परिपत्र सं. 29/2016 : आय घोषणा योजना, 2016 पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 29/2016
परिपत्र की तिथि
18/08/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
18/08/2016
2016 की परिपत्र सं. 29
एफ. नं. 142/8/2016-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
***
दिनांक 18 अगस्त, 2016
आय घोषणा योजना, 2016 पर स्पष्टीकरण
आय घोषणा योजना, 2016 (तत्पश्चात् 'योजना' के तौर पर संदर्भित) 1 जून, 2016 को प्रभावी हुर्इ। हितधारकों द्वारा उठाए गए संदेहों तथा सम्बन्धों को व्यक्त करने के लिए बोर्ड ने 2016 के परिपत्र सं. 17, 24, 25 व 27 के द्वारा तीन अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न के सेट को जारी किया है। योजना से संबंधित जनता से प्राप्त आगे प्रश्नों को संबोधित करने के लिए निम्नलिखित स्पष्टीकरणों को जारी किया गया है।-
| प्रश्न सं. 1 : | कुछ मामलों में, अघोषित आय को लेनदारों अथवा अन्य देयताओं जो काल्पनिक हो सकती है, में प्रतिबिंबित किया जा सकता है। क्या ऐसे मामलों में, निर्धारिती ऐसी काल्पनिक देयता को ही प्रकट कर सकते हैं चूंकि इसे किसी निर्दिष्ट परिसंपत्ति अथवा निवेश से जोड़ना संभव नहीं हो सकता ? | ||
| उत्तर : | उस स्थिति में जहां ऋण, लेनदार, प्राप्त अंग्रिम, शेयर पूंजी, देयता आदि अंकेक्षित तुलन पत्र में प्रकट होती है लेकिन काल्पनिक प्रकार की होती है तथा ऐसी देयताओं को तुलन पत्र में एक विशेष परिसंपत्ति के अधिग्रहण से न जोड़ा जा सके तो ऐसी काल्पनिक देयताओं को योजना के अंतर्गत प्रकट किया जा सकता है जैसा इसे किसी निर्दिष्ट परिसंपत्ति में निवेश के साथ जोड़ा जाता हो। हालांकि, जहां काल्पनिक देयता तथा प्राप्त परिसंपत्ति के बीच प्रत्यक्ष संबध होता है तो घोषित की जाने वाली राशि 01.06.2016 के अनुसार प्राप्त परिसंपत्ति की उचित बाजार कीमत होगी। | ||
| प्रश्न सं. 2 : | क्या पूर्व के निर्धारण वर्ष के लिए योजना के अंतर्गत घोषित आय को उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण प्रक्रिया में लेनदेनों के स्पष्टीकरण हेतु विचार में लिया जा सकता है ? | ||
| उत्तर : | वित्त अधिनियम, 2016 की धारा 189 के अनुसार, योजना के अंतर्गत की गर्इ कोर्इ घोषणा संपूर्ण मूल्यांकनों की अंतिम स्थिति को प्रभावित नहीं करेगा। हालांकि, वर्ष जिसके लिए आय को योजना के अंतर्गत प्राप्त किया जाता है, के उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण अधिकारी के समक्ष एक मूल्यांकन कार्यवाही में, पूर्व के निर्धारण वर्ष के लिए घोषित आय को लेनदेनों की व्याख्या के लिए विचार में लिया जा सकता है बशर्ते कि घोषित आय तथा उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के लेनदेनों के बीच संबंध हो। | ||
| प्रश्न सं. 3 : | क्या योजना के अंतर्गत घोषित परिसंपत्ति की मूल्यांकन रिपोर्ट को किसी भी समय किसी पूछताछ के लिए विभाग द्वारा मंगाया जा सकता है? | ||
