परिपत्र सं. 6/2023 : धर्मार्थ और धार्मिक न्यासों से संबंधित प्रावधानों के संबंध में स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 6/2023
परिपत्र की तिथि
24/05/2023
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
24/05/2023
2023 की परिपत्र सं. 6
एफ.नं. 370133/06/2023-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
दिनांक : 24 मई, 2023
विषय : धर्मार्थ और धार्मिक न्यासों से संबंधित प्रावधानों के संबंध में स्पष्टीकरण - संबंधित
1. आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के उप-वाक्यांश (iv) या उप-वाक्यांश (v) या उप-वाक्यांश (vi) या उप-वाक्यांश (viक) में संदर्भित किसी फंड या न्यास या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थान या अधिनियम की धारा 12कक या धारा 12कख के अंतर्गत पंजीकृत कोई न्यास या संस्थान (तत्पश्चात् न्यास के तौर पर संदर्भित) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत दी गई शर्तों को पूरा करने के अनुसार करमुक्त है। कराधान और अन्य कानून (कुछ प्रावधानों की छूट और संशोधन) अधिनियम, 2020 के माध्यम से अधिनियम की धारा 12कख को शामिल करते अधिनियम को संशोधित करते हुए अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग), धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के पहले और दूसरे परंतुक को संशोधित करते हुए और अधिनियम की धारा 80छ की उप-धारा (5) के पहले और दूसरे परंतुक को संशोधित करते हुए पंजीकरण या अनुमति हेतु एक न्यास द्वारा आवेदन से संबंधित प्रावधानों को संशोधित किया गया है। संशोधित किए गए प्रावधान निम्नलिखित के लिए प्रदान किए गए हैं।
(क) सभी मौजूदा न्यासों को 30.06.2021 को या उससे पहले पंजीकरण/अनुमति के लिए आवेदन करना आवश्यक था। हालांकि, प्रपत्र सं. 10क को इलैक्ट्रानिक तौर पर दाखिल करने में हो रही परेशानियों पर विचार करते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (बोर्ड) ने अधिनियम की धारा 119 के अंतर्गत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए ऐसे मामलों में प्रपत्र सं. 10क को दाखिल करने की तिथि को 2021 की परिपत्र सं. 12 के माध्यम से 31.08.2021 तक, 2021 की परिपत्र सं. 16 दिनांक 29.08.2021 के द्वारा 31.03.2022 तक और 2022 की परिपत्र सं. 22 दिनांक 01.11.2022 के द्वारा 25.11.22 तक और आगे बढ़ादी है। ऐसा पंजीकरण/अनुमति 5 वर्षों की अवधि के लिए वैध होग। इसलिए, मौजूदा न्यास को नए पंजीकरण/अनुमति हेतु आवेदन करने की आवश्यकता है और एक बार पंजीकरण/अनुमति मिलने पर यह पांच वर्षों के लिए वैध है।
(ख) नए न्यासियों को उस निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ से कम से कम एक महीने पहले अनंतिम पंजीकरण/अनुमति के लिए आवेदन करना आवश्यक है जहां से कथित पंजीकरण/अनुमति की मांग की जाती है। ऐसा अनंतिम पंजीकरण/अनुमति अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए वैध है।
(ग) अनंतिम तौर पर पंजीकृत/अनुमत न्यास को अनंतिम पंजीकरण/अनुमति की अवधि की समाप्ति से कम से कम छह महीने पहले या गतिविधियों के प्रारंभ के छह महीनों के अंदर, जो पहले हो, प्रपत्र से. 10कख में नियमित पंजीकरण/अनुमति हेतु आवदेन करने की आवश्यकता है। प्रपत्र सं. 10कख को इलैक्ट्रानिक तौर पर दाखिल करने में हो रही परेशानियों पर विचार करते हुए, बोर्ड ने अधिनियम की धारा 119 के अंतर्गत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए 2022 की परिपत्र सं. 8 दिनांक 31.03.2022 के द्वारा प्रपत्र स. 10कख को इलैक्ट्रानिक तौर पर दाखिल करने की नियत तिथि को 30.09.2022 तक बढ़ा दिया है।
(घ) न्यास के एक बार पांच वर्षों के लिए स्वीकृत/पंजीकृत होने उनको पांच वर्षों की अवधि की समाप्ति से कम से कम छह महीने पहले आवेदन करना आवश्यक है।
