आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 30/2016

परिपत्र की तिथि

26/08/2016

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

26/08/2016

 विदेशी शिपिंग कंपनियों (एफएससी) के मामलों में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), बंदरगाह अनुमति प्रमाणपत्र (पीसीसी), जलयात्रा प्रतिफल तथा जलयात्रा निर्धारण की प्रक्रिया का व्यवस्थीकरण

परिपत्र सं. 30/2016

एफ.नं. 500/05/2014-एफटीडी-I

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

विदेशी कर व कर अनुसंधान प्रभाग - II

एफटी एंड टीआर-V प्रभाग

 

नर्इ दिल्ली, दिनांक 26 अगस्त, 2016

 

विषय : विदेशी शिपिंग कंपनियों (एफएससी) के मामलों में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), बंदरगाह अनुमति प्रमाणपत्र (पीसीसी), जलयात्रा प्रतिफल तथा जलयात्रा निर्धारण की प्रक्रिया का व्यवस्थीकरण।

 

आयकर अधिनियम, 1961 (द एक्ट) की धारा 172 के प्रावधानों के अनुसार आपेक्षित बंदरगाह निकासी प्रमाणपत्र के निर्गमन में विदेशी शिपिंग कंपनियों द्वारा झेली जा रही प्रक्रियात्मक कठिनार्इयों में प्रतिनिधित्व प्राप्त किए गए हैं। बोर्ड ने डीटीएए (दोहरा कराधान परिहार समझौता) राहत द्वारा कवर्ड मामलों में प्रत्येक समुद्री यात्रा के लिए एनओसी को प्राप्त करने की प्रक्रिया को दूर करने हेतु पहले परिपत्र सं. 732 दिनांक 20.12.1995 जारी किया था। हालांकि, यह प्रतिनिधित्व किया गया है कि :

(क) संधि लाभ वाली एफसी (विदेशी शिपिंग कंपनी) को अभी भी बंदरगाह पर कस्टम विभाग को अग्रिम प्रस्तुति हेतु प्रत्येक जलयान के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) को जारी करने हेतु बंदरगाह निर्धारण अधिकारी (प्रत्येक मांग बंदरगाह पर) के पास जाना आवश्यक है।

(ख) कोर्इ एक समान क्रिया प्रत्येक जलयात्रा को एनओसी देने वाले बंदरगाह निर्धारण अधिकारियों द्वारा तथा जलयात्रा प्रतिफल को निर्धारित करने में भी अनुसरित नहीं होगी।

2. अधिनियम की धारा 172 को गैर-निवासियों के समुद्री व्यापार के निर्धारण के लिए एक स्वपूर्ण कोड के लिए मुहैया कराया गया है। कथित धारा में शामिल कराधान की योजना के अनुसार, यात्री, पशुधन, डाक अथवा उत्पाद रखने वाली विदेशी शिपिंग कंपनी की आय भारतीय बंदरगाह से जाने वाले जहाज को उसकी ओर से मालिक अथवा चार्टर अथवा किसी व्यक्ति को ऐसी ढुलार्इ के कारण देय अथवा देययोग्य राशि के साढे़ सात प्रतिशत होने के तौर पर समझा जाएगा। कथित धारा आगे निर्धारित करती है कि बंदरगाह से जहाज के जाने से पहले एक ऐसे विदेशी जहाज का प्रमुख निर्धारण अधिकारी (एओ) को जलयात्रा के प्रतिफल को तैयार तथा प्रस्तुत करेगा अथवा उपयुक्त तथा आवश्यक व्यवस्था करेगा कि प्रतिफल जहाज के बंदरगाह से जाने के 30 दिनों के भीतर दाखिल हो। निर्धारण अधिकारी, विवरणी को प्राप्त करने पर, समुद्रीयात्रा के कारण आय का निर्धारण करेगा तथा इस पर देययोग्य कर को निर्धारित करेगा। कस्टम प्राधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करें कि बंदरगाह संबंधी अनुमति तब तक न दी जाए जबतक (क) या तो आय पर देय कर का भुगतान न किया गया हो अथवा (ख) ऐसे करों के भुगतान के लिए संतुष्टिवर्धक व्यवस्था न की गर्इ हो। अधिनियम की धारा 172 यह भी निर्धारित करती है कि जहाज का मालिक अथवा चार्टर वित्त वर्ष, जिसमें जहाज रवाना हुआ हो, से प्रासंगिक वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले दावा कर सकता है कि इसकी कुल आय का वार्षिक निर्धारण अधिनियम की अन्य धाराओं के प्रावधानों के अंतर्गत की जानी है तथा ऐसे मामले में ऐसी जलयात्रा से पहले दिया गया कर उस निर्धारण वर्ष के लिए अग्रिम कर के भुगतान के तौर पर समझा जाएगा।

