आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

परिपत्र सं. 17/2014​

परिपत्र की तिथि

10/12/2014

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

10/12/2014

परिपत्र सं. 17/2014​

परिपत्र सं. 17/2014

एफ.नं. 275/192/2014-आयकर (बी)

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

नार्थ ब्लाक, नर्इ दिल्ली

दिनांक 10 दिसंबर, 2014

विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वित्तवर्ष 2014-15 के दौरान वेतन से आयकर कटौती

ज्ञापन सं. 08/2013 दिनांक 25.10.2013 हेतु संदर्भ आमंत्रित किया गया है जिसके द्वारा वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान आयकर अधिनियम, 1961 (बाद में अधिनियम) की धारा 192 के अंतर्गत विषय 'वेतन' के अंतर्गत आय के भुगतान द्वारा आयकर कटौती की दरों को सूचित किया गया था। वर्तमान ज्ञापन में वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान विषय 'वेतन' के अंतर्गत देययोग्य आय के भुगतान द्वारा आयकर कटौती की दरें शामिल है तथा आयकर नियम, 1962 (बाद में अधिनियम) तथा अधिनियम के कुछ संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। संबंधित अधिनियम, नियम, प्रपत्र तथा अधिसूचना आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है।

2. वित्तीय (सं. 2) अधिनियम, 2014 के अनुसार आयकर की दरें

वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 के अनुसार निम्नलिखित दरों पर वित्तीय वर्ष 2014-15 (अर्थात् निर्धारण वर्ष 2015-16) के लिए विषय 'वेतन' के अंतर्गत देययोग्य आय से अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत कटौती करना अपेक्षित है :-

2.1 कर की दरें

क. कर की साधारण दरें :

क्र.सं.

कुल आय

कर की दर

1.

जहां कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक न हो

शून्य

2.

जहां कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक हो लेकिन रू. 5,00,000/- से अधिक न हो

राशि का 10 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 2,50,000/- से अधिक हो

3. जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू. 10,00,000/- से अधिक न हो रू. 25,000/- जमा राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो
4. जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो रू. 1,25,000/- जमा राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो

ख. भारत के प्रत्येक नागरिक, व्यक्ति के लिए कर की दरें जिनकी आयु वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी समय साठ वर्ष या उससे अधिक हो लेकिन अस्सी वर्ष से कम हो

क्र.सं. कुल आय कर की दर
1 जहां कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक न हो शून्य
2 जहां कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू. 5,00,000/- से अधिक न हो राशि का 10 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 3,00,000/- से अधिक हो
3 जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू. 10,00,000/- से अधिक न हो रू. 20,000/- जमा राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो
4 जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो रू. 1,20,000/- जमा राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो

ग. भारत के प्रत्येक व्यक्ति नागरिक है, के लिए कर की दरें जिनकी आयु वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक हो

क्र.सं.

कुल आय

कर की दर

1

जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक न हो

शून्य

2.

जहां कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो लेकिन रू. 10,00,000/- से अधिक न हो

राशि का 20 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक हो

3.

जहां कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो

रू. 1,00,000/- जमा राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय रू. 10,00,000/- से अधिक हो

2.2 आयकर पर अधिभार

आयकर की राशि विशिष्ट करदाता के आयकर भुगतान पर 10 प्रतिशत की दर से अधिभार लगाया जाएगा, यदि वित्तीय वर्ष 2014-15 (निर्धारण वर्ष 2015-16) के दौरान विशिष्ट व्यक्ति की आय रू. 1 करोड़ से अधिक होती है। बहरहाल, अधिभार की राशि में इतनी बढ़ोत्तरी नहीं की जाएगी कि जहां उसकी आय रू. 1 करोड़ से अधिक हो जाए और यदि अधिभार ऐसी राशि (निर्धारिती की कुल आय में से एक करोड़़ घटाने पर) पर लगता है तो इसे कुल राशि में से एक करोड़ रूपए कम करने तक सीमित किया जाएगा।

2.3.1 आयकर पर शिक्षा उपकर

यदि कोई अधिभार हो तो, आयकर सहित राशि आयकर के दो प्रतिशत की दर से आयकर पर शिक्षा उपकर लगाया जाएगा।

2.3.2 आयकर पर माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर

यदि कोई अधिभार हो तो, आयकर सहित राशि पर एक प्रतिशत की दर से एक अतिरिक्त शिक्षा उपकर वसूला जाएगा लेकिन इसमें 2.3.1 के अनुसार आयकर पर शिक्षा उपकर शामिल नहीं होगा।

3. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत 'वेतनों' से कर कटौती स्रोत की विस्तृत योजना

3.1 कर गणना की विधि

कोर्इ भी व्यक्ति जो विषय "वेतन" के अंतर्गत किसी भी प्रकार का वेतन प्राप्त करता है उसकी वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए विषय "वेतन" के अंतर्गत निर्धारिती की अनुमानित आय पर आयकर वसूला जाएगा। आयकर की ऊपर दी गर्इ दरों के आधार पर गणना करना आपेक्षित है बशर्ते अधिनियम की धारा 206 एए के अनुसार पैन प्रस्तुत किया जाए तथा प्रत्येक भुगतान के समय कटौती की जाएगी। बहरहाल, किसी भी स्थिति में कोर्इ कर मूल से वसूला न जाए जब तक वित्तीय वर्ष के लिए रियायत राशि सहित अनुमानित वेतन आय रू. 2,50,000/- अथवा रू. 3,00,000/- अथवा रू. 5,00,000/-जो भी स्थिति बने, कर्मचारी (कर गणना के कुछ उदाहरण परिशिष्ट-I में दिए गए है) की आयु के अनुसार, से अधिक न हो।

3.2 नियोक्ता द्वारा आवश्यक कर का भुगतान

नियोक्ता को यह विकल्प दिया गया है कि वह कर्मचारी को दिए जाने वाली गैर-मौद्रिक रियायत पर कर का भुगतान करें। नियोक्ता, उसके विकल्प के अनुसार, कर्मचारी के वेतन से किसी टीडीएस को काटे बिना स्वंय एसी रियायतों का भुगतान कर सकता है। बहरहाल, नियोक्ता को उस समय कर का भुगतान करना होगा जब वह ऐसे करों का भुगतान कर चुका हो अर्थात् कर्मचारी को विषय 'वेतन' के तहत देययोग्य वेतन के भुगतान के समय।

3.2.1 औसत आयकर की गणना

ऊपर दिए गए पैरा 3.2 में निर्दिष्ट कर का भुगतान करने के लिए, कर का निर्धारण रियायत, जिसके लिए नियोक्ता द्वारा स्वयं कर का भुगतान किया गया है, राशि सहित विषय "वेतन" के अंतर्गत देययोग्य आय पर वित्तीय वर्ष के लिए लागू दरों के आधार पर आंके गए आयकर के औसत के आधार पर किया जाएगा।

3.2.2 उदाहरण

सभी रियायत राशि वाले वर्ष सहित साठ वर्ष की आयु से कम के कर्मचारी विषय "वेतन" के अंतर्गत देययोग्य आय रू. 4,50,000/- है जिसमें से रू. 50,000/- गैर मौद्रिक रियायत राशि के कारण होगी तथा नियोक्ता ऊपर दिए गए पैरा 3.2 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार ऐसी रियायतों पर कर के भुगतान का विकल्प चुन सकता है

चरण :

सभी रियायतों सहित विषय "वेतन" के तहत देययोग्य वेतन

रू. 4,50,000/-

कुल वेतन पर कर (उपकर सहित)

रू. 20,600/-

कर की औसत दर (20,600/4,50,000) X 100)

4.57 प्रतिशत

रू. 50,000/- पर देययोग्य कर (50,000 का 4.57 प्रतिशत)

रू. 2285/-

प्रति माह जमा की जाने वाली राशि

रू. 190 (रू. 190.40)= 2285/12)

नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाला कर कर्मचारी के वेतन से टीडीएस के तौर पर समझा जाएगा।

3.3 एक से अधिक नियोक्ता से वेतन

धारा 192 (2) उस स्थिति को परिभाषित कराती है जहां कोर्इ व्यक्ति एक से अधिक नियोक्ता के अधीन कार्य करता है या एक से दूसरे नियोक्ता की ओर परिवर्तित होता है। यह कर्मचारी, जो एक से अधिक नियोक्ता से वेतन प्राप्त करता है या कर रहा है, के कुल वेतन से ऐसे नियोक्ता (करदाता के चुनाव के अनुसार) द्वारा कर कटौती कराता है। कर्मचारियों को अब पूर्व/अन्य नियोक्ता द्वारा लंबित अथवा प्राप्त "वेतन" विषय के अंतर्गत वेतन की वर्तमान/चुने हुए नियोक्ता की जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा तथा लिखित में तथा उनके द्वारा तथा पूर्व/अन्य नियोक्ता द्वारा विधिवत सत्यापित वहां से काटे गए कर की जानकारी भी देनी होगी। वर्तमान/चुने हुए नियोक्ता को वेतन (पूर्व अथवा अन्य नियोक्ता से प्राप्त वेतन सहित) की कुल राशि से कर कटौती करना आपेक्षित है।

3.4 बकाया अथवा अग्रिम वेतन भुगतान के मामले में राहत

3.4.1 धारा 192 (2ए) के अंतर्गत जहां निर्धारिती सरकारी कर्मचारी अथवा कंपनी, सहकारी समिति, स्थानीय प्राधिकरण, विश्वविद्यालय, संस्थान, संस्था अथवा निकाय का कर्मचारी हो, धारा 89 (1) के अंतर्गत राहत पाने का अधिकारी होगा। वह पैरा (3.1) में संदर्भित भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को प्रस्तुत हो सकता है, प्रपत्र 10र्इ में ऐसा विवरण उनके द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए तथा इसके बाद उत्तरदायी व्यक्ति, जैसा कि निर्दिष्ट है, ऐसे विवरण के आधार पर राहत की गणना करेगा तथा उक्त पैरा (3.1) के अंतर्गत कटौती करेगा।

3.4.2 प्रभावी तिथि 1/04/2010 (वार्षिक वर्ष 2010-11) के अनुसार, उसकी सेवा, धारा 10(10सी)(i) (नियम 2बीए के साथ पठित), में निर्दिष्ट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की स्थिति अथवा उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की किसी योजना अथवा योजनाओं के कारण, की समाप्ति अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर मिले हुए अथवा मिलनेयोग्य किसी राशि की स्थिति में ऐसी कोर्इ राहत नहीं दी जाएगी, यदि उसकी ऐसी स्वैच्छिक वियुक्ति अथवा उसकी सेवा की समाप्ति अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर कोर्इ भी मिले हुए अथवा मिलने योग्य राशि के संबंध में छूट ऐसे अथवा अन्य किसी, निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 10 (10सी) के अंतर्गत बकाए का दावा किया जा सकता है।

3.5 अन्य किसी विषय के अंतर्गत आय संबंधी जानकारी:

(i) धारा 192 (2बी) ऐसे करदाता को समान वित्तीय वर्ष तथा उस स्त्रोत पर किसी अन्य कर के लिए करदाता द्वारा प्राप्त "वेतन" ( घर की संपत्ति से वेतन के विषय के अंतर्गत नुकसान को छोड़कर ऐसे विषय के अंतर्गत नुकसान की अवस्था का न होना) को छोड़कर अन्य किसी अन्य विषय के अंतर्गत वेतन का विवरण प्रस्तुत करने के योग्य बनाती है। विवरण साधारण वर्णन में भी प्रस्तुत किया जा सकता है जो नियमों के नियम 26बी (2) के अंतर्गत निर्धारित तरीके से करदाता द्वारा उचित तरह से हस्ताक्षतरित अथवा सत्यापित किया जाएगा तथा साधारण विवरण के अनुसार संबंद्ध किया जाएगा। सत्यापन का प्रपत्र निम्नानुसार पुन: प्रस्तुत करना है :-

मैं..............................................(निर्धारिती का नाम), घोषणा करता हूं कि उक्त कथन मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य है

इस कथन को दोहराया जाता है कि डीडीओ केवल "भवन संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत किसी भी नुकसान पर विचार कर सकते है। वसूले जाने वाले कर की राशि की गणना के लिए डीडीओ द्वारा अन्य किसी भी विषय के अंतर्गत हुए नुकसान पर विचार नहीं किया जाएगा।

3.6 भवन संपत्ति से आय विषय के अंतर्गत आय का ब्यौरा

भवन संपत्ति द्वारा नुकसान पर विचार करने के दौरान डीडीओ को सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी ऊपर संदर्भित किए गए घोषणा को जमा करें तथा भवन संपत्ति से ऐसे नुकसान की गणना उसके साथ संलग्न करें। निम्नलिखित विवरण प्रत्येक भवन संपत्ति के लिए पृथक रूप से "भवन संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत किए जाने वाले नुकसान के दावे के संबंध में नियोक्ता द्वारा प्राप्त अथवा रखा जाएगा।

क) सकल वार्षिक किराया/मूल्य

ख) नगरपालिका कर भुगतान, यदि हो

ग) दिए गए ब्याज, यदि हो, हेतुं कटौती संबंधी दावा

घ) अन्य कटौती संबधी दावा

ड) संपत्ति का पता

च) ऋण राशि, यदि हो तथा

छ) ऋणदाता (ऋण प्रदाता) का नाम व पता

3.6.1 भवन संपत्ति से प्राप्त आय की गणना के लिए उधार ली गर्इ पूंजी पर ब्याज की कटौती संबंधी दावे के लिए शर्तें (धारा 24 (बी))

अधिनियम की धारा 24 (बी) निम्नानुसार उधार ली गर्इ पूंजी पर ब्याज पर भवन संपत्ति से प्राप्त आय से कटौती की अनुमति देता है :-

(i)  कटौती उस स्थिति में लागू होगी जब भवन संपत्ति उसके द्वारा खरीदी जाए तथा कर्मचारी स्वयं के रहने के लिए उसका प्रयोग करें। बहरहाल, रोजगार के अन्य स्थान पर होने के कारण भवन वास्तविक तौर पर कर्मचारी द्वारा अधिगृहित नहीं है, अन्य स्थान पर उसका भवन होने पर वह भवन उससे संबंधित नहीं मान जाएगा

(ii)  कटौती का हिस्सा निम्न तालिका के अनुसार स्वीकार्य होगा

क्र.सं.

उधार ली गर्इ पूंजी का उद्देश्य

उधार ली गर्इ पूंजी की तिथि

अधिकतम स्वीकार्य कटौती

1

भवन की मरम्मत अथवा नवीकरण अथवा पुन:निर्माण

किसी भी समय

रू. 30,000/-

2

भवन का अर्जन अथवा निर्माण

01.04.1999 से पहले

रू. 30,000/-

3

भवन का अर्जन अथवा निर्माण

01.04.1999 को अथवा इसके बाद

रू. 1,50,000/-

(निर्धारण वर्ष 2014-15 तक)

रू. 2,00,000/-
(निर्धारण वर्ष 2015-16 से प्रभावी)

उक्त क्रम सं. 3 की स्थिति में

(क) भवन का अर्जन अथवा निर्माण उस वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के तीन वर्षों के भीतर होना चाहिए जिसमें पूंजी उधार ली गर्इ है। अत: डीडीओ के लिए यह आवश्यक है कि वह उस संपत्ति का समाप्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करे जिसके लिए दावे की मांग की गर्इ है, चाहे कर्मचारी द्वारा स्व: घोषणा आधार पर अथवा निर्माणकर्ता द्वारा ।

(ख) इसके आगे वित्तीय वर्ष, जिसमें संपत्ति अर्जित अथवा निर्माण (अधिनियम की अन्य किसी धारा के अंतर्गत कटौती के तौर पर स्वीकार्य ब्याज के किसी भी हिस्से तक सीमित) से वित्तीय वर्ष के लिए अग्रिम अवधि ब्याज उस साल से आगामी चार वित्तीय वर्षों में वित्तीय वर्ष के लिए समान किस्तों में काटा जाए।

(ग) कर्मचारी को डीडीओं के समक्ष उस व्यक्ति से प्रमाणपत्र प्रस्तुत कराना होगा जहां उसने देययोग्य ब्याज की राशि को निर्दिष्ट करते हुए उधार ली गर्इ राशि पर कोर्इ ब्याज देना है। यदि पुराने ऋण को चुकाने के लिए नया ऋण लिया गया है तो ऐसे चुकाए गए मूलधन तथा ब्याज के विवरण को दर्शाते हुए प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना चाहिए।

3.7 कटौती का अधिकता अथवा कमी हेतु समायोजन

धारा 192 (3) के प्रावधान कटौती करने वाले को यह अधिकार देते है कि वह वित्तीय वर्ष के दौरान पहले से किए गए कर की कटौती में किसी अधिकता या कमी का समायोजन कर सके, संबंधित वर्ष के भीतर उस कर्मचारी के लिए आगामी कटौती।

3.8 विदेशी मुद्रा में वेतन भुगतान :

विदेशी मुद्रा में देययोग्य वेतन पर कर की कटौती के लिए ऐसे वेतन की रूपए में कीमत ऐसी मुद्रा के "टैलीग्राफिक ट्रांसफर बाइंग रेट" के आधार पर गणना की जाएगी, उस तिथि के अनुसार जब मूल से कटौती करना आपेक्षित है। (नियम 26 देखें)

4. कर तथा अपने अधिभार की कटौती हेतु उत्तरदायी व्यक्ति

4.1 अधिनियम की धारा 204 (i) के अनुसार भुगतान, केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा भुगतान को छोड़कर, धारा 192 के उद्देश्य के लिए "भुगतान हेतु उत्तरदायी व्यक्ति" का अर्थ स्वयं नियोक्ता अथवा यदि नियोक्ता कंपनी हो तो, स्वयं कंपनी, उसके प्रधान अधिकारी सहित। इसके आगे, धारा 204 (iv) के अनुसार, ऋण के संबंध में, अथवा जो भी स्थिति हो, भुगतान केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार, डीडीओ अथवा अन्य किसी व्यक्ति जो भी नाम हो, ऋण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति अथवा जो भी स्थिति हो, धारा 192 के उद्देश्य के लिए "भुगतान के लिए उत्तरदायी व्यक्ति" ऐसी रकम का भुगतान करेगा।

4.2 पैरा 9 के अनुसार निर्धारित कर अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत वेतन से वसूला जाना चाहिए।

4.3 न्यूनतम दर पर कर कटौती

करदाता के क्षेत्राधिकार टीडीएस अधिकारी द्वारा करदाता द्वारा प्रपत्र सं. 13 में उनके समक्ष परिपूरित आवेदन की प्रतिक्रिया में अधिनियम की धारा 197 के अंतर्गत कर की कोर्इ कटौती न होने अथवा न्यूनतम कटौती का प्रमाणपत्र जारी किया जाए तो डीडीओ को ऐसे प्रमाणपत्र पर विचार करना चाहिए तथा यहां निर्दिष्ट दरों पर देययोग्य वेतन पर कर वसूलना चाहिए। ( नियम 28 एए देखें)। प्रमाणपत्र की विशिष्ट पहचान संख्या टीडीएस के त्रैमासिक विवरण में सूचित करना आपेक्षित है। ( प्रपत्र 27 क्यू)

4.4 कर वसूली को जमा करना

केंद्र सरकार के खाते हेतु कर कटौती के भुगतान की निर्धारित विधि तथा समय के लिए नियम 30 को संदर्भित करें

4.4.1 टीडीएस के भुगतान हेतु नियत तिथि

केंद्र सरकार के खाते हेतु भुगतान/जमा किए जाने वाले टीडीएस हेतु निर्धारित समय निम्नानुसार है:-

क) सरकारी कार्यालय की स्थिति में

क्र.सं.

विवरण

समय जब तक जमा किया जाना है

1

बिना चालान कर भुगतान (पुस्तक प्रविष्टि)

उसी दिन

2

चालान सहित कर भुगतान

अगले महीने का सातवां दिन

3

रियायत पर कर, नियोक्ता द्वारा जमा किये जाने पर के विकल्प सहित

अगले महीने का सातवां दिन

ख) गैर सरकारी कार्यालय की स्थिति में

क्र.सं.

विवरण

समय जब तक जमा किया जाना है

1

मार्च में कर कटौती

30 अप्रैल अगली वित्तीय वर्ष

2

अन्य किसी माह में कर कटौती

अगले महीने का सातवां दिन

3

रियायत पर कर, नियोक्ता द्वारा जमा किये जाने पर  के विकल्प सहित

अगले महीने का सातवां दिन

बहरहाल, यदि डीडीओ अधिनियम 192 के अंतर्गत डीटीएस के त्रैमासिक भुगतान के स्वीकृति हेतु क्षेत्राधिकार/संयुक्त आयकर आयुक्त के समक्ष आवेदन करता है तो नियम 30(3) त्रैमासिक आधार तथा निम्न तालिका में दिए गए समय के अनुसार इसके भुगतान का अधिकार देता है :-

क्र.सं.

वित्तीय वर्ष की त्रैमासिक समाप्ति तिथि

त्रैमासिक भुगतान तिथि

1

30 जून

7 जुलार्इ

2

30 सितम्बर

 7 अक्टूबर

3

31 दिसंबर

 7 जनवरी

4

31 मार्च

अगली वित्तीय वर्ष को 30 अप्रैल

4.4.2 टीडीएस के भुगतान की विधि

4.4.2.1 पुस्तक प्रविष्टि द्वारा टीडीएस के भुगतान की स्थिति में पीएओ, निधि अधिकारी द्वारा अनिवार्य विवरण का ब्यौरा

सरकारी कार्यालय, जहां चालान (पुस्तक प्रविष्टि) की प्रस्तुति के बिना केद्र सरकार को कर का भुगतान किया जाता है, की स्थिति में वेतन और लेखा अधिकारी अथवा निधि अधिकारी अथवा आहरित चेक तथा संवितरण अधिकारी अथवा अन्य किसी नाम का कोर्इ व्यक्ति जिसे ऋण काटने वाला कर कटौती के बारे में सूचित करता है अथवा केंद्र सरकार के ऋण में ऐसी राशि को डालने वाला-

(क) कर कटौती करने वाले के द्वारा कर कटौती के संबंध में आयकर महानिदेशक (सिस्टम) (टिन सुविधा सेवा केंद्र वर्तमान में मैसर्स नेशनल सिक्योरिटी डिपोजिटरी लि. द्वारा व्यवस्थित की जाती है) द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसी के महीने के अंत में 10 दिनों के भीतर प्रपत्र सं. 24जी में विवरण जमा करना चाहिए तथा उसे संबंधित माह के लिए सूचित करना चाहिए; तथा

(ब) प्रत्येक कटौतीदाता, जिसके संबंध में कटौटित राशि क्रेटिड की गर्इ है, को एजेंसी द्वारा जनित संख्या (पुस्तक पहचान संख्या अथवा बिन के अनुसार) को सूचित करना चाहिए। बिन में प्रपत्र 24जी की पावती संख्या, प्रपत्र सं. 24जी में डीडीओ अनुक्रम संख्या तथा कर के भुगतान की तिथि शामिल है।

प्रपत्र 24जी के प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया परिशिष्ट III में शामिल है। पीएओ/डीडीओ को पालन किए जाने वाले सही प्रक्रिया को समझने के लिए परिशिष्ट IV में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। क्रेंद सरकार मंत्रालय के जेडएओ/पीएओ मासिक आधार पर प्रपत्र सं. 24जी को भरने के लिए उत्तरदायी होंगे। राज्य सरकार के विभागों की स्थिति में प्रपत्र सं. 24 जी को भरने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति का विवरण परिशिष्ट V में दिया गया है।

प्रपत्र 24जी के प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया का विवरण परिशिष्ट IV में दिया गया है। पीएओ/डीडीओ को पालन किए जाने वाले सही प्रक्रिया को समझने के लिए उसमें दिए गएं अक्सर पूछे जाने वाले सवालों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

4.4.2.2 आयकर चालान द्वारा भुगतान

 (i)  आयकर चालान द्वारा भुगतान किए जाने की स्थिति में ऐसे कटौतीयोग्य कर की राशि को भारतीय रिजर्व बैंक के किसी कार्यालय अथवा भारतीय स्टेट बैंक की किसी शाखा अथवा अन्य किसी प्राधिकृत बैंक में उक्त पैरा 4.4.1 की तालिका में निर्दिष्ट समय के भीतर प्रेषण द्वारा केंद्र सरकार के ऋण में जमा किया जा सकता है।

(ii)  कंपनी तथा व्यक्ति (कंपनी को छोड़कर) जिस पर धारा 44एबी के प्रावधान लागू हों, की स्थिति में कटौती की गर्इ राशि, इलैक्ट्रानिक आयकर चालान सहित भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक में इलैक्ट्रानिक प्रेषण द्वारा किया जाएगा। (नियम 125)

राशि भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक में इलैक्ट्रानिक प्रेषण के तौर पर समझी जाएगी यदि राशि निम्न प्रकार से प्रेषित की जाए

(क)  भारतीय रिजर्व बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक अथवा अन्य प्राधिकृत बैंक की इंटरनेट सुविधा : अथवा

(ख)  डेबिट कार्ड ( अधिसूचना सं. 41/2010 दिनांक 31 मर्इ 2010)

4.5 असफल कर जमा कटौती की स्थिति में ब्याज, जुर्माना व अभियोजन

4.5.1 यदि व्यक्ति किसी भी स्त्रोत से कर का संपूर्ण अथवा कुछ भाग देने में असमर्थ रहता है तो अथवा कटौती के बाद निर्धारित समय में केंद्र सरकार के क्रेटिड में कर का संपूर्ण अथवा कुछ भाग देने में असमर्थ रहता है तो धारा 201 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवार्इ के लिए जिम्मेदार होगा तथा ऐसे कर के संबंध में निर्धारिती-दोषी के तौर पर समझा जाएगा तथा अधिनियम की धारा 221 के अंतर्गत कार्रवार्इ के लिए उत्तरदायी होगा। आगामी धारा 201(1ए) यह बताती है कि ऐसे व्यक्ति साधारण ब्याज के लिए उत्तरदायी होगा।

 (i)  कर के वसूले जाने वाली तिथि से ऐसे कर की राशि पर प्रत्येक माह अथवा माह के किसी अंश के लिए 1 प्रतिशत की दर पर तथा

(ii)  प्रत्येक माह अथवा तिथि, जिस पर ऐसे कर का वास्तविक भुगतान किया गया था, से ऐसे कर की राशि वाले माह के किसी अंश पर एक तथा डेढ़ प्रतिशत

ऐसा ब्याज, वसूलनीय, अनिवार्य प्रकृति का है तथा संबंधित त्रैमासिक हेतु टीडीएस के त्रैमासिक विवरण के प्रस्तुतीकरण पर देय होगा।

4.5.2 धारा 271 सी साथ-साथ नीचे दर्शाती है कि यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 194 बी के दूसरे प्रावधानों के अनुसार संपूर्ण कर अथवा कर के किसी अंश अथवा सभी स्त्रोत से संपूर्ण कर अथवा कुछ अंश के भुगतान में असमर्थ रहता है तो कर की राशि के समान कुल राशि को जुर्माने के तौर पर देना होगा जिसका उसने भुगतान अथवा कटौती न करार्इ हो।

4.5.3 आगे, धारा 276 बी यह दर्शाता है कि यदि कोर्इ व्यक्ति, धारा 194बी के दूसरे प्रावधान के अंतर्गत सभी स्त्रोतों से कर की कटौती अथवा स्वयं के कर भुगतान, उपरोक्तानुसार निर्धारित समय के भीतर केंद्र सरकार को देने में असफल रहता है तो वह एक अवधि, जो जुर्माने सहित 3 महीने और 7 साल के बीच हो सकती है, सश्रम कारावास के साथ दंडित किया जाएगा।

4.6 कर कटौती हेतु प्रमाण पत्र की प्रस्तुति (धारा 203)

4.6.1 धारा 203 के अनुसार डीडीओ द्वारा कर्मचारी को टीडीएस की राशि के ब्यौरे तथा अन्य विवरण वाले प्रपत्र 16 में एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आपेक्षित है। नियम 31 का प्रावधान है कि प्रपत्र 16 कर्मचारी को उस वित्तीय वर्ष जिसमें वेतन का भुगतान तथा कर कटौती की गर्इ थी, के बाद 31 मर्इ तक दिया जाना चाहिए। साथ ही साथ बैंक को पेंशन के भुगतान के समय काटे गए कर के लिए ऐसे प्रमाणपत्र को जारी करना चाहिए। अधिसूचना सं. 11 दिनांक 19.02.2013 हेतु संशोधित प्रपत्र 16 को संलग्न करना चाहिए। प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र निर्दिष्ट करेगा

(क)  कटौती कराने वाले की वैध स्थार्इ खाता संख्या (पैन)

(ख)  कटौती कराने वाले का वैध कर कटौती तथा संग्रह खाता संख्या (टैन)

(ग)  (i) पुस्तक पहचान संख्या अथवा संख्या (बिन) जहां सरकारी कार्यालय की स्थिति में कर कटौती को जमा चालान की बिना प्रस्तुति पर किया गया।

(ii) बैंक द्वारा भुगतान की स्थिति में पुस्तक पहचान संख्या अथवा संख्या (सिन*)

(* चालान पहचान संख्या (सिन) का अर्थ है ऐसा नंबर जिसमें बैंक शाखा, जहां कर का भुगतान किया गया है, जिस तिथि को कर का भुगतान किया गया है तथा बैंक द्वारा दिए गए चालान सिरियल नंबर, का बेसिक स्टेटिकल रिटर्न (बीएसआर) कोड शामिल है)

(घ)  टीडीएस का सभी प्रासंगिक त्रैमासिक ब्यौरे की प्राप्ति संख्या (24क्यू)। त्रैमासिक ब्यौरे की संख्या की प्राप्ति 8 अंकों की होती है।

आगे परिपत्र 04/2013 दिनांक 17.04.2013 के अनुसार सभी कटौतीदाता ( सरकारी कटौतीदाता, जो पुस्तक प्रविष्टि के द्वारा केंद्र सरकार के खाते में टीडीएस जमा करते हैं, सहित) अध्याय XVII-ब की धारा 192 के प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल 2012 को अथवा के बाद कुल कटौती के संबंध में टीआरएसीर्इएस पोर्टल के माध्यम से जनित तथा तद्नुसार डाउनलोड करके तथा विधिवत सत्यापन और पुष्टि के बाद प्रपत्र 16 के भाग ए को जारी करेगें। प्रपत्र सं. 16 के भाग ए में विशिष्ट टीडीएस प्रमाणपत्र संख्या होनी चाहिए। प्रपत्र सं. 16 के भाग बी (परिशिष्ट) हाथ से कटौतीदाता द्वारा तैयार किया जाएगा तथा प्रपत्र 16 के भाग ए सहित उचित सत्यापन तथा प्रमाणीकरण के बाद कटौतीदाता को जारी किए जाऐंगे।

यदि डीडीओ धारा 203 के अनुसार आपेक्षित संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र जारी करने में असफल रहता है तो धारा 272ए(2)(जी) के अंतर्गत जुर्माने के तौर पर रू. 100/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे।

बहरहाल यह स्पष्ट किया जाता है कि टीडीएस प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ऐसी कोर्इ बाध्यता नहीं है यदि सभी स्त्रोतों से कर,  छूट तथा कटैातियों के दावे के आधार पर काटनेयोग्य/काटा नही गया हो।

(नोट : टीआएसीर्इएस आयकर विभाग का वेब आधारित एप्लीकेशन है जो टीडीएस प्रबंधन से जुडे़ हुए सभी हितधारकों को इंटरफेस होने का मौका मुहैया कराता है। इसके द्वारा चालान की स्थिति को देखा, एनएसडीएल की डाउनलोडिंग, कोन्सों फाइल, दोषमुक्त रिपोर्ट तथा प्रपत्र 16/16ए के साथ-साथ वार्षिक कर साख ब्यौरा (प्रपत्र 26एएस) को देखा जा सकता है। प्रत्येक कटौतीदाता को ट्रेसिस पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत कराना अनिवार्य है। कटौतीदाताओं को जारी किए गए प्रपत्र 16/16ए को ट्रेसिस पोर्टल से जनरेट तथा डाउनलोड करना चाहिए।

टीडीएस प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने तथा विवरण को भरने से संबंधित कुछ आवश्यक बिंदु नीचे निर्दिष्ट किए गए है :

(क)  टीडीएस प्रमाणपत्र केवल कटौतीदाता के लिए उत्पन्न होंगे यदि तिमाही 4 में काटौतीदाता द्वारा प्रपत्र 24क्यू के परिशिष्ट II में वैध पैन को ठीक तरह से निर्दिष्ट किया गया हो। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को प्रपत्र 16 में यह सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है कि प्रपत्र 24 जी/ ओएलटीएएस के संबंध में "मैचिंग" की स्थिति "एफ" हो। यदि मैचिंग की स्थिति "एफ" से अलग हो तो इसे सुधारने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाएं। यहां यह निर्दिष्ट करना उचित होगा कि कटौतीदाताओं के लिए ब्यौरे के ऑनलाइन सुधार सहित कुछ सुविधाएं वेबसाइट www.tdscpc.gov.in/ पर उपलब्ध करार्इ गर्इ है।

