ब्राज़ील : व्यापक करार
हस्ताक्षर तिथि
1992
लागू होना
11/03/1992
ब्राजील
विदेशी देशों के साथ कराधान से बचने और आधिकारिक चोरी को रोकने के लिए समझौता - ब्राज़ील
जबकि भारत गणराज्य की सरकार और ब्राज़ील के संघीय गणराज्य की सरकार के बीच इनकम पर टैक्स के संबंध में डबल टैक्सेशन से बचने और फ़ाइनेंशियल चोरी को रोकने के लिए एनेक्स्ड कन्वेंशन को मंज़ूरी दे दी गई है और 11 मार्च, 1992 को ब्रासीलिया में मंज़ूरी के दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान किया गया, जैसा कि उस कन्वेंशन के आर्टिकल 28 के अनुसार ज़रूरी है:
अतः अब आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 90 तथा कंपनी (लाभ) अधिकर अधिनियम, 1964 (1964 का 7) की धारा 24ए द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा निर्देश देती है कि उक्त अभिसमय के सभी उपबंध भारत संघ में प्रभावी होंगे।
अधिसूचना: संख्या जीएसआर 381(ङ) , दिनांक 31-3-1992 , नोटिफ़िकेशन संख्या एसओ 93 (ङ) [एफ. सं. 500/101/2006-एफटी और टीआर-वी], दिनांक 4-1-2018 द्वारा संशोधित
अनुलग्नक
भारत गणराज्य की सरकार और ब्राजील संघीय गणराज्य की सरकार के बीच आयकर संबंधी करों के संबंध में दोहरे कराधान से बचने और कर चोरी की रोकथाम के लिए समझौता।
1 ["भारत गणराज्य और ब्राजील संघीय गणराज्य,
गैर-कराधान हेतु अवसर सृजन किए बिना अथवा कर अपवंचन अथवा परिहार के माध्यम से कराधान कम करके (तीसरे राज्यों के निवासियों के अप्रत्यक्ष लाभ हेतु इस अभिसमय में प्रदान की गई छूट प्राप्त करने पर केंद्रित संधि शॉपिंग व्यवस्थाओं के माध्यम सहित) आय पर करों के बारे में दोहरे कराधान को समाप्त करने के लिए एक अभिसमय सम्पन्न करने के आशय से,]
इस प्रकार सहमत हुए हैं:
अनुच्छेद 1
व्यक्तिगत दायरा
1.यह समझौता उन व्यक्तियों पर लागू होगा जो अनुबंधित राज्यों में से किसी एक या दोनों के निवासी हैं।
1 [यह अभिसमय अनुच्छेद 19, 20, 21, 23, 24, 25 तथा 27 के अंतर्गत दिए जाने वाले लाभों को छोड़कर किसी संविदाकारी देश द्वारा इसके निवासियों के कराधान को प्रभावित नहीं करेगा। ]
1[अनुच्छेद 2
शामिल कर
1. यह अभिसमय किसी संविदाकारी राज्य अथवा इसके राजनैतिक उप-प्रभागों अथवा स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा आय पर लगाए गए करों के संबंध में लागू होगा, चाहे वे किसी भी तरह से लगाए जाएं।
2. जिन करों पर यह अभिसमय लागू होगा, वे हैं:
| (क) | भारत के मामले में: | |
| आयकर, जिसमें उस पर लगने वाला अधिभार भी शामिल है; | ||
| (जिसे इसके बाद "भारतीय कर " कहा जायेगा); | ||
| (ख) | ब्राजील के मामले में: | |
| संघीय आयकर ; | ||
| (जिसे इसके बाद "ब्राज़ील के कर" कहा जायेगा) |
3. यह अभिसमय किसी भी समरूप अथवा तत्वतः समान करों पर भी लागू होगा जो अभिसमय पर हस्ताक्षर किए जाने की तारीख के पश्चात् उपर्युक्त करों के अतिरिक्त अथवा उनके स्थान पर लगाए जाएंगे। संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारी किन्हीं भी सारभूत परिवर्तनों के संबंध में एक दूसरे को अधिसूचित करेंगे जो उनके अपने-अपने कराधान कानूनों में किए गए हों।"
1[अनुच्छेद 3
सामान्य परिभाषाएँ
1. इस अभिसमय के प्रयोजनार्थ जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो:
| (क) | "भारत" शब्द का अर्थ है - भारत का राज्यक्षेत्र और इसमें प्रादेशिक समुद्र और उसके ऊपर के वायुमंडलीय क्षेत्र के अतिरिक्त कोई भी अन्य समुद्री क्षेत्र जिनमें भारतीय कानून तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार भारत के प्रभुसत्ता सम्पन्न अधिकार, अन्य अधिकार तथा क्षेत्राधिकार शामिल हैं; | |
| (ख) | "ब्राज़ील" शब्द का अर्थ है - ब्राज़ील संघीय गणराज्य और, जब भौगोलिक अर्थ में उपयोग किया जाता है, तो इसमें ब्राज़ील संघीय गणराज्य के क्षेत्र के साथ-साथ समुद्र-तल का क्षेत्र, उसका उप-क्षेत्र और प्रादेशिक समुद्र के समीप का अति-निकटवर्ती जल-कॉलम भी होता है, जिसमें ब्राज़ील संघीय गणराज्य अंतर्राष्ट्रीय कानून और उसके राष्ट्रीय कानून के अनुरूप, जीवित और गैर-जीवित प्राकृतिक संसाधनों की खोज, दोहन, संरक्षण और प्रबंधन के उद्देश्य से या नवीकरणीय स्रोतों से ऊर्जा के उत्पादन के लिए संप्रभु अधिकारों या अधिकार क्षेत्र का उपयोग करता है; | |
| (ग) | "एक संविदाकारी राज्य" तथा "दूसरा संविदाकारी राज्य" शब्दों का अर्थ संदर्भ की अपेक्षानुसार भारत गणराज्य अथवा ब्राज़ील संघीय गणराज्य है; | |
| (घ) | "व्यक्ति" शब्द में कोई व्यष्टि, कोई कम्पनी, व्यक्तियों की कोई संस्था और कोई अन्य सत्ता शामिल है जिसे संबंधित संविदाकारी राज्यों में प्रवृत्त कराधान कानूनों के तहत एक कराधेय इकाई के रूप में समझा जाता है; | |
| (ङ) | "कम्पनी" शब्द से कोई निगमित निकाय अथवा कोई सत्ता अभिप्रेत है जिसे कर प्रयोजनों के लिए एक निगमित निकाय के रूप में माना जाता है; | |
| (च) | "एक संविदाकारी राज्य का उद्यम" तथा "दूसरे संविदाकारी राज्य का उद्यम" शब्दों से क्रमशः एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा संचालित कोई उद्यम तथा दूसरे संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा संचालित कोई उद्यम अभिप्रेत है; | |
| (छ) | "उद्यम" शब्द किसी प्रकार के कारोबार को करने पर लागू होगा; | |
| (ज) | "अंतर्राष्ट्रीय यातायात" शब्द का अर्थ समुद्री जहाज या वायुयान द्वारा किसी भी परिवहन से है, सिवाय इसके कि जब जहाज या विमान केवल एक संविदाकारी राज्य में स्थानों के बीच कार्यरत हो और जहाज या विमान का संचालन करने वाला उद्यम उस राज्य का उद्यम न हो; | |
| (झ) | "राष्ट्रिक" शब्द से अभिप्रेत है: |
| (i) | किसी एक संविदाकारी राज्य की राष्ट्रिकता धारण करने वाले सभी व्यष्टि; | |
| (ii) | सभी विधिक व्यक्ति, भागीदारियां और संस्थाएं, जिन्हें अपनी इस तरह की हैसियत किसी संविदाकारी राज्य में प्रवृत्त कानूनों से प्राप्त होती हो; |
| (ञ) | "कर" शब्द से संदर्भ के अनुसार "भारतीय कर" अथवा "ब्राज़ील के कर" अभिप्रेत हैं; | |
| (ट) | "सक्षम प्राधिकारी" शब्द से अभिप्रेत है: |
| (i) | भारत में: वित्त मंत्री, भारत सरकार या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि; | |
| (ii) | ब्राज़ील में: अर्थव्यवस्था मंत्री, ब्राज़ील के संघीय राजस्व के विशेष सचिव या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि; |
| (ठ) | "राजकोषीय वर्ष" शब्द से अभिप्रेत है:" |
| (i) | भारत के मामले में, अप्रैल की पहली तारीख से शुरू होने वाला वित्तीय वर्ष; | |
| (ii) | ब्राज़ील के मामले में, जनवरी की पहली तारीख से शुरू होने वाला कैलेंडर वर्ष। |
2. किसी संविदाकारी राज्य द्वारा जहां तक किसी भी समय इस अभिसमय को लागू किए जाने का प्रश्न है, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, उसमें अपरिभाषित किसी शब्द का वही अर्थ होगा जो उस करों के प्रयोजनों के लिए उस राज्य, जिस पर यह अभिसमय लागू होता है, के कानूनों के अंतर्गत उस समय होता है और यह अर्थ उस राज्य में लागू किए जाने वाले कर कानूनों के अंतर्गत लगाए गए अर्थ पर प्रभावी होगा जो उस राज्य के कर कानूनों के अंतर्गत लगाए जाते हैं।"
अनुच्छेद 4
1[निवासी
1. इस अभिसमय के प्रयोजनार्थ “एक संविदाकारी राज्य का निवासी” शब्द का अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति से है जिस पर उस राज्य के कानूनों के अंतर्गत उसके अधिवास, निवास, विधिक मुख्यालय, निगमन के स्थान, प्रबन्धन के स्थान अथवा इसी स्वरूप के किसी ऐसे ही कारण से कर लगाया जा सकता है और, इसमें वह राज्य और इसका कोई राजनैतिक उप-प्रभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण भी शामिल है। तथापि, इस शब्द में कोई ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं होगा जिस पर केवल उस राज्य में स्थित स्रोतों से होने वाली आय पर उस राज्य में कर लगाया जा सकता है।
2. जब पैराग्राफ 1 के उपबंधों के कारण यदि कोई व्यक्ति दोनों ही संविदाकारी राज्यों का निवासी हो, वहां उसकी हैसियत निम्नानुसार तय की जाएगी:
