आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 18/2022

परिपत्र की तिथि

13/09/2022

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/09/2022

परिपत्र सं. 18/2022

2022 की परिपत्र सं. 18

एफ.नं. 370142/27/2022-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(टीपीएल प्रभाग)

*****

नई दिल्ली, दिनांक 13 सितंबर, 2022

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194द की उप-धारा (2) के अंतर्गत परेशानियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त दिशानिर्देश

वित्त अधिनियम 2022 में प्रभावी तिथि 1 जुलाई, 2022 से आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् "अधिनियम" के तौर पर संदर्भित) में नई धारा 194द को शामिल किया गया है।

2. नई धारा एक व्यक्ति, जो एक निवासी को किसी प्रकार का लाभ या रियायत देने के लिए जिम्मेदार है, के लिए ऐसे लाभ या रियायत देने से पहले ऐसे लाभ या रियायत की कीमत के 10 प्रतिशत या कुल कीमत पर स्रोत पर कर कटौती को अनिवार्य करती है। लाभ या रियायत राशि में परिवर्तनीय हो सकते है या नहीं लेकिन ऐसे निवासी द्वारा व्यापार या पेशा करने से अर्जित होना चाहिए।

3. यह कटौती नहीं की जानी चाहिए यदि वित्त वर्ष के दौरान निवासी को दी गई या दी जाने वाले लाभ या रियायत की कीमत या कुल कीमत को बीस हजार रूपए से अधिक न हो।

4. कर कटौती की जिम्मेदारी उस व्यक्ति, व्यक्ति/हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) डिडक्टर के तौर पर, व्यक्ति पर भी लागू नही होगी जिसकी वित्त वर्ष जिसमें उसे ऐसे लाभ या रियायत दी गई, के तुरंत बाद के वित्त वर्ष के दौरान व्यापार से कुल बिक्री/कुल प्राप्ति/कुल कारोबार एक करोड़ से अधिक नही है या पेशे से पचास लाख रूपए नही है।

5. अधिनियम की धारा 194द की उप-धारा (2) केंद्र सरकार की अनुमति के साथ परेशानियों को दूर करने के लिए दिशानिर्देश जारी करती है। इन दिशानिर्देशों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है और आयकर प्राधिकारियों और लाभ या रियायत प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर बाध्यकारी है।

6. तद्नुसार, अधिनियम की धारा 194द की उप-धारा (2) द्वारा दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए, सीबीडीटी ने 16 जून 2022 के परिपत्र संख्या 12/2022 के रूप में दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके बाद, विभिन्न मुद्दों पर हितधारकों द्वारा कुछ और स्पष्टीकरण का अनुरोध किया गया। तदनुसार, यह परिपत्र भी मुद्दों पर स्पष्टीकरण प्रदान करने के लिए धारा 194द की उप-धारा (2) के तहत जारी किया गया है जो इस प्रावधान के कार्यान्वयन में कठिनाइयों को दूर करने में मदद करेगा।

7. यह स्पष्ट किया जाता है कि यह परिपत्र केवल अधिनियम की धारा 194द के प्रावधानों को लागू करने में होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए ही है और यह उन प्राप्तकर्ताओं के हाथो आय की करदेयता को प्रभावित नही करता जो अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होते हैं।

दिशानिर्देश

प्रश्न 1 : 2022 की परिपत्र सं. 12 के प्रश्न सं. 3 को संदर्भित करें : यदि किसी बैंक द्वारा ऋण निपटान/माँफी को लाभ/अनुलाभ के रूप में माना जाता है, तो इससे कठिनाई होगी क्योंकि बैंक को उसके द्वारा ली गई कटौती के अलावा कर कटौती की अतिरिक्त लागत भी वहन करनी होगी। क्या ऐसी स्थिति में अधिनियम की धारा 194द लागू होगी?