| उत्तर : | पंजीकृत मूल्य निर्धारक द्वारा मूल्यांकन रिपोर्ट की विभाग द्वारा पूछताछ नहीं की जाएगी। हालांकि, मूल्य निर्धारक से मूल्यांकन के स्वीकृत सिद्धांतों के अनुसार सही तथा सत्य मूल्यांकन रिपोर्ट को प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है। किसी गलतबयानी की स्थिति में, कानून के अनुसार उचित कार्यवाही को पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता के समक्ष लिया जा सकता है। | ||
| प्रश्न सं. 4 : | पद्यपि 1 जून, 2016 के अनुसार उचित बाजार कीमत आर्इडीएस के अंतर्गत करारोपित है तथा ऐसी राशि को संबंधित परिसंपत्ति की भविष्य की बिक्री के समय अधिग्रहण की लागत के तौर पर समझा जाएगा, क्या ऐसा उपचार दीर्घावधि अथवा अल्पावधि के तौर पर परिसंपत्ति के स्वरूप को प्रभावित करेगा ? | ||
| उत्तर : | मुद्दे पर पहले विचार किया गया था तथा परिपत्र सं. 17 दिनांक 20.05.2016 के द्वारा स्पष्ट किया गया था कि ऐसी स्थिति में अधिकार की अवधि 01.06.2016 से प्रारंभ होने के तौर पर समझी जाएगी चूंकि परिसंपत्ति को ऐसी तिथि पर पुर्नमूल्यांकित किया गया है। हालांकि, विभिन्न हितधारकों से प्राप्त प्रतिनिधित्व पर विचार करते हुए तथा तथ्य कि यह परिसंपत्ति, जिसे अघोषित आय से आंशिक तौर पर वित्तपोषित किया गया था जिसे अब योजना के अंतर्गत घोषित किया गया, की बिक्री के समय पूंजीगत प्राप्ति की गणना में जटिलता का कारण हो सकता है, मामले पर पुन: विचार किया गया है। तद्नुसार, उक्त संदर्भितानुसार पूर्व स्पष्टीकरण के अधिक्रमण में, यह स्पष्ट किया जाता है कि योजना के अंतर्गत घोषित परिसंपत्ति के अधिग्रहण की अवधि ऐसी अवधि के अधिग्रहण की वास्तविक तिथि पर आधारित होगी। हालांकि, योजना के अंर्तगत घोषित राशि के संबंध में सूचीकरण लाभ केवल 01.06.2016 से उपलब्ध होंगे। कथित स्थिति को निम्नानुसार दर्शाया गया है :- | ||
| मान लीजिए श्री 'ए' ने रू. 10 लाख की मदद से 01.10.2011 को एक घर खरीदा तथा योजना के अंतर्गत 01.06.2016 के अनुसार इसकी उचित बाजार कीमत को रू. 20 लाख के तौर पर घोषित किया। यदि कथित घर को 01.10.2017 को रू. 30 लाख पर बेचा जाता है तो पूंजीगत प्राप्ति की गणना के उद्देश्य के लिए घर के अधिकार की अवधि छह वर्ष होगी अर्थात् 01.07.2011 से 01.10.2017 तक। चूंकि अधिकार अवधि तीन वर्ष से अधिक है, ऐसे स्थानांतरण से उत्पन्न प्राप्ति को दीर्घावधि पूंजीगत प्राप्ति के तौर पर समझा जाएगा। आगे, इस मामले में सूचीकरण 01.06.2016 से 01.10.2017 तक रू. 20 लाख पर उपलब्ध होगा। | |||
| प्रश्न सं. 5 : | योजना के अंतर्गत घोषित की जाने वाली अचल संपत्ति की राशि क्या होगी यदि जहां अचल संपत्ति की लागत केवल पंजीकृत दस्तावेज द्वारा आंशिक रूप से प्रमाणित तथा अन्यथा आंशिक रूप से होती है ? | ||
| उत्तर : | ऐसे मामले में, स्टांप ड्यूटी राशि हेतु लागत मुद्रास्फीति सूचकांक को लागू करने के आधार पर अचल संपत्ति की उचित बाजार कीमत की गणना करने का विकल्प केवल उस संपत्ति के भाग के संबंध में ही उपलब्ध होगी जो पंजीकृत दस्तावेजों द्वारा प्रमाणित होती है। शेष भाग के संबंध में संपत्ति की उचित बाजार कीमत कथित नियम के परंतुक को प्रभावी किए बिना नियमों के नियम 3(1)(घ) के प्रावधानों के आधार पर निर्धारित होगा। कथित स्थिति को निम्नानुसार दर्शाया जा सकता है :- | ||
