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वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 3/2022

परिपत्र की तिथि

03/02/2022

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

03/02/2022

 परिपत्र सं. 3/2022

परिपत्र सं. 3/2022

एफ.नं. 503/1/2021-एफटीएंडटीआर-I

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(एफटीएंडटीआर-I)

नई दिल्ली, 3 फरवरी, 2022

विषय : कुछ देशों के साथ भारत के डीटीएए के प्रोटोकॉल में सबसे पसंदीदा राष्ट्र (एमएफएन) से संबंधित स्पष्टीकरण

कुछ देशों, विशेषकर यूरोपीय देशों और ओईसीडी सदस्यों (नीदरलैंड, फ्रांस, स्विस कन्फेडरशन, स्वीडन, स्पेन और हंगरी) के साथ भारत के दोहरे कराधान से बचने के लिए किए गए समझौते (डीटीएए) के प्रोटोकॉल में प्रावधान शामिल है जिसे सबसे पसंदीदा राष्ट्र (एमएफएन) वाक्यांश के तौर पर संदर्भित किया गया है। हालांकि, इन डीटीएए में प्रत्येक एमएफएन वाक्यांश का अलग सूत्र है, सामान्य आधारभूत प्रावधान यह है कि यदि पहले राष्ट्र के साथ डीटीएए के हस्ताक्षर/प्रभावी होने के बाद (एमएफएन वाक्यांश की भाषा पर निर्भर करते हुए), भारत अन्य ओईसीडी सदस्य देश के साथ डीटीएए करता है। जिसमें भारत आय की कुछ मदों (जैसे लाभांश, ब्याज, आय, रॉयल्टी, तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क आदि) के संबंध में अपने स्रोत संबंधी कराधान अधिकरों को कम दर पर या पहले देश के साथ डीटीएए में आय की उन मदों में दी गई सीमा की तुलना में अधिक सीमित करता है, तो ऐसे लाभकारी उपचार पहले देश को भी दिए जाने चाहिए।

2. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के ओईसीडी सदस्य देशों के साथ कुछ डीटीएए के प्रोटोकॉल में उपलब्ध एमएफएन वाक्यांश (विशेषकर लाभांश कटौती दर) के लागू होने के संबंध में स्पटीकरण की मांग की गई है। देशों, यानी स्लोवेनिया, कोलंबिया और लुथिआनिया, के साथ भारत के डीटीएए को आय की कुछ मदों के संबंध में स्रोत कराधान की कम दर के लिए मुहैया कराया गया है। हालांकि, ये राष्ट्र भारत के साथ उनके डीटीएए को अंतिम रूप देते समय ओईसीडी के सदस्य नहीं थे और उसके बाद ओईसीडी के सदस्य बने।

