परिपत्र सं. 20/2021 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194-ण की उप-धारा (4), धारा 194थ की उप-धारा (3) और धारा 206ग की उप-धारा (1-झ) के अंतर्गत दिशानिर्देश
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 20/2021
परिपत्र की तिथि
25/11/2021
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
25/11/2021
2021 की परिपत्र सं. 20
एफ.नं. 370142/56/2021-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
(टीपीएल प्रभाग)
***
दिनांक 25 नवंबर, 2021
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194-ण की उप-धारा (4), धारा 194थ की उप-धारा (3) और धारा 206ग की उप-धारा (1-झ) के अंतर्गत दिशानिर्देश - संबंधित -
वित्त अधिनियम, 2020 के माध्यम से आयकर अधिनियम 1961 (तत्पश्चात् "अधिनियम" के तौर पर संदर्भित) में एक नई धारा 194-ण को शामिल किया गया है जो प्रभावी तिथि 1 अक्टूबर, 2020 से एक ई-कॉमर्स संचालक को अपने डिजिटल या इलैक्ट्रानिक सुविधा या प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पाद की बिक्री या सेवा के प्रावधान या दोनों के लिए कुल कीमत के एक प्रतिशत की दर से आयकर कटौती करने को अनिवार्य करता है। हालांकि, निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने पर कुछ व्यक्तियों या हिन्दू अविभाजित परिवारों को उक्त कटौती से छूट दी गई है। यह कटौती ई-कॉमर्स भागीदार के खाते में ऐसी बिक्री या सेवा या दोनों की राशि को जमा करते समय या ऐसे ई-कॉमर्स भागीदार को उसके भुगतान के समय, जो भी पहले हो, की जानी आवश्यक है।
2. वित्त अधिनियम, 2020 के अधिनियम की धारा 206ग में उप-धारा (1ज) को भी शामिल किया गया है जो अनिवार्य करती है कि प्रभावी तिथि 1 अक्टूबर, 2020 से किसी पिछले वर्ष में पचास लाख रूपए से अधिक की ऐसी कुल कीमत या राशि के किसी उत्पाद की बिक्री हेतु प्रतिफल की राशि को प्राप्त करने वाला एक विक्रेता आयकर के तौर पर पचास लाख रूपए से अधिक की बिक्री प्रतिफल के 0.1 प्रतिशत के बराबर राशि क्रेता से एकत्रित करेगा। एकत्रीकरण बिक्री प्रतिफल की राशि की प्राप्ति के समय किया जाना आवश्यक है। विक्रेता को उस व्यक्ति के तौर पर परिभाषित किया गया है जिसकी कुल बिक्री या कुल प्राप्तियां या कारोबार उस वित्त वर्ष के तुरंत पहले के वित्त वर्ष के दौरान दस करोड़ रूपए से अधिक है जिसमें उत्पाद की बिक्री की गई है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना को निर्दिष्ट करने के लिए उस व्यक्ति को प्राधिकृत किया है जिसको कुछ शर्तों, जैसी यहां निर्दिष्ट है, को पूरा करने के अनुसार इस धारा के लिए विक्रेता के तौर पर विचार न किया गया हो।
3. वित्त अधिनियम, 2021 के अधिनियम में एक नई धारा 194थ को शामिल किया गया है जो 1 जुलाई, 2021 से प्रभावी हुई। यह उस किसी क्रेता पर लागू होता है जो किसी पिछले वर्ष में पचास लाख रूपए से अधिक की कुल कीमत या किसी उत्पाद की खरीद के लिए किसी घरेलू विक्रेता को किसी राशि के भुगतान के लिए उत्तरदायी है। विक्रेता को, क्रेता के खाते में ऐसी राशि या भुगतान के समय, जो भी पहले हो, के समय आयकर के तौर पर पचास लाख रूपए से अधिक की ऐसी राशि के 0.1 प्रतिशत के बराबर राशि की कटौती करना आवश्यक है। खरीददार को उस व्यक्ति के तौर पर परिभाषित किया जाना है जिसकी कुल प्राप्तियां या कारोबार उसके द्वारा किए गए व्यापार से उस वित्त वर्ष के तुरंत पहले के वित्त वर्ष के दौरान दस करोड़ रूपए से अधिक है जिसमें उत्पाद की बिक्री की गई है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना को निर्दिष्ट करने के लिए उस व्यक्ति को प्राधिकृत किया है जिसको कुछ शर्तों, जैसी यहां निर्दिष्ट है, को पूरा करने के अनुसार इस धारा के लिए क्रेता के तौर पर विचार न किया गया हो।
