परिपत्र सं. 3/2020 : परिपत्र सं. 3/2020
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 3/2020
परिपत्र की तिथि
03/01/2020
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
03/01/2020
परिपत्र संख्या 3/2020 [एफ.सं. 197/55/2018-आईटीए-I], दिनांक 3-1-2020
आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् 'अधिनियम') की धारा 11 के प्रावधानों के अंतर्गत न्यास या संस्थानों के पास रखी संपत्ति से प्राप्त आय के संदर्भ में ऐसे न्यास या संस्थान छूट देने के लिए प्राथमिक शर्त यह है कि न्यास या संस्थान के अंतर्गत आने वाली संपत्ति से प्राप्त आय को पिछले वर्ष के दौरान प्रयोग की जानी चाहिए और इसे धारा में दी गई विभिन्न शर्तों के अनुसार ऐसे उद्देश्य के लिए संचित या प्रयोग किया जाना चाहिए।
2. वित्त अधिनियम 2015 द्वारा प्रभावी तिथि 1-4-2016 (निर्धारण 2016-17) से अधिनियम की धारा 11 और धारा 13 को संशोधित किया गया है। तद्नुसार, आयकर नियम 1962 (तत्पश्चात नियम) को भी (प्रथम संशोधन) नियम, 2016 के द्वारा संशोधित किया गया था। नियमों के नियम 17 के साथ पठित अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के अनुसार जहां 15 प्रतिशत आयकर को न्यास या संस्थान द्वारा अस्पष्ट रूप से संरक्षित किया जा सकता है 85 प्रतिशत आय को शर्तों के अनुसार अधिक से अधिक 5 वर्षों की अवधि के लिए ही संचित संचित किया जा सकता है, अन्य विषयों के साथ साथ, ऐसे व्यक्ति अधिनियम की धारा 139(1) के अंतर्गत नियत तिथि के अंतर्गत निर्धारण अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप से निर्धारित प्रपत्र सं. 10 को जमा करेंगे।
3. आगे जहां न्यास या संस्थान के पास रखी संपत्ति से आय का प्रयोग धर्मांर्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए होती है जो ऐसे किसी कारण से पिछले वर्ष के दौरान प्राप्त 85 प्रतिशत आय से कम होती है कि आय को उस वर्ष के दौरान या किसी अन्य कारण से प्राप्त नहीं किया गया है तो आय की विवरणी को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को या उससे पहले न्यास या संस्थान द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रपत्र सं. 9क में जमा करके विकल्प को चुनते हुए ऐसी आय को घर्मांर्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया गया है समझा जाएगा।
4. बोर्ड/क्षेत्रीय प्राधिकारियों को यह निर्दिष्ट करते हुए प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है कि प्रपत्र सं. 9क और प्रपत्र सं. 10 को निर्धारण वर्ष 2016-17, जो इन प्रपत्रों के ई-दाखिलीकरण का प्रथम वर्ष था और बाद के निर्धारण वर्षों के लिए भी, से प्रारंभ होने वाली आय की विवरणी के साथ दाखिल नहीं किया जा सका। यह अनुरोध किया गया है कि प्रपत्र सं. 9क और प्रपत्र सं. 10 को दाखिल करने में देरी को अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत नजरअंदाज किया जा सकता है।
5. तदनुसार इस संबंध में जारी पहले परिपत्रों निर्देशों के अतिक्रमण में, अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए और देरी को क्षमा करने के लिए न्यास या संस्थान द्वारा दाखिल आवेदन के तुंरत निपटान को देखते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने निर्धारण वर्ष 2016 17 और निर्धारण वर्ष 2017-18 के संदर्भ में प्रपत्र संख्या 9क और प्रपत्र संख्या 10 में लंबित आवेदनों को जमा करने के लिए आयकर आयुक्त को पहले ही प्राधिकृत कर दिया है जहां ऐसे प्रपत्र संख्या 9क और प्रपत्र सं 10 को प्रपत्र सं 7/2018 दिनांक 20.12.2018 और परिपत्र सं. 30/2019 दिनांक 17.12.2019 जिनको एफ.नं. 197/55/2018-आईटीए-I द्वारा जारी किया गया के द्वारा जारी किया गया था के द्वारा अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत दिए गए समय की समाप्ति के बाद दाखिल किया गया है।
6. उक्त के अलावा, सीबीडीटी द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि जहां निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए प्रपत्र सं. 9क और प्रपत्र सं. 10 को दाखिल करने में 365 दिनों तक की देरी हुई हो तो आयकर आयुक्त एतद् द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 139(2) के अंतर्गत देरी करने के लिए ऐसे लंबित आवेदनों को जमा करने और योग्यता के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्राधिकृत है।
7. आयकर आयुक्त, प्रपत्र सं. 9क और प्रपत्र सं. 10 में ऐसे लंबित आवेदनों पर विचार करने के दौरान, खुद को संतुष्ट करेंगे कि निर्धारित को नियत समय के अंतर्गत प्रपत्र सं. 9क और प्रपत्र सं. 10 में ऐसे आवेदन को दाखिल करने से उपयुक्त कारण द्वारा रोका गया था। आगे, प्रपत्र सं 10 के संदर्भ में आयुक्त यह भी संतुष्टि करेंगे कि संचित या समायोजित राशि को अधिनियम की धारा 11 की उप-धारा (5) में निर्दिष्ट एक या एक से अधिक तरीकों या विधियों में निवेश या जमा किया गया है।