| (क) | उसे उसी राज्य का निवासी माना जाएगा जहां उसे एक स्थायी निवास-गृह उपलब्ध हो; यदि उसे दोनों ही राज्यों में कोई स्थायी निवास-गृह उपलब्ध हो, तो वह उस राज्य का एक निवासी माना जाएगा, जिसके साथ उसके व्यक्तिगत और आर्थिक संबंध घनिष्ठतर हैं (महत्वपूर्ण हितों का केन्द्र); | |
| (ख) | यदि उस राज्य जिसमें उसके महत्वपूर्ण हित निहित हैं, निश्चित नहीं किया जा सकता हो, अथवा यदि उसको दोनों राज्यों में से किसी भी राज्य में कोई स्थायी निवास-गृह उपलब्ध नहीं हो, तो वह उस राज्य का निवासी माना जाएगा जिसमें वह आदतन रहता हो; | |
| (ग) | यदि वह पारंपरिक रूप से दोनों ही राज्यों में रहता हो अथवा उनमें से किसी भी राज्य में नहीं रहता हो, तो वह उस राज्य का निवासी माना जाएगा जिसका वह एक राष्ट्रिक है; | |
| (घ) | यदि वह दोनों राज्यों का निवासी है या दोनों में से किसी का भी नहीं है, तो संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारी पारस्परिक सहमति से इस प्रश्न का समाधान करेंगे। |
3. जहाँ इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 के उपबंधों के कारण किसी व्यष्टि से भिन्न कोई व्यक्ति दोनों संविदाकारी राज्यों का निवासी हो, तो उसे केवल उस राज्य का निवासी माना जाएगा जिसमें उसका प्रभावी प्रबंध स्थान स्थित है; यदि उस राज्य का निर्धारण नहीं किया जा सकता हो जिसमें उसका प्रभावी प्रबंध स्थान स्थित है तो संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारी पारस्परिक सहमति से इस प्रश्न का समाधान करने का प्रयास करेंगे। ऐसी सहमति की अनुपस्थिति में, ऐसे व्यक्ति को उस सीमा तथा पद्धति जिस पर संविदाकारी देशों के सक्षम प्राधिकारी सहमत हुए को छोड़कर, इस समझौते के द्वारा कर से किसी प्रकार की राहत अथवा छूट प्राप्त करने का अधिकार नहीं होगा।"
1 [अनुच्छेद 5
स्थायी स्थापना
1. इस अभिसमय के प्रयोजनार्थ, “स्थायी संस्थापन” पद से कारोबार का वह निश्चित स्थान अभिप्रेत है, जिसके द्वारा किसी उद्यम का कारोबार पूर्णतः या अंशतः चलाया जाता है।"
2. “स्थायी संस्थापन” पद में विशेषतया निम्नलिखित शामिल होंगे:
| (क) | प्रबंधन का कोई स्थान; | |
| (ख) | कोई शाखा; | |
| (ग) | कोई कार्यालय; | |
| (घ) | कोई कारखाना; | |
| (ङ) | कोई कार्यशाला; | |
| (च) | कोई खान, तेल अथवा गैस का कुआँ, खदान अथवा प्राकृतिक संसाधनों के निष्कर्षण का कोई स्थान; | |
| (छ) | एक भवन स्थल अथवा निर्माण स्थल अथवा असेंबली परियोजना जो छह महीने से अधिक समय तक मौजूद रहती है। |
3. "स्थायी संस्थापन" शब्द में ये भी शामिल हैं: सेवाएं प्रस्तुत करना, जिसमें इस प्रयोजन हेतु उद्यम में लगे हुए कर्मचारियों अथवा अन्य कार्मिकों के माध्यम से किसी उद्यम की परामर्शी सेवाएं शामिल हैं, परन्तु वहीं यदि उस स्वरूप के क्रियाकलाप किसी संविदाकारी राज्य के भीतर संबंधित राजकोषीय वर्ष में प्रारम्भ या समाप्त होने वाली किसी 12 महीने की अवधि के भीतर कुल मिलाकर 183 दिन से अधिक की अवधि या अवधियों के लिए जारी रहते हों।
4. पैराग्राफ 2 के उप-पैराग्राफ छ) में संदर्भ के अनुसार, यह निर्धारित करने की दृष्टि से कि क्या छह माह की उपर्युक्त अवधि से अधिक समय हो गया है,
| (क) | जहाँ किसी संविदाकारी देश का कोई उद्यम अन्य संविदाकारी देश में ऐसे स्थान जो कोई भवन स्थल अथवा निर्माण स्थल, अथवा असेंबली परियोजना कहलाए, में एक या अधिक अवधियों के लिए गतिविधि करता है, जो कुल 30 दिनों से अधिक हों परंतु छह माह से अधिक ना हों; तथा; | |
| (ख) | अलग-अलग समय के दौरान एक ही भवन स्थल अथवा निर्माण स्थल, अथवा असेंबली परियोजना में पहले उल्लेखित उद्यम से संबंधित एक या अधिक उद्यमों द्वारा संबंधित गतिविधियां की जाती हैं, प्रत्येक 30 दिनों से अधिक, |
ये विभिन्न समयावधियां समुच्चय समयावधि में जोड़ी जाएंगी जिसके दौरान प्रथमोल्लिखित उपक्रम ने उस भवन स्थल अथवा निर्माण स्थल, अथवा असेंबली परियोजना पर कार्यकलाप चलाए हैं।
5. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती उपबंधों के बावजूद भी "स्थायी संस्थापन" पद में निम्नलिखित को शामिल नहीं समझा जाएगा:
| (क) | उद्यम से संबंधित माल अथवा पण्य-वस्तुओं के मात्र भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ सुविधाओं का इस्तेमाल करना; | |
| (ख) | मात्र भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ उद्यम से संबंधित माल अथवा पण्य-वस्तुओं के किसी स्टॉक का रख-रखाव करना; | |
| (ग) | किसी अन्य उद्यम द्वारा केवल संसाधित किए जाने के प्रयोजनार्थ उद्यम के माल अथवा पण्य-वस्तुओं के स्टॉक का रख-रखाव करना; | |
| (घ) | उद्यम के लिए माल अथवा पण्य-वस्तुओं का केवल क्रय करने के लिए अथवा सूचना एकत्र करने के लिए कारोबार के किसी निश्चित स्थान का रख-रखाव करना; | |
| (ङ) | उद्यम के लिए किसी अन्य कार्यकलाप को चलाने के प्रयोजनार्थ कारोबार के लिए निश्चित स्थान का रख-रखाव करना; | |
| (च) | उप पैराग्राफ क) से ड़) में उल्लिखित कार्यकलापों के किसी संयोजन के लिए केवल बिजनेस के निश्चित स्थान का रख-रखाव, |
बशर्ते कि ऐसे कार्यकलाप अथवा उप पैराग्राफ (च) के केस में बिजनेस के निश्चित स्थान के समग्र कार्यकलाप प्रारंभिक अथवा सहायक प्रकृति के हैं।
5.1 पैराग्राफ 5 बिजनेस के निश्चित स्थान को लागू नहीं होगा जिसे एक उपक्रम द्वारा प्रयोग किया गया है अथवा रखरखाव किया गया है यदि वही उपक्रम अथवा घनिष्ठ रूप से संबंधित उपक्रम उसी संविदाकारी राज्य में उसी स्थान अथवा दूसरे स्थान पर बिजनेस कार्यकलाप जारी रखता है तथा"
| (क) | वह स्थान अथवा दूसरा स्थान इस अनुच्छेद के उपबंधों के अंतर्गत उपक्रम अथवा घनिष्ठ रूप से संबंधित उपक्रम हेतु स्थायी संस्थापन का गठन करता अथवा | |
| (ख) | एक ही स्थान पर दो उपक्रमों द्वारा अथवा दो स्थानों पर उसी उपक्रम अथवा घनिष्ठ रूप से संबंधित उपक्रमों द्वारा किए गए कार्यकलापों के संयोजन से होने वाले समग्र कार्यकलाप प्रारंभिक अथवा सहायक प्रकृति के नहीं हैं, |
बशर्ते कि उसी स्थान पर दो उपक्रमों द्वारा अथवा दो स्थानों पर उसी उपक्रम द्वारा अथवा घनिष्ठ रूप से संबंधित उपक्रमों द्वारा किए गए बिजनेस कार्यकलाप पूरक कार्यों का गठन करते हैं जो सशक्त बिजनेस ऑपरेशन का हिस्सा है।
6. पैराग्राफ 1 एवं 2 के उपबंधों के होते हुए भी, परंतु पैराग्राफ 7 के उपबंधों के शर्माधीन, जहां एक व्यक्ति एक उपक्रम की ओर से संविदाकारी राज्य में कार्य कर रहा है और ऐसा कार्य करने में, आदतन संविदाओं को अंतिम रूप देता है, अथवा आदतन उन संविदाओं को अंतिम रूप देने को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है जिसे उपक्रम द्वारा बिना सामग्री संशोधन के साधारणतः अंतिम रूप दिया जाता है और ये संविदाएं
| (क) | उस उद्यम के नाम से की जाती है, अथवा | |
| (ख) | स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए, अथवा प्रयोग के अधिकार प्रदान करने के लिए, उस उपक्रम द्वारा स्वामित्व वाली संपत्ति अथवा यह कि उपक्रम के पास प्रयोग करने का अधिकार है, अथवा | |
| (ग) | उस उपक्रम द्वारा सेवाओं के उपबंध के लिए, |
उस उद्यम को, ऐसे कार्यकलापों के संबंध में जो वह व्यक्ति उक्त उद्यम के लिए करता है, उस राज्य में एक स्थायी संस्थापन का होना समझा जाएगा जब तक कि उस व्यक्ति की गतिविधियां पैराग्राफ 5 में उल्लिखित उन गतिविधियों तक सीमित हों, यदि कारोबार के एक निश्चित स्थान से प्रयोग करता है ( कारोबार के एक निश्चित स्थान जिसमें पैराग्राफ 5.1 लागू होगा, को छोड़कर), तो उस पैराग्राफ के उपबंधों के अधीन कारोबार के इस निश्चित स्थान को एक स्थायी संस्थापन नहीं बनाएगा।
7. पैराग्राफ 6 वहां लागू नहीं होगा जहां कार्यरत कोई व्यक्ति किसी संविदाकारी देश में अन्य संविदाकारी देश के किसी उद्यम की ओर से प्रथमतः उल्लिखित देश में एक स्वतंत्र अभिकरण (एजेंट) के रूप में व्यवसाय करता है तथा उस व्यवसाय की एक सामान्य गतिविधि के रूप में कामकाज करता है। फिर भी, जहां कोई व्यक्ति विशिष्टत: अथवा लगभग विशिष्टत: एक अथवा अधिक उद्यमों की ओर से जिनसे वह करीबी रूप से जुड़ा है कामकाज करता है तो उस व्यक्ति को किसी ऐसे उद्यम के संबंध में, इस पैराग्राफ के अर्थ के भीतर एक स्वतंत्र अभिकरण (एजेंट) नहीं माना जाएगा।