(ख)  नियोक्ता को एनएसडीएल आरपीयू ( इसके पश्चात रिटर्न निर्मित निति) के अनुसार प्रपत्र 24क्यू के परिशिष्ट 1 के स्तंभ 321 (भुगतान राशि/क्रेटिड) में वेतन की सकल राशि (धारा 10 के अंतर्गत किसी राशि की छूट तथा अध्याय VI ए के अंतर्गत कटौती सहित) उद्धृत करनी चाहिए।

(ग)  नियोक्ता को एनएसडीएल आरपीयू के अनुसार प्रपत्र 24क्यू के परिशिष्ट II के स्तंभ 337 में धारा 10 के अंतर्गत किसी छूट को छोड़कर वेतन राशि को उद्धृत करना चाहिए।

(घ)  टीडीएस के लिए प्रस्तुत "वेतन" विषय को छोड़कर किसी भी विषय के अंतर्गत वेतन ( भवन संपत्ति के घाटे सहित) पर टीडीएस को एनएसडीएल आरपीयू के अनुसार स्तंभ 353 (पिछले नियोक्ता द्वारा टीडीएस के सूचित वेतन) में दिखाया जा सकता है।

(ड)  नियोक्ता को पूर्णाकिंत किए बिना परिशिष्ट II में कुल करयोग्य वेतन (स्तंभ 346) को उद्धृत करने की सलाह दी जाती है तथा टीडीएस उसके अनुसार यानि टीडीएस को भी पूर्णांकित किए बिना, काटा तथा सूचित किया जाना चाहिए।

उदाहरण :

कुल करयोग्य आय

कुल करयोग्य आय (पूर्णांकित राशि)

काटा जाने योग्य टीडीएस (उपकर सहित)

आय के पूर्णाकिंत किए जाने के बाद काटा/सूचित किया गया टीडीएस (उपकर सहित)

अल्प कटौती  

1350094

1350090

236929.05

236927.80

रू. 1.25

4.6.2 यदि निर्धारिती, वर्ष के दौरान एक से अधिक नियोक्ता द्वारा नियुक्त किया गया है तो प्रत्येक कर्मचारी को ऐसी अवधि,जिसमें प्रत्येक नियोक्ता के साथ नियुक्त किए गए ऐसे निर्धारिती, से संबंधित प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र के भाग ए तथा निर्धारिती के विकल्प पर पिछले नियोक्ता अथवा प्रत्येक नियोक्ता द्वारा जारी किया जा सकता है।

4.6.3. डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकरण

 (i)  जहां प्रपत्र 16 में प्रमाणपत्र जारी किया जाना है वहां निर्धारिती की पंसद के अनुसार ऐसे प्रमाणपत्रों के प्रमाणीकरण के लिए डिजिटल हस्ताक्षरों का प्रयोग किया जा सकता है।

(ii)  पद (i) के अंतर्गत प्रमाणपत्र की स्थिति में निर्धारिती को सुनिश्चित करना चाहिए कि

(अ)  उक्त पैरा 4.6.1 में निर्दिष्ट शर्तें अनुपालन में है

(ब)  एक बार प्रमाणपत्र के डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित हो जाने के पश्चात् प्रमाणपत्र की सामग्री परिवर्तनयोग्य नहीं होगी तथा

(स)  ऐसे प्रमाणपत्रों का लाग तथा नियंत्रण संख्या निर्धारिती द्वारा नियंत्रित की जाएगी।

♦ डिजिटल हस्ताक्षरों का प्रयोग इंटरनेट पर अधिकतर र्इ-हस्तांतरण के प्रमाणीकरण के लिए किया जा सकता है क्योंकि डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग कर जानकारी का हस्तांतरण असुरक्षित है। यह समय की बचत करता है विशेषकर ऐसे संगठनों में जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद है क्योंकि हस्तरूपी कर कटौती वाले प्रमाणपत्र को जारी करने में काफी समय लगता है। ( परिपत्र सं. 2 का 2007 दिनांक 21.05.2007)

4.6.4. आवश्यक वस्तुओं आदि से संबंधित विवरणों का प्रस्तुतीकरण (धारा 192 (2सी) :

4.6.4.1 धारा 192 (2सी) के अनुसार, कर्मचारी को दी जाने वाले वेतन के बदले पूर्वाकांक्षित अथवा लाभ के पूर्ण तथा सत्य विवरण को उपलब्ध कराने के उत्तरदायित्व ऐसे वेतन, यानि स्त्रातों से कर कटौती के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, के भुगतान हेतु उत्तरदायी व्यक्ति का होगा। ऐसे विवरणों का प्रपत्र तथा प्रणाली नियम 26ए, प्रपत्र 12बीए (परिशिष्ट II) तथा प्रपत्र 16 में निर्दिष्ट की गर्इ है। पूर्वाकांक्षित से संबंधित प्रक्रिया तथा मूल्य जानकारी प्रपत्र 12बीए में नियोक्ता द्वारा उपलब्ध करार्इ जाएगी यदि दी गर्इ अथवा देययोग्य वेतन रू. 1,50,000/- से अधिक हो तो। अन्य मामलों में जानकारी नियोक्ता द्वारा स्वयं प्रपत्र 16 (भाग बी) में नियोक्ता द्वारा उपलब्ध करार्इ जाएगी।

4.6.4.2 नियोक्ता, जो इस परिपत्र के पैरा 3.2 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी की ओर से पूर्वाकांक्षित पर कर अदा करता है, को ऐसे संबंधित कर्मचारी को प्रमाणपत्र जारी करना होगा जो केंद्र सरकार को कर का भुगतान करता हो तथा भुगतान की गर्इ राशि, ऐसी दर पर भुगतान किया गया हो तथा जिस पर संशोधित प्रपत्र 16 में कुछ अन्य विवरण हो, को निर्दिष्ट किया हो।

4.6.4.3 कर्मचारी को मुहैया कराए जाने वाले पूर्वाकांक्षित की राशि को दर्शाते हुए ब्यौरे के प्रस्तुतीकरण के लिए धारा 192 (2सी) के अंतर्गत नियोक्ता पर डाला गया उत्तरदायित्व नियोक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जो उनके तहत बनाए गए कानून तथा नियमों के मूल्यांकन के अनुसार निवर्हनीय है। कोर्इ भी असत्य जानकारी, जाली दस्तावेज अथवा पूर्वाकांक्षित संबंधित जानकारी छिपाने की स्थिति में कानून के तहत अपरिहार्य परिणामों के लिए उत्तरदायी होगा। उक्त निर्दिष्ट प्रपत्र 16 तथा/अथवा प्रपत्र 12बीए में प्रमाणपत्र वित्तीय ऐसे वित्तीय वर्ष जिसमें वेतन का भुगतान किया गया हो तथा कर वसूला गया हो, के तुरंत बाद के वित्तीय वर्ष की 31 मर्इ तक कर्मचारी को दे दिया जाएगा। यह वह धारा 192 (2सी) के अनुसार आपेक्षित संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र जारी करने में असफल रहता है तो धारा 272ए(2)(i) के अनुसार जुर्माने के तौर पर रू. 100/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे।

अधिनियम की धारा 139सी के अनुसार आंकलन अधिकारी नियोक्ता द्वारा जारी प्रपत्र 16 के साथ प्रपत्र 12बीए को प्रस्तुत करने के लिए करदाता से मांग कर सकते है।

4.7 पैन तथा टैन का अनिवार्य उद्धृतीकरण

4.7.1 अधिनियम की धारा 203 ए स्त्रोतों से कर कटौती के लिए सभी उत्तरदायी व्यक्तियों के लिए यह अनिवार्य करता है कि वह चालान, टीडीएस-प्रमाणपत्र, ब्यौरे तथा अन्य प्रमाणपत्रों में खाता सं. (टैन) का एकत्रीकरण तथा काटे गए कर को उद्धृत तथा प्राप्त करें। इस संबंध में जानकारी इस विभाग के परिपत्र सं. 497 (एफ. सं. 275/118/87-आर्इटी(बी) दिनांक 9.10.1987) में उपलब्ध है। यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 203ए के अंतर्गत इसका अनुपालन नहीं करता है तो वह धारा 272 बीबी के अंतर्गत कुल दस हजार रूपए के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा। इसी प्रकार धारा 139ए (5बी) के अनुसार स्त्रोतों से कर देने वाले सभी व्यक्तियों के लिए यह अनिवार्य है कि उन व्यक्तियों, जिनका आयकर धारा 192 (2सी) के अंतर्गत प्रस्तुत ब्यौरे, धारा 203 कें अंतर्गत प्रस्तुत प्रमाणपत्रों तथा अधिनियम की धारा 200(3) के प्रावधानों के अनुसार तैयार तथा प्रेषित सभी ब्यौरों, में कटौती की गर्इ है।

4.7.2 सभी करदाताओं को प्रपत्र सं. 24क्यू (वेतन से की गर्इ कर कटौती) में टीडीएस ब्यौरे को नत्थी करना होगा। क्योंकि आय के रिटर्न सहित टीडीएस प्रमाणपत्रों को भरने की आवश्यकता को पूरी तरह साथ किया गया है इसलिए कटौतीदाताओं के पैन की कमी कर देने वालों के लिए क्रेटिड देते समय समस्या उत्पन्न करते है। इसलिए कर कटौतीदाताओं को सलाह दी जाती है कि वह प्रपत्र 24क्यू में वेतन के लिए टीडीएस ब्यौरे में सभी कटौतियों के सही पैन विवरण को प्राप्त तथा उद्धृत करें। करदाताओं को अपने कटौतीदाताओं अपने सही पैन को प्रस्तुत करना अनिवार्य है। कटौतीदाता (नियोक्ता) को कटौती करवाने वाले (कर्मचारी) द्वारा पैन न प्रस्तुत करने पर नीचे दिए गए पैरा 4.8 में निर्दिष्ट अधिनियम की धारा 206एए के अनुसार उच्च दर पर टीडीएस काटने का अधिकार है।

4.8 कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत करने की अनिवार्य आवश्यकता (धारा 206एए) :

4.8.1 अधिनियम में धारा 206एए के अनुसार आय अथवा राशि जिस पर कर कटौतीयोग्य है, की किसी भी कुल प्राप्ति की स्थिति में कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि कर्मचारी (कटौती कराने वाला) कटौतीदाता को अपना पैन प्रस्तुत करने में असफल होता है तो कारदाता को निम्न उच्च दरों के हिसाब से टीडीएस कटाने का अधिकार होगा :-

  i)  इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों में निर्दिष्ट दरों पर; अथवा

 ii)  प्रवृत्त दर अथवा दरों पर; अथवा

iii)  बीस प्रतिशत की दर पर

कटौतीदाता को सभी तीनों शर्तों में कर राशि को निर्धारित करना होगा तथा टीडीएस की उच्च दर को लागू करना होगा। बहरहाल, जहां धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस की गणना के लिए कर्मचारी की आय कर सीमा से कम होती है तो कोर्इ कर कटौती नहीं की जाएगी। जहां धारा 192 के अंतर्गत टीडीएस की गणना के लिए कर्मचारी की आय कर सीमा से ऊपर रहती है तो कटौतीदाता धारा 192 में प्रवृत्तानुसार दरों पर आधारित आयकर दरों के औसत की गणना करेंगे। यदि कर की गणना 20 प्रतिशत से कम होती है तो कर की कटौती 20 प्रतिशत की दर से की जाएगी तथा औसत दर के 20 प्रतिशत से अधिक रहने की स्थिति में कर औसत दर पर काटा जाएगा। 2 प्रतिशत की दर से शिक्षा उपकर तथा 1 प्रतिशत की दर से माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर नहीं वसूला जाएगा, यदि अधिनियम की धारा 206एए के अंतर्गत कर 20 प्रतिशत की दर से काटा गया है।

4.9 धारा 200(3) के अंतर्गत कर कटौती का विवरण(टीडीएस का त्रैमासिक ब्यौरा)

4.9.1 कटौती (वेतनमान की स्थिति में नियोक्ता) करने वाले व्यक्ति को प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अवधि (विवरण नीचे तालिका में) के लिए प्रपत्र 24क्यू में टीडीएस के त्रैमासिक ब्यौरे के विधिवत सत्यापन को आयकर महानिदेशक (सिस्टम) द्वारा प्राधिकृत टिन/सुविधा केंद्रों पर जमा करना आपेक्षित है जो वर्तमान में मैसर्स नेशनल सिक्योरिटी डिपोजटरी लि. (एनएसडीएल) द्वारा संचालित की जा रही है। किसी भी टिन सुविधा केद्रों पर र्इ-टीडीएस मध्यस्त का ब्यौरा http://www.incometaxindia.gov.in तथा http://tin-nsdl.com पोर्टल पर उपलब्ध है। टीडीएस के वार्षिक रिटर्न को भरने की अनिवार्यता पूरी तरह से प्रभावी तिथि 1.4.2006 हो चुकी होनी चाहिए। प्रपत्र 24क्यू (अधिसूचना सं. एस.ओ. 704(र्इ) दिनांक 12.5.2006) अंतिम तिमाही हेतु भरा हुआ तिमाही ब्यौरा टीडीएस के वार्षिक रिटर्न के तौर पर समझा जाएगा। त्रैमासिक आधार पर इस ब्यौरे को भरने की नियत तिथि तालिका में निम्नानुसार है :-

तलिका : त्रैमासिक र्इ-टीडीएस रिटर्न 24क्यू के ब्यौरे को भरने की तिथि

क्र.सं. समाप्तयोग्य तिमाही हेतु रिटर्न सरकारी कार्यालयों हेतु नियत तिथि अन्य कटौतियों हेतु नियत तिथि

1

30 जून

31 जुलार्इ

15 जुलार्इ

2

30 सितम्बर

31 अक्टूबर

15 अक्टूबर

3

31 दिसंबर

31 जनवरी

15 जनवरी

4

31 मार्च

15 मर्इ

15 मर्इ

4.9.2 उक्त निर्दिष्ट ब्यौरे को आयकर महानिदेशक (सिस्टम) द्वारा निर्दिष्ट प्रक्रियाओं, प्रारूप् तथा मानदंडों के अनुसार इलैक्ट्रानिक प्रक्रिया के माध्यम सत्यापित के प्रपत्र 27ए में ब्यौरे के सत्यापन सहित अथवा डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक अथवा प्रपत्र रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। र्इ-टीडीएस/डीसीएस ब्यौरे को प्रस्तुत करने के लिए प्रक्रिया परिशिष्ट VI में ब्यौरेवार दी गर्इ है।

4.9.3 प्रपत्र 24क्यू में 20 से कम कटौती के आंकड़ों तथा करदाता के सरकारी कार्यालय न होने अथवा अधिनियम (अधिसूचना सं. 11 दिनांक 19.02.2013) की धारा 44एबी के अंतर्गत अपने खाते को अंकेक्षित करने वाले व्यक्ति को छोड़कर सभी रिटर्न इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत करना आपेक्षित है।

4.9.4 ब्यौरे को प्रस्तुत करने के असफल होने पर शुल्क (धारा 234र्इ) :

यदि कोर्इ व्यक्ति 1.07.2012 को अथवा के पश्चात् स्त्रोतों से कर के संबंध में धारा 200 (3) में निर्दिष्ट समय के भीतर ब्यौरा देने अथवा देने के कारण को बताने में असफल रहता है तो शुल्क के तौर पर रू. 200/- प्रतिदिन जब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है, भरने के लिए बाध्य होंगे। बहरहाल, ऐसे शुल्क के लिए कर राशि, जिसके लिए स्त्रोतों से कर वसूला गया था, से अधिक नही होगा। यह शुल्क अनिवार्य होगा तथा ऐसे ब्यौरे की प्रस्तुति से पूर्व देना होगा।

4.9.5 टीडीएस ब्यौरे को भरने में होने वाली चूक का सुधार

डीडीओ पहले दिए गए ब्यौरे में प्रस्तुत जानकारी को अद्यतन, जोड़ने, हटाने अथवा किसी त्रुटि को सही करने के लिए सुधार वक्तव्य भी दे सकता है।

4.9.6 ब्यौरा प्रस्तुत करने में असफल अथवा गलत सूचना प्रस्तुति हेतु जुर्माना (धारा 271एच)

यदि कोर्इ व्यक्ति 1.07.2012 को अथवा के पश्चात् स्त्रोतों से कर के संबंध में धारा 200 (3) में निर्दिष्ट समय के भीतर अथवा गलत ब्यौरा देने अथवा देने के कारण को बताने में असफल रहता है तो जुर्माने के तौर पर कम से कम रू. 10,000/- जो रू. 1,00,000/- तक बढ़ार्इ जा सकती है, भरने के लिए बाध्य होंगे। बहरहाल, यदि व्यक्ति यह साबित कर दे कि उसने केंद्र सरकार के क्रेडिट को शुल्क तथा ब्याज, यदि हो, के साथ टीडीएस को भेजने के बाद ब्यौरा देने के लिए निर्धारित समय से एक वर्ष की अंतिम तिथि से पूर्व ऐसे ब्यौरे को वह भेज चुका था, तो उस पर कोर्इ जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

4.9.7 कर कटौती के ब्यौरे को तैयार करते समय, कटौतीदाता के लिए अनिवार्यता :-

  (i) ब्यौरे में खाता संख्या (टैन) का संग्रहण तथा उसका कर कटौती उद्धृत अनिवार्य

(ii)  कटौतीदाता के सरकारी (राज्य सरकार सहित) कार्यालय की स्थिति को छोड़कर ब्यौरे में उसकी स्थार्इ खाता संख्या (पैन) को उद्वृता अनिवार्य। सरकारी उद्धृता की स्थिति में "पीएएनएनओटीआरर्इक्यडी" को र्इ-टीडीएस ब्यौरे में उद्धृत किया जाना है।

(iii) सभी कटौतीकारों के पैन को उद्धृत करना अनिवार्य

(iv) पुस्तक पहचान संख्या अथवा चालान पहचान संख्या जो भी स्थिति हो, सहित केंद्र सरकार को दिए जाने वाले कर के विवरण का प्रस्तुतीकरण

(v)  देय राषि अथवा क्रेटिड जिस पर प्रापक के आंकलन अधिकारी द्वारा धारा 197 के अंतर्गत कोर्इ कटौती नही वाले प्रमाणपत्र के निगर्मन के अनुसार कर नहीं काटा गया, के विवरण का प्रस्तुतीकरण

4.9.8. यह ध्यान दिया जाए कि नर्इ टीडीएस प्रक्रिया के तहत कटौतीदाता का टैन/कटौतीकार का पैन तथा टीडीएस ब्यौरे की पावती संख्या कटौतीकार के ऑनलाइन टीडीएस क्रेटिड की स्वीकृति के लिए विशिष्ट पहचान के अनुसार कटौतीदाता द्वारा भरी जाएगी। इसलिए इन ब्यौरों को भरने में सावधानी बरती जाए। टीडीएस ब्यौरे में सही सिन/बिन को निर्दिष्ट करने के दौरान भी विशेष सावधानी बरती जाए।

4.10 पेंशन से आय पर टीडीएस

राष्ट्रीयकृत बैंक से पेंशन प्राप्त करने वाले, जो अपनी पेंशन (जीवनसाथी को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन नहीं) पेंशनकर्ताओं की स्थिति में इस परिपत्र में शामिल निर्देश उसी रूप में लागू होंगे जैसे वह वेतन-आय के मामले में लागू होतें है। जीवन बीमा, भविष्य निधि, एनएससी आदि के कारण धारा 80सी के अंतर्गत पेंशन की राशि से कटौती की स्वीकृति दी जा सकती है यदि पेंशनकर्ता बैंक को प्रासंगिक विवरण प्रस्तुत करेंगे। इस संबंध में आरबीआर्इ पेंशन परिपत्र (केंद्रीय श्रृंखला) सं. 7/सी.डी.आर/1992 (संदर्भ सीओ: डीजीबीए: जीए (एनबीएस) सं. 60/जीए.64 (11सीवीएल)-/92) दिनांक 27 अप्रैल 1992 के मार्फत भारतीय रिर्जव बैंक द्वारा भारतीय स्टेट बैंक तथा अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं तथा सभी बैंकों, जिन्हें पेंशन के भुगतान के सुपुर्द किया गया है, की शाखाओं द्वारा इन निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। आगे, बैंकों की सभी शाखाएं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड कें परिपत्र सं. 761 दिनांक 13.1.1998 के मार्फत पेंशनकर्ताओं को प्रपत्र 16 में कटौतीयोग्य कर के प्रमाणपत्र को धारा 203 के अंतर्गत जारी करने के लिए बाध्य है।

4.11. गैर निवासियों की स्थिति में किए जाने वाले टीडीएस से संबंधित मामले

4.11.1 गैर निवासियों के भारत में काम करने तथा नियोक्ता, यदि पहले ही भारत छोड़ चुके होने की स्थिति में कर्मचारी की देय राशि, द्वारा कर वहन करने तथा आंकलन आदेश के पास होने के समय भारत के बैंक में कोर्इ खाता न होने की स्थिति में प्रतिदाय नियोक्ता को जारी किया जा सकता है क्योंकि कर उसके द्वारा वहन किया गया है। (परिपत्र सं. 707 दिनांक 11.07.1995)

4.11.2 गैर निवासियों के संबंध भारत में की गर्इ सेवा हेतु दिए जाने वाला वेतन भारत में कमार्इ जाने वाली आय के तौर पर मानी जाएगी। अधिनियम में विशेष रूप से निर्दिष्ट है कि विश्राम अवधि अथवा अवकाश अवधि, इसमें भारत में अग्रगमिता अथवा दूसरी जगह लेना तथा रोजगार के सेवा अनुबंध शामिल है, के लिए किसी भी प्रकार का वेतन भारत में कमाए जाने वाले वेतन के तौर पर समझाा जाएगा।

5. वेतन विषय के अंतर्गत आय की गणना

5.1 वेतन विषय के अंतर्गत आदेय आय

(1) निम्नलिखित आय, वेतन विषय के अंतर्गत आयकर के प्रति देययोग्य मानी जाएगी

(क)  पिछले वर्षों, चाहे भुगतान किया हो अथवा नहीं, के दौरान निर्धारिती हेतु पूर्व नियोक्ता अथवा नियोक्ता से आदेय कोर्इ वेतन

(ख)  नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा अथवा की ओर से पिछले वर्षों के दौरान कोर्इ दिया हुआ वेतन अथवा उसे स्वीकृत किया हुआ वेतन यदि उसके लिए नियत न होने अथवा नियत होने की स्थिति में

(ग)  नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता के द्वारा अथवा की ओर से पिछले सालों के दौरान वेतन को कोर्इ बकाया भुगतान किया हुआ अथवा भुगतान के लिए स्वीकृत किया हुआ, यदि पिछले सालों के लिए आयकर न वसूला गया हो तो।

(2) संदेह को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि अग्रिम में कोर्इ भी दिया गया वेतन किसी भी पिछले साल के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय में शामिल होगा तथा इसे उस व्यक्ति की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा जब उसका वेतन देय होगा।

कोर्इ भी वेतन पारितोषिक, छूट अथवा पारिश्रमिक जो भी नाम हो, कंपनी द्वारा कंपनी के हिस्सेदार द्वारा देय अथवा प्राप्त आय को "वेतन" के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

5.2 वेतन की परिभाषा, वेतन के स्थान पर पूर्वाकांक्षित तथा लाभ (धारा 17)

5.2.1 "वेतन" में शामिल है

  i.  मेहनताना, शुल्क, पारितोषिक, पूर्वाकांक्षित, लाभ के स्थान पर, वेतन के अलावा, अग्रिम वेतन, वार्षिकी अथवा पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश आदि के नकदीकरण के संबंध में भुगतान

  ii.  अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ए के नियम 6 में शामिल प्राधिकृत भविष्य निधि से संबंधित कर्मचारी के क्रेटिड के वार्षिक संवृद्धि का भाग

अ)  कर्मचारी के वेतन के 12 प्रतिशत से अधिक प्राधिकृत भविष्य निधि में कर्मचारी के खाते में नियोक्ता द्वारा किया गया योगदान

ब)  अब तक कर्मचारी की शेष राशि पर दिया गया ब्याज केंद्र सरकार (प्रभावी तिथि 01.09.2010 को दर 9.5 प्रतिशत पर निश्चित की गर्इ-अधिसूचना सं. एसओ 1046 (र्इ) दिनांक 13.05.2011) द्वारा निर्धारित ऐसी दर से अधिक मान्य किया जा सकता है।

 iii.  धारा 80सीसीडी (इस परिपत्र का पैरा 5.5.3) में संदर्भित अधिसूचना एफ.एन. 5/7/2003-र्इसीबीएंडपीआर दिनांक 22.12.2003 (ऐसा परिशिष्ट में VII) के मार्फत नर्इ पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारी के खाते में केंद्र सरकार अथवा अन्य नियोक्ता द्वारा योगदान किया जाएगा।

यह ध्यान दिया जाए कि, जब से वेतन में पेंशन शामिल हुर्इ, स्त्रोत से कर पेंशन से भी काटा जाएगा अन्यथा जबतक आवश्यकता हो। बहरहाल, धारा 10 (10ए) के अंतर्गत छूट की सीमा तक पेंशन का रूपांतरित भाग की के लिए कर कटौती करना आपेक्षित नहीं है।

परिवारिक पेंशन अन्य स्त्रोंतों से आय शीर्षक के अंतर्गत कर देययोग्य है तथा वेतन शीर्षक के अतर्गत देययोग्य नहीं होगी। इसलिए अधिनियम की धारा 192 के प्रावधान प्रयोज्यनीय नहीं है। अत: पारिवारिक पेंशन के लिए कोर्इ टीडीएस आपेक्षित नहीं है।

5.2.2 रियायत में शामिल है :-

  I.  नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाने वाले निशुल्क आवास के किराए की राशि

 II.  नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाने वाले किसी आवास के संबंध में किसी छूट की राशि

III.  किसी भी लाभ अथवा निशुल्क अथवा कम दरों पर दी गर्इ सुविधा की राशि निम्नलिखित मामलों में से किसी पर लागू होगी

    (i)  कंपनी द्वारा कर्मचारी को जो ऐसी कंपनी का निदेशक हो

   (ii)  कंपनी द्वारा कर्मचारी को जिसका कंपनी में वास्तविक हित हों

  (iii)  कंपनी द्वारा (कंपनी संहित) कर्मचारी को जो उक्त i तथा ii बिदुंओं के तहत शामिल नहीं होते हो तथा जिनकी आय "वेतन" ( चाहे एक अथवा एक से अधिक नियोक्ता द्वारा देय अथवा भुगतान की हो अथवा स्वीकृति दी हो), मौद्रिक भुगतान, रू. 50,000/- से अधिक, के रूप मे उपलब्ध न करार्इ गर्इ हो तथा सभी लाभों की राशि को छोड़कर

(किराए के संबंध में छूट का गठन अधिनियम की धारा 17(2) (ii) में नीचे विवरण 1 से 4 में निर्दिष्ट की गर्इ है)

IV.  किसी कार्य जो कि निर्धारिती द्वारा दी जाए, के संबंध में नियोक्ता द्वारा कोर्इ भी कुल राशि

 V.  धारा 17 के अंतर्गत नियोक्ता द्वारा दी जाने वाली कोर्इ भी कुल राशि, चाहे प्रत्यक्ष हो अथवा निधि के तौर पर, प्राधिकृत भविष्य निधि अथवा प्राधिकृत पेंशन पूंजी अथवा अन्य निर्दिष्ट पूंजी को छोड़कर, वार्षिक अनुबंध को अथवा निर्धारिती के जीवन के बीमा को प्रभाव में लाने के लिए।

VI.  नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित अथवा आवंटित परिश्रम इक्विटी शेयर अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति की राशि, इस उद्देश्य के लिए तथा कर्मचारी को मामूली दर पर अथवा निशुल्क

(क)  "निर्दिष्ट प्रतिभूति अर्थात् प्रतिभूति संविदा (नियामक) अधिनियम, 1956 की धारा 2(एच) में निर्दिष्टानुसार प्रतिभूति तथा कर्मचारी पूंजी विकल्प किसी योजना अथवा नीति के अंतर्गत स्वीकृत की गर्इ है, ऐसी योजना तथा नीति के अंतर्गत दी गर्इ प्रतिभूति सहित।

(ख)  "पारिश्रमिक इक्विटी शेयर" अर्थात् राशि योग अथवा बौद्धिक संपदा के रूप् में उपलब्ध अधिकारों के प्रयोग अथवा तकनीकी जानकारी को उपलब्ध करने के लिए नकद को छोड़कर विचार हेतु अथवा छूट पर कंपनी के कर्मचारियों अथवा निदेशकों द्वारा जारी इक्विटी शेयर, जो भी नाम हो

(ग)  कोर्इ निर्दिष्ट प्रतिभूति अथवा पारिश्रमिक इक्विटी की राशि तिथि, ऐसी प्रतिभूति के संबंध में निर्धारिती द्वारा प्राप्त अथवा वास्तविक भुगतान राशि द्वारा कम किए जाने के अनुसार निर्धारिती द्वारा प्रदत विक्लप का प्रयोग किया गया था, पर पारिश्रमिक इक्विटी शेयर, अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति, जो भी स्थिति हो, की सही बाजारी कीमत के अनुसार होनी चाहिए।

(घ)  उचित बाजार मूल्य अर्थात् निर्दिष्टानुसार (आयकर नियम के नियम 3(9) को संदर्भित करें) विधि के अनुसार निर्धारित राशि

(ड)  विकल्प अर्थात् अधिकार लेकिन पूर्व-निर्धारित मूल्य पर पारिश्रमिक इक्विटी शेयर अथवा निर्दिष्ट प्रतिभूति के आवेदन के लिए नियोक्ता द्वारा स्वीकृत कार्य नहीं।

VII.  निर्धारिती के संबंध में नियोक्ता द्वारा स्वीकृत पेंशन राशि के लिए कोर्इ भी योगदान राशि, एक लाख रूपए की सीमा से अधिक तथा

VIII.  अन्य कोर्इ अनुषंगी लाभ अथवा सुविधा की राशि नियम 3 में निर्धारितानुसार

5.2. 2ए ऐसे लाभ तथा सुविधा के मूल्यांकन हेतु नियम नियम 3 में दिए गए है जो निम्नानुसार है :-

I नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाला आवासीय सुविधा (नियम 3(1)) :-

भवन में शामिल है "आवास", फ्लैट, फार्म हाउस अथवा उसका कोर्इ भाग, होटल परिसर, मोटल, सर्विस अपार्ट्मेंट, अतिथि कक्ष, कारावैन, मोबाइल घर, जहाज अथवा अन्य तैरने वाला ढ़ाचा

क बिना किराये वाले फर्नीचर आवास के मूल्यांकन के लिए सभी कर्मचारियों को दो श्रेणियों में विभक्त किया गया है :-

  (i)  केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भवन की राशि ऐसे भवन के लिए दिए जा रहे लार्इसेंस शुल्क के समान है क्योंकि कर्मचारी द्वारा वास्तविक किराया तक कम किया जाता है। स्वायत्त, अर्ध-स्वायत्त संस्थानों, पीएसयू/पीएसर्इ व सहायक कंपनियों, विश्वविद्यालयों आदि के कर्मचारी इस मूल्यांकन गणना के तहत नहीं आते

(ii)  अन्य सभी यानि वह करदाता जो केंद्र तथा राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं है, भवन के संबंध में भवन का मूल्यांकन नीचे दी गर्इ तालिका के अनुसार निर्धारित है :

क) जहां कर्मचारी को उपलब्ध किया जाने वाला भवन नियोक्ता द्वारा खरीदा गया है

क्र.सं.