3. राजकोषीय मामला महानिदेशक द्वारा जारी आदेश, अंतर्राष्ट्रीय राजकोषीय मामला, नीदरलैंड (आदेश सं. आईएफजेड 2012/54एम दिनांक 28 फरवरी 2012) (इसके बाद "आदेशष् के तौर पर संदर्भित), 4 फरवरी, 2016 को डीजीआईएफपी द्वारा प्रकाशित फ्रैंच ऑफिशियल बुलेटिन ऑफ पब्लिक फाईनेंस - टैक्स (bulletin offcial des finances publiques-impôts) (बाद में "बुलेटिन" के तौर पर संदर्भित) और 13 अगस्त, 2021 को फैडरल डिपार्टमेंट ऑफ फाईनेंस, स्विस कन्फेडरशन द्वारा प्रकाशित आदेश हेतु संदर्भ अनिर्णित है। नीदरलैंड और फ्रांस के एक तरफा आदेश/बुलेटिन घोषणा करते हैं कि भारत के साथ उनके संबंधित डीटीएए के अंतर्गत लाभांश पर कर संबंधी दर स्लोवेनिया, जो 21 जुलाई, 2010 को एमएफएन का सदस्य बना, के साथ भारत के डीटीएए करने के बाद एफएफएन वाक्यांश के अंतर्गत संशोधित रहेगी। डीटीएए के पास 5 प्रतिशत की कम कर संबंधी दर है यदि होल्डिंग 10 प्रतिशत से अधिक है। निर्णय/बुलेटिन में आगे निर्दिष्ट किया गया है कि कर दर स्लोवेनिया के ओईसीडी का सदस्य बनने की तिथि से पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी। इसी प्रकार, स्विस महासंघ के एकतरफा प्रकाशन घोषणा करता है कि भारत के साथ उनके डीटीएए के अंतर्गत उनके लाभांश पर कर की दर लिथुआनिया और कोलंबिया जो क्रमश: 5 जुलाई, 2018 और 28 अप्रैल, 2020 को ओइसीडी के सदस्य बने, के साथ डीटीएए में भारत के आने के बाद एमएफएन वाक्यांश के अंतर्गत संशोधित किया गया है। प्रकाशक आगे निर्दिष्ट करता है कि 5 प्रतिशत की कम दर 5 जुलाई, 2018 (यानी लुथिआनिया के ओईसीडी का सदस्य बनने की तिथि) से पूर्वव्यापी तौर पर 10 प्रतिशत से अधिक के अधिकार के लिए और 28 अप्रैल, 2020 (यानी कोलंबिया के ओईसीडी से जुड़ने की तिथि) से पूर्वव्यापी तौर पर योग्य हितों और पोर्टफोलियो लाभांश से उत्पन्न होने वाले लाभांश के लिए लागू होगा।

4. एमएफएन वाक्यांश की व्याख्या पर उक्त निर्दिष्ट निर्णय/बुलेटिन/प्रकाशन और स्पष्टता की मांग करते हुए करदाताओं और क्षेत्रीय कार्यालयों से प्राप्त प्रतिनिधित्व को देखते हुए, सीबीडीटी एतद्द्वारा एमएफएन वाक्यांश को लागू करने पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण जारी करता है :

4.1. एकपक्षीय निर्णय/बुलेटिन/प्रकाशन एमएफएन वाक्यांश के लागू होने पर संधि सहभागियों की सांझा समझ को प्रदर्शित नहीं करता :

दोनों नीदरलैंड और फ्रांस ने भारत के साथ किसी द्विपक्षीय परामर्श के बिना कथित निर्णय/बुलेटिन पारित किया है। इसलिए, यह निर्णय/बुलेटिन एमएफएन वाक्यांश के लागू होने पर भारत की सांझा समझ और संबंधित संधि सहभागियों और किसी बाध्यकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करता जहां तक संबंधित संधियों में एमएफएन वाक्यांश की व्याख्या का संबंध है। सबसे अच्छे रूप में यह एकपक्षीय निर्णय/बुलेटिन नीदरलैंड/फ्रांस के कर से राहत देने के लिए संबंधित सरकारों के दृष्टिकोण का ही प्रतिनिधित्व करता है। चूंकि इन निर्णयों/बुलेटिनों को भारत सरकार के साथ किसी विचार-विमर्श के बिना पारित किया गया था, इसका कर देयता जो संबंधित कर संधि के अंतर्गत भारत सरकार के लिए देययोग्य है, की कटौती करने पर कोई प्रभाव नही होगा।

4.1.1 भारत भी नीदरलैंड और फ्रांस को अपनी स्थिति बता चुकी है कि संदेहास्पद निर्णय/बुलेटिन संबंधित डीटीएए में विषय और उद्देश्य के अनुसार नहीं है और कि भारत-स्लोवेनिया संधि में कम कर की दर को एमएफएन वाक्यांश के आधार पर इन संधियों में आयातित नहीं किया जा सकता चूंकि स्लोवेनिया स्लोवेनिया तब ओईसीडी का एक सदस्य नहीं था जब भारत ने इसके साथ डीटीएए किया। केवल इस तथ्य पर भरोसा कि स्लोवेनिया एमएफएन वाक्यांश को लागू करते समय ओईसीडी सदस्य देश है एमएफएन वाक्यांश के लक्ष्य और उद्देश्य को निष्क्रिय करता है। नीदरलैंड और फ्रांस को भारत के एमएफएन वाक्यांश की व्याख्या के लिए कोई उत्तर नही है।

