परिपत्र सं. 21/2019 : निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए आर्इटीआर प्रपत्रों को भरने के संबंध में स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 21/2019
परिपत्र की तिथि
27/08/2019
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
27/08/2019
2019 की परिपत्र सं. 21
एफ.नं. 370142/1/2019-टीपीएल (पीटी.-1)
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
***
दिनांक : 27 अगस्त, 2019
निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए आर्इटीआर प्रपत्रों को भरने के संबंध में स्पष्टीकरण
निर्धारण वर्ष (ए.वार्इ.) 2019-20 के लिए आयकर विवरणी (आर्इटीआर) प्रपत्रों को जी.एस.आर. 279(र्इ) दिनांक 01 अप्रैल, 2019 वाली अधिसूचना के माध्यम से अधिसूचित किया गया था। तद्नुसार आर्इटीआर प्रपत्रों को दाखिल करने के निर्देश को जारी किया गया था और समस्त आर्इटीआर प्रपत्रों के र्इ-दाखिलीकरण के लिए सॉफ्टवेयर यूटिलिटी को भी जारी किया गया था। आर्इटीआर प्रपत्रों की अधिसूचना के बाद आर्इटीआर प्रपत्रों को भरने के संबंध में हितधारकों द्वारा कर्इ सवाल उठाए गए थे। बोर्ड द्वारा उन सवालों की जांच की गर्इ और 2019 के परिपत्र सं. 18 दिनांक 08.08.2019 के द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब के लिए स्पष्टीकरण जारी किया गया था।
2. तत्पश्चात , आर्इटीआर प्रपत्रों को दाखिल करने से संबंधित कुछ मुद्दों पर अग्रिम प्रतिनिधित्व प्राप्त किया गया है। तद्नुसार, 2019 की परिपत्र सं. 18 के आंशिक संशोधन में निम्नलिखित स्पष्टीकरण को जारी किया गया।
3. आर्इटीआर प्रपत्र-2 और आर्इटीआर प्रपत्र-3 में, भाग क सामान्य में, कॉलम (ज) में, करदाता को यह निर्दिष्ट करना आवश्यक है यदि वह पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय एक कंपनी में निदेशक था। सकारात्मक उत्तर की स्थिति में, करदाता को आगे उस प्रत्येक कंपनी के संबंध में निम्नलिखित सूचना देना आवश्यक है जिसका वह निदेशक था -
(क) कंपनी का नाम
(ख) पैन
(ग) यदि उसके शेयर सूचीबद्ध या असूचीबद्ध हो
(घ) निदेशक पहचान संख्या (डीआर्इएन)
3.2 प्रतिनिधित्व यह निर्दिष्ट करते हुए प्राप्त हुआ कि अनिवासियों को केवल भारत में प्राप्त आय या भारत में अर्जित या उपार्जित आय के संबंध में ही कर का भुगतान करना आवश्यक है। अनिवासियों को भारत के बाहर अपनी परिसंपत्तियों का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए, अनिवासियों को विदेशी कंपनियों में निदेशक पद का ब्यौरा देने की आवश्यकता नहीं है। आर्इटीआर प्रपत्रों में प्रकटीकरण की आवश्यकता केवल उन परिसंपत्तियों और आयों तक ही सीमित होनी चाहिए जिसका भारत के साथ संबंध है।
3.3 इस संबंध में यह निर्दिष्ट किया जाता है कि एक कंपनी में निदेशक पद के संबंध में आर्इटीआर प्रपत्रों में प्रकटीकरण की अनिवार्यता केवल सूचना के उद्देश्य से है। सामान्य तौर पर इस कॉलम में डाला गया ब्यौरा निर्धारिती की कर देयता या कुल आय की गणना के लिए प्रासंगिक नहीं है। जैसे कि एक अनिवासी करदाता द्वारा एक विदेशी कंपनी में निदेशक पद के प्रकट करने की अनिवार्यता ऐसे करदाता द्वारा संघटित विदेशी परिसंपत्ति या किसी विदेशी स्रोत की आय के स्पष्टीकरण के बराबर नहीं है।