2001 जनगणना के अनुसार जनसंख्या वाले शहर

रियायत

1

25 लाख से अधिक

वेतन का 15 प्रतिशत

2

10 लाख से अधिक किंतु 25 लाख से कम

वेतन का 10 प्रतिशत

3

अन्य स्थानों के लिए

वेतन का 7.5 प्रतिशत

निर्धारित दर नियोक्ता द्वारा देययोग्य लीज/किराये पर:

वास्तविक राशि अथवा वेतन का 15 प्रतिशत है जो भी कम हो, कर्मचारी द्वारा दिए जाने वाले किराये की किसी भी राशि को कम करने के अनुसार। आवासीय भवन के संबंध में रियायत की गणना के उद्देश्य के लिए वेतन का अर्थ

 क  वास्तविक वेतन

 ख  मंहगार्इ भत्ता अथवा मंहगार्इ वेतन यदि वह कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभ अथवा पेंशन की गणना में शामिल हुआ हो

 ग  बोनस

 घ  छूट

 ड  अन्य सभी करयोग्य भत्ते (जो भाग करयोग्य न हो) तथा

 च  अन्य कोर्इ मौद्रिक भुगतान जो कर के रूप में देययोग्य हो (जो भी नाम हो)

सभी नियोक्ता द्वारा वेतन अवधि, जिसमें भवन उपलब्ध कराया गया है, के संबंध में विचार किया जाएगा। कर्मचारी के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण की स्थिति में तैनाती के समय नए स्थान पर भवन सहित उपलब्ध कराया जाएगा जबकि दूसरे स्थान को बनाए रखने की स्थिति में रियायत की राशि ऐसे भवन जिसकी 90 दिनों से कम की अवधि के लिए कम से कम हो, की केवल संदर्भ सहित निर्धारित हो तथा उसके बाद रियायत की राशि ऐसे भवन के लिए वसूली जाएगी।

भवन के प्रस्तुतीकरण पर रियायत का मूल्यांकन :- उक्त विधि (ए में) द्वारा निर्धारितानुसार रियायत की राशि निम्नानुसार बढ़ार्इ जाएगी :-

  i)  फर्नीचर, उपकरण तथा सामग्री का 10 प्रतिशत शुल्क अथवा

 ii)  जहां फर्नीचर, उपकरण तथा सामग्री किराये पर ली गर्इ हो जिस पर वास्तविक किराया भाड़ा देययोग्य हो

तथा ली गर्इ राशि स्वयं कर्मचारी द्वारा दी गर्इ किराये तक सीमित है।

यह भी बताया जाता है कि जहां केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा कर्मचारी जो ऐसी सरकार के नियंत्रण के तहत उपक्रम अथवा अन्य किसी के साथ प्रतिनियुक्ति सेवा कर रहा है, द्वारा भवन मुहैया कराया जाता है

  (i)  ऐसे नियोक्ता के कर्मचारी को उस निकाय अथवा उपक्रम जहां वह प्रतिनियुक्ति आधार पर सेवारत है, के तौर पर समझा जाएगा।

 (ii)  ऐसे भवन की रियायत की राशि उक्त तालिका में ए(ii) (ए) के अनुसार गणना की जाने वाली राशि होगी, जहां तक नियोक्ता द्वारा भवन खरीदा गया है।

ग होटल के रूप में भवन प्रस्तुतिकरण : रियायत राशि निम्नलिखित दो निम्नतम आधार पर निर्धारित होगी

  1.  अवधि जिसमें भवन उपलब्ध कराया गया है के संबंध में दी गर्इ अथवा देययोग्य वेतन का 24 प्रतिशत

  2.  ऐसे होटल हेतु नियोक्ता द्वारा दिया गया अथवा देययोग्य वास्तविक शुल्क

ऐसी अवधि जिसमें ऐसे भवन मुहैया कराया गया है जहां नियोक्ता द्वारा देययोग्य अथवा वास्तविक तौर पर कोर्इ दिया गया किराया सीमित

ब्हरहाल, सी में कुछ भी करयोग्य नहीं है यदि दो शर्तों को संतुष्ट किया गया हो

 1.  होटल निवास पिछले वर्ष में कुल 15 दिनों से अधिक अवधि के लिए मुहैया न कराया गया हो तथा

 2.  ऐसे निवास ऐसे कर्मचारी को उपलब्ध कराया गया हो जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित होता हो

यह स्पष्ट किया जाता है कि निवास के संपूर्ण भाग के तौर पर उपलब्घ करार्इ गर्इ सेवा के दौरान, रियायत के तौर पर पृथक रूप् से मूल्यांकित करने की आवश्यकता नहीं, अन्य सेवा से अधिक जिसके लिए नियोक्ता द्वारा कर्मचारी हेतु भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति की गर्इ है, बचत वाक्यांश के अनुसार रियायत के तौर पर मूल्यांकित की जाएगी। अन्य शब्दों मे, निवास के लिए संपूर्ण कीमत नियमों के अनुसार मूल्यांकित की जाएगी तथा होटल द्वारा उपलब्ध करार्इ गर्इ अन्य सुविधाओं के लिए अन्य शुल्क बचत वाक्यांश के अंतर्गत पृथक रूप से मूल्यांकित की जाएगी।

बहरहाल, खनन स्थल अथवा तटवर्ती तेल अन्वेषण स्थल अथवा परियोजना क्रियान्वयन स्थल अथवा बांध स्थल अथवा ऊर्जा उत्सर्जन स्थल अथवा तटवर्ती स्थल पर कार्यरत कर्मचारी को उपलब्ध कराए गए किसी निवास की राशि रियायत के तौर पर नहीं समझी जाएगी यदि :

  i)  ऐसा निवास "दूरदराज के इलाकों" में स्थित हो अथवा

 ii)  जहां निवास "दूरदराज के इलाकों" के इलाकों में स्थित न हो लेकिन अस्थार्इ प्रकार के निवास का चबूतरे वाला क्षेत्र 800 वर्ग फीट से अधिक नही होना चाहिए तथा किसी भी नगरपालिका अथवा छावनी की स्थानीय सीमा के तहत 8 किलोमीटर के भीतर होना चाहिए।

यहां परियोजना क्रियान्वयन स्थल का अर्थ अपनी शुरूआती स्थिति से परियोजना तक वाला स्थान। दूरदराज के इलाकों का अर्थ है कि एक ऐसा क्षेत्र जो नवीनतम प्रकाशित अखिल भारतीय जनगणना के अनुसार कम से कम 20,000 की जनसंख्या वाले शहर से कम से कम 40 किलोमीटर दूर स्थित हो।

II नियोक्ता द्वारा रियायत पर उपलब्ध करार्इ जाने वाली कार [नियम 3(2)] :

(1) यदि नियोक्ता अपने कर्मचारी को कार की सेवा उपलब्ध कराता है तो ऐसी रियायतों की राशि :

क)  शून्य, यदि कर्मचारी द्वारा कार का प्रयोग पूर्णता और केवल उसके द्वारा कार्यालय संबंधी कार्यों के लिए की जाए।

ख)  ऐसे किसी प्रयोग ( यदि मोटर कार का प्रयोग कर्मचारी अथवा उसके किसी घर के सदस्य द्वारा अपने निजी अथवा व्यक्तिगत प्रयोग की स्थिति में) के लिए मोटर कार को चलाने तथा उसकी देखरेख करने पर कर्मचारी द्वारा व्यय किया हुआ वास्तविक खर्चा, मोटर कार की सामान्य टूट फूट की राशि के प्रदर्शन में वृद्धि के अनुसार चालक हेतु पारिश्रमिक तथा कर्मचारी द्वारा वसूली गर्इ किसी राशि में वृद्धि के अनुसार, सहित।

ग)  रू. 1800/- (जमा रू. 900/- यदि चालक भी उपलब्ध कराया गया हो) प्रतिमाह ( कर्मचारी द्वारा आंशिक रूप से सेवा निवर्हन के प्रयोग अथवा आंशिक रूप से उसके अथवा उसके पारिवारिक सदस्य द्वारा निजी अथवा व्यक्तिगत प्रयोग की स्थिति में, यदि देखरेख पर अथवा उसे चलाने पर होने वाला व्यय समान अथवा कर्मचारी द्वारा प्रतिपूर्ति की गर्इ हो, की स्थिति में)। बहरहाल, रियायत की राशि रू.2400/- ( रू. 900/- सहित, यदि चालक भी उपलब्घ कराया गया हो) प्रति माह होगी यदि मोटर कार के इंजन की घन क्षमता 1.6 लीटर से अधिक हो।

घ)  रू. 600/- (जमा रू. 900/- यदि चालक भी उपलब्ध कराया गया हो) प्रतिमाह ( कर्मचारी द्वारा आंशिक रूप से सेवा निवर्हन के प्रयोग अथवा आंशिक रूप से उसके अथवा उसके पारिवारिक सदस्य द्वारा निजी अथवा व्यक्तिगत प्रयोग की स्थिति में, यदि देखरेख पर अथवा उसे चलाने पर होने वाला व्यय समान होने की स्थिति में)। बहरहाल, रियायत की राशि रू. 900/- (रू. 900/- सहित, यदि चालक भी उपलब्घ कराया गया हो) प्रति माह होगी यदि मोटर कार के इंजन की घन क्षमता 1.6 लीटर से अधिक हो।

(2) यदि मोटर कार अथवा अन्य कोर्इ ऑटोमोटिव वाहन कर्मचारी द्वारा खरीदा जाता हैं लेकिन उसके चलने तथा रखरखाव का वास्तविक व्यय नियोक्ता द्वारा वहन अथवा प्रतिपूरित किया जाता हैं तो रियायत राशि के आंकलन की विधि भिन्न तथा निम्नानुसार होगी

(क) जहां मोटर कार अथवा अन्य किसी ऑटोमोटिव वाहन को कर्मचारी द्वारा खरीदा जाता हैं लेकिन उसके चलने तथा रखरखाव का वास्तविक व्यय (चालक के वेतन, यदि हो, सहित) नियोक्ता द्वारा वहन अथवा प्रतिपूरित किया जाता हैं तो कोर्इ रियायत कर हेतु देययोग्य नही होगी यदि कार का प्रयोग पूर्णता तथा केवल सरकारी उद्देश्य के लिए होता है। बहरहाल निम्न अनुपालन अनिवार्य हैं

  •  नियोक्ता को कार्यालयीन उद्देश्य के लिए यात्रा के विवरण का पूर्ण ब्यौरा सुरक्षित रखना होगा

  •  नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि व्यय पूर्णता कार्यालयीन उद्देश्यों के लिए किया गया

बहरहाल यदि मोटर कार का प्रयोग आंशिक रूप से आधिकारिक कार्यों अथवा आंशिक रूप् से निजी कार्यों के उद्देश्यों के लिए किया गया हो तो रियायत संबंधी राशि नियोक्ता द्वारा वहन किया गया वास्तविक व्यय होगा जो उक्त (1) में निर्दिष्ट राशि ( सी में) के अनुसार घटाया जाएगा।

मोटर की सामान्य टूट-फूट मोटर कार की वास्तविक कीमत के 10 प्रतिशत वार्षिक के तौर पर आंकी जाएगी।

III निजी परिचारक आदि [नियम 3(3)] : सफार्इकर्मचारी, माली तथा चौकीदार सहित सभी निजी परिचारकों की निशुल्क सेवा की राशि नियोक्ता की वास्तविक वेतन में से ली जाएगी। जहां कर्मचारी के घर पर परिचारकों की सेवाएं मुहैया करार्इ जाती है वहां उसके द्वारा प्रतिपादित की जा रही निजी सुविधा की एवज में कर्मचारी के हाथ में आने वाली रियायत के तौर पर पूरी राशि पर कर लगाया जाएगा। ऐसी सुविधा अथवा सेवा के लिए कर्मचारी द्वारा किसी प्रकार की देय राशि उक्त राशि से वसूली जाएगी।

IV घर में प्रयोग होने वाली गैस,बिजली अथवा पानी [नियम 3(4)] :

गैस, बिजली तथा पानी के रूप में दी जाने वाली रियायत की राशि गैस, बिजली अथवा पानी मुहैया कराने वाली एजेंसी हेतु नियोक्ता द्वारा चुकार्इ गर्इ राशि होगी। जहां आपूर्ति नियोक्ता के स्वयं के स्त्रातों से की जाती हो वहां नियोक्ता द्वारा वहन की जा रही प्रति र्इकार्इ शुल्क रियायत के तौर पर विचारनीय होगी। ऐसी किसी सुविधा अथवा सेवा के लिए कर्मचारी द्वारा दी गर्इ राशि उक्त राशि से कम की जाएगी।

V निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा [नियम 3(5)] : कर्मचारी के किसी भी पारिवारिक सदस्य के निशुल्क अथवा रियायती शिक्षा के कारण रियायत इस कारण से नियोक्ता द्वारा वहन किए गए खर्चे की राशि के समान खर्चे के अनुसार तय की जाएगी। बहरहाल, जहां ऐसे शिक्षा संस्थान खुद नियोक्ता द्वारा चलाए तथा खरीदे गए अथवा जहां नियोक्ता के यहां नौकरी करने के कारण किसी संस्थान द्वारा निशुल्क शिक्षा मुहैया करार्इ जाती है तो कर्मचारी की रियायत की राशि अवस्थिति, ऐसी शिक्षा अथवा ऐसे लाभ का व्यय प्रति बालक 1000/- प्रतिमाह से अधिक न हो, में अथवा के पास इसी प्रकार के संस्थान में ऐसी शिक्षा के शुल्क का हवाला देते हुए निर्धारित की जाएगी।

VI यात्री सामग्री परिवहन [नियम 3(6)] : नियोक्ता, जो यात्री अथवा सामान के परिवहन में संलग्न है, निशुल्क अथवा रियायती दरों पर निजी अथवा व्यक्तिगत यात्रा के लिए कर्मचारी अथवा अपने पारिवार के किसी सदस्य के लिए, यात्री अथवा सामान के परिवहन के उद्देश्य के लिए ऐसे नियोक्ता द्वारा अन्य व्यवस्थाओं को उपलब्ध करा कर अथवा खरीद अथवा पट्टे पर लेकर, के प्रावधानों के अनुसार किसी भी लाभ अथवा सुविधा की राशि ऐसी राशि से वसूली जाएगी जो ऐसे किसी लाभ अथवा सुविधा के लिए कर्मचारी द्वारा वसूला अथवा भुगतित राशि, यदि हो तो, तक सीमित करने के अनुसार सामान्य जन को ऐसे नियोक्ता द्वारा ऐसा लाभ या सुविधा दी गर्इ हो। यह किसी एयरलाइंस अथवा रेलवे के कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा।

VII ब्याज शुल्क अथवा रियायत ऋण [नियम 3(7)(i)]: यह सामान्य बात है, विशेषकर वित्तीय संस्थानों के विषय में, कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को रियायती दरों पर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए। ऐसे ऋण से उत्पन्न होने वाली रियायती राशि ब्याज से अधिक होगी जो निर्धारित ब्याज दर से अधिक ब्याज यदि हो, में देययोग्य होगा, कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा वास्तविक भुगतान की स्थिति में। निर्धारित ब्याज दर सामान्य जन को समान प्रकार तथा समान उद्देश्य के लिए ऋण के संबंध में प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के पहले दिन के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक द्वारा वार्षिक तौर पर वसूली जाने वाली दर होगी। रियायत राशि अधिकतम बाकाया मासिक शेष विधि के आधार पर आंकी जाएगी। इस नियम के अंतर्गत रियायत के आंकलन के लिए नियोक्ता द्वारा गणना तथा समायोजन के लिए अन्यथा अपनार्इ गर्इ अन्य कोर्इ विधि प्रासंगिक नहीं होगी। रू. 20,000/- की कुल राशि वाले छोटे ऋण इससे बाहर होंगे।

नियम 3ए में निर्दिष्ट बीमारियों के इलाज के लिए लिया गया ऋण भी छूटप्राप्त होगा बशर्ते चिकित्सा संबंधी प्रतिपूर्ति के लिए दी गर्इ ऋण की राशि किसी बीमा योजना के तहत प्रतिपूर्ति न की गर्इ हो। जहां कोर्इ भी चिकित्सा बीमा प्रतिपूर्ति प्राप्त होती है वहां रियायत दर पर रियायत राशि प्रतिपूर्ति राशि पर प्रतिपूर्ति की तिथि को लिए गए बकाए ऋण के समक्ष वसूली जाएगी लेकिन विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए लिए गए बकाए ऋण के समक्ष वसूला नहीं जाएगा।

VIII अवकाश लाभांश हेतु नियोक्ता द्वारा यात्रा, पर्यटन, निवास तथा अन्य किसी अवकाश हेतु प्रतिपूर्ति अथवा भुगतान [नियम 3(7)(ii)] :

कर्मचारी अथवा उसके अन्य किसी परिवार के सदस्य द्वारा किसी अवकाश के लाभ के लिए नियोक्ता द्वारा यात्रा, पर्यटन, निवास तथा अन्य देय खर्चों अथवा प्रतिपूर्ति के कारण, छुट्टी यात्रा रियायत (धारा 10(5) के अनुसार) को छोड़कर, इस कारण से नियोक्ता द्वारा वहन किए गए व्यय की राशि होगी। बहरहाल, कर्मचारी से किसी प्रकार का वसूला अथवा खर्च की गर्इ राशि निर्धारित रियायत राशि तक सीमित होगी।

जहां नियोक्ता द्वारा ऐसी सुविधाएं दी जाती हों तथा यह सभी कर्मचारियों के लिए एक समान रूप से उपलब्ध न हो तो लाभ की राशि ऐसी राशि से ली जाएगी जिस पर सामान्य जन के लिए अन्य एजेंसियों द्वारा ऐसी सुविधाएं मुहैया करार्इ जाती है। यदि अवकाश सुविधाएं नियोक्ता द्वारा पोषित की जाती है तथा सभी कर्मचारियों के लिए एक समान रूप से उपलब्ध है तो ऐसे लाभ की राशि छूट प्राप्त करने योग्य होगी।

जहां कर्मचारी आधिकारिक दौरे पर हो तथा उसके किसी परिवार के सदस्य के संबंध में खर्चे उसके द्वारा वहन किए गए हो, परिवार के संबंधित सदस्य के संबंध में व्यय की राशि रियायत के तौर पर मानी जाएगी।

IX नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को मुहैया कराए गए सस्ते/निशुल्क खाद्य सामग्री/गैर-मादक पेय पदार्थ [नियम 3(7)(iii)] :

करयोग्य रियायत की राशि की गणना निम्नानुसार की जाएगी

 

भुगतान वाउचर जो हस्तांतरणीय नहीं है तथा केवल खाने वाले स्थानों पर प्रयोग के लिए हो, सहित खाद्य पदार्थों/गैर-मादक पेय सामग्री की राशि पर होने वाले व्यय के नियोक्ता द्वारा वहन किए जाने की स्थिति में

 

XXX

कम : रू. 50/- प्रति खाद्य पदार्थ की स्थार्इ राशि

XXX

 

कम : नियोक्ता द्वारा कर्मचारि से वसूली गर्इ राशि

XXX

XXX

शेष राशि कर्मचारियों को उपलब्ध कराए गए खाद्य पदार्थ की राशि की रियायत पर करयोग्य होगा।  

XXX

टिप्पणी : छूट निम्न स्थितियों के अनुसार दी गर्इ है

  1.  चाय/स्नैक्स कार्यालयीन अवधि के दौरान मुहैया कराए जाने पर

  2.  दूरदराज के क्षेत्रों अथवा तट से दूर अधिष्ठापन में कार्यालयीन अवधि के दौरान मुहैया करार्इ गर्इ खाद्य सामग्री व गैर-मादक पेय पदार्थ

X सदस्यता शुल्क तथा वार्षिक शुल्क [नियम 3(7)(v)] : कर्मचारी (अथवा उसके किसी परिवार के सदस्य के) द्वारा वहन किया गया कोर्इ भी सदस्यता शुल्क तथा वार्षिक शुल्क, जो नियोक्ता द्वारा उपलब्घ कराए गए क्रेटिड कार्ड ( किसी भी अतिरिक्त कार्ड सहित) अथवा अन्यथा, नियोक्ता द्वारा भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति हेतु हो, द्वारा वसूला गया हो, निम्नलिखित आधार पर करयोग्य होगा :

नियोक्ता द्वारा वहन किया गया व्यय

 

XXX

कम : आधिकारिक उद्देश्यों के लिए व्यय

XXX

 

कम : कर्मचारी से वसूली गर्इ राशि, यदि हो,

XXX

XXX

रियायतानुसार करयोग्य राशि

 

XXX

बहरहाल राशि पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन की गर्इ तो यह छूट योग्यनीय होगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाए

  i)  खर्चों के प्रकार तथा तिथि सहित ऐसे खर्चों का पूर्ण ब्यौरा नियोक्ता द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।

  ii)  नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि यह पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन किया गया था।

XI क्लब व्यय [नियम 3(7)(vi)]

क्लब सुविधा हेतु कोर्इ वार्षिक अथवा नियतकालिक शुल्क तथा नियोक्ता (अथवा परिवार के किसी सदस्य) जिसका नियोक्ता द्वारा भुगतान अथवा वहन किया गया हो, द्वारा क्लब में किसी खर्च की स्थिति में शुल्क निम्नलिखित आधार पर करयोग्य होगी।

नियोक्ता द्वारा वहन किया गया व्यय

 

XXX

कम : आधिकारिक उद्देश्यों के लिए व्यय

XXX

 

कम : कर्मचारी से वसूली गर्इ राशि, यदि हो,

XXX

XXX

रियायतानुसार करयोग्य राशि

 

XXX

बहरहाल राशि पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन की गर्इ तो यह छूट योग्य होगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाएगा

  i)  ऐसे खर्चों का पूर्ण ब्यौरा, व्यय के प्रकार तथा तिथि सहित तथा इनका व्यापार संबंधी मुनाफा नियोक्ता द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।

 ii)  नियोक्ता को प्रमाणपत्र देना होगा कि यह पूर्णता तथा केवल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए वहन किया गया था।

टिप्पणी : 1) नियोक्ता के परिसर में नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों की समस्त श्रेणियों को एकसमान स्वास्थ्य क्लब, खेल-कूद सुविधाएं आदि मुहैया कराने तथा उन पर होने वाला व्यय इसमें शामिल नहीं होगा।

2) कॉर्पोरेट अथवा संगठन की सदस्यता, जहां लाभ नौकरी की समाप्ति के बाद विशेष कर्मचारी को नही मिलता, के लिए प्रारंभिक तौर पर एक साथ जमा की गर्इ राशि अथवा शुल्क छूट योग्य है। प्रारंभिक शुल्क/जमा, ऐसी स्थिति में, शामिल नहीं होगी।

XII संपत्ति का प्रयोग [नियम 3(7)(vii)] : कर्मचारी अथवा उसके किसी परिवार के सदस्य द्वारा प्रयोग की जाने वाली और नियोक्ता द्वारा खरीदी गर्इ चल संपत्ति ( उनको छोड़कर जिन्हें नियम 3 के उप नियम में संदर्भित किया गया है) के लिए यह साधारण है। यह रियायत ऐसे किसी प्रयोग के लिए कर्मचारी द्वारा वसूले गए किसी शुल्क को सीमित करने के अनुसार संपत्ति के वास्तविक मूल्य पर 10 प्रतिशत की दर से वसूली जानी है। बहरहाल, कम्प्यूटरों तथा लैपटॉप का प्रयोग में किसी प्रकार की रियायत नहीं मिलेगी।

XIII संपत्ति का स्थानांतरण [नियम 3(7)(viii)] : अक्सर नियोक्ता द्वारा चल संपत्ति ( शेयर तथा प्रतिभूति की स्थिति में नहीं) के स्थनांतरण की स्थिति में कर्मचारी अथवा उसके कोर्इ परिवार का सदस्य निशुल्क अथवा बाजार कीमत के मुकाबले बेहद कम कीमत पर इसका लाभ उठाता है। चल संपत्ति की वास्तविक लागत तथा कर्मचारी द्वारा अदा की गर्इ कुल राशि, यदि हो, के बीच अंतर रियायतों की राशि से लिया जाएगा। चल संपत्ति, जिसका पहले से प्रयोग किया जा रहा है, की स्थिति में वास्तविक लागत संपत्ति के प्रयेाग वाले सभी पूर्ण वर्षों के लिए ऐसी वास्तविक लागत के 10 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी। बहरहाल, उच्चतम मूल्यह्रास होने के कारण, कम्प्यूटर तथा इलैक्ट्रानिक मशीन की स्थिति में, रियायतों की राशि प्रयोग के प्रत्येक पूर्ण वर्ष की शेष विधि को कम करके वास्तविक लागत के 50 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी। इस संबंध में इलैक्ट्रानिक मशीनों का अर्थ है आंकड़ा संग्रहण तथा संचालन संबंधी उपकरण जैसे कम्प्यूटर, डिजीटल डायरी तथा प्रिंटर। इसमें घर में प्रयोग होने वाले उपकरण (यानि घरेलू वस्तुएं) जैसे वाशिंग मशीन, माइक्रोवेब, ओवन, मिक्सर, तवे, ओवन आदि शामिल नहीं होंगे। इसी प्रकार कार की स्थिति में रियायतों की राशि प्रयोग के प्रत्येक पूर्ण वर्ष की शेष विधि को कम करके वास्तविक लागत के 20 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी।

XIV उपहार [नियम 3(7)(iv)] :

किसी उपहार अथवा वाउचर अथवा टोकन की राशि ऐसे उपहार जिन्हें कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को नियोक्ता द्वारा दिए, मिले उपहार के तौर पर दिया गया हो, रियायत के अंतर्गत करयोग्य है। बहरहाल उपहार आदि कुल रू. 5,000 प्रति वर्ष की राशि से कम, को छूट प्राप्त होगी।

XV नियोक्ता द्वारा धारा 17(2) के तहत रू. 15000/- से अधिक की चिकित्सा अदायगी की स्थिति में रियायत इस प्रकार दी जाएगी : आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि रियायत संबंधी मूल्यांकन की विधि नियम के नियम 3 तथा अधिनियम की धारा 17(2) के तहत दी गर्इ है। कटौती कराने वाले कटौती की प्रक्रिया हेतु रियायत राशि के निर्धारण से पूर्व सावधानीपूर्वक उक्त प्रावधानों को देख सकते है।

यह निर्दिष्ट करना उचित होगा कि अधिनियम की धारा 10(13ए), 10(5), 10(4), 17 के अंतर्गत विशेष रूप से निर्दिष्ट लाभ छूट प्राप्त होंगे। इन लाभांशों में निर्दिष्ट भवन किराया भत्ता, यात्रा तथा स्थानांतरण पर छुट्टी यात्रा रियायत, यात्रा व्यय/भत्ता, यात्रा खर्चों को पूरा करने के लिए दैनिक भत्ते, शर्तों के अनुसार चिकित्सा सुविधाएं शामिल है।

5.2.3 'वेतन के स्थान पर लाभ' में शामिल होगी:-

I अपने नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता अथवा नौकरी की समाप्ति के संबंध में अथवा इससे संबंधित नियम व शर्तों के संशोधन की स्थिति में निर्धारिती द्वारा देय अथवा प्राप्त किसी भी प्रकार के मुआवजे की राशि

II भविष्य अथवा अन्य निधि से अथवा नियोक्ता अथवा पूर्व नियोक्ता से निर्धारिती द्वारा लंबित अथवा देय कोर्इ भुगतान (धारा 10 के वाक्यांश (10), (10ए), (10बी), (11), (12), (13) अथवा (13ए)  में संदर्भित भुगतान को छोड़कर), ऐसी पॉलिसी पर बोनस के माध्यम से आवंटित कुल राशि सहित कीमैन बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोर्इ राशि अथवा ऐसा किसी अंशदान पर निर्धारिती द्वारा अंशदान को शामिल नही किया जाएगा।

"कीमैन बीमा पॉलिसी" का अर्थ वही है जैसा धारा 10(10डी) में निर्धारित किया गया है।

III किसी व्यक्ति से निर्धारिती द्वारा देय अथवा प्राप्त कोर्इ राशि, चाहे एकमुश्त अथवा किसी अन्य तरीके से-

(क)  उसके साथ नौकरी उस व्यक्ति की नियुक्ति से पहले;  या

(ख)  उस व्यक्ति के साथ उसकी नियुक्ति के छोड़ने के बाद

5.3 वेतन विषय के अंतर्गत शामिल न होने वाली आय (छूट) :

निम्नलिखित किसी भी वाक्यांश के तहत आने वाली कोर्इ आय अधिनियम की धारा 192 के उद्देश्य हेतु वेतन से आय की गणना हेतु शामिल नहीं की जाएगी।

5.3.1 अवकाश यात्रा छूट (एलटीसी) : धारा 10(5) के अंतर्गत भारत में किसी भी स्थान पर (अ) भारत में किसी स्थान पर अवकाश अथवा (ब) सेवा से सेवानिवृत्ति अथवा सेवा की समाप्ति के बाद, नियोक्ता अथवा अपने पूर्व नियोक्ता से अपने तथा अपने परिवार के सदस्य के लिए, प्रक्रिया के संबंध में, प्राप्त अथवा देय कोर्इ यात्रा भत्ता अथवा सहायता की राशि नियमों के नियम 2ब में निर्धारित है।

निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार किया जाए :

♦ यात्राओं की संख्या - छूट 4 कैलेडर वर्षों में प्रदर्शित 2 यात्राओं के संबंध में उपलब्ध होगी

  •  यात्रा तथा उस पर किया गया व्यय किए बिना किसी छूट का दावा नहीं किया जा सकता

  •  छूट का भाग 01.10.1997 को अथवा के बाद की गर्इ यात्रा के लिए निम्नलिखित अधिकतम सीमाओं के अनुसार लागू होगा

क्र.सं.