| मान लीजिए, श्री 'X' ने रू. 10 लाख के लिए वर्ष 2004-05 में भूमि का टुकड़ा खरीदा, हालांकि स्टाम्प ड्यूटी रू. 15 लाख थी। इसके पश्चात्, 2005-06 से 2007-08 की अवधि में, श्री 'X' ने कथित भूमि पर दो मंजिला घर का निर्माण किया। कथित संपत्ति के संबंध में घोषित की जाने वाली राशि (क + ख) होगी जहां | |||
| क = भूमि की राशि (यदि निर्धारिती सूचीकरण के आधार पर मूल्यांकन का चुनाव करता है) होगी | |||
| रू. 15 लाख x | 2016-17 का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक | ||
| 2004-05 का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक | |||
| ख = पंजीकृत लागत अथवा निर्माण की लागत जो भी अधिक हो, द्वारा निर्धारितानुसार 01.06.2016 के अनुसार घर की उचित बाजार कीमत (भूमि की लागत को छोड़कर) | |||
| प्रश्न सं. 6 : | एक घोषणाकर्ता ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अधिसूचना सं. 74 दिनांक 17.08.2016 के द्वारा आय घोषणा योजना (तीसरा संशोधन) नियम के द्वारा उसके संशोधन से पहले आय घोषणा योजना, 2016 के आधार पर अचल संपत्ति की राशि को निर्धारित करने वाली योजना के अंतर्गत एक घोषणा को पहले ही दाखिल किया है। ऐसी स्थिति में एक मामला क्या घोषणाकर्ता ऐसे संशोधित नियमों पर आधारित घोषणा को संशोधित कर सकता है ? | ||
| उत्तर : | हां, घोषणाकर्ता आय घोषणा योजना नियम, 2016 के संशोधित प्रावधानों के कारण पहले से दाखिल घोषणा में घोषित अचल संपत्ति की उचित बाजार कीमत को संशोधित कर सकता है उस मामले में भी जहां ऐसा संशोधन अचल संपत्ति के संबंध में घोषित राशि के निम्न संशोधन का परिणाम हो सकता है। | ||
| प्रश्न सं. 7 : | क्या योजना के अंतर्गत देययोग्य राशि का भुगतान बैंक को नकद में किया जा सकता है ? आगे, क्या योजना के अंतर्गत घोषित राशि को नकद में बैंक खाते में जमा किया जा सकता है ? | ||
| उत्तर : | भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) से नगद में योजना के अंतर्गत कर के भुगतान की स्वीकृति के लिए बैंकों को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है। आरबीआर्इ से इसके मौजूदा मुख्य परिपत्र सं. डीबीओडी सं. लैग. बीसी21/09.07.006/2014-15 दिनांक 01.07.2014 के अनुसार काउंटर पर नकद को जमा कराने की स्वीकृति हेतु बैंकों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। | ||
| प्रश्न सं. 8 : | क्या योजना के अंतर्गत की गर्इ घोषणा के परिणामस्वरूप बैंक में किए गए नकद जमा की सूचना को एफआर्इयू द्वारा मालूम किया जाएगा अथवा आयकर विभाग को सूचित किया जाएगा ? | ||
| उत्तर : | यह स्पष्ट किया जाता है कि योजना के अंतर्गत घोषणा के परिणामस्वरूप जमा किए गए नगद के आधार पर ही एफआर्इयू अथवा आयकर विभाग द्वारा घोषणाकर्ता के समक्ष कोर्इ प्रतिकूल कार्यवाही नहीं की जाएगी। | ||