3.4 हालांकि, अनिवासी करदाताओं के दिमाग से शंकाओं को दूर करने के लिए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि एक अनिवासी को उस विदेशी कंपनी में अपने निदेशक पद का ब्यौरा देना आवश्यक नहीं है जिसकी वह भारत में कोर्इ आय प्राप्त नहीं करता या भारत में अर्जित या उपार्जित नहीं करता। अन्य शब्दों में, एक अनिवासी करदाता, जो एक केवल विदेशी कंपनी में निदेशक है, जो भारत में कोर्इ आय प्राप्त नहीं करता या अर्जित या उपार्जित नहीं करता, का इस संबंध में उसका उत्तर नहीं में होना चाहिए, जिस पर उसे ऐसी विदेशी कंपनी का ब्यौरा देना आवश्यक नहीं है। आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि एक अनिवासी करदाता, जो एक घरेलू कंपनी और साथ ही विदेशी कंपनी में भी निदेशक है, जो भारत में कोर्इ आय प्राप्त नहीं करता या अर्जित या उपार्जित नहीं करता, उसके प्रासंगिक प्रश्न का उत्तर सकारात्मक होना चाहिए और केवल घरेलू कंपनी में निदेशक का विवरण देना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि घरेलू करदाता को प्रासंगिक कॉलम में विदेशी कंपनी सहित किसी कंपनी में उसके निदेशक पद का विवरण देना आवश्यक होगा।
4. आगे, सत्यापन से पहले भाग-ख टीटीआर्इ में आर्इटीआर प्रपत्र-2, आर्इटीआर प्रपत्र-3, आर्इटीआर प्रपत्र-5, आर्इटीआर प्रपत्र-6 और आर्इटीआर प्रपत्र-7 में एक करदाता, जो भारत में निवासी है, को निर्दिष्ट करना आवश्यक है कि उसके पास पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय
(क) लाभार्थी मालिक, लाभार्थी या अन्यथा के तौर पर भारत से बाहर स्थित किसी परिसंपत्ति (किसी उद्यम में वित्तीय हित सहित) को नियंत्रण था; या
(ख) भारत के बाहर स्थित किसी खाते में हस्ताक्षरी प्राधिकारी था; या
(ग) भारत के बाहर किसी स्रोत से कोर्इ आय थी ?
उत्तर के सकारात्मक होने की स्थिति में, करदाता को अनुसूची चक को भरना आवश्यक है। अनुसूची चक में, करदाता को प्रासंगिक लेखांकन अवधि के दौरान किसी भी समय नियंत्रण में रखी गर्इ विदेशी परिसंपत्ति आदि का ब्यौरा देने की आवश्यकता है।
4.1 उन मामलों के उदारहण को उद्धृत करते हुए प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए हैं जहां विदेशी परिसंपत्तियां "प्रासंगिक लेखांकन अवधि" (विदेशी क्षेत्राधिकार में) की समाप्ति के बाद लेकिन "पिछले वर्ष" (भारत में) की समाप्ति से पहले प्राप्त की गर्इ हो। ऐसे मामलों में, करदाता को सकारात्मक रूप में भाग-ख-टीटीआर्इ में प्रश्नों का उत्तर देना होगा और तद्नुसार, अनुसूची चक में विदेशी परिसंपत्ति आदि का ब्यौरा देना आवश्यक है। चूंकि परिसंपत्तियों को प्रासंगिक लेखांकन अवधि की समाप्ति के बाद प्राप्त किया गया था अनुसूची चक में किसी राशि की सूचना देना आवश्यक नहीं होगा। हालांकि, यदि करदाता अनुसूची चक की सभी तालिकाओं में शून्य राशि की सूचना देता है तो आर्इटीआर प्रपत्र मान्यकृत नहीं होता है।
4.2 इस संबंध में, एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि एक करदाता को केवल तभी हां में प्रासंगिक प्रश्न का उत्तर देना आवश्यक होगा जब उसके पास "पिछले वर्ष" (भारत में) के दौरान किसी भी समय साथ ही "प्रासंगिक लेखांकन अवधि" के दौरान किसी भी समय (विदेशी कर क्षेत्राधिकार में) विदेशी परिसंपत्ति आदि का अधिकार हो, और तद्नुसार अनुसूची चक को भरना होगा।
(सलील मिश्रा)
निदेशक (टीपीएल-IV)
निम्न को प्रति :—
1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (आर) का ओएसडी
2. सचिव (राजस्व) हेतु पीएस
3. अध्यक्ष, सदस्य और अवर सचिव व उससे ऊपर के पद के सीबीडीटी में सभी अन्य अधिकारी
4. समस्त प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक अपने क्षेत्रों/प्रभारों में सभी अधिकारियों के बीच वितरित करने के अनुरोध के साथ
5. प्रधान डीजीआर्इटी(पद्धति)/प्रधान डीजीआर्इटी(सर्तकता)/प्रधान डीजीआर्इटी (प्रशा)/प्रधान डीजी(एनएडीटी)/प्रधान डीजीआर्इटी(एलएंडआर)
6. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी
7. विभागीय वेबसाइट पर चस्पा करने के लिए वेब मैनेजर

