परिपत्र सं. 20/2017 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132ख के स्पष्टीकरण 2 की प्रयोज्यता
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 20/2017
परिपत्र की तिथि
12/06/2017
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
12/06/2017
परिपत्र सं. 20/2017
एफ.नं. 279/विविध/140/2015/आर्इटीजे
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नर्इ दिल्ली, 12 जून, 2017
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132ख के स्पष्टीकरण 2 की प्रयोज्यता - संबंधित
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 132ख को आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम), संपत्ति कर अधिनियम, 1957, व्यय कर अधिनियम, 1987, उपहार कर अधिनियम, 1958 और ब्याज कर अधिनियम, 1974 के अंतर्गत किसी मौजूदा देयता की राशि के समक्ष जब्त परिसंपत्ति/अपेक्षित संपत्ति और अधिनियम की धारा 153क के अंतर्गत निर्धारण की समाप्ति पर निर्धारित देयता की राशि और पिछले वर्ष जिसमें खोज किया जाता है या मांग की जाती है, के प्रासंगिक वर्ष के मूल्यांकन या ब्लॉक अवधि के लिए अध्याय XIV-ख के अंतर्गत मूल्यांकन की समाप्ति पर निर्धारित देयता की राशि, जो भी स्थिति है (ऐसे मूल्यांकन के संबंध में देययोग्य ब्याज या लगाए गए किसी जुर्माने सहित) और जिसके बारे में ऐसा व्यक्ति चूककर्ता है या चूककर्ता समझा जाता है या अधिनियम की धारा 245ग की उप-धारा (1) के अंतर्गत निपटान आयोग के समक्ष किए गए आवेदन पर उत्पन्न देयता की राशि, के लिए मुहैया कराया गया है।
2. अग्रिम कर देयता आदि के समक्ष ऐसी जब्ती/आपेक्षित नगद के समायोजन के संबंध में विभाग और निर्धारिती के बीच विवाद उत्पन्न हुआ है। कर्इ न्यायालयों ने संघटित किया है कि निर्धारिती द्वारा किए गए आवेदन पर, जब्त राशि निर्धारिती की अग्रिम कर देयता के समक्ष समायोजित की जानी है। तत्पश्चात् अधिनियम की धारा 132ख के स्पष्टीकरण 2 को यह स्पष्ट करते हुए वित्त अधिनियम, 2013, प्रभावी तिथि 01.06.2013 द्वारा शामिल किया गया था कि "मौजूदा देयता" अधिनियम के अध्याय XVII के भाग ग के प्रावधानों के अनुसार देययोग्य अग्रिम कर को शामिल नहीं करता। हालांकि, मुद्दे पर जारी विवाद कि क्या संशोधन पूर्वप्रभावी प्रयोज्ता के रूप में स्पष्टकारी था या इसके पास केवल भावी प्रयोज्ता है।
3. कर्इ न्यायालयों का मानना है कि अधिनियम की धारा 132ख के स्पष्टीकरण 2 का समाविष्टिकरण प्रत्याशित प्रकार का है और 01.06.2013 से पहले के मामलों के लिए लागू नहीं होता। कॉसमोस बिल्डर्स और प्रोमोटर लि.1 के मामले में माननीय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्णय के समक्ष विभाग द्वारा दाखिल एसएलपी और सुनील चंद्रा गुप्ता2 के मामले में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में खारिज किया है। तत्पश्चात् सीबीडीटी ने स्पेज टॉवर प्रा लि.3 दिनांक 17.11.2016 के मामले में माननीय पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्णय को भी स्वीकृत किया है जिसमें यह संघटित किया जाता है कि अधिनियम की धारा 132ख हेतु स्पष्टीकरण 2 प्रत्याशित प्रकार के हैं।
4. तद्नुसार, अब यह निर्धारित किया गया है कि अधिनियम की धारा 132ख के स्पष्टीकरण 2 की प्रविष्टि का प्रत्याशित प्रयोग होगा और इसलिए हो सकता है कि 01.06.2013 से पहले के मामलों के लिए इस मुद्दे पर विभाग द्वारा अपील दाखिल न की जाए और जिन्होंने पहले की दाखिल कर दी है उसे निरस्त/रद्द कर दिया जाए।
5. उक्त को सभी संबंधितों के ध्यान में लाया जा सकता है।
6. हिन्दी संस्करण का अनुसरण होगा।
(नीतिका बंसल)
उप-सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति :
1. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अधिकारी
2. राजस्व सचिव हेतु ओएसडी
3. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त व समस्त आयकर महानिदेशक, समस्त अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए अनुरोध के साथ
4. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
5. प्रमुख आयकर महानिदेशक, राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, नागपुर
6. प्रमुख आयकर महानिदेशक (पद्धति), एआरए सेंटर, झंडेवालान एक्सटेंशन, नर्इ दिल्ली
7. प्रमुख आयकर महानिदेशक (सर्तकता), नर्इ दिल्ली
8. एडीजी (पीआर, पीपी व ओएल), सामान्य मेलिंग सूची के अनुसार परिपत्र के लिए
9. एडीजी-4 (पद्धति) आयकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए
10. irsofficersonline पर अपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ
11. एनजेआरएस पर अपलोडिंग के लिए njrs_support@nsdl.co.in
12. हिन्दी अनुवाद के लिए हिन्दी अनुभाग
13. गार्ड फाइल
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1. एनजेआरएस-2015-एलएल-0714-2, 2014 की आर्इटीए सं. 425 में आदेश दिनांक 14.07.2015 (पंजाब व हरियाणा)
2. एनजेआरएस-2015--एलएल-0311-25, 2014 की आर्इटीए सं. 182 में आदेश दिनांक 11.03.2015 (इलाहाबाद)
3. एनजेआरएस-2016-एलएल-1117-5, 2015 की आर्इटीए सं. 40