8. यह तथ्य कि कोई कम्पनी, जो एक संविदाकारी राज्य की निवासी है, किसी ऐसी कम्पनी को नियंत्रित करती है अथवा किसी ऐसी कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती है, जो दूसरे संविदाकारी राज्य की निवासी है अथवा जो उस दूसरे राज्य में (चाहे किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से अथवा अन्यथा) कारोबार करती है, को उन दोनों में से किसी कम्पनी को स्वतः ही दूसरे का स्थायी संस्थापन नहीं माना जाएगा।
9. इस अनुच्छेद के उद्देश्यार्थ, कोई व्यक्ति अथवा उद्यम किसी उद्यम से करीबी रूप से जुड़ा माना जाएगा यदि सभी संगत तथ्यों तथा परिस्थितियों के आधार पर एक का दूसरे पर नियंत्रण हो अथवा दोनों ही किसी एक व्यक्ति अथवा उद्यमों के नियंत्रण में हो। किसी भी सूरत में, किसी व्यक्ति या उद्यम को किसी उद्यम से करीबी रूप से जुड़ा माना जाएगा यदि वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्षः दूसरे में 50 प्रतिशत से अधिक लाभकारी हित रखता है (अथवा, किसी कंपनी के मामले में, कंपनी के कुल वोट तथा शेयरों अथवा कम्पनी में लाभकारी इक्विटी हित के मूल्य का 50 प्रतिशत से अधिक है) अथवा यदि अन्य किसी व्यक्ति या उद्यम का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्षतः उस व्यक्ति तथा उस उद्यम अथवा दो उद्यमों में 50 प्रतिशत से अधिक लाभकारी हित है (अथवा, किसी कंपनी के मामले में, कंपनी के कुल वोट तथा शेयरों अथवा कम्पनी में लाभकारी इक्विटी हित के मूल्य का 50 प्रतिशत से अधिक है)।"
अनुच्छेद 6
अचल संपत्ति से आय
1.किसी संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राज्य में स्थित अचल संपत्ति (कृषि या वानिकी से आय सहित) से प्राप्त आय पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है।
2."अचल संपत्ति" शब्द का वही तात्पर्य होगा जो उस संविदाकारी राज्य के कानून के अंतर्गत है जिसमें संबंधित संपत्ति स्थित है। इन शर्तों में किसी भी मामले में अचल संपत्ति के सहायक संपत्ति, पशुधन और कृषि तथा वानिकी में उपयोग किए जाने वाले उपकरण, ऐसे अधिकार जिन पर भू-संपत्ति के संबंध में सामान्य कानून के प्रावधान लागू होते हैं, अचल संपत्ति का उपभोग और खनिज भंडारों, स्रोतों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के कार्य करने या कार्य करने के अधिकार के लिए प्रतिफल के रूप में परिवर्तनीय या निश्चित भुगतान के अधिकार शामिल होंगे; जहाजों और विमानों को अचल संपत्ति नहीं माना जाएगा।
3.पैराग्राफ 1 के प्रावधान अचल संपत्ति के प्रत्यक्ष उपयोग, किराये पर देने या किसी अन्य रूप में उपयोग से प्राप्त आय पर लागू होंगे।
4.पैराग्राफ 1 और 3 के प्रावधान किसी उद्यम की अचल संपत्ति से आय और स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाओं के निष्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली अचल संपत्ति से आय पर भी लागू होंगे।
अनुच्छेद 7
व्यावसायिक लाभ
1.किसी संविदाकारी राज्य के उद्यम का लाभ केवल उसी राज्य में कर योग्य होगा, जब तक कि उद्यम दूसरे संविदाकारी राज्य में स्थित किसी स्थायी प्रतिष्ठान के माध्यम से कारोबार नहीं करता हो। यदि उद्यम उपरोक्त के अनुसार व्यवसाय करता है, तो उद्यम के लाभ पर दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है, लेकिन उनमें से केवल उतना ही जितना उस स्थायी प्रतिष्ठान के लिए फलस्वरूप माना जा सकने वाला है।
2.पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के अधीन, जहाँ किसी संविदाकारी राज्य का कोई उद्यम दूसरे संविदाकारी राज्य में स्थित किसी स्थायी प्रतिष्ठान के माध्यम से व्यवसाय करता है, प्रत्येक संविदाकारी राज्य में उस स्थायी प्रतिष्ठान को वे लाभ दिए जाएँगे जो उससे तब प्राप्त होने की अपेक्षा की जा सकती थी जब वह एक पृथक और अलग उद्यम होता जो समान या समान परिस्थितियों में समान या समान गतिविधियों में संलग्न होता और उस उद्यम से पूर्णतः स्वतंत्र रूप से व्यवहार करता जिसका वह स्थायी प्रतिष्ठान है।
3.किसी स्थायी प्रतिष्ठान के लाभ का निर्धारण करते समय, स्थायी प्रतिष्ठान के प्रयोजनों के लिए किए गए व्यय, जिनमें कार्यकारी और सामान्य प्रशासनिक व्यय भी शामिल हैं, को कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी, जो संबंधित संविदाकारी राज्य के कराधान कानूनों के प्रावधानों के अनुसार और उनकी सीमाओं के अधीन होगा।
4.किसी स्थायी प्रतिष्ठान को केवल इस आधार पर लाभ नहीं दिया जाएगा कि उस स्थायी प्रतिष्ठान ने उद्यम के लिए माल या वाणिज्य वस्तु खरीदी है।
5.जहां लाभ में आय की मदें शामिल हैं, जिनका इस कन्वेंशन के अन्य अनुच्छेदों में अलग से वर्णन किया गया है, तो उन अनुच्छेदों के प्रावधान इस अनुच्छेद के प्रावधानों से प्रभावित नहीं होंगे।
1 [अनुच्छेद 8
जहाजरानी और वायु परिवहन
1. एक संविदाकारी राज्य के किसी उद्यम द्वारा अन्तरराष्ट्रीय यातायात में जलयानों अथवा वायुयानों के प्रचालन से प्राप्त होने वाले लाभों पर केवल उसी राज्य में कर लगाया जाएगा।
2. किसी परिवहन उद्यम, जो एक संविदाकारी राज्य की निवासी है, द्वारा अंतरराष्ट्रीय यातायात में समुद्री यान अथवा वायुयान के परिचालन से आय के प्रासंगिक है, माल अथवा पण्य वस्तुओं के परिवहन के लिए प्रयुक्त कंटेनरों (जिसमें कंटेनरों के परिवहन के लिए ट्रेलर तथा अन्य उपस्कर शामिल हैं) के प्रयोग, रख-रखाव अथवा कंटेनरों को किराए पर देने से प्राप्त लाभ केवल उसी संविदाकारी राज्य में कराधेय होंगे जब तक कि उन कंटेनरों का प्रयोग केवल दूसरे संविदाकारी राज्य के भीतर न किया जाए।
3. पैराग्राफ 1 के उपबंध किसी पूल में भागीदारी, किसी संयुक्त उद्यम अथवा किसी अन्तरराष्ट्रीय प्रचालन एजेंसी में प्राप्त लाभों पर भी लागू होंगे।]
अनुच्छेद 9
संबद्ध उद्यम
कहाँ
| (क) | एक संविदाकारी राज्य का एक उद्यम दूसरे संविदाकारी राज्य के एक उद्यम के प्रबंधन, नियंत्रण या पूंजी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेता है, या | |
| (ख) | वही व्यक्ति एक संविदाकारी राज्य के एक उद्यम और दूसरे संविदाकारी राज्य के एक उद्यम के प्रबंधन, नियंत्रण या पूंजी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं |
और दोनों में से किसी भी स्थिति में दोनों उद्यमों के बीच उनके वाणिज्यिक या वित्तीय संबंधों में ऐसी शर्तें बनाई या लगाई जाती हैं जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच बनाई जाने वाली शर्तों से भिन्न हैं, तो कोई भी लाभ जो उन शर्तों के अभाव में किसी एक उद्यम को प्राप्त होता, लेकिन उन शर्तों के कारण प्राप्त नहीं हुआ है, उस उद्यम के लाभ में शामिल किया जा सकता है और तदनुसार कर लगाया जा सकता है।
अनुच्छेद 10
लाभांश
1. किसी संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राज्य के निवासी को भुगतान किए गए लाभांश पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है।
1[2. तथापि, ऐसे लाभांशों पर उस संविदाकारी राज्य में भी और उस राज्य के कानून के अनुसार कर लगाया जा सकेगा जिसका लाभांश अदा करने वाली कम्पनी एक निवासी है, परन्तु यदि लाभांश का हितभागी स्वामी अन्य संविदाकारी राज्य का एक निवासी तो इस प्रकार प्रभार्य कर निम्नलिखित से अधिक नहीं होगा:
| (क) | लाभांश की सकल राशि का 10 प्रतिशत यदि लाभकारी स्वामी एक कंपनी (साझेदारी के अलावा) है, जो पूरे 365 दिन की अवधि जिसमें लाभांश के भुगतान का दिन शामिल है (उस अवधि की गणना के उद्देश्य से, किसी भी स्वामित्व के परिवर्तन का ध्यान नहीं रखा जाएगा, जो सीधे तौर पर उस कम्पनी के विलय या विभाजन पुनर्गठन या कानूनी रूप से कंपनी के परिवर्तन से होगा जो शेयर धारक है या लाभांश अदा करती है), में लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी की पूंजी के कम से कम 20 प्रतिशत की सीधे तौर पर धारक या | |
| (ख) | दूसरे सभी मामलों में लाभांश की सकल रकम का 15 प्रतिशत।"] |
3. इस अनुच्छेद में प्रयुक्त "लाभांश" शब्द का अर्थ शेयरों, "जॉयसेंस" शेयरों या "जॉयसेंस" अधिकारों, खनन शेयरों, संस्थापकों के शेयरों या अन्य अधिकारों से होने वाली आय है, जो ऋण-दावे नहीं हैं और लाभ में हिस्सेदारी रखते हैं, साथ ही अन्य कॉर्पोरेट अधिकारों से होने वाली आय भी है, जिस पर उसी तरह कराधान लागू होता है जैसे शेयरों से होने वाली आय पर, उस राज्य के कानूनों के अनुसार, जिसमें वितरण करने वाली कंपनी निवासी है।
