आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 17/2020

परिपत्र की तिथि

29/09/2020

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

29/09/2020

 परिपत्र सं. 17/2020

2020 की परिपत्र सं. 17

 

एफ.सं. 370133/22/2020-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

(टीपीएल प्रभाग)

*****

 

दिनांक : 29 सितंबर, 2020

 

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194-ण (4) और धारा 206ग(1-झ) के अंतर्गत दिशानिर्देश - संबंधी

 

वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा आयकर अधिनियम 1961 (तत्पश्चात् अधिनियम के तौर पर संदर्भित) की धारा 194-ण में एक नई धारा शामिल की गई है जो अनिवार्य करती है कि प्रभावी तिथि 1 अक्टूबर, 2020 से ई-कॉमर्स संचालक उत्पादों की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान या दोनों की कुल राशि के एक प्रतिशत (अधिनियम की प्रस्तावित धारा 197ख के प्रावधानों के अनुसार) की दर पर आयकर कटौती की जाएगी जिसमें उसके डिजिटल या इलैक्ट्रानिक सुविधा या प्लेटफार्म की सुविधा दी जानी चाहिए। हालांकि, कथित कटौती से छूट उस मामले में दी गई है जहां कुछ व्यक्ति या हिंदु अविभाजित परिवार निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करती हो। यह कटौती एक ई-कॉमर्स भागीदार के खाते में ऐसी बिक्री या सेवा या दोनों की राशि को जमा करते समय या ऐसे ई-कॉमर्स भागीदार को उसके भुगतान के समय, जो भी पहले हो, किया जाना आवश्यक है।

2. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा अधिनियम की धारा 206ग में उप-धारा (1ज) को शामिल किया गया है जो अनिवार्य करती है कि प्रभावी तिथि 1 अक्टूबर, 2020 से किसी कीमत के किसी उत्पाद की बिक्री या कर एकत्रित करने के लिए किसी पिछले वर्ष में पचास लाख से अधिक की ऐसी कुल कीमत के लिए प्रतिफल के तौर पर राशि प्राप्त करने वाला एक विक्रेता आयकर के तौर पर पचास लाख से अधिक के बिक्री प्रतिफल के 0.1 प्रतिशत (अधिनियम की धारा 206 की प्रस्तावित उप-धारा (10क) के प्रावधानों के अनुसार) के बराबर राशि को खरीददार से कर एकत्रित करेगा। बिक्री प्रतिफल की रशि की प्राप्ति के समय एकत्रीकरण किया जाना आवश्यक है।

3. अधिनियम की धारा 194-ण की उप-धारा (4) और धारा 206ग की उप-धारा (1-झ) बोर्ड (केंद्र सरकार की अनुमति के साथ) को समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से दिशानिर्देशों को जारी करने का अधिकार देती है। कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए दिशानिर्देशों को जारी करने के लिए बोर्ड द्वारा विभिन्न प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए हैं। अधिनियम की धारा 194-ण की उप-धारा (4) और अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1-झ) के अंतर्गत शामिल अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार की अनुमति से बोर्ड निम्नलिखित दिशानिर्देशों को एतद्द्वारा जारी करते हैं।

4. दिशानिर्देश

4.1 विभिन्न विनिमयों के द्वारा किए गए लेनदेनों पर प्रयोज्यता

4.1.1 यह प्रदर्शित किया गया है कि कुछ विनिमयों और क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन के मामलें में अधिनियम की धारा 194-ण और धारा 206ग की उप-धारा (1-ज) में शामिल स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रहण (टीसीएस) के प्रावधानों को कार्यान्वित करने में वास्तविक समस्याएं हैं। यह निर्दिष्ट किया गया है कि कभी-कभी इन लेनदेनों में खरीददार और विक्रेता के बीच सीधा संपर्क नहीं होता।

4.1.2 ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए यह मुहैया कराया गया है कि अधिनियम की धारा 194-ण और धारा 206ग की धारा (1ज) के प्रावधान निम्न के संबंध में लागू नहीं होंगे -

