आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 12/2024

परिपत्र की तिथि

15/10/2024

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

15/10/2024

परिपत्र सं. 12/2024

2024 का परिपत्र सं. 12

एफ.नं. 370142/22/2024-टीपीएल

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

दिनांक : 15 अक्टूबर, 2024

विषय : प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास योजना, 2024 के प्रावधानों पर दिशानिर्देश टिप्पणी 1/2024 - संबंधित

लंबित आयकर मुकदमेबाजी के संबंध में विवाद का समाधान करने के लिए वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2024 के अध्याय IV के माध्यम से प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास योजना, 2024 (इसके बाद डीटीवीएसवी योजना, 2024 के रूप में संदर्भित) को अधिनियमित किया गया है। योजना का उद्देश्य, अन्य बातों के साथ-साथ, लंबित आयकर मुकदमेबाजी को कम करना, सरकार के लिए समय पर राजस्व उत्पन्न करना और करदाताओं को मानसिक शांति, निश्चितता और समय और संसाधनों की बचत प्रदान करके लाभान्वित करना है जो अन्यथा लंबे समय तक खींची गई और कष्टकारी मुकदमेबाजी प्रक्रिया में खर्च हो जाते था।

2. कथित योजना के प्रारंभ होने की तिथि 01.10.2024 के तौर पर पहले ही अधिसूचित कर दी गई है। इसके अलावा, योजना को सक्षम करने वाले नियम और प्रपत्रों को भी 20.09.2024 को अधिसूचित कर दिया गया है। डीटीवीएसवी योजना, 2024 के अधिनियमन के बाद उसमें शामिल विभिन्न प्रावधानों के संदर्भ में दिशानिर्देश की मांग करने वाले हितधारकों की ओर से कई सवाल प्राप्त हुए हैं।

3. तद्नुसार, डीटीपीएसवी योजना, 2024, जो बोर्ड को जनहित में निर्देश या अनुदेश जारी करने का अधिकार देती है, की धारा 97 के अंतर्गत एतद्द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (एफएक्यू) के उत्तर के रूप में निम्नलिखित दिशानिर्देश संबंधी नोट जारी किया जाता है।

क्र.सं.

मुद्दे

टिप्पणी

योग्यता मामले

1

किस अपील को प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास योजना, 2024 के अंतर्गत शामिल किया जाता है

कृपया प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास योजना, 2024 ('डीटीवीएसवी योजना, 2024' या 'योजना') की धारा 89 संदर्भित करें वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2024 के अध्याय IV में निहित योजना कीधारा 89 को "अपीलकर्ता" की परिभाषा के लिए प्रदान किया गया है -

 (i)  एक व्यक्ति जिसके मामले में अपील या रिट याचिका (डब्ल्यूपी) या विशेष अवकाश याचिका (एसआई.पी) या तो उसके द्वारा या आयकर प्राधिकरण द्वारा या दोनों द्वारा, अपीलीय फोरम के समक्ष दायर की गई हो और ऐसी अपील या याचिका निर्दिष्ट तिथि यानी 22.7.2024 तक लंबित हो; या

(ii)  एक व्यक्ति जिसने आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 114ग के अंतर्गत विवाद समाधान पैनल (डीआरपी) के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज की हो और डीआरपी 22.07.2024 को या उससे पहले किसी निर्देश को जारी न किया हो

(iii) एक व्यक्ति जिसके मामले में अधिनियम की धारा 144ग(5) के अंतर्गत डीआरपी न जारी किया गया हो और निर्धारण अधिकारी ने 22.07.2024 को या उससे पहले धारा 144ग(13) के अंतर्गत निर्धारण पूरा न किया हो; या

(iv) एक व्यक्ति जिसने अधिनियम की धारा 264 के अंतर्गत संशोधन के लिए आवेदन न किया हो और ऐसा आवेदन 22.07.2024 तक लंबित हो

गैर-योग्यता मामले

2

जो मामले डीटीवीएसवी योजना, 2024 के अंतर्गत शामिल न हो

योजना की धारा 96 के अनुसार, योजना, अन्य विषयों के साथ-साथ, बकाए कर के संदर्भ में लागू नहीं होगी -

 (i) एक ऐसे निर्धारण वर्ष के संबंध में जिसके संदर्भ में एक निर्धारण अधिनियम की धारा 132/132क के अंतर्गत किए गए अन्वेषण के आधार पर अधिनियम की धारा 143(3)/144/147/153क/153ग के अंतर्गत किया गया है

(ii) एक निर्धारण वर्ष से संबंधित जिसके संदर्भ में अभियोजन घोषणा करने की तिथि को या उससे पहले किया गया हो;

(iii) भारत के बाहर स्थित किसी स्त्रोत से किसी अघोषित आय या भारत के बाहर स्थित अघोषित संपत्ति से संबंधित

