परिपत्र सं. 6/2015 : अवधि के विस्तारण पर निश्चित परिपक्वता योजना के अंतर्गत सहभागी कोष के संबध में पूंजीगत प्राप्ति
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 6/2015
परिपत्र की तिथि
09/04/2015
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
09/04/2015
2015 की परिपत्र सं. 6
एफ. सं. 133/39/2014-टीपीएल
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी)
(टीपीएल प्रभाग)
दिनांक 9 अप्रैल, 2015
विषय : अवधि के विस्तारण पर निश्चित परिपक्वता योजना के अंतर्गत सहभागी कोष के संबध में पूंजीगत प्राप्ति
आयकर अधिनियम, 1961 (तत्पश्चात् द एक्ट के तौर पर संदर्भित) के प्रावधानों के अनुसार, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा किए गए संशोधन से पूर्व, शेयर, सूचीबद्ध प्रतिभूतियां, सहभागी कोष र्इकार्इ तथा जीरो कूपन बांड की प्रकृति में परिसंपत्ति दीर्घ कालीन पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर अर्हता प्राप्त हैं यदि अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति में छत्तीस माह से अधिक की धारण अवधि के समयानुसार बारह माह से अधिक की अवधि के लिए धारित की जाती है। तद्नुसार, बारह माह से अधिक की अवधि के लिए संघटित निश्चित परिपक्वता योजना (एफएमपी) के अंतर्गत सहभागी कोष इकार्इ दीर्घ कालीन परिसंपत्ति के तौर पर अर्हता प्राप्त है। वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा अधिनियम की धारा 2 की उप-धारा (42 क) में संशोधन छत्तीस माह से अधिक की दीर्घ कालीन पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर उसकी अर्हता के लिए सहभागी कोष (इक्विटी ओरिएंटेड फंड को छोड़कर) की र्इकार्इ तथा असूचीबद्ध कोष की स्थिति में धारण अवधि को परिवर्तित करेगा। परिणामस्वरूप, पहले किए गए एफएमपी इकार्इयों तथा 10.07.2014 के पश्चात् बेचने/छुड़ाने में किसी निवेश से उत्पन्न प्राप्ति अल्प-अवधि पूंजीगत प्राप्ति के तौर पर करारोपित होगी यदि र्इकार्इ को छत्तीस माह अथवा उससे कम की अवधि के लिए संघटित किया गया था।
2. एफएमपी निश्चित परिपक्वता तिथि वाली नियत कालिक समाप्ति निधियां हैं जिसमें निवेश की अवधि पहले अधिनिर्णित हैं। एफएमपी द्वारा एकत्रित कोष समकक्ष परिपक्वता अवधि वाली प्रतिभूतियों में परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) द्वारा निवेशित होती हैं। दीर्घ-कालीन पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर अर्ह करने हेतु एफएमपी को सक्षम करने के लिए, कुछ एएमसी प्रशासनिक सहभागी कोष ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सहभागी कोष) नियामक, 1996 के विनियमन 33(4) के प्रावधानों के अनुसार एफएमपी को स्थगित करने का विकल्प निवेशक को मुहैया करा कर मूल निवेश की तिथि से अधिक से अधिक छत्तीस माह से परे की तिथि से एफएमपी की अवधि का विस्तारण प्रस्तुत किया है। इस संबंध में प्रतिनिधित्व एफएमपी, जो नियत कालिक समाप्ति निधियां हैं, स्थगन के समय इकार्इ धारक के हाथों पूंजीगत प्राप्ति पर कर की प्रयोज्नीयता से संबंधित स्पष्टीकरण की मांग करता है।
3. इस मामले में भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचित किया है कि सेबी (सहभागी कोष) विनियमन, 1996 का विनियमन 33(4) नियत कालिक समाप्ति निधि को स्थगित करने की स्वीकृति देता है। ऐसे विनियमन निम्नानुसार हैं :—
"(4)" नियत कालिक समाप्ति निधियां परिपक्वता अवधि की समाप्ति पर पूर्णता प्रतिदाय हैं : बशर्ते कि एक नियत कालिक समाप्ति निधि योजना को स्थगित करने के लिए स्वीकृति किया जा सके यदि स्थगन से ठीक पूर्व परिसंपत्ति के होने वाले संघटन सहित स्थगन की प्रयोजन अवधि तथा अन्य शर्तें तथा अन्य समस्त योजना के वस्तुगत विवरण को र्इकार्इधारकों हेतु प्रकट किया जाए तथा इसकी प्रति को बोर्ड को दाखिल किया जाए।
बशर्ते कि ऐसा स्थगन उन इकार्इधारकों की स्थिति में ही स्वीकृत हो जो लिखित में अपनी सहमति देता है तथा र्इकार्इधारक स्थगन का चुनाव नही करता अथवा लिखित सहमति नही देता, को निविल परिसंपत्ति राशि आधारित मूल्य पर पूर्ण में अपने संघटन के प्रतिदाय की स्वीकृति होगी"।
सेबी ने स्पष्ट किया हैं कि उक्तकथित विनियामक के अनुसार स्थगन की स्थिति में योजना समान रहेगी तथा इसमें विभिन्न योजना शामिल नही होगी।
4. सहभागी कोष की स्थिति में, सहभागी कोष इकार्इ में पूंजीगत परिसंपत्ति शामिल हैं तथा ऐसी इकार्इ की कोर्इ बिक्री, विनिमय अथवा त्याग अधिनियम की धारा 2 के वाक्यांश (47) के अंतर्गत 'स्थानांतरण' है। उक्तकथित विनिमय के अनुसार स्थगन स्थानांतरण की राशि नही होगी क्योंकि योजना एक ही रहती है। तद्नुसार, एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि इस योजना को जारी रखने के लिए निवेशक द्वारा विकल्प के चुनाव के समय कोर्इ पूंजीगत प्राप्ति उत्पन्न नही होगी। हालांकि, पूंजीगत प्राप्ति योजना में से चुनाव अथवा इकार्इ के प्रतिदान के समय उत्पन्न होगी, जैसी भी स्थिति हो।
(गौरव कनौजिया)
निदेशक भारत सरकार
निम्न को प्रति :—
1. पीएस से एफएम/ओएसडी से एफएम/ओएसडी से एमओएस(आर)
2. पीएस से सचिव (राजस्व)
3. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में अन्य समस्त अधिकारी
4. समस्त प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक - अपने क्षेत्रों/प्रभारों में समस्त अधिकारियों के बीच वितरित करने के प्रतिवेदन सहित
5. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति)/प्रधान आयकर महानिदेशक (सर्तकता)/प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)/प्रधान महानिदेशक (राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी)/प्रधान आयकर महानिदेशक (एलएंडआर)
6. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मीडिया समन्वयक तथा आधिकारिक प्रवक्ता
7. विभागीय वेबसाइट पर चस्पा करने के लिए वैब मैनेजर