  (i) प्रतिभूतियों और उत्पादों में लेनदेन जो प्राधिकृत शेयर बाजार के माध्यम से किया जाता है या प्राधिकृत क्लीयरिंग कार्पोरेशन द्वारा निकाला या निपटाया जाता है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार या प्राधिकृत क्लीयरिंग कार्पोरेशन शामिल है।

 (ii) सीईआरसी के नियामक 21 के अनुसार पंजीकृत पॉवर एक्सचेंज के माध्यम से विद्युत, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा बचत प्रमाणपत्रों में लेनदेन और

इसके लिए

  (i) "प्राधिकृत क्लीयरिंग कार्पोरेशन" का वही अर्थ होगा जैसा अधिनियम की धारा 10 के वाक्यांश (23ड़ड़) के स्पष्टीकरण के वाक्यांश (i) में इसे निर्दिष्ट किया गया है

 (ii) "प्राधिकृत शेयर बाजार" का वही अर्थ होगा जैसा अधिनियम की धारा 43 की उप-धारा (5) के स्पष्टीकरण 1 के वाक्यांश (ii) में इसे निर्दिष्ट किया गया है

(iii) "अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र" का वही अर्थ होगा जैसा विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 की धारा 2 के वाक्यांश (त) में इसे निर्दिष्ट किया गया है

4.2 भुगतान गेटवे पर प्रयोज्यता :

4.2.1 ई-कॉमर्स लेनदेनों में, भुगतान सामान्य तौर पर भुगतान गेटवे की सुविधा दी जाती है। यह प्रदर्शित किया गया है कि इन लेनदेनों में धारा 194-ण को दो बार लगाया जा सकता है अर्थात् एक बार मुख्य ई-कॉमर्स संचालक पर जो उत्पादों की बिक्री या सेवाओं या दोनों का प्रावधान करता है और एक बार भुगतान गेटवे पर जो सुविधाजनक सेवाएं देने के लिए ई-कॉमर्स संचालक के तौर पर योग्य हो जाता है। यह दर्शाने के लिए एक खरीददार ई-कॉमर्स वेबसाइट "एक्सवाईजेड" से एक लाख रूपए की कीमत की वस्तु खरीदता है, वह "एबीसी" के डिजिटल प्लेटाफॉर्म के माध्यम से एक लाख रूपए का भुगतान करता है। इन तथ्यों पर धारा 194-ण के अंतर्गत कर कटौती की देयता दोनों "एक्सवाईजेड" और "एबीसी" पर आ सकती है।

4.2.2 इस समस्या को दूर करने के लिए, यह मुहैया कराया गया है कि भुगतान गेवटे को लेनदेन पर अधिनियम की धारा 194-ण के अंतर्गत कर कटौती की आवश्यकता नहीं होगी यदि उसी लेनदेन पर अधिनियम की धारा 194-ण के अंतर्गत ई-कॉमर्स संचालक द्वारा कर कटौती की गई है। इसलिए, उक्त उदाहरण में, यदि "एक्सवाईजेड" ने एक लाख रूपए पर धारा 194-ण के अंतर्गत कर कटौती की हो तो "एबीसी" को उसी लेनदेन पर अधिनियम की धारा 194-ण के अंतर्गत कर कटौती की आवश्यकता नहीं होगी। उचित कार्यान्वयन की सुविधा के लिए, "एबीसी" कर की कटौती के संबंध में "एक्सवाईजेड" से वचन ले सकता है।

4.3 बीमा एजेंट या बीमा एग्रीगेटर पर प्रयोज्यता :

4.3.1 यह प्रतिनिधित्व किया गया है कि कई मामलों में बीमा एजेंट या बीमा एग्रीगेटर की बाद के वर्षों में बीमा कंपनी और खरीददार के बीच लेनदेन में कोई भागीदारी नहीं होती। यह प्रतिनिधित्व किया गया है कि बाद में वर्षों में कर कटौती की देयता बीमा एजेंट या बीमा एग्रीगेटर के लिए उत्पन्न हो सकती है भले ही लेनदेन बीमा कंपनी के साथ सीधे किया गया हो। इससे बीमा एजेंट/एग्रीगेटर का काम बढ़ जाता है।

