परिपत्र सं. 20/2019 : सीबीडीटी डीआर्इएन की संकल्पना द्वारा कर व्यवस्था में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की ओर कदम बढ़ाते हुए
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 20/2019
परिपत्र की तिथि
19/08/2019
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
19/08/2019
परिपत्र सं. 20/2019
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नर्इ दिल्ली, दिनांक 19 अगस्त, 2019
विषय : तेल अन्वेषण और उत्पादन (र्इएंडपी) कंपनियों द्वारा किए गए खरीद संबंधी व्यय के उपचार से संबंधित स्पष्टीकरण -संबंधित
तेल व गैस ब्लॉक के जीवन चक्र पर, र्इएंडपी कंपनियां सामान्य तौर पर 'उत्पादन साझाकरण समझौते' में अपने भागीदारी हितो (पीआर्इ) को खरीदती ('फार्म इन') और बेचती (फार्म आउट) है। खरीदी संबंधी व्यय तब किए जाते हैं जब इस प्रकार के व्यापार करने वाला कोर्इ उद्यम तेल/गैस ब्लॉक में अन्य उद्यम से पीर्इ को प्राप्त करता है और केंद्र सरकार के साथ किए गए पीएससी का हिस्सा बनता है। एक अनुरोध यह स्पष्ट करने के लिए किया गया है कि क्या अधिकार के रूप में "खरीदी" व्यय को आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 32(1) के वाक्यांश (ii) के अंतर्गत एक 'अमूर्त परिसंपत्ति' के तौर पर समझे जाने के लिए स्वीकृत किया जाना चाहिए।
2. केंद्र सरकार (जीओआर्इ) ने तेल व गैस कंपनियों के साथ उत्पादन साझाकरण अनुंबधों (पीएसर्इ) पर हस्ताक्षर करके नए अन्वेषण और लार्इसेंसिंग नीति (एनर्इएलपी), हाइड्रोकार्बन अन्वेषण व लार्इसेंसिंग नीति (एचर्इएलपी), ओपन ऐवरेज लार्इसेंसिंग नीति (ओएएलपी) आदि के अंतर्गत विभिन्न स्तरों में निर्दिष्ट ब्लॉक की वैश्विक बोली के माध्यम से अन्वेषण और विकास हितो को प्रस्तुत किया है। सफल तेल व गैस कंपनियों को भारत सरकार के साथ पीएसर्इ के अंतर्गत भारत में और तेल व गैस ब्लॉक में अन्वेषण, विकास और उत्पादन संचालन करने के लार्इसेंस दिए जाते हैं। सामान्य तौर पर आवश्यक बड़े निवेश और जोखिम के कारण कर्इ र्इएंडपी कंपनियां भारत सरकार के साथ पीएसर्इ को निष्पादित करती हैं जिसमें प्रत्येक सदस्य के पास स्वयं का स्वीकृत और स्पष्ट पीर्इ होता है।
3. अधिनियम की धारा 42(2) बताती है कि बेचने की स्थिति में अपरिशोधित व्यय को कटौती के तौर पर स्वीकृत किया जाता है और अतिरिक्त राशि विक्रेता के हाथों करारोपित होती है जबकि खरीददार के हाथों आयकर अधिनियम में कोर्इ प्रावधान नहीं बनाए गए हैं। इसलिए चूंकि बेचे जाने की करदेयता स्पष्ट तौर पर निर्दिष्ट है उस भुगतान में फार्म के उपचार से संबंधित कोर्इ विशिष्ट प्रावधान नहीं बनाए गए है जो र्इएंडपी उद्यमों और कर विभाग के बीच गतिरोध का कारण बनता है।
4. अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए सरकार के साथ पीएसर्इ या समकक्ष अनुबंधों में अपने पीर्इ को खरीदने (फार्म-इन) और बिक्री (फार्म-आउट) करना सामान्य अंतर्राष्ट्रीय प्रचलन है और इस प्रकार जोखिम को साझा करने के लिए, नर्इ और आला दर्जे की विशेषज्ञता और तकनीक लार्इ गर्इ है। ऐसे समझौते में पीर्इ को पीएसर्इ के अंतर्गत अधिकार, लार्इसेंस और बाध्यता में हितों के तौर पर समझा जाता है। ऐसे खरीदी मूल्य को इंस्ट्टीयूट ऑफ चार्टेड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया द्वारा जारी निर्देश टिप्पणी के अनुसार एक परिसंपत्ति के तौर पर आंका जाता है। आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, यूके आदि में अपनाए जाने वाले तेल व गैस के लिए अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन नियमों को जरूरत पड़ती है कि ऐसे अधिग्रहण की लागत को पूंजीकृत और कम आंका जाता है। मॉडल पीएससी (हाइड्रोकार्बन महानिदेशक की वेबसाइट के अनुसार) का अवलोकन बताता है कि भागीदार हित संबंधित लार्इसेंस, परमिट आदि के साथ पीएससी के अंतर्गत पेट्रोलियम के अन्वेषण, उपयोग और विक्रय के अधिकार या बाध्यता में हित है।