2 [4. पैराग्राफ 1 और 2 के उपबंध उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि लाभांशों का हितभागी स्वामी जो एक संविदाकारी राज्य का निवासी होने के कारण दूसरे संविदाकारी राज्य में वहां स्थित एक स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता है, जिसकी लाभांश अदा करने वाली कम्पनी निवासी है अथवा उस दूसरे राज्य में स्थित किसी निश्चित स्थान से स्वतंत्र वैयक्तिक सेवाएं प्रदान करता है और जिस सम्पत्ति के संबंध में लाभांशों की अदायगी की जाती है वहां वह इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान से प्रभावी रूप से सम्बद्ध है। ऐसे मामले में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14 के उपबंध, जैसा भी मामला हो, लागू होंगे। ]
5. यदि भारत के किसी निवासी का ब्राजील में कोई स्थायी प्रतिष्ठान है, तो यह स्थायी प्रतिष्ठान ब्राजील के कानून के अनुसार स्रोत पर कर कटौती के अधीन हो सकता है। हालांकि, ऐसा कर उस स्थायी प्रतिष्ठान के सकल लाभ की राशि के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, जो ऐसे लाभ से संबंधित कॉर्पोरेट कर के भुगतान के बाद निर्धारित की जाती है।
3[6. जहां कोई कम्पनी, जो एक संविदाकारी राज्य की निवासी है, दूसरे संविदाकारी राज्य से लाभ अथवा आय प्राप्त करती है, वहाँ दूसरा राज्य कम्पनी द्वारा अदा किए गए लाभांशों पर, किसी भी प्रकार का कर नहीं लगाएगा, जब तक कि ऐसे लाभांश उस दूसरे राज्य के किसी निवासी को अदा किए जाते हों, अथवा जब तक कि जिस सम्पत्ति के बारे में लाभांशों की अदायगी की जाती हो, वह उस दूसरे राज्य में स्थित किसी स्थायी संस्थापन या किसी नियत स्थान से प्रभावी रूप से संबद्ध हो और न ही कम्पनी के अवितरित लाभों पर कर लगाया जाएगा, चाहे अदा किए गए लाभांश अथवा अवितरित लाभ पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से उस दूसरे राज्य में उद्भूत होने वाले लाभ अथवा आय के रूप में हों।]
अनुच्छेद 11
1. किसी संविदाकारी राज्य में उत्पन्न होने वाला और दूसरे संविदाकारी राज्य के निवासी को भुगतान किया जाने वाला ब्याज उस दूसरे राज्य में कर योग्य हो सकता है।
1[2. तथापि, इस प्रकार के ब्याज पर उस संविदाकारी राज्य में भी और उस राज्य के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा जिस राज्य में वह उद्भूत होता है, किन्तु यदि ब्याज का हितभागी स्वामी दूसरे संविदाकारी राज्य का निवासी है तो इस प्रकार प्रभारित कर निम्नलिखित से अधिक नहीं होगा:
| (क) | यदि हितग्राही बैंक है और उपकरण खरीदने या निवेश परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए कम से कम पांच वर्षों के लिए ऋण दिया गया है तो ब्याज की सकल राशि का 10 प्रतिशत; या | |
| (ख) | दूसरे सभी मामलों में ब्याज की सकल रकम का 15 प्रतिशत। ] |
3. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों के बावजूद :
| 2[(क) | एक संविदाकारी राज्य में उद्भूत तथा दूसरे संविदाकारी राज्य की सरकार को, उसके किसी राजनैतिक उप- प्रभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण को, केंद्रीय बैंक या किसी एजेंसी (किसी वित्तीय संस्था सहित) को जिनका स्वामित्व पूरी तरह से उक्त सरकार या राजनैतिक उप-प्रभाग के पास है, अदा किए जाने वाले ब्याज पर प्रथमोल्लिखित राज्य में कर से छूट प्राप्त होगी, जब तक कि उप- पैराग्राफ ख) लागू न हो; ] | |
| (ख) | किसी संविदाकारी राज्य की सरकार, उसके किसी राजनीतिक उप-विभाग या उस सरकार या राजनीतिक उप-विभाग के पूर्ण स्वामित्व वाली किसी एजेंसी (वित्तीय संस्था सहित) द्वारा जारी प्रतिभूतियों, बांडों या डिबेंचरों से प्राप्त ब्याज पर केवल उसी राज्य में कर लगेगा। |
4. इस अनुच्छेद में प्रयुक्त "ब्याज" शब्द का अर्थ सरकारी प्रतिभूतियों, बांडों या डिबेंचरों से प्राप्त आय है, चाहे वे बंधक द्वारा सुरक्षित हों या न हों और चाहे लाभ में हिस्सेदारी का अधिकार हो या न हो, और ऋण दावे हर प्रकार के साथ-साथ अन्य आय जिसे उस संविदाकारी राज्य के कराधान कानून द्वारा उधार दिए गए धन से प्राप्त आय के समान माना जाता है जिसमें आय उत्पन्न होती है।
3[5. पैराग्राफ 1 और 2 के उपबंध उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि ब्याज का हितभागी स्वामी, संविदाकारी राज्य का निवासी होने से दूसरे संविदाकारी राज्य में, जिसमें ब्याज उदभूत हुआ हो, उसमें स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो अथवा उस दूसरे राज्य में, उसमें स्थित किसी निश्चित स्थान से स्वतंत्र वैयक्तिक सेवाएं निष्पादित करता हो और जिस ऋण-दावे के बारे में ब्याज अदा किया गया हो वह इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान से प्रभावी रूप से सम्बद्ध हो। ऐसी स्थिति में, अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जैसा भी मामला हो, के उपबंध लागू होंगे।
6. पैराग्राफ 2 में विनिर्दिष्ट कर की सीमित दर एक संविदाकारी राज्य में उत्पन्न होने वाले ब्याज और उस दूसरे संविदाकारी राज्य के किसी उद्यम के किसी स्थाई संस्थापन, जो किसी तीसरे राज्य में स्थित हो, को अदा किए जाने वाले ब्याज पर लागू नहीं होगी यदि ऐसे ब्याज पर दूसरे राज्य में प्रभावी तौर पर उसके मुकाबले में कम दर पर कर लगाया जाता यदि ब्याज उस दूसरे राज्य के उद्यम को सीधे तौर पर अदा किया जाता।
7. ब्याज किसी संविदाकारी राज्य में उद्भूत हुआ माना जाएगा, यदि ब्याज अदा करने वाला उस राज्य का निवासी हो । तथापि, जहां ब्याज अदा करने वाले व्यक्ति का, चाहे वह किसी संविदाकारी राज्य का निवासी हो अथवा नहीं किसी संविदाकारी राज्य में एक स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान है और इस संबंध में ऋण जिस पर ब्याज प्रदत्त किया गया था, इस प्रकार का ब्याज इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन किया जाता है, तो इस प्रकार का ब्याज उस राज्य में उद्भूत हुआ माना जाएगा जिसमंह वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है । "
8. यदि भुगतानकर्ता और वास्तविक स्वामी के बीच या उन दोनों तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच विशेष संबंध के कारण, भुगतान किए जा रहे ऋण के दावे को ध्यान में रखते हुए, ब्याज की राशि उस राशि से अधिक हो जाती है जो भुगतानकर्ता और वास्तविक स्वामी के बीच ऐसे संबंध के अभाव में तय की गई होती, तो इस अनुच्छेद के प्रावधान केवल अंतिम उल्लिखित राशि पर लागू होंगे। ऐसे मामले में, भुगतान का अतिरिक्त भाग प्रत्येक अनुबंधित राज्य के कानूनों के अनुसार कर योग्य रहेगा, इस सम्मेलन के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए।
अनुच्छेद 12
रॉयल्टी
1. किसी अनुबंधित राज्य में उत्पन्न होने वाली और दूसरे अनुबंधित राज्य के निवासी को भुगतान की जाने वाली रॉयल्टी पर कर लगाया जा सकता है उस दूसरे राज्य में।
1[2. तथापि, इस प्रकार के रॉयल्टीज पर उस संविदाकारी राज्य में भी और उस राज्य के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा जिस राज्य में वे उद्भूत होती हैं, किन्तु यदि रॉयल्टीज का हितभागी स्वामी दूसरे संविदाकारी राज्य का निवासी है तो इस प्रकार प्रभारित कर निम्नलिखित से अधिक नहीं होगा:
| (क) | ट्रेड मार्क के उपयोग से उत्पन्न होने वाली रॉयल्टियों अथवा ट्रेड मार्क के उपयोग से सम्बंधित अधिकार से उत्पन्न रॉयल्टियों की सकल रकम का 15 प्रतिशत; | |
| (क) | दूसरे सभी मामलों में रॉयल्टीज की सकल रकम का 10 प्रतिशत।] |
3. इस अनुच्छेद में प्रयुक्त "रॉयल्टी" शब्द का अर्थ किसी भी प्रकार का भुगतान है जो किसी साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक कृति (जिसमें सिनेमा फिल्में, टेलीविजन या रेडियो प्रसारण के लिए फिल्में या टेप शामिल हैं) के कॉपीराइट के उपयोग या उपयोग के अधिकार, किसी पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन या मॉडल, योजना, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया, या औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक उपकरण के उपयोग या उपयोग करने की अनुमति, या औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक अनुभव से संबंधित जानकारी के लिए प्रतिफल के रूप में प्राप्त होता है।