(ड़) धारा 80छ की उप-धारा (2) के वाक्यांश (क) के उप-वाक्यांश (iv) में संदर्भित एक फंड या संस्थान को दानकर्ता द्वारा किए गए दान के संदर्भ में अधिनियम की धारा 80छ के अंतर्गत कटौती केवल तभी दानकर्ता को स्वीकार्य होगा यदि ऐसे दान का ब्यौरा प्रपत्र 10खघ में दानी द्वार प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे दान संबंधी प्रमाणपत्र को प्रपत्र सं. 10खड़ में दिया जाना आवश्यक है। इसके अलावा, प्रपत्र सं. 10खघ और प्रपत्र सं. 10खड़ उस वित्त वर्ष के बाद की तुरंत 31 मई को या उससे पहले प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है जिसमें दान प्राप्त हुआ।
2. न्यास से संबंधित प्रावधानों पर स्पष्टता हेतु अनुरोध करने वाले हितधारकों से प्राप्त प्रतिनिधित्व निम्नानुसार व्यवहारित है :
पंजीकरण/अनुमति हेतु आवेदन करने के लिए धारा 115नघ के आवेदन से संबंधित स्पष्टीकरण
3. वित्त अधिनियम के माध्यम से, अन्य विषयों के साथ-साथ, अधिनियम की धारा 115नघ को संशोधित किया गया है ताकि बताया जा सके कि निर्दिष्ट समय के अंदर पंजीकरण/अनुमति हेतु आवदेन न करने वाले न्यास की अर्जित आय अधिनियम की धारा 115नघ के प्रावधानों के अनुसार कर हेतु उत्तरदायी होगी। यह संशोधन 01.04.2023 से प्रभावी हुआ और इसलिए निर्धारण वर्ष 2023-24 और उसके बाद के निर्धारण वर्षों के लिए लागू होता है।
4. यह निर्दिष्ट करते हुए प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है कि कई न्यास वास्तविक परेशानियों के चलते अनुमत समय के अंदर पंजीकरण/अनुमति हेतु आवेदन नही कर पाए। इससे साधारण तौर पर इस आधार पर आवदेन निरस्त होती है कि देरी थी। जैसाकि उक्त पैरा 1(क) में निर्दिष्ट है, पंजीकरण/अनुमति मांगने वाले मौजूदा न्यासों द्वारा आवेदन देने की अंतिम तिथि 2022 की परिपत्र सं. 22 दिनांक 01.11.2022 के द्वारा 25.11.2022 तक बढ़ाई गई थी। इसके अलावा, जैसाकि उक्त 1(ग) में निर्दिष्ट है, अनंतिम तौर पर पंजीकृत/अनुमत न्यासें द्वारा पंजीकरण/अनुमत आवदेन की प्रस्तुति की देय तिथि को 30.09.2022 तक बढ़ा दिया गया है। यह न्यास कथित धारा के प्रावधानों के अनुसार अधिनियम की धारा 115नघ के अंतर्गत कर का विषय होगी जैसा वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित है यदि आवेदन 25.11.2022 या 30.09.2022, जो भी मामला हो, तक नही दिया जाता।
5. ऐसे मामलों में वास्तविक परेशानियों को दूर करनने के लिए, बोर्ड ने अधिनियम की धारा 119 के अंतर्गत अधिकारों का प्रयोग करते हुए निम्न में आवेदन करने की देय तिथि को बढ़ा दिया है -
(i) प्रपत्र सं. 10क, धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के पहले परंतुक के वाक्यांश (i) या धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के उप-वाक्यांश (i) या अधिनियम की धारा 80छ की उप-धारा (5) के पहले परंतुक के वाक्यांश (i) के अंतर्गत आवेदन के मामले में, 30.09.2023 तक, जहां ऐसे आवेदन करने की देय तिथि ऐसी तिथि से पहले समाप्त हो चुकी हो।
(ii) प्रपत्र सं. 10कख, धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के पहले परंतुक के वाक्यांश (iii) या धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के उप-वाक्यांश (iii) के अंतर्गत आवेदन के मामले में, 30.09.2023 तक, जहां ऐसे आवेदन करने की देय तिथि ऐसी तिथि से पहले समाप्त हो चुकी हो।
6. उक्त को देखते हुए, न्यास धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के पहले परंतुक के वाक्यांश (i) या वाक्यांश (iii) के अंतर्गत या अधिनियम की धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के उप-वाक्यांश (i) या उप-वाक्यांश (iii) के अंतर्गत पंजीकरण/अनुमति हेतु 30.09.2023 तक आवेदन कर सकते हैं और जहां ऐसा आवेदन कथित तिथि तक किया जाता है और पंजीकरण/अनुमति दी जाती है, अधिनियम की धारा 115नघ की उप-धारा (3) के वाक्यांश (iii) के प्रावधान अधिनियम की धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के उप-वाक्यांश (i) या (iii) के पहले परंतुक के वाक्यांश (i) या (iii) के अनुसार आवेदन करने में देरी के कारण लागू नही होगा।
7. यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि नियत तिथि का विस्तार जैसा पैराग्राफ 5(ii) में निर्दिष्ट देय तिथि का विस्तार अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के पहले परंतुक के वाक्यांश (iii) या अधिनियम की धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के उप-वाक्यांश (iii), जो भी मामला हो, के अंतर्गत सभी लंबित आवेदनों के मामले में भी लागू होंगे। इसलिए, जहां न्यास ने पहले ही कथित प्रावधानों के अंतर्गत प्रपत्र सं. 10कघ में आवेदन कर दिया हो लेकिन ऐसा आवेदन 30.09.2022 के बाद प्रस्तुत किया गया हो और जहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त ने इस परिपत्र के निगर्मन से पहले एक आदेश पारित न किया हो तो प्रपत्र सं. 10कख में लंबित आवेदन एक वैध आवेदन के तौर पर समझा जा सकता है। इसके अलावा, जहां न्यास ने प्रपत्र सं. 10कख में आवेदन पहले ही कर दिया हो और जहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त ने इस परिपत्र के निगर्मन पर या उससे पहले ऐसा आवेदन निरस्त करने वाला आदेश केवल इस तथ्य के आधार पर पारित कर दिया हो कि आवेदन देय तिथि के बाद प्रस्तुत किया गया था तो न्यास पैराग्राफ 5(ii) में दिए गए विस्तारित समय, अर्थात् 30.09.2022 तक प्रपत्र सं. 10कख में नया आवेदन कर सकता है।
8. यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां न्यास प्रपत्र सं. 10क में पंजीकरण/अनुमति हेतु आवेदन करने के लिए 25.11.2022 की सीमा, जैसा उक्त पैरा 1(क) में निर्दिष्ट है, से चूक गया हो और अनंतिम पंजीकरण/अनुमति करने के लिए प्रपत्र सं. 10क को बाद में प्रस्तुत किया हो तो ई-दाखिलीकरण पोर्टल पर प्रासंगिक कार्यप्रणाली को अनंतिम पंजीकरण/अनुमति हेतु प्रपत्र सं. 10क को निरस्त करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है और ऐसे न्यास पैराग्राफ 5(i) में निर्दिष्ट 30.09.2023 तक बढ़ाई गई अवधि के अंदर पंजीकरण/अनुमति के लिए प्रपत्र सं. 10क में नया आवेदन कर सकते हैं।
प्रपत्र सं. 10खघ की प्रस्तुति के लिए देय तिथि में बढ़ोत्तरी
9. अधिनियम की धारा 80छ की उप-धारा (5) के अंतर्गत फंड या संस्थान को दिए गए विस्तारित समय को देखते हुए, जैसा पैराग्राफ 5(i) में चर्चा की गई है, अधिनियम की धारा 119 के अंतर्गत अधिकारों का प्रयोग करते हुए, बोर्ड वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान प्राप्त दान के संदर्भ में प्रपत्र सं. 10खघ में दान के ब्यौरे की प्रस्तुति हेतु देयतिथि को 30.06.2023 तक बढ़ाता है।
अनंतिम पंजीकरण की प्रयोज्यता के संदर्भ में स्पष्टीकरण
10. अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) का आंठवां परंतुक, अन्य विषयों के साथ-साथ बताता है कि अनंतिम मंजूरी की मांग वाले अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के उप-वाक्यांश (iv), (v), (vi) या (viक) के अंतर्गत संदर्भित न्यास के मामले में ऐसी अनुमति उस वित्त वर्ष के तुरंत बाद के निर्धारण वर्ष से होगी जिसमें आवेदन किया गया। हालांकि, धारा 10 के वाक्यांश (23ग) का पहला परंतुक बताता है कि अनंतिम अनुमति हेतु आवेदन उस निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने के कम से कम एक महीने पर किया जाना आवश्यक है जहां से इसकी मांग की गई है।