4. अधिनियम की धारा 194-ण की उप-धारा (4), धारा 194थ की उप-धारा (3) और धारा 206ग की उप-धारा (1-झ) बोर्ड को (केंद्र सरकार की अनुमति से) समस्याओं को दूर करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार देती है।
4.1 इस संदर्भ में, 2020 की परिपत्र सं. 17, दिनांक 29.09.2020 के द्वारा, समस्याओं को दूर करने और कुछ लेनदेनों हेतु स्पष्टता प्रदान करने के लिए कुछ मामलों में अधिनियम की धारा 194-ण और धारा 206ग(1ज) के प्रावधानों के संबंध में बोर्ड द्वारा (केंद्र सरकार की अनुमति से) दिशानिर्देश जारी किए गए थे।
4.2 आगे, 2021 की परिपत्र सं. 13, दिनांक 30.06.2021 के द्वारा, अधिनियम की धारा 194थ के प्रावधानों के संबंध में बोर्ड द्वारा दिशानिर्देश जारी किए गए जिसके माध्यम से कुछ मामलों में धारा 194थ के प्रावधानों को लागू करने से पैदा हुई समस्याओं को दूर किया गया। आगे, अधिनियम की धारा 194-ण, 194थ और 206ग (1ज) के प्रावधानों को दुबारा लागू करने के संदर्भ में दिशानिर्देशों को भी कथित परिपत्र के माध्यम से जारी किए गए थे।
4.3 उक्त को जारी रखते हुए, समस्याओं को आगे दूर करने के लिए, बोर्ड ने केंद्र सरकार की अनुमति से एतद्द्वारा अधिनियम की धारा 194-ण की उप-धारा (4), धारा 194थ की उप-धारा (3) और धारा 206 की उप-धारा(1-झ) के अंतर्गत निम्नलिखित दिशानिर्देशों को जारी करते हैं।
5. दिशानिर्देश
5.1 इलैक्ट्रानिक पोर्टल के माध्यम से की गई ई-नीलामी सेवाएं :
5.1.1 ऐसे विभिन्न हितधारकों की ओर से प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ जो उनके द्वारा नियंत्रित, संचालित या अनुरक्षित इलैक्ट्रानिक पोर्टल (तत्पश्चात् 'ई-नीलामी' के तौर पर संदर्भित) के माध्यम से ई-नीलामी का व्यापार करते हैं। यह निर्दिष्ट किया गया है कि एक ई-नीलामी में, अपने पोर्टल के माध्यम से ई-नीलामी करने में शामिल ई-नीलामीकर्ता केवल उत्पादों या सेवाओं की बिक्री/खरीद हेतु मूल्य को खोजने के लिए ही उत्तरदायी है और नीलामी रिपोर्ट का परिणाम ग्राहक को जमा किया जाता है। ग्राहक क्रेता या विक्रेता हो सकता है। नीलामी में भागीदार विक्रेता (यदि ग्राहक क्रेता है) या क्रेता (यदि ग्राहक विक्रेता है) है। बिक्री/खरीद का लेनदेन विक्रेता और क्रेता के बीच सीधे तौर पर किया जा रहा है जोकि ई-नीलामीकर्ता के इलैक्ट्रानिक पोर्टल के माध्यम से नहीं किया गया। आगे, ऐसे खोजे गए मूल्य को ई-नीलामीकर्ता की जानकारी के बिना पक्षों के बीच आगे समझौता किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में, यह प्रदर्शित किया गया है कि अधिनियम की धारा 194-ण के प्रावधान लागू नहीं होते चूंकि बिक्री/खरीद के लेनदेन अपने आप इलैक्ट्रानिक पोर्टल के माध्यम से नहीं होते।
5.1.2 दिए गए प्रतिनिधित्व से, निम्नलिखित तथ्यों को अधिसूचित किया गया है :
(क) ई-नीलामीकर्ता अपने इलैक्ट्रानिक पोर्टल में अपने ग्राहकों के लिए ई-सेवाएं देगा और केवल उस मूल्य का पता लगाने के लिए जिम्मेदार है जिसे ग्राहक को सूचित किया जाना है।