द्वारा की गर्इ यात्रा

छूट सीमा

1

हवार्इ

गंतव्य तक सबसे छोटे रास्ते के माध्यम से राष्ट्रीय हवार्इ सेवा (एयर इंडिया) का एयर इकोनॉमी किराया

2

रेल द्वारा जुडे़ स्थल परिवहन द्वारा की गर्इ यात्रा तथा हवार्इ इकानामी किराया

गंतव्य तक सबसे छोटे रास्ते के माध्यम से प्रथम एसी का रेल किराया यात्रा

 

3

उदगम स्थल तथा गंतव्य अथवा उसका भाग जो रेलवे से न जुड़ा हो

अ) गंतव्य तक सबसे छोटे रास्ते के माध्यम से प्रथम श्रेणी अथवा डिलक्स श्रेणी का किराया जहां सार्वजनिक परिवहन सेवा मौजूद न हो

ब) जहां सार्वजनिक परिवहन सेवा मौजूद न हो वहां के लिए सबसे छोटे रास्ते के माध्यम से यात्रा के लिए यदि रेल द्वारा यात्रा की गर्इ हो

   •  यह छूट उस यात्रा के वास्तविक व्यय के लिए सीमित होगी जो केवल वायु, रेल तथा बस किराये पर किए गए व्यय पर की गर्इ है। स्थानीय परिवहन, भ्रमण-दर्शन आदि के लिए कोर्इ व्यय में छूट के लिए अर्हता प्राप्त करनी होगी।

   •  चाहे यात्रा घुमावदार रास्ते पर की गर्इ हो लेकिन छूट सबसे छोटे रास्ते पर स्वीकार्य होगी। इसी तरह यदि यात्रा विभिन्न स्थानों को कवर करते हुए घुमावदार तरीके से की गर्इ हो तो छूट की सीमा छोटे रास्ते द्वारा भारत में सबसे दूर के स्थान के उदगम स्थल से यात्रा पर स्वीकार्य होगा।

   •  बच्चों पर प्रतिबंध - यह छूट 01.10.1998 के बाद पैदा हुए 2 से अधिक आश्रित बच्चों के लिए उपलब्घ नहीं है। यह प्रतिबंध 01.10.1998 के पहले पैदा हुए बच्चों के संबंध तथा एक के बाद एक कर्इ बच्चों के जन्म की स्थिति के सबंध में लागू नहीं होता। यह ध्यान दिया जाए कि अधिनियम की धारा 2 (15बी) बच्चों की व्याख्या करता है जिसमें किसी व्यक्ति के सौतेले बच्चे तथा दत्तक बच्चे भी शामिल है।

   •  परिवार की व्याख्या :- नियम के प्रावधानों के अनुसार, परिवार का अर्थ:

    •  किसी व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे

    •  माता-पिता, भार्इ-बहन जो पूर्णता या मुख्यता: व्यक्ति पर निर्भर करते हो

• विदेश यात्रा - नियमों के प्रावधानों के अनुसार, छूट विदेश यात्रा की स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी

• नियोक्ता का कर्त्तव्य - नियोक्ता को अपने कर्त्तव्य का निवर्हन करना होगा कि यात्रा अवकाश (किराया) रियायत धारा 10(5) के तहत करयोग्य नहीं है तथा उन्हें न केवल कथित वाक्यांश के प्रावधानों को संतुष्ट करना आपेक्षित है बल्कि इसके समर्थन में सबूतों को सुरक्षित रखना भी आपेक्षित है।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नानुसार विचारनीय है :

  1.  यह सभी कर्मचारियों के लिए एक समान है।

  2.  यदि कर्मचारी चार कैलेंडर वर्षों के दौरान या तो एक अथवा दोंनो मौकों पर एलटीसी का लाभ नही उठाता है तो एलटीसी, उत्तरगामी चरण के तुरंत वाले पहले कैलेडर वर्ष के दौरान, की राशि पूर्ववर्ती चरण के दौरान उठाए उठाए न जाने वाले लाभ के स्थान पर छूट के लिए योग्य होगा जिससे उत्तरगामी चरण के तुरंत बाद लाभ लिए जाने के लिए आगे केवल एक यात्रा को बढ़ाया जाएगा।

  3.छूट का हिस्सा - आधारभूत नियम यह है कि छूट का हिस्सा यात्रा पर हुए वास्तविक व्यय तक सीमित किया जाएगा।

अवकाश यात्रा अथवा गृह यात्रा रियायत के उद्देश्य के लिए ली गर्इ कोर्इ भी अवकाश नकदीकरण करयोग्य है।

5.3.2 मृत्य-सह-सेवानिवृत्ति अनुतोषिक : अथवा अन्य कोर्इ अनुतोषिक धारा 10(10) के अंतर्गत कुल आय की गणना के समावेशन से निर्दिष्ट सीमा तक छूटयोग्य है। केंद्र सरकार, अथवा जैसी स्थिति हो, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 अथवा संघ के सिविल सेवाओं के सदस्यों हेतु स्वीकार्य अन्य किसी समान योजना के तहत अथवा रक्षा से संबंधित पदाधिकारी अथवा संघ (ऐसे सदस्य अथवा हितधारक जो कथित नियम के तहत नहीं आते) के तहत सिविल पद अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य अथवा राज्य की सिविल सेवा के सदस्य अथवा राज्य के तहत सविल सेवा हितधारक अथवा स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी अथवा पेंशन कोड के अंतर्गत प्राप्त होने वाली सेवानिवृत्ति अनुतोषिक के किसी भुगतान अथवा रक्षा सेवा के सदस्यों पर लागू होने वाले विनियमन के संशोधित पेंशन नियमों के अंतर्गत प्राप्त कोर्इ मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति अनुतोषिक छूट योग्य है। उक्त निर्दिष्ट, सेवानिवृत्ति, समाप्ति आदि, को छोड़कर अनुतोषिक प्राप्तकर्ता मंडल द्वारा निर्धारित सीमा तक छूट प्राप्त कर सकते है। वर्तमान में प्रभावी तिथि 24.05.2010 के अनुसार सीमा 10 लाख है (अधिसूचना सं. 43/2010 एस.ओ. 1414(र्इ) एफ. सं. 200/33/2009-आर्इटीए-1 दिनांक 11 जून 2010)

5.3.3 केंद्र सरकार अथवा संघ के सिविल सेवाओं के सदस्यों हेतु स्वीकार्य अन्य किसी समान योजना के तहत अथवा रक्षा से संबंधित पदाधिकारी अथवा संघ ( ऐसे सदस्य अथवा हितधारक जो कथित नियम के तहत नहीं आते) के तहत सिविल पद अथवा अखिल भारतीय सेवा के सदस्य अथवा रक्षा सेवा से संबंधित पदाधिकारी अथवा राज्य की सिविल सेवा के सदस्य अथवा राज्य के तहत सविल पदाधिकारी अथवा स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी अथवा केंद्र, राज्य अथवा प्रादेशिक अधिनियम द्वारा स्थापित कॉर्पोरेशन सविल पेंशन कोड के अंतर्गत प्राप्त होने वाली अनुतोषिक के विनियम के किसी भुगतान से धारा 10(10ए)(i) के अंतर्गत छूट पाने के हकदार होंगे। अन्य किसी नियोक्ता की योजना के अतर्गत प्राप्त पेंशन के विनियम के भुगतान के संबंधं में छूट धारा 10(10ए)(ii) के अंतर्गत वहन की जाएगी। इसके अलावा धारा 10(23एएबी) में संदर्भित पूंजी से पेंशन के विनिमय के भुगतान की स्थिति में छूट धारा 10(10ए)(iii) के तहत मिलेगी।

5.3.4 व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने, चाहे वृद्धावस्था की अयोग्या या चाहे अन्य कोर्इ कारण, के समय उसके द्वारा अर्जित अवकाश की अवधि के संबंध में केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार, अवकाश वेतन के समकक्ष वेतन, के कर्मचारी द्वारा प्राप्त कोर्इ भुगतान धारा 10(10एए)(i) के तहत छूटयोग्य होगा। अन्य कर्मचारियों की स्थिति में यह छूट दस माह की अधिकतम अवकाश के अनुसार वृद्धावस्था की अयोग्यता पर सेवानिवृत्ति के समय अवकाश के संबंध में मिलने वाले पैसे के संबंध के आधार पर निर्धारित की जाएगी। यह छूट उन कर्मचारियों के संबंध में जो 01.04.1998 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं, चाहे वृद्धावस्था के कारण अथवा अन्य किसी कारण से, भारत सरकार की अधिसूचना सं. एस.ओ. 588 (र्इ) दिनांक 31.05.2002 के अनुसार, रू. 3,00,000/-, निर्दिष्ट अधिकतम सीमा पर आगे लगाया जाएगा।

5.3.5 धारा 10(10बी) के तहत कामगार द्वारा प्राप्त होने वाला छंटनी मुआवजा कुछ शर्तों के अनुसार आयकर के दायरे से बाहर है। छंटनी मुआवजे की अधिकतम सीमा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 25एफ(बी) के आधार पर आंकी गर्इ राशि अथवा केंद्र सरकार के आधिकारिक राजपत्र, जो भी कम हो, में निर्दिष्ट अधिसूचना द्वारा कम से कम 50,000/- तक है। यह सीमा उन स्थितियों में लागू नहीं होगी जहां मुआवजा किसी योजना, जो केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत की गर्इ हो और लागू होने वाली योजना तथा प्रासंगिक स्थितियों के अनुसार कामगार के उत्तरदायित्व को सुरक्षित रखने हेतु विशेष सुरक्षा की आवश्यकता हो, के तहत दिया जाना हो। ऐसे भुगतान की अधिकतम सीमा रू.5,00,000/- जहां मुआवजा 25.06.1999 की अधिसूचना सं. 10969 में निर्दिष्टानुसार 01.01.1997 को अथवा बाद में दिया हो।

5.3.6 धारा 10(10सी) के तहत, योजना अथवा स्वैच्छिक् सेवानिवृत्ति अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, स्वैच्छिक पृथकीकरण की योजना के अनुसार अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अथवा उसकी सेवा की समाप्ति के समय निम्नलिखित निकायो के कर्मचारियों द्वारा कोर्इ भी प्राप्तयोग्यनीय अथवा प्राप्त (यदि किश्तों में प्राप्त हो तो भी) आय आयकर से छूट योग्य है बशर्ते वह रू. 5,00,000/- से अधिक न हो।

क)  सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी

ख)  अन्य कोर्इ कंपनी

ग)  केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित प्राधिकरण

घ)  स्थानीय प्राधिकरण

ड)  सहकारी समिति

च)  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, 1956 के तहत विश्वविद्यालय के तौर पर घोषित किए हुए संस्थान, केंद्र, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के तहत अथवा निगमित अथवा स्थापित विश्विद्यालय

छ)  प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 की धारा 3 (जी) के तहत कोर्इ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान

ज)  आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचितानुसार ऐसे प्रबंधन संस्थान, इस संबंध में निर्दिष्ट किया जाएगा

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति सेवा के अंतर्गत प्राप्त छूट प्राप्त राशि केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों तथा देश भर अथवा किसी राज्य अथवा राज्यों में महत्वपूर्ण पहचान रखने वाले अधिसूचित संस्थानों के कर्मचारियों को दी गर्इ है। यह भी ध्यान दिया जाए कि जहां यह छूट किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी कर्मचारी को स्वीकृत की गर्इ है उसके लिए अन्य निर्धारण वर्ष की स्वीकृत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, यदि स्वैच्छिक् सेवानिवृत्ति अथवा वृद्धावस्था के कारण सेवानिवृत्ति पर प्राप्त राशि के संबंध में किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 89 के तहत स्वीकृत किया गया है तो धारा 10(10सी) के अंतर्गत कोर्इ छूट नही दी जाएगी।

5.3.7 जीवन बीमा पॉलिसी के तहत कोर्इ भी प्राप्त होने वाली राशि, निम्नलिखित को छोडकर ऐसी पॉलिसी पर बोनस के रूप् में आवंटित कुल राशि धारा 10(10डी) के अंतर्गत छूट योग्य होगी।

  i)  धारा 80डीडी(3) अथवा धारा 80डीडीए(3) के तहत प्राप्त कोर्इ राशि; अथवा

  ii)  कीमैन बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोर्इ राशि; अथवा

 iii)  01.04.2003, किंतु 31.03.2012 को अथवा पूर्व, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 20 प्रतिशत से अधिक, को अथवा पश्चात् जारी बीमा पॉलिसी के तहत प्राप्त कोर्इ राशि; अथवा

iv)  01.04.2012 को अथवा पूर्व, उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 10 प्रतिशत से अधिक;  अथवा

 v)  धारा 80डीडीबी में निर्दिष्टानुार बीमारी अथवा संक्रमण से पीड़ित अथवा धारा 80 यू के अनुसार विक्लांग व्यक्तियों अथवा गंभीर विक्लांग व्यक्ति की स्थिति में 01.04.2013 को उस पॉलिसी के संबंध में जब पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी वर्ष के लिए देययोग्य प्रीमियम वास्तविक कुल बीमाकृत पूंजी का 15 प्रतिशत से अधिक

बहरहाल व्यक्ति की मृत्यु पर उक्त (iii), (iv) तथा (v) में निर्दिष्ट ऐसी पॉलिसी के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि करमुक्त होगी

5.3.8 किसी भी भविष्य निधि के भुगतान जिस पर भविष्य निधि अधिनियम, 1925 लागू होता है अथवा अन्य कोर्इ भविष्य निधि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किया गया हो तथा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित हो, धारा 10(11) के अंतर्गत के तहत छूट प्राप्त करने के योग्य है।

5.3.9 अधिनियम की धारा 10 (13ए) के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा अधिकृत आवासीय निवास के संबंध में किराए (जो भी नाम दिया जाए) के भुगतान पर किए गए व्यय को पूरा करने के लिए नियोक्ता द्वारा निर्धारिती को स्वीकृत विशेष रूप से विशेष भत्ता निर्धारितानुसार आयकर से सीमा तक छूट योग्य है, ऐसे क्षेत्र और स्थान के संबंध में जो ऐसा निवास मौजूद है तथा अन्य प्रासंगिक विचारण। नियम के नियम 2ए के अनुसार छूट का परिमाण विशेष भत्तों पर किराये के भुगतान के व्यय को पूरा करने के लिए निम्नलिखित में से एक के अनुसार लागू होगा।

(क)  प्रासंगिक अवधि, यानि जिसमें वित्तीय वर्ष के दौरान निवास अधिकृत किया गया था, के संबंध में निर्धारिती द्वारा प्राप्त ऐसे भत्तो की वास्तविक कीमत; अथवा

(ख)  प्रासंगिक अवधि के लिए देय वेतन के दसवें भाग के अधिशेष में किराए के भुगतान पर वहन किया गया वास्तविक व्यय; अथवा

  (i)  ऐसे निवास जो बंबर्इ, कलकत्ता, दिल्ली अथवा मद्रास में स्थित हों, प्रासंगिक अवधि के लिए कर्मचारी द्वारा देय वेतन का 50 प्रतिशत

  (ii)  ऐसा निवास जो अन्य किसी स्थान पर स्थित हो, प्रासंगिक अवधि के लिए कर्मचारी द्वारा देय वेतन का 40 प्रतिशत

इस उद्देश्य के लिए 'वेतन' में मंहगार्इ भत्ता, यदि रोजगार की शर्तें उपलब्घ हों, लेकिन सभी अन्य भत्तों तथा रियायतों को छोडकर

यह ध्यान दिया जाए कि आवासीय निवास के संबंध में किराए के भुगतान पर वहन किया गया केवल वास्तविक व्यय निर्धारिती द्वारा अधिकृत किया जाएगा बशर्ते नियम 2ए में निर्धारित सीमा आयकर से छूट योग्य हो। इसी प्रकार, कर्मचारी, जिस घर/फ्लैट में वह निवास करता हो, को स्वीकृत होने वाला घर का किराया आयकर की छूट से बाहर होगा। संवितरण प्राधिकरण को इस संबंध में स्वयं कर्मचारी की कुल आय से भवन किराया भत्ता अथवा उसके किसी भाग पर भत्ते को छोड़कर किराए के वास्तविक भुगतान के प्रमाण की प्रस्तुति पर आग्रह को सुनिश्चित करना होगा।

यद्यपि किराए के भुगतान पर वास्तविक व्यय की वसूली धारा 10(13ए) के अंतर्गत कटौती के दावे के लिए पूर्व-निर्धारित है। प्रशासनिक उपाय के तौर पर यह निर्णय लिया गया हैं कि वेतन पाने वाले कमचारी जिनको रु. 3000/- तक भवन किराया भत्ता मिलता है वह किराया पावती प्रस्तुतीकरण से छूट पाने के हकदार होंगे। हालांकि यह हो सकता है कि यह रियायत स्त्रोतों से कर की कटौती के उद्देश्य के लिए ही है तथा कर्मचारी के इस दैनिक मूल्यांकन में आंकलन अधिकारी ऐसी पूछताछ से मुक्त हो सकता है जो भी वह समझे कि कर्मचारी किराये के भुगतान पर वास्तविक व्यय किया हुआ है।

आगे, यदि कर्मचारी द्वारा चुकाए जाने वाला किराया रू. 1,00,000 प्रति वर्ष हो तो उस कर्मचारी के लिए नियोक्ता को घर के स्वामी के पैन को रिपोर्ट करना अनिवार्य है। यदि घर के स्वामी के पास पैन नहीं है तो नाम व पते सहित घर के मालिक द्वारा घोषणापत्र कर्मचारी द्वारा भरा जाएगा।

5.3.10 धारा 10(14) निम्नलिखित भत्तों के लिए छूट प्रदान करता है

 (i)  नियम 2बीबी के अंतर्गत निर्धारित अपने कर्त्तव्य के निवर्हन के दौरान किए गए पूर्ण, आवश्यक तथा विशेष को पूरा करने के लिए कर्मचारी को कुछ विशेष भत्ते अथवा लाभ मिल सकते है बशर्तें इस उद्देश्य के लिए वास्तविक व्यय किया गया हो

(ii)  कर्मचारी को स्वीकृत किया गया कोर्इ भत्ता चाहे तैनाती वाले स्थान पर अपने व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए हो अथवा उसके स्थानीय स्थल पर, आवासीय स्थान के बढ़ते शुल्क के लिए मुआवजा दिया जाएगा जो कि निर्धारितानुसार तथा निर्धारित किया जा सकता है।

ii) कर्मचारी को किसी भी प्रकार का भत्ता चाहे उसकी नियुक्ति वाले स्थल पर उसके निजी खर्चों को पूरा करने के लिए अथवा स्थानीय स्थल पर अथवा रहने के लिए बढ़ते खर्चो को पूरा करने, जिसे निर्धारित किया जा सके तथा निर्धारितानुसार सीमित किया जा सके।

बहरहाल, उक्त (ii) में संदर्भित भत्ते व्यक्तिगत प्रकार के भत्तों में शामिल नही है जिसे उसके कार्यालय से संबंधित विशेष प्रकार के कार्यो को पूरा करने के लिए पारिश्रमिक अथवा क्षतिपूर्ति पूरी करने के लिए स्वीकृत किया जाए जब तक ऐसे भत्ते उसके नियुक्ति स्थल अथवा आवास से संबंधित हो।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अधिसूचना सं. एसओ 617(र्इ) दिनांक 7 जुलार्इ, 1995 (एफ. सं. 142/9/95-टीपीएल) के मार्फत धारा 10(14) (ii) के उद्देश्य के लिए दिशानिर्देश जारी किए है जिसे अधिसूचना एसओ सं. 403 (र्इ) दिनांक 24.04.2000 (एफ. सं. 142/34/99-टीपीएल) के मार्फत संशोधित किया गया है। कर्मचारी को अपने निवास स्थल तथा नौकरी वाले स्थल के बीच के परिवहन के उद्देश्य से किए गए खर्चो को पूरा करने के लिए स्वीकृत किया गया परिवहन शुल्क अधिसूचना एस.ओ. 395(र्इ) दिनांक 13.05.98 के मार्फत रू. 800 प्रतिमाह अथवा रू. 1600 प्रतिमाह (नेत्रहीन व्यक्ति के लिए) तक की सीमा तक छूट प्राप्त है।

5.3.11 अधिनियम की धारा 10(15)(iv)(i) के अंतर्गत केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, सेवानिवृत्ति को छोड़कर, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में ऐसी योजना बनाए जाने अथवा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार, के कर्मचारी द्वारा किया गया जमा पर सरकार द्वारा दिया जाने वाला ब्याज आयकर से छूट प्राप्त है। अधिसूचना सं. एफ.2/14/89-एनएस-II दिनांक 7.6.89, अधिसूचना सं. एफ.2/14/89-एनएस-II दिनांक 12.10.89 द्वारा संशोधितानुसार, केंद्र सरकार ने कथित वाक्यांश के उद्देश्य के लिए सेवानिवृत्ति होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए जमा योजना के नाम से योजना अधिसूचित की है।

5.3.12 शिक्षा पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए स्वीकृत किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति अधिसूचना की धारा 10(16) के प्रावधानों के अनुसार कुल आय मे शामिल नहीं की जाएगी।

5.3.13 धारा 10(18) किसी व्यक्ति जो केद्र सरकार अथवा राज्य सरकार का कर्मचारी हो तथा "परम वीर चक्र" अथवा "महावीर चक्र" अथवा "वीर चक्र" अथवा केंद्र सरकार द्वारा विशेष रूप से निर्दिष्ट ऐसे अन्य वीरता पुरस्कार, द्वारा पेंशन के रूप में प्राप्त किसी प्रकार के वेतन की छूट प्रदान करता है। ऐसे किसी व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य द्वारा प्राप्त पारिवारिक पेंशन अधिसूचना सं. एस.ओ. 1948(र्इ) दिनांक 24.11.2000 तथा 81(र्इ) दिनांक 29.01.2001 के तहत छूट प्राप्त है जिसे परिशिष्ट VIII व IX के तहत संलग्न किया गया है। इस उद्देश्य के लिए "पारिवार" अधिनियम की धारा 10(5) में निर्दिष्ट अर्थ के अनुसार है।

ऐसे पुरस्कार को प्राप्त करने की स्थिति में डीडीओ कर में कटौती न करने का विकल्प दे सकता है बशर्तें दावों के मूल्यांकन के बारे में उनको संतुष्ट किया जाए।

5.3.14 अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत कर से छूट निम्न संबंधों में भी उपलब्ध होगी :-

(क) नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किसी अस्पताल में किसी कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को किसी उपलब्ध करार्इ जाने वाली चिकित्सा सुविधा पर खर्च होने वाली राशि

(ख) कर्मचारी के स्वयं के चिकित्सा इलाज अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा वास्तविक रूप से व्यय किए गए खर्चे के संबंध में नियोक्ता द्वारा भुगतान की गर्इ कोर्इ राशि

  (i)  अपने कर्मचारी के चिकित्सीय इलाज के उद्देश्य के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्इ अन्य अस्पताल अथवा सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अनुरक्षित कोर्इ अन्य अस्पताल

 (ii)  नियम के नियम 3 (ए)(1) में निर्धारित दिशानिर्देशों के संबंध में मुख्य आयुक्त द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अस्पताल के नियम के नियम 3ए(2) में उपलब्धतानुसार निर्धारित बीमारी अथवा रोग के संबंध में

(ग)  कर्मचारी (केंद्र सरकार अथवा बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कोर्इ योजना) के लिए, लिए गए चिकित्सा बीमा के संबंध में नियोक्ता द्वारा दिया गया प्रीमियम अथवा कर्मचारी जिसने अपने लिए अथवा अपने परिवार के सदस्य (केंद्र सरकार अथवा बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कोर्इ योजना) के लिए चिकित्सा बीमा लिया हो, को बीमा प्रीमियम की प्रतिपूर्ति

(घ)  किसी चिकित्सक द्वारा अपने अथवा अपने परिवार के किसी सदस्य के चिकित्सीय इलाज कराने के लिए कर्मचारी द्वारा व्यय किए गए राशि की अदायगी, नियोक्ता द्वारा, जो वर्ष में कुल रू. 15,000/- से अधिक न हो।

(ड)  विदेश में चिकित्सीय इलाज के संबंध में कर्मचारी अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य के रहने तथा इलाज अथवा ऐसे इलाज के लिए मरीज की सेवा करने वाली एक परिचारक की रहने के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा स्वीकृत सीमा हेतु रियायत इसमें शामिल नहीं होगी।

चिकित्सालय अथवा क्लिीनिक अथवा नर्सिग होम सहित अस्पताल में चिकित्सीय इलाज पर व्यय किया गया खर्च की छूट का लाभ उठाने के लिए तथा व्यक्ति से संबंध रखने वाला परिवार अर्थात् व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे। परिवार में व्यक्ति के माता-पिता भार्इ तथा बहनें भी शामिल है यदि वे पूर्ण अथवा मुख्यत: व्यक्ति पर आश्रित है।

5.4 धारा 16 के अंतर्गत वेतन द्वारा आय से कटौती

5.4.1 मनोरंजन भत्ता (धारा 16(ii)) :

निर्धारिती जो सरकार से वेतन प्राप्त करता हो, को नियोक्ता द्वारा विशेष रूप से स्वीकृत मनोरंजन के रूप में किसी प्रकार के भत्ते के संबंध में धारा 16(ii) एक कटौती स्वीकार्य है जो उसके वेतन को एक/पांच भाग ( किसी प्रकार के भत्ते, लाभ अथवा अन्य रियायत को छोडकर) अथवा पांच हजार जो भी कम हो, होगी। गैर सरकारी कर्मचारी के संबंध में किसी प्रकार का कोर्इ मंनोरंजन भत्ते में कोर्इ कटौती नही होगी।

5.4.2 नियुक्ति पर कर (धारा 16(iii)

भारतीय संविधान, अन्य किसी कानून के तहत लागू, की दफा 276(2) के अर्थानुसार नियुक्ति (वृत्तिक कर) पर कर "वेतन" विषय के अंतर्गत आय की गणना में कटौतीअनुसार स्वीकृत होगी।

यह स्पष्ट किया जाता है कि सकल वेतन आय, जिसे वित्तिय वर्ष 2004-05 तक स्वीकृत किया गया था, से "मान्य कटौती" वित्तिय वर्ष 2005-06 से आगे स्वीकार्य नही होगी।

5.5 अधिनियम के अध्याय VI-ए के अंतर्गत कटौतियां

कर्मचारी के करयोग्य वेतन की गणना के लिए अधिनियम के अध्याय VI-ए के अंतर्गत निम्नलिखित कटौतियां उसकी सकल कुल आय से स्वीकृत होगी

5.5.1 जीवन बीमा प्रीमियम, आस्थगित वार्षिकी, भविष्य निधि हेतु अंशदान, कुछ इक्विटी अथवा ऋण-पत्र आदि के संबंध में कटौतियां (धारा 80सी)

क. धारा 80सी, कर्मचारी को निम्नलिखित योजना में वर्तमान वित्तिय वर्ष में भुगतान अथवा जमा की पूर्ण राशि हेतु कटौती हक देती है, बशर्ते सीमा रू. 1,50,000/- हो।

(1) व्यक्ति, जीवनसाथी अथवा कोर्इ बच्चा, जीवन बीमा अमल में लाने अथवा रखने के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान

(2) आस्थिगिती वार्षिक, के लिए अनुबंध को अमल में लाने अथवा रखने के लिए किया गया कोर्इ भुगतान व्यक्ति, व्यक्ति का जीवनसाथी अथवा किसी बच्चे के जीवन पर नीचे निर्दिष्ट मद (7) हेतु संदर्भित किए गए वार्षिकी योजना हेतु नही होगा बशर्ते उपलब्ध कराया जाए कि वार्षिकी के भुगतान के स्थान पर नकद भुगतान को प्राप्त करने के विकल्प को बीमाकृत व्यक्ति द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रावधानों में शामिल नहीं किया गया है।

(3) किसी व्यक्ति को सरकार द्वारा अथवा की ओर से देययोग्य वेतन से किसी प्रकार की कुल कटौती आस्थिगित वार्षिकी अथवा उसके जीवनसाथी अथवा बच्चों के प्रावधानों के गठन हेतु को प्राप्त कराने के उद्देश्य से उसकी सेवा की शर्तों के अनुसार कुल काटी गर्इ राशि वेतन के 1/5 भाग से अधिक नहीं होनी चाहिए।

(4) कोर्इ भी किया गया अंशदान

(क)  व्यक्ति द्वारा किसी भविष्य निधि, जिसके लिए भविष्य निधि अधिनियम, 1925 लागू होता हो, के लिए

(ख)  केंद्र सरकार द्वारा स्थापित कोर्इ भविष्य निधि तथा अधिकारिक राजपत्र में इस संबध में अधिसूचित, जहां ऐसे अंशदान व्यक्ति अथवा जीवनसाथी अथवा बच्चे के नाम पर खाते मे किया गया हो।

(केंद्र सरकार ने जब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1559(र्इ) दिनांक 3.11.05 के मार्फत सार्वजनिक भविष्य निधि में अधिसूचित किया है)

(ग)  कर्मचारी द्वारा अनुमोदित भविष्य निधि हेतु

(घ)  कर्मचारी द्वारा अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष

यह ध्यान दिया जाए कि किसी कोष हेतु "अंशदान" ऋण अथवा उधार के भुगतान की रकम में शामिल नहीं होगी।

(5) अन्य विवरण :-

(क)  इस संबंध में निर्दिष्ट आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार केंद्र सरकार की ऐसी जमा योजना अथवा केंद्र सरकार की ऐसी प्रतिभूति हेतु

(ख)  इस संबंध में निर्दिष्ट आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचितानुसार सरकार द्वारा सरकार बचत योजना अधिनियम, 1959 की धारा 2(सी) में परिभाषित ऐसे बचत पत्र हेतु

(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओत्र सं. 1560(र्इ) दिनांक 3.11.05 तथा अधिसूचना जी.एस.आर 848 (र्इ), दिनांक 29 नवंबर, 2011, के मार्फत राष्ट्रीय बचत पत्र (IX अंक) अधिसूचित की है, प्रकाशन राष्ट्रीय बचत पत्र (IX अंक) नियम, 2011 जी.एस.आर 868 (र्इ), दिनांक 7 दिसंबर] 2011, बचत पत्र एफ. सं. 1-13/2011-एनएस-II आर/डब्ल्यू संशोधन अधिसूचना सं. जीएसआर 319(र्इ), दिनांक 25-4-2012, श्रेणी की राष्ट्रीय पत्र IX अंक को निर्दिष्ट करते हुए

(6) किसी व्यक्ति, माता-पिता अथवा किसी बच्चे की स्थिति में अंशदान के रूप में दी गर्इ कोर्इ राशि

 क.  भारतीय यूनिट ट्रस्ट के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना, 1971 के योगदान पर

 ख.  केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचितानुसार तथा धारा 10 (23डी) में संदर्भित जीवन बीमा निगम के म्यूच्यूअल फंड के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में किसी योगदान पर

(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1561 (र्इ) दिनांक 3.11.05 के मार्फत एलआर्इसी म्यूच्यूअल फंड के यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (धनरक्षा, 1989 के तौर पर प्रसिद्ध) को अधिसूचित किया है।

(7) आधिकारिक राजपत्र, निर्दिष्ट में अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की अन्य कोर्इ बीमा कंपनी अथवा जीवन बीमा निगम की ऐसे वार्षिक योजना के लिए अनुबंध को अमल में लाने अथवा रखने के लिए किया गया किसी प्रकार का अंशदान

(केंद्र सरकार ने तब से अधिसूचना एस.ओ. सं. 1562 (र्इ) दिनांक 3.11.05 के मार्फत न्यू जीवन धारा, न्यू जीवन धारा-I, न्यू जीवन अक्षय, न्यू जीवन अक्षय-I तथा न्यू जीवन अक्षय- II तथा अधिसूचना एस.ओ. सं. 847 (र्इ) दिनांक 1.6.2006 के मार्फत जीवन अक्षय- III)

(8) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार की किसी योजना के अनुसार कोई बनार्इ गर्इ योजना के अंतर्गत भारतीय यूनिट ट्रस्ट( उपक्रम व निरसन को स्थानांतरित) को संदर्भ करने हेतु निर्दिष्ट कंपनी अथवा प्रबंधक अथवा धारा 10(23डी) की म्यूच्यूअल फंड की किसी र्इकार्इ को दिया अंशदान

(केंद्र सरकार ने तब अधिसूचना एस.ओ.सं. 1563(र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत इस उद्देश्य के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 2005 को अधिसूचित किया है।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 1992 अथवा इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम 1998 के अनुसार बनी हुर्इ योजना में 1.4.2006 के बाद किया गया निवेश धारा 80सी के अंतर्गत कटौती के लिए अर्हता प्राप्त है।

(9) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार के अनुसार भारतीय यूनिट ट्रस्ट( उपक्रम व निरसन को स्थानांतरित) अधिनियम, 2002, में परिभाषित निर्दिष्ट कंपनी अथवा प्रबंधक अथवा धारा 10(23डी) के संदर्भन हेतु किसी म्यूचुयल फंड के स्थापन पेंशन कोष किसी व्यक्ति द्वारा दिया अंशदान

(केंद्र सरकार ने तब अधिसूचना एस.ओ.सं. 1563(र्इ) दिनांक 3.11.2005 के मार्फत इस उद्देश्य के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, 2005 को अधिसूचित किया है।

(10) इस संबंध में संदर्भित आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचानुसार केंद्र सरकार के अनुसार नेशनल हाउसिंग बैंक द्वारा स्थापित ऐसा कोर्इ पेंशन कोष हेतु कोर्इ अंशदान करने अथवा ऐसी कोर्इ जमा योजना ऐसे किसी अंशदान को करने के लिए

(11) (अ) आवासीय उद्देश्य के लिए भारत में घरों की खरीद अथवा निर्माण के लिए दीर्घ-कालीन ऋण उपलब्ध कराने में संलग्न (ब) किसी भारतीय कानून द्वारा अथवा के अंतर्गत स्थापित कोर्इ प्राधिकरण जो भवन अथवा निवास अथवा शहरों, कस्बों तथा गांवों, अथवा दोनों के लिए, की योजना, विकास अथवा शहरों उन्नतीकरण की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने में लगी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, इस उद्देश्य हेतु आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केद्र सरकार की ओर से ऐसी किसी जामा योजना में किसी प्रकार का अंशदान

(केंद्र सरकार ने तब धारा 80सी (2) (गअप)(ए) के उद्देश्य हेतु अधिसूचना एस.ओ.सं. 37(र्इ) दिनांक 11.01.2007 के मार्फत एचयूडीसीओ की सार्वजनिक जमा योजना को अधिसूचित किया है।

(12) आवासीय भवन संपत्ति,आय जो "आवासीय संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत कर योग्य है के क्रय अथवा निर्माण के लिए निर्धारिती द्वारा दी गर्इ कोर्इ रकम (अथवा जो यदि निर्धारिती के स्वयं का भवन प्रयोग नही होता है, इस विषय के अंतर्गत कर योग्य है) जहां ऐसा भुगतान किसी विकास प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड आदि की किसी स्व: वित्तपोषण के अंतर्गत देय राशि की किसी भाग अथवा किसी किश्त के रूप में किया गया भुगतान, के क्रय अथवा निर्माण के उद्देश्य के लिए निर्धारिती द्वारा भुगतित कोर्इ रकम

कटौती भारत में भवन निर्माण अथवा क्रय के लिए दीर्घकालीन अवधि का ऋण उपलब्ध के व्यापार में संलग्न संस्थानों की कुछ अन्य श्रेणियां अथवा राष्ट्रीय आवास बैंक, अथवा जीवन बीमा निगम अथवा कोर्इ बैंक अथवा सरकार से निर्धारिती द्वारा उधार लिए गए ऋण के लौटाने के संबंध में भी स्वीकार्य होगी। नियोक्ता द्वारा उधार लिया गया ऋण लौटाने की स्थिति में यह भी कवर होगा यदि नियोक्ता केंद्र अथवा राज्य अधिनियम के अंतर्गत स्थापित कोर्इ अन्य निकाय अथवा कार्पोरेट अथवा बोर्ड अथवा प्राधिकरण अथवा सहकारी संस्था अथवा स्थानीय प्राधिकरण अथवा ऐसे विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय अथवा कानून द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हो

स्थानांतरण के लिए किए गए स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क तथा अन्य खर्चे भी शामिल किए जाऐंगे। भवन संपत्ति की लागत के लिए भुगतान में प्रवेश शुल्क अथवा शेयर पूंजी प्रारंभिक जमा अथवा अन्य किसी वृद्धि अथवा संशोधन शुल्क अथवा भवन संपत्ति जो संबंधित प्राधिकारी द्वारा समाप्ति प्रमाणपत्र के निगर्मन पर किया गया अथवा निर्धारिती द्वारा भवन के अधिपत्य अथवा बाहर निकलने पर, का नवीकरण अथवा मरम्मत का खर्चा शामिल नहीं होगा। अधिनियम की धारा 24 के प्रावधानों के अंतर्गत स्वीकार्य कटौती के संबंध में किसी प्रकार के व्यय के लिए भुगतान भवन संपत्ति के निर्माण अथवा क्रय के लिए भुगतान में शामिल नही होगी।

ऐसी अवस्था में भवन संपत्ति जिसके लिए कटौती इन प्रावधानों के लिए स्वीकार्य की गर्इ है धारा 80सी(2)(xviii) में निर्दिष्ट किसी राशि अथवा धन वापसी के रूप में उसके द्वारा अधिपत्य करने अथवा वापस करने वाले वित्तिय वर्ष के अंत से पांच साल की समाप्ति तिथि से पूर्व किसी भी समय करदाता द्वारा स्थानांतरित किया जा सकता है। इन प्रावधानों के अंतर्गत किसी प्रकार की कटौती ऐसे पूर्व वर्षों में दी गर्इ कुल राशि के संबंध में की जाएगी जब स्थानांतरण किया गया तथा पूर्व के वर्षों की स्वीकृत आय की कुल कटौती निर्धारिती की पिछले वर्षों की कुल आय के कर के अनुसार की जाएगी।

