परिपत्र सं. 12/2020 : आयकर अधिनियम 1961 की धारा 269धप के अंतर्गत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों के संदर्भ में स्पष्टीकरण-संबंधित
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 12/2020
परिपत्र की तिथि
20/05/2020
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
20/05/2020
परिपत्र सं. 12/2020
एफ.सं. 370142/35/2019- टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
दिनांक 20 मई, 2020
विषय : आयकर अधिनियम 1961 की धारा 269धप के अंतर्गत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों के संदर्भ में स्पष्टीकरण-संबंधित
कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते हुए डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के घोषित नीतिगत उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए, धारा 269 धप नामक नए प्रावधान को अधिनियम (सं. 2) अधिनियम 2019 के द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 ("अधिनियम') में शामिल किया गया था।
यह धारा व्यापार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति और पिछले वर्ष से तुरंत पहले के वर्ष में रु. 50 करोड़ या उससे अधिक की बिक्री/कारोबार/कुल प्राप्ति (निर्दिष्ट व्यक्ति) वाले व्यक्ति के लिए आश्यक है जिसे निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों के माध्यम से भुगतान स्वीकृत करने के लिए अनिवार्य किया गया है।
तद्नुसार अधिसूचना सं. 105/2019 दिनांक 30.12.2019 के द्वारा (i) रुपये डेबिट कार्ड (ii) यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) (भीम-यूपीआई) और (iii) यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस क्विक रिस्पांस कोड (भीम-यूपीआई क्यूआर कोड) को भी निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों के तौर पर अधिसूचित किया गया था।
2. यह निर्दिष्ट करते हुए प्रतिनिधि प्राप्त हुए हैं कि निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों के माध्यम से भुगतान करने की अनिवार्य आवश्यकता सामान्य तौर पर बी2सी ( बिजनेस टू कंज्यूमर) व्यापार, जो सीधे रिटेल ग्राहकों से लेन-देन करते हैं, के मामले में लागू होती है। इसके अलावा चूंकि निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों की प्रति लेन-देन या प्रतिदिन की अधिकतम भुगतान सीमा है इसलिए यह उन बी2बी ( बिजनेस टू बिजनेस) व्यापारियों के लिए प्रासंगिक नहीं है जो सामान्य तौर पर भुगतान को अन्य इलेक्ट्रॉनिक विधियों जैसे एनईएफटी या आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी राशि प्राप्त करते हैं। निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक विधियों के माध्यम से भुगतान स्वीकृत करने की सुविधा ऐसे व्यापार के लिए अनिवार्य बनाना प्रशासनिक असुविधा का कारण बनेगा और इसमेंअतिरिक्त लागत शामिल हो जाएगी।
3. उक्त परिस्थिति पर विचार करते हुए एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि अधिनियम की धारा 269धप के प्रावधान केवल बी टू बी लेनदेन (अर्थात् रिटेल ग्राहकों/खरीदारों के साथ कोई लेन-देन नहीं) करने वाले निर्दिष्ट व्यक्ति के लिए लागू नहीं होगी यदि पिछले वर्ष के दौरान प्राप्त सभी कुल राशियों का कम से कम 95 प्रतिशत नकद के अलावा किसी अन्य विधि द्वारा प्राप्त होता है जिसमें बिक्री, कारोबार, कुल प्राप्ति हो के लिए प्राप्त कुल राशि भी शामिल है।
(अंकुर गोयल)
अवर सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति :
1. एफएम का पीएस/एफएम का ओएसडी/एमओएस(एफ) का पीए एमओएस( ऐप) का ओएसडी
2. सचिव(राजस्व) का पीपीएस
3. अध्यक्ष, सीबीडीटी व समस्त सदस्य, सीबीडीटी
4. समस्त प्रधान आयकर महानिदेशक/प्रधान आयकर आयुक्त
5. सीबीडीटी के समस्त संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उपसचिव/ अवर सचिव
6. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
7. जेएस व कानूनी सलाहकार, विधि एवं न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली
8. आयकर आयुक्त(एमएंडटीपी), सीबीडीटी के आधिकारिक प्रवक्ता
9. प्रधान आयकर महानिदेशक( पद्धति) कार्यालय आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए
10. जेसीआईटी( डेटाबेस प्रकोष्ठ) www.irsofficers .online.gov.in पर अपलोडिंग के लिए

