परिपत्र सं. 05/2017 : मुकद्मेबाजी को कम करने के लिए परिमाप - परिपत्र 21/2015 तथा 8/2016 पर स्पष्टीकरण संबंधी
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 05/2017
परिपत्र की तिथि
23/01/2017
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
23/01/2017
परिपत्र सं. 5/2017
एफटीएस नं. 279157/आर्इटीजे
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
****
नर्इ दिल्ली, दिनांक 23 जनवरी, 2017
विषय : मुकद्मेबाजी को कम करने के लिए परिमाप - परिपत्र 21/2015 तथा 8/2016 पर स्पष्टीकरण संबंधी
प्रभावी करने के लिए सीबीडीटी परिपत्र सं. 21/2015 दिनांक 10.12.2015 के मार्फत दिशानिर्देश जारी किया गया था कि अपील/एसएलपी कथित परिपत्र के पैरा 3 के अंतर्गत निर्दिष्ट मौद्रिक सीमाओं से अधिक नहीं है। उसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि अपील केवल इसलिए दाखिल नहीं की जाएगी क्योंकि कर प्रभाव यदि कथित परिपत्र में निर्धारित मौद्रिक सीमा से अधिक है।
2. उक्तकथित परिपत्र सं. 21/2015 के पैरा 8 में, यह निसंदेह और स्पष्ट रूप से मुहैया कराया गया है कि निम्नलिखित मुद्दों से संबंधित प्रतिकूल निर्णय योग्यता पर प्रतियोगी होने चाहिए बावजूद कि आवश्यक कर प्रभाव परिपत्र में निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम है अथवा भले ही कोर्इ कर प्रभावी नहीं है :
क. जहां अधिनियम अथवा नियम के प्रावधानों की संवैधानिक मान्यता चुनौती के तहत है, अथवा
ख. जहां बोर्ड के आदेश, अधिसूचना, निर्देश अथवा परिपत्र अमान्य अथवा अधिकारातीत होने के तौर पर संघटित हो, अथवा
ग. जहां राजस्व लेखापरीक्षा आपत्ति विभाग द्वारा स्वीकृत की जाती हो
घ. जहां संवृद्धि अघोषित विदेशी परिसंपत्ति/बैंक खातों से संबंधित हो।
पात्रता पर प्रतिस्पर्धा हेतु दिशा इन मामलों में अपील को यांत्रिक दाखिलीकरण का खंडन करती हो।
3. हालांकि, यह ध्यान दिया गया है कि परिपत्र सं. 21/2015 के पैरा 8(ग), संबंधित मामले जहां राजस्व लेखापरीक्षा आपत्ति के कारण की गर्इ संवृद्धि को हटाया जाता है, गलती से व्याख्या की जा रही हो और अपील को योग्यता पर मामले की उचित जांच के बिना विभाग द्वारा यांत्रिक रूप से दाखिल किया जा रहा हो। यह परिपत्र सं. 21/2015 तथा परिपत्र सं. 8/2016 में शामिल निर्देशों के विपरीत है। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि परिपत्र सं. 21/2015 के पैरा 8 के अर्थ तथा प्रयोजन है कि कथित पैरा में निर्दिष्ट मुद्दों पर भी, विरूद्धात्मक निर्णय के समक्ष अपील योग्यता पर ही दाखिल की जानी चाहिए।
4. तद्नुसार, इसलिए, अपील उक्त निर्दिष्ट दिशानिर्देशों के उल्लंघन में विभाग द्वारा दाखिल नहीं की जानी चाहिए। आगे, अपील इन निर्देशों के उल्लंघन में दाखिल की जा सकती हो को निरस्त किया जा सकता है।
5. उक्त को समस्त संबंधितों के ध्यान में लाया जा सकता है।
(नीतिका बंसल)
डीएस (आर्इटीजे),
सीबीडीटी, नर्इ दिल्ली
निम्न को प्रति :
1. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अधिकारी।
2. राजस्व सचिव हेतु ओएसडी।
3. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व समस्त आयकर महानिदेशक, अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए अनुरोध के साथ।
4. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक।
5. प्रमुख आयकर महानिदेशक, राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, नागपुर।
6. प्रमुख आयकर महानिदेशक (पद्धति), एआरए सेंटर, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली।
7. प्रमुख आयकर महानिदेशक (सर्तकता), नर्इ दिल्ली।
8. एडीजी (पीआर, पीपी व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली, सामान्य मेलिंग सूची के अनुसार परिपत्र के लिए तथा त्रैमासिक कर बुलेटिन में मुद्रण के लिए।
9. एडीजी-4 (पद्धति) आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए।
10. irsofficersonline पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ।
11. गार्ड फाइल।
नीतिका बंसल)
डीएस (आर्इटीजे)
सीबीडीटी, नर्इ दिल्ली

