परिपत्र सं. 34/2016 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119 के अंतर्गत आदेश
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 34/2016
परिपत्र की तिथि
21/09/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
21/09/2016
2016 की परिपत्र सं. 34
एफ नं. 282/227/2016-आर्इटी (अन्वे. V)/ 26/2016
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(अन्वेषण प्रभाग)
***
नर्इ दिल्ली, दिनांक 21 सितम्बर, 2016
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119 के अंतर्गत आदेश
आय घोषणा योजना, 2016 (द स्कीम) से संबंधित 2016 की परिपत्र सं. 17 दिनांक 20.05.2016 स्पष्ट करती है कि एक व्यक्ति निर्धारण वर्ष जिसके लिए आयकर अधिनियम, 1961 (द एक्ट) की धारा 142(1)/143(2)/148 के अंतर्गत एक नोटिस 31.05.2016 को अथवा उसके पहले जारी किया गया हो, को छोड़कर निर्धारण वर्ष के लिए योजना के अंतर्गत घोषणा करने के लिए पात्र होगा।
इस संदर्भ में, चिंताएं जाहिर की गर्इ हैं कि यदि योजना के अंतर्गत घोषणा एक समान मुद्दे, जो अधिनियम की धारा 143(3)/147 के अंतर्गत लंबित मूल्यांकन है, पर निर्धारण के अंतर्गत न आने वाले वर्षों के लिए की जाती है तो क्या ऐसी घोषणा निर्धारण के अंतर्गत वर्ष के लिए कथित मुद्दे पर आय को छिपाकर निर्धारिती द्वारा स्वीकृति के समान होगी। संदेह भी जाहिर किया गया है कि अन्य वर्षों में एक समान मुद्दे के अंतर्गत घोषणा वर्ष जिसमें मूल्यांकन लंबित हो, के लिए अभियोजन के प्रारंभ तथा जुर्माने के उदग्रहण का कारण हो सकता है।
इस संबंध में, समस्त संबंधितों का ध्यान अधिनियम की धारा 273क के प्रावधानों के लिए आमंत्रित है जिसे कुछ मामलों में जुर्माने में कमी अथवा छूट के अधिकार के लिए मुहैया कराया गया है। ध्यान अधिनियम की धारा 279(1क) के प्रावधानों हेतु भी आमंत्रित है जो मुहैया कराती है कि एक व्यक्ति निर्धारण वर्ष के लिए मूल्यांकन के संबंध में धारा 276ग अथवा धारा 277 के अंतर्गत एक दोष के विरूद्ध प्रवृत्त नहीं होगा जिसके संबंध में धारा 271(1)(iii) अथवा 270क के अंतर्गत अधिरोपित अथवा अधिरोप्य जुर्माना धारा 273क के अंतर्गत एक आदेश द्वारा कम अथवा छूट दी गर्इ हो।
धारा 273क परस्पर मुहैया कराती है कि प्रमुख आयुक्त अथवा आयुक्त उन मामलों में जुर्माने को कम अथवा छूट देंगे जहां निर्धारिती को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए अपनी आय के निर्धारण से संबंधित किसी पूछताछ में सहयोग करना हो तथा या तो भुगतान करना हो अथवा किसी कर के भुगतान के लिए संतुष्टजनक व्यवस्था करनी हो अथवा प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के संबंध में अधिनियम के अंतर्गत पारित मूल्यांकन आदेश के फलस्वरूप ब्याज देना हो। यह स्पष्ट किया जाता है कि जहां एक घोषणा एक समान मुद्दे, जो अधिनियम की धारा 143(3)/147 के अंतर्गत मूल्यांकन लंबित हो, पर निर्धारण के अंतर्गत न आने वाले वर्षों के लिए योजना के अंतर्गत की जाती हो तथा व्यक्ति अधिनियम की धारा 143(3)/147 के अंतर्गत वर्ष के लंबित मूल्यांकन के लिए ऐसे मुद्दे पर कर तथा ब्याज, यदि हो का भुगतान करने का प्रस्ताव करता हो तो व्यक्ति को अधिनियम की धारा 273क के अर्थ के भीतर "किसी पूछताछ में समन्वय" के तौर पर समझा जाएगा। इसलिए, प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्तों को कथित निर्धारण वर्ष के लिए एक मुद्दे के संबंध में अधिनियम की धारा 273क के अंतर्गत वैध प्रयोग की प्राप्ति पर उदार दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जाती है जो मुद्दे हेतु समान हैं जिस पर एक वैध घोषणा को योजना के अंतर्गत देययोग्य पूर्ण राशि के भुगतान के अनुसार अन्य निर्धारण वर्षों के लिए योजना के अंतर्गत की गर्इ हो।
(ममता बंसल)
निदेशक (अन्वे. V)
निम्न को प्रति :
1- अध्यक्ष, सदस्य तथा संयुक्त सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में समस्त अन्य अधिकारी
2- अपने क्षेत्रों में समस्त अधिकारियों के बीच वितरित करने के अनुरोध के साथ आयकर के समस्त प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान आयकर निदेशक
3- विभागीय वेबसाइट पर चस्पा करने के लिए वेब मैनेजर
4- आर्इआरएस की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने के अनुरोध के साथ डाटा बेस प्रकोष्ठ

