परिपत्र सं. 11/2024 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119(2)(ख) के तहत आवेदन को स्वीकृत करने के लिए या प्रतिदाय का दावा करने और हानि को अग्रेषित करने और उसके समायोजन के लिए आयकर प्राधिकारियों को प्राधिकृत करते हुए आदेश
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 11/2024
परिपत्र की तिथि
01/10/2024
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
01/10/2024
परिपत्र सं. 11/2024
एफ.नं. 312/63/2023-ओटी
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
दिनांक : 1 अक्टूबर, 2024
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119(2)(ख) के तहत आवेदन को स्वीकृत करने के लिए या प्रतिदाय का दावा करने और हानि को अग्रेषित करने और उसके समायोजन के लिए आयकर प्राधिकारियों को प्राधिकृत करते हुए आदेश
आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत प्रतिदाय का दावा करने हुए विवरणी दाखिलीकरण में देरी की क्षमा और हानि के अग्रेषण का दावा करते हुए प्रतिदाय और उसके समायोजन के लिए आवेदन पर समय-समय पर केद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी किए गए सभी पूर्व निर्देश/परिपत्र/दिशानिर्देशों को प्रतिस्थापित करते हुए वर्तमान परिपत्र प्रतिदाय का दावा करने वाले विवरणी दाखिल करने में देरी को माँफ़ करने के लिए आवेदनों और हानि के अग्रेषण का दावा करने वाली विवरणी और क्षमा की शर्तों पर समग्र दिशानिर्देशों और ऐसे मामलों पर निर्णय लेने के लिए अपनाए जाने वाली प्रक्रिया सहित उसके समायोजन से निपटने के लिए जारी किया जा रहा है।
2. (i) प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त के पास ऐसे आवेदन/दावों को स्वीकृत/निरस्त करने के अधिकार होंगे यदि ऐसे दावों की राशि किसी एक निर्धारण वर्ष में रू. 1 करोड़ से अधिक न हो।
(ii) मुख्य आयकर आयुक्तों (सीसएसीआईटी) के पास ऐसे आवेदन/दावों को स्वीकृत/निरस्त करने के अधिकार होंगे यदि ऐसे दावों की राशि किसी एक निर्धारण वर्ष में रू. 1 करोड़ से अधिक हो लेकिन रू. 3 करोड़ से अधिक न हो
(iii) प्रधान मुख्य आयकर आयुक्तों (सीसएसीआईटी) के पास ऐसे आवेदन/दावों को स्वीकृत/निरस्त करने के अधिकार होंगे यदि ऐसे दावों की राशि किसी एक निर्धारण वर्ष में रू. 3 करोड़ से अधिक हो
2.1 इसके अलावा, यह भी प्रदान किया गया है कि आयकर आयुक्त के पास निर्धारित समय-सीमा के अंदर केंद्रीयकृत प्रसंस्करण प्रकोष्ठ (सीपीसी), बेंगलूरू को आईटीआर-V भेजकर आय की विवरणी को सत्यापित करने में देरी की क्षमा के लिए अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत याचिका को स्वीकृत/निरस्त करने के अधिकार भी हैं।
3. प्रतिदाय/हानि के दावे के लिए किसी भी माँफी आवेदन पर उस मूल्यांकन वर्ष के अंत से पाँच साल से अधिक समय तक विचार नहीं किया जाएगा जिसके लिए ऐसा आवेदन/दावा किया गया है। मूल्यांकन वर्ष के अंत से पाँच साल के भीतर ऐसे आवेदन को दाखिल करने की समय सीमा 01.10.2024 को या उसके बाद दाखिल किए गए आवेदनों के लिए लागू होगी। पाँच वर्षों की यह सीमा उन सभी प्राधिकारियों पर लागू होगी जिनके पास उपरोक्त निर्धारित मौद्रिक सीमा के अनुसार देरी को माफ करने के अधिकार हैं। जहां तक संभव हो, माफी आवेदन का निपटारा उस महीने के अंत से छह महीने के भीतर किया जाना चाहिए जिसमें सक्षम प्राधिकारी को आवेदन प्राप्त हुआ है।