(iv) अधिनियम की धारा 90 या धारा 90क में संदर्भित समझौते के अंतर्गत प्राप्त सूचना के आधार पर किए गए निर्धारण या पुर्ननिर्धारण से संबंधित, यदि यह किसी बकाए कर से संबंधित हो

कुछ अन्य मामले भी हैं जहां सीओएफईपीओएसए अधिनियम, 1974, यूएपीए अधिनियम, 1967, एनडीपीएस अधिनियम 1985, पीबीपीटी अधिनियम, 1988, पीसी अधिनियम, 1988, पीएमएलए 2002 आदि के प्रावधान लागू हो सकते हैं। ऐसे मामले भी योजना में शामिल नहीं हैं।

अधिक जानकारी के लिए, योजना की धारा 96 देखें।

दरें

3

कृपया डीटीवीएसवी योजना, 2024 के अनुसार बकाए कर पर देययोग्य राशि प्रदान करें

तालिका 1

क्र.सं. बकाए कर का रूप देययोग्य राशि जहां घोषणा 31.12.2024 को या उससे पहले की गई हो देययोग्य राशि जहां घोषणा 01.01.2025 को या उससे पहले व अंतिम तिथि से पहले की गई हो
1 विवादित कर, ब्याज, जुर्माना सहित बकाया कर (नया अपीलार्थी) विवादित कर का 100 प्रतिशत विवादित कर का 110 प्रतिशत
2 विवादित कर, ब्याज, जुर्माना सहित बकाया कर (पुराना अपीलार्थी) विवादित कर का 110 प्रतिशत विवादित कर का 120 प्रतिशत
3 विवादित ब्याज/जुर्माना शुल्क से संबंधित बकाया कर (नया अपीलार्थी) विवादित ब्याज/जुर्माना/शुल्क का 25 प्रतिशत विवादित ब्याज/जुर्माना/शुल्क का 30 प्रतिशत
4 विवादित ब्याज/जुर्माना शुल्क से संबंधित बकाया कर (पुराना अपीलार्थी) विवादित ब्याज/जुर्माना/शुल्क का 30 प्रतिशत विवादित ब्याज/जुर्माना/शुल्क का 35 प्रतिशत

  •  जहां किसी विवादित मुद्दे पर कर प्राधिकरण द्वारा अपील/रिट याचिका/एसएलपी दायर की जाती है, देय राशि उपरोक्त तालिका में निर्दिष्ट देय राशि का 50 प्रतिशत होगी।

  •  जहां अपीलकर्ता द्वारा आयुक्त (अपील)/संयुक्त आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर की जाती है या किसी ऐसे मुद्दे पर विवाद समाधान पैनल के समक्ष आपत्तियां दायर की जाती हैं, जिस पर उसे पहले ही आईटीएटी (जहां ऐसे मुद्दे पर निर्णय उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पलटा नहीं जाता है) द्वारा उसके पक्ष में निर्णय मिल चुका है या उच्च न्यायालय (जहां ऐसे मुद्दे पर निर्णय सर्वोच्च न्यायलय द्वारा पलटा नहीं जाता है), देय राशि उपरोक्त तालिका में निर्दिष्ट देय राशि का 50 प्रतिशत होगी

  •  जहां अपीलकर्ता द्वारा आईटीएटी के समक्ष किसी ऐसे मुद्दे पर अपील की जाती है, जिस पर उसे पहले ही उच्च न्यायालय द्वसास अपने पक्ष में निर्णय मिल चुका है (जहां ऐसे मुद्दे पर निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पलटा नहीं गया है), देय राशि उपरोक्त तालिका में निर्दिष्ट देय राशि का 50 प्रतिशत होगी

प्रपत्र और समयसीमा का प्रकार

4

योजना में निर्दिष्ट प्रपत्र क्या है

उक्त योजना के लिए चार पृथक प्रपत्रों को अधिसूचित किया गया है। यह इस प्रकार है :

प्रपत्र-1 : घोषणा करने के लिए प्रपत्र और घोषणाकर्ता द्वारा वचन

प्रपत्र-2 : नामित प्राधिकारी द्वारा जारी किए जाने के लिए प्रमाणपत्र हेतु प्रपत्र

प्रपत्र-3 : घोषणाकर्ता द्वारा भुगतान की सूचना हेतु प्रपत्र

प्रपत्र-4 : नामित प्राधिकारी द्वार बकाए कर का पूर्ण और अंतिम निपटान हेतु आदेश

  •  योजना में यह भी प्रावधान है कि प्रत्येक विवाद के लिए फॉर्म-I अलग से दाखिल किया जाएगा, बशर्ते कि जहां अपीलकर्ता और आयकर प्राधिकरण, दोनों ने एक ही आदेश के संबंध में अपील दायर की हो, ऐसे मामले में एकल फॉर्म-I दाखिल किया जाएगा।

  •  भुगतान की सूचना प्रपत्र-3 में दी जानी है और अपील, आपत्ति, आवेदन, रिट याचिका, विशेष अनुमति याचिका या दावे को वापस लेने के प्रमाण के साथ नामित प्राधिकारी को प्रस्तुत की जानी है।

5

योजना में निर्दिष्ट विभिन्न समय-सीमाएं क्या हैं ?

