आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 13/2023

परिपत्र की तिथि

26/07/2023

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

26/07/2023

 परिपत्र सं. 13/2023

परिपत्र सं. 13/2023

एफ.नं. 173/21/2023-आईटीए-I

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

नई दिल्ली, 26 जुलाई, 2023

विषय : निर्धारण वर्ष 2018-19 से निर्धारण वर्ष 2022-23 तक विभिन्न निर्धारण वर्षों के लिए अधिनियम की धारा 80प के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए आय की विवरणी हेतु आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119 की उप-धारा (2) के वाक्यांश (ख) के अंतर्गत देरी के लिए क्षमा

आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् अधिनियम के तौर पर संदर्भित) की धारा 80प को अधिनियम के अध्याय VIक-भाग-ग (कुछ आय के संदर्भ में कटौतियां) के अंतर्गत सहकारी संस्थाओं की आय के संदर्भ में कटौती हेतु प्रदान किया गया है।

2- अभी तक चूंकि अधिनियम की धारा 80प संबंधित है, वित्त अधिनियम, 2018 के द्वारा प्रभावी तिथि 01.04.2018 से अधिनियम की धारा 80कग को प्रतिस्थापित किया गया है जो निम्नानुसार बताता है कि—

कटौती स्वीकार्य नही है जबतक विवरणी प्रस्तुत न हो

80कग. जहां निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक किसी पिछले वर्ष की निर्धारिती की कुल आय की गणना निम्न तिथि पर या उसके बाद प्रारंभ होती हो -

(i) 1 अप्रैल, 2006 को या बाद लेकिन 1 अप्रैल, 2018 से पहले, किसी भी प्रकार की कटौती धारा 80-झक या धारा 80-झकख या धारा 80-झख या धारा 80-झग या धारा 80-झघ या धारा 80-झड़ के अंतर्गत स्वीकार्य है

(ii) 1 अप्रैल, 2018 कोई कटौती शीर्षक "ग- कुछ आय के संदर्भ में कटौतियां के अंतर्गत इस अध्याय के किसी प्रावधान के अंतर्गत स्वीकार्य है,

ऐसी काई कटौती स्वीकार्य नही होगी जबतक वह धारा 139 की उप-धारा (1) के अंतर्गत निर्दिष्ट देय तिथि तक या उससे पहले ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत न कर दे।

3. आय की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी संबंधित राज्य कानूनों के तहत खातों का अंकेक्षण कराने में देरी के कारण हुई थी को निर्दिष्ट करते हुए आय की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी को माफ करने और ऐसे विवरणी को अधिनियम की धारा 139 की उप-धारा (1) के तहत नियत तिथि के भीतर प्रस्तुत किए गए विवरणी के रूप में मानने के संबंध में निर्धारण वर्ष 2018-19 से वर्ष 2022-23 तक विभिन्न मूल्यांकन वर्षों के लिए अधिनियम की धारा 80प के तहत कटौती का दावा करने वाली सहकारी समितियों से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (इसके बाद 'बोर्ड' के रूप में संदर्भित) में आवेदन प्राप्त हुए हैं।

4. पैरा 3 में संदर्भित मामलों में वास्तविक कठिनाई को कम करने के लिए, बोर्ड, अधिनियम की धारा 119 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निर्देश देता है कि मुख्य आयकर आयुक्त (सीसआईटी)/आयकर महानिदेशक (ाअयरक महानिदेशक) बोर्ड द्वारा ऐसे आवेदनों के हस्तांतरण पर, बोर्ड के समक्ष लंबित विलंब माफी के ऐसे आवेदनों से निपटने के लिए अधिकृत हैं, और ऐसे आवेदनों पर कानून के अनुसार गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेते हैं।

5. बोर्ड इसके द्वारा निर्देश देता है कि सीसीआईटी/डीजीआईटी, अब से, अधिनियम की धारा 80प के तहत कटौती का दावा करने वाली आय की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी की माफी के लिए सभी लंबित और साथ ही नए आवेदनों को स्वीकार करेगा, जो या तो बोर्ड में या क्षेत्रीय कार्यलय में दायर किए गए हैं। मूल्यांकन वर्ष 2018-19 से 2022-23 के लिए और ऐसे आवेदनों पर कानून के अनुसार गुण-दोष के आधार पर निर्णय लें, जहां ऐसे व्यक्ति को संबंधित राज्य कानूनों के तहत अपने खातों का अंकेक्षण करवाना आवश्यक है।

6. उपरोक्त पैरा-5 के संदर्भ में, आय की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी की माफी के लिए ऐसे आवेदनों पर निर्णय लेते समय सीसीआईटी/डीजीआईटी को खुद को संतुष्ट करना होगा कि आवेदक का मामला अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत माफी के लिए एक उपयुक्त मामला है। सीसीआईटी/डीजीआईटी ऐसे आवेदनों पर निर्णय लेते समय निम्नलिखित की जांच करेगा -

(i) अधिनियम की धारा 139 की उपधारा (1) के तहत नियत तिथि के भीतर आय की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी उचित दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ निर्धारिती के नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण हुई थी;

(ii) जहां आय की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी ऐसे संबंधित राज्य कानून के तहत नियुक्त वैधानिक लेखा परीक्षकों द्वारा खातों का अंकेक्षण कराने में देरी के कारण हुई, जिसके तहत ऐसे व्यक्ति को अपने खातों का अंकेक्षण करवाना आवश्यक है, अंकेक्षण के पूरा होने की तारीख साथ ही अधिनियम की धारा 139 की उपधारा (1) के तहत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख और

(iii) मामले से संबंधित कर परिहार या कर चोरी की ओर संकेत करने वाला कोई अन्य मुद्दा, जो सत्यापन के दौरान प्रकाश में आता है और या तो प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष से संबंधित होता है या अन्य मूल्यांकन वर्ष के साथ प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष का संबंध स्थापित करता है।

6.1 उक्त पैरा 6(iii) के अंतर्गत आने वाले मामलों में कानून के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई की आवश्यकता होगी।

7. सीसीआईटी/डीजीआईटी अधिमानत: उस महीने के अंत से तीन महीने के भीतर आवेदन का निपटान करेगा जिसमें ऐसा आवेदन आवेदक से प्राप्त होता है या बोर्ड द्वारा स्थानांतरित किया जाता है। अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के तहत आवेदन को खारिज करने का कोई भी आदेश आवेदक को सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना पारित नहीं किया जाएगा।

8. हिंदी संस्करण का अनुसरण किया जाना है।

(विकास िसंह)

निदेशक (आईटीए-I)

निम्न को प्रति

1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (आर) का पीएस/एमओएस (आर) का ओएसडी

2.  राजस्व सचिव का पीपीएस

3.  अध्यक्ष, सीबीडीटी व सभी सदस्य, सीबीडीटी

4.  समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक

5.  प्रधान मुख्य लेखा नियंत्रक, नई दिल्ली

6.  संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त, सीबीडीटी

7.  वेब प्रबंधक, प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने के अनुरोध के साथ

8.  आयकर आयुक्त (मीडिया व टीपी) और आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी, नई दिल्ली

9.  महासचिव, आईआरएस संघ/महासचिव, आईटीजीओए/अखिल भारतीय अजा. व अजजा कर्मचारी कल्याण संघ/आयकर कर्मचारी संघ (आईटीईएफ)

10.  जेसीआईटी, डाटाबेस प्रकोष्ठ वेबसाइट www.irsofficersonline.org पर अपलोडिंग के लिए

निदेशक (आईटीए-I)