4.3.2 समस्या को दूर करने के लिए यह मुहैया कराया गया है कि पहले वर्ष के बाद के वर्षों में यदि बीमा एजेंट या बीमा एग्रीगेटर, बीमा कंपनी और बीमा पॉलिसी के खरीददार के बीच लेनदेन में कोई भागीदारी नहीं होती तो वह उन बाद के वर्षों के लिए अधिनियम की धारा 194-ण के अंतर्गत कर कटौती के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। हालांकि, बीमा कंपनी को अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत उन बाद के वर्षों के लिए बीमा एजेंट या बीमा एग्रीगेटर को किए गए भुगतान, यदि हो, पर कर कटौती करना आवश्यक है।

4.4 वित्त वर्ष 2020-21 के लिए प्रारंभिक कर की गणना

4.4.1 चूंकि अधिनियम की दोनों धाराएं 194-ण और 206ग की उप-धारा (1ज) 1 अक्टूबर, 2020 से प्रभावी हुई है, यह स्पष्ट करने के लिए अनुरोध किया गया है कि इन धारओं के अंतर्गत निर्दिष्ट विभिन्न प्रारंभिक कर की गणना की जाएगी और चाहे कर 1 अक्टूबर, 2020 से पहले प्राप्त राशि के संदर्भ में काटा/एकत्रित किया जाना आवश्यक है या नहीं।

4.4.2 यह स्पष्ट किया जाता है कि -

  (i) चूंकि एक व्यक्ति/हिंदु अविभाजित परिवार (ई-कॉमर्स भागीदार के तौर पर जिसने अपना पैन/आधार प्रस्तुत किया हो) के लिए पांच लाख रूपये की शुरूआती सीमा पिछले वर्ष के संदर्भ में है, अधिनियम की धारा 194-ण के अंतर्गत कटौती के लिए बिक्री या सेवा या दोनों की राशि की गणना 1 अप्रैल, 2020 से आंकी जाएगी। इसलिए, ऐसे एक व्यक्ति/हिंदु अविभाजित परिवार के संबंध में वित्त वर्ष 2020-21 (30 सितंबर 2020 तक की अवधि सहित) के दौरान दी गई बिक्री या सेवा या दोनों की कुल राशि पांच लाख रूपए से अधिक होती है तो धारा 194-ण के प्रावधान 1 अक्टूबर, 2020 को या उसके बाद दी गई राशि पर लागू होगी।

 (ii) चूंकि अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) बिक्री प्रतिफल की प्राप्ति पर लागू होती है इस उप-धारा के प्रावधान 1 अक्टूबर, 2020 से पहले प्राप्त किसी बिक्री प्रतिफल पर लागू नहीं होगी। तद्नुसार, यह 1 अक्टूबर 2020 को या उसके बाद प्राप्त सभी बिक्री प्रतिफलों (बिक्री के लिए प्राप्त उधार सहित) पर लागू होगी भले ही बिक्री 1 अक्टूबर, 2020 से पहले की गई हो।

(iii) चूंकि पचास लाख रूपये की शुरूआती सीमा पिछले वर्ष के संदर्भ में है, धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत टीसीएस के लिए बिक्री प्रतिफल की प्राप्ति की गणना 1 अप्रैल, 2020 से की जाएगी। इसलिए, विक्रेता के तौर पर एक व्यक्ति, एक खरीददार से 30 सितंबर, 2020 तक पचास लाख रूपए या उससे अधिक की राशि पहले ही प्राप्त कर चुका हो तो धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत टीसीएस ऐसे खरीददार से पिछले वर्ष, 1 अक्टूबर, 2020 को या उसके बाद, के दौरान बिक्री प्रतिफल की सभी प्राप्तियों पर लागू होगी।

4.5 मोटर वाहन की बिक्री पर प्रयोज्यता :

4.5.1 अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1च) के प्रावधान दस लाख रूपए से अधिक की कीमत के मोटर वाहन की बिक्री पर लागू होंगे। अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज), उप-धारा (1च) के अंतर्गत आने वाले उत्पादों की प्रयोज्यता से इसे अलग रखती है। यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है कि क्या सभी मोटर वाहनों को अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) की प्रयोज्यता से बाहर रखा गया है।

4.5.2 इस संदर्भ में यह ध्यान दिया जा सकता है कि उप-धारा (1ज) और (1च) के कार्यक्षेत्र में अंतर है। जहां उप-धारा (1च) मोटर वाहन की एकल बिक्री पर आधारित है, उप-धारा (1ज) उत्पाद की कुल बिक्री के समक्ष पिछले वर्ष के दौरान 50 लाख से अधिक की प्राप्ति के लिए है। जहां उप-धारा (1च) केवल ग्राहक को बिक्री के लिए है और नाकि डीलर को बिक्री के लिए, उप-धारा (1ज) प्रारंभिक सीमा से अधिक की सभी बिक्री के लिए है। इसलिए, समस्याएं दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि -

 (i) एक डीलर से बिक्री प्रतिफल की प्राप्ति अधिनियम की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत टीसीएस के अनुसार होगी यदि ऐसी बिक्री अधिनियम की धारा 206 की उप-धारा (1च) के अंतर्गत टीसीएस का विषय नहीं है

 (ii) ग्राहक को बिक्री के मामले में, एक खरीददार को दस लाख रूपए या उससे कम की कीमत के मोटर वाहन की बिक्री के लिए बिक्री प्रतिफल की प्राप्ति अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत टीसीएस का विषय होगी यदि पिछले वर्ष के दौरान ऐसे वाहनों के लिए बिक्री प्रतिफल की प्राप्ति पिछले वर्ष के दौरान पचास लाख रूपए से अधिक हो।

(iii) ग्राहक को बिक्री के मामले में, दस लाख रूपए से अधिक की कीमत के मोटर वाहन की बिक्री के लिए बिक्री प्रतिफल की प्राप्ति अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत टीसीएस का विषय होगी यदि ऐसी बिक्री अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1च) के अंतर्गत टीसीएस का विषय है।

4.6 बिक्री रिटर्न, छूट या अप्रत्यक्ष कर के लिए समायोजन

4.6.1 यह स्पष्ट करने के लिए अनुरोध किया गया है कि क्या अधिनियम की धारा 206 की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत कर के एकत्रीकरण के लिए जीएसटी सहित बिक्री विवरणी, छूट या अप्रत्यक्ष कर के लिए किया जाना आवश्यक है या नहीं। एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि जीएसटी सहित बिक्री विवरणी, छूट या अप्रत्यक्ष कर के कारण कोई समायोजन अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के अंतर्गत कर के संग्रहण के लिए किया जाना आवश्यक नहीं है चूंकि संग्रहण बिक्री प्रतिफल की राशि की प्राप्ति के संदर्भ में किया जाता है।

4.7 विदेशी एयरलाइंसों को दिए जाने वाला र्इंधन

4.7.1 यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है कि यदि अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के प्रावधान भारत में हवाई अड्डों पर विदेशी एयरलाइंस को दिए जाने वाले र्इंधन पर लागू होंगे। इस समस्या को दूर करने के लिए यह बताया गया है कि अधिनियम की धारा 206ग की उप-धारा (1ज) के प्रावधान भारत में हवाई अड्डों पर विदेशी एयरलाइंस को दिए जाने वाले र्इंधन के लिए प्राप्त बिक्री प्रतिफल पर लागू नहीं होंगे।

 

(अंकित जैन)

अवर सचिव, भारत सरकार

 

निम्न को प्रति

  1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/एमओएस (एफ) का ओएसडी

  2. सचिव (राजस्व) का पीएस

  3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी

  4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त

  5. सीबीडीटी के सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव

  6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा पाल

  7. संयुक्त सचिव व कानूनी सलाहकार, कानून व विधि मंत्रालय, नई दिल्ली

  8. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता

  9. आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय

10. संयुक्त आयकर आयुक्त (डाटाबेस प्रकोष्ठ) www.irsofficersonline.gov.in पर अपलोडिंग के लिए