आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

रिलीज़ दिनांक

22/01/2019

Document Content

 

भारत सरकार

वित्त मंत्रालय

राजस्व विभाग

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नर्इ दिल्ली, 22 जनवरी, 2019

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

सीबीडीटी द्वारा डाटा विश्लेषक का प्रयोग करते हुए नॉन-फार्इलर मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) के माध्यम से विवरणी दाखिल न करने वालों की पहचान

 

नॉन-फार्इलर मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) का उद्देश्य उन व्यक्तियों की पहचान और उनकी जांच करना है जिन्होंने अधिक राशि का लेनदेन किया और जो कर का भुगतान कर सकते थे लेकिन फिर भी अभी तक अपनी कर विवरणी को दाखिल नहीं किया। विवरणी दाखिल न करने वाले उन व्यक्तियों की पहचान के लिए विश्लेषण किया गया जिनके बारे में विशिष्ट सूचना विभाग के डाटाबेस में उपलब्ध थी। सूचना के स्रोतों में वित्तीय लेनदेनों का विवरण (एसएफटी), स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस), स्रोत पर कर संग्रहण (टीसीएस), विदेशी प्रेषण, आयात और निर्यात डाटा आदि के बारे में सूचना शामिल है।

डाटा विश्लेषण से ऐसे कर्इ संभावी विवरणी दाखिल न करने वालों की पहचान हुर्इ जिन्होंने वित्त वर्ष 2017-18 में अधिक राशि के लेनदेन किए लेकिन निर्धारण वर्ष 2018-19 (वित्त वर्ष 2017-18 से संबंधित) के लिए आयकर विवरणी को अभी तक दाखिल नहीं किया।

विभाग इन एनएमसी मामलों का र्इ-सत्यापन कर चुका है ताकि उनके ऑनलाइन अनुरोध की याचिका द्वारा करदाता के अनुपालन लागत को कम किया जा सके। इस बात पर जोर दिया जाता है कि प्रतिउत्तर देने के लिए किसी भी आयकर कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है चूंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जानी है। करदाता अपने मामलों से संबंधित सूचना की जानकारी 'अनुपालन पोर्टल' से प्राप्त कर सकते है जिसे विभाग की वेबसाइट https://incometaxindiaefiling.gov.in पर विभाग के र्इ-दाखिलीकरण पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। पैन धारक को अनुपालन पोर्टल पर इलैक्ट्रानिक रूप से अपने प्रतिउत्तर को देना चाहिए और रिकॉर्ड उद्देश्य के लिए प्रतिउत्तर देना चाहिए। यूजर गार्इड और एफएक्यू अनुपालन पोर्टल पर "रिसोर्स" मैन्यू के अंतर्गत मुहैया कराया गया है।

विवरणी दाखिल न करने वाले व्यक्तियों से अनुरोध है कि वह निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए अपनी कर देयता का आंकलन करें और 21 दिनों के अंदर आयकर विवरणी (आर्इटीआर) को दाखिल करें या ऑनलाइन प्रतिउत्तर दें। अगर दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक हुआ तो मामले को ऑनलाइन बंद कर दिया जाएगा। हालांकि, यदि जहां कोर्इ विवरणी दाखिल न की गर्इ हो या कोर्इ जवाब नहीं मिलता तो आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत कार्यवाही को शुरू करने पर विचार किया जाएगा।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी