आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 8/2014

परिपत्र की तिथि

31/03/2014

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

31/03/2014

परिपत्र सं. 8/2014

एफ. नम्बर 173992013 - आर्इटीए - आर्इ

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

प्रत्यक्ष कर के केन्द्रीय बोर्ड

आर्इटीए डिवीजन

नर्इ दिल्ली, 31 मार्च, 2014

सर्कुलर नम्बर 8/2014

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(2ए) के प्रावधान का स्पष्टीकरण, उन मामलों में जहां फर्म की आय, मुक्त-स्पष्टीकरण सम्बंधित हो।

1 . आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) की धारा 10(2ए) के प्रावधान के स्पष्टीकरण के साथ सम्बंध में बोर्ड में एक संदर्भ प्राप्त हुआ, जो कि स्पष्टीकरण देखता है कि एक पार्टनरशिप फर्म के साझेदारों के हाथों में क्या राशि पहुंच रही है, उन मामलों में जहां फर्म, अधिनियम के पाठ 3 और 4ए के तहत कटौती या छूट की मांग करता है।

2. मामला पूरी तरह से जांचा गया। धारा 10 की उपधारा 2ए, वित्त अधिनियम, 1992, डब्ल्यू र्इ एफ 01.04.1993 के द्वारा रखी गर्इ, जो कि साझेदारी फर्म की कटौती की योजना में परिवर्तन के कारण हुआ। स्वीकृत वर्ष 1993-94 के दौरान, एक फर्म इस प्रकार स्वीकृत हुर्इ और उसकी कुल आय के भुगतान कर के लिए उत्तरदायी है। एक साझेदार कर के लिए उत्तरदायी नहीं है, एक बार फिर उसकी कुल आय में उसका साझा होगा।

3. यह स्पष्ट किया जाता है कि धारा 10 के अधिनियम की उपधारा (2ए) के लिए फर्म की कुल आय, प्रसंग के आधार पर आय के साथ जोड़ी जाती है जो कि कर्इ अधिनियमों के प्रावधानों के तहत कटौती की जाती है। हालांकि, इसका अगला स्पष्टीकरण यह है कि एक फर्म की आय, सिर्फ फर्म के हाथों में कर के लिए होनी चाहिये और इसके साझेदारों के हाथों में कर की कोर्इ भी स्थिति नहीं होनी चाहिये। इसके अनुसार, पूरा लाभ फर्म में खाते के साझेदारों को क्रेडिट, इस प्रकार के साझेदारों के हाथों में कर से मुक्त होना चाहिये, यहां तककि अगर आय कर के योग्य होकर, किसी अधिनियम के प्रावधान के अनुसार कटौती या मुक्त के खाते पर फर्म के हाथों में निल जाएं।

4. यह सभी सम्बंधित को नोटिस के द्वारा लाया जा सकता है।

5. हिंदी संस्करण का पालन होगा।

दीपशिखा शर्मा

भारत सरकार की उप-सचिव