आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 06/2016

परिपत्र की तिथि

29/02/2016

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

29/02/2016

परिपत्र सं. 06/2016

परिपत्र सं. 6/2016

 

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)

 

नॉर्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, दिनांक 29 फरवरी, 2016

 

विषय : शेयर तथा प्रतिभूतियों की बिक्री पर अतिरिक्त की करदेयता का निगर्मन - पूंजीगत प्राप्ति अथवा व्यापारिक आय - मुकद्मेबाजी को कम करने के लिए निर्देश - संबधी

 

आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 2 की उप-धारा (14) निर्धारिती द्वारा संघटित किसी भी प्रकार की संपत्ति को शामिल करने के लिए शब्द 'पूंजीगत परिसंपत्ति' को परिभाषित करता है चाहे संपत्ति व्यापार अथवा पेशे से संबंधित हो अथवा नहीं, लेकिन इसमें कुछ अपवादों के अनुसार निजी परिसंपत्तियां अथवा माल शामिल नहीं है। शेयरों तथा अन्य प्रतिभूतियों के संबंध में, इसे या तो पूंजीगत परिसंपत्ति अथवा माल/व्यापारिक संपत्ति अथवा दोनों के तौर पर संघटित किया जा सकता है। शेयर अथवा अन्य प्रतिभूतियों में विशेष निवेश के स्वरूप के निर्धारण के लिए, चाहे पूंजीगत परिसंपत्ति अथवा माल के तौर पर समान हो, अनिवार्य तथ्यपरक-विशिष्ट निर्धारण है तथा भूतकाल में अधिक अनिश्चितता तथा मुकद्मेबाजी का कारण हो गया है।

2. पिछले वर्षों के दौरान, न्यायालय ने कारोबारी माल के तौर पर संघटित शेयरों से निवेश के तौर पर संघटित शेयरों का अंतर करने के लिए विभिन्न मानकों को निर्धारित किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ('सीबीडीटी') ने साथ ही निर्देश सं. 1827, दिनांक 31 अगस्त, 1989 तथा 2007 की परिपत्र सं. 4 दिनांक 15 जून, 2007 के माध्यम से, क्षेत्रीय कार्यालयों की दिशा-निर्देश के लिए कथित सिद्धांतों का संक्षेपण किया है।

3. हालांकि, विवाद व्यक्तिगत मामले के तथ्यों के इन सिद्धांतों के प्रयोग पर लागू होना जारी रहता है चूंकि करदाताओं के लिए ऐसे शेयरों/प्रतिभूतियों को प्राप्त करने के प्रयोजन को साबित करना कठिनार्इ भरा रहा। इस पृष्ठभूमि में, यह पहचानने के दौरान कि पूर्ण शर्तों में कोर्इ सार्वभौमिक सिद्धांत शेयरों तथा प्रतिभूतियों (अर्थात् चाहे यह पूंजीगत प्राप्ति अथवा व्यापारिक आय के रूप में हो अथवा नहीं) की बिक्री से आय की विशेषता का निर्णय करने के लिए निर्धारित किया जा सकता है, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अनुभव करता है कि शेयर/प्रतिभूतियों का अधिकांश भाग सूचीबद्ध के संबंध में होता तथा इस मामले में मुकद्मेबाजी तथा अनिश्चतता को कम करने को देखते हुए, उक्तकथित परिपत्रों हेतु आंशिक संशोधन में, आगे निर्देश दिया जाता है कि संघटित करने वाला निर्धारण अधिकारी, चाहे सूचीबद्ध शेयरों अथवा अन्य प्रतिभूतियों से उत्सर्जित अतिरिक्त राशि को पूंजीगत प्राप्ति अथवा व्यापारिक आय के तौर पर समझा जाए अथवा नहीं, निम्नलिखित को संज्ञान में लेगा -

 क) जहां निर्धारिती स्वयं, सूचीबद्ध शेयरों तथा प्रतिभूतियों के संघटन की अवधि के बावजूद, व्यापारिक माल के तौर पर उनको समझे जाने का चुनाव करता है, ऐसे शेयरों/प्रतिभूतियों के स्थानांतरण से उत्पन्न आय इसकी व्यापारिक आय के तौर पर समझी जाएगी।

 ख) स्थानांतरण की तिथि से ठीक उत्तरगामी 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए संघटित सूचीबद्ध शेयरों तथा प्रतिभूतियों के संबंध में, यदि निर्धारिती पूंजीगत प्राप्ति के तौर पर उसके स्थानांतरण से अर्जित आय को समझे जाने का इच्छुक है तो इसे निर्धारण अधिकारी द्वारा विवाद हेतु नहीं दिया जाएगा। हालांकि, विशेष निर्धारण वर्ष में निर्धारिती द्वारा एक बार कदम उठाए जाने पर वह उत्तरगामी निर्धारण वर्षों में प्रयोज्य रहेगा साथ ही तथा करदाता को उत्तरगामी वर्षों में इस संबंध में विभिन्न/विपरीत कदम उठाने की स्वीकृति नहीं होगी।

 ग) अन्य समस्त मामलों में, लेनदेन का रूप (अर्थात् चाहे यह पूंजीगत प्राप्ति अथवा व्यापारिक आय के रूप में हो अथवा नहीं) केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी उक्त कथित परिपत्रों को देखते हुए निर्णय करेगा।

4. हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि उक्त ऐसे शेयरों/प्रतिभूतियों के संबंध में लागू नहीं होगा जहां लेनदेन की विश्वसनीयता पर स्वयं सवाल खड़ा हो, जैसे दीर्घ पूंजीगत प्राप्ति/अल्प अवधि पूंजीगत हानि अथवा अन्य कोर्इ नकली लेनदेन का झूठा दावा।

5. इसे दुहराया जाता है कि उक्त सिद्धांत मुकद्मेबाजी को कम करने तथा शेयरों तथा प्रतिभूतियों के स्थानांतरण से व्युत्पन्न आय के उपचार के निगर्मन के दृष्टिकोण में निरंतरता को बनाए रखने के एकमात्र लक्ष्य से ही सूत्रबद्ध किया गया है। अधिनियम के समस्त्त प्रासंगिक प्रावधानों को शेयरों तथा प्रतिभूतियों के स्थानांतरण सहित लेनदेन पर लागू किया जाता रहेगा।

 

(रोहित गर्ग)

उप सचिव, भारत सरकार

 

एफ. नं. 225/12/2016-आर्इटीए-II

 

निम्न को प्रति :

  1. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष तथा समस्त सदस्य

  2. ओएसडी से राजस्व सचिव

  3. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक

  4. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में समस्त संयुक्त सचिव तथा आयकर आयुक्त

  5. अपर महानिदेशक (पीआर, पीपी एवं ओएल) विभाग के आधिकारिक हैडल पर चस्पा करने के लिए

  6. अपर महानिदेशक विभागीय वेबसाइट पर आपलोडिंग के लिए डाटा बेस प्रकोष्ठ

  7. incometaxindia.gov.in तथा पब्लिक पोर्टल पर निर्देशों को अपलोड करने के लिए वेबमैनेजर

  6. आर्इटीसीसी, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (3 प्रतियां)

  7. गार्ड फाइल

 

(रोहित गर्ग)

उप सचिव, भारत सरकार