4.1.2 स्विस कन्फेडरशन के मामले में, भारत ने अपनी स्थिति बता चुका है कि तीसरे देश के साथ भारत के डीटीएए के लाभ को भारत-स्विस डीटीएए में आयातित नही किया जा सकता जबतक तीसरा देश उस संधि के हस्ताक्षर के समय ओईसीडी का सदस्य नहीं था।

4.2 डीटीएए के निष्कर्ष की तिथि पर ओईसीडी के सदस्य के तौर पर तीसरे देश के लिए शर्त :

भारत के डीटीएए विशेषकर उक्त निर्दिष्ट राष्ट्र के संबंध में एमएफएन वाक्यांश को सीधे पढ़ने पर, यह स्पष्ट है कि आवश्यक है कि तीसरा देश भारत के साथ संधि को अंतिम रूप देते हुए साथ ही साथ एमएफएन वाक्यांश को लागू करते समय ओईसीडी का सदस्य देश बने। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि एमएफएन को लागू करने के लिए तीसरा देश भारत के साथ डीटीएए का अंतिम रूप देने की तिथि पर ओईसीडी राष्ट्र देश का सदस्य होना चाहिए।

4.3 तीसरे देश के साथ डीटीएए के प्रभावी होने की तिथि से रियायती दर/सीमित सीमा को लागू करना और नाकि तीसरे देश का ओईसीडी का सदस्य बनने की तिथि से :

यह भी बताया जा सकता है कि इन डीटीएए में एमएफएन वाक्यांश स्पष्ट तौर पर घटाई गई दर तीसरे देश के साथ भारतीय डीटीएए के प्रभावी होने की तिथि से प्रभावी हुई। इसलिए, डीटीएए के प्रभावी होने के बाद ओईसीडी के सदस्य बनने पर तीसरे देश की तिथि से कम की गई दर को प्रभावी करने के लिए नीदरलैंड, फ्रांस और स्विस कन्फेडरशन के निर्णय/बुलेटिन/प्रकाशन में घोषणा प्रोटोकॉल में एमएफएन वाक्यांश के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार नहीं है। वास्तव में, यह देश तीसरे देश के साथ भारतीय डीटीएए के प्रभावी होने की तिथि से प्रभावी नही हो सकी चूंकि तीसरा देश प्रभावी होने की ऐसी तिथि पर ओईसीडी का सदस्य नही था। यह स्पष्ट हो जाता है कि डीटीएए के प्रोटोकॉल में एमएफएन वाक्यांश का इरादा उस तीसरे देश के साथ भारत के डीटीएए का लाभ देना नहीं है जो ओईसीडी का सदस्य नही था जब भारत ने उसके साथ डीटीएए किया। इस संदर्भ में, रामजेठ मलानी व अन्य (2009 की रिट याचिका सिविल नं. 176) के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने अवलोकन किया है कि :

