आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 9/2015

परिपत्र की तिथि

09/06/2015

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

09/06/2015

 परिपत्र सं. 9/2015

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119 - आयकर प्राधिकरण - अधीनस्थ प्राधिकारियों के लिए निर्देश - धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत प्रतिदाय दावा तथा अग्रेषित हानियों के दावे के दाखिलीकरण में विलंब के लिए क्षमा

परिपत्र 9/2015 (एफ. सं. 312/22/2015-ओटी), दिनांक 9.6.2015

 

आयकर अधिनियम, (द एक्ट) की धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत अग्रेषित हानि के दावे तथा उसके मुआवजे के दावे, धन वापसी तथा प्रतिदाय के दावे विवरणी दाखिल करने में देरी की क्षमा के लिए आवेदन के साथ व्यवहार करने के लिए समय-समय पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (द बोर्ड) द्वारा जारी समस्त पूर्व निर्देश/परिपत्र/दिशा-निर्देशों के अधिक्रमण में, वर्तमान परिपत्र को अधिक्रमण की शर्तों पर व्यापक दिशा-निर्देशों तथा ऐसे मामलों को निर्धारित करने के लिए अनुसरित होने वाली प्रक्रिया को निगर्मित किया जा रहा है।

2. प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त ऐसे आवेदन/दावे को स्वीकार/अस्वीकार करने के अधिकार का अधिकार रखते हैं यदि ऐसे दावों की राशि किसी एक निर्धारण वर्ष के लिए रू. 10 लाख से अधिक न हो। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त ऐसे आवेदन/दावों को स्वीकार/अस्वीकार करने का अधिकार रखते है यदि ऐसे दावों की राशि रू. 10 लाख से अधिक होती है लेकिन किसी एक निर्धारण वर्ष के लिए रू. 50 लाख से अधिक नही होती। रू. 50 लाख से अधिक की राशि के लिए आवेदन/दावे पर बोर्ड द्वारा विचार किया जाएगा।

3. प्रतिदाय/हानि के दावे के लिए कोर्इ क्षमा आवेदन निर्धारण वर्ष जिसके लिए ऐसा आवेदन/दावा किया गया है, की समाप्ति से छह वर्षों की अवधि के बाद विचारनीय नही होगा। छह वर्षों की यह सीमा बोर्ड सहित उक्त निर्धारित मौद्रिक सीमा के अनुसार देरी को क्षमा करने का अधिकार रखने वाले समस्त प्राधिकारियों पर लागू होगा। एक क्षमा आवेदन जहां तक संभव हो माह जिसमें सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से छह माह के भीतर निपटाया जाना चाहिए।

4. उस स्थिति में जहां प्रतिदाय दावा न्यायलय के आदेश के परिणामस्वरूप किया गया हैं, अवधि जिसके लिए ऐसी प्रक्रिया किसी न्यायालय के समक्ष लंबित थी, को छह वर्षों की कथित अवधि की गणना के दौरान नजरअंदाज किया जाएगा, बशर्ते ऐसा क्षमा आवेदन माह जिसमें न्यायालय द्वारा आदेश जारी किया गया था अथवा वित्त वर्ष की समाप्ति जो भी बाद में हो, की समाप्ति से छह माह के भीतर दाखिल किया गया हो।

5. मौद्रिक सीमा के भीतर आवेदन को स्वीकार/अस्वीकार करने का अधिकार प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त को प्रत्योजित है ऐसे दावे की स्थिति में निम्नलिखित शर्तों के अनुसार होंगे :

   i. धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत मामले पर विचार करने के दौरान, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि घोषित आय/हानि तथा/अथवा प्रतिदाय दावा सही तथा सत्य हैं तथा साथ ही योग्यता पर वास्तविक कठिनार्इ का मामला हैं।

 ii. मामले के साथ व्यवहार करने वाले प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त दावे की सत्यता को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्थिति की आवश्यक पूछताछ अथवा अनुसंधान करने के लिए क्षेत्राधिकार निर्धारण अधिकारी को निर्देश करने का अधिकार रखेंगे।

6. प्रतिदाय के पूरक दावे के लिए विलंबित आवेदन (उस वर्ष के लिए निर्धारण की समाप्ति के पश्चात् प्रतिदाय की अतिरिक्त राशि का दावा) क्षमा के लिए स्वीकृत हो सकता है बशर्ते उक्त संदर्भित अन्य शर्तें परिपूरित होती हों। प्रतिदाय के पूरक दावे तथा वापसी प्रतिदाय दावे की स्थिति में प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त को प्रत्योजित मौद्रिक सीमा के भीतर स्वीकार/अस्वीकार का अधिकार निम्नलिखित अग्रिम शर्तों के अनुसार होगा :

    i. निर्धारिती की आय अधिनियम के किसी प्रावधान के अंतर्गत किसी अन्य व्यक्ति के हाथों निर्धारणीय नही हैं।

   ii. प्रतिदाय के विलंबित दावे पर कोर्इ ब्याज स्वीकार्य नही होगा

  iii. प्रतिदाय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्व-निर्धारण कर के अधिक भुगतान अथवा/तथा अग्रिम कर के अधिक भुगतान तथा/अथवा स्रोत पर अतिरिक्त कर कटौती/संग्रहण के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है।

7. आवेदक की स्थिति में, जिसने परिपक्वता पर संचयी ब्याज की योजना को चुनने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी 8 प्रतिशत बचत (कराधान) बांड, 2003 में निवेश किया हो लेकिन व्यापारिक आधार पर अर्जित ब्याज लेखांकन किया हो तथा परिपक्वता के समय मध्यस्त बैंक ने उपार्जित ब्याज/टीडीएस आवंटन के बिना दिए गए ब्याज की पूर्ण राशि पर स्रोत पर कर कटौती की हो, शामिल विभिन्न वित्तीय वर्षों पर, तो ऐसे प्रतिदाय दावे को करने के लिए छह वर्षों की समय सीमा प्रयोज्नीय नही होगी।

8. यह परिपत्र धारा 119(2भख) के अंतर्गत देरी की क्षमा के लिए उन सभी आवेदनो/दावों को सम्लित करेगा जो परिपत्र के निगर्मन की तिथि के अनुसार लंबित है।

9. बोर्ड उक्त पैरा 2 में निर्दिष्ट प्राधिकारियों द्वारा पारित आदेश अथवा पारित न होने वाले आदेश में से उत्पन्न होने वाली किसी शिकायत की जांच करने का अधिकार सुरक्षित रखता है तथा इस परिपत्र के उचित कार्यान्वयन के लिए उनको उपयुक्त निर्देश देने का अधिकार रखता हैं। हालांकि बोर्ड ऐसे प्राधिकारी के आदेश के खिलाफ कोर्इ मूल्यांकन अथवा अपील पर विचार नही करेगा।