(13) शिक्षण शुल्क, चाहे प्रवेश के दौरान अथवा उसके बाद भारत में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य शिक्षण संस्थानों को कर्मचारी के किन्हीं दो बच्चों की पूर्णकालीन अवधि शिक्षा के उद्देश्य हेतु

पूर्णकालीन शिक्षा में विद्यार्थी जिसने कथित पाठ्यक्रम के लिए पूर्णकालीन समय के लिए पंजीकरण कराया है, के लिए किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य किसी शिक्षण संस्थान द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक पाठ्यक्रम शामिल है।

यह स्पष्ट किया जाता है कि शिक्षण शुल्क के तौर पर स्वीकार्य राशि में विकास राशि अथवा चंदा अथवा प्रति व्यक्ति शुल्क अथवा समान प्रकार के राशि के भुगतान को छोड़कर भारत में किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय अथवा अन्य शिक्षण संस्थान को किसी भी प्रकार का भुगतान शामिल होगा।

(14) बोर्ड अथवा किसी सार्वजनिक वित्तीय संस्थान द्वारा अनुमोदित सार्वजनिक कंपनी द्वारा दी गर्इ किसी निर्वाच्य पूंजी का इक्विटी शेयर अथवा ऋणपत्र हेतु अंशदान

(15) बोर्ड द्वारा अनुमोदित तथा धारा 10 के वाक्यांश (23डी) हेतु सदंर्भित किसी म्यूच्यूअल फंड की किसी श्रेणी हेतु अंशदान, यदि ऐसी श्रेणी के अंशदान की राशि किसी कंपनी की पूंजी के निर्वाच्य निगर्मन में अंशदान हों।

(16) अनुसूचित बैंक के साथ कम से कम पांच वर्षों की अवधि के लिए सावधि जमा हेतु मियादी जमा के तौर पर निवेश, इस उद्देश्य हेतु आधिकारिक राजपत्र में केंद्र सरकार द्वारा निर्मित तथा अधिसूचितानुसार

(केंद्र सरकार ने अधिसूचना एस.ओ. सं. 1220(र्इ) दिनांक 28.7.2006 के मार्फत इस उद्देश्य हेतु बैंक अवधि जमा योजना, 2006 को अधिसूचित किया है)

(17) इस संबध में आधिकारिक राजपत्र में ऐसी अधिसूचना द्वारा केंद्र सरकार की ओर से कृषि तथा ग्रामीण विकास हेतु राष्ट्रीय बैंक द्वारा जारी ऐसे बांड हेतु अंशदान

(18) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना नियम, 2004 के अंतर्गत खाते में किसी प्रकार का निवेश

(19) डाक घर समय अवधि नियम, 1981 के अंतर्गत खाते में पाच वर्षों की अवधि जमा हेतु किसी प्रकार का अंशदान

ख. धारा 80सी (3) व 80सी (3ए) अधिकार देती है कि किसी प्रीमियम की आस्थगित वार्षिकी राशि अथवा अन्य किसी किए गए भुगतान के अनुबंध को छोड़कर बीमा पॉलिसी की स्थिति में निम्न तक सीमित होगा

1 अप्रैल 2012 से पूर्व जारी पॉलिसी

वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 20 प्रतिशत

1 अप्रैल 2012 को अथवा के बाद जारी पॉलिसी

वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 10 प्रतिशत

अप्रैल 2013 को अथवा के बाद जारी पॉलिसी* - धारा 80 यू के अनुसार विक्लांग व्यक्तियों अथवा गंभीर विक्लांगता अथवा धारा 80डीडीबी में निर्दिष्टानुसार बीमारी अथवा रोग से पीड़ितों की स्थिति में

वास्तविक पूंजी निश्चित राशि का 15 प्रतिशत

 

* वित्तीय अधिनियम 2013 द्वारा प्रारंभ

जीवन बीमा पॉलिसी के संबंध में वास्तविक पूंजी सम एशोयर्ड का अर्थ पॉलिसी अवधि के दौरान किसी भी समय बीमाकृत होने पर पॉलिसी के तहत न्यूनमत निश्चित राशि, निम्न खाते में शामिल नहीं होगी

 (i)  प्रीमियम की कोर्इ राशि वापसी हेतु सहमति, अथवा

(ii)  कुल वास्तविक निश्चित राशि जो किसी व्यक्ति द्वारा पॉलिसी के अंतर्गत प्राप्त की जा सकती है, के अतिरिक्त बोनस अथवा अन्य रूप से प्राप्त लाभ के रूप में

5.5.2 कुछ पेंशन कोष के अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80सीसीसी)

धारा 80सीसीसी धारा 10(23एएबी) में संदर्भित कोष से प्राप्त होने वाली पेंशन के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम अथवा अन्य किसी बीमा कंपनी के वार्षिकी योजना हेतु अनुबंध को लागू करने अथवा रखने के लिए कर हेतु कटौतीयोग्य आय से भुगतान अथवा जमा करने के लिए कर्मचारी कटौती का अधिकार देती है। बहरहाल, कटौती कर्मचारी के खाते, यदि हो तो, में ब्याज अथवा उपार्जित बोनस अथवा जमा को छोड़कर की जाएगी यदि राशि रू. 1 लाख से अधिक न हो।

बहरहाल यदि कोर्इ राशि उक्त सदर्भित राशि में कर्मचारी के पूंजी हेतु बकाया है तो कटौती उक्तानुसार स्वीकृत की जाएगी तथा कर्मचारी अथवा उसका मनोनीत व्यक्ति निम्न कारणों की वजह से इस खाते में आने वाले ब्याज अथवा उपार्जित बोनस अथवा पूंजी के साथ इस राशि को प्राप्त करेगा।

 (i)  वार्षिकी योजना की समाप्ति चाहे पूरी हो या कुछ भाग

(ii)  वार्षिकी योजना से प्राप्त पेंशन

वित्त वर्ष के दौरान प्राप्त होने वाली राशि उस वित्तीय वर्ष के लिए कर्मचारी अथवा उसके मनोनीत व्यक्ति की आय से उसी प्रकार कर वसूला जाएगा।

जहां कर्मचारी द्वारा किसी राशि का भुगतान अथवा जमा करार्इ जाती है तो इस धारा के उद्देश्य हेतु खाते में शामिल की जाती है, , ऐसी राशि से संबंधित कटौती धारा 80सी के अंतर्गत स्वीकृत नहीं की जाएगीं।

5.5.3 केद्र सरकार की पेंशन योजना के अंशदान के संबंध में कटौती (धारा 80सीसीडी) :

धारा 80सीसीडी (1) कर्मचारी, 01.01.2004 को अथवा के पश्चात अन्य नियोक्ता द्वारा अथवा केद्र सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होने के नाते अथवा व्यक्ति के तौर पर अन्य को कोर्इ निर्धारिती, अधिसूचना एफ. एन. 5/7/2003-र्इसीबीएंडपीआर दिनांक 22.12.2003 (राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम - एनपीएस) द्वारा अथवा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित, के मार्फत अधिसूचितानुसार पेंशन के अंतर्गत कर हेतु प्रभारणीय आय का देय राशि अथवा जमा से कटौती की जाएगी। बहरहाल, कटौती कर्मचारी के वेतन ( मंहगार्इ भत्ते को मिलाकर लेकिन अन्य सभी भत्तों और रियायतों को छोड़कर) के 10 प्रतिशत की समान राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए। धारा 80सीसीडी (1) के अंतर्गत कटौती रू. 1,00,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

धारा 80सीसीडी(2) के अनुसार,जहां कथित पेंशन योजना में किसी प्रकार का अंशदान केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियोक्ता द्वारा किया जाता है तो कर्मचारी को उसके पिछले वर्ष के वेतन की 10 प्रतिशत तक की सीमा के अनुसार केंद्र सरकार अथवा अन्य किसी नियोक्ता द्वारा पूर्ण राशि के कुल वेतन से कटौती की स्वीकृति दी जाएगी।

यदि कोर्इ राशि उक्त संदर्भित पेंशन योजना में कर्मचारी की पूंजीे के समक्ष बकाया है तो कटौती उक्त संदर्भ के अनुसार स्वीकृत की जाएगी तथा कर्मचारी अथवा उसका मनोनीत सदस्य निम्न कारण की वजह से उस पर उपार्जित राशि सहित इस राशि को प्राप्त करेगा।

 (i)  वार्षिकी योजना की समाप्ति अथवा बाहर निकलने की स्थिति में अथवा

(ii)  वार्षिकी योजना की खरीद द्वारा प्राप्त पेंशन तथा ऐसी समाप्ति अथवा बाहर निकलने की स्थिति का चुनाव करना

वित्त वर्ष के दौरान प्राप्त होने वाली राशि उस वित्तीय वर्ष के लिए कर्मचारी अथवा उसके मनोनीत व्यक्ति की आय से उसी प्रकार कर वसूला जाएगा।

जहां कर्मचारी द्वारा किसी राशि का भुगतान अथवा जमा करार्इ जाती है तो इस धारा के उद्देश्य हेतु खाते में शामिल की जाती है, , ऐसी राशि से संबंधित कटौती धारा 80सी के अंतर्गत स्वीकृत नहीं की जाएगी।

5.5.4 इक्विटी बचत योजना के अंतर्गत किए गए निवेश से संबंधित कटौती (धारा 80सीसीजी) :

धारा 80सीसीजी अधिसूचित इक्विटी बचत योजना के अंतर्गत किए गए निवेश के संबंध में प्रभावी निर्धारण वर्ष 2013-14 अनुसार कटौती उपलब्ध कराता है। राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना 2012 को इस धारा के अंतर्गत योजना के अनुसार एसओ सं. 2777र्इ दिनांक 23.11.2012 के मार्फत अधिसूचित किया गया है। यह योजना आरजीर्इएसएस 2013 के अनुसार अधिसूचना एसओ सं. 3693 दिनांक 18.12.2013 के मार्फत दिसंबर 2013 में संशोधित की गर्इ थी। आरजीर्इएसएस 2013 के अनुसार इस धारा के अंतर्गत यह कटौती उपलब्ध होगी यदि निम्न शर्तों को पूरा किया जाता है :

(क)  निर्धारिती अकेला रहता हो

(ख)  उसकी सकल कुल आय रू. 12 लाख से अधिक न हो

(ग)  उसने धारा 10(38) में परिभाषित इक्विटी उन्मुख कोष की अधिसूचित योजना अथवा सूचित सूची के अनुसार सूचित शेयर लिए हो

(घ)  निर्धारिती नया रिटेल निवेशक हो

(ड)  उक्त योजना के अनुसार अधिग्रहण की तिथि से 3 साल की अवधि के लिए निवेश बंद हो

(च)  निर्धारिती निर्धारितानुसार अन्य शर्तों को पूरा करता हो

कटौती राशि : कटौती राशि इक्विटी शेयर/र्इकार्इ में निवेशित राशि का 50 प्रतिशत है। बहरहाल, इस प्रावधान के अंतर्गत राशि रू. 25,000 से अधिक न हो।

कटौती की वापसी - उक्त कथित कटौती के दावों के बाद यदि निर्धारिती उक्त शर्तों को पूरा करने में असफल रहता है तो वास्तविक स्वीकार्य कटौती उस वर्ष के निर्धारिती आये से समझी जाएगी जब व्यक्तिक्रम प्रतिबद्ध हो।

यह कटौती उस वर्ष की शुरूआत के साथ लगातार तीन निर्धारण वर्षों के लिए स्वीकृत होगी जिसमें सूचित इक्विटी शेयर अथवा श्रेणी पहले अधिगृत की गर्इ थी। किसी वर्ष में इस धारा के तहत करदाता द्वारा किसी प्रकार की कटौती का दावा किया जाता है तो वह अन्य किसी वर्ष के लिए इस धारा के तहत किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।

5.5.5 स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान, आदि के संबंध में कटौती (धारा 80डी)

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम आदि हेतु उपलब्ध कटौती हेतु धारा 80डी उपलब्ध कराती है जिसका आंकलन निम्नानुसार किया जाता है :

क्र.सं.

व्यक्ति जिसके लिए भुगतान किया गया है

भुगतान की प्रकृति

भुगतान का प्रकार

स्वीकार्य कटौती (रू में)

1.

कर्मचारी अथवा उसका परिवार

 *  कर्मचारी अथवा इसके परिवार के स्वास्थ्य बीमा को लागू करने अथवा रखने के लिए कुल राशि केंद्र

 *  सरकार (वित्त अधिनियम 2013) द्वारा अधिसूचित ऐसी कोर्इ अन्य योजना अथवा सीजीएसएस को किया गया किसी प्रकार का अन्य अंशदान

 *  कर्मचारी अथवा परिवार के निवारक स्वास्थ्य जांच की वजह से किया गया भुगतान, (रू. 5,000/- तक सीमित, नकद भुगतान स्वीकार्य)

नकद को छोड़कर अन्य कोर्इ विधि

कुल स्वीकार्य राशि रू. 15,000/- (वरिष्ठ नागरिकों के लिए रू. 20,000/-) 

2.

कर्मचारी के माता -पिता

 *  कर्मचारी के माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा को लागू करने अथवा रखने के लिए कुल राशि

 *  कर्मचारी के माता-पिता के लिए निवारक स्वास्थ्य जांच की वजह से किया गया भुगतान, (रू. 5,000/- तक सीमित, नकद भुगतान स्वीकार्य)

नकद को छोड़कर अन्य कोर्इ विधि

कुल स्वीकार्य राशि रू. 15,000/- (वरिष्ठ नागरिकों के लिए रू. 20,000/-) 

यहां

  i)  'परिवार' का अर्थ कर्मचारी का जीवन साथी और आश्रित बच्चे है

 ii)  'वरिष्ठ नागरिक' का अर्थ भारत में रहने वाला व्यक्ति जिसकी आयु पिछले प्रासंगिक वर्षों के दौरान साठ वर्ष (वर्ष 2013-14 से शुरू) अथवा इससे अधिक है।

डीडीओ को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उक्त संदर्भित चिकित्सा बीमा इस संबंध में योजना सहित लागू होगी :

(क)  इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित तथा सामान्य बीमा व्यापार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 के अंतर्गत गठित भारतीय जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन अथवा

(ख)  बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 3 की उप-धारा (1) के अंतर्गत स्थापित बीमा नियामक तथा विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित अन्य कोर्इ बीमा कंपनी

5.5.6 विकलांंग व्यक्तियेां अथवा आश्रितों पर व्यय के संबंध में कटौती

5.5.6.1 आश्रित विकलांग व्यक्तियों के चिकित्सा उपचार सहित रखरखाव के संबंध मं कटौती (धारा 80डीडी) :

धारा 80डीडी के अंतर्गत, जहां कर्मचारी, भारत का नागरिक हो, पिछले वर्षों के दौरान-

(क)  विकलांग व्यक्तियों होने की स्थिति में आश्रित के चिकित्सीय उपचार (नर्सिंग सहित), प्रशिक्षण तथा पुर्नवास हेतु किसी प्रकार का किया गया व्यय अथवा

(ख)  जीवन बीमा निगम अथवा अन्य किसी बीमा कंपनी अथवा प्राधिकरण अथवा निर्दिष्ट कंपनी की ओर से इस संबंध में गठित योजना के अंतर्गत किसी प्रकार का देय अथवा जमा की गर्इ राशि बशर्ते इस संबंध में अनुरक्षण शर्तों तथा आश्रित, विकलांग होने के नाते, के रखरखाव हेतु इस संबंध में बोर्ड द्वारा अनुमोदित, कर्मचारी उस वर्ष की उसकी कुल सकल आय से पचास हजार रूपए के कुल कटौती स्वीकृत की जाएगी।

बहरहाल, गंभीर विकलांगता वाले आश्रितों के लिए एक लाख रूपए की राशि निर्दिष्ट शर्तों के अनुसार कटौती हेतु स्वीकृत होगी।

उक्त (बी) के अंतर्गत कटौती स्वीकृत की जाएगी यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाता है :-

 (i)  उक्त (बी) में निर्दिष्ट योजना आश्रित, विकलांग व्यक्ति होने के नाते, व्यक्ति जिसके नाम पर योजना का अंशदान किया गया है, की मृत्यु होने की स्थिति में, के लाभ के लिए वार्षिकी अथवा एकमुश्त का भुगतान उपलब्ध कराता है।

(ii)  मनोनीत कर्मचारी चाहे आश्रित हो, विकलांग व्यक्ति होने के नाते अथवा अन्य कोर्इ व्यक्ति अथवा विश्वास पात्र जो उसकी ओर से भुगतान प्राप्त कर सके, आश्रित के लाभ पाने के लिए, विकलांग व्यक्ति होने के नाते

बहरहाल, यदि आश्रित व्यक्ति विकलांग व्यक्ति होने के नाते, कर्मचारी के मर जाने पर, उक्त की उप-धारा (ब) के अंतर्गत भुगतान की गर्इ अथवा जमा की गर्इ राशि के समान राशि को पिछले वर्ष जिसमें कर्मचारी द्वारा ऐसी कोर्इ राशि प्राप्त की गर्इ हो, के कर्मचारी की आय के तौर पर मानी जाएगी तथा तद्नुसार पिछले वर्ष की आय के अनुसार कर की वसूली की जाएगी।

5.5.6.2 विकलांग व्यक्ति के संबंध में कटौती (धारा 80 यू) :

धारा 80 यू के अंतर्गत, व्यक्ति की कुल आय की गणना, निवासी होने के नाते जो पिछले साल के दौरान किसी भी समय विकलांग व्यक्ति के तौर पर चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया हो, के लिए पचास हजार रूपए की कुल कटौती को स्वीकार किया जाएगा। बहरहाल, जहां गंभीर विकलांग व्यक्ति की स्थिति में, उच्च कटौती के तहत एक लाख की कटौती स्वीकार्य होगी।

डीडीओ को यह ध्यान देना चाहिए कि कर्मचारी के आश्रित होने की स्थिति में 80डीडी कटौती जबकि स्वयं कर्मचारी की स्थिति में 80यू कटौती होगी। बहरहाल दोनों धाराओं के अंतर्गत कर्मचारी को डीडीओ को निम्नलिखित प्रस्तुत करना चाहिए

 1.  नियमों के नियम 11ए(2) के अनुसार निर्धारित प्रपत्र में नियम 11ए(1) में परिभाषितानुसार चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र की प्रति। डीडीओ को इस नियम में तथा यहां निर्दिष्टानुसार प्रपत्र में इसके परिभाषित होने से चिकित्सा प्राधिकारी से जारी प्रमाणपत्र को देखने के बाद ही कटौती करनी होगी।

 2.  आगे, विकलांगता की अवस्था के अस्थार्इ होने तथा कथित प्रमाणपत्र में संलग्न अवधि की सीमा के पुनर्मूल्यांकन की स्थिति में इस धारा के अतर्गत किसी आगामी अवधि के लिए कोर्इ कटौती स्वीकार्य नहीं होगी जबतक उक्त 1 के अनुसार चिकित्सा प्राधिकारी से एक नया प्रमाण पत्र प्राप्त तथा डीडीओ के समक्ष प्रस्तुत न किया जाए।

 3.  धारा 80डीडी तथा 80यू के उद्देश्य हेतु नियम निम्नानुसार परिभाषित हैं :-

(क)  "प्रशासक" अर्थात् भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम और निरसन) अधिनियम, 2002 की धारा 2 के वाक्यांश (ए) में संदर्भितानुसार प्रशासक

(ख)  "आश्रित" अर्थात्

 (i)  व्यक्ति होने की स्थिति में, व्यक्ति का जीवनसाथी, बच्चे,  माता-पिता, भार्इ तथा बहनें अथवा इनमें से कोर्इ

(ii)  अविभाजित हिंदु परिवार होने की स्थिति में, अविभाजित हिंदु परिवार का सदस्य, व्यक्ति पर पूर्ण तथा मुख्य रूप से आश्रित अथवा व्यक्ति की मदद और रखरखाव के जरिए अविभाजित हिंदु परिवार तथा जिसने पिछले वर्ष से संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए उसकी कुल आय की गणना में धारा 80यू के अंतर्गत कटौती का किसी प्रकार का दावा न किया हो।

(ग)  "विकलांगता" विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार रक्षा तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (i) में निर्दिष्ट अर्थ होगा तथा इसमें मानसिक मंदता और बहु विकलांगता अधिनियम, 1999, सेरेबल पाल्सी, राष्ट्रीय आत्मकेंद्रित व्यक्ति कल्याण ट्रस्ट की धारा 2 के वाक्यांश (ए),(सी) तथा (एच) में संदर्भित "आत्मकेंद्रित" "सेरेबल पाल्सी" तथा "बहु विकलांगता" शामिल है।

(घ)  "जीवन बीमा निगम" का वही अर्थ है जो धारा 88 की उप-धारा (8) में निहित है।

(ड़)  "चिकित्सा प्राधिकारी" अर्थात् विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार रक्षा तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा 2 के वाक्यांश (पी) में अथवा मानसिक मंदता और बहु विकलांगता अधिनियम, 1999, सेरेबल पाल्सी, राष्ट्रीय आत्मकेंद्रित व्यक्ति कल्याण ट्रस्ट की धारा 2 के वाक्यांश (ए), (सी), (एच), (जे) तथा (ओ) में संदर्भित "आत्मकेंद्रित", "सेरेबल पाल्सी" तथा "बहु विकलांगता" "विकलांग व्यक्ति", "गंभीर विकलांगता" को प्रामाणित करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट अधिसूचना के माध्यम से ऐसा कोर्इ अन्य चिकित्सा प्राधिकारी, निर्दिष्ट अर्थ होगा।

(च)  "विकलांग व्यक्ति " अर्थात् मानसिक मंदता और बहु विकलांगता अधिनियम, 1999, सेरेबल पाल्सी, राष्ट्रीय आत्मकेंद्रित व्यक्ति कल्याण ट्रस्ट की धारा 2 के वाक्यांश (टी) अथवा विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार रक्षा तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा 2 के वांक्यांश में निर्दिष्ट अर्थ होगा

(छ)  "गंभीर विकलांगता का अर्थ"

 (i)  अस्सी प्रतिशत अथवा इससे अधिक विकलांगता सहित व्यक्ति, विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार रक्षा तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा 56 की उप-धारा (4) में संदर्भितानुसार

(ii)  मानसिक मंदता और बहु विकलांगता अधिनियम, 1999, सेरेबल पाल्सी, राष्ट्रीय आत्मकेंद्रित व्यक्ति कल्याण ट्रस्ट की धारा 2 के वाक्यांश (ओ) में संदर्भितानुसार गंभीर विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति

(ज)  "निर्दिष्ट कंपनी" अर्थात् भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम और निरसन) अधिनियम, 2002 की धारा 2 के वाक्यांश (एच) में निर्दिष्टानुसार

5.5.7. चिकित्सा उपचार आदि से संबंधित कटौती (धारा 80डीडीबी) :

धारा 80डीडीबी, कर्मचारी, जो पिछले वर्ष के दौरान भारत में निवास करता हो, की स्थिति में धारा 80डीडीबी उसके अथवा उसके आश्रितों के लिए नियम 11डीडी (1) में निर्दिष्टानुसार ऐसे रोग अथवा बीमारी के चिकित्सीय उपचार हेतु वास्तविक देय किसी राशि में कटौती की स्वीकृति देता है। कटौती वास्तविक देय राषि के समान अथवा रू. 40,000 जो भी कम हो, के समान की जाएगी। इससे आगे देय राशि प्राप्त राशि तक सीमित की जाएगी यदि बीमाकर्ता द्वारा कोर्इ बीमा प्रक्रिया में हो अथवा कर्मचारी द्वारा प्रतिपूति की गर्इ हो। वरिष्ठ नागरिक (व्यक्ति जो प्रासंगिक बीते वर्षों के दौरान किसी समय भारत में निवास करता हो तथा जिसकी आयु 60 साल अथवा अधिक हो) राशि से कटौती रू. 60,000/- स्वीकृत है।

डीडीओ को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी नियम 11डीडी में निर्दिष्टानुसार प्रतिरक्षाविज्ञानी, रक्तविशेषज्ञ, उरोलाजिस्त, स्नायुविशेषज्ञ अथवा ऐसे किसी विशेषज्ञ से प्रपत्र 10-I में प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें।

कर्मचारी की स्थिति में इस उद्देश्य के लिए "आश्रित" का अर्थ व्यक्ति जिसका जीवनसाथी, बच्चे, माता-पिता, भाइ तथा बहनें अथवा इनमें से कोर्इ जो पूर्ण अथवा मुख्य रूप से कर्मचारी के समर्थन तथा रखरखाव पर आश्रित हो, होगा

5.5.8 उच्च शिक्षा के लिए, लिए गए ऋण के संबंध में कटौती (धारा 80र्इ) :

धारा 80र्इ कर्मचारी को अपने जीवनसाथी अथवा अपने बच्चों अथवा विद्यार्थी जिसका वह कानूनी रूप से अभिभावक है, की उच्च शिक्षा के लिए अथवा उसकी जारी उच्च शिक्षा के लिए किसी वित्तीय संस्थान अथवा किसी अनुमोदित धर्मार्थ संस्थान से लिए गए ऋण के संबंध में कटौती की स्वीकृति देती है।

कटौती वित्तीय वर्ष, जिस वर्ष में कर्मचारी ने लिए गए ऋण का ब्याज चुकाना आरंभ किया है, तथा तुरंत सफल सात वर्ष अथवा जब तक जिसमें कर्मचारी द्वारा पूरा ब्याज चुकाया गया हो, जो भी पहले हो, के लिए कुल आय की गणना से की जाएगी

इस धारा के उद्देश्य के लिए :-

(क)  "अनुमोदित धर्मार्थ संस्थान" अर्थात् धारा 80जी(2)(ए) में संदर्भित संस्थान अथवा निर्धारित प्राधिकारी धारा 10(23सी) द्वारा अनुमोदित तथा धर्मार्थ उद्देश्य हेतु स्थापित संस्थान

(ख)  "वित्त संस्थान" अर्थात् बैंकिग कंपनी, जिस पर बैकिंग नियामक अधिनियम, 1949 लागू होता हो ( अधिनियम की धारा 51 में संदर्भित बैकिंग संस्थान अथवा अन्य कोर्इ बैंक) अथवा अन्य कोर्इ वित्तीय संस्थान जिसे केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिकारिक राजपत्र, निर्दिष्ट, में अधिसूचित किया गया हो।

(ग)  "उच्च शिक्षा" अर्थात् केंद्र सरकार अथवार राज्य सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण अथवा केंद सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण, ऐसा करने के लिए, द्वारा अनुमोदित कोर्इ अन्य संस्थान द्वारा मान्यताप्राप्त कोर्इ विद्यालय, बोर्ड अथवा विश्वविद्यालय से उच्च माध्यमिक शिक्षा अथवा इसके समकक्ष उत्तीर्ण करने के पश्चात् होने वाला कोर्इ पाठ्यक्रम,।

5.5.9 आवासीय भवन हेतु लिए गए ऋण के संबंध में कटौती (धारा 80र्इर्इ) :

वित्त अधिनियम 2013 के मार्फत, व्यक्ति को वित्तीय संस्थान से लिए गए ब्याज, रू. 1,00,000 की सीमा तक की कटौती स्वीकार्य है, भवन जिसकी कीमत 40 लाख से अधिक न हो, अधिग्रहण के लिए ऋण 01.04.2013 से 31.03.2014 (ऋण 25 लाख से अधिक न हो) की अवधि के दौरान मंजूर हुआ हो। बहरहाल कटौती स्वीकार्य होगी यदि ऋण के स्वीकृत किए जाने की तिथि को निर्धारिती के पास अपना कोर्इ आवासीय भवन न हो।

यदि उक्त ऋण के संबंध में ब्याज का दावा निर्धारण वर्ष 2014-15 के दौरान रू. 1,00,000/- से कम हो तो शेष राशि निर्धारण वर्ष 2015-16 में स्वीकृत होगी।

5.5.10 कुछ कोष, धर्मार्थ संस्थान आदि को चंदे के संबंध में कटौती (धारा 80जी)

धारा 80 जी विभिन्न कोष, धर्मार्थ संस्थानों आदि को चंदे के रूप में दी गर्इ राशि के कारण कटौती मुहैया कराता है। यदि कर्मचारी अपने संबंधित नियोक्ता द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष अथवा लेिफ्टीनेंट गर्वनर राहत कोष में दान करता है तो, ऐसे कोष हेतु किए गए दान के संबंध में ऐसे सभी कर्मचारियों को पृथक प्रमाणपत्र जारी करने हेतु ऐसे कोष के लिए संभव नहीं है क्योंकि इन कोषों के लिए दिए गए अंशदान समेकित चेक के रूप में होते है। कर्मचारी जो इन कोष के माध्यम से दान करता है वह धारा 80 जी के अंतर्गत कटौती का दावा करने का अधिकार रखता है। एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि उक्तानुसार निर्दिष्ट ऐसे कोषों के संबंध में दावा इस संबंध में नियोक्ता/आरेखण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर धारा 80 जी के अंतर्गत स्वीकार्य है। परिपत्र सं. 2/2005, दिनांक 12.01.2005

इस धारा के अंतर्गत दान, यदि रू. 10000/- से अधिक हो बशर्ते राशि का भुगतान नकद को छोड़कर अन्य किसी विधि द्वारा किया गया हो, किसी भी राशि के संबंध में कटौती स्वीकार्य होगी।

5.5.11 देय किरायों के संबंध में कटौती (धारा 80जीजी) :

धारा 80जीजी कर्मचारी को उसके भवन के लिए उसके द्वारा दिए गए भवन किराये के संबंध में कटौती का अधिकार देती है। ऐसी कटौती निम्नलिखित शर्तों के अनुसार स्वीकार्य होगी।

(क)  कर्मचारी को विशेषरूप से स्वीकृत किए गए किसी प्रकार के भवन किराये की प्राप्ति न होने पर, जो इस अधिनियम की धारा 10 (13ए) के अंतर्गत छूट हेतु योग्य हो

(ख)  कर्मचारी द्वारा प्रपत्र सं. 10बीए में घोषणा दायर करें (परिशिष्ट X)

(ग)  कर्मचारी के पास निजी न हो :

  (i)  स्वंय अथवा अपने जीवनसाथी अथवा अपना छोटा बच्चा अथवा जहां ऐसा कर्मचारी हिंदु अविभाजित परिवार का हिस्सा हो, ऐसा परिवार जो सामान्य रूप से वहां रहता हो अथवा अपने कार्यालय का कार्य करता हो अथवा वहीं से अपना व्यापार अथवा पेशा संचालित करता हो, के लिए कोर्इ आवासीय निवास, अथवा

 (ii)  अन्य कोर्इ स्थान, कोर्इ आवासीय निवास जो कर्मचारी के उपजीविका में हो, जिसकी कीमत धारा 23(2)(ए) अथवा धारा 23 (4)(ए) के अंतर्गत निर्धारित हो, जो भी स्थिति हो,

(घ)  वह अपनी कुल आय के 10 प्रतिशत से अधिक के दिए गए आवासीय किराये के संबंध में कटौती पाने का हकदार है। कटौती उसकी कुल आय के 25 प्रतिशत अथवा रू. 2,000/- प्रतिमाह, जो भी कम हो, के समान तक की जाएगी। इन प्रतिशतों से बाहर की कुल आय की गणना धारा 80जीजी के अंतर्गत किसी प्रकार की कटौती से पहले की जाएगी।

आरेखण एवं संवितरण अधिकारी को स्वयं को संतुष्ट करना चाहिए कि उक्त निर्दिष्ट सभी शर्तें ऐसी कटौती के समक्ष पूरी करता है व उनके द्वारा कर्मचारी को ऐसी कटौती की स्वीकृति दी गर्इ है। उन्हें इस संबंध में यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि किराये के वास्तविक भुगतान की प्रस्तुति की गर्इ है।

5.5.12 वैज्ञानिक अनुसंधान अथवा ग्रामीण विकास हेतु कुछ दान के संबंध में कटौतियां (धारा 80जीजीए) :

धारा 80जीजीए निम्न तालिका में दी गर्इ किसी राशि के चंदे के संबंध में कर्मचारी की कुल आय से कटौती की स्वीकृति देती है :-