योजना में विभिन्न निर्दिष्ट समय सीमाएं इस प्रकार हैं :

(i)  घोषणा और वचन न्यूनतम प्रारंभिक सीमा पर देययोग्य राशि को रखने के लिए 31.12.2024 को या उससे पहले प्रपत्र-I में करदाता द्वारा दाखिल किया जाएगा। यदि 31.12.2024 के बाद घोषणा और वचन दिया जाता है तो देययोग्य राशि उक्त तालिका में दी गई दरों के अनुसार बढ़ाई जाएगी

(ii) नामित प्राधिकारी करदाता द्वारा देय राशि निर्धारित करने के लिए घोषणा की प्राप्ति की तारीख से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर प्रपत्र-2 जारी करेगा।

(iii) करदाता उस राशि का भुगतान करेगा जैसा प्रमाणपत्र की प्राप्ति की तिथि से पंद्रह दिनों की अवधि के अंदर प्रपत्र-2 में निर्धारित है और प्रपत्र-3 में ऐसे भुगतान के ब्यौरे की सूचना देगा

(iv) प्रपत्र-3 की प्राप्ति पर, नामित प्राधिकारी यह निर्दिष्ट करते हुए प्रपत्र-4 में आदेश पारित करेगा कि करदाता ने पूर्ण और अंतिम राशि का भुगतान कर दिया है

अन्वेषण निर्धारण

6

कृपया स्पष्ट करें कि कौन सा निर्धारण अधिनियम की धारा 132/132क के अंतर्गत शुरू किए गए अन्वेषण के आधार पर किया जाना है विचारनीय होगा?

धारा 153क या 153ग के तहत तय किए गए आंकलन स्पष्ट रूप से धारा 132/132क के तहत शुरू की गई खोज के आधार पर किए जाते हैं। इसलिए,

ऐसे मामले डीटीवीएसवी योजना, 2024 के लिए पात्र नहीं होंगे।

अन्य मामलों के लिए जहां मूल्यांकन धारा 143(3)1144/147 के तहत किया गया है, मामलों के निम्नलिखित तीन सेटों को उन मामलों के रूप में माना जाएगा जहां मूल्यांकन धारा 132/132क के तहत शुरू की गई खोज के आधार पर किया गया है।

यह मामले हैं

((i) जहां अन्वेषण 1 अप्रैल, 2021 को या उसे बाद धारा 132 के अंतर्गत प्रारंभ होता है या बही खाते, अन्य दस्तावेज या कोई परिसंपत्तिधारा 132क के अंतर्गत आपेक्षित होती है, यदि निर्धारिती और निर्धारण तद्नुसार किए गए हों

(ii) जहां निर्धारण अधिकारी को प्रधान आयुक्त या आयुक्त की पूर्व अनुमति के साथ संतुष्टि हो कि कोई राशि, बुलियन, आभूषण या अन्य कीमत सामान या उत्पाद जिसे 1 अप्रैल, 2021 को या बाद किसी अन्य व्यक्ति के मामले में धारा 132 या धारा 132क के अंतर्गत जब्त किया गया हो या मांगा गया हो , निर्धारिती से संबंधित है और निर्धारण तद्नुसार किया गया है; या

(iii) जहां निर्धारण अधिकारी को प्रधान आयुक्त या आयुक्त की पूर्व अनुमति के साथ संतुष्टि हो कि कोई बही खाते या दस्तावेज जिसे 1 अप्रैल, 2021 को या बाद किसी अन्य व्यक्ति के मामले में धारा 132 या धारा 132क के अंतर्गत जब्त किया गया हो या मांगा गया हो, जो निर्धारिती से संबंधित है या उसमें शामिल कोई सूचना उससे संबंधित है और निर्धारण तद्नुसार किया गया है

पुन:स्थापित वर्ष

7

एक करदाता 4 पुन: स्थापित वर्षों में से डीटीवीएसवी योजना, 2024 में कुछ नजदीकी वर्षों का मूल्यांकन कर रहा है

यदि अग्रिम मूल्यनिर्धारण समझौता 4 पुन: स्थापित वर्षों के शेष वर्षों के लिए अपनाया गया है

सीबीडीटी परिपत्र 15/2015 दिनांक 10.06.2015 के अनुसार

आआवेदक के पास उन वर्षों को चुनने का विकल्प नहीं है जिनके लिए वह वापसी के लिए आवेदन करना चाहता है। आवेदक को या तो सभी चार वर्षों के लिए आवेदन करना होगा या आवेदन ही नहीं करना होगा। हालांकि, यदि शामिल किया गया अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन वापसी वर्ष में मौजूद नहीं था या वापसी वर्ष में कुछ अयोग्यता है, तो आवेदक चार साल से कम समय के लिए वापसी के लिए आवेदन कर सकता है।