2[4. पैराग्राफ 1 और 2 के उपबंध उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि रॉयल्टी का हितभागी स्वामी, संविदाकारी राज्य का निवासी होने से दूसरे संविदाकारी राज्य में, जिसमें रॉयल्टी उदभूत हुई हो, उसमें स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो अथवा उस दूसरे राज्य में, उसमें स्थित किसी निश्चित स्थान से स्वतंत्र वैयक्तिक सेवाएं निष्पादित करता हो और जिस संपत्ति के अधिकार के बारे में रॉयल्टी अदा की गयी हो वह इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान से प्रभावी रूप से सम्बद्ध हो। ऐसे मामलों में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14 के उपबंध, जैसा भी मामला हो, लागू होंगे।
5. रॉयल्टियों को किसी संविदाकारी राज्य में उद्भूत हुआ माना जाएगा, यदि अदा करने वाला उस राज्य का निवासी हो । तथापि, जहां रायल्टी अदा करने वाले व्यक्ति का, चाहे वह किसी संविदाकारी राज्य का निवासी हो अथवा नहीं किसी संविदाकारी राज्य में एक स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान है और इस संबंध में दायित्व जिस पर रायल्टी प्रदत्त किया गया था, इस प्रकार की रायल्टी इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन किया जाता है, तो इस प्रकार की रायल्टी उस राज्य में उद्भूत हुआ मानी जाएगी जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है । " ]
6. जहां भुगतानकर्ता और लाभकारी स्वामी के बीच या उन दोनों तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच विशेष संबंध के कारण, रॉयल्टी की राशि, उस उपयोग, अधिकार या जानकारी को ध्यान में रखते हुए जिसके लिए इसका भुगतान किया जाता है, उस राशि से अधिक हो जाती है जिस पर भुगतानकर्ता और लाभकारी स्वामी के बीच ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में सहमति हुई होती, तो इस अनुच्छेद के प्रावधान केवल अंतिम उल्लिखित राशि पर लागू होंगे। ऐसे मामले में, भुगतान का अतिरिक्त भाग प्रत्येक अनुबंधित राज्य के कानूनों के अनुसार कर योग्य रहेगा, इस सम्मेलन के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए।
1[अनुच्छेद 12- क
तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क
1. एक संविदाकारी राज्य में उद्भूत होने वाले और दूसरे संविदाकारी राज्य के किसी निवासी को अदा की गई तकनीकी सेवाओं के लिए फीस पर उस दूसरे संविदाकारी राज्य में कर लगाया जा सकेगा।
2. “तथापि, अनुच्छेद 14 के प्रावधानों के होते हुए भी और अनुच्छेद 8, 16 और 17 के प्रावधानों के शर्ताधीन, एक संविदाकारी राज्य में सृजित तकनीकी सेवाओं के लिए फीस पर उस संविदाकारी राज्य में भी व उस राज्य के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकता है जिस राज्य में वह उद्भूत होता है, किन्तु फीस का हितभागी स्वामी दूसरे संविदाकारी राज्य का निवासी है तो इस प्रकार प्रभारित कर, फीस की सकल रकम के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
3. इस अनुच्छेद में यथा प्रयुक्त "तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क" शब्द का अर्थ किसी भी प्रबंधकीय, तकनीकी या परामर्शी प्रकृति की किसी भी सेवा के एवज में भुगतान से है, जब तक कि भुगतान नहीं किया जाता है:
| (क) | भुगतान करने वाले व्यक्ति के कर्मचारी को; | |
| (ख) | शिक्षण संस्थान में पढ़ाने के लिए या शिक्षण संस्थान द्वारा पढ़ाने के लिए; या | |
| (ग) | एक व्यक्ति के व्यक्तिगत उपयोग के लिए सेवाओं के लिए एक व्यक्ति द्वारा। |
4. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे यदि तकनीकी सेवाओं के लिए फीस का हितभागी स्वामी, जो एक संविदाकारी राज्य का निवासी होने के कारण दूसरे संविदाकारी राज्य में, जिसमें तकनीकी सेवाओं के लिए फीस उद्भूत होती हैं, उस दूसरे राज्य में स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता है अथवा उस दूसरे राज्य में वहां पर स्थित किसी निश्चित स्थान से स्वतंत्र वैयक्तिक सेवाएं निष्पादित करता है, तथा तकनीकी सेवाओं के लिए फीस ऐसे स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से सम्बद्ध हैं। ऐसे मामलों में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14 के उपबंध, जैसा भी मामला हो, लागू होंगे।
5. इस अनुच्छेद के प्रयोजनार्थ, पैराग्राफ 6 के अध्यधीन, तकनीकी सेवाओं के लिए फीस को एक संविदाकारी राज्य में उत्पन्न होना माना जाएगा यदि भुगतानकर्ता उस राज्य का निवासी है या यदि वह व्यक्ति जो शुल्क का भुगतान कर रहा है, चाहे वह व्यक्ति एक संविदाकारी राज्य का निवासी है या नहीं, का एक संविदाकारी राज्य में एक स्थायी संस्थापन है या एक निश्चित आधार है जिसके संबंध में फीस का भुगतान करने की बाध्यता थी, और ऐसी फीस स्थायी संस्थापन या निश्चित आधार द्वारा वह्न की जाती है।
6. इस अनुच्छेद के प्रयोजनार्थ, तकनीकी सेवाओं के लिए फीस को एक संविदाकारी राज्य में उत्पन्न नहीं होना माना जाएगा यदि भुगतानकर्ता उस राज्य का निवासी है और उस दूसरे राज्य में स्थित एक स्थायी संस्थापन के माध्यम से दूसरे संविदाकारी राज्य में व्यवसाय करता है या उस दूसरे राज्य में स्थित एक निश्चित आधार के माध्यम से स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाओं का निष्पादन करता है और इस तरह की फीस उस स्थायी संस्थापन या निश्चित आधार द्वारा वहन की जाती है ।
7. जहां, अदा करने वाले और तकनीकी सेवाओं के लिए हितभागी स्वामी अथवा उन दोनों के बीच तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच विशेष संबंध होने के कारण अदा की गई फीस की रकम, उन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जिसके लिए उन्हें रकम अदा की जाती है, उस रकम से बढ़ जाती है, जिसके संबंध में इस प्रकार के संबंध नहीं होने की स्थिति में अदा करने वाले और हितभागी स्वामी के बीच सहमति हो गई होती, वहां इस अनुच्छेद के उपबंध अंतिम रूप से वर्णित रकम पर ही लागू होंगे। ऐसे मामले में फीस के आधिक्य भाग पर इस अभिसमय के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक संविदाकारी राज्य के कानूनों के अनुसार कर लगाया जाएगा।
1[अनुच्छेद 13
पूंजीगत लाभ
1. अनुच्छेद 6 में उल्लिखित जो दूसरे संविदाकारी राज्य में स्थित है, अचल सम्पत्ति के अंतरण से एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा प्राप्त अभिलाभों पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकेगा।
2. ऐसी चल संपत्ति के अंतरण से होने वाले अभिलाभ पर, जो एक संविदाकारी राज्य के किसी उद्यम की दूसरे संविदाकारी राज्य में स्थित किसी स्थायी संस्थापन की कारोबार संपत्ति का एक हिस्सा है अथवा किसी निश्चित स्थान से संबंधित ऐसी चल संपत्ति के अंतरण से प्राप्त होने वाले अभिलाभ पर, जो संपत्ति एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी को दूसरे संविदाकारी राज्य में स्वतंत्र सेवाएं निष्पादित करने के प्रयोजनार्थ उपलब्ध है, जिसमें किसी ऐसे स्थायी संस्थापन (अकेले अथवा पूर्ण उद्यम के साथ) अथवा ऐसे निश्चित स्थान के अंतरण से होने वाले ऐसे अभिलाभ भी शामिल हैं, पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकेगा।
3. उस संविदाकारी राज्य के उद्यम द्वारा अन्तरराष्ट्रीय यातायात में चलाए जाने वाले ऐसे जलयानों अथवा वायुयानों की बिक्री से अथवा इस प्रकार के जलयानों, वायुयानों के परिचालन से संबंधित चल सम्पत्ति से प्राप्त अभिलाभों पर केवल उस राज्य में कर लगाया जा सकेगा।
4. किसी कंपनी में जो संविदाकारी राज्य की निवासी है, शेयरों के अंतरण से प्राप्त अभिलाभों पर उस राज्य में कर लगाया जा सकता है।
5. पैराग्राफ 1, 2, 3 तथा 4 में उल्लिखित सम्पत्ति से भिन्न किसी भी सम्पत्ति के अंतरण से प्राप्त अभिलाभों पर दोनों संविदाकारी राज्यों में कर लगाया जा सकता है।]
1[अनुच्छेद 14
स्वतंत्र व्यक्तिगत सेवाएँ
1. एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा व्यावसायिक सेवाओं अथवा इसी प्रकार के स्वतंत्र स्वरूप वाले अन्य कार्य-कलापों से प्राप्त आय पर केवल उसी राज्य में कर लगाया जा सकेगा, परन्तु निम्नलिखित परिस्थितियों को छोड़कर जब ऐसी आय पर दूसरे संविदाकारी राज्य में भी कर लगाया जा सकेगा :
| (क) | यदि उसे अपने कार्यकलापों के निष्पादन के प्रयोजनार्थ दूसरे संविदाकारी राज्य में एक निश्चित स्थान नियमित रूप से उपलब्ध है तो उस मामले में उस दूसरे राज्य में केवल उतनी आय पर कर लगाया जा सकेगा जो उस निश्चित स्थान के कारण उद्भूत हुई मानी जा सकती है; अथवा | |
| (ख) | यदि दूसरे संविदाकारी राज्य में उसके ठहरने की अवधि या अवधियां संबंधित किसी बारह महीने की अवधि में; जो संबंधित राजकोषीय वर्ष में प्रारंभ या शुरू हो रही हो; कुल मिलाकर 183 दिन अथवा उससे अधिक दिन हों, तो उस मामले में, आय के केवल उतने ही भाग पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकेगा, जो उस दूसरे राज्य में उसके द्वारा निष्पादित कार्य-कलापों से प्राप्त हुई हो। |
2. “व्यावसायिक सेवाएं” पद में विशेषकर स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षिक अथवा अध्यापन संबंधी कार्य-कलाप तथा चिकित्सकों, वकीलों, इंजीनियरों, वास्तु-विदों, दंत चिकित्सकों तथा लेखाकारों के स्वतंत्र कार्य-कलाप शामिल हैं।]
अनुच्छेद 15
आश्रित व्यक्तिगत सेवाएँ
1. अनुच्छेद 16, 18, 19 और 20 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा रोजगार के संबंध में प्राप्त वेतन, मजदूरी और अन्य समान पारिश्रमिक पर केवल उसी राज्य में कर लगाया जाएगा, जब तक कि रोजगार दूसरे संविदाकारी राज्य में न किया जाए। यदि रोजगार इस प्रकार किया जाता है, तो उससे प्राप्त पारिश्रमिक पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है।
1[2. पैराग्राफ 1 के उपबंधों के बावजूद, एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राज्य में किए गए किसी नियोजन के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक पर केवल प्रथमोल्लिखित राज्य में कर लगाया जा सकेगा यदि :
| (क) | प्राप्तकर्ता, संबंधित वित्तीय वर्ष में समाप्त अथवा प्रारंभ हुए किसी बारह महीने की ऐसी अवधि अथवा अवधियों के लिए दूसरे राज्य में रह रहा है जो कुल मिलाकर 183 दिनों से अधिक नहीं हैं; और | |
| (ख) | पारिश्रमिक ऐसे किसी नियोजक द्वारा अथवा उसकी ओर से अदा किया गया है, जो दूसरे राज्य का निवासी नहीं है; और | |
| (ग) | पारिश्रमिक ऐसे किसी स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन नहीं किया जाता है, जो नियोजक का दूसरे राज्य में हो। |
3. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के बावजूद, एक रोजगार के संबंध में एक संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक, समुद्री जहाज या वायुयान के नियमित पूरक के एक सदस्य के रूप में, जो कि अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित एक जहाज या विमान पर सवार रहते हुए किया जाता है, दूसरे संविदाकारी राज्य के पूरी तरह भीतर से संचालित जहाज या विमान पर सवार होने को छोड़कर, पर केवल प्रथमोल्लिखित राज्य में ही कर योग्य होगा।
अनुच्छेद 16
निदेशकों का पारिश्रमिक
किसी संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा निदेशक मंडल या किसी कंपनी की परिषद के सदस्य के रूप में प्राप्त निदेशकों का पारिश्रमिक और अन्य समान भुगतान, जो दूसरे संविदाकारी राज्य का निवासी है, पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है।
1[अनुच्छेद 17
कलाकारों और खिलाड़ियों
1. अनुच्छेद 14 और 15 के उपबंधों के बावजूद भी, एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा मनोरंजनकर्ता, जैसे कि कोई थियेटर, चलचित्र, रेडियो या दूरदर्शन कलाकार अथवा किसी संगीतकार अथवा किसी खिलाड़ी के रूप में दूसरे संविदाकारी राज्य में किए गए इस प्रकार के अपने वैयक्तिक कार्य-कलापों से प्राप्त आय पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकेगा।
2. जहां किसी मनोरंजनकर्ता अथवा किसी खिलाड़ी द्वारा अपने इस प्रकार की हैसियत में किए गए वैयक्तिक कार्य-कलापों के संबंध में प्राप्त आय स्वयं मनोरंजनकर्ता या खिलाड़ी को प्राप्त नहीं हो, अपितु किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त हो, ऐसी आय पर अनुच्छेद 7, 14 और 15 के उपबंधों के बावजूद, उस संविदाकारी राज्य में कर लगाया जा सकेगा, जिसमें मनोरंजनकर्ता अथवा खिलाड़ी के कार्य-कलाप किए जाते हों।
3. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 और 2 के उपबंध किसी मनोरंजनकर्ता अथवा किसी खिलाड़ी द्वारा, किसी संविदाकारी राज्य में निष्पादित कार्य-कलापों से प्राप्त आय पर लागू नहीं होंगे यदि उस संविदाकारी राज्य में की गई यात्रा दूसरे संविदाकारी राज्य द्वारा प्रायोजित या उसकी सार्वजनिक निधियों द्वारा पर्याप्त रूप से, उसके राजनैतिक उपप्रभागों या स्थानीय प्राधिकरणों की सार्वजनिक निधियों सहित, समर्थित हों।]
अनुच्छेद 18
पेंशन और सामाजिक सुरक्षा भुगतान
1.अनुच्छेद 19 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अधीन, किसी संविदाकारी राज्य के निवासी को दी जाने वाली पेंशन और अन्य समान पारिश्रमिक, गुजारा भत्ता और वार्षिकियां उस राज्य में कर योग्य हो सकती हैं।
2.हालाँकि, इस तरह की पेंशन और अन्य समान पारिश्रमिक, गुजारा भत्ता और वार्षिकी पर दूसरे संविदाकारी राज्य में भी कर लगाया जा सकता है यदि भुगतान उस दूसरे राज्य के निवासी या उसमें स्थित किसी स्थायी प्रतिष्ठान द्वारा किया जाता है।
3.पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों के बावजूद, किसी सार्वजनिक योजना के तहत दी गई पेंशन और अन्य भुगतान, जो किसी संविदाकारी राज्य या उसके किसी राजनीतिक उप-विभाग या स्थानीय प्राधिकरण की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है, केवल उसी राज्य में कर योग्य होंगे।
4.जैसा कि इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है:
| (क) | 'पेंशन और अन्य समान पारिश्रमिक' शब्द का तात्पर्य पिछले रोजगार के संबंध में या पिछले रोजगार के संबंध में चोटों के लिए मुआवजे के रूप में किए गए आवधिक भुगतान हैं; | |
| (ख) | "वार्षिकी" शब्द का तात्पर्य है जीवन के दौरान निर्धारित समय पर या किसी निर्दिष्ट या निश्चित समयावधि के दौरान समय-समय पर देय राशि, जिसके लिए धन या धन के मूल्य में पर्याप्त और पूर्ण प्रतिफल के बदले में भुगतान करने का दायित्व होता है। |
अनुच्छेद 19
सरकारी भुगतान
1. किसी संविदाकारी राज्य, उसके राजनीतिक उप-विभाग या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किसी व्यक्ति को उस राज्य, राजनीतिक उप-विभाग या स्थानीय प्राधिकरण को प्रदान की गई सेवाओं के संबंध में पेंशन को छोड़कर दिया गया पारिश्रमिक केवल उसी राज्य में कर योग्य होगा।
हालाँकि, ऐसा पारिश्रमिक केवल उसी संविदाकारी राज्य में कर योग्य होगा जिसका प्राप्तकर्ता निवासी है, यदि सेवाएँ उस राज्य में प्रदान की गई हैं और पारिश्रमिक प्राप्तकर्ता उस राज्य का निवासी है जो:
| (क) | उस राज्य का नागरिक है, या | |
| (ख) | केवल सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से उस राज्य का निवासी नहीं बना है। |
1[2
| (क) | पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के होते हुए भी, किसी संविदाकारी राज्य अथवा उसके किसी राजनैतिक उप- प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अथवा उनके द्वारा सृजित निधियों में से किसी व्यष्टि को उस राज्य अथवा उप- प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए प्रदान की गई सेवाओं के संबंध में अदा की गई पेंशनों और अन्य ऐसे पारिश्रमिकों पर केवल उस राज्य में कर लग सकेगा। | |
| (ख) | तथापि, ऐसी पेंशनों और अन्य ऐसे पारिश्रमिकों पर केवल दूसरे संविदाकारी राज्य में कर लगेगा, यदि वह व्यष्टि उस दूसरे राज्य का निवासी तथा राष्ट्रिक हो । |
3. अनुच्छेद 15, 16, 17 और 18 के उपबंध, किसी संविदाकारी राज्य अथवा उसके किसी राजनैतिक उप- प्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण अथवा निकाय द्वारा चलाए गए किसी कारोबार के सिलसिले में प्रदान की गई सेवाओं के संबंध में वेतन, मजदूरी, पेंशनों और इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर लागू होंगे।]