"61. भारतीय संघ बनाम आजादी बचाओ आंदोलन में इस न्यायालय ने फ्रैंक बैनीसन की टिप्पणियों को मुख्य तौर पर अनुमोदित किया है कि एक संधि एक वास्तविक कानून न होकर वास्तव में अप्रत्यक्ष कानून है और संधियों का मसौदा प्रत्यक्ष रूप से अव्यवस्थित होने से असुविधा होती है। इस संदर्भ में इस न्यायालय ने आगे अनुमोदित किया है कि अधिपति widgery, C.J. का निर्णय है कि शब्द "उनके सामान्य अर्थ, वकील और उनके जैसे साधारण व्यक्तियों के लिए दिया जाना है" उसी प्रकार से..... वकीलों की तुलना में राजनायिकों का अर्थ भी दिया जाना है। संधियों और उसमें निहित प्रावधानों के संबंध में व्याख्या के विस्तृत सिद्धांत होंगे कि शब्दों का सामान्य अर्थ प्रभावी होगा जबतक संदर्भ की अन्यथा आवश्यकता न हो। हालांकि, तथ्य यह है कि ऐसी संधियां राजनायिकों द्वारा बनाई गई है ना कि वकीलों द्वारा, जिससे मसौदाकरण में अव्यवस्था भी शामिल होती है कि किसी शब्द, वाक्यांश या अनावश्यक वाक्य प्रस्तुत करने में सावधानी बरती जानी है विशेषकर वहां जहां ऐसे शब्द, वाक्यांश या शब्द की प्रस्तुति से स्पष्ट तौर पर निरर्थक स्थिति पैदा होती हो, विशेषकर संवैधानिक परिपेक्ष्य से। सरकार उस किसी एक तरीके से भारत को बाध्य नहीं कर सकती कि संवैधानिक प्रावधान, महत्व और अनिवार्यताओं (जोर दिया गया) को तोड़ा गया है।

इसलिए, कोई भी एमएफएन वाक्यांश जो तीसरे देश के साथ भारतीय डीटीएए को प्रभावी करने की तिथि से कम दर को लागू करने को अनिवार्य करता है, के स्पष्ट शब्दों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। सभी तीन देशों ने अपने एकपक्षीय निर्णय/बुलेटिन/प्रकाशन के माध्यम से अनावश्यक एमएफएन वाक्यांश के इस हिस्से को प्रभावी किया जोकि उक्त भारतीय उच्चतम न्यायालय के अनुसार नहीं किया जा सकता। उक्त निर्दिष्ट निर्णय/बुलेटिन/प्रकाशन का अभी तक कोई प्रयोग नहीं है जहां तक भारत के व्यक्ति के कारधान संबंधी देयता का संबंध है।

4.4 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 90 के अंतर्गत अधिसूचना की अनिवार्यता :

आगे, यह आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 90 की उप-धारा (1) के अंतर्गत भारत की घरेलू आवश्यकता है कि डीटीएए या डीटीएए के लिए संशोधन आधिकारिक राजपत्र में इसकी अधिसूचना के बाद कार्यान्वित हुई। आजादी बचाओ आंदोलन (2004, 10 एससीसी) के प्रसिद्ध मामले में साथ ही साथ माननीय भारतीय उच्चतम न्यायालय ने अवलोकन किया है कि डीटीएए प्रावधान ऐसे डीटीएए की अधिसूचना के निगर्मन की तिथि से प्रभावी हुआ। माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी निर्णय में यह स्पष्ट किया कि धारा 90 की उप-धारा (2) के लाभकारी प्रावधान तुरंत प्रभावी होते है यदि एक बार अधिसूचना जारी हो। उस निर्णय के प्रासंगिक सार निम्नानुसार पढ़े जा सकते हैं :