इसलिए, कुछ अपवादों में, वापसी अवधि 4 वर्षों से कम भी हो सकती है। उसी अनुरूप, यदि योजना में कुछ वर्षों का निपटान किया जाता है, तो शेष वर्षों के लिए वापसी लागू किया जा सकता है।

अपील का निपटारा

8

मान लीजिए कि कोई करदाता डीटीवीएसवी योजना, 2024 के लिए आवेदन करने के लिए पात्र है क्योंकि उसकी अपील 22.7.2024 तक लंबित है। लेकिन बाद में, इससे पहले कि करदाता डीटीवीएसवी योजना, 2024 के तहत घोषणा कर पाता, उसकी अपील का निपटारा कर दिया गया। क्या ऐसा करदाता अभी भी योजना के तहत घोषणा दाखिल कर सकता है?

डीटीवीएसवी योजना, 2024 कर विवादों के निपटान के लिए एक योजना है। जहां करदाता द्वारा घोषणा दाखिल करने से पहले निर्णय दिया गया है, वहां कोई विवाद लंबित नहीं है जब तक कि करदाता या विभाग फिर से अपील नहीं करता। इसलिए जहां कोई अपील 22.7.2024 को लंबित है, लेकिन योजना के तहत घोषणा करने की तारीख तक लंबित नहीं है, ऐसे मामले योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

हालांकि, ऐसे मामलों में जहां करदाता योजना की धारा 90 के तहत घोषणा दाखिल करता है और अपीलीय प्राधिकारी को इसकी सूचना देता है तो संबंधित अपीलीय प्राधिकारी करदाता की अपील का निपटान न करने पर विचार कर सकता है।

22.07.2024 को समाप्त न होने वाली अपील करने की समय सीमा

9

डीटीवीएसवी योजना, 2024 के मौजूदा प्रावधान उन मामलों को शामिल नहीं करते हैं जहां करदाता को आदेश प्राप्त हुए होंगे, लेकिन अपील/विशेष अवकाश याचिका करने की समय सीमा 22 जुलाई 2024 को समाप्त नहीं हुई थी। क्या ऐसी कोई संभावना है कि ऐसे मामलों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है?

योजना की धारा 89(1) के अनुसार, यह स्पष्ट है कि योजना के लिए योग्य होने के लिए एक अपीलार्थी के लिए निर्दिष्ट तिथि यानी 22.07.2024 तक लंबित होनी चाहिए। अपीलार्थी की परिभाषा उन मामलों को भी शामिल करती है जहां डीआरपी धारा 144ग(5) के निर्देशों के अंतर्गत जारी किया गया हो लेकिन निर्धारण अधिकारी ने धारा 144ग(13) के अंतर्गत निर्धारण को पूरा न किया हो

इसलिए, योजना को उन मामलों की योग्यता के लिए प्रदान नहीं किया गया है जहां अपील 22.07.2024 तक लंबित नहीं है केवल उक्त संदर्भित डीआरपी मामलों को छोड़कर

आंशिक तौर मुद्दों का निपटारा

10

जहां विवादित कर में योग्य कर बकाया के साथ-साथ गैर-योग्य कर बकाया शामिल है (जैसे,धारा 96 (क) में उल्लिखित कर बकाया, उदाहरण के लिए अघोषित विदेशी आय के संबंध में कर बकाया), क्या करदाता ऐसे मामले में इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है ?

योजना कीधारा 91(2) के अनुसार, घोषणा करने के बाद आईटीएटी/सीआईटी(ए)/जेसीआईटी (ए) के समक्ष अपील नामित प्राधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने की तारीख से निरस्त की गई है मानी जाएगी। इसके अलावा योजना की धारा 91(3) के अनुसार, करदाता को अपील वापस लेने और योजना की धारा 92(2) के तहत भुगतान की सूचना के साथ उसका प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।

इसलिए, योजना आंशिक रूप से मुद्दे को निपटाने की परिकल्पना नहीं करती है। योजना के अनुसार विवाद का पूर्ण निपटान किया जाना है।

इस प्रकार, जहां गैर-योग्य कर बकाया हैं, ऐसे विवाद इस योजना के तहत कवर किए जाने के योग्य हैं।

अपील का भाग लंबित रहते हुए जुर्माना अपील का निपटारा

11

क्या एक करदाता संबंधित क्वांटम अपील के मुकद्मेबाजी को जारी रखने के दौरान जुर्माना अपील का निपटान कर सकता है