अनुच्छेद 20
शिक्षकों और शोधकर्ताओं
1.कोई व्यक्ति जो किसी संविदाकारी राज्य में जाने से ठीक पहले दूसरे संविदाकारी राज्य का निवासी है या था और जो प्रथम उल्लिखित राज्य की सरकार या उस प्रथम उल्लिखित राज्य के किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय, संग्रहालय या अन्य सांस्कृतिक संस्थान के निमंत्रण पर या सांस्कृतिक आदान-प्रदान के किसी आधिकारिक कार्यक्रम के अंतर्गत उस राज्य में केवल अध्यापन, व्याख्यान देने या ऐसे संस्थान में अनुसंधान करने के उद्देश्य से लगातार दो वर्षों से अधिक अवधि के लिए उपस्थित रहता है, उसे ऐसे कार्यकलाप के लिए उसके पारिश्रमिक पर उस राज्य में कर से छूट प्राप्त होगी, बशर्ते कि ऐसे पारिश्रमिक का भुगतान उसके द्वारा उस राज्य के बाहर से प्राप्त किया गया हो।
2.यह अनुच्छेद अनुसंधान से होने वाली आय पर लागू नहीं होगा यदि ऐसा अनुसंधान मुख्य रूप से किसी विशिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों के निजी लाभ के लिए किया जाता है।
अनुच्छेद 21
छात्र और प्रशिक्षु
1.किसी छात्र या व्यवसायिक प्रशिक्षु को, जो किसी संविदाकारी राज्य में जाने से ठीक पहले दूसरे संविदाकारी राज्य का निवासी है या था तथा जो केवल अपनी शिक्षा या प्रशिक्षण के उद्देश्य से प्रथम उल्लिखित राज्य में उपस्थित है, अपने भरण-पोषण, शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए प्राप्त होने वाले भुगतान पर उस राज्य में कर नहीं लगाया जाएगा, बशर्ते कि ऐसे भुगतान उस राज्य के बाहर के स्रोतों से प्राप्त हों।
2.पैराग्राफ 1 में शामिल न किए गए रोजगार से प्राप्त अनुदान, छात्रवृत्ति और पारिश्रमिक के संबंध में, पैराग्राफ 1 में वर्णित छात्र या व्यवसाय प्रशिक्षु, इसके अतिरिक्त, ऐसी शिक्षा या प्रशिक्षण के दौरान करों के संबंध में उन्हीं छूटों, राहतों या कटौतियों का हकदार होगा जो उस राज्य के निवासियों को उपलब्ध हैं जहां वह जा रहा है।
3.इस अनुच्छेद का लाभ केवल उस अवधि तक ही दिया जाएगा जो उचित हो या जो शिक्षा या प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए प्रथागत रूप से आवश्यक हो, लेकिन किसी भी स्थिति में किसी भी व्यक्ति को इस अनुच्छेद का लाभ उस राज्य में उसके प्रथम आगमन की तारीख से लगातार पांच वर्षों से अधिक समय तक नहीं दिया जाएगा।
अनुच्छेद 22
अन्य आय
किसी संविदाकारी राज्य के निवासी की आय की मदें, जो दूसरे संविदाकारी राज्य में उत्पन्न होती हैं और जिनका इस कन्वेंशन के पूर्वगामी अनुच्छेदों में उल्लेख नहीं किया गया है, उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है।
1[अनुच्छेद 23
दोहरे कराधान के उन्मूलन के तरीके
1. जहां एक संविदाकारी राज्य का कोई निवासी ऐसी आय प्राप्त करता है जिस पर इस अभिसमय के उपबंधों के अनुसार दूसरे संविदाकारी राज्य में कर लगे (केवल उस सीमा तक कि ये उपबंध उस दूसरे राज्य में कर की मंजूरी इसलिए देते हैं कि वह आय उस दूसरे राज्य के किसी निवासी द्वारा प्राप्त करने वाली आय भी है), तो प्रथमोल्लिखित राज्य इस निवासी की आय पर लगने वाले कर पर उस दूसरे राज्य में दिए गए आय कर के बराबर की राशि की सीमा तक कटौती की मंजूरी प्रदान करेगा। तथापि, किसी भी मामले में ऐसी कटौती, छूट दिए जाने से पहले यथा-संगणित आयकर के उस भाग से अधिक नहीं होगी, जिसका श्रेय उस आय को हो, जैसा भी मामला हो, जिस पर उस दूसरे राज्य में कर लगाया जा सकता है।
2. जहां इस अभिसमय के किसी उपबंध के अनुसार एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी द्वारा प्राप्त की गई आय उस राज्य में कर से छूट प्राप्त हो, वहां फिर भी वह राज्य ऐसी निवासी की शेष आय पर कर की धनराशि की संगणना के समय छूट प्राप्त आय को ध्यान में रखेगा।"]
अनुच्छेद 24
गैर- भेदभाव
1. एक अनुबंधित राज्य के नागरिकों पर दूसरे अनुबंधित राज्य में कोई ऐसा कराधान या उससे संबंधित कोई ऐसी आवश्यकता नहीं लगाई जाएगी, जो उस दूसरे राज्य के नागरिकों पर समान परिस्थितियों में लगाए जाने वाले कराधान और उससे संबंधित आवश्यकताओं से भिन्न या अधिक बोझिल हो।
1[2. एक संविदाकारी राज्य के किसी उद्यम के दूसरे संविदाकारी राज्य में स्थित स्थायी संस्थापन पर उस दूसरे राज्य में ऐसा कोई कराधान लागू नहीं किया जाएगा जो उस दूसरे राज्य के उद्यमों पर समरूप कार्यकलापों को करने हेतु लागू होने वाले कराधान से अपेक्षाकृत कम अनुकूल हो। इस उपबंध का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि एक संविदाकारी राज्य के लिए यह बाध्यकर है कि वह दूसरे संविदाकारी राज्य के निवासियों को, कराधान प्रयोजनों के लिए उनकी सिविल हैसियत अथवा पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए किसी प्रकार की ऐसी व्यक्तिगत छूट, राहत अथवा कटौतियों की मंजूरी दे जो वह अपने निवासियों को देता है । ऐसा नहीं माना जाएगा कि ये प्रावधान किसी संविदाकारी राज्य को दूसरे संविदाकारी राज्य के किसी उद्यम के स्थाई संस्थापन के लाभों पर कर की उस दर को लगाने से रोकते हैं, जो प्रथमोल्लिखित राज्य की समान कम्पनी के लाभों पर लगाई गई उन करों की दर से अधिक हों और न ही इसका अर्थ अनुच्छेद 7 के पैराग्राफ 3 के उपबंधों के प्रतिकूल होना समझा जाएगा।]
3. किसी अनुबंधकारी राज्य के उद्यम, जिनकी पूंजी पूर्णतः या आंशिक रूप से, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दूसरे अनुबंधकारी राज्य के एक या अधिक निवासियों के स्वामित्व या नियंत्रण में है, प्रथम उल्लिखित राज्य में किसी भी ऐसे कराधान या उससे संबंधित किसी भी आवश्यकता के अधीन नहीं होंगे जो प्रथम उल्लिखित राज्य के अन्य समान उद्यमों पर लागू कराधान और संबंधित आवश्यकताओं से भिन्न या अधिक बोझिल हो, जिनकी पूंजी पूर्णतः या आंशिक रूप से, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, किसी तीसरे राज्य के एक या अधिक निवासियों के स्वामित्व या नियंत्रण में है।
4. इस अनुच्छेद में "कराधान" शब्द से तात्पर्य उन करों से है जिन पर यह सम्मेलन लागू होता है।
अनुच्छेद 25
पारस्परिक समझौता प्रक्रिया
1 [1. जहां कोई व्यक्ति यह समझता है कि एक अथवा दोनों संविदाकारी राज्यों की कार्यवाहियों के कारण इस प्रकार का कर लगाया जाएगा जो कि इस अभिसमय के उपबंधों के अनुकूल नहीं है तो वह उन राज्यों के घरेलू कानून में उपचारों की व्यवस्था होने के बावजूद भी, उस संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी को अपना मामला प्रस्तुत कर सकता है जिसका कि वह निवासी है। इस मामले को उस कार्रवाई की प्रथम अधिसूचना से तीन वर्षों के भीतर अवश्य प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए जिसके परिणामस्वरूप ऐसा कराधान लगाया गया है जो इस अभिसमय के उपबंधों के अनुरूप नहीं है।]
2. सक्षम प्राधिकारी, यदि आपत्ति उचित प्रतीत होती है और यदि वह स्वयं उचित समाधान पर नहीं पहुँच पाता है, तो सम्मेलन के अनुसार कराधान न होने से बचने के उद्देश्य से, दूसरे अनुबंधित राज्य के सक्षम प्राधिकारी के साथ पारस्परिक समझौते द्वारा मामले का समाधान करने का प्रयास करेगा। सहमति से किया गया कोई भी समझौता अनुबंधित राज्यों के राष्ट्रीय कानूनों में निर्धारित किसी भी समय सीमा के बावजूद लागू किया जाएगा।
3. अनुबंधित राज्यों के सक्षम प्राधिकारी इस सम्मेलन की व्याख्या या इसके अनुप्रयोग से संबंधित किसी भी कठिनाई या संदेह को आपसी सहमति से हल करने का प्रयास करेंगे। वे सम्मेलन में उल्लिखित न किए गए मामलों में दोहरे कराधान को समाप्त करने के लिए भी आपस में परामर्श कर सकते हैं।
4. अनुबंधित राज्यों के सक्षम प्राधिकारी पूर्वोक्त अनुच्छेदों के अनुसार किसी समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से एक दूसरे से सीधे संवाद कर सकते हैं। जब समझौते पर पहुंचने के लिए मौखिक रूप से विचारों का आदान-प्रदान करना उचित प्रतीत हो, तो ऐसा आदान-प्रदान अनुबंधित राज्यों के सक्षम प्राधिकारियों के प्रतिनिधियों से गठित एक आयोग के माध्यम से किया जा सकता है।
1 [अनुच्छेद 26
सूचना का आदान-प्रदान