(ख) ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे पता लगाए गए मूल्य जरूरी नहीं कि वही मूल्य हो जिस पर लेनदेन हुआ और यह ग्राहक के विवेक पर निर्भर करता है कि वह मूल्य को स्वीकार करे या काउंटर पार्टी के साथ सीधे लेनदेन करे।
(ग) ई-नीलामीकर्ता द्वारा बनाए रखे गए इलैक्ट्रानिक पोर्टल के बाहर विक्रेता और क्रेता पक्ष के बीच प्रत्यक्ष तौर पर की गई खरीद/बिक्री संबंधी लेनदेन और खोजा गया मूल्य खरीद/बिक्री के निष्कर्ष और बातचीत के प्रारंभिक बिंदु के तौर पर कार्य करे।
(घ) ई-नीलामीकर्ता उन उत्पादों की खरीद और बिक्री करने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं जिसके लिए ई-नीलामी इसके इलैक्ट्रानिक पोर्टल पर की गई थी केवल मूल्य को खोजने के अलावा।
(ड़) लेनदेनों के लिए भुगतान इलैक्ट्रानिक पोर्टल के बाहर विक्रेता और क्रेता के बीच प्रत्यक्ष तौर पर किए जाते हैं और ई-नीलामीकर्ता के पास उस भुगतान की मात्रा और अनुसूची के बारे में कोई सूचना नहीं हैं जिसे ग्राहक और प्रतिपक्ष द्वारा आपसी तौर पर अधिनिर्णित किया जाता है।
(च) ई-नीलामी सेवाएं देने के लिए ई-नीलामीकर्ताओं को भुगतान करने के लिए, ग्राहक अधिनियम की धारा 194-ण को छोड़कर अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कर कटौती करता है।
5.1.3 समस्याओं को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम की धारा 194-ण के प्रावधान ई-नीलामीकर्ताओं द्वारा की गई ई-नीलामी संबंधी गतिविधियों के संबंध में लागू नही होंगे यदि पैरा 5.1.2 के (क) से (च) में सूचित सभी तथ्य पूरे होते हैं। यह स्पष्टीकरण वहां लागू नही होंगे यदि इनमें से किसी भी तथ्य का पालन न किया गया हो। आगे, यह स्पष्ट किया जाता है कि खरीददार और विक्रेता अधिनियम की धारा 194थ और 206ग(1ज) के प्रावधानों, जो भी हो, के अनुसार कर कटौती/एकत्रीकरण के लिए जिम्मेदार रहेगा।
5.2 जीएसटी को छोड़कर कर और विभिन्न राज्य संबंधी वसूलियों का समायोजन
5.2.1 2021 की परिपत्र सं. 13 के पैरा 4.3.2 में, यह बताया गया है कि यदि जीएसटी के घटक रसीद में अलग से इंगित हो और कर विक्रेता के खाते में राशि को क्रेडिट करते समय काटी जाती हो तो कर ऐसे जीएसटी को शामिल किए बिना राशि पर अधिनियम की धारा 194थ के अंतर्गत काटा जाना है। आगे यह बताया जाता है कि यदि कर भुगतान के आधार पर काटा जाता हो जैसाकि भुगतान क्रेडिट से पहले है तो कर पूर्ण राशि पर काटा जाना है चूंकि यह पहचान कर पाना मुश्किल है कि राशि के जीएसटी घटक के साथ भुगतान को भविष्य में इनवाइस किया जाना है। आगे, क्रय विवरणी के मामले में काटे गए कर का समायोजन भी दिया गया है।
5.2.2 यह प्रदर्शित किया गया है कि उत्पादों के मामले में जो जीएसटी की सीमा में नहीं आते, जैसे पैट्रोलियम उत्पाद, विभिन्न करारोपण जैसे वैट, उत्पाद शुल्क, बिक्री कर आदि उनको वसूला जाता है। जबकि जीएसटी घटक का उपचार 2021 की परिपत्र सं. 13 में स्पष्ट किया गया है, यह उन गैर-जीएसटी करारोपण पर स्पष्ट नहीं है जिनको अन्यथा सम्मिलित किया गया होता और जीएसटी द्वारा प्रतिस्थापित किया गया होता।