योजना की धारा 89(1)(i) का संदर्भ लिया जा सकता है, जो 'विवादित दंड' की परिभाषा प्रदान करती है। इसमें प्रावधान है कि विवादित जुर्माना ऐसा जुर्माना है जो विवादित आय या विवादित कर के संबंध में लगाया गया है या लगाया नहीं जा सकता।

इस प्रकार, अपीलकर्ता के लिए केवल जुर्माना अपील के निपटान के लिए आवेदन करना संभव नहीं होगा, जब ऐसे जुर्माने से संबंधित विवादित कर पर अपील अभी भी लंबित है

यदि विवादित कर को शामिल करने वाली क्वांटम अपील और मूल्यांकन वर्ष के लिए ऐसे विवादित कर पर लगाए गए जुर्माने के खिलाफ अपील दोनों लंबित हैं, तो घोषणाकर्ता को विवादित कर अपील और जुर्माना अपील दोनों का विवरण देते हुए एक घोषणा पत्र दाखिल करना आवश्यक है। हालांकि, उसे केवल विवादित कर का प्रासंगिक प्रतिशत ही चुकाना होगा।

सुरक्षात्मक और ठोस परिवर्धन

12

यदि विभिन्न निर्धारण वर्षों के लिए एक ही निर्धारिती के मामले में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि साथ ही साथ सुरक्षात्मक वृद्धि हो तो वह कैसे शामिल होगी? इसी प्रकार एक निर्धारिती के मामले में पर्याप्त वृद्धि और उसी मुद्दे पर दूसरे निर्धारिती के मामले में सुरक्षात्मक बृद्धि, इसे डीटीवीएसवी योजना 2024 के तहत कैसे कवर किया जाएगा?

जहां मूल और सुरक्षात्मक परिवर्धन किए गए हैं, चाहे अलग-अलग मूल्यांकन वर्षों के लिए एक ही करदाता के मामले में हो या विभिन्न करदाताओं के हाथों में, तो दो परिवर्धन यानी मूल या सुरक्षात्मक में से किसी एक का निपटान किया जा सकता है यदि मूल परिवर्धन योजना के अंतर्गत निपटान के लिए पात्र है।

मूल या सुरक्षात्मक जोड़ से संबंधित विवाद के निपटारे पर, एओ उसी करदाता के मामले में या किसी अन्य करदाता के मामले में उसी मुद्दे से संबंधित, जैसा भी मामला हो, सुरक्षात्मक या मूल जोड़ को हटाकर सुधार आदेश पारित करेगा। .

अन्य प्रत्यक्ष करों से संबंधित विवाद

13

क्या संपत्ति कर, प्रतिभूति लेनदेन कर, कमोडिटी लेनदेन कर और ईक्वलाईजेशन लेवी से संबंधित विवाद शामिल है?

नहीं, आयकर से संबंधित विवाद ही शामिल हैं

की गई अपील की निरस्ती के लिए अनुरोध

14

यदि एक करदाता ने योजना की धारा 91(3) के अंतर्गत अपील निरस्त करने के लिए अनुरोध किया हो और अपील अभी निरस्त करने के लिए स्वीकृत न की गई हो तो करदाता ऐसे मामलों में किस प्रकार निरस्ती का प्रमाण प्रस्तुत करेगा

जहां निर्धारिती ने निरस्ती का अनुरोध किया हो और ऐसा अनुरोध प्रक्रियागत हो तो किए गए अनुरोध का प्रमाण संलग्न किया जाएगा

ब्याज की छूट संबंधी आवेदन

15

धारा 234क, 234ख या 234ग के तहत ब्याज के संबंध में, कोई अपील नहीं है लेकिन निर्धारिती ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष छूट आवेदन किया है जो 22.7.2024 तक लंबित है? क्या ऐसे मामलों को योजना के तहत शामिल किया जाएगा?

एक करदाता जिसने छूट संबंधी आवेदन किया हो वह योजना की धारा 89(1)(क) के अंतर्गत अपीलार्थी नहीं है। इसलिए, ऐसा मामला शामिल नहीं है

सर्वधन नोटिस

16

यदि संयुक्त आयकर आयुक्त(अपील)/आयकर आयुक्त (अपील) ने एक सर्वधन नोटिस दिय हों तो क्या अपीलार्थी कुल निर्धारिती आय में प्रस्तावित संवृद्ध आय को शामिल करने के बाद डीटीपीएसवी योजना, 2024 का लाभ ले सकता है?