"उक्तकथित मामलों के सर्वेक्षण से यह स्पष्ट है कि भारत में न्यायिक सहमति रही है कि धारा 90 को विशेष रूप से दोहरा कराधान परिहार समझौते की शर्तों के कार्यान्वयन के लिए अधिसूचना को जारी करने के लिए केंद्र सरकार को सक्षम और सशक्त करने के लिए बनाई गई है। जब ऐसा होता है, तो मामले, जिसके लिए वह लागू होते हैं, से संबंधित ऐसे समझौते के प्रावधान संचालित होंगे भले ही आयकर अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगति हो। हम उन निर्णयों, जो हमने नोटिस किए हैं, में कारणों को अनुमोदित करते है। यदि विधानमंडल का इरादा इसे धारा 4 के अंतर्गत वसूले जाने वाले कर के सामान्य सिद्धांतों और अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत कुल आय का अन्वेषण के सामान्य सिद्धातों से निकालना नही है तो "अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार" उन धाराओं को बनाने का कोई उद्देश्य नही था। कथित वाक्यांश के साथ कथित दो धाराओं के संशोधन का वास्तविक उद्देश्य केंद्र सरकार को इस लायक करना था ताकि डीटीए की उन शर्तों को कार्यान्वित करने के लिए धारा 90 के अंतर्गत अधिसूचना जारी कर सके जो आयकर की वसूली की जांच के मामले में आयकर अधिनियम के प्रावधानों को अपने आप रद्द कर सके और डीटीएसी............................की शर्तों के साथ असंगति की सीमा तक कुल आय का अन्वेषण कर सके। यह न्यायालय उस तरीके से संबंधित नही है जिसमें कर संधियां का समझौता या बातचीत की जाती है, ना ही किसी विशेष संधि की बुद्धिमत्ता से संबंधित है। क्या भारत-मॉरिशस डीटीएसी वर्तमान रूप में प्रतिपादित होना चाहिए था, या किसी अन्य विशेष प्रारूप में, इससे हमारा संबंध नही है। क्या धारा 90 को कानूनी पुस्तक में स्थान दिया जाना चाहिए था, इससे भी हमारा संबंध नही है। धारा 90, जो केंद्र सरकार को अधिकार देती है, के लिए हमारे समक्ष चुनौती नही दी गई और इसलिए हमें इसके साथ आगे बढ़ना चाहिए कि धारा सवैंधानिक तौर पर वैध है। चुनौती धारा से मिलने वाले अधिकार का प्रयोग करना है, हमारा मानना है कि धारा 90 केंद्र सरकार को विदेशी सरकार के साथ डीटीएसी करने का अधिकार देती है। जब आवश्यक अधिसूचना को उसके अंतर्गत जारी किया गया हो तो धारा 90 की उप-धारा (2) के प्रावधान संचालन के वक्त लागू होते हैं और निर्धारिती जो डीटीएसी के प्रावधानों द्वारा शामिल है, वह उसके बाद के लाभ के हकदार हैं भले ही डीटीएसी के प्रावधान आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के साथ सुसंगत हो (जोर दिया गया है)

4.4.1 यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि भारत ने नीदरलैंड, फ्रांस, स्विस कंफेडेरशन हेतु स्लोवेनिया, लिथुआनिया और कोलंबिया के लाभ लेने के लिए किसी अधिसूचना को जारी नही किया है।

4.5 एमएफएन वाक्यांश के अंतर्गत रियायती दरों का कोई चयनित आयात नहीं :

उक्त चर्चा के पक्षपात के बिना, आगे यह नोट किया जा सकता है कि कुछ क्षेत्राधिकारों को एमएफएन, जिस अंतर्राष्ट्रीय संधियों की व्याख्या के नियमों के साथ पठित संधि के प्रावधान अनुमति नही है, के उद्धृत करने और लागू करने में चुना गया है। स्लोवेनिया और लिथूआनिया के साथ भारत की संधियों में लाभांश के लिए कर की दर का विभाजन शामिल है। भारत-लिथुआनिया के अनुच्छेद 10(2) को यहां पुन: तैयार किया जा रहा है :

"हालांकि, ऐसे लाभांश उस संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकते है जिसकी लाभांश देने वाली कंपनी घरेलू है और उस राष्ट्र के कानून के अनुसार करारोपित हो सकते हैं लेकिन यदि लाभांश के लाभार्थी मालिक अन्य संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है तो वसूला गया कर निम्न से अधिक नहीं होगा :

(क) लाभांश की कुल राशि का 5 प्रतिशत यदि लाभार्थी मालिक एक कंपनी हो (एक सांझेदार को छोड़कर) जो लाभांश देने वाली कंपनी की पूंजी का कम से कम 10 प्रतिशत सीधे तौर पर रखती हो