3. ऐसे भी उदाहरण हैं कि जहां विदेशी शिपिंग कंपनी अन्य राष्ट्रों के साथ भारतीय डीटीएए द्वारा कवर की गर्इ हो जिसमें विदेशी शिपिंग कंपनी की शिपिंग आय का कराधान अधिकार पूर्णता अन्य राष्ट्र के पास हो। ऐसे मामलों में, विदेशी शिपिंग कंपनी को निम्न के संबंध में करों का कोर्इ भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है या तो जलयात्रा प्रतिफल धारा 172(3) के अंतर्गत दाखिल की गर्इ हो अथवा वार्षिक विवरणी अधिनियम की धारा 172(7) के साथ पठित धारा 139 के अंतर्गत दाखिल की गर्इ हो। डीटीएए द्वारा कवर्ड मामलों में प्रत्येक जलयात्रा के लिए एनओसी को प्राप्त करने की प्रक्रिया को दूर करने के लिए बोर्ड को प्रतिनिधित्व पर, परिपत्र सं. 732 दिनांक 20.12.1995 को जारी किया गया था। कथित परिपत्र के अनुसार, निर्धारण अधिकारी डीटीएए की प्रयोज्यता को सावधानीपूर्वक सत्यापित करने के पश्चात् वर्ष के लिए वैध वार्षिक एनओसी को जारी करने के लिए सक्षम है। यह अपेक्षा थी कि जलयात्रा प्रतिफल का दाखिलीकरण तथा ऐसी विदेशी शिपिंग कंपनियों को बंदरगाह अनुमति प्रमाणपत्र (पीसीसी) का निर्गमन दैनिक तथा शीघ्र तरीके से होगा।

4. यह प्रतिनिधित्व किया गया है कि कोर्इ एक समान अभ्यास प्रत्येक जलयात्रा के लिए एनओसी देने वाले निर्धारण अधिकारियों द्वारा तथा इस सबंध में जलयात्रा निर्धारण करने के लिए भी अनुसरित नहीं होगा। आगे, यह प्रतिनिधित्व किया जाता है कि कुछ बंदरगाहों पर, क्षेत्राधिकारी निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी वार्षिक एनओसी को वैध किया जा रहा है तथा बंदरगाह अनुमति तथा समुद्री यात्रा प्रतिफल निर्धारण दैनिक तरीके से किया जा रहा है जबकि अन्य बंदरगाहों पर, बंदरगाह निर्धारण अधिकारी बंदरगाह निकासी जारी होती है के परिणामस्वरूप एनओसी से पहले वार्षिक एनओसी को वैध नहीं कर रहे तथा कर निवास प्रमाणपत्र, प्रभावी प्रबंधन प्रमाण आदि को जमा करने जैसे दस्तावेजीकरण के लिए आग्रह कर रहे हैं। यह प्रतिनिधित्व किया गया है ऐसे मामलों में, विवरण को दाखिल करने पर आग्रह कार्य के प्रतिरूप का परिणाम है चूंकि यह दस्तावेज वार्षिक एनओसी को जारी करने के समय क्षेत्राधिकारी एओ द्वारा सत्यापित तथा पहले से दाखिल किए गए हैं। यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि बंदरगाह पर क्षेत्राधिकार रखने वाले अधिकारी से एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया एफएससी के लिए रसद संबंधी कठिनार्इयां प्रस्तुत करती है चूंकि सामान्यत: बंदरगाह निर्धारण अधिकारी क्षेत्राधिकारी निर्धारण अधिकारी से विचारनीय दूरी पर स्थित होता हैं।

5. मामले की जांच बोर्ड द्वारा की गर्इ है तथा प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए गए है।

6. परिपत्र 732 दिनांक 20.12.1995 को डीटीएए की प्रयोज्यता को सावधानीपूर्वक सत्यापित करने के पश्चात् निर्धारण अधिकारी द्वारा वार्षिक एनओसी को जारी करने के लिए मुहैया कराया गया है। वार्षिक एनओसी उन मामलों में जारी की जानी है जहां डीटीएए के कारण विदेशी शिपिंग कंपनियों पर कोर्इ कर उदग्रहणीय नहीं है। निर्धारण अधिकारी जिसके लिए वार्षिक एनओसी के लिए अनुरोध विदेशी शिपिंग कंपनी द्वारा दाखिल हुआ है, को तद्नुसार वार्षिक एनओसी को जारी करने से पहले विदेशी शिपिंग कंपनी को डीटीएए की प्रयोज्यता को जांचना चाहिए। वार्षिक एनओसी में विदेशी शिपिंग कंपनी द्वारा लिए गए समुद्री जहाजों के नाम, चार्टर्ड जहाज के नाम अथवा उन शिपिंग कंपनियों के नाम होने चाहिए जिससे जहाज विदेशी कंपनी द्वारा भाडे़ पर लिए गए हो तथा दल के सदस्यों का नाम तथा उनके जहाज जो इस दल के भाग हैं, के नाम होने चाहिए। निर्धारण अधिकारी को आवेदक से घोषणा लेना जारी रखना चाहिए कि संधि के लाभ अंतर्राष्ट्रीय ट्रेफिक में माल-भाडे़ के संबंध में ही उपलब्ध होगा।