हां। जहां जेसीआईटी (ए)/सीआईटी (ए) के समक्ष अपील लंबित है, विवादित कर वह राशि है जो अपीलकर्ता द्वारा देय है यदि ऐसी अपील अपीलकर्ता के खिलाफ तय की जानी थी। यह डीटीवीएसवी योजना, 2024 की धारा 89(1)(ञ) में 'विवादित कर' की परिभाषा के अनुसार है। इसलिए, जहां जेसीआईटी(ए)/सीजेटी(ए) ने वृद्धि नोटिस दिया है, करदाता कुल निर्धारिती आय में प्रस्तावित बढ़ी हुई आय को शामिल करने के बाद योजना का लाभ उठा सकता है। विवादित कर की उचित गणना तदनुसार प्रपत्र-I की प्रासंगिक अनुसूचियों में प्रदान की गई है।

प्रतिदाय मुद्दे

17

क्या करदाता ऐसे प्रतिदाय का प्रयोग करते हुए डीटीवीएसवी योजना, 2024 के अंतर्गत अपील का निपटान कर सकते हैं जिसकी वह विभाग द्वारा अपेक्षा कर रहे हैं?

योजना की धारा 92(2) के अनुसार, घोषणाकर्ता को प्रमाण पत्र प्राप्त होने की तारीख से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर योजना कीधारा 92(1) के तहत निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा और ऐसे भुगतान का विवरण सूचित करना होगा। निर्धारित प्रपत्र में नामित प्राधिकारी और उसके बाद नामित प्राधिकारी एक आदेश पारित करेगा जिसमें कहा जाएगा कि घोषणाकर्ता ने राशि का भुगतान कर दिया है।

योजना में विभाग से अपेक्षित किसी भी प्रतिदाय के समायोजन के माध्यम से योजना की धारा 92(1) के तहत निर्धारित राशि के भुगतान की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है।

18

यदि कर का भुगतान डीटीवीएसवी योजना, 2024 के लाभ लेने के बाद किया जाता है और बाद में करदाता इन दिए गए करों के प्रतिदाय को लेने का निर्णय लेता है तो क्या ऐसा संभव है?

नहीं योजना के अंतर्गत की गई घोषणा के अनुसार दी गई राशि योजना की धारा 94(1) के प्रावधानों के अनुसार किसी भी स्थिति में प्रतिदाय योग्य नहीं होगी।

टीडीएस/टीसीएस मुद्दे

19

क्या टीडीएस/टीसीएस को जमा करने में देरी भी योजना के अंतर्गत शामिल है?

विवादित कर में स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) से संबंधित कर शामिल हैं जो विवादित हैं और अपील में लंबित हैं। हालांकि, यदि टीडीएस या टीसीएस से संबंधित कोई विवाद नहीं है और ऐसे टीडीएस/टीसीएस जमा करने में देरी हो रही है, तो ऐसी देरी के कारण लगाए गए ब्याज से संबंधित अपील में लंबित विवाद को योजना के तहत शामिल किया जाएगा।

20

जहां निर्धारिती टीडीएस के डिडक्टर के तौर पर टीडीएस अपील (अधिनियम की धारा 201 के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध) का निपटान करता है तो क्या ऐसे कर का क्रेडिट डिडक्टर के लिए स्वीकार्य है?

हां। हालांकि, क्रेडिट डिडक्टर द्वारा विवाद के समाधान की तिथि तक स्वीकार्य होगा और इसलिए डिडक्टर हेतु लागू होने वाला ब्याज लागू होगा

21

जब निर्धारिती डीटीवीएसवी योजना, 2024 के तहत अपनी अपील का निपटान करता है, तो क्या अधिनियम की धारा 201 के तहत टीडीएस आदेश के तहत निर्धारित दायित्व से डिफॉल्ट करने वाले डिडक्टर को परिणामी राहत उपलब्ध होगी?

हां, ऐसे मामले में, चूक करने वाले डिडक्टर को संबंधित टीडीएस राशि का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, उसे अधिनियम की धारा 201 की उप-धारा (झक) के तहत ब्याज का भुगतान करना होगा। यदि अधिनियम की धारा 201 की उप-धारा (1क) के तहत ब्याज की ऐसी वसूली डीटीवीएसवी योजना, 2024 के लिए योग्य है, तो चूक करने वाले कटौतीकर्ता विवादित ब्याज की प्रासंगिक अनुसूची दाखिल करके इस विवादित ब्याज का निपटान कर सकता है।

धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत महत्वपूर्ण राहत

22

जहां निर्धारिती डीटीवीएसवी योजना, 2024 (यानी धारा 201 के अंतर्गत विरूद्धात्मक आदेश) के अंतर्गत टीडीएस के डिडक्टर के तौर पर टीडीएस देयता का निपटान करता है तो उसे अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iक) के अंतर्गत पंरतुक के अंतर्गत व्यय में महत्वपूर्ण राहत कब मिलेगी?

