अनुसरित होंगे। |
| प्रश्न सं. 12 : | एक निश्चित समयसीमा को मुहैया कराया जा सकता है जैसे व्यवस्था की मौजूदगी के 5 से 10 वर्ष जहां जीएएआर प्रावधान आयकर अधिनियम की धारा 97(4) के संबंध में प्रावधानों की शर्तों में लागू नहीं होगा |
| उत्तर : | समयावधि जिसके लिए एक व्यवस्था मौजूद है केवल एक प्रासंगिक पहलू है और नाकि यह निर्धारित करने के लिए धारा 97(4) के अंतर्गत एक उपयुक्त पहलू कि क्या एक व्यवस्था वाणिज्यिक पहलू को कम करता है। |
| प्रश्न सं. 13 | यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि व्यवहार्य रूप से, 'अनुचित परिहार व्यवस्था' के तौर पर समझे जा रहे लेनदेन के परिणामों को एकसमान, उचित तथा तर्कसंगत आधार पर निर्धारित किया जाता है। अधिनियम की धारा 98 के अंतर्गत समायोजनों की क्षतिपूर्ति निरंतर तथा उचित तरीके से की जानी चाहिए। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए यदि एक विशेष परिणाम एक भागीदार के हाथों लागू होता है तो अन्य भागीदार के हाथो तत्स्थानी समायोजन होगा। |
| उत्तर : | उपयुक्त प्रक्रियात्मक बचाव सुनिश्चित करने के लिए है कि जीएएआर एक समान, उचित और तर्कसंगत तरीके में उपयोग होता है। जीएएआर के परिणामस्वरूप एक भागीदार द्वारा लागू किए जा रहे विशेष परिणाम की स्थिति में अन्य भागीदार के हाथों तत्स्थानी समायोजन नहीं बनाया जाएगा। जीएएआर विभिन्न परिणामों के साथ एक गैर परिहार प्रावधान है और विभिन्न करदाताओं में तत्स्थानी कर समायोजनाएं निवारण के समक्ष विरोध कर सकते हैं। |
| प्रश्न सं. 14 : | धारा 102(10) में परिभाषितानुसार आर्इएनआर 3 करोड़ के कर लाभ ऐसी व्यवस्था तथा प्रत्येक करदाता और पृथक रूप से प्रत्येक प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के संबंध में आंकी जा सकती है। कर लाभ को प्राप्त करने के लिए मुख्य उद्देश्य को मूल्यांकन करने के लिए, मूल्यांकन क्षेत्रों में कर परिणामों हेतु विस्तारित किया जाना चाहिए। रू 3 करोड़ का कर प्रभाव व्यवस्था हेतु समस्त पक्षों हेतु प्रभावों पर विचार किए जाने के बाद विचारित किया जाना चाहिए अर्थात् निविल आधार पर नाकि सकल आधार पर (अर्थात् चुनिंदा एक अथा कुछ पक्षों द्वारा प्रभाव)। |
| उत्तर : | कर कानूनों का प्रयोग क्षेत्राधिकार से जुड़ा है और इसलिए क्या देखा जा सकता है और जांचा जा सकता 'व्यवस्था' अथवा 'व्यवस्था के भाग' के कारण भारतीय क्षेत्राधिकार में प्रयोग हो रहे 'कर लाभ' है। आगे, ऐसे लाभ निर्धारण वर्ष से संबंधित हैं। आगे, जीएएआर एक व्यवस्था अथवा व्यवस्था के भाग से संबंधित है और इसलिए रू. 3 करोड़ की सीमा को केवल एक अकेले करदाता के संबंध में नहीं पढ़ा जा सकता। |
| प्रश्न सं. 15 : | क्या एक प्रतिकूल दृष्टिकोण को बाद के वर्षों में अपनाया जाएगा यदि व्यवस्था किसी पहले के वर्ष में स्वीकार्य होने के लिए संघटित है ? |
| उत्तर : | यदि प्रधान आयकर आयुक्त/अनुमोदन पैनल ने एक वर्ष में स्वीकृत करने की व्यवस्था की हो और तथ्य और परिस्थितियां निरंतरता के सिद्वांतों के अनुसार वही रहती हो तो, जीएएआर एक बाद के वर्ष में उस व्यवस्था के लिए प्रयोग नहीं होगा। |
| प्रश्न सं. 16 : | कम से कम पहले के 5 वर्षों के लिए जीएएआर के अंतर्गत की गर्इ वृद्धि के अनुसार कोर्इ जुर्माना कार्यवाही नहीं की जानी चाहिए |
| उत्तर : | जुर्माने का लगाना मामले के तथ्यों तथा परिस्थितियों पर निर्भर करता है और यह स्वचालित नहीं है। जुर्माना प्रावधानों से पांच वर्षों की अवधि के लिए कोर्इ व्यापक छूट कानून के अंतर्गत उपलब्ध नहीं है। निर्धारिती, अपने विकल्प पर, धारा 273क के अंतर्गत लाभ के लिए आवेदन कर सकता है यदि वह उसमें निर्धारित शर्तों को पूरा करता है। |
(डा. ओ.एन. सुप्रिया राव)
अवर सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति :—
1. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी में अन्य समस्त अधिकारी
2. राजस्व सचिव का निजी सचिव
3. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व समस्त आयकर महानिदेशक - अपने अधिकारियों को ध्यान में लाने के अनुरोध के साथ
4. प्रधान आयकर महानिदेशक, एनएडीटी, नागपुर
5. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति), एआरए सेंटर, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली
6. प्रधान आयकर महानिदेशक (सतर्कता), नर्इ दिल्ली
7. एडीजी(पीआर, पीपी व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली मेलिंग लिस्ट के अनुसार वितरण तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन के मुद्रण के लिए (100 प्रतियां)
8. सीएंडएजी, नर्इ दिल्ली
9. पब्लिक डोमेन पर चस्पा करने के लिए व incometaxindia.gov.in पर अपलोडिंग के लिए वेब मैनेजर
10. irsofficersonline पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ
11. गार्ड फाइल
(डा. ओ.एन. सुप्रिया राव)
अवर सचिव, भारत सरकार