उत्तर : यह सच है कि बैंक द्वारा कर्ज माफ करना या उसका निपटान करना उस व्यक्ति के लिए आय हो सकता है जिसने कर्ज लिया था। यह भी सच है कि इस तरह के लेन-देन को अधिनियम की धारा 194द के तहत कर कटौती के अधीन करने से ऐसे बैंक पर अतिरिक्त लागत आएगी, क्योंकि इसके लिए कटौतीकर्ता को पहले से ही कटौती करने के अलावा कर का भुगतान करना होगा। इसलिए, कठिनाई को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि उधारकर्ताओं के साथ एकमुश्त ऋण निपटान या निम्नलिखित द्वारा उधारकर्ताओं के साथ समझौता करने पर दिए गए ऋण की छूट अधिनियम की धारा 194द के तहत स्रोत पर कर कटौती के अधीन नहीं होगी।

(i) लोक वित्तीय संस्थान जैसा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के वाक्यांश (72) में परिभाषित है

(ii) अनुसूचित बैंक जैसा अधिनियम की धारा 36 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (viiक) के स्पष्टीकरण के वाक्यांश (ii) में परिभाषित है

(iii) सहकारी बैंक (प्राथमिक कृषि क्रेडिट संस्था को छोड़कर) जैसा अधिनियम की धारा 80त की उप-धारा (4) के स्पष्टीकरण में परिभाषित है

(iv) प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक जैसा अधिनियम की धारा 80त की उप-धारा (4) के स्पष्टीकरण में परिभाषित है

(v) राज्य वित्तीय निगम धारा 3 या धारा 3क के तहत स्थापित एक वित्तीय निगम या राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 की धारा 46 के तहत अधिसूचित संस्था है

(vi) कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2 की उपधारा (45) के अर्थ के तहत एक सरकारी कंपनी के तौर पर राज्य औद्योगिक निवेश निगम जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करने के व्यवसाय में लगी हुई है

(vii) जमा लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी जैसा कि अधिनियम की धारा 43ख के स्पष्टीकरण 4 के वाक्यांश (ड़) में परिभाषित है

(viii) प्रणालीगत आयात गैर-जमा लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जैसा अधिनियम की धारा 43ख के स्पष्टीकरण 4 के वाक्यांश (छ) में परिभाषित है

(ix) सार्वजनिक कंपनी जो आवासीय उद्देश्य के लिए भारत में घरों के निर्माण या खरीद के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करने में लगी हुई है और जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम 1987 के तहत गठित राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देशों/निर्देशों के अनुसार पंजीकृत है

(x) वित्तीय संपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुर्ननिर्माण और सुरक्षा हित प्रवर्तन (एसआरएफ एईएसआई) अधिनियम 2002 की धारा 3 के तहत पंजीकृत संपत्ति पुर्ननिर्माण कंपनियां

जैसाकि पहले ही निर्दिष्ट है, यह स्पष्टीकरण अधिनियम की धारा 194द के लिए ही है। व्यक्ति जिसे ऐसी छूट का लाभ मिला हो, के हाथो ऐसे निपटान/छूट का उपचार इस स्पष्टीकरण द्वारा प्रभावित नही होगा। लाभाथ्री के हाथो ऐसे निपटान/छूट की करदेयता अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होगा।

प्रश्न 2 : 2022 की परिपत्र सं. 12 के प्रश्न सं. 7 को संदर्भित करें - यदि समझौते की शर्तों के तहत, सेवा प्रदाता द्वारा किया गया व्यय सेवा प्राप्तकर्ता की लागत है और ऐसी लागत सेवा प्राप्तकर्ता द्वारा सेवा प्रदाता को प्रतिपूÆत की जाती है, तो यह कैसे लाभ/अनुलाभ है यदि बिल सेवा के नाम पर नहीं है प्राप्तकर्ता?

उत्तर : 2022 की परिपत्र सं. 12 के प्रश्न सं. 7 के उत्तर में, यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यय, जो व्यापार या पेशा करने के लिए एक व्यक्ति की जिम्मेदारी है, यदि अन्य व्यक्ति द्वारा पूरी होती है, जो व्यापार/पेशे की अवधि के दौरान पहले व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की ओर से दिया गया प्रभावी लाभ/रियायत है।