ऐसे मामलों में, कटौतीकर्ता उस वर्ष में अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iकं) के परंतुक के तहत महत्वपूर्ण राहत या स्वीकार्य व्यय प्राप्त करने का हकदार होगा, जिस वर्ष में कर कटौती की जानी आवश्यक थी, यदि अधिनियम कीधारा 40(क)(i)/(iकं) के तहत उसी मुद्दे के संबंध में है जिस पर धारा 201 के तहत आदेश जारी किया गया है।

हालांकि, यदि निर्धारिती ने ऐसे आगामी वर्ष में टीडीएस की वसूली के कारण बाद के वर्ष में अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iकं) के अंतर्गत उसी राशि की कटौती का दावा किया है तो वह डीटीवीएसवी योजना, 2024 के अंतर्गत निपटान के आधार पर अधिनियम की 40(क)(i)/(iकं) के अंतर्गत महत्वपूर्ण राहत का हकदार होगा।

यदि,धारा 143(3) के तहत आदेश में अन्य मुद्दे भी हो और अपीलकर्ता अधिनियम कीधारा 143(3) के तहत आदेश के संबंध में भी विवाद का निपटारा करना चाहता है, तो उस मुद्दे से संबंधित अधिनियम की धारा 40(क)(i)/(iकं) के अंतर्गत अस्वीकृति जिस पर उसने पहले ही अधिनियम की धारा 201 के तहत देनदारी का निपटान कर दिया है, विवादित कर की गणना के लिए इसे नजरअंदाज कर दिया जाएगा।

12कक के अंतर्गत पंजीकरण

23

एक न्यास को अधिनियम की धारा 12कक के अंतर्गत पंजीकरण मना किया गया है। क्या ऐसे आदेश के विरूद्धात्मक अपील डीटीवीएसवी योजना, 2024 के योग्य है

नहीं

समायोजित मामले

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एक मामले को निर्धारण अधिकारी को पूर्ण या आंशिक तौर पर समायोजित किया गया है। क्या करदाता डीटीवीएसवी योजना, 2024 का लाभ ले सकता है यदि समायोजित मामला 22.07.2024 तक लंबित हो?

योजना के अनुसार, एक अपील जो 22.7.2024 तक लंबित है, निपटान के लिए पात्र होगी। निर्धारण अधिकारी के समक्ष समायोजित मामला इस प्रकार लंबित अपील नहीं है। इसलिए, निर्धारण अधिकारी के लिए समायोजित किए गए मामले, चाहे पूरी तरह से समायोजित हो या आंशिक रूप से, योजना के अंतर्गत शामिल नहीं हैं।

एक ही आदेश के संदर्भ में एक निर्धारण वर्ष के लिए दो अपील

25

जहां एक ही आदेश के संदर्भ में एक निर्धारण वर्ष के लिए दो अपीलें दाखिल की जाती है - एक अपीलार्थी द्वारा और दूसरा कर विभाग द्वारा, चाहे अपीलार्थी केवल एक अपील को चुनें? ऐसे मामलों में विवादित कर की गणना किस प्रकार की जाएगी?

हां। अपीलकर्ता के पास उसके द्वारा दायर अपील या विभाग द्वारा दायर अपील या दोनों का निपटारा करने का विकल्प चुनने का विकल्प है। इसे प्रपत्र-1 में की जाने वाली घोषणा में निर्दिष्ट किया जाना चाहिए। प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास नियम, 2024 के नियम 4 के प्रावधान को भी देखें, जिसे निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत किया गया है : -

"जहां अपीलकर्ता और आयकर प्राधिकरण दोनों ने एक ही आदेश के संबंध में अपील या रिट याचिका या विशेष अनुमति याचिका दायर की है, अपीलकर्ता द्वारा एकल प्रपत्र-I दिया जाएगा"

तदनुसार, प्रपत्र-I में प्रासंगिक अनुसूचियां अपीलकर्ता को भरनी होंगी और विवादित कर की गणना की जाएगी।

148/148क नोटिस पर रिट

26

यदि अधिनियम की धारा 148/148क के तहत जारी नोटिस के खिलाफ रिट दायर की गई है और उस नोटिस के परिणामस्वरूप कोई मूल्यांकन आदेश पारित नहीं किया गया है, तो क्या ऐसे मामले योजना के तहत पात्र हैं?

ऐसे मामलों में आय को निर्धारित किया जाना है। इसलिए, विवादित कर पता लगाने योग्य नहीं है। इसलिए, करदाता ऐसे मामलों में योजना के योग्य नहीं होगा

उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय के समक्ष की जाने वाली अपील

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यदि अपील उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष की जाती है और जो 22.07.2024 तक लंबित है। क्या मामला टीडीवीएसवी योजना, 2024 के योग्य है?

हां

अनापत्ति व एमए

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क्या अनापत्ति दर्ज की जाती है और 22.07.2024 तक लंबित भी योजना में शामिल है

हां

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क्या 22.07.2024 तक लंबित विविध आवेदन योजना द्वारा भी शामिल है?

नहीं। एमए अपील नहीं है। इसलिए, 22.07.2024 तक कोई अपील लंबित नहीं है

उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय द्वारा रोका गया निर्धारण आदेश

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क्या ऐसे मामले में डीटीवीएसवी योजना 2024 का लाभ उठाया जा सकता है, जहां एओ द्वारा पारित मूल्यांकन आदेश की प्रवर्तनीयता पर उच्च न्यायालयश् या उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है?