क्र.सं. व्यक्तियों को दिया गया दान धारा के तहत अनुमोदित अधिसूचना प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत/अनुमोदित अधिसूचना
1. एक अनुसंधान संस्था जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान का दायित्व लेना हो अथवा विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य किसी संस्थान का वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रयोग किया जाए धारा 35(1)(ii) के अंतर्गत केंद्र सरकार
2. एक अनुसंधान संस्था जिसका उद्देश्य सांख्यिकी अनुसंधान का दायित्व लेना हो अथवा विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य संस्थान के सामाजिक ज्ञान अथवा सांख्यिकी अनुसंधान के लिए उसका प्रयोग किया जाए धारा 35 (1)(ii) के अंतर्गत केंद्र सरकार
3. एक संस्था अथवा संस्थान जिसका उद्देश्य किसी ग्रामीण विकास कार्यक्रम का उत्तरदायित्व लेना हो, धारा 35सीसीए के लिए किसी अनुमोदित ग्रामीण विकास कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु प्रयोग किए जाने के लिए धारा 35सीसीए (2) के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुति पर नियम 6एएए के अंतर्गत निर्धारित
4. एक संस्था अथवा संस्थान जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन हेतु व्यक्तियों को प्रशिक्षित करना हो धारा 35सीसीए (2ए) के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुति पर नियम 6एएए के अंतर्गत निर्धारित
5. किसी अनुमोदित परियोजना अथवा योजना के क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय समिति द्वारा अनुमोदित संस्था अथवा संस्थान अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अथवा स्थानीय प्राधिकरण धारा 35एसी (2ए) के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुति पर राष्ट्रीय सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण संवर्धन समिति
6. ग्रामीण विकास कोष 35सीसीए(1)(सी) के अंतर्गत अधिसूचित केंद्र सरकार द्वारा स्थापित एवं अधिसूचित
7.  राष्ट्रीय शहरी गरीबी उन्मूलन कोष 35सीसीए(1)(डी) के अ्ंतर्गत अधिसूचित केंद्र सरकार द्वारा स्थापित एवं अधिसूचित

निम्न स्थिति में इस धारा के अंतर्गत कोर्इ कटौती नहीं होगी

 i)  कर्मचारी की कुल आय जिसमें आय शामिल है जो "व्यापार अथवा पेशे का लाभ तथा प्राप्तियां" विषय के अंतर्गत देययोग्य है।

 ii)  रू. 10000 से अधिक दान की राशि तथा नकद में देय

आरेखण तथा संवितरण प्राधिकारी को स्वयं को संतुष्ट करना होगा कि ऐसी कटौतियों के सम्मुख पूरी की गर्इ

उक्त निर्दिष्ट शर्तो को कर्मचारी हेतु उनके द्वारा पूरा किया गया है। उन्हें व्यक्ति, जिनके लिए दान किया गया है, द्वारा दान के वास्तविक भुगतान तथा प्राप्ति के प्रमाण की प्रस्तुति पर इस संबध में आग्रह द्वारा स्वयं को भी संतुष्ट करना होगा तथा सुनिश्चित करना होगा कि स्वीकृति/अधिसूचना सही प्राधिकारी द्वारा जारी की गर्इ है। डीडीओ को कर्मचारी द्वारा स्व: घोषणा द्वारा सुनिश्चित करना होगा कि वह "व्यापार अथवा व्यवसाय के लाभ तथा प्राप्तियों" से वेतन प्राप्त नहीं करता है।

5.5.13 बचत खाता में जमा पर ब्याज के संबंध में कटौती (धारा 80टीटीए) :

धारा 80टीटीए वित्तीय वर्ष 2012-13 से आरंभ की गर्इ है तथा यह कर्मचारी को स्वीकृति प्रदान करती है कि उसकी सकल आय, यदि बचत खाते में जमा (अवधि जमा नहीं) के ब्याज के रूप में किसी आय शामिल हो, कटौती निम्न राशि पर होगी :-

 (i)  ऐसी आय की स्थिति में राशि कुल दस हजार, ऐसी कुल राशि, से अधिक नही होंनी चाहिए, तथा

(ii)  किसी अन्य स्थिति में दस हजार रूपए

कटौती उपलब्ध होगी यदि यह बचत खाता निम्न में संरक्षित होता है :-

(क) बैंकिग संस्थान जिस पर बैंकिग नियामक अधिनियम, 1949 लागू होता है ( उस अधिनियम की धारा 51 हेतु संदर्भित किसी बैंक अथवा बैंकिंग संस्थान सहित)

(ख) बैंकिंग ( सहकारी भूमि बंधक बैंक अथवा सहकारी भूमि विकास बैंक सहित) के व्यापार को करने में लगी सहकारी संस्था; अथवा

(ग) भारतीय डाक कार्यालय अधिनियम, 1898 की धारा 2 के वाक्यांश (के) में परिभाषितानुसार डाक घर

इस धारा के लिए "सावधि जमा" का अर्थ नियम अवधि की समाप्ति पर पुन:देययोग्य जमा

6. रू. 5 लाख तक की कुल आय वाले व्यक्ति के लिए रू. 2000 की छूट (धारा 87ए)

वित्त अधिनियम 2013 उस करदाता, भारत के निवासी को राहत प्रदान कराता है जो न्यून आय श्रेणी अर्थात् जिनकी कुल आय रू. 5,00,000/- से अधिक न हो। छूट की राशि रू. 2000/- अथवा देय कर की राशि, जो भी कम है। यह छूट निर्धारण वर्ष 2014-15 तथा आगामी निर्धारण वर्षों के लिए उपलब्ध है।

7. अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष से अंशदान तथा मान्यताप्राप्त भविष्य निधि के अंतर्गत संचित अधिशेष के भुगतान पर टीडीएस

7.1 कर्मचारी को संचित शेष राशि के भुगतान के लिए मान्यताप्राप्त भविष्य निधि कोष के न्यासियों अथवा कोष विनिमय द्वारा अनुमोदित कोर्इ व्यक्ति, उन मामलों में कटौती करेगा जहां अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ए का नियम 9 का उप-नियम (1) लागू होता हो, अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ए के नियम 10 में निर्दिष्ट कटौती उससे करने के लिए जब कर्मचारी को संचित शेष राशि का भुगतान किया गया हो।

संचित शेष राशि को "वेतन" विषय के अंतर्गत देययोग्य आय के तौर पर समझा जाएगा

7.2 नियोक्ता द्वारा किसी प्रकार का अंशदान, ऐसे अंशदान, यदि हो, पर ब्याज सहित, कर्मचारी को दिया गया अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष, दी गर्इ राशि पर कर अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग बी के नियम 6 में उपलब्घ सीमा तक कोष को न्यासियों द्वारा काटा जाएगा। टीडीएस उस कर की औसत दर तक होना चाहिए जिस पर कर्मचारी पूर्ववर्ती तीन वर्षों अथवा अवधि, यदि अवधि तीन वर्ष से कम हो व वह कोष का सदस्य रहा हो, के दौरान कर के लिए देने के लिए उत्तरदायी था।

कटौती कराने वाला लौटे हुए अंशदान (कर, यदि हो, सहित) के कारण किसी प्रकार की कुल राशि पर कर काटने के लिए उत्तरदायी होगा भले ही कोष अथवा कोष का कोर्इ भाग अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष में छोड़ दिया गया हो।

8. डीडीओ द्वारा दावों की वास्तविकता के संबंध में स्वयं का संतुष्टिकरण :

आरेखण तथा संवितरण अधिकारियों को कर्मचारी द्वारा की गर्इ वास्तविक जमा/अंशदान/भुगतान के बारे में स्वयं को संतुष्ट करना चाहिए, ऐसे विवरण/जानकारी के लिए आवाह्न द्वारा जिसके लिए उन्हें कथित कटौती की स्वीकृति के समक्ष आवश्यक माना गया है। कर्मचारी द्वारा किए गए किसी प्रकार के जमा/अंशदान/भुगतान से संबंधित कर्मचारी के दावे की प्रमाणिकता के संबंध में डीडीओ द्वारा संतुष्ट न होने पर उसे इसकी आज्ञा नहीं देनी चाहिए तथा कर्मचारी आवश्यक प्रमाण आदि की प्रस्तुति तथा आय के रिटर्न को भरकर ऐसी राशि पर कटौती/छूट का दावा करने के लिए मुक्त है बशर्तें वह आंकलन अधिकारी को इस संबंध में संतुष्ट करें।

9. कटौती किए जाने वाले आयकर की गणना :

9.1 धारा 192 के लिए वेतन आय की गणना निम्नानुसार की जाएगी :-

(क) पहले पैरा 5.2 में निर्दिष्ट सभी आय सहित पैरा 5.1 में निर्दिष्टानुसार कुल आय की गणना तथा पैरा 5.3 में निर्दिष्ट आय को छोड़कर

(ख) उक्त (ए) में शामिल आंकड़ों से पैरा 5.4 में निर्दिष्ट कटौती की स्वीकृति तथा कर्मचारी के शुद्ध वेतन में शामिल राशि की गणना।

(ग) पैरा 3.5 में निर्दिष्ट सामान्य कथन के रूप में दिखार्इ गर्इ कुल सकल आय शामिल करने हेतु अन्य सभी विषयों - "भवन संपत्ति", "व्यापार अथवा व्यवसाय की लाभ व परिलब्धियां", "पूंजीगत लाभ", तथा "अन्य स्त्रोेतों से आय" से आय को शामिल करते हुए। बहरहाल, यह स्मरण कराया जाता है कि "भवन संपत्ति से आय" विषय के अंतर्गत नुकसान को छोड़कर ऐसे किसी विषय के अंतर्गत किसी प्रकार का नुकसान डीडीओ द्वारा स्वीकार्य नहीं होगा।

(घ) उक्त (सी) में शामिल आंकड़ों से पैरा 5.5 में निर्दिष्ट कटौती स्वीकृत है यदि प्रासंगिक शर्तों को पूरा किया जाए। पैरा 5.5 में निर्दिष्ट शुरूआती सीमा के अनुसार कटौती की कुल राशि उक्त (बी) में निर्दिष्ट राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा यदि यह अधिक होती है तो, उसे उस राशि तक सीमित किया जाना चाहिए।

यह कर्मचारी की कुल आय होगी जिस पर कटौती किए जाने के लिए आयकर आपेक्षित है। यह आय दस रूपए के नजदीकी गुणज की पूर्णांक राशि होनी चाहिए।

9.2 ऐसी राशि पर आयकर की गणना पैरा 4.8 में परिभाषितानुसार धारा 206एए के प्रावधानों के अनुसार तथा कर्मचारी की आयु को ध्यान में रखते हुए इस परिपत्र के पैरा 2.1 मे दी गर्इ दरों के अनुसार की जाएगी। धारा 87ए के अनुसार छूट रू. 2000/- तक योग्य व्यक्तियों (पैरा 6 देखें) को दी जा सकती है। लागू होने वाली स्थितियों में अधिभार की गणना की जाएगी (पैरा 2.2)

9.3 कुल देय कर लेने के लिए देय कर की राशि पर शिक्षा उपकर, लागू हो, (प्राथमिक हेतु 2 प्रतिशत तथा माध्यमिक शिक्षा हेतु 1 प्रतिशत) लगाकर बढ़ाया जाएगा।

9.4 पैरा 9.3 के अंतर्गत आने वाले कर की राशि समान किस्तों के रूप में प्रतिमाह काटी जाएगी। पिछली कटौतियों के अधिक अथवा कम होने की स्थिति में वह उसी वित्तीय वर्ष के दौरान आगामी कटौतियों की राशि को बढ़ाकर अथवा घटाकर समायोजित कर दी जाएगी।

10. विविध

10.1 ये निर्देश संपूर्ण नहीं है तथा ये नियोक्ता को वेतन से कर कटौती के संबंध में विभिन्न प्रावधानों को समझाने के लिए है जहां भी किसी भी प्रकार की शंका हो, वहां आयकर अधिनियम, 1961, आयकर नियम, 1962, वित्तीय (सं. 2) अधिनियम 2014, प्रासंगिक परिपत्र/अधिसूचना आदि को संदर्भित किया जा सकता है।

10.2 किसी सहायता की स्थिति में आयकर विभाग के स्थानीय जनसंपर्क अधिकारी/आंकलन अधिकारी को संपर्क किया जा सकता है।

10.3 ये निर्देश केंद्र/राज्य सरकारों के नियंत्रण के अंतर्गत जो भी है, सहित सभी संवितरण अधिकारी तथा उपक्रम के ध्यान में लाए जा सकते है।

10.4 इस परिपत्र की प्रतियां आयकर निदेशक (जन संपर्क, मुद्रण व प्रकाशन तथा आधिकारिक भाषा), 6वां तल, मयूर भवन, क्नॉट प्लेस, नर्इ दिल्ली-110001 तथा निम्नलिखित वेबसाइट पर उपलब्ध है

www.finmin.nic.in तथा www.incometaxindia.gov.in

हिन्दी संस्करण का अनुसरण होगा

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार

प्रति को

1. समस्त राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश

2. सभी मंत्रालय/भारत सरकार के विभाग आदि

3. राष्ट्रपति सचिवालय

4. उप-राष्ट्रपति सचिवालय

5. प्रधानमंत्री कार्यालय

6. लोकसभा सचिवालय

7. राज्यसभा सचिवालय

8. मंत्रीमंडल सचिवालय

9. सचिव, संघ लोक सेवा आयोग, धौलपुर हाउस,नर्इ दिल्ली

10. सचिव, कर्मचारी चयन आयोग, लोधी कॉम्पलैक्स, नर्इ दिल्ली

11. सर्वोच्च न्यायालय, नर्इ दिल्ली

12. चुनाव आयोग, नर्इ दिल्ली

13. योजना आयोग, नर्इ दिल्ली

14. राज्यपाल सचिवालय/सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपाल

15. मंत्रालयों के सभी एकीकृत वित्त्तीय सलहाकार/भारत सरकार के विभाग

16. राजस्व विभाग के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, केंद्रीय उत्पादन सीमा शुल्क बोर्ड के अधीनस्थ सभी विभागों के प्रमुख एवं कार्यालय

17. सेना मुख्यालय, नर्इ दिल्ली

18. वायु सेना मुख्यालय, नर्इ दिल्ली

19. नौसेना मुख्यालय, नर्इ दिल्ली

20. डाक एवं तार महानिदेशक, नर्इ दिल्ली, (10 प्रतियां)

21. भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (50 प्रतियां)

22. महालेखापाल-I, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद

23. महालेखापाल-II, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद

24. महालेखापाल, असम, शिलांग

25. महालेखापाल-I, बिहार, रांची

26. महालेखापाल-II, बिहार, पटना

27. महालेखापाल-I, गुजरात, अहमदाबाद

28. महालेखापाल-II, गुजरात, राजकोट

29. महालेखापाल, केरल, तिरूवनंतपुरम

30. महालेखापाल, मध्य प्रदेश, ग्वालियर

31. महालेखापाल, तमिलनाडु, चेन्नर्इ

32. महालेखापाल-I, महाराष्ट्र, मुंबर्इ

33. महालेखापाल-II, महाराष्ट्र, नागपुर

34. महालेखापाल, कर्नाटक,बेंगलुरू

35. महालेखापाल, उड़ीसा, भुवनेश्वर

36. महालेखापाल, पंजाब, चंडीगढ़

37. महालेखापाल, हिमाचल प्रदेश, शिमला

38. महालेखापाल, राजस्थान, जयपुर

39. महालेखापाल-I,II, III, उत्तर प्रदेश, इलाहबाद

40. महालेखापाल, पश्चिम बंगाल, कोलकाता

41. महालेखापाल, हरियाणा, चंडीगढ़

42. महालेखापाल, जम्मू व कश्मीर, श्रीनगर

43. महालेखापाल, मणिपुर, इंफाल

44. महालेखापाल, त्रिपुरा, अगरतला

45. महालेखापाल, नागालैंड, कोहिमा

46. लेखापरीक्षक (केंद्रीय), कोलकाता

47. लेखापरीक्षक (केंद्रीय राजस्व),नर्इ दिल्ली

48. लेखापरीक्षक (केंद्रीय), मुंबर्इ

49. लेखापरीक्षक, वैज्ञानिक एवं वाणिज्य विभाग, मुंबर्इ

50. सभी बैंक (भारतीय स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के, राष्ट्रीयकृत बैंक )

51. सचिव, भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय कार्यालय पी.बी. नं. 406, मुंबर्इ-400001 (25 प्रतियां, इसकी शाखाओं में वितरित करने के लिए)

52. लेखा अधिकारी, असम राइफल्स महानिरीक्षक, (मुख्यालय), शिलांग

53. वाणिज्य व उद्योग के समस्त चैंबर्स

54. लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय पुस्तकालय (प्रति 15 प्रतियां)

55. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की तकनीकी विंग में सभी कार्यालय एवं हिस्से

56. सहायक मुख्य निरीक्षक, आरबीआर्इ निरीक्षण विभाग, क्षेत्रीय प्रकोष्ठ मुंबर्इ/कोलकाता/चेन्नर्इ/नर्इ दिल्ली/कानपुर

57. लेखा नियंत्रक, आर्थिक मामला विभाग, नर्इ दिल्ली

58. प्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक, लोक ऋण कार्यालय, अहमदाबाद/ बेंगलुरू/ भुवनेश्वर/ मुंबर्इ/ कोलकाता/ हैदराबाद/ कानपुर/ जयपुर/ चेन्नर्इ/ नागपुर/ नर्इ दिल्ली/ पटना/ गुवाहाटी/ त्रिवेंद्रम

59. महालेखापाल, डाक व तार, शिमला

60. रक्षा लेखा महानियंत्रक, नर्इ दिल्ली

61. लेखा परीक्षा निदेशालय, रक्षा सेवाएं, नर्इ दिल्ली

62. विश्व स्वास्थ्य संगठन, नर्इ दिल्ली

63. अंतर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय, भारत शाखा, नर्इ दिल्ली

64. सचिव, इंडियन रेड क्रास सोसार्इटी, नर्इ दिल्ली

65. परमाणु ऊर्जा विभाग, मुंबर्इ

66. सचिव, विकास बोर्ड, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

67. राष्ट्रीय बचत संगठन, नागपुर

68. उप-महालेखाकार, डाक एवं तार, कोलकाता

69. कानूनी सलाहकार, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, पी.बी. नं. 19969, मुंबर्इ-4000021

70. प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय:-

i जीवन दीप बिल्डिंग, 1 मिडलटन स्ट्रीट, कोलकाता

ii सर्किल टाप हाउस, रजाई सलाई, चेन्नर्इ-600001

iii लखनऊ, उत्तर प्रदेश

iv बैंक स्ट्रीट, हैदराबाद-500001

v हमीदा रोड़, भोपाल-462001

vi शॉप नं. 101 से 105, सेक्टर 17-बी, चंडीगढ़

vii नर्इ एम्यू बिल्डिंग, मैडम कामा रोड़, मुंबर्इ-400021

viii 9, संसद मार्ग, नर्इ दिल्ली-110001

ix भेडरू, अहमदाबाद-380001

x जज कोर्ट रोड़, पोस्ट बॉक्स नं. 103, पटना-800001

xi 59, फोरेस्ट पार्क, भुवनेश्वर

xii गुवाहाटी, असम

71. मुख्य लेखा नियंत्रक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, लोक नायक भवन, खान मार्किट, नर्इ दिल्ली

72. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, (मुख्य कार्यालय), द माल, पटियाला

73. स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, मुख्य कार्यालय, तिलक मार्ग, 'सी' स्कीम, जयपुर

74. स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, मुख्य कार्यालय, गन फैक्ट्री, हैदराबाद

75. स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, 5 यशवंत निवास रोड़, इंदौर

76. स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, (मुख्य कार्यालय), के.जी. रोड़, बैंगलूरू

77. स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र, सत्यनारायण रोड़ के पीछे, भावनगर, गुजरात

78. स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, पोस्ट बॉक्स नं. 34, तिरूवनंतपुरम

79. एन.एस. शाखा, आर्थिक मामला विभाग, नर्इ दिल्ली

80. संपादक, "द इनकम टैक्स रिपोर्टर" कंपनी लॉ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (प्रा.) लि., 88, त्यागराज रोड, त्यागराज नगर, चेन्नर्इ-600017

81. संपादक, चार्टर्ड सेक्रेटरी, द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया, 'आर्इसीएसआर्इ हाउस, 22, इंस्टीट्यूशनल एरिया, लोधी रोड़, नर्इ दिल्ली-110003

82. संपादक, "टैक्सेशन" 174, जोर बाग, नर्इ दिल्ली

83. संपादक, "द टैक्स लॉ रिव्यू" पोस्ट बॉक्स नं. 152, जालंधर-144001

84. संपादक, "टैक्समैन" एलार्इड सर्विसेज (प्रा) लि. 1871, कूचा चेलन, खारी बावली, दिल्ली - 110006

85. कानून मंत्रालय (कानूनी मामला विभाग), शास्त्री भवन नर्इ दिल्ली

86. भारतीय खाद्य निगम, 16-17, बाराखंभा लेन, नर्इ दिल्ली-110001

87. आर्इएफसीआर्इ, बैंक ऑफ बड़ौदा भवन, 16, संसद मार्ग, नर्इ दिल्ली

88. आर्इडीबीआर्इ, आर्इडीबीआर्इ टावर, कफ पराड, मुंबर्इ-400005

89. आर्इसीआर्इसीआर्इ, 163, बैकबे रिक्लेमेशन, मुंबर्इ-400 020

90. नाबार्ड, पूनम चैंबर्स, डा. ऐनी बेसेंट रोड़, पी.बी. नं. 552, वर्ली, मुंबर्इ

91. राष्ट्रीय आवास बैंक, तृतीय तल, बॉम्बे लाइफ बिल्डिंग, 45, वीर नरिमन रोड़, मुंबर्इ

92. आर्इआरबीआर्इ, 19, नेताजी सुभाष रोड़, कोलकाता

93. भारत में संचालित हो रहे सभी विदेशी बैंक

94. एयर इंडिया, नर्इ दिल्ली

95. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नर्इ दिल्ली

96. उप निदेशक (प्रशा.), एनएसएसओ (एफओडी), महालोनोबिस भवन, 6वां तल, 164, जी.एल. टैगौर रोड़, कोलकाता-700108

 

(संदीप सिंह)

अवर सचिव, भारत सरकार

परिशिष्ट -I

कुछ दृष्टांत

उदाहरण 1

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

(क) साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी ( पुरूष या महिला) तथा निम्न कुल वेतन वाले कर्मचारियों की स्थिति में आयकर की गणना

i) रू. 2,50,000/-,

ii) रू. 5,00,000/-,

iii) रू. 10,00,000/-,

iv) रू. 20,00,000/-, तथा

v) रू. 1,10,00,000/-

(ख) उक्त कर्मचारियों की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा नहीं कराए जाने की स्थिति में

विवरण रूपए रूपए रूपए रूपए रूपए
  (i) (ii) (iii) (iv) (v)
सकल वेतन आय (भत्तों सहित) 2,50,000 5,00,000 10,00,000 20,00,000 1,10,00,000
जी.पी.एफ अंशदान 45,000 50,000 1,00,000 1,00,000 1,00,000
           

कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना

विवरण रूपए रूपए रूपए रूपए रूपए
  (i) (ii) (iii) (iv) (v)
सकल वेतन 2,50,000 5,00,000 10,00,000 20,00,000 1,10,00,000
कम : धारा 80 सी के अंतर्गत 45,000 50,000 1,00,000 1,00,000 1,00,000
करयोग्य आय 2,05,000 4,50,000 9,00,000 19,00,000 1,09,00,000
(क) उसपर देययोग्य कर शून्य 18,000* 1,05,000 3,95,000 3095000
अधिभार         309500
बढ़ाया :
(i) शिक्षा उपकर @ 2 % शून्य 360 2100 7,900 68090
(ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा
उपकर @ 1 %
शून्य 180 1050 3950 34045
कुल देय कर शून्य 18,540 1,08,150 406850 3506635
(ख) धारा 206एए के अंतर्गत टीडीएस, कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत न किए जाने पर शून्य 90,000 1,30,000 406850 3506635

*धारा 87ए के तहत रु. 2,000 छूट सहित

उदाहरण 2

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

साठ वर्ष की आयु से नीचे के आश्रित विकलांग वाले कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)

क्र.सं. विवरण रूपए
1. सकल वेतन 4,00,000
2. विकलांग आश्रित (लेकिन गंभीर विकलांगता न हो) के उपचार पर खर्च की गर्इ राशि 7000
3.  विकलांग आश्रित (लेकिन गंभीर विकलांगता न हो) के रखरखाव के लिए वार्षिकी से संबंधित भारतीय जीवन बीमा निगम को दी गर्इ राशि 60,000
4. जीपीएफ अंशदान 25,000
5. भुगतान की हुर्इ एलआर्इपी 10,000
6.  बचत खाते पर ब्याज आय 12,000

कर की गणना

क्र.सं. विवरण रूपए
1. सकल वेतन 4,00,000
2.

जमा : अन्य स्त्रोतों से आय

बचत खाते पर ब्याज आय

 रू. 12,000
3.  कुल सकल आय 4,12,000
4.  घटाया : धारा 80डीडी के अंतर्गत कटौती (केवल रू. 50,000/- तक सीमित) 50,000
5.  घटाया : धारा 80सी के अंतर्गत कटौती (i) जीपीएफ रू. 25,000/- 35,000
(ii) एलआर्इपी रू. 10,000/- = रू. 35,000
6.  घटाया : बचत खाते (रू. 10000/- तक सीमित) से ब्याज आय पर धारा 80टीटीए के अंतर्गत कटौती 10000
7. कुल आय 3,17,000
8.

उस पर देययोग्य आयकर

( धारा 87ए के अनुसार रू. 2000 की छूट सहित)

4,700
9.  बढ़ाया :  
(i) शिक्षा उपकर @ 2 % 94
(ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % 47
10.  कुल देययोग्य आयकर 4,841
11.  तक पूर्णाकिंत 4,840

उदाहरण 3

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना जहां चिकित्सा उपचार पर किया गया खर्चा नियोक्ता द्वारा वहन किया गया हो (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)

क्र.सं. विवरण रूपए
1. सकल वेतन 5,20,000
2.  नियोक्ता द्वारा स्वयं तथा परिवार के आश्रित सदस्य पर चिकित्सा उपचार पर खर्च की गर्इ राशि 35,000
3.  जीपीएफ अंशदान 20,000
4.  एलआर्इसी प्रीमियम 20,000
5.  भवन बिल्डिंग की अग्रिम अदायगी 25,000
6.  दो बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क 60,000
7.  यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश 30,000
8.  बचत खाते पर ब्याज आय 8,000
9.  सावधि जमा पर ब्याज आय 15,000

कर की गणना

क्र.सं. विवरण रूपए
1. सकल वेतन 5,20,000
2.  जमा : चिकित्सा व्यय की अदायगी के संबंध में रियायत
धारा 17(2)(v) के अनुसार रू. 15,000/- से अधिक होने पर
20,000
3.  अन्य स्त्रोतों से आय 23,000
  i) बचत खाता पर ब्याज आय रू. 8,000  
  ii) बचत खाता पर ब्याज आय रू. 15,000  
4.  कुल सकल आय 5,63,000
5.  क. : घटा : धारा 80 सी के अंतर्गत कटौती  
  (i) जीपीएफ रू. 20,000/-  
  (ii) एलआर्इसी रू. 20,000/-  
  (iii) भवन बिल्डिंग की अग्रिम अदायगी रू. 25,000/-  
  (iv) दो बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क रू. 60,000/-  
  (v) यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश रू. 30,000/-  
  कुल = रू. 1,55,000/-  
  1,50,000 रू. तक सीमित    
  ख. घटा : बचत खाते पर ब्याज आय (रू. 8000/- तक सीमित केवल बचत खाता ब्याज  पर उपलब्ध) पर धारा 80 टीटीए के अंतर्गत कटौती रू. 8000/-   1,58,000
  कुल उपलब्घ कटौती रू. 1,58,000/-    
6.  कुल आय   4,05,000
7.  उस पर देय आयकर ( धारा 87 ए के अनुसार रू. 2000 की छूट सहित)   13500
8.  जमा :    
  (i) शिक्षा उपकर @ 2 %   270
  (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 %   135
9.  कुल देययोग्य आयकर   13,905
10.  तक पूर्णांकित   13,910

 

उदाहरण 4

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में दिल्ली में स्थित आवासीय भवन के संबंध में धारा 10(13ए) के अंतर्गत भवन किराया भत्ते की गणना का उदाहरण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)

क्र.सं. विवरण रूपए
1.  वेतन 3,50,000
2.  मंहगार्इ भत्ता 2,00,000
3.  आवास किराया भत्ता 1,40,000
4, दिया गया आवास किराया 1,44,000
5.  साधारण भविष्य निधि 60,000
6.  जीवन बीमा प्रीमियम 4,000
7,  यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान का अंशदान 50,000
     

कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना

क्र.सं. विवरण रूपए
1.  वेतन+मंहगार्इ भत्ता+भवन किराया भत्ता 3,50,000+2,00,000+1,40,000+6,90,000 6,90,000
2.  कुल वेतन आय 6,90,000
3.  घटा : धारा 10 (13ए) के अंतर्गत घर किराया भत्ता में छूट   
  से न्यूनतम  
  (क) एचआरए की प्राप्त वास्तविक राशि = 1,40,000  
  (ख) वेतन के 10 प्रतिशत से अधिक किराये पर व्यय ( मंहगार्इ भत्ते सहित यह समझकर कि मंहगार्इ भत्ता  
  सेवानिवृति लाभ के लिए लिया गया है) (1,44,000 - 55,000) = 89,000  
  (ग) वेतन ( बेसिक + डीए) का 50 प्रतिशत 2,75,000/- 89,000
4.  कुल सकल आय 6,01,000
5.  घटाया : धारा 80 सी के अंतर्गत कटौती  
  (i) जीपीएफ रू. 60,000/-  
  (ii) एलआर्इसी रू. 4,000/-  
  (iii) यूनिट-लिंक्ड प्लान में निवेश रू. 50,000/-  
   कुल = रू. 1,14,000/- 1,14,000/-
6.  कुल आय   4,87,000
7. कुल आय पर देययोग्य कर   21700
  (धारा 87ए के अनुसार रू. 2000 की छूट के साथ)    
8.  बढ़ाया :    
  (i) शिक्षा उपकर @ 2 %   434
  (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 %   217
9.  कुल देययोग्य आयकर   22351
10.  तक पूर्णांकित   22350

 

उदाहरण 5

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

मुंबर्इ में गैर-सरकारी कंपनी में साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी, जिसे दस माह के लिए रियायती दर पर फ्लैट निवास तथा दो माह के लिए होटल में निवास उपलब्ध कराया गया था, की कर की गणना तथा रियायत के मूल्यांकन का उदाहरण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)

क्र.सं. विवरण रूपए
1.  वेतन 7,00,000
2.  बोनस 1,40,000
3.  रियायती दर पर फ्लेट (दस माह के लिए ) = रू. 3,60,000 3,60,000
4. नियोक्ता द्वारा देय होटल किराया (दो माह के लिए ) 1,00,000
5,  फर्नीचर शुल्क 2,00,000
6.  निशुल्क गैस, बिजली, पानी आदि (वास्तविक भुगतान कंपनी द्वारा करने पर ) 40,000
7.  कर्मचारी से बसूला जाने वाला किराया 60,000
8,  यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान हेतु अंशदान 50,000
9.  जीवन बीमा प्रीमियम 10,000
10.  मान्यताप्राप्त भविष्य निधि हेतु अंशदान 42,000

कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना

क्र.सं. विवरण रूपए
1.  वेतन 7,00,000
2.  बोनस 1,40,000
3. कुल वेतन (1+2) रियायत के (12 माह) के मूल्यांकन हेतु 8,40,000
  रियायतों का मूल्यांकन  
4(क)  फ्लैट हेतु रियायत  
  (10 माह के लिए वेतन का 15 प्रतिशत = रू. 1,05,000/-) तथा (वास्तविक  
  दिया गया किराया = रू. 3,60,000) अर्थात् रू. 1,05,000/-  
  घटाया : वसूला गया किराया रू. 60000/- रू. 45,000  
4(ख)  होटल हेतु रियायत रू. 33,600  
  (2 माह के वेतन का 24 प्रतिशत = रू. 33,600/-) से कम    
  तथा (वास्तविक भुगतान = रू. 1,00,000)    
4(ग)   फर्नीचर हेतु रियायत 1,38,000  
  रू. 2,00,000 के शुल्क का 10 प्रतिशत रू. 20,000    
4(घ) निशुल्क गैस, बिजली, पानी आदि हेतु रियायत रू. 40,000 1,38,600
4  कुल 1,38,600  
5.  कुल सकल आय (रू. 8,40,000 + 1,38,600)   9,78,600
6.  कुल सकल आय   9,78,600
7.  घटाया : धारा 80 सी के अंतर्गत कटौती    
  (i) भविष्य निधि (80सी) रू. 42,000/-  
  (ii) एलआर्इसी (80सी) रू. 10,000/-  
  (iii) यूनिट लिंक्ड प्लान हेतु अंशदान (80सी) रू. 50,000/- = रू. 1,02,000/-
  कुल = रू. 1,02,000/-  
8.  कुल आय   8,76,600
9.  देय कर   1,00,320
10.  बढ़ाया    
  (i) शिक्षा उपकर @ 2 %   2,006
  (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 %   1,003
11.  कुल देययोग्य आयकर   1,03,329
12.  तक पूर्णांकित   1,03,330

उदाहरण 6

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

दिल्ली में तैनात गैर-सरकारी कंपनी में साठ वर्ष की आयु से नीचे के कर्मचारी की स्थिति में की कर की गणना तथा रियायत के मूल्यांकन तथा भवन निर्माण ऋण की अदायगी का उदाहरण (नियोक्ता को वैध पैन प्रस्तुति पर)

