परिपत्र सं. 07/2016 : संघ के सदस्यों की करदेयता से संबंधित स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 07/2016
परिपत्र की तिथि
07/03/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
07/03/2016
परिपत्र सं. 7/2016
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, 7 मार्च, 2016
विषय : संघ के सदस्यों की करदेयता से संबंधित स्पष्टीकरण - संबंधी -
ठेकेदारों का एक संघ बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं, विशेषकर अभियांत्रिकी, खरीद तथा निर्माण ('र्इपीसी') अनुबंध तथा टर्नकी परियोजना में, को प्राय: क्रियान्वित करने के लिए बनाया जाता है। कर प्राधिकरण ने, कर्इ मामलों में स्थिति ली है कि ऐसा संघ व्यक्तियों का संघ ('एओपी') अर्थात् कर उदग्रहण के लिए पृथक उद्यम, को बनाता हैं। दूसरी ओर करदाताओं का दावा इस राय के विपरीत है। यह कर विवाद का कारण बनता है विशेषकर उन मामलों में जहां सह-व्यवस्था के प्रत्येक सदस्य, यद्यपि ठेकादाता हेतु संयुक्त तथा पृथक रूप से उत्तरदायी है, के पास स्पष्ट अंतर तथा कार्य क्षेत्र में भूमिका, संघ के सदस्यों का उत्तरदायित्व तथा देयता हो।
2. शब्द एओपी को आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') में विशेषरूप से परिभाषित किया गया है। इससे संबंधित मुद्दा कि एओपी का गठन क्या हो कुछ मामलों में उच्चतम न्यायालय द्वारा विचारनीय था। हालांकि कुछ दिशानिर्देश इस संबंध में निर्धारित किए गए थे, न्यायालय ने कहा था कि सार्वभौमिक प्रयोग का कोर्इ सूत्र नहीं है ताकि एओपी के अस्तित्व का अंतिम तौर पर निर्णय किया जा सके तथा यह मामले के विशेष तथ्यों तथा परिस्थितियों पर पहले निर्भर होगा। र्इपीसी अनुबंध/टर्नकी परियोजनाओं के विशिष्ट प्रसंग में विभिन्न न्यायालयों के कर्इ विरोधात्मक निर्णय है जिस पर एओपी संस्थापित होता है।
3. मामले की जांच की गर्इ है। कर विवादों के परिहार तथा इन मामलों को संभालने के दौरान प्रवेश में निरंतरता के उद्देश्य से, बोर्ड ने निर्णय लिया है कि र्इपीसी/टर्नकी अनुबंध के निष्पादन के लिए सह-व्यवस्था जिसके निम्नलिखित विशेषता हो सकती है को एओपी के तौर पर न समझा जाए।
क. प्रत्येक सदस्य अपने स्वयं के संसाधनों के माध्यम से अपने कार्य के भाग के निष्पादन को करने के लिए उत्तरदायी है तथा साथ ही अपने कार्य क्षेत्र के जोखिम को वहन करता है अर्थात् संघ के सदस्यों के बीच कार्य तथा लागत में स्पष्ट निर्धारण होता है तथा प्रत्येक सदस्य अपने निर्दिष्ट कार्यक्षेत्र में व्यय करता है।
ख. प्रत्येक सदस्य अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत सख्ती से आने वाले अनुबंध के प्रदर्शन पर आधारित लाभ को प्राप्त अथवा हानि उठाता है। हालांकि, संघ के सदस्य बिलिंग में सुविधा के लिए सकल स्तर पर अनुबंध मूल्य को सांझा कर सकते हैं।
ग. किसी कार्यक्षेत्र के लिए प्रयुक्त व्यक्ति तथा सामग्री संबंधित संघ सदस्यों के जोखिम तथा नियंत्रण के अंतर्गत हैं।
घ. संघ का नियंत्रण तथा प्रबंधन सम्मिलित नहीं है तथा सामान्य प्रबंधन प्रशासनिक सुविधा के लिए संघ के सदस्यों के बीच पारस्पिरिक समन्वय के लिए ही हैं।
4. यहां अन्य पहलू भी हो सकते हैं जो न्यायसंगत कर सकते हैं कि संघ एओपी नहीं है तथा यह विशेष मामलों के विशिष्ट तथ्यों तथा परिस्थतियों पर निर्भर हो सकेगा, जिसे मामले के अवलोकन को लेने के दौरान विचार में लिये जाने की आवश्यकता है।
5. यह स्पष्ट किया जाता है कि यह परिपत्र उन मामलों में प्रयोज्य नहीं होगा जहां संघ के समस्त अथवा कुछ सदस्य अधिनियम की धारा 92क के अर्थ के भीतर संबंद्ध अधिकारी हो। ऐसे मामलों में, निर्धारण अधिकारी निर्णय करेगा कि इस मुद्दे पर न्यायिक धर्मशास्त्र तथा अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों को देखते हुए क्या एओपी को निर्मित किया जाए अथवा नहीं।
6. उक्त को आवश्यक अनुपालन के लिए समस्त के ध्यान में लाया जा सकता है।
7. हिन्दी संस्करण का अनुसरण होगा
(रोहित गर्ग)
उप सचिव, भारत सरकार
(एफ. नं. 225/2/2016/आर्इटीए.II)
निम्न को प्रति :
1. अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के समस्त सदस्य
2. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक
3. पीपीएस से राजस्व सचिव
4. समस्त संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
5. उपयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के निगर्मन के लिए सनिवेदन सहित आयकर आयुक्त (एमसीएंडटीपी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
6. अपर महानिदेशक (पीआर, पीपी व ओएल) विभाग के आधिकारिक हैंडल पर चस्पा करने के लिए
7. अतिरिक्त आयकर आयुक्त, विभागीय वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ
8. incometaxindia.gov.in पर अपलोडिंग के लिए वेब मैनेजर व पब्लिक डोमेन पर चस्पा करने के लिए
9. आर्इटीसीसी, केद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (3 प्रतियां)
10. गार्ड फाइल
(रोहित गर्ग)
उप सचिव, भारत सरकार