11. इसी प्रकार, अधिनियम की धारा 12क की उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) बताता है कि अनंतिम पंजीकरण की मांग करने वाले न्यास को उस निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम एक आवेदन करना आवश्यक है जब पंजीकरण मांगा गया हो। हालांकि, धारा 12क की उप-धारा (2), अन्य विषयों के साथ-साथ बताती है कि अनंतिम पंजीकरण उस वित्त वर्ष के तुरंत बाद के निर्धारण वर्ष से लागू होगा जिसमें ऐसे पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया। इसी आधार पर, अध्ििानमय की धारा 80छ की उप-धारा (5) का पहला परंतुक बताता है कि एक फंड या संस्थान द्वारा अनंतिम अनुमति हेतु आवेदन उस निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम एक महीने पहले किया जाना आवश्यक है जब अनुमति मांगी गई। हालांकि, धारा 80छ की उप-धारा (5) का चौथा परंतुक, अन्य विषयों के साथ-साथ, बताता है कि दूसरे परंतुक के अंतर्गत दिया गया अनंतिम अनुमोदन उस वित्त वर्ष के तुरंत बाद के निर्धारण वर्ष से लागू होगा जिसमें ऐसे पंजीकरण का आवेदन किया गया।
12. निरंतरता लाने के लिए, एतद्द्वारा पैरा 10 और 11 में संदर्भित अनंतिम मंजूरी या अनंतिम पंजीकरण की मांग करने वाले न्यास, फंड या संस्थान के मामले में यह स्पष्ट किया जाता है कि कथित अनंतिम अनुमोदन या अनंतिम पंजीकरण उस पिछले वर्ष के प्रासंगिक निर्धारण वर्ष से प्रभावी होगा जिसमें आवेदन किया जाता है और अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के पहले परतुंक के वाक्यांश (iii) या धारा 12क के उप-धारा (1) के वाक्यांश (कग) के (iii) या अधिनियम की धारा 80छ की उप-धारा (5) के पहले पंरतुक के वाक्यांश (iii), जो भी मामला हो, के अनुसार तीन वर्षों की अवधि के लिए वैध होगा।
छूट की अस्वीकृति से संबंधित स्पष्टीकरण यदि जहां सचित ब्यौरा देय तिथि तक दाखिल न किया गया हो
13. वित्त अधिनियम, 2023 के माध्यम से अधिनियम की धारा 11 की उप-धारा (2) को संशोधित किया गया है कि उप-धारा (प्रपत्र सं. 10) के वाक्यांश (क) में संदर्भित संचित संबंधी ब्यौरा धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत आय की प्रस्तुति की देय तिथि से कम से कम दो महीने पहले प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसी प्रकार, अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 3 के प्रावधान को भी संशोधित किया गया है। इसके अलावा, अधिनियम की धारा 11 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण 1 के वाक्यांश (2) के अंतर्गत प्रपत्र सं. 9क में आय की डीम्ड आय हेतु विकल्प की प्रस्तुति की नियत तिथि को भी संशोधित किया गया है जोकि धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की देय तिथि से कम से कम दो महीने पहले होगा।
14. प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ कि न्यास उनकी आय की गणना के पूर्ण होने से पहले प्रपत्र सं. 10 और प्रपत्र 9क हेतु सक्षम नही हो सकता। चूंकि आय की गणना आय की विवरणी की प्रस्तुति के समय की जाती है इसलिए, न्यास को उनकी आयकर विवरणी की प्रस्तुति की देय तिथि तक प्रपत्र सं. 10 और प्रपत्र सं. 9क की प्रस्तुति की अनुमति होनी चाहिए।
15. यह स्पष्ट किया जाता है कि प्रपत्र सं. 10 और प्रपत्र 9क में संचय संबंधी ब्यौरा आय की विवरणी की प्रस्तुति की देय तिथि से कम से कम दो महीने पहले प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है ताकि बहीखातो के अंकेक्षण के दौरान विचारनीय हो सकता है। हालांकि, न्यास का संचित/डीम्ड आवेदन तबतक अस्वीकृत नही होगा जबतक अधिनियम की धारा 139 की उप-धारा (1) में दिए गए अनुसार विवरणी की प्रस्तुति की देय तिथि को या उससे पहले संचित/डीम्ड आवेदन का ब्यौरा प्रस्तुत न कर दिया जाए।
प्रपत्र 10ख में प्रस्तुत किए जाने वाले अंकेक्षण रिपोर्ट से संबंधित स्पष्टीकरण
16. अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत छूट का दावा करने के योग्य न्यास द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली शर्त है कि अधिनियम की धारा 11 और धारा 12 या अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के उप-वाक्यांश (iv),(v), (v) और (viक) के प्रावधानों, जो भी हो, को प्रभावी किए बिना जहां किसी न्यास की कुल आय, जैसा अधिनियम के अंतर्गत गिनी गई है, उस राशि से अधिक हो जो किसी पिछले वर्ष में आयकर हेतु वसूलनीय नही है, उसे अपने खातो को अंकेक्षित कराना आवश्यक है।
17. न्यास की अंकेक्षण रिपोर्ट से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत करने के लिए और पिछले कुछ वर्षों में न्यास के कराधान हेतु किए गए महत्वपूर्ण संशोधन को देखते हुए, प्रपत्र सं. 10ख और प्रपत्र सं. 10खख में संशोधित अंकेक्षण रिपोर्ट को 2023 की अधिसूचना सं. 7 दिनांक 21.02.2023 के द्वारा संशोधित किया गया है ताकि मुहैया कराया जा सके कि एक न्यास के खातों के अंकेक्षण रिपोर्ट को निम्न में प्रस्तुत किया जाएगा -
(क) प्रपत्र सं. 10ख जहां,
(i) न्यास की कुल आय जो पिछले वर्ष के दौरान पांच करोड़ से अधिक है या
(ii) ऐसे न्यास ने पिछले वर्ष के दौरान किसी विदेशी अंशदान को प्राप्त किया हो या
(iii) ऐसे न्यास ने पिछले वर्ष के दौरान भारत से बाहर अपनी आय के किसी हिस्से का प्रयोग किया हो
(ख) अन्य मामलों में प्रपत्र सं. 10खख
18. उक्त के संबंध में यह ध्यान दिया जा सकता है कि प्रपत्र सं. 10ख और प्रपत्र सं. 10खख में अंकेक्षक के लिए इलैक्ट्रानिक विधि और गैर-इलैक्ट्रानिक विधि में आवेदन या कुछ भुगतानों का वर्गीकरण करना आवश्यक है। कथित प्रपत्रों हेतु यह टिप्पणियां हैं कि इलैक्ट्रानिक विधियां आयकर नियम, 1962 के नियम 6कखखक में संदर्भित निम्नलिखित विधियां होगी :
(क) क्रेडिट कार्ड
(ख) डेबिट कार्ड
(ग) नेट बैंकिंग
(घ) आईएमपीएस (त्वरित भुगतान प्रणाली)
(ड़) यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरैफेस)
(च) आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रास सेटेलमेंट)
(छ) एनईएफटी (नेशनल इलैक्ट्रानिक फंड ट्रांस्फर) और
(ज) भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) आधार पे
19. यह बताया गया है कि इलैक्ट्रानिक विधियों का उक्त ब्यौरे में बैंक पर आहरित खाते में देय चेक या अकाउंट में देय बैंक ड्राफ्ट या एक बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली का प्रयोग शामिल नही है।
20. एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि प्रपत्र सं. 10ख और प्रपत्र 10खख के लिए पैरा 18 में संदर्भित इलैक्ट्रानिक विधियां बैंक पर आहरित खाते में देय चेक या अकाउंट में देय बैंक ड्राफ्ट या एक बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली के अतिरिक्त है।
21. हिंदी संस्करण का अनुसरण किया जाना है।
(विपुल अग्रवाल)
निदेशक (टीपीएल-I), सीबीडीटी
निम्न को प्रति :
1. एफएम का पीएस/ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/ओएसडी
2. राजस्व सचिव का पीएस
3. अध्यक्ष और सदस्य, सीबीडीटी
4. संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव, सीबीडीटी
5. भारतीय नियंत्रक महालेखा परीक्षक (30 प्रतियां)
6. जेएस व कानूनी सलाहकार, विधि व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली
7. भारतीय चार्टेड अकाउंटेंट संस्थान
8. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी) आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी
9. अपर महानिदेशक (पद्धति)-4 विभागीय वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए
10. संयुक्त आयकर आयुक्त, डेटाबेस प्रकोष्ठ irsofficersonline.org पर अपलोडिंग के लिए
11. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त
(विपुल अग्रवाल)
निदेशक (टीपीएल-I), सीबीडीटी