अब, यदि सेवा प्रदाता, सेवा प्राप्तकर्ता को सेवा प्रदान करने के दौरान कुछ व्यय करता है और बिल सेवा प्रदाता के नाम पर है, तो वास्तव में (समझौते की शर्तों के बावजूद) यह व्यय सेवा प्रदाता का दायित्व है और नाकि सेवा प्राप्तकर्ता का। यह सेवा प्रदाता वह है जो उसके द्वारा किए गए खर्चों में शामिल जीएसटी के इनपुट क्रेडिट प्राप्त करता है। यदि यह सेवा प्राप्तकर्ता का दायित्व होता, तो जीएसटी इनपुट क्रेडिट उसे (सेवा प्राप्तकर्ता) दिया गया होता, न कि सेवा प्रदाता को। इसलिए, 2022 के परिपत्र संख्या 12 में प्रश्न संख्या 7 का उत्तर स्पष्ट रूप से बताता है कि ऐसी स्थिति में ऐसे व्यय की प्रतिपूÆत लाभ/अनुलाभ है जिस पर अधिनियम की धारा 194द के तहत कर कटौती की जानी आवश्यक है।

इसके बाद, यह ध्यान में लाया गया कि जीएसटी में, यदि सेवा प्रदाता "वास्तविक एजेंट" के रूप में व्यय करता है, तो जीएसटी इनपुट क्रेडिट सेवा प्राप्तकर्ता को दिया जाता है, न कि सेवा प्रदाता को। मोटे तौर पर, एक वास्तविक एजेंट वह है जो प्राप्तकर्ता को आपूर्ति करते समय प्राप्तकर्ता की ओर से कुछ अन्य आपूर्ति पर व्यय करता है या प्राप्त करता है और मुख्य आपूर्ति के प्राप्तकर्ता से ऐसी आपूर्तियों के लिए प्रतिपूर्ति (वास्तविक तौर पर, अपनी खुद की आपूर्ति की कीमत को उसमें शामिल किए बिना) का दावा करता है। जबकि मुख्य सेवा के संदर्भ में उनके बीच का संबंध (सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्तकर्ता) मूलधन से मूलधन आधार पर है, अन्य सहायक सेवाओं के संबंध में उनके बीच का संबंध वास्तविक एजेंट का है। जीएसटी मूल्यांकन नियम 2017 के तहत "वास्तविक एजेंट" को निम्नलिखित अर्थ दिया गया है।

"वास्तविक एजेंट" का अर्थ एक व्यक्ति जो

क) जो वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के दौरान व्यय या लागत वहन करने के लिए आपूर्ति के प्राप्तकर्ता के साथ उसके वास्तविक एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए एक संविदात्मक समझौता करता है

ख) आपूर्ति के प्राप्तकर्ता के शुद्ध एजेंट के रूप में खरीदी या प्रदान की गई वस्तुओं या सेवाओं या दोनों पर न तो कोई स्वामित्व रखने का इरादा है और न ही रखता है

ग) इस प्रकार खरीदी गई ऐसी वस्तुओं या सेवाओं का उपयोग अपने हित के लिए नहÈ करता हो और

घ) आपूर्ति जो वह देता है, के लिए प्राप्त राशि के अलावा ऐसी वस्तुओं या सेवाओं की खरीद के लिए खर्च की गई वास्तविक राशि प्राप्त करता हो

जीएसटी मूल्यांकन नियम यह प्रदान करते हैं कि वास्तविक एजेंट के रूप में किए गए व्यय को आपूर्ति के मूल्य से बाहर रखा जाएगा, और इस प्रकार कुल कारोबार से भी। हालाँकि, वास्तविक एजेंट के रूप में किए गए व्यय का ऐसा निष्काषन केवल और केवल तभी संभव है जब वासतविक एजेंट के रूप में विचार करने के लिए आवश्यक सभी शर्तें और नियमों में निर्धारित अतिरिक्त शर्तें प्रत्येक मामले में आपूर्तिकर्ता द्वारा पूरी की जाती हैं। आपूÆतकर्ता को मूल्य से बाहर करने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा (वास्तविक एजेंट के रूप में माने जाने और ऊपर चर्चा की गई शर्तों के अलावा): -

i. आपूर्तिकर्ता, आपूर्ति के प्राप्तकर्ता के वास्तविक एजेंट के रूप में कार्य करता है, जब वह ऐसे प्राप्तकर्ता द्वारा प्राधिकरण पर तीसरे पक्ष को भुगतान करता है;

ii. आपूर्ति  के प्राप्तकर्ता की ओर से वास्तविक एजेंट द्वारा किए गए भुगतान को वास्तविक एजेंट द्वारा सेवा प्राप्तकर्ता को जारी किए गए चालान में अलग से दर्शाया गया है और

iii. आपूर्ति  के प्राप्तकर्ता के वास्तविक एजेंट के रूप में तीसरे पक्ष से वास्तविक एजेंट द्वारा खरीदी गई आपूÆत उन सेवाओं के अतिरिक्त है जो वह अपने हिस्से में आपूर्ति  करता है।

