आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 4/2015

परिपत्र की तिथि

26/03/2015

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

26/03/2015

 परिपत्र सं. 4/2015

परिपत्र सं. 4/2015

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली

दिनांक 26 मार्च, 2015

 

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 9 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (i) की व्याख्या 5 संबंधित स्पष्टीकरण -संबंधी

 

आयकर अधिनियम की धारा 9 आय जो भारत में अर्जित अथवा उपार्जित समझी जाती है, के लिए मुहैया करार्इ गर्इ है। कथित धारा की उप-धारा (1) के वाक्यांश (i) निम्नानुसार हैं :—

"9. (1) निम्नलिखित आय को भारत में अर्जित अथवा उपार्जित समझा जाएगा :—

   (i) भारत में किसी व्यापारिक संबंध द्वारा अथवा के माध्यम से अथवा भारत में किसी संपत्ति द्वारा अथवा के माध्यम से अथवा भारत में आय के स्रोत अथवा किसी परिसंपत्ति द्वारा अथवा के माध्यम से अथवा भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उपार्जित अथवा अर्जित समस्त आय।"

2. वित्त अधिनियम, 2012 में धारा 9 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (i) का स्पष्टीकरण 5 अंतनिर्विष्ट है :—

"स्पष्टीकरण 5 - शंकाओं के समाधान के लिए, एतद्द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि भारत से बाहर निगमित अथवा पंजीकृत कंपनी अथवा उद्यम में किसी शेयर अथवा ब्याज के तौर पर परिसंपत्ति अथवा पूंजीगत परिसंपत्ति सदैव भारत में स्थित होने के तौर पर समझी जाएगी, यदि शेयर अथवा ब्याज प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भारत में स्थित परिसंपत्ति से वस्तुत: इसकी राशि से प्राप्त होते हैं।

3. बोर्ड द्वारा यह बताते हुए कर्इ अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं कि स्पष्टीकरण 5 की प्रस्तावना का उद्देश्य भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से उपार्जित अथवा अर्जित आय के कराधान से संबंधित वैधानिक प्रयोजन को स्पष्ट करना था। शंकाओं को भारत में स्थित परिसंपत्ति के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी स्थानांतरण के परिणामस्वरूप न होकर लेनदेन हेतु व्याख्या की प्रयोजनीयता के बारे में व्यक्त किया गया है। यह बताया गया है कि व्याख्या के प्रावधानों का ऐसा विस्तारित प्रयोग भारत से बाहर विदेशी कंपनी द्वारा घोषित लाभांश आय के कराधान का परिणाम हो सकता है। यह अनभिप्रेत दोहरे कराधान का कारण हो सकता है तथा स्रोत के सामान्य स्वीकृत सिद्धांतों साथ ही साथ वित्त अधिनियम 2012 द्वारा किए गए संशोधन के उद्देश्य तथा प्रयोजन के विपरीत होगा।

4. मामले को बोर्ड में जांचा गया है। वित्त विधेयक 2012 हेतु व्याख्यात्मक ज्ञापन निम्नलिखित शब्दों में धारा 9 (1)(i) के संशोधन के प्रयोजन का वर्णन करता है :—

"आयकर अधिनियम की धारा 9 उन आय के मामलों को उपलब्ध कराती है जिसे भारत में अर्जित अथवा उपार्जित समझा गया हो। यह कर आय के लिए बनार्इ गर्इ कानूनी परिकल्पना है, जो भारत में उपार्जित हो सकती है अथवा नही भी तथा यह करयोग्य नही होगी लेकिन इस धारा द्वारा बनाए गए विचारनीय प्रावधान के लिए उप-धारा (1)(i) उन परिस्थितियों की श्रेणी को मुहैया कराती है जिसमें उपार्जित अथवा अर्जित आय भारत में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से करयोग्य है। वाक्यांश (i) में से एक अवयव भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपार्जित अथवा अर्जित आय है। इस वाक्यांश का कानूनी प्रयोजन उसके प्रयोग को विस्तृत करना है चूंकि इसमें आय शामिल है जो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उपार्जित है। यह धारा कराधान के स्रोत नियम को संहिताबद्ध करती है जिसमें राज्य, जहां आय का वास्तविक आर्थिक संपर्क है, के पास आय प्राप्त करने वाले उद्यम के निवास स्थान के बावजूद आय कर का अधिकार है। जहां निगमित ढ़ांचा क्रमागत कोष के लिए बनाया जाता है, गतिविधि जिसके लिए ऐसे लाभ रोप्य हैं, में किए गए निवेश के परिणामस्वरूप केवल वास्तविक प्राप्ति अथवा आय में उपार्जित होता है तथा नाकि विधि जिसके द्वारा ऐसे लाभ सांधित होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह सिद्धांत कर्इ राष्ट्रों द्वारा प्राधिकृत है जो मुहैया कराता है कि स्रोत राष्ट्र के पास विदेशी लेनदेन के प्राप्त लाभ पर कराधान अधिकार है जहां राशि आधारभूत परिसंपत्ति हेतु रोप्य हैं.....................