क्र.सं. विवरण रूपए
1.  वेतन 4,00,000
2.  मंहगार्इ भत्ता 1,00,000
3.  भवन किराया भत्ता 1,80,000
4, विशेष कार्य भत्ता 12,000
5.  भविष्य निधि 60,000
6.  एलआर्इपी 10,000
7.  एनएससी VIII अंक में जमा 30,000
8.  घर, जो कर्मचारी द्वारा लिया गया है, हेतु उसके द्वारा दिया गया किराया 1,20,000
9. गृह निर्माण ऋण के पुनर्भुगतान (प्रिंसिपल) 60,000
10.  तीन बच्चों के लिए अध्यापन शुल्क ( रू, 10,000 प्रति बालक) 30,000

कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना

क्र.सं.  विवरण रूपए
1.  सकल वेतन (बेसिक+डीए+एचआरए+एसडीए) 6,92,000
  घटाया : धारा 10 (13ए) के अंतर्गत आवास भत्ता पर छूट  
  से न्यूनतम  
  (क) प्राप्त एचआरए की वास्तविक राशि = रू. 1,80,000  
  (ख) वेतन (मंहगार्इ भत्ते सहित) के 10 प्रतिशत से अधिक किराए पर व्यय मंहगार्इ भत्ता समझकर  
  सेवानिवृत्ति लाभ ( 1,20,000-50,000) = रू. 70,000 70,000
  (ग) वेतन (मंहगार्इ भत्ते सहित) का 50 प्रतिशत = रू. 2,00,000  
2 कुल देययोग्य सकल आय 6,22,000
   घटाया : धारा 80 सी के अंतर्गत कटौती  
  (i) भविष्य निधि : रू. 60,000  
  (ii) एलआर्इपी : रू. 10,000  
  (iii) एनएससी VIII अंक : रू. 30,000  
  (iv) एचबीए की पुन अदायगी : रू. 60,000  
  (v) अध्यापन शुल्क ( दो बच्चों तक सीमित) : रू. 20,000  
  कुल : रू. 1,80,000  
  1,50,000 रू. तक सीमित   1,50,000
  कुल आय 4,72,000
  उसपर देय आयकर (धारा 87ए के अनुसार रू. 2000 की छूट सहित) 20,200
  बढ़ाया :    
  (i) शिक्षा उपकर @ 2 %   404
  (ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 %   202
  कुल देययोग्य आयकर 20,806
  तक पूर्णांकित 20,810

 

उदाहरण 7

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

क. साठ वर्ष की आयु से अधिक लेकिन 80 वर्ष की आयु से कम तथा निम्न सकल पेंशन वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना

विवरण रूपए रूपए रूपए
  (i) (ii) (iii)
सकल पेंशन 4,50,000 8,00,000 12,50,000
पी.पी.एफ. का अंशदान 70,000 1,00,000 1,50,000

 

ख. उक्त कर्मचारी की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा न कराए जाने की स्थिति में।

कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना

विवरण रूपए रूपए रूपए
  (i) (ii) (iii)
सकल पेंशन 4,50,000 8,00,000 12,50,000
घटाया : धारा 80 सी के अंतर्गत कटौती 70,000 1,00,000 1,50,000
देय आय 3,80,000 7,00,000 11,00,000
उस पर देय कर (क) 6,000 60,000 1,50,000
बढ़ाया :      
(i) शिक्षा उपकर @ 2 % 120 1200 3000
(ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @ 1 % 60 600 1500
कुल देययोग्य आयकर 6,180* 61,800 1,54,500
ख. कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत न करने की स्थिति में धारा 206एए के अंतर्गत टीडीएस 16,000 80,000 1,60,000

*धारा 87ए के अनुसार रू. 2000 की छूट सहित

उदाहरण 8

निर्धारण वर्ष 2015-16 हेतु

क. 80 वर्ष की आयु से अधिक तथा निम्न सकल पेंशन वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी की स्थिति में आयकर की गणना

विवरण रूपए रूपए रूपए
  (i) (ii) (iii)
सकल पेंशन 5,00,000 8,00,000 12,50,000
पी.पी.एफ. का अंशदान 80,000 1,20,000 1,50,000

ख. उक्त कर्मचारी की स्थिति में टीडीएस राशि क्या होगी, उनके द्वारा उनके डीडीओ/कार्यालयों को पैन जमा न कराए जाने की स्थिति में।

कुल आय तथा उस पर देययोग्य कर की गणना

विवरण रूपए रूपए रूपए
  (i) (ii) (iii)
सकल पेंशन 5,00,000 8,00,000 12,50,000
घटाया : धारा 80 सी के अंतर्गत कटौती 80,000 1,20,000 1,50,000
देय आय 4,20,000 6,80,000 11,00,000
उस पर देय कर (क) शून्य 36,000 1,30,000
बढ़ाया :      
(i) शिक्षा उपकर @ 2 %   720 2600
(ii) माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर @1 %   360 1300
कुल देय कर शून्य 37,080 1,33,900
ख. कर्मचारी द्वारा पैन प्रस्तुत न करने की स्थिति में धारा 206एए के अंतर्गत टीडीएस शून्य 37,080 1,33,900

 

परिशिष्ट-II

प्रपत्र सं. 12बीए

(नियम 26ए(2)(बी) को देखें)

रियायत के विवरण को दर्शाते हुए वर्णन, उसकी राशि सहित वेतन के स्थान पर अन्य अनुषंगी लाभ अथवा सुविधाएं तथा मुनाफा

1) नियोक्ता का नाम तथा पता :

2) टैन

3) कर्मचारी की टीडीएस आंकलन श्रेणी :

4) कर्मचारी का नाम, पद तथा पैन :

5) यदि कर्मचारी निदेशक अथवा कंपनी में

पर्याप्त रूचि रखने वाला व्यक्ति हो तो :

(जहां नियोक्ता ही कंपनी हो)

6) कर्मचारी के "वेतन" विषय के अंतर्गत आय :

(रियायत को छोड़कर)

7) वित्तीय वर्ष :

8) रियायतों का मूल्यांकन

क्र.सं. रियायत का प्रकार (नियम 3 देखें) नियम के अनुसार  रियायत राशि (रू.) यदि कर्मचारी से वसूली गर्इ कर राशि हेतु) (रू.) देययोग्नीय रियायत की गर्इ राशि स्तंभ (3)-स्तंभ (4) (रू.)
(1) (2) (3) (4) (5)
1.  भवन      
2.  कार/अन्य वाहन      
3.  सफार्इ कर्मी, माली, चौकीदार अथवा निजी परिचारक      
4. गैस, बिजली, पानी      
5.  ब्याज मुक्त अथवा रियायती ऋण      
6.  अवकाश व्यय      
7.  नि:शुल्क अथवा रियायती यात्रा      
8.  नि:शुल्क भोजन      
9.  नि:शुल्क शिक्षा      
10.  उपहार, वाउचर आदि      
11.  क्रेडिट कार्ड व्यय      
12. क्लब व्यय      
13. कर्मचारियों द्वारा चल संपत्ति का प्रयोग      
14. कर्मचारियों को संपत्ति का स्थानांतरण      
15.  अन्य किसी लाभ की कीमत/ सुविधा/ सेवा/ विशेष      
16.  स्टॉक विकल्प (गैर-अर्हता विकल्प)      
17.  अन्य लाभ अथवा सुविधाएं      
18.  रियायतों की कुल कीमत      
19.  17(3) के अनुसार वेतन के स्थान पर लाभ की कुल कीमत      

 

9. कर के विवरण :-

(क) धारा 192(1) के अंतर्गत वेतन से काटा गया कर ...........................

(ख) धारा 192 (1ए) के अंतर्गत कर्मचारी की ओर से नियोक्ता द्वारा दिया गया कर ...........................

(ग) कुल दिया गया कर ...........................

(घ) सरकारी कोष में किए गए भुगतान की तिथि ............................

नियोक्ता द्वारा घोषणा

मैं.....................................पुत्र...................................(पद)................................के तौर पर कार्यरत, की ओर से................................(नियोक्ता का नाम) एतद्द्वारा घोषणा करता हूं कि उक्त दी गर्इ जानकारी लेखा पुस्तकें, प्रपत्र तथा अन्य प्रासंगिक आंकड़ों अथवा हमारे पास मौजूद जानकारी पर आधारित है तथा ऐसे प्रत्येक रियायत की राशि का विवरण धारा 17 तथा इस आधार पर बनाए गए नियम के अनुसार है और ऐसी जानकारी सत्य और सही है।

उत्तरदायी व्यक्ति के हस्ताक्षर

स्थान.................   कर कटौती हेतु
दिनांक...................   पूरा नाम......................
    पद...............................

 

परिशिष्ट III

स्त्रोत से कर कटौती के परिपत्र की बिंदु सं. 4.4.2.1-आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन से आयकर कटौती-वित्तीय वर्ष 2013-14

पुस्तक प्रविष्टि द्वारा टीडीएस भुगतान की स्थिति में पीएओ, कोष अधिकारी द्वारा विवरण का अनिवार्य नत्थीकरण

1. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर प्रपत्र 24जी को तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया :

प्रपत्र 24जी डीआर्इटी (सिस्टम), दिल्ली द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना (फाइल फारमेट) के अनुसार पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ (बाद में एओ के तौर पर संदर्भित) द्वारा तैयार किया जाना चाहिए जो टिन की वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर उपलब्ध है। एओ चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर अथवा एनएसडीएल र्इ-गर्वेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एनएसडीएल), जो टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, द्वारा विकसित प्रपत्र 24 जी रिटर्न प्रीप्रेशन यूटिलिटी (आरपीयू) के प्रयोग द्वारा प्रपत्र 24जी तैयार किया जाना चाहिए।

प्रपत्र 24 जी को तैयार करने के बाद एओ को फाइल वैलिडेशन यूटिलिटी (एफवीपी), जो टिन वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्घ है, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करना आपेक्षित है।

एओ द्वारा हस्ताक्षरित वास्तविक विवरण सांख्यिकी रिपोर्ट के साथ सीडी/डीवीडी/पैन ड्रार्इव में '.fvu फाइल, एफवीपी के माध्यम से एक बार फाइल मान्यकृत होने पर टिन-सुविधा केंद्र पर प्रस्तुत की जानी चाहिए। टिन-सुविधा केंद्र पर प्रपत्र 24जी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित एक रसीद एओ को उपलब्ध करार्इ जाएगी। एओ टिन वेबसाइट पर प्रपत्र24 जी की स्थिति देख सकते है।

पुस्तक पहचान संख्या (बिन) प्रपत्र 24 जी में प्रतिवेदित वैध टैन के साथ दर्ज प्रत्येक डीडीओ हेतु जनित की जाएगी जिसे प्रपत्र 24जी में निर्दिष्ट र्इ-मेल आर्इडी पर एओ को आगे प्रसारित किया जाएगा। एओ को संबंधित डीडीओ को बिन विवरण देने की आवश्यकता है। बिन को त्रैमासिक र्इ-टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा उद्धृत किया जाना है। बिन में प्रपत्र 24जी की रसीद संख्या, डीडीओ क्रमांक संख्या तथा स्थानांतरण वाउचर की तिथि सन्निहित है।

एओ को कटौतीदाता द्वारा काटे गए कर के संबंध में माह के अंत से दस दिनों के भीतर प्रपत्र 24जी को प्रस्तुत करना तथा उसे उस माह के लिए सूचित करना आपेक्षित है। "माह-वित्तीय वर्ष" के लिए केवल एक नियमित प्रपत्र 24जी जमा किया जा सकता है।

1.1 प्रपत्र 24 जी मे संशोधन

एओ टिन सेंट्रल सिस्टम पर स्वीकृत प्रपत्र 24जी के किसी संशोधन अथवा निरसन के लिए संशोधित प्रपत्र 24जी को पेश कर सकते है। संशोधित प्रपत्र 24 जी की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24 जी के समान है। सीडी/पैन ड्रार्इव पर कॉपी की हुए मान्यकृत संशोधित प्रपत्र 24जी (.fvu फाइल) टिन-सुविधा केंद्र हेतु मूल प्रपत्र 24जी तथा एसएसआर की अंतिम रसीद के साथ जमा किया जाना है।

टिन-सुविधा केंद्र पर संशोधित प्रपत्र 24 जी की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद एओ को उपलब्ध करार्इ जाएगी। एओ टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24जी की स्थिति देख सकते है।

2 टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24जी का ऑनलाइन अपलोड :

टिन वेबसाइट पर प्रपत्र 24जी के ऑनलाइन अपलोड के लिए लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एआर्इएन) जरूरी है। ऑनलाइन एआर्इएन पंजीकरण के लिए एओ को टिन-सुविधा केंद्र के माध्यम से कम से कम एक प्रपत्र 24जी को जमा करने की आवश्यकता है। एआर्इएन पंजीकरण के पश्चात् एओ टिन वेबसाइट पर एओ खाते के द्वारा प्रपत्र 24जी को जमा कर सकते है। प्रपत्र 24 जी की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24जी (टिन-सुविधा केंद्र पर जमा कराए गए) के समान है। मान्यकृत प्रपत्र 24जी संशोधित फाइल (.fvu फाइल) टिन वेबसाइट पर अपलोड की जानी है। ऑनलाइन अपलोड में एसएसआर जमा करने की आवश्यकता नहीं है। टिन सेंट्रल सिस्टम पर स्वीकृत प्रपत्र 24 जी हेतु 15 अंको वाले टोकन नं. सन्निहित ऑनलाइन रसीद जनित तथा प्रदर्शित की जाएगी तथा एओ को दिखार्इ जाएगी। रसीद का प्रारूप टिन-सुविधा केंद्र द्वारा जारी रसीद के समान है।

प्रपत्र 24जी के ऑनलाइन अपलोड के लिए एओ हेतु कोर्इ प्रभार देययोग्नीय नहीं है। लॉगिन पर एओ बिन विवरण को देख/डाउनलोड तथा जनसंख्कीय विवरण को अपडेट कर सकते है। पंजीकरण तथा प्रपत्र 24जी के ऑनलाइन अपलोडिंग के लिए कोर्इ डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) आवश्यक नहीं है।

2.1 टिन वेबसाइट पर संशोधित प्रपत्र 24जी की ऑनलाइन अपलोडिंग

एओ टिन सेंट्रल सिस्टम पर स्वीकृत प्रपत्र 24जी के किसी संशोधन अथवा निरसन के लिए संशोधित प्रपत्र 24जी को पेश कर सकते है। संशोधित प्रपत्र 24 जी की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित प्रपत्र 24 जी के समान है। मान्यकृत प्रपत्र 24 जी संशोधित प्रपत्र (.fvu फाइल) टिन वेबसाइट पर एओ खाते के माध्यम से ऑनलाइन अपलोड की जा सकती है। टिन सेंट्रल सिस्टम पर स्वीकृत प्रपत्र 24जी के संशोधन हेतु 15 अंकों वाले टोकन नंबर सिन्निहित आनलाइन रसीद एओ के लिए जनित तथा प्रदर्शित होगी। रसीद का प्रारूप टिन-सुविधा केंद्र द्वारा जारी रसीद के समान है। ऑनलाइन अपलोड में मूल प्रपत्र 24 जी की अंतिम रसीद तथा एसएसआर को जमा करने की आवश्यकता नहीं है।

3. अक्सर पूछे जाने वाले सवालों तथा विस्तृत विवरण के लिए एओ को सलाह दी जाती है कि वह टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर लॉगिन करे।

परिशिष्ट IV

वेतन एवं लेखा अधिकारी (पीएओ/जिला कोषागार अधिकारी (डीटीओ/आहरण एवं संवितरण अधिकारी (सीडीडीओ) द्वारा मासिक प्रपत्र सं. 24जी विवरण की प्रस्तुति

1. किस आयकर नियम के अंतर्गत प्रपत्र24 जी को भरा जाना चाहिए ?

आयकर विभाग अधिसूचना सं. 41/2010 दिनांक 31, मर्इ 2010 आयकर नियम 30 का संशोधन करता है जो अनिवार्य करता है कि सरकारी कार्यालय कि स्थिति में जहां चालान (बैंक में कर जमा करने से संबधित) की प्रस्तुति के बिना केंद्र सरकार को कर का भुगतान किया जाता है, प्रासंगिक पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ अथवा समकक्ष सरकारी कार्यालय (इस दस्तावेज में यहां एओ के तौर पर निर्दिष्ट) को मासिक आधार पर प्रपत्र 24जी जमा करना आपेक्षित है।

2. कौन प्रासंगिक पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ है, कौन प्रपत्र 24जी भरने के लिए उत्तरदायी है ?

एक प्रासंगिक पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ वह कार्यालय है जिसकों कटौती कराने वाला/डीडीओ (टैनधारक) पुस्तक समायोजन के माध्यम से टीडीएस/टीसीएस के प्रेषण की सूचना देता है। सामान्य तौर पर केंद्र सरकार का डीडीओ अपने संबंधित वेतन एवं लेखा अधिकारी (पीएओ) को पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से टीडीएस की सूचना देते है तथा राज्य सरकार के डीडीओ अपने संबंधित जिला कोषागार अधिकारी को पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से टीडीएस की सूचना देते है। ऐसे पीएओ तथा डीटीओ को मासिक आधार पर प्रपत्र 24जी जमा करना आपेक्षित है।

यहां आहरण एवं संवितरण अधिकारी (सीडीडीओ) की ऐसे भी उदाहरण है जब राज्य के एजी को प्रत्यक्ष तौर पर पुस्तक प्रविष्टि के माध्यम से सूचना देते है। उदाहरण के लिए, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग आदि। ऐसे सीडीडीओ को मासिक आधार पर प्रपत्र 24जी जमा करना आपोक्षित है। परिशिष्ट III में योजनाबद्ध आरेख विभिन्न परिस्थितियो में प्रपत्र 24जी भरने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट करता है।

3. क्या समान कार्यालय/अधिकारी डीडीओ तथा एओ के तौर पर कार्य कर सकता है ?

सामान्य तौर पर, पीएओ कार्यालय वह है जिसको डीडीओ टीडीएस की सूचना देता है तथा इसलिए, दोनो अलग-अलग कार्यालयों से होते है। बहरहाल, जहां डीडीओ और एओ समान है, सीडीडीओ की स्थिति में, वहां प्रपत्र 24जी की सांख्यकीय सूचना उसके वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित होनी चाहिए।

4. एआर्इएन क्या है तथा किसे आवेदन करना चाहिए?

लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एआर्इएन) एक विशिष्ट प्रकार के सात अंको की संख्या है जो प्रत्येक एओ को आयकर निदेशालय द्वारा (सिस्टम), दिल्ली द्वारा आवंटित की जाती है। प्रत्येक एओ की इस संख्या द्वारा सिस्टम में विशिष्ट प्रकार से पहचान होती है। एओ को टीडीएस कार्यालय के क्षेत्राधिकार में एआर्इएन हेतु आवेदन करना आपेक्षित है। एआर्इएन आवेदन टिन साइट से डाउनलोड की जा सकती है। प्रत्येक एआर्इएनदाता को प्रपत्र 24जी को जमा करना आपेक्षित है।

प्र्रत्येक डीडीओ की कर कटौती तथा संग्रहण खाता संख्या के द्वारा सिस्टम में पहचान होती है। यह संख्या आयकर विभाग द्वारा आवंटित होती है।

5. लेखा कार्यालय पहचान संख्या (एआर्इएन) आवेदन को कहा जमा किया जाना चाहिएं ?

एआर्इएन आवंटन हेतु विधिवत भरे तथा हस्ताक्षरित आवेदन सीआर्इटी (टीडीएस) क्षेत्राधिकार के पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ द्वारा वास्तविक रूप से जमा किया जाना चाहिए। परिपूरित तथा सही एआर्इएन आवेदन पत्र क्षेत्राधिकार सीआर्इटी (टीडीएस) द्वारा एनएसडीएल र्इ-गर्वनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एनएसडीएल), टाइम्स टॉवर, प्रथम तल, कमला मिल्स कांपाउंड, सेनापति बापत मार्ग, लोअर परेल, मुंबर्इ-400013 पर एआर्इएन के आवंटन की सिफारिश करते हुए पीएओ/सीडीडीओ/डीटीओ को अग्रषित किया जाएगा।

6. प्रपत्र 24 जी के माध्यम से कौन सी सूचना जमा की जानी चाहिए ?

प्रत्येक एओ को पृथक रूप से हर प्रकार की कटौती/संग्रहण की जानकारी अर्थात् उसके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत प्रत्येक डीडीओ द्वारा दिया गया टीडीएस-वेतन/टीडीएस गैर वेतन/टीडीएस-गैर वेतन गैर निवासी/टीसीएस, देते हुए प्रत्येक माह एक पूरा, सत्य तथा समेकित प्रपत्र 24जी प्रस्तुत करना चाहिए।

7. प्रपत्र 24जी को कहां जमा किया जाना चाहिए ?

प्रपत्र 24जी केवल टिन-सुविधा केंद्र पर सीडी/पैन ड्रार्इव में केवल इलैक्ट्रानिक रूप में अथवा वेबपोर्टल www.tin-nsdl.com पर एओ खाते के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाना चाहिए। प्रपत्र सं. 24जी को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। अंतिम रसीद संख्या (पीआरएन) प्रपत्र 24 जी की प्राप्ति रसीद के तौर पर जारी की जाएगी।

8. ऑनलाइन सुविधा के लिए पंजीकरण कैसे करें ?

टिन वेंबसाइट www.tin-nsdl.com के माध्यम से ऑनलाइन प्रपत्र 24 जी भरने के लिए एओ खाते के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। एओ खाते के लिए पंजीकरण केवल एक बार आपेक्षित है। एओ को, एओ खाते के पंजीकरण हेतु नो योर कस्टमर (केवार्इसी) मानदंडों के अनुपालन में कम से कम एक बार टिन-एफसी पर प्रपत्र24जी जमा कराना आपेक्षित है। पंजीकरण के बाद, एओ के लिए यह विकल्प मौजूद है कि वह या तो टिन-सुविधा केंद्र पर सीडी/पैन ड्रार्इव के द्वारा अथवा ऑनलाइन प्रपत्र 24जी जमा करें।

9. एओ खाते के साथ किस प्रकार की कार्यक्षमताएं उपलब्ध है ?

एओ खाते के माध्यम से, एओ भरे हुए प्रपत्र 24जी की स्थिति, बिन (पुस्तक पहचान संख्या) विवरण प्राप्त, एओ प्रोफाइल को अपडेट तथा प्रपत्र 24 जी को अपलोड कर सकता है। स्टेटस टै्रकिंग एआर्इएन तथा प्रपत्र 24जी की संबंधित अंतिम रसीद संख्या (पीआरएन) पर आधारित है।

10. क्या एओ पेपर के रूप में प्रपत्र 24जी प्रस्तुत कर सकता है ?

नहीं, प्रपत्र 24जी केवल इलैक्ट्रानिक रूप से जमा किया जाना है।

11. क्या एओ आयकर कार्यालय में इलैक्ट्रानिक रूप से तैयार प्रपत्र 24 जी को जमा कर सकता है ?

नहीं, इलैक्ट्रानिक रूप से तैयार प्रपत्र 24जी केवल टिन-सुविधा केंद्र अथवा ऑनलाइन जमा किया जाना है।

12. प्रपत्र 24 जी में क्या-क्या शामिल है ?

प्रत्येक प्रपत्र 24जी आयकर विभाग (आर्इटीडी) द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। प्रपत्र 24जी में शामिल है :-

 •  एओ द्वारा भरे हुए प्रपत्र 24जी का विवरण (एआर्इएन, नाम, जनसंख्यिकीय जानकारी, संपर्क विवरण)

 •  मंत्रालय/राज्य की जानकारी सहित एओ (केद्र/राज्य सरकार) की श्रेणी

 •  स्टेटमेंट का विवरण ( माह तथा वर्ष जिसके लिए प्रपत्र 24जी भरा जाना है)

 •  भुगतान सारांश, कटौती का प्रकार (टीडीएस-वेतन/टीडीएस गैर-वेतन/टीडीएस-गैर वेतन गैर निवासी/टीडीएस) के अनुसार

 •  डीडीओ वार भुगतान विवरण (डीडीओ का टैन, नाम, जनसांख्यकीय विवरण, कुल दिया गया कर तथा सरकारी खाते (ए.जी./प्रधान सीसीए) को प्रेषित

 •  डीडीओ, जो एओ से संबंधित हो, यदि एओ, डीडीओ के नवीनतम विवरण को बढ़ाना/घटाना अथवा अपडेट करना चाहे, उसे विवरण में निर्दिष्ट करना चाहिए।

13. प्रपत्र 24जी विवरण को तैयार करने की क्या प्रक्रिया है ?

एओ चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, एनएसडीएल जो टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, द्वारा विकसित प्रपत्र 24जी प्रीप्रेशन यूटिलिटी (आरपीयू) अथवा थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट (www.incometaxindia.gov.in) के प्रयोग द्वारा प्रपत्र 24जी तैयार कर सकते है।

एक बार विवरण के तैयार होने पर, एओ एनएसडीएल द्वारा तैयार फाइल वैलिडेशन यूटिलिटी (एफयूवी), जो टिन अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध है, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करेंगे। विवरण एओ द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित होने पर प्रपत्र 24जी सांख्यकीय विवरण रिपोर्ट के साथ एनएसडीएल द्वारा संचालित किसी भी टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर कॉम्पैक डिस्क (सीडी) में प्रस्तुत किया जा सकता है। टिन -सुविधा केद्र की सूची टिन अथवा आयकर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

टिन-सुविधा केद्र द्वारा एक बार प्रपत्र 24जी स्वीकार किए जाने पर विवरण के जमा करने के प्रमाण के अनुसार एओ को विशिष्ठ अंतिम रसीद संख्या (पीआरएन) के साथ अंतिम रसीद जारी की जाएगी।

14. प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी क्या है ?

प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी एक जावा आधारित यूटिलिटी है। प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी वेबसाइट www.tin-nsdl.com से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है। डाउनलोड करने के बाद, इसे मशीन की लोकल डिस्क पर सेव करना जरूरी है।

जेआरर्इ (जावा रन-टाइम एनवायरमेंट) (वर्जन : एसयूएन जेआरर्इ : 1.4.2_02 अथवा 1.4.2_03 अथवा 1.4.2_04 अथवा आर्इबीएम जेआरर्इ : 1.4.1.0) कम्प्यूटर पर इंस्टाल किया जाना चाहिए जहां प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी इंस्टाल किया जाना है। जेआरर्इ http://java.sun.com तथा http://www.ibm.com/developerworks/java/jdk से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है अथवा आप अपने कम्प्यूटर वेंडर (हार्डवेयर) से इसे इंस्टाल करने के लिए कहें।

प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी विंडो प्लेटफार्म विडों 2के प्रोफेशनल/विंडो 2के सर्वर/विंडो एनटी 4.0 सर्वर/ विंडो एक्सपी प्रोफेशनल पर चलाया जा सकता है। 'प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी' को चलाने के लिए '24GRPU.bat' फाइल पर क्लिक करें।

यदि जेआरर्इ आपके कम्प्यूटर पर इंस्टाल नही है तो '24GRPU.bat' पर क्लिक करें, जिसके बाद एक संदेश प्रदर्शित होगा। ऐसी स्थिति में, जेआरर्इ को इंस्टाल करें तथा दुबारा प्रयास करें। यदि जेआरर्इ का उचित वर्जन इंस्टाल हो तो प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी प्रदर्शित होगा।

15. प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी को डाउनलोड तथा इंस्टाल करने के लिए क्या किया जाना चाहिए ?

डाउनलोडिंग में किसी प्रकार की सहायता तथा प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी प्रयोग करने के लिए प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी में 'मदद' में उपलब्घ कराए गए निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढे़। यह यूटिलिटी 75,000 तक के रिकार्ड सहित प्रपत्र 24जी को तैयार करने के लिए प्रयोग की जा सकती है। प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी (वर्जन 1.2) नियमित तथा संशोधित विवरण के लिए प्रयोग की जा सकती है।

16. फाइल वैलिडेशन यूटिलिट (एफवीयू) क्या है ?

एओ को फाइल के प्रारूप स्तर सटीकता को सुनिश्चित करने के लिए फाइल वैलिडेशन यूटिलिटी (एफवीयू) के माध्यम से प्रिपरेशन यूटिलिटी का प्रयोग करके जनित प्रपत्र 24जी (नियमित/संशोधित) फाइल को देना चाहिए। यह यूटिलिटी टिन वेबसाइट से निशुल्क भी डाउनलोड की जा सकती है। प्रपत्र 24जी में किसी प्रकार की त्रुटि आने पर एओ द्वारा त्रुटियों को सुधारना चाहिए। सुधार के पश्चात, यूजर कों एफवीयू के माध्यम से संशोधित प्रपत्र 24जी देना चाहिए। यह प्रक्रिया त्रुटि मुक्त प्रपत्र 24जी जनित होने तक दोहरार्इ जानी चाहिए। वित्तीय वर्ष 2005-06 से शुरू तैयार प्रपत्र 24जी इस यूटिलिटी के प्रयोग द्वारा मान्यकृत किया जा सकता है।

प्रपत्र 24जी एफवीयू एक जावा आधारित यूटिलिटी है। जेआरर्इ (जावा रन-टाइम एनवायरमेंट) (वर्जन : एसयूएन जेआरर्इ : 1.4.2_02 अथवा 1.4.2_03 अथवा 1.4.2_04 अथवा आर्इबीएम जेआरर्इ : 1.4.1.0) कम्प्यूटर पर इंस्टाल किया जाना चाहिए जहां प्रपत्र 24जी प्रिपरेशन यूटिलिटी इंस्टाल किया जाना है। जेआरर्इ http://java.sun.com तथा http://www.ibm.com/developerworks/java/jdk से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है अथवा आप अपने कम्प्यूटर वेंडर (हार्डवेयर) से इसे इंस्टाल करने के लिए कहें।

प्रपत्र 24जी एफवीयू सेटअप में निम्न दो फाइलें सन्निहित हैं

 •  Form 24G FVU.bat : यह एफवीयू के इंस्टालेशन हेतु सेटअप प्रोग्राम है।

 •  Form 24G_ FVU_STANDALONE.jar : यह एफवीयू प्रोग्राम फार्इल है।

ये फाइलें कार्यान्वित होने वाली जिप फाइल (Form 24G FVU.exe)(Version 1.2) में है। ये फाइलें Form 24G FVU से इंस्टाल करना अनिवार्य है।

एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप के लिए निर्देश नीचे दिए गए हैं :

 •  Form 24G FVU एक्सटै्रक्ट तथा सेटअप

17. आरपीयू के माध्यम से प्रपत्र 24जी विवरण तैयार होने के बाद, तीन फाइलें जनित होंगी जब ऐसा विवरण एफवीयू से गुजरेगा। क्या टिन-सुविधा केंद्र हेतु एओ द्वारा सभी तीनों फाइलों को सीडी/पैन ड्रार्इव में डालना अनिवार्य है ?

जब सही फाइलें एफवीयू से होकर गुजरेंगी तो निम्नलिखित तीन फाइले उत्पन्न होंगी :-

(क) अपलोड फाइल

(ख) प्रपत्र 24जी विवरण सांख्यिकीय रिपोर्ट तथा

(ग) प्रपत्र 24जी

क्रम सं. (क) में प्रत्येक प्रपत्र 24जी (अपलोड फाइल) सीडी में सेव करनी चाहिए तथा इसे लेखा अधिकारी द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षर करने के बाद कागजी रूप में क्र.सं. (ब) में निर्दिष्ट विवरण सांख्यिकीय रिपोर्ट सहित संलग्न किया जाना चाहिए जिसे टिन-सुविधा केंद्र पर जमा किया जाना चाहिए।

प्रपत्र 24जी : प्रपत्र 24 जी, उक्त क्रमांक संख्या (ग) में, टीडीएस/टीसीएस पुस्तक समायोजन प्रपत्र का पाठक अनुकूल प्रारूप है। यह एचटीएमएल प्रारूप में प्रपत्र 24जी के वास्तविक रूप की तरह है। इसमें लेखा अधिकारी साथ ही साथ आरेखण एवं संवितरण अधिकारी का विवरण शामिल है। इस फाइल को जमा करने की आवश्यकता नहीं है।

18. क्या प्रपत्र24जी विवरण सही किया जा सकता है ?

प्रत्येक प्रपत्र24जी को आयकर विभाग (आर्इटीडी) द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना के अनुसार तैयार किया जाना है। यदि यह नए आंकड़े संरचना को पुष्टि नहीं है तो इसे टिन द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा।

प्रक्रिया के अनुसार, प्रपत्र24 जी से संबंधित विवरण परिपूरित तथा सत्य होना चाहिए। किसी भी स्थिति में खंडित विवरण जमा ( अर्थात् उसी एआर्इएन, वित्तीय वर्ष तथा माह के संबंध में विभिन्न प्रकार के प्रपत्र के अंतर्गत कटौती हेतु ब्यौरा देते हुए पृथक विवरण) की अपेक्षा नहीं की जाएगी। बहरहाल, मूल स्वीकृत विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि 'संशोधित बयान' को जमा करके सुधारी जा सकती है। संशोधन हेतु, आरपीयू का नवीनतम प्रारूप टिन वेबसाइट से डाउनलोड किया जाना चाहिए।

प्रपत्र 24जी संशोधन टिन वेबसाइट पर प्रत्यक्ष रूप से अपलोडिड किया जा सकता है। टिन सेंट्रल सिस्टम पर प्रत्यक्ष रूप से अपलोड करने के लिए एओ को पहले टिन वेबसाइट पर एआर्इएन पंजीकृत कराना होना तथा संशोधित प्रपत्र 24जी अपलोड करना होगा।

19. कितने प्रकार के संशोधित विवरण स्वीकार्य हैं ?