यदि ये शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो ऐसे किए गए व्यय को जीएसटी के तहत आपूर्ति के मूल्य में शामिल किया जाता है। हालाँकि, "वास्तविक एजेंट" के उपर्युक्त मामले में, यदि सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो प्राप्तकर्ता को जीएसटी इनपुट क्रेडिट की अनुमति दी जाती है और इसे वास्तविक एजेंट की आपूर्ति के रूप में नहÈ माना जाता है, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस तरह से खर्च की गई राशि "वास्तविक एजेंट" जिसके लिए उसे प्राप्तकर्ता द्वारा प्रतिपूÆत की जाती है, उसे अधिनियम की धारा 194द के प्रयोजन के लिए लाभ/अनुलाभ के रूप में नहीं माना जाएगा।

प्रश्न 3 : 2022 की परिपत्र सं. 12 के प्रश्न सं. 7 को संदर्भित करें - सीबीडीटी परिपत्र सं. 715 दिनांक 8 अगस्त 1995 की प्रश्न सं. 30 स्पष्ट करता है कि धारा 194ग और 194ञ के अंतर्गत कर कटौती प्रतिपूर्ति को शामिल करते हुए बिल की कुल राशि से की जानी आवश्यक है। एक व्यक्ति ने एक कंपनी को सेवा प्रदान की है और उसके द्वारा अपनी जेब से किया गया खर्च उसी बिल में सेवा शुल्क के साथ कंपनी से वसूला जाता है। कंपनी इस परिपत्र के अनुसार सेवा शुल्क घटक के साथ-साथ जेब खर्च दोनों पर अधिनियम की धारा 194´ के तहत कर काटती है। क्या अधिनियम की धारा 194द के प्रावधान का अनुपालन नहीं हुआ है?

उत्तर : सीबीडीटी परिपत्र सं. 715 दिनांक 8 अगस्त 1995 के प्रासंगिक हिस्से निम्नानुसार हैं

प्रश्न 30 : क्या धारा 194ग और 194ञ  के तहत स्रोत पर कर की कटौती प्रतिपू सहित या वास्तविक खर्चों की प्रतिपूर्ति  को छोड़कर बिल की सकल राशि से की जानी है?

उत्तर: धारा 194ग और 194ञ भुगतान की गई किसी भी राशि का उल्लेख करते हैं। प्रत्यक्ष तौर पर, स्रोत पर कर कटौती के उद्देश्य से प्रतिपूर्ति को बिल राशि से नहÈ काटा जा सकता है।

यदि जेब से खर्च (प्रतिपूर्ति ) पहले से ही बिल में विचारनीय है, जिस पर 8 अगस्त 1995 के परिपत्र संख्या 715 के अनुसार, धारा 194आर के अलावा, अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कर काटा जाता है, तो यह स्पष्ट किया जाता है अधिनियम की धारा 194आर के तहत कर कटौती के लिए आगे कोई दायित्व नहीं होगा।

उपरोक्त उदाहरण में, जेब से किया गया खर्च कंपनी से लिए जाने वाले पेशेवर शुल्क के बिल में प्रतिफल का हिस्सा है और जेब से किए गए खर्च सहित संपूर्ण प्रतिफल पर अधिनियम की धारा 194ञ  के तहत कर काटा जाता है। ऐसे मामले में, जेब से होने वाला खर्च पहले से ही पेशेवर शुल्क के हिस्से के रूप में शामिल है। इसलिए, कोई और लाभ/अनुलाभ नहÈ है जिसके लिए अधिनियम की धारा 194द के तहत कर कटौती की आवश्यकता हो।

प्रश्न 4 : 2022 की परिपत्र सं. 12 के प्रश्न सं. 8 को संदर्भित करें - यदि कंपनी के उत्पादों के बारे में डीलरों को जानकारी देने के लिए डीलर की बैठक हो तो - (i) कोई आवश्यकता है कि सभी डीलरों को बैठक में आमंत्रित किया है (ii) क्या होगा यदि डीलर एक दिन पहले आएं और एक दिन बाद चले जाएं (iii) समूह गतिविधि में व्यक्तिगत डीलरों के विरुद्ध लाभ की पहचान कैसे करें?