(ख) अन्य सभी मामलों में लाभांश की कुल राशि का 15 प्रतिशत

उक्त उद्धरण को सीधे पढ़ने पर निष्कर्ष का पता चलता है कि लाभांश आय पर 5 प्रतिशत की लाभार्थी दर केवल तभी लागू होती है यदि लाभांश प्राप्त करने वाली कंपनी (एक सांझेदार को छोड़कर) लाभांश देने वाले कंपनी की पूंजी का कम से कम 10 प्रतिशत रखती हो। इसकी सूचना नीदरलैंड, फ्रांस और स्विस कन्फेडरशन के प्राधिकारियों को भी संप्रेषित की गई थी। भले ही नीदरलैंड, फ्रांस, स्विस कनफेडेशन ने यह बताकर अपने निर्णय/बुलेटिन/प्रकाशन में इस पर विचार किया हों कि 5 प्रतिशत की दर केवल तभी लागू होगी जब 10 प्रतिशत के स्वामित्व की शर्तें पूरी होती हो, अन्य मामलों में 15 प्रतिशत की कर संबंधी दर को न बदलने के कारण विशेष आयात के लिए कोई ठोस तर्क/आधार नहीं दिया गया है। इस मुद्दे पर भारत द्वारा व्यक्त की गई चिंता का संबोधन नहीं किया गया है।

5. उक्त को देखते हुए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि एमएफएन वाक्यांश की प्रयोज्यता और तीसरे देश के साथ भारत के डीटीएए में दी गई (जैसे लाभांश, ब्याज आय, रॉयल्टी, तकनीकी सेवा के लिए शुल्क आदि) आय की कुछ मदों के संबंध में स्रोत संबंधी कराधान अधिकार के सीमित क्षेत्र या कम दर के लाभ पहले (ओईसीडी) राष्ट्र के लिए केवल तभी उपलब्ध होंगे जब निम्नलिखित सभी शर्तें पूरी होती हों :

 (i) द्वितीय संधि (तीसरे राष्ट्र के साथ) भारत और पहले राष्ट्र के बीच संधि के प्रभावी (एमएफएन वाक्यांश की भाषा पर निर्भर करते हुए) हस्ताक्षर/प्रविष्टि के बाद की गई हो ;

 (ii) द्वितीय संधि भारत और उस राष्ट्र के बीच किया गया हो जो उसके साथ संधि के हस्ताक्षर के समय ओईसीडी का सदस्य है ;

(iii) भारत ने आय की प्रासंगिक मदों के संदर्भ में कराधान की दर या सीमा के संबंध में द्वितीय संधि के अपने कराधान अधिकार को सीमित किया है; और

(iv) पहले राष्ट्र के साथ संधि में द्वितीय सधि के लाभ लेने के लिए भारत द्वारा एक अलग अधिसूचना जारी की गई है जैसाकि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 90 की उप-धारा (1) के प्रावधानों द्वारा आवश्यक है।

यदि पैराग्राफ 5(i) से (iv) में सूचीबद्ध सभी शर्तें पूरी होती हैं तो तीसरे देश के साथ संधि में कम दर या सीमित सीमा भारतीय कर कानून के अंतर्गत नियत प्रक्रिया का अनुसरण करने के बाद डीटीएए में एमएफएन वाक्यांश के प्रावधानों के अनुसार तिथि से एमएफएन वाक्यांश वाले ओईसीडी राष्ट्र के साथ संधि में लाई जाती है।

6. उक्त पैराग्राफ में दिए गए स्पष्टीकरण के होते हुए भी जहां एक करादाता के मामले में जहां इस मुद्दे पर किसी न्यायालय द्वारा कोई निर्णय ऐसे करादाता को लाभ देता हो तो यह परिपत्र ऐसे मामले में न्यायालय के आदेश के कार्यान्वयन को प्रभावित नहीं करेगा।

(सुखद चतुर्वेदी)

अवर सचिव, भारत सरकार

निम्न को प्रति :

1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस(एफ) का पीएस

2. सचिव (राजस्व) का पीपीएस

3. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव और उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी में सभी अधिकारी

4. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय कराधान/निर्धारण/उनके क्षेत्र/प्रभार में टीडीएस के बीच परिपत्र को अनुरोध करने के साथ

5. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी

6. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय, आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए

7. जेसीआईटी (डेटाबेस प्रकोष्ठ) www.irsofficersonline.gov.in पर अपलोड करने के लिए