5.2.3 इस संदर्भ में, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि उन उत्पादों की खरीद के मामले में जो जीएसटी की सीमा के अंतर्गत नहीं आते जब कर विक्रेता के खाते में राशि को जमा करते समय काटा जाता हो और क्रेता और विक्रेता के बीच समझौते और अनुबंध की शर्तों के संबंध में वैट/बिक्री कर/उत्पाद शुल्क/सीएसटी, जो भी मामला हो, के घटक को रसीद में अलग से इंगित किया गया है तो कर ऐसे वैट/उत्पाद शुल्क/बिक्री कर/सीएसटी, जो भी मामला हो, को शामिल किए बिना जमा की गई राशि पर अधिनियम की धारा 194थ के अंतर्गत काटा जाना है। हालांकि, यदि कर कटौती भुगतान के आधार पर की जाती है, यदि यह क्रेडिट से पहले होता है तो पूर्ण राशि पर कर कटौती की जानी है चूंकि भविष्य में इनवायस किए जाने वाले वैट/बिक्री कर/उत्पाद शुल्क/सीएसटी घटक के साथ भुगतान की पहचान कर पाना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, खरीद विवरणी के मामले में, स्पष्टीकरण जैसा 2021 की परिपत्र सं. 13 के पैरा 4.3.3 में दिया गया है, भी वैट/बिक्री कर/उत्पाद शुल्क/सीएसटी आदि हेतु उत्तरदायी गैर-जीएसटी से संबंधित क्रय विवरणी हेतु भी लागू होंगे।
5.3 अधिनियम की धारा 194थ की प्रयोज्यता यदि जहां छूट अधिनियम की धारा 206ग(1क) के अंतर्गत दी गई हो
5.3.1 अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1क) मुहैया कराती है कि कथित धारा की उप-धारा (1) में कुछ भी शामिल होते हुए भी, उस खरीददार के मामले में कोई कर एकत्रित नहीं किया जाना है जो भारत का निवासी है यदि ऐसे खरीददार कर एकत्रित करने वाले उत्तरदायी व्यक्ति को इसे प्रभावी करने के लिए एक घोषणा करता हो कि उत्पाद (जैसा उप-धारा (1) में संदर्भित है) को उत्पाद या वस्तु के विनिर्माण, प्रसंस्करण या उत्पादन या विद्युत के उत्पादन के लिए प्रयुक्त किया जाना है और नाकि व्यापारिक उद्देश्यों के लिए।
5.3.2 अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के प्रावधानों के अनुसार, कर उन उत्पादों को छोड़कर उत्पादों की बिक्री के संदर्भ में एकत्रित किया जाना है जिनको उप-धारा (1) या उप-धारा (1च) या उप-धारा (1छ) के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है। यह प्रदर्शित किया गया है कि यदि उत्पाद जो कथित धारा की उप-धारा (1) के प्रावधानों के अंतर्गत शामिल है लेकिन उप-धारा (1क) के अंतर्गत छूट प्राप्त है तो कर धारा 206ग की उप-धारा (1) या उप-धारा (1ज) के अंतर्गत एकत्र करने योग्य नहीं है चूंकि उप-धारा (1ज) के प्रावधान स्पष्ट तौर पर उन उत्पादों को बाहर करती है जो धारा 206ग की उप-धारा (1) के अंतर्गत शामिल है। यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है कि अधिनियम की धारा 194थ के प्रावधान ऐसे मामलों में लागू होंगे।
5.3.3 मामले की जांच की गई है। यह देखा गया है कि अधिनियम की धारा 194थ के प्रावधान उन लेनदेनों के संबंध में लागू नहीं होते जहां कर धारा 206ग (उसकी उप-धारा (1ज) को छोड़कर) के अंतर्गत एकत्रित किए जाने के योग्य है। चूंकि अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1क) के आधार पर, कर कथित धारा की उप-धारा (1) के अंतर्गत आने वाले उत्पादों हेतु एकत्रित किया जाना आवश्यक नहीं है, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसे मामलों में, अधिनियम की धारा 194थ के प्रावधान लागू होंगे और खरीददार कथित धारा के अंतर्गत कर कटौती के लिए उत्तरदायी होगे यदि उसमें निर्दिष्ट शर्तों को पूरा किया जाता है।
5.4 एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या कार्पोरेशन को छोड़कर सरकारी विभाग के मामले में धारा 194थ के प्रावधानों को लागू करना
