परिपत्र सं. 1/2016 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80झक(5) में शब्द 'प्रारंभिक निर्धारण वर्ष' का स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 1/2016
परिपत्र की तिथि
15/02/2016
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
15/02/2016
परिपत्र सं. 1/2016
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, 15 फरवरी, 2016
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80झक(5) में शब्द 'प्रारंभिक निर्धारण वर्ष' का स्पष्टीकरण
आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 80झक, प्रभावी तिथि 01.04.2000 से वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा संस्थापित, को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पात्र व्यापार (जैसा उस धारा की उप-धारा (4) में संदर्भित हैं) से एक उद्यम अथवा उपक्रम द्वारा व्युत्पन्न लाभ तथा हानि के 100 प्रतिशत के समान राशि की कटौती के लिए मुहैया किया गया है। धारा 80झक की उप-धारा (2) आगे मुहैया करती है कि उक्तकथित कटौती का वर्ष जिसमें वहां निर्धारितानुसार उपक्रम ने संचालन प्रारंभ किया, विकास शुरू हुआ अथवा सेवा को मुहैया कराना प्रारंभ किया, से आरंभ होने वाले पंद्रह वर्षों (कुछ मामलों में बीस वर्ष) में से किसी भी निरंतर दस वर्षों के लिए निर्धारिती द्वारा, अपने विकल्प पर, दावा किया जा सकता है। धारा 80झक की उप-धारा (5) निम्नानुसार मुहैया कराती है कि -
"इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में कुछ भी शामिल होते हुए भी, पात्र व्यापार के लिए लाभ तथा प्राप्ति जिसके लिए उप-धारा (1) के प्रावधान लागू होते हैं, प्रारंभिक निर्धारण वर्ष अथवा किसी उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के तुरंत उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के लिए उस उप-धारा के अंतर्गत कटौती के भाग को निर्धारित करने के उद्देश्य के लिए, आंकी जाएगी जैसे ऐसे पात्र व्यापार निर्धारण वर्ष जिसके लिए निर्धारित किया जाना है, सहित तथा तक तथा प्रारंभिक निर्धारण वर्ष तथा प्रत्येक उत्तरगामी निर्धारण वर्ष के प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान निर्धारिती की आय के एकमात्र स्रोत था"।
उक्त उप-धारा में, जो कटौती की परिमात्रा के निर्धारण के तरीके को निर्धारित करती है, शब्द 'प्रारंभिक निर्धारण वर्ष' को एक संदर्भ किया गया है। यह प्रतिनिधित्व किया गया है कि कुछ निर्धारण अधिकारी शब्द 'प्रारंभिक निर्धारण वर्ष' की व्याख्या करते है जैसे वर्ष जिसमें पात्र व्यापारिक/विनिर्माण गतिविधि प्रारंभ हुर्इ थी तथा उप-धारा (2), जो वर्ष के निर्णय के लिए निर्धारिती के विकल्प का अवसर देती है जो पंद्रह (अथवा बीस) वर्षों के प्रयोज्य स्लैब में से कटौती के दावे की इच्छा रखता है, के अंतर्गत मुहैया कराए गए स्पष्ट आदेश की उपेक्षा, कटौती की स्वीकृति के लिए प्रथम वर्ष के तौर पर स्वयं संचालन/प्रारंभ आदि के ऐसे प्रथम वर्ष का विचार किया गया था,
मामले को बोर्ड द्वारा जांचा गया है। उप-धारा (2) से यह काफी स्पष्ट है कि एक निर्धारिती जो धारा 80झक के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए पात्र है, उसके पास प्रारंभिक/प्रथम वर्ष को चुनने का विकल्प है जिससे उस उप-धारा के अंतर्गत निर्धारितानुसार पंद्रह (अथवा बीस) वर्षों के स्लैब में से दस निरंतर वर्षों के लिए कटौती के दावे की आकांक्षा हो सकती है। एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि एक बार ऐसे प्रारंभिक निर्धारण वर्ष के निर्धारिती द्वारा चुने जाने पर वह वर्ष जिसके संबंध में उसने धारा में निर्धारित शर्तों को पूरा करने के अनुसार ऐसे विकल्प का प्रयोग किया है, से प्रारंभ होने वाले निरंतर दस वर्षों के लिए धारा 80झक के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए पात्र होगा। इसलिए, शब्द 'प्रारंभिक मूल्यांकन वर्ष' का अर्थ धारा 80झक के अंतर्गत दावे के लिए निर्धारिती द्वारा चुना गया प्रथम वर्ष होगा। हालांकि कटौती के दावे के लिए कुल वर्षों की संख्या पंद्रह अथवा बीस वर्षों, जो भी मामला हो, के निर्धारित स्लैब का उल्लंघन नहीं करना चाहिए तथा दावे की अवधि निरंतरता में उपयोगी होनी चाहिए।
इसलिए, निर्धारण अधिकारी को इस स्पष्टीकरण के अनुसार धारा 80झक के अंतर्गत कटौती तथा संतुष्ट होने पर कि विशेष मामले में प्रयोज्य निर्धारित समस्त शर्तें विधिवत रूप से संतुष्ट होने के पश्चात् स्वीकृति का निर्देश दिया जाता है। धारा 80झक के अंतर्गत कटौती की स्वीकार्यता पर लंबित मुकद्मेबाजी उस सीमा तक अपनार्इ नहीं जाएगी जहां ये उस धारा जिसके लिए स्थार्इ अधिवक्ता/डी.आर. उपयुक्त रूप से निर्देशित है, की उप-धारा (5) में निर्दिष्टानुसार 'प्रारंभिक निर्धारण वर्ष' की व्याख्या से संबंधित है।
उक्त को समस्त संबंधित निर्धारण अधिकारियों के ध्यान में लाया जा सकता है
दीपशिखा शर्मा
निदेशक, भारत सरकार
(एफ. सं. 200/31/2015-आर्इटीए-I)
निम्न को प्रति :
1. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष तथा समस्त अधिकारी
2. पीएस/ओएसडी से सचिव (राजस्व)
3. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) कार्यालय, पब्लिक डोमेन पर आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रतिवेदन के साथ
4. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/आयकर महानिदेशक
5. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के समस्त अधिकारी तथा तकनीकी विभाग
6. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का आर्इटीसीसी प्रभाग (3 प्रतियां)
7. आर्इआरएस अधिकारी वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए अपर/संयुक्त आयकर आयुक्त डाटोबस प्रकोष्ठ
8. विभाग के आधिकारिक हेंडल पर ट्वीट पोस्ट करने के अनुरोध के साथ अतिरिक्त महानिदेशक (पीआर, पीपी एंड ओएल)
9 गार्ड फाइल
(दीपशिखा शर्मा)
निदेशक, भारत सरकार