4. वित्त अधिनियम 2024 के माध्यम से अधिनियम की धारा 139(9क) में संशोधन के मद्देनजर ऐसे दावों के मामले में प्राधिकारियों को दी गई मौद्रिक सीमा के अंतर्गत आवेदन को स्वीकृत/निरस्त करने के अधिकार निम्नलिखित शर्तों के अनुसार होंगे :
i. अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के तहत मामले पर विचार करते समय, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारिती को नियत तारीख के भीतर आय की विवरणी दाखिल करने से उचित कारण से रोका गया था और यह मामला योग्यता के आधार पर वास्तविक कठिनाई का है।
ii. मामले से निपटने वाले अधिकारियों को क्षेत्राधिकार के मूल्याँकन अधिकारी को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक पूछताछ करने का निर्देश देने का अधिकार होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवेदन को कानून के अनुसार गुण-दोष के आधार पर निपटाया जाए।
5. ऐसे मामले में जहाँ न्यायालय के आदेश के परिणामस्वरूप प्रतिदाय का दावा उत्पन्न हुआ है, अवधि जिसके लिए ऐसी कार्यवाही किसी कानूनी न्ययालय के समक्ष लंबित है उसे पाँच वर्षों की उक्त अवधि की गणना करते समय नजरअंदाज किया जाएगा बशर्तें कि ऐसा माफी आवेदन उस महीने की समाप्ति से छह महीने के भीतर दायर किया गया हो जिसमें आदेश पारित हुआ या वित्त वर्ष की समाप्ति पर जारी हुआ हो, जो भी बाद में हो।
6. प्रतिदाय के पूरक दावे (उसी वर्ष के लिए मूल्याँकन पूरा होने के बाद प्रतिदाय की अतिरिक्त राशि का दावा) के लिए विलंबित आवेदन को माँफी के लिए स्वीकार किया जा सकता है बशर्ते कि ऊपर उल्लिखित अन्य शतेर्ं पूरी हों। प्रतिदाय का दावा करने वाली विवरणी और प्रतिदाय के पूरक दावे के मामले में प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त को नामित मौद्रिक सीमा के भीतर स्वीकृति/अस्वीकृति के अधिकार आगे निम्नलिखित शर्तों का विषय होंगे :
i. निर्धारिती की आय अधिनियम के किसी भी प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी अन्य व्यक्ति के हाथों निर्धारणीय नहीं हैं
प्रतिदाय के बिलंबित दावे पर कोई ब्याज स्वीकार्य नहीं है
ii. अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्त्रोत पर अतिरिक्त कर कटौती/संग्रह और/या अतिरिक्त अग्रिम कर भुगतान और/या स्व-मूल्यांकन कर के अधिक भुगतान के परिणामस्वरूप प्रतिदाय उत्पन्न हुआ है।
7. इस परिपत्र के पैरा 2 के अनुसार अधिकारों के प्रत्यायोजन में अधिनियम की धारा 119(2)(ख) के तहत देरी की माफी के लिए ऐसे सभी आवेदन/दावे भी शामिल होंगे जो परिपत्र जारी होने की तारीख यानी 01.10.2024 तक लंबित हैं।
8. बोर्ड के पास उपरोक्त पैरा 2 में उल्लिखित अधिकारियों द्वारा पारित या पारित नहीं किए गए किसी आदेश से उत्पन्न होने वाली किसी भी शिकायत की जाँच करने और इस परिपत्र के उचित कार्यान्वयन के लिए उन्हें उचित निर्देश जारी करने के अधिकार सुरक्षित है।
(आशीष कुमार अग्रवाल)
उप सचिव, भारत सरकार
निम्न को प्रति :
1. अध्यक्ष और सदस्य, सीबीडीटी
2. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक, अपने क्षेत्र में वितरण हेतु
3. समस्त संयुक्त सचिव/आयकर आयुक्त/निदेशक/उप सचिव/अवर सचिव, सीबीडीटी
4. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
5. अपर महानिदेशक (पीआर व पीपी) साधारण मेलिंग सूची के अनुसार वितरण के लिए और त्रैमासिक कर बुलेटिन में प्रकाशन के लिए
6. वेब मैनेजर, आधिकारिक आयकर वेबसाइट पर परिपत्र को चस्पा करने के अनुरोध के साथ
7. संयुक्त आयकर आयुक्त, डेटाबेस प्रकोष्ठ वेबसाइट irsofficersonline.gov.in पर इसे चस्पा करने के लिए
8. गार्ड फाइल