5.4.1 सरकारी विभाग (दोनों केंद्र सरकार और राज्य सरकार) की ओर से प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ कि जांच की जाए यदि विभाग को अधिनियम की धारा 194थ के प्रावधानों के अंतर्गत कर कटौती करनी है।
5.4.2 धारा 194थ के प्रावधानों के अनुसार, कर एक व्यक्ति, खरीददार के तौर पर, द्वारा काटा जाना है जिसकी उस व्यक्ति द्वारा किए गए व्यापार से कुल बिक्री, कुल प्राप्ति या कारोबार वित्त वर्ष जिसमें उत्पाद ऐसे व्यक्ति की ओर से खरीदा जाता है, से तुरंत बाद के वित्त वर्ष के दौरान दस करोड़ से अधिक है। इसलिए, अधिनियम की धारा 194थ के लिए एक खरीददार के तौर पर विचारनीय व्यक्ति के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाना आवश्यक है :
(क) ऐसे व्यक्ति व्यापार/वाणिज्यिक गतिविधि करेगा
(ख) ऐसे व्यापार/वाणिज्यिक गतिविधि से कुल बिक्री, कुल प्राप्तियां या करोबार वित्त वर्ष जिसमें उत्पाद ऐसे व्यक्ति की ओर से खरीदा जाता है, से तुरंत बाद के वित्त वर्ष के दौरान रू. 10 करोड़ से अधिक है।
किसी सरकारी विभाग के मामले में जो कोई व्यापारिक या वाणिज्यिक गतिविधि नहीं करता हो तो एक खरीददार के तौर पर प्रतिफल के रूप में प्राथमिक अनिवार्यता पूरी नहीं होगी। तद्नुसार, ऐसे संगठन अधिनियम की धारा 194थ के लिए 'खरीददार' के तौर पर विचारनीय नहीं होंगे और उनके द्वारा खरीदे गए ऐसे उत्पादों पर कर कटौती के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। हालांकि, यदि कथित विभाग एक व्यापारिक/वाणिज्यिक गतिविधि करता हो तो अधिनियम की धारा 194थ के प्रावधान अन्य शर्तों को पूरा करने के अनुसार लागू होगी।
5.4.3 उस मामले में मुद्दे को उठाया गया है जहां कोई सरकारी विभाग अधिनियम की धारा 194थ के अंतर्गत कर कटौती के लिए 'विक्रेता' के तौर पर विचारनीय होगा। इस संदर्भ में, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि धारा 194थ के लिए, केंद्र सरकार या राज्य सरकार को 'विक्रेता' के तौर पर नही समझा जाएगा और खरीददार द्वारा कोई कर नहीं काटा जाना है यदि जहां केंद्र या राज्य सरकार का कोई विभाग उत्पादों का विक्रेता हो।
5.4.4 उक्त के संबंध में, आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि अन्य कोई व्यक्ति जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या कार्पोरेशन जिनको केंद्र या राज्य अधिनियम या किसी ऐसी अन्य निकाय, प्राधिकारी या ईकाई के अंतर्गत गठित किया गया हो, उसे धारा 194थ के प्रावधानों का अनुपालन करना आवश्यक होगा और कर कटौती तद्नुसार होगी।
अंकित जैन
अवर सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति :
1- एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/एमओएस (एफ) का ओएसडी
2- सचिव (राजस्व) का पीएस
3- अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी
4- समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त
5- सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/सीबीडीटी के अवर सचिव
6- भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
7- जेएस व कानूनी सलाहकार, कानून व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली
8- आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता
9- आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय
10- जेसीआईटी (डाटाबेस प्रकोष्ठ) www.irsofficersonline/gov.in पर अपलोडिंग के लिए