ए.ओ. द्वारा दो प्रकार के संशोधित विवरण प्रस्तुत किये जा सकते है। यह नीचे दिए गए है।

 •  एम (संशोधन) :- मौजूदा प्रपत्र24जी विवरण में किसी संशोधन हेतु

 •  एक्स (रद्द करना) :- मौजूदा प्रपत्र24जी विवरण में किसी निराकरण हेतु

संशोधित विवरण तैयार करने के लिए मूल विवरण की रसीद संख्या तथा पिछले विवरण की रसीद संख्या अनिवार्य है।

पहले संशोधन की स्थिति में, मूल विवरण का पीआरएन "मूल विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए तथा "पिछले विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में भी उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए।

संशोधित विवरण पहले ही जमा कराए जाने की स्थिति में, मूल विवरण का पीआरएन "मूल विवरण की रसीद संख्या" फील्ड उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए तथा पिछले संशोधन का पीआरएन "पिछले विवरण की रसीद संख्या" फील्ड में निर्दिष्ट कराया जाना चाहिए।

20. संशोधन विवरण का एम-प्रकार क्या है ?

इस प्रकार का संशोधित विवरण एओ द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए, यदि वह अपनी किसी प्रकार की जानकारी जैसे नाम, पता, उत्तरदायी व्यक्ति का विवरण, श्रेणी, मंत्रालय, राज्य अथवा डीडीओ (आरेखण एवं संवितरण अधिकारी) आदि को धटाना अथवा बढ़ाना, को अपडेट करना चाहता है। एआर्इएन (लेखा कार्यालय पहचान संख्या), वित्तीय वर्ष तथा माह में संशोधन स्वीकार्य नहीं है।

मूल प्रपत्र 24जी विवरण में उपलब्ध कराए गए डीडीओ विवरण में तीन प्रकार से संशोधन किया जा सकता है :

 •  बढ़ाना : डीडीओ विवरण मूल प्रपत्र 24जी में शामिल किया जा सकता है।

 •  अपडेट : डीडीओ का विवरण (अर्थात् टैन, टैन का नाम, जनसांख्यिकीय तथा संपर्क विवरण, कर कटौती राशि तथा प्रेषण, कटौती का प्रकार) मूल अथवा उत्तरवर्ती संशोधन विवरण में मुहैया कराए गए डीडीओ रिकार्ड के लिए अपडेट किया जा सकता है।

 •  हटाना : मूल प्रपत्र 24जी अथवा उत्तरवर्ती संशोधन विवरण में उपलब्ध कराए गए डीडीओ रिकार्ड को हटाया जा सकता है।

एम-प्रकार का संशोधन विवरण सदैव एओ विवरण तथा डीडीओ विवरण में शामिल होगा जिसे बढ़ाया तथा/अथवा हटाया जा सकता है।

21. एक्स प्रकार का संशोधन विवरण क्या है ?

इस प्रकार के संशोधन विवरण को एओ द्वारा प्रस्तुत किया जाना चाहिए यदि वह मौजूदा प्रपत्र 24जी विवरण को रद्द करना चाहे। संशोधन के एक्स प्रकार की फाइलिंग उसी प्रार्इमरी की (एआर्इएन, वित्तीय वर्ष तथा माह) के लिए नियमित प्रपत्र 24जी को जमा करने की स्वीकृति देती है। इस प्रकार का संशोधन केवल तभी जमा होगी जब प्रपत्र 24जी गलत एआर्इएन, वित्तीय वर्ष अथवा माह के साथ जमा किया गया हो।

22. बिन क्या है ?

बिन का पूरा अर्थ स्वीकार्य मासिक प्रपत्र 24 जी में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रपत्र प्रकार के लिए "पुस्तक पहचान संख्या या बुक आइडेंटिफिकेशन नंबर" है। बिन में निम्न शामिल हैं :-

(i) रसीद संख्या : रसीद संख्या सात अंकों का विशिष्ठ अंक है जो प्रपत्र 24जी के सफलतापूर्वक स्वीकृति पर जनित होता है।

(ii) डीडीओ क्रमांक संख्या : यह पांच अंकों वाला विशिष्ठ अंक है जो प्रपत्र 24जी में प्रतिवेदित प्रत्येक डीडीओ लेन-देन पर जनित होती है।

(iii) स्थानांतरण वाउचर तिथि : यह माह की वह अंतिम तिथि है जिसके लिए प्रपत्र 24जी विवरण जमा किया गया है।

बिन से संबंधित डीडीओ, जिसे टीडीएस/टीसीएस विवरण में इसकी सूचना देना आपेक्षित है, द्वारा प्रसारित करना आपेक्षित है। बिन का उद्धृतीकरण प्रभावी तिथि 01 फरवरी 2012 से अनिवार्य कर दिया गया है। बिन चालान की प्रस्तुति के बिना जमा किए जाने वाले टीडीएस के दावे को मूल्यांकित करने के लिए विशिष्ट प्रकार की संख्या है। जैसा कि यह वैरिफिकेशन की है इसलिए सलाह दी जाती है कि संबंधित डीडीओ को एओ द्वारा दिया गया वैध बिन टीडीएस विवरण में सही रूप से जमा किया जाना चाहिए।

23. बिन कब जनित (जनरेट) होता है?

स्वीकृत प्रपत्र 24जी विवरण की प्रोसैसिंग पर, बिन प्रपत्र 24 जी विवरण में मौजूद प्रत्येक डीडीओ रिकॉर्ड (वैध टैन सहित) हेतु जनित होता है। बिन टिन सेंट्रल सिस्टम पर जनित होता है तथा टैन के विवरण तथा प्रपत्र के प्रकार के साथ पीएओ को सूचित किया जाता है।

24. पीएओ तथा डीडीओ बिन के साथ क्या करते हैं?

पीएओ को संबंधित डीडीओ को बिन प्रसारित करना आपेक्षित है। त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण को तैयार करने के दौरान डीडीओ को कथित बिन विवरण को उद्धृत करना आपेक्षित है यदि कर स्थानांतरण वाउचर (पुस्तक समाविष्टि) के माध्यम से दिया गया हों।

विशेषकर 24जी के लिए जनित बिन प्रपत्र 24 जी में मुहैया करार्इ गर्इ र्इ-मेल आर्इडी पर एओ को मेल किया जाना है। इसके अतिरिक्त एओ टिन साइट पर एओ लागिन के माध्यम से बिन विवरण को डाउनलोड भी कर सकते है।

25. किन परिस्थितियों में बिन को जनरेट किया जा सकता है?

 •  बिन प्रपत्र 24जी संशोधन विवरण में जुडे़ हुए वैध टैन-डीडीओ रिकॉर्ड के लिए जनित किया जाएगा।

 •  बिन डीडीओ रिकॉर्ड के लिए जनित होगा जहां आयकर विभाग के डेटाबेस में अवैध टैन्स/टैन उपलब्ध नहीं है वह वैध टैन के साथ अपडेट होगा।

 •  टैन के नाम, जनसांख्यिकीय तथा संपर्क विवरण में कोर्इ अपडेट, कर कटौती तथा प्रेषण अथवा कटौती के प्रकार हेतु नया बिन जनित नहीं होगा।

 •  कटे हुए डीडीओ रिकॉर्ड के लिए बिन विवरण जनित नहीं होगा।

26. बिन की क्या उपयोगिता है ?

डीडीओ द्वारा भरे गए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस राशि तथा बिन विवरण सत्यापन उद्देश्य के लिए पीएओ द्वारा भरे हुए प्रपत्र सं. 24जी में भरे हुए संबंधित ब्यौरे के साथ जोड़ी जाएगी।

27. क्या यहां ऐसे उदाहरण है जहां टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस राशि तथा बिन विवरण प्रपत्र 24 जी उस रिपोर्ट से मेल न खाते हों ?

(i) टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा बिन की गलत/असत्य सूचना की घटना देखने में आर्इ है। बिन तथा टीडीएस विवरण में अनुरूप राशि की गलत सूचना प्रपत्र 24 जी में सूचितानुसार संबंधित राशि के असंतुलन का कारण होगी। इस स्थिति में, संभावना है कि अनुरूपी कटौती कराने वाले को टीडीएस/टीसीएस का क्रेटिड प्राप्त न हो। इसलिए, संबंधित पीएओ द्वारा प्रसारितानुसार बिन, डीडीओ द्वारा भरे हुए टीडीएस/टीसीएस में इसी राशि के साथ सही रूप से सूचित किया जाना चाहिए।

(ii) कर्इ मामलों में, एक विशिष्ट डीडीओ को इसी प्रकार के टीडीएस विवरण के लिए प्रपत्र 24जी में एक से अधिक एओ द्वारा सूचना देने के मामले भी आते है जो कि एक मान्य परिस्थिति नहीं है। डीडीओ तथा संबंधित एओ को मामले के समाधान निकालने की सलाह दी जाती है तथा विशेष माह के लिए विशेष प्रकार के प्रपत्र के लिए केवल एक एओ का खाका तैयार करना चाहिए।

28. पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ के क्या कर्त्तव्य हैं ?

 i   टीडीएस कार्यालय के क्षेत्राधिकार के साथ एआर्इएन हेतु आवेदन करने के लिए, एआर्इएन आवेदन टिन वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।

ii  डीडीओ सूचना हेतु सही टैन को प्राप्त करने हेतु

iii  महीने के अंत से 10 दिनों के भीतर प्रपत्र 24 जी (सीडी, डीवीडी, पैन ड्रार्इव में) को जमा करने हेतु, चाहे इलैक्ट्रानिकली अथवा टिन सुविधा केंद्र पर अथवा टिन वेबसाइट पर प्रत्यक्ष अपलोड द्वारा

iv  टिन वेबसाइट के माध्यम से भरे हुए प्रपत्र 24जी की स्थिति का पता लगाने के लिए

v  प्रपत्र 24जी विवरण के आधार पर जनित पुस्तक पहचान संख्या (बिन) को डाउनलोड करने के लिए

vi  संबंधित डीडीओ को बिन प्रसारित करने के लिए

29. डीडीओ के क्या कर्त्तव्य है?

 i  अपने पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ ,जिसको डीडीओ/कटौतीदाता काटे जाने वाले कर के बारे में सूचित करता है, को सही पैन उपलब्ध कराना तथा वह केंद्र सरकार के क्रेटिड में ऐसी राशि को जमा करने के लिए उत्तरदायी है।

ii  पीएओ/डीटीओ/सीडीडीओ की सूचना के लिए काटे गए कर की सूचना तथा पुस्तक समायोजन के माध्यम से केंद्र सरकार के खाते में क्रेटिड हेतु

iii  काटे गए कर के लिए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण (24क्यू, 26क्यू आदि) में बिन उद्धृत करने तथा पुस्तक समायोजन द्वारा क्रेटिड हेतु

30. त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में बिन विवरण के गैर-उद्धृतीकरण के क्या परिणाम है ?

(क) डीडीओ द्वारा भरे हुए त्रैमासिक टीडीएस/टीसीएस विवरण में सूचित टीडीएस की राशि तथा बिन विवरण का सत्यापन उद्देश्य के लिए पीएओ द्वारा प्रपत्र 24 जी में भरे विवरण के साथ मिलाप किया जाएगा।

(ख) टीडीएस/टीसीएस विवरण में डीडीओ द्वारा किसी प्रकार की गलत सूचना बेमेल का कारण बन सकती है जिससे संबंधित कटौती कराने वाले के क्रेटिड, कटौती कराने वाले के प्रपत्र 26एएस में उपलब्ध नहीं होगा।

(ग) पूर्ण जानकारी टिन वेबसाइट www.tin-nsdl.com तथा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्घ है।

परिशिष्ट V

"राज्य सरकार के विभागों की स्थिति में प्रपत्र सं. 24जी को भरने के लिए उत्तदायी व्यक्ति"

महालेखा पाल (राज्य)

वेतन एवं लेखा अधिकारी/

जिला कोषागार अधिकारी

उप कोषागार कार्यालय

ड घ

आहरण एवं संवितरण अधिकारी

आहरण एवं संवितरण अधिकारी

आरेखण एवं संवितरण अधिकारी

पुस्तक प्रविष्टि की सूचना का प्रकार 24 जी भरने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (एआर्इएन धारक)
पीएओ/डीटीओ
पीएओ/डीटीओ
पीएओ/डीटीओ
पीएओ/डीटीओ
सीडीडीओ
एसटीओ

 

एजी महालेखापाल
पीएओ वेतन एवं लेखा अधिकारी
डीटीओ जिला कोषागार कार्यालय
एसटीओ उप कोषागार कार्यालय
डीडीओ संरेखण एवं संवितरण अधिकारी
सीडीडीओ आहरण एंव संवितरण अधिकारी

परिशिष्ट VI

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन स्त्रोत से कर कटौती के परिपत्र की बिंदु सं. 4.9 - वित्तीय वर्ष 2014-15 - अधिनियम की धारा 200(3) के अंतर्गत कर कटौती का त्रैमासिक विवरण के तैयारी की प्रक्रिया

1. त्रैमासिक र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न डीआर्इटी (सिस्टम), दिल्ली द्वारा निर्धारित आंकड़ों की संरचना (फाइल फारमेट) के अनुसार कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा तैयार किया जाना चाहिए जो टिन की वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर उपलब्ध है। कटौतीदाता/डीडीओ चाहे तो इन-हाउस सुविधाओं, एनएसडीएल र्इ-गर्वेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एनएसडीएल), जो टिन वेबसाइट से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, द्वारा विकसित रिटर्न प्रीप्रेशन यूटिलिटी (आरपीयू) अथवा थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर के प्रयोग द्वारा र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न तैयार कर सकते है।

र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न को तैयार करने के बाद कटौतीदाता/डीडीओ को फाइल वैलिडेशन यूटिलिटी (एफवीपी), जो टिन वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्घ है, का प्रयोग कर इसे मान्यकृत करना आपेक्षित है।

2. टिन सुविधा केद्र (टिन-एफसी) पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न के प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया

एफवीयू के माध्यम से एक बार फाइल मान्यकृत होने पर '.fvu फाइल जनित होगी। कटौतीदाता/डीडीओ अथवा कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा विधिवत भरे हुए तथा हस्ताक्षरित वास्तविक प्रपत्र 27ए सहित सीडी/डीवीडी/पैन ड्रार्इव में इस एफवीपी, '.fvu फाइल की प्रति टिन-सुविधा केंद्र पर प्रस्तुत किया जाना है। कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न की स्थिति देख सकते है। 'वित्त वर्ष-त्रैमासिक-टैन-प्रपत्र' हेतु केवल एक नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न जमा किया जाएगा।

2.1 र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न में संशोधन

2.1.1 विवरण के ऑनलाइन संशोधन के लिए सीपीसी-टीडीएस पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) की भी शुरूआत की गर्इ है जिसके द्वारा व्यक्तिगत सूचना, पैन संशोधन, चालान जानकारी घटाना/बढ़ाना, वेतन की जानकारी को घटाना/बढ़ाना, कटौतीदाता पंक्ति आदि को बढ़ाना/अपडेट/मूव करना, कटौतीदाता द्वारा भरे विवरण में डिजिटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना किया जा सकता है। अन्य जानकारी के लिए कृपया नीचे दी गर्इ तालिका को संदर्भित करें।

डिफाल्ट समरी  व्यू व्यक्तिगत  जानकारी चालान  संशोधन (बेमेल, मेल कटौतीकर्ता कटौतीकर्ता मूवमेंट पैन संशोधन (परिशिष्ट.  I) पैन संशोधन (परिशिष्ट. II) विवरण चालान  करना हेतु जमा भुगतान ब्याज, उदग्रहण कटौती ढ़ार्इ गर्इ कटौतीकर्ता पंक्ति बढ़ार्इ पंक्ति गर्इ वेतन
ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर सहित, 2013-14 से आरंभ) हां हां हां हां हां हां हां हां हां
ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर सहित,  2013-14 से पूर्व से आरंभ) हां हां हां नहीं नहीं हां हां नहीं नहीं
ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर के बिना, 2013-14 से आरंभ) हां नहीं हां नहीं नहीं हां हां नहीं नहीं
ऑनलाइन संशोधन (डिजिटल हस्ताक्षर के बिना,  2013-14 से पूर्व से आरंभ) हां नहीं हां नहीं नहीं हां हां नहीं नहीं

अधिक जानकारी के लिए कटौतीदाता को सलाह दी जाती है कि टीआरएसीर्इएस पर उपलब्घ र्इ-ट्यूटोरियल/अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हेतु संदर्भित करें। ऑनलाइन संशोधन के लिए कोर्इ शुल्क नहीं होगा तथा कोन्सो फाइल की डाउनलोडिंग तथा टिन एफसी को विजिट करने की अनिवार्यता दूर करता है।

2.1.2 1 जनवरी, 2015 की प्रभावी तिथि से टीआरएसीर्इएस सीपीसी-टीडीएस ( सामान्यत: विवरण भरने की तिथि से दो दिन के पश्चात्) के प्रसंस्करण की तिथि से 7 दिनों तक संशोधन विंडो उपलब्ध कराएगा। यह सुविधा सीपीसी-टीडीएस द्वारा पहचाने जाने वाले चालान मिसमैच तथा पैन त्रुटियों के मामलों को भरने में तथा मांग सूचना को जारी होने से रोकने में मदद करेगा। इसलिए, कटौतीदाता को सलाह दी जाती है कि वह इस सुविधा के लाभ के लिए प्रसंस्करण स्थिति को यथासमय देखते रहें।

2.1.3 कटौतीदाता/डीडीओ र्इ-टीडीएस विवरण में किसी संशोधन के लिए संशोधित र्इ-टीडीएस विवरण को भी जमा कर सकते है। संशोधित विवरण टीडीएस समेकित फाइल के प्रयोग द्वारा तैयार किया जा सकता है जो टीआरएसीर्इएस की वेबसाइट www.tdscpc.gov.in पर उपलब्ध है। संशोधित विवरण का मान्यकरण टिन-एफसी पर विवरण सांख्यकीय रिपोर्ट तथा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित भौतिक प्रपत्र 27ए, नियमित र्इ-टीडीएस विवरण के समान है। टिन सुविधा केंद्र पर कागजी विवरण/रिटर्न की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों की टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टीआरएसीर्इएस वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण की स्थिति देख सकते है।

3. टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर कागजी टीडीएस को तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया

प्रपत्र 24क्यू में सभी 20 अथवा उससे कम के कटौती रिकार्ड को छोड़कर कम्प्यूटर मीडिया में प्रस्तुत किया जाना है। द्वारा विधिवत रूप से भरे हुए तथा हस्ताक्षरित कागजी टिन सुविधा केद्र पर जमा किया जाना है। टिन सुविधा केंद्र पर कागजी विवरण/रिटर्न की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को 15 अंकों की टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर कागजी की स्थिति देख सकते है। कागजी के लिए कोर्इ प्रभार देय नहीं है।

3.1 कागजी में संशोधन/रिटर्नस

वास्तविक टीडीएस टिन पर वास्तविक टीडीएस विवरण/रिटर्न स्वीकृति हेतु किसी संशोधन की स्थिति में दुबारा भरा जा सकता है। कटौतीदाता को विधिवत रूप से भरे हुए तथा हस्ताक्षरित वास्तविक टीडीएस विवरण/रिटर्न को टिन-सुविधाकेंद्र पर नियमित कागजी विवरण/रिटर्न की अंतिम रसीद की प्रति के साथ जमा करना होगा। टिन-सुविधा केंद्र पर संशोधित कागजी विवरण/रिटर्न की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर कटौतीदाता/डीडीओ को विशिष्ट 15 अंकों वाले टोकन नं. सन्निहित रसीद उपलब्ध करार्इ जाएगी। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर कागजी विवरण/रिटर्न की स्थिति देख सकते है।

4. टिन वेबसाइट पर ऑनलाइन र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न की प्रस्तुति की प्रक्रिया

कटौतीदाता/डीडीओ को र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न के ऑनलाइन अपलोड हेतु डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) जुटाना आपेक्षित है। टिन वेबसाइट पर पंजीकरण के पश्चात् कटौतीदाता/डीडीओ द्वारा अनुमोदित पत्रांक एनएसडीएल को संगठन के लैटर हैड पर उपलब्ध कराना चाहिए। एक बार एनएसडीएल द्वारा आवेदन स्वीकृत होने पर एक यूजर आर्इडी बन जाएगी तथा कटौतीदाता/डीडीओ को पंजीकरण के समय मुहैया करार्इ गर्इ उनकी पंजीकृत र्इ-मेल पर भेज दी जाएगी। र्इ-टीडीएस विवरण को तैयार करने तथा मान्यकरण नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न ( टिन-एफसी पर जमा) के समान है। कटौतीदाता/डीडीओ अपने यूजर आर्इ तथा डीएसएससी के माध्यम से लॉग इन कर सकते है तथा टिन वेबसाइट पर एफवीयू द्वारा जनित र्इ-टीडीएस फाइल ('.fvu फाइल ) को अपलोड तथा मान्यकृत कर सकते है। टिन पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न की सफलतापूर्वक स्वीकृति पर विशिष्ट 15 अंकों वाले डिजिटल टोकन नं. तथा 8 अंकों वालीे रसीद संख्या सन्निहित रसीद जनित तथा प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन अपलोड में भौतिक रूप से प्रपत्र 27ए को जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न की स्थिति देख सकते है।

र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न के ऑनलाइन अपलोड हेतु कोर्इ शुल्क देय नहीं है।

4.1 टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न का संशोधन

कटौतीदाता/डीडीओ टिन सेंट्रल सिस्टम पर स्वीकृत होने वाली र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न में किसी संशोधन हेतु संशोधित र्इ-टीडीएस/रिटर्न को जमा कर सकते है। संशोधित विवरण/रिटर्न केवल टीडीएस समेकित फाइल का प्रयोग कर ही तैयार किया जा सकता है जो टेन पंजीकरण के माध्यम से सीपीसी-टीडीएस पोर्टल www.tdscpc.gov.in पर उपलब्घ है। र्इ-टीडीएस विवरण की तैयारी तथा मान्यकरण नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न के समान है। कटौतीदाता/डीडीओ अपने यूजर आर्इडी तथा डीएसएससी के माध्यम से लॉग इन कर सकते है तथा टिन वेबसाइट पर एफवीयू द्वारा जनित र्इ-टीडीएस फाइल ('.fvu फाइल ) को अपलोड तथा मान्यकृत कर सकते है। टिन पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न संशोधन के सफलतापूर्वक स्वीकृति पर विशिष्ट 15 अंकों वाले डिजिटल टोकन नं. सन्निहित रसीद जनित तथा प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन अपलोड में भौतिक रूप से प्रपत्र 27ए तथा नियमित र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न की अंतिम रसीद की प्रति को जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कटौतीदाता/डीडीओ टिन वेबसाइट पर र्इ-टीडीएस विवरण/रिटर्न की स्थिति देख सकते है।

5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल तथा अधिक विवरण के लिए कटौतीदाता/डीडीओ को सलाह दी जाती है कि वह वेबसाइट www.tin-nsdl.com पर लॉग इन करें।

परिशिष्ट - VII

वित्त मंत्रालय

(आर्थिक मामला विभाग)

(र्इसीबी एंड पीआर डिविजन)

अधिसूचना

नर्इ दिल्ली, 22 दिसंबर, 2003

एफ.सं. 5/7/2003-र्इसीबी एंड पीआर - सरकार ने केंद्र सरकार सेवा के नवागंतुकों, सैन्य बल के अलावा, प्रथम स्तर पर, के लिए नर्इ परिभाषित अंशदान पेंशन सिस्टम आरंभ करने से संबंधित 2003-04 के बजट घोषणा के क्रियान्वयन के प्रस्ताव को 23 अगस्त, 2003 को, परिभाषित लाभ पेंशन सिस्टम की मौजूदा प्रणाली से प्रतिस्थापित करने के लिए, स्वीकृत किया था।

 i  प्रणाली 1 जनवरी 2004 ( प्रथम स्तर पर सैन्य बलों को छोड़कर) से केंद्र सरकार की सेवा के सभी नए नियुक्तों के लिए अनिवार्य है। मासिक अंशदान वेतन तथा मंहगार्इ भत्ते का 10 प्रतिशत होगा, जिसे कर्मचारी द्वारा दिया जाना है तथा केंद्र सरकार द्वारा इसका मिलाप किया जाना है। बहरहाल, गैर सरकारी कर्मचारी के संबंध में सरकार की ओर से कोर्इ अंशदान नहीं किया जाएगा। अंशदान तथा निवेश रिटर्न निकाले न जाने वाले टियर-I खाते में जमा की जाएगी। मौजूदा परिभाषित लाभ पेंशन तथा जीपीएफ के प्रावधान केंद्र सरकार की सेवा में नर्इ नियुक्ति हेतु उपलब्ध नहीं होगी।

ii  उक्त पेंशन खाते के अतिरिक्त, प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने विकल्प के अनुसार अवैतानिक टियर-II विड्रावेबल खाता भी होना चाहिए। यह विकल्प जीपीएफ के तौर पर दिया जाएगा जिसे केंद्र सरकार की सेवा में नर्इ भर्ती के लिए वापस लिया जाएगा। सरकार इस खाते में किसी प्रकार का अंशदान नहीं करेगी। यह परिसंपत्तियां उक्त प्रक्रिया के अनुसार ही संचालित होगी। बहरहाल, कर्मचारी किसी भी समय अपने पैसे के 'सैकेंड टियर' के भाग अथवा पूरी राशि को निकालने के लिए मुक्त है। इस विड्राल खाते में किसी प्रकार की पेंशन जमा नहीं की जाएगी तथा इसे किसी विशेष कर का लाभ नहीं मिलेगा।

iii  व्यक्ति सामान्य तौर पर टियर-I पेंशन सिस्टम से 60 वर्ष की आयु में अथवा के बाद बाहर निकल सकते है। बाहर निकलने पर व्यक्ति द्वारा वार्षिकी (र्इराडा-विनियमित जीवन बीमा निगम) को खरीदने के लिए पेंशन राशि से 40 प्रतिशत निवेश करना आपेक्षित है। सरकारी कर्मचारी की स्थिति में वार्षिकी सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी तथा उसके आश्रित माता-पिता तथा उसके जीवन साथी के जीवन के लिए पेंशन उपलब्ध करार्इ जानी चाहिए। व्यक्ति को बची हुर्इ पेंशन राशि का एकमुश्त पैसा प्राप्त होगा जिसे किसी भी तरह से प्रयोग के लिए वह मुक्त है। व्यक्ति को 60 साल की आयु के पहले पेंशन सिस्टम से बाहर निकाले जाने की आजादी है। बहरहाल इस स्थिति में अनिवार्य वार्षिकी पेंशन राशि का 80 प्रतिशत होगी।

नर्इ पेंशन प्रणाली की रचना

 (i) इसके पास सेंट्रल रिकॉर्ड किपिंग एंड अकांउटिंग (सीआरए) इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। कर्इ पेंशन कोष प्रबंधकों (पीएफएम) को योजना की तीन श्रेणियां दी जाएगी जो क, ख तथा ग हैं

(ii) भाग लेने वाली संस्थाओं (पीएफएम तथा सीआरए) को पिछले अनुभव के बारे में आसानी से समझ आने वाली जानकारी मुहैया करार्इ जाएंगी जिससे व्यक्ति प्राप्त सूचना के आधार यह फैसला कर सके कि कौन सी योजना का चुनाव करना है।

2. नर्इ पेंशन प्रणाली के संचालन हेतु प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2004 से होगी।

यू.के. सिन्हा, संयुक्त सचिव

परिशिष्ट-VIII

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

(केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड)

अधिसूचना

नर्इ दिल्ली, 24 नवंबर, 2000

आयकर

एस.ओ. 1048 (र्इ) - आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 के वाक्यांश (18) के उप-वाक्यांश (i) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा केंद्र सरकार तत्संबंधी कॉलम 3 के अनुरूप निर्दिष्टानुसार स्थितियों में दिए गए पुरस्कार का नीचे दी गर्इ तालिका के कॉलम 2 में निर्दिष्ट कथित धारा के अनुसार वीरता पुरस्कार का उल्लेख करती है,

तालिका

क्र.सं. वीरता पुरस्कार का नाम   पात्रता हेतु परिस्थितियां
(1) (2)   (3)
1. अशोक चक्र   जब नागरिक को वीरता हेतु पुरस्कृत किया जाए
2. कीर्ति चक्र   -तदैव-
3.  शौर्य चक्र   -तदैव-
4. जीवन रक्षक कार्य प्रदर्शित करने की स्थिति में सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक   जब नागरिक को बहादुरी के लिए पुरस्कृत किया जाए
5.  उत्तम जीवन रक्षा पदक   -तदैव-
6.  जीवन रक्षा पदक   -तदैव-
7. वीरता हेतु राष्ट्रपति पुलिस पदक तब पुरस्कृत किया जाता है   जब पुलिस बलों, केंद्रीय पुलिस अथवा सुरक्षा बलों तथा इस कार्य के लिए संबंधित विभाग के प्रमुख द्वारा प्रमाणित किए गए सदस्यों ने अविश्वसनीय बहादुरी का परिचय दिया हो
8.  वीरता हेतु पुलिस पदक   -तदैव-
9.  सेना पदक तब पुरस्कृत किया जाता है   जब साहस अथवा विशिष्ट वीरता का परिचय दिया जाए तथा प्रासंगिक सेवा मुख्यालय द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किया जाए
10.  नौ सेना पदक   -तदैव-
11.  वायु सेना पदक   -तदैव-
12.  वीरता हेतु अग्निशमन सेवा पदक तब पुरस्कृत किया जाता है    जब साहस अथवा विशिष्ट वीरता का परिचय दिया जाए तथा पिछले मुख्यालय द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किया जाए
13.  वीरता हेतु राष्ट्रपति पुलिस व अग्निशमन पदक    -तदैव-
14.  वीरता हेतु राष्ट्रपति अग्निशमन पदक   -तदैव-
15.  वीरता हेतु राष्ट्रपति होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा पदक    -तदैव-
16.  वीरता हेतु होम गार्ड व नागरिक सुरक्षा पदक   -तदैव-

 

(अधिसूचना सं. 1156/एफ.सं. 142/29/99-टीपीएल)

टी.के. शाह

निदेशक

परिशिष्ट IX

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

नर्इ दिल्ली, 29 जनवरी, 2001

एस.ओ. 81 (र्इ) - आयकर अधिनियम, 1961 (1961 की 43) की धारा 10 के वाक्यांश (18) के उप-वाक्यांश (i) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा केंद्र सरकार, वित्तीय मंत्रालय, राजस्व विभाग (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) संख्या एस.ओ. 1048(र्इ), दिनांक 24 नवंबर, 2000 में भारत सरकार की अधिसूचना में निम्नलिखित संशोधन को करने के उद्देश्य से तथा कथित धारा के उद्देश्य के लिए वीरता पुरस्कार को निर्दिष्ट करती है :-

कथित अधिसूचना के अनुसार तालिका में 'पात्रता हेतु परिस्थिति' से संबंधित कोष्ठक (3) के अंतर्गत क्रमांक संख्या 1,2 तथा 3 के समक्ष शब्दों में 'नागरिक हेतु" शब्द छूट गया है।

(अधिसूचना सं. 22/एफ सं. 142/29/99-टीपीएल)

टी.के. शाह

निदेशक

परिशिष्ट-X

प्रपत्र सं. 10बीए

(नियम 11बी देखें)

निर्धारिती द्वारा भरे जाने वाली घोषणापत्र

धारा 80 जीजी के अतंर्गत कटौती का दावा

मैं/हम....................................................................................................................................................(स्थार्इ खाता संख्या सहित निर्धारिती का नाम) एतद्द्वारा यह घोषणा करता हूं कि पिछले वर्ष.................के दौरान मैनें/हमने .....................माह की अवधि के लिए मेरे/हमारे रहने के उद्देश्य से परिसर.........................................................(परिसर का पूरा पता) को अधिगृहित किया था तथा श्री/कुमारी/श्रीमती...................................................(मकान मालिक का नाम व पूरा पता) को नकद/रेखांकित चेक, बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से रू...........................का भुगतान किया।

आगे यह भी प्रमाणित किया जाता है कि निम्न द्वारा कोर्इ अन्य आवासीय निवास नहीं खरीदा गया है

क) मैं/मेरे जीवनसाथी/मेरे छोटे बच्चे/हमारा परिवार (निर्धारिती के एचयूएफ होने की स्थिति में), ............................................जहां मैं/हम साधारणतय: रहते/कार्यालय अथवा रोजगार अथवा व्यापार अथवा व्यवसाय करते हैं अथवा

ख) मेरे/हमारे, अन्य स्थान होने पर, मेरे अधिकार क्षेत्र में आवास होने पर, जिसकी राशि धारा 23(2)(बी) की धारा 23(2)(ए)(i) के अतर्गत निर्धारित की जानी है।