.......................कुछ न्यायिक कथन धारा 9 तथा 195 के कार्यक्षेत्र तथा प्रयोजन के बारे में शंका उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा उपार्जित अथवा अर्जित समझे जाने वाली आय के संबंध में कुछ मुद्दे हैं जहां विभिन्न न्यायिक प्राधिकारी के निर्णय परस्पर विरोधी हैं।

इसलिए, धारा 9 तथा 195 के कार्यक्षेत्र तथा प्रयोज्नीयता के संबंध में विधायी आशय को पुन: कहने के लिए पूर्वव्यापी संशोधन के स्पष्टीकरण को मुहैया कराने की आवश्यकता है तथा कानून में निश्चितता को मुहैया कराने के लिए अन्य स्पष्ट संशोधन को बनाने की आवश्यकता है।"

5. व्याख्यात्मक ज्ञापन स्पष्ट रूप से मुहैया कराता है कि धारा 9(1) (i) का संशोधन ऐसे लाभ की प्राप्ति की विधि के बावजूद भारत के साथ आर्थिक संबंध वाली प्राप्ति के कराधान के संबंध में कानूनी प्रयोजन को दोहराना था। इसलिए, व्याख्यात्मक ज्ञापन में निर्दिष्ट स्पष्टता के रूप में भारत में स्थित परिसंपत्ति के अप्रत्यक्ष स्थानांतरण से उत्पन्न आय के संबंध में कराधान के स्रोत नियम को स्पष्ट करने की मांग की गर्इ। इस स्पष्टता में देखते हुए, व्याख्या 5 विदेशी कंपनी अथवा उद्यम में किसी शेयर अथवा हित के संबंध में किसी लेनदेन द्वारा भारत से बाहर उत्पन्न किसी आय समझे जाने के संबंध में लागू होगा जिसका भारत में उपार्जित अथवा अर्जित आय के तौर पर भारत में स्थित अंतनिर्दिष्ट परिसंपत्ति के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से स्थानांतरण का प्रभाव हैं।

6. भारत से बाहर ऐसी विदेशी कंपनी द्वारा लाभांश की घोषणा का भारत में स्थित किसी अंतर्निहित परिसंपत्ति के स्थानांतरण पर प्रभाव नही है। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि शेयर, जो भारत में मौजूद परिसंपत्ति से वस्तुत: उसकी आय से प्राप्त होते हैं, के संबंध में भारत से बाहर विदेशी कंपनी द्वारा घोषित तथा दिए गए लाभांश अधिनियम की धारा 9 (1) (i) की व्याख्या 5 के प्रावधानों के आधार पर भारत में उपार्जित अथवा अर्जित नही समझे जाऐंगे।

7. यह सख्त अनुपालन के लिए समस्त संबंधितों के ध्यान में लाया जा सकता है

 

 

(अनूप सिंह)

अवर सविच भारत सरकार

 

(एफ. सं. 500/17/2015-एफटीएंडटीआर-IV)

निम्न को प्रति :

  1. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष तथा समस्त सदस्य

  2. समस्त प्रधान प्रमुख आयकर आयुक्त/प्रमुख आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/आयकर महानिदेशक

  3. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के समस्त अधिकारी तथा तकनीकी प्रभाग

  4. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का आर्इटीसीसी प्रभाग (3 प्रतियां)

  5. विभागीय वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए प्रधान आयकर महानिदेशक कार्यालय

  6. आर्इआरएस अधिकारी वेबसाइट पर अपलोडिंग के लिए डाटाबेस प्रकोष्ठ

  7. गार्ड फाइल

 

(अनूप सिंह)

अवर सविच भारत सरकार