आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
सुलभता विकल्प
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 5/2020

परिपत्र की तिथि

23/01/2020

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

23/01/2020

परिपत्र सं. 5/2020

परिपत्र सं. 5/2020

 

एफ.नं. 285/08/2014-आईटी(अन्वे. V)/712

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

(केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)

******

कमरा नं. 501, 5वां तल, सी-ब्लॉक,

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर,

मिंटो रोड़, नई दिल्ली-110002

 

दिनांक : 23.1.2020

 

विषय : परिपत्र सं. 24/2019 एफ.नं. 285/08/2014-आईटी. (अन्वे. V)/349 दिनांक 9-9-2019 से संबंधित स्पष्टीकरण - संबंधित

 

सीबीडीटी ने आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत अभियोजन चलाने के लिए मामलों की पहचान और प्रसंस्करण के लिए निर्दिष्ट मापदंडों के लिए परिपत्र सं. 24/2019 दिनांक 9-9-2019 जारी किया है। उन मामलों में उक्तकथित परिपत्र के पैरा 2(iii) को लागू करने के संदर्भ में अनुरोध किया गया है कि जहां जुर्माने को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा अभी तक पुष्ट नहीं किया गया है।

2. सीबीडीटी द्वारा मामले की जांच की गई है और परिपत्र सं. 24/2019 के आंशिक संशोधन द्वारा एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि परिपत्र के पैरा 3 में निर्दिष्टानुसार दो मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक के कॉलेजियम की पूर्व अनुमति के साथ एक आयकर प्राधिकारी के समक्ष कार्यवाही के किसी स्तर पर अभियोजन योग्य मामलों चलाया जा सकता है, उन मामलों सहित जो 132/132क/133क के अंतर्गत शामिल है और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा जुर्माने को पुष्ट करने की अनिवार्यता ऐसे मामलों में लागू नहीं होगी। तद्नुसार, उक्तनिर्दिष्ट परिपत्र के मौजूदा पैरा 2(iii) को निम्नानुसार संशोधित किया गया है :

iii. धारा 276ग(1) के अंतर्गत उल्लंघन : कर आदि बचाने का जानबूझकर किया गया प्रयास

उन मामलों में जहां राशि को बचाया गया कर या कम बताई गई आय रू. 25 लाख या उससे कम है तो दो मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक रैंक के अधिकारियों के कॉलेजियम की पिछली प्रशासनिक अनुमति को छोड़कर मामलों को छोड़कर अभियोजन के लिए प्रसंस्कृत नही होगी जैसा पैरा 3 में निर्दिष्ट है

आगे, इस धारा के अंतर्गत अभियोजन आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा जुर्माना लगाने के आदेश की पुष्टि के बाद सामान्य तौर पर लांच किया जाएगा। आगे, धारा 132, 132क, 133क के अंतर्गत आने वाले मामलों सहित अन्य मामलों में अभियोजन परिपत्र के पैरा 3 में निर्दिष्ट दो मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक की पिछली अनुमति के साथ एक आयकर प्राधिकारी के समक्ष कार्यवाही के किसी भी स्तर पर लांच की जा सकती है।

3. आगे, उन मामलों हेतु परिपत्र को लागू करने से संबंधित स्पष्टीकरण का भी अनुरोध किया गया है जहां परिपत्र के जारी होने की तिथि से पहले ही लांच किया गया है। इस संबंध में, यह ध्यान दिया जा सकता है कि परिपत्र के पैरा 5 में यह निर्दिष्ट किया गया है कि परिपत्र उन सभी मामलों में लागू होगा जहां शिकायत अभी भी की जानी है। इसलिए परिपत्र केवल उन मामलों में ही लागू होता है जहां अभियोजन कार्यवाही को परिपत्र के जारी होने की तिथि यानी 9-9-2019 के बाद दाखिल किया जाना है।

4. इस स्पष्टीकरण को बोर्ड के परिपत्र सं. 24/2019 एफ.नं. 285/08/2014-आईटी (अन्वे. V)/349 दिनांक 9-9-2019 के हिस्से के तौर पर पढ़ा जाएगा।

5. प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/आयका महानिदेशक से अनुरोध है कि अनुपालन के लिए अपने क्षेत्र के सभी अधिकारियों के बीच उक्त स्पष्टीकरण को प्रसारित करें।

 

दीपक तिवारी

आयकर आयुक्त (ओएसडी)(अन्वे.)सीबीडीटी

 

निम्न को प्रति :

  1. वित्त मंत्री का पीएस

  2. राजस्व सचिव का पीएस

  3. अध्यक्ष और समस्त सदस्य, सीबीडीटी

  4. समस्त प्रधान मुख्य आयुक्त/मुख्य आयुक्त/प्रधान महानिदेशक/आयकर महानिदेशक

  5. सीबीडीटी में संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त और उससे ऊपर के समस्त अधिकारी

  6. आयकर आयुक्त (मीडिया व तकनीकी नीति), सीबीडीटी

  7. एडीजी (पद्धति-4)/ www.incometaxindia.gov.in पर चस्पा करने के लिए वेब मैनेजर

  8. अपर आयकर आयुक्त, डेटाबेस प्रकोष्ठ www.irsofficersonline.gov.in पर चस्पा करने के लिए

  9. गार्ड फाइल

 

दीपक तिवारी

आयकर आयुक्त (ओएसडी)(अन्वे.)सीबीडीटी