नहीं। योजना के तहत 22.7.2024 को लंबित क्वांटम अपील का निपटारा किया जा सकता है। जहां एक मूल्यांकन आदेश पर रोक लगा दी गई है, यह 22.7.2024 को लंबित अपील के बराबर नहीं है।

अन्य मुद्दे

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अधिनियम की धारा 143(3) के तहत मूल्यांकन आदेश एक मूल्यांकन वर्ष के लिए निर्धारिती के मामले में पारित किया गया था। उक्त मूल्यांकन आदेश आईटीएटी के पास लंबित है। बाद में उसी मूल्यांकन वर्ष के लिए धारा 147/143(3) के तहत एक और आदेश पारित किया गया और वह सीआईटी (अपील) के पास लंबित है? क्या डीटीवीएसवी योजना, 2024 के तहत दोनों या एक आर्डर का निपटान किया जा सकता है?

इस मामले में अपीलकर्ता के पास दोनों अपीलों में से किसी एक या दोनों अपीलों को एक ही मूल्यांकन वर्ष के लिए निपटाने का विकल्प है।

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास नियम, 2024 के नियम 4(1) के अनुसार, प्रत्येक आदेश के संबंध में घोषणा अलग से दाखिल की जाएगी। इसलिए, यदि कोई करदाता दोनों अपीलों का निपटारा करने का निर्णय लेता है तो उसे दोनों आदेशों के लिए अलग-अलग घोषणा दाखिल करनी होगी।

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किसी ऐसे मुद्दे पर लंबित अपील में 50 प्रतिशत रियायत का कोई प्रावधान नहीं है जहां निर्धारिती को सर्वोच्च न्यायालय से उस झूठ पर राहत मिली हो?

यदि किसी मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय से अपीलकर्ता के पक्ष में फैसला आ गया है, तो उस मुद्दे के संबंध में अब कोई विवाद नहीं है और उसे उस मुद्दे को सुलझाने की आवश्यकता नहीं है। यदि वह मुद्दा कई मुद्दों का हिस्सा है, तो विवादित कर इस मुद्दे पर शून्य कर की गणना करते समय अन्य मुद्दों पर गिना जा सकता है

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धारा 143(3) के तहत दो मुद्दों पर परिवर्धन किया गया जबकि अपील केवल एक परिवर्धन के लिए दायर की गई है। क्या दोनों अतिरिक्त के लिए ब्याज और जुर्माना मांफ किया जाएगा।

डीटीवीएसवी योजना के तहत, 2024 ब्याज और जुर्माना केवल उस मुद्दे के संबंध में मांफ किया जाएगा जो अपील में विवादित है और जिसके लिए घोषणा दायर की गई है। इसलिए, अविवादित मुद्दे के लिए कर, ब्याज और जुर्माना देय होगा

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एक बार डीटीवीएसवी योजना, 2024 के अंतर्गत घोषणा करने पर और वित्तीय परेशानियों के लिए भुगतान तद्नुसार नहीं किया गया है तो क्या घोषणा निष्क्रिय कर दी जाएगी?

हां, योजना की धारा 91(5) के प्रावधानों के अनुसार, इसे माना जाएगा कि जैसे घोषणा नहीं की गई है

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क्या डीटीवीएसवी योजना, 2024 के तहत अभियोजन से छूट केवल घोषणाकर्ता के लिए है या निपटाए गए 10 विवादों के संबंध में कंपनी के निदेशक या फर्म के भागीदार के लिए भी है।

यदि किसी विवाद का निपटारा योजना के तहत किया गया है, तो उस विवाद के संबंध में अभियोजन से छूट अधिनियम की धारा 278ख के तहत उसी विवाद के संबंध में कंपनी/फर्म के निदेशक/भागीदार (घोषणाकर्ता होने के नाते) को भी मिलेगी।

(सुरबेदु ठाकुर)

अवर सचिव, भारत सरकार

निम्न को प्रति :

1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस (एफ) का पीएस/एमओएस(एफ) का ओएसडी

2. राजस्व (सचिव) का ओएसडी

3. अध्यक्ष, सीबीडीटी) व सभी सदस्य, सीबीडीटी

4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त

5. सभी संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव, सीबीडीटी

6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

7. संयुक्त सचिव व कानूनी सलाहकार, विधि व न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली

8. आयकर आयुक्त (एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता

9. वेब मैनेजर, अपर महानिदेशक-4, प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति), आधिकारिक वेबसाइट पर चस्पा करने के लिए

10. संयुक्त आयकर आयुक्त, (डेटाबेस प्रकोष्ठ) irsofficersonline.gov.in पर अपलोड करने के लिए