7. जलयात्रा संबंधी एनओसी का निर्गमन

जलयात्रा एनओसी तथा इसकी अनिवार्यता, जो जलयात्रा से संबंधित मालभाडे़ की परिणामी करदेयता पर आश्रित है, तीन भिन्न तरीकों में नीचे व्यवहारित होगी।

  (i) उन मामलों में जिनमें पूर्ण कार्गो एक एकल विदेशी शिपिंग कंपनी से संबंधित हो जो पूर्ण डीटीएए राहत वाले राष्ट्र से संबंधित है, क्षेत्राधिकारी निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी वार्षिक एनओसी जलयात्रा एनओसी के उद्देश्य पर भी तामील होगी। ऐसे मामलों में एनओसी वार जलयात्रा की अनिवार्यता 1995 के परिपत्र 732 के माध्यम से पहले ही दूर किया जा चुका है। आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि बंदरगाह पर क्षेत्राधिकार रखने वाले आयकर अधिकारी से जलयात्रा संबंधी एनओसी की आवश्यकता नहीं है तथा कस्टम प्राधिकारी ऐसे जहाजों हेतु पीसीसी जारी करने से पहले क्षेत्राधिकारी एओ द्वारा जारी वार्षिक एनओसी को स्वीकृत करेगा।

 (ii) उन मामलों में जिनमें कार्गो कर्इ विदेशी शिपिंग कंपनियों से संबंधित हो तो डीटीएए राहत सहित राष्ट्र से संबंधित प्रत्येक वस्तु तथा प्रत्येक वस्तु जिसका वार्षिक एनओसी उनके संबंधित क्षेत्राधिकारी एओ द्वारा जारी किया गया हो तो जलयात्रा एनओसी आपेक्षित नहीं है। ऐसे मामलों में पीसीसी के निर्गमन से पहले कस्टम प्राधिकारियों द्वारा सत्यापन की सुविधा के लिए, संलग्न प्रारूप के अनुसार सनदी लेखाकार (सीए) द्वारा एक प्रमाणपत्र संबंधित कस्टम प्राधिकारियों के समक्ष जहाज के प्रमुख द्वारा दाखिल किया जाना है। सीए प्रमाणपत्र समस्त विदेशी शिपिंग कंपनियों जिससे जहाज में कार्गो संबंधित है, के लिए वार्षिक एनओसी के साथ संलग्न होगा।

(iii) किसी अन्य मामले में, समुद्री जहाज के प्रमुख को बंदरगाह पर क्षेत्राधिकार रखने वाले अधिकारी से जलयात्रा एनओसी को प्राप्त करना आपेक्षित है। कस्टम प्राधिकारी ऐसे एनओसी अथवा प्रमाणीकरण प्रति की प्रस्तुति पर ही पीसीसी जारी करेंगे।

8. जलयात्रा प्रतिफल का दाखिलीकरण

जलयात्रा के लिए जहां कार्गो कर्इ विदेशी शिपिंग कंपनियों से संबंधित हो, भले ही वे सभी डीटीएए राहत वाली संधि राष्ट्रों से संबंधित हो, यहां ऐसी विदेशी शिपिंग कंपनियों के लिए विभिन्न एओ होगा। चूंकि जलयात्रा विवरणी जहाज तथा इसके कार्गो आदि के संबंध में है, यह संभव नहीं होगा कि इसे विभिन्न विदेशी कंपनियों के क्षेत्राधिकारी एओ को दाखिल किया जाए। इसलिए, ऐसे समस्त मामलों में, जलयात्रा विवरणी बंदरगाह पर क्षेत्राधिकार रखने वाले एओ के साथ दाखिल किया जाना जारी रहेगा। चूंकि जलयात्रा प्रतिफल जहाज के रवाना होने के एक माह के भीतर दाखिल किया जाना है, यह बंदरगाह से जहाजों के समय से रवाना होने को किसी भी तरह प्रभावित नहीं करेगा।