उत्तर : प्रश्न संख्या 8 के उत्तर से उत्पन्न इन प्रश्नों पर स्पष्टता की मांग करने वाले विभिन्न हितधारकों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि

(i) यह आवश्यक नहÈ है कि अधिनियम की धारा 194द के तहत कर कटौती के प्रयोजनों के लिए खर्चों को लाभ/अनुलाभ के रूप में नहÈ माने जाने के लिए सभी डीलरों को डीलर/व्यावसायिक सम्मेलन में आमंत्रित किया जाना आवश्यक है।

(ii) डीलर/व्यावसायिक सम्मेलन के प्रतिभागियों पर सम्मेलन की तारीखों से पहले या ऐसे सम्मेलन की तारीखों से अधिक समय तक रुकने के कारण होने वाले खर्च को अधिनियम की धारा 194द के प्रयोजनों के लिए लाभ/अनुलाभ के रूप में माना जाएगा। हालांकि, बैठक की वास्तविक आरंभ तिथि से तुरंत एक दिन पहले और बैठक की वास्तविक समाप्ति तिथि के तुरंत बाद को ओवरस्टे नही माना जाएगा।

(iii) यह ध्यान में लाया गया है कि ऐसे डीलर/व्यावसायिक बैठक के दौरान ऐसे खर्च हो सकते हैं जिन्हें लाभ/अनुलाभ के रूप में वगÊकृत करने की आवश्यकता है और अधिनियम की धारा 194द के तहत कर कटौती की जानी आवश्यक है। हालाँकि, वास्तविक प्राप्तकर्ता के लिए ऐसे लाभ/अनुलाभ की पहचान करने में व्यावहारिक कठिनाइयाँ हो सकती हैं क्योंकि यह एक सामूहिक गतिविधि है और उचित आवंटन संभव नहीं है। ऐसे मामले में, अधिनियम की धारा 194द के प्रावधान का अनुपालन न करने पर, न केवल अधिनियम की धारा 40 के वाक्यांश (झक) के तहत अस्वीकृति होगी, बल्कि अधिनियम की धारा 201 अन्य सभी परिणामों के साथ धारा के तहत लाभ/अनुलाभ प्रदाता को डिफ़ॉल्ट रूप से निर्धारिती के रूप में माना जा सकता है।

इन व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि लाभ/अनुलाभ इस तरीके से सामूहिक गतिविधि में दिया गया हो कि उचित आवंटन कुंजी का उपयोग करके प्रत्येक भागीदार को ऐसे लाभ/अनुलाभ का मिलान करना मुश्किल हो, तो लाभ/अनुलाभ प्रदाता अपनी कुल आय की गणना के लिए कटौती योग्य व्यय के रूप में, ऐसे लाभ/अनुलाभ का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यय का दावा न करने का विकल्प चुन सकता है। यदि वह ऐसा चुनने का निर्णय लेता है, तो उसे ऐसे लाभ/अनुलाभ पर धारा 194द के तहत कर कटौती करने की आवश्यकता नहीं होगी और इसलिए उसे अधिनियम की धारा 201 के तहत डिफ़ॉल्ट निर्धारिती के रूप में नहीं माना जाएगा। इस प्रकार, ऐसे मामले में उसे अपनी कुल आय की गणना करने के लिए, ऐसे लाभ/अनुलाभ का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यय को वापस जोड़ना होगा, यदि ऐसा व्यय खाते में डेबिट किया गया है।

2022 की परिपत्र सं. 12 में प्रश्न 8 का उत्तर इस सीमा तक संशोधित किया है

प्रश्न 5 : 2022 के परिपत्र संख्या 12 के प्रश्न संख्या 9 को देखें- कंपनी "ए" अपने डीलर "बी" को एक कार उपहार में देती है और अधिनियम की धारा 194द के तहत इस लाभ पर कर काटती है। डीलर "बी" इस कार का उपयोग अपने व्यवसाय में करता है। क्या उसे "व्यापार या पेशे के लाभ और प्राप्ति" मद के तहत अपनी आय की गणना में मूल्यहास के लिए कटौती मिलेगी?