5. उक्त के संदर्भ में मामले की जांच की गर्इ। इस संबंध में यह निर्दिष्ट करना प्रासंगिक होगा कि पूर्व अधिसूचना सं. जी.एस.आर 117(र्इ) दिनांक 08.03.1996 के द्वारा, अधिनियम की धारा 293क के अंतर्गत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने निर्दिष्ट किया था कि वह व्यक्ति जिसके साथ 1 अप्रैल, 1992 को या उसके बाद खनिज तेल के अन्वेषण या उत्पादन के लिए या पूर्वेक्षण सहित किसी व्यापार में संपर्क या भागीदारी के लिए समझौता किया गया -
क) ऐसे व्यक्ति सहित व्यक्तियों के संघ या व्यक्तियों की निकाय के तौर पर आय पर मूल्यांकित नहीं किया जाएगा; लेकिन
ख) उक्त संदर्भित प्रत्येक व्यक्ति उसी स्थिति में आय के अपने हिस्से या इसके हिस्से, जो भी मामला हो, के संबंध में मूल्यांकित किया जाएगा जिसमें व्यक्ति ने केंद्र सरकार के साथ समझौता किया
6. इसलिए, र्इएंडपी अनुबंधों में भाग लेने वाले व्यक्तियों को आय के उनके हिस्से के संबंध में व्यक्तिगत तौर पर आंका जाता है, एक र्इएंडपी अनुबंध में ऐसे पूर्ण या आंशिक 'भागीदारी हित' के अधिग्रहण पर विस्तारित राशि, जहां ऐसे अधिग्रहण को भारत सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया हो, र्इएंडपी अनुबंध के अंतर्गत अधिकारों, लार्इसेंस और बाध्यता में हितों के तौर पर अंतर्निहित हिस्से (प्रतिशत के तौर पर प्रस्तुत) को प्राप्त करने के लिए राशि का प्रतिनिधित्व करता है।
7. उक्त कानूनी स्थिति को देखते हुए, एतद्द्वारा निम्नानुसार स्पष्ट किया जाता है कि :—
i. 'भागदारी हित' को प्राप्त करने के लिए दी गर्इ राशि को या तो व्यक्तियों के संघ या व्यक्तियों की निकाय में सदस्य के हित के अधिग्रहण के लिए निवेश या सांझेदारी में हित को प्राप्त करने के लिए लागत के तौर पर समझा जाएगा बल्कि इसे अंतर्निहित परिसंपत्ति को प्राप्त करने के लिए दी गर्इ राशि के तौर पर समझा जाएगा; और
ii. धारा 32 की उप-धारा (1) के लिए अमूर्त परिसंपत्ति के कारण घटक की लागत को कम करने के बाद 'भागीदारी हित' को प्राप्त करने के लिए दी गर्इ राशि को एक "अर्मूत परिसंपत्ति" (एक लार्इसेंस के सदृश्य व्यापार या वाणिज्यिक अधिकार के तौर पर) के तौर पर समझा जाएगा, अधिनियम की धारा 32 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (ii) के लिए मूल्यहस के दावे के लिए योग्य
8. यह परिपत्र स्पष्टीकरण के रूप में है जो आयकर अधिनियम, 1961 में धारा 32 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (ii) की प्रयोज्यता की तिथि से लागू होगा।
9. हिन्दी संस्करण का अनुसरण होना है
राजा राजेश्वरी आर
अवर सचिव (आर्इटीए.II), सीबीडीटी
(एफ.नं. 225/34/2019-आर्इटीए.II)
निम्न को प्रति :
1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/एमओएस (एफ) का ओएसडी
2. सचिव (राजस्व) का पीएस
3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी
4. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक
5. सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त, सीबीडीटी
6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
7. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता
8. आर्इटीसीसी प्रभाग (4 प्रतियां)
9. आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय
10. अपर आयकर आयुक्त (डाटाबेस प्रकोष्ठ) आर्इआरएस अधिकारियों की वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए
राजा राजेश्वरी आर
अवर सचिव (आर्इटीए.II), सीबीडीटी