| प्रश्न सं. 9 : | यदि आयकर अधिनियम की धारा 12क के अंतर्गत पंजीकृत न्यास अथवा संस्थान योजना के अंतर्गत घोषणा को दाखिल करता है तो क्या धारा 12क के अंतर्गत पंजीकरण को ऐसी घोषणा के आधार पर निरस्त किया जाएगा ? | ||
| उत्तर : | नहीं, आयकर अधिनियम की धारा 12क के अंतर्गत पंजीकरण को योजना के अंतर्गत दाखिल की गर्इ घोषणा में सूचना के आधार पर ही निरस्त नहीं किया जाएगा। | ||
| प्रश्न सं. 10 : | जहां एक व्यक्ति ने भारित कटौती का दावा किया हो कहा जाए 175% जाली दान करने के कारण घोषणा योजना के अंतर्गत कटौती की राशि क्या होगी ? | ||
| उत्तर : | घोषणाकर्ता को जाली रूप से किए गए दान के संबंध में दावा किए गए भारित कटौती की राशि की घोषणा करनी है अर्थात् इस मामले में जाली रूप से किए गए दान का 175 प्रतिशत | ||
| प्रश्न सं. 11 : | यदि जहां एक निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी को दाखिल न किया गया हो लेकिन इसे दाखिल करने की समय सीमा आयकर अधिनियम की धारा 139 के अंतर्गत समाप्त न हुर्इ हो क्या योजना के अंतर्गत घोषणा को ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए दाखिल किया जा सकता है ? | ||
| उत्तर : | निर्धारण वर्ष जिसके लिए आय की विवरणी को दाखिल नहीं किया गया है, के लिए घोषणा योजना के अंतर्गत की जा सकती है भले ही आयकर अधिनियम की धारा 139 के अंतर्गत विवरणी को दाखिल करने के लिए समय सीमा समाप्त न हुर्इ हो। | ||
| प्रश्न सं. 12 : | 2016 के परिपत्र सं. 17 दिनांक 20.05.2016 के प्रश्न सं. 6 के उत्तर (ख) में, यह निर्दिष्ट किया गया है कि "व्यक्ति एक अघोषित आय के संबंध में योजना के अंतर्गत घोषणा करने से वर्जित होता है, जिसमें सर्वेक्षण किया गया था"। कृपया स्पष्ट करें ? | ||
| उत्तर : | उत्तर 6 के वाक्यांश (ख) को "सर्वेक्षण संचालन की स्थिति में, व्यक्ति पिछले वर्ष जिसमें सर्वेक्षण किया गया था, के संबंध में योजना के अंतर्गत घोषणा करने से बाधित है। व्यक्ति, हालांकि, किसी अन्य पिछले वर्ष की अघोषित आय के संबंध में घोषणा करने के लिए पात्र है", के तौर पर पढ़ा जा सकता है। | ||
(अभिषेक गौतम)
अवर सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति :
1. पीएस से एफएम/ओएसडी से एफएम/ओएसडी से एमओएस(आर)
2. पीएस से सचिव (राजस्व)
3. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में समस्त अधिकारी
4. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक - अपने क्षेत्रों/प्रभारों में समस्त अधिकारियों के बीच बांटने के अनुरोध के साथ
5. प्रधान आयकर महानिदेशक(पद्धति)/प्रधान आयकर महानिदेशक (सर्तकता)/प्रधान आयकर महानिदेशक(प्रशा.)/प्रधान महानिदेशक (राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी)/प्रधान आयकर महानिदेशक(एलएंडआर)
6. आयकर आयुक्त(एमएंडटीपी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
7. विभागीय वेबसाइट पर प्रकाशित करने के लिए वैब मैनेजर