उत्तर: एक बार कंपनी "ए" ने अधिनियम की धारा 194द के अनुसार कार उपहार में देने पर कर काट लिया हो (या डीलर "बी" द्वारा उसे इस तरह के लाभ पर कर का भुगतान दिखाने के बाद कार जारी कर दी हो) और डीलर "बी" ने उसके आयकर रिटर्न में आय के रूप में लाभ इसे शामिल कर लिया हो, यह माना जाएगा कि अधिनियम की धारा 32 के प्रयोजनों के लिए कार की "वास्तविक लागत" डीलर बी द्वारा उसके आयकर विवरणी में आय के रूप में शामिल लाभ की राशि होगी। इसलिए, डीलर "बी" मूल्यहास का दावा करने के लिए अन्य शर्तों को पूरा करने पर मूल्यहास प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 6 : क्या दूतावास/उच्चायोग को अधिनियम की धारा 194द के अंतर्गत कर कटौती करना आवश्यक है ?

उत्तर: कठिनाई को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि धारा 194द का प्रावधान संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा अधिनियम) 1947 के दायरे में एक संगठन द्वारा प्रदान किए गए लाभ/अनुलाभ पर लागू नहÈ है, एक अंतरराष्ट्रीय संगठन जिसकी आय के तहत छूट है संसद का विशिष्ट अधिनियम (जैसे कि एशियाई विकास बैंक अधिनियम 1966), एक दूतावास, एक उच्चायोग, दूतावास, आयोग, वाणिज्य दूतावास और एक विदेशी राज्य का व्यापार प्रतिनिधित्व।

प्रश्न 7: क्या बोनस शेयर/राइट शेयर जारी करना एक लाभ या अनुलाभ है यदि यह किसी कंपनी द्वारा जारी किया गया है जिसमें जनता को पर्याप्त रुचि है जैसा कि अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (18) में परिभाषित है और क्या कर अधिनियम की धारा 194द इसके तहत काटा जाना आवश्यक है?

उत्तर: बोनस शेयरों के मामले में, जो किसी ऐसी कंपनी द्वारा सभी शेयरधारकों को जारी किए जाते हैं, जिसमें अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (18) में परिभाषित अनुसार जनता की काफी रुचि होती है, यह दर्शाया गया है कि इससे शेयरधारकों को कोई लाभ नहीं होता है चूंकि उनकी हिस्सेदारी का कुल मूल्य और स्वामित्व नहÈ बदलता है। बोनस शेयर के अधिग्रहण की अग्रिम लागत पूंजीगत प्राप्ति गणना के लिए शून्य के तौर पर ली जाएगी जब शेयर बेचा जाता है। इसी प्रतिनिधित्व को सही शेयरों के निगर्मन पर स्पष्टता मांगने के लिए प्राप्त किया जाता है।

यह स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम की धारा 194द के तहत कर उस कंपनी द्वारा बोनस या राइट शेयर जारी करने पर कर की कटौती की आवश्यकता नहीं है, जिसमें जनता की काफी रुचि है जैसा अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (18) में परिभाषित है, जहां ऐसी कंपनी द्वारा सभी शेयरधारकों को बोनस शेयर जारी किए जाते हैं या ऐसी कंपनी द्वारा सभी शेयरधारकों को सही शेयर दिए जाते हैं, जैसा भी मामला हो।

(ओम प्रकाश मीणा)

डीसीआईटी (ओएसडी)(टीपीएल-III)

निम्न को प्रति :

1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/एमओएस (एफ) का ओएसडी

2. सचिव (राजस्व) का पीपीएस

3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी

4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त

5. समस्त संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक उप सचिव/अवर सचिव, सीबीडीटी

6. भारतीय लेखा एवं नियंत्रक परीक्षक

7. संयुक्त सचिव व कानूनी सलाहकार, विधि व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली

8. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी

9. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालप  आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए

10. संयुक्त आयकर आयुक्त (डेटाबेस प्रकोष्ठ) www.irsofficersonline.gov.in पर अपलोड करने के लिए