9. जलयात्रा मूल्यांकन

यदि जहां एक विदेशी शिपिंग कंपनी जलयात्रा आधार अर्थात् जहाज आधार पर, पर निर्धारित किए जाने के लिए पूर्ण संधि राहत के लिए पात्र हो तो निर्धारण अधिकारी जिसके समक्ष ऐसी जलयात्रा प्रतिफल दाखिल किया गया हो, एओ द्वारा जारी वार्षिक एनओसी का विधिवत ऋण देगा। ऐसे स्थिति में संधि के लाभ से संबंधित मूल्यांकन शीघ्रता से तथा विदेशी शिपिंग कंपनी की पात्रता के संबंध में किसी अग्रिम सत्यापन को किए बिना किया जाना चाहिए तथा क्षेत्राधिकार एओ द्वारा जारी वार्षिक एनओसी को वैध किया जाना चाहिए। अन्य मामलों में अर्थात् उस स्थिति मे जहां विदेशी शिपिंग कंपनी जलयात्रा आधार के स्थान पर वार्षिक आधार पर मूल्यांकित किए जाने की अपनी इच्छा को प्रस्तुत करते हुए धारा 172(7) के अंतर्गत सूचना को दाखिल करती है। बंदरगाह निर्धारण अधिकारी के समक्ष जलयात्रा मूल्यांकन समाप्त होना चाहिए तथा बंदरगाह निर्धारण अधिकारी वार्षिक एनओसी जारी करने वाले निर्धारण अधिकारी को उस विदेशी शिपिंग कंपनी के संबंध में जलयात्रा तथा मालभाडे़ के विवरण की सूचना देगा।

10. संबंधित प्राधिकारियों से उक्त दिशानिर्देशों पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

 

(विनय सिन्हा)

निदेशक (एफटीएंडटीआर-V), भारत सरकार

 

सेवा में,

(क) अध्यक्ष, सदस्य तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अन्य समस्त अधिकारी

(ख) प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक अपने क्षेत्र/प्रभार में समस्त अधिकारियों के बीच इसे वितरित करने के अनुरोध के साथ

(ग) आयुक्त (मीडिया तथा तकनीकी नीति) तथा आधिकारिक प्रवक्ता, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, इस परिपत्र को विस्तृत प्रचार देने के अनुरोध के साथ

(घ) अपर आयकर महानिदेशक (पीआर, पीपी एंड ओएल)

(ड़) आर्इटीसीसी प्रभाग, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (3 प्रतियां)

(च) अपर महानिदेशक (पद्धति)-IV, विभागीय वेबसाइट पर चस्पा करने के लिए

(छ) आर्इआरएस अधिकारी वेबसाइट पर अपलोडिंग करने के लिए डाटाबेस प्रकोष्ठ

(ज) हिंदी अनुवााद के लिए राजस्व विभाग का हिंदी प्रकोष्ठ

(झ) गार्ड फाइल

 

(विनय सिन्हा)

निदेशक (एफटीएंडटीआर-V), भारत सरकार

 

सनदी लेखागार द्वारा प्रस्तुत होने वाला प्रमाणपत्र

 

सेवा में

कस्टम अधिकारी

..........................बंदरगाह

भारत

 

विषय : केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के परिपत्र सं. 30 दिनांक 26/08/2016 के अनुसार जारी सत्यापन प्रमाणपत्र

 

यह प्रमाणित किया जाता है कि ...................... को (नौकायान की अंतिम तिथि) पर ............................से (बंदरगाह का नाम) से नौकायान करने वाले ....................(जलयान का नाम) कर्इ विदेशी शिपिंग कंपनियों से संबंधित कार्गो ले जा रहा है, जिसमें से प्रत्येक भारतीय दोहरा कराधान परिहार समझौता (डीटीएए) के अंतर्गत शिपिंग आय पर भारत में कराधन से राहत के लिए पात्र है। यह प्रमाणपत्र जहाज.............. (समुद्री जहाज का नाम) के प्रमुख के अनुरोध पर जारी किया गया है तथा निम्नानुसार ऐसी विदेशी शिपिंग कंपनी को जारी वार्षिक एनओसी के अधार पर दिया गया है :

विदेशी शिपिंग कंपनी का नाम एनओसी को जारी करने की तिथि

 

(हस्ताक्षर)

 

तिथि :

स्थान :

संलग्न : वार्षिक एनओसी की प्रतियां

 

(यह प्रमाणपत्र सीए फर्म के लैटर हैड पर होनी चाहिए तथा सीए द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए तथा आर्इसीएआर्इ के साथ सदस्यता संख्या इंगित होनी चाहिए)