1.संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना का आदान-प्रदान करेंगे जो इस समझौते के प्रावधानों को क्रियान्वित करने के लिए या संविदाकारी राज्यों या उनके राजनीतिक उपविभागों या स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से लगाए गए हर प्रकार और वर्णन के करों से संबंधित घरेलू कानूनों के प्रशासन या प्रवर्तन के लिए प्रासंगिक हो, जहां तक कि इसके तहत कराधान कन्वेंशन के विपरीत नहीं है। सूचना का आदान-प्रदान अनुच्छेद 1 और 2 द्वारा प्रतिबंधित नहीं है, बल्कि ब्राजील के मामले में यह केवल संघीय करों पर ही लागू होता है।
2.किसी संविदाकारी राज्य द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त की गई कोई भी सूचना उसी प्रकार गुप्त मानी जाएगी, जैसे उस राज्य के घरेलू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त की गई सूचना को, तथा उसका खुलासा केवल उन व्यक्तियों या प्राधिकारियों (न्यायालयों और प्रशासनिक निकायों सहित) को किया जाएगा, जो पैराग्राफ 1 में निर्दिष्ट करों के संबंध में करों के मूल्यांकन या संग्रहण, प्रवर्तन या अभियोजन, अपीलों के निर्धारण, या उपर्युक्त की निगरानी से संबंधित हैं। ऐसे व्यक्ति या अधिकारी जानकारी का इस्तेमाल केवल ऐसे उद्देश्यों के लिए करेंगे। वे सार्वजनिक अदालती कार्यवाही या न्यायिक निर्णयों में सूचना का खुलासा कर सकते हैं। पूर्वोक्त के बावजूद, किसी संविदाकारी राज्य द्वारा प्राप्त सूचना का उपयोग अन्य प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है, जब ऐसी सूचना का उपयोग दोनों राज्यों के कानूनों के अंतर्गत ऐसे प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है और आपूर्तिकर्ता राज्य का सक्षम प्राधिकारी लिखित रूप में ऐसे उपयोग को स्पष्ट रूप से अधिकृत करता है।
3.किसी भी मामले में पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों की व्याख्या इस प्रकार नहीं की जाएगी कि वे किसी संविदाकारी राज्य पर यह दायित्व अधिरोपित करें:
| क. | उस या अन्य संविदाकारी राज्य के कानूनों और प्रशासनिक व्यवहार के विपरीत प्रशासनिक उपाय करना; | |
| ख. | ऐसी सूचना प्रदान करना जो उस या अन्य संविदाकारी राज्य के कानूनों के तहत या प्रशासन के सामान्य क्रम में प्राप्त करने योग्य नहीं है; | |
| ग. | ऐसी जानकारी प्रदान करना जो किसी व्यापार, व्यवसाय, औद्योगिक, वाणिज्यिक या व्यावसायिक रहस्य या व्यापार प्रक्रिया को प्रकट करती हो, या ऐसी जानकारी जिसका प्रकटीकरण सार्वजनिक नीति (ordre public) के विपरीत हो। |
4.यदि किसी संविदाकारी राज्य द्वारा इस अनुच्छेद के अनुसार सूचना का अनुरोध किया जाता है, तो दूसरा संविदाकारी राज्य अनुरोधित सूचना प्राप्त करने के लिए अपने सूचना संग्रहण उपायों का उपयोग करेगा, भले ही उस दूसरे राज्य को अपने कर उद्देश्यों के लिए ऐसी सूचना की आवश्यकता न हो। पूर्ववर्ती वाक्य में निहित दायित्व पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अधीन है, लेकिन किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं को किसी संविदाकारी राज्य को केवल इसलिए सूचना प्रदान करने से मना करने की अनुमति देने के रूप में नहीं समझा जाएगा क्योंकि ऐसी सूचना में उसका कोई घरेलू हित नहीं है।
5.किसी भी मामले में पैराग्राफ 3 के प्रावधानों को किसी संविदाकारी राज्य को केवल इसलिए सूचना देने से इंकार करने की अनुमति देने के रूप में नहीं समझा जाएगा कि सूचना किसी बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, नामित व्यक्ति या एजेंसी या प्रत्ययी क्षमता में कार्य करने वाले व्यक्ति के पास है या क्योंकि यह किसी व्यक्ति में स्वामित्व हितों से संबंधित है।]
1 [लेख 26- क
लाभों के लिए पात्रता
1. इस अनुच्छेद में अन्यथा प्रदान किए जाने के अलावा, एक संविदाकारी राज्य का निवासी किसी लाभ (अनुच्छेद 4 के पैराग्राफ 3 या अनुच्छेद 25 के तहत एक लाभ के अलावा) का हकदार नहीं होगा जो अन्यथा इस अभिसमय द्वारा दिया जाएगा, जब तक कि ऐसा निवासी "अर्हता प्राप्त व्यक्ति" न हो, जैसा कि पैराग्राफ 2 में परिभाषित किया गया है, उस समय लाभ दिया जाएगा।
2. एक संविदाकारी राज्य का कोई निवासी उस समय जब इस अभिसमय द्वारा अन्यथा लाभ दिया जाता, एक अर्हता प्राप्त व्यक्ति होगा, उस समय, निवासी एक :
| (क) | व्यक्ति; | |
| (ख) | वह संविदाकारी राज्य, अथवा उसका कोई राजनैतिक उप- प्रभाग अथवा कोई स्थानीय प्राधिकरण, अथवा उस राज्य की कोई एजेंसी या संस्था, राजनैतिक उप- प्रभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण; | |
| (ग) | कोई कम्पनी अथवा अन्य संस्था, यदि इसके शेयरों की मुख्य श्रेणी एक या अधिक मान्यताप्राप्त शेयर बाजारों में नियमित तौर पर ट्रेड की जाती है; | |
| (घ) | एक व्यक्ति, एक व्यष्टि के अलावा, जो संविदाकारी राज्यों के सक्षम अधिकारियों द्वारा सहमत एक गैर-लाभकारी संगठन है, | |
| (ङ.) | किसी व्यष्टि के अलावा कोई अन्य व्यक्ति, यदि, उस समय तथा बारह महीने की अवधि के कम से कम आधे दिनों में जिसमें वह समय शामिल है, वे व्यक्ति जो उस संविदाकारी राज्य के निवासी हैं और जो कि उप-पैराग्राफ (क) से (घ) तहत इस अभिसमय के लाभों के हकदार हैं, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, उस व्यक्ति के कम से कम 50 प्रतिशत शेयरों के स्वामी हों। |
3.
| (क) | एक संविदाकारी राज्य का कोई निवासी दूसरे संविदाकारी क्षेत्राधिकार से अर्जित आय के सम्बंध में इस अभिसमय के तहत लाभों का हकदार होगा, चाहे वह निवासी एक अर्हता प्राप्त व्यक्ति है या नहीं, यदि वह निवासी प्रथमोल्लिखित राज्य में किसी व्यवसाय के सक्रिय संचालन में कार्यरत हो, और उस दूसरे राज्य से प्राप्त आय उस व्यवसाय से उत्पन्न होती हो या उससे आनुषंगिक हो। इस अनुच्छेद के प्रयोजनार्थ, "किसी व्यवसाय का सक्रिय संचालन" में निम्नलिखित गतिविधियां अथवा उनका कोई संयोजन शामिल नहीं होगा: |
| (i) | होल्डिंग कम्पनी के रूप में संचालन; | |
| (ii) | कम्पनियों के समूह को सम्पूर्ण पर्यवेक्षण अथवा प्रशासन उपलब्ध करवाना; | |
| (iii) | सामूहिक वित्तपोषण उपलब्ध करवाना (कैश पूलिंग सहित); अथवा | |
| (iv) | निवेश करना अथवा उसका प्रबंधन करना, जब तक कि ये गतिविधियां किसी बैंक अथवा संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा सहमत वित्तीय संस्थान, बीमा उद्यमों अथवा पंजीकृत प्रतिभूति डीलर द्वारा उनके व्यवसाय की सामान्य स्थिति में न की जाती हों। |
| (ख) | यदि एक संविदाकारी राज्य का कोई निवासी उस निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राज्य में संचालित कारोबारी गतिविधि से आय अर्जित करता है, अथवा किसी सम्बंधित व्यक्ति से दूसरे राज्य में उत्पन्न आय प्राप्त करता है, तो ऐसी आय के सम्बंध में उप-पैराग्राफ क) में वर्णित शर्तें केवल तभी पूरी हुई मानी जाएंगी यदि उस प्रथमोल्लिखित संविदाकारी राज्य में जिससे वह आय सम्बंधित है, उस निवासी द्वारा संचालित की गई कारोबारी गतिविधि उस निवासी द्वारा अथवा उस दूसरे संविदाकारी राज्य में ऐसे सम्बंधित व्यक्ति द्वारा उसी या सहयोगी कारोबारी गतिविधि के सम्बंध में पर्याप्त है। इस पैराग्राफ के प्रयोजनार्थ कोई कारोबारी गतिविधि पर्याप्त है या नहीं, वह सभी तथ्यों तथा परिस्थितियों के आधार पर निर्धारित की जाएगी। | |
| ( ग ) | यह पैराग्राफ लागू करने के लिए, एक संविदाकारी राज्य के किसी निवासी के संबंध में सम्बंधित व्यक्तियों द्वारा संचालित गतिविधियां ऐसे निवासी द्वारा संचालित की गई मानी जाएंगी। |
4. एक संविदाकारी राज्य का कोई निवासी जो एक अर्हता प्राप्त व्यक्ति नहीं है तो भी उस लाभ का हकदार होगा जो उस आय के सम्बंध में इस अभिसमय द्वारा अन्यथा दी जाती यदि, उस समय जब लाभ अन्यथा दिया जाएगा और किसी बारह महीने की अवधि के कम से कम आधे दिनों में जिसमें वह समय शामिल है, वे व्यक्ति जो समान लाभार्थी हैं, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, उस निवासी के कम से कम 75 प्रतिशत शेयरों के स्वामी हों।
5. यदि एक संविदाकारी राज्य का कोई निवासी न तो इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अनुसरण में अर्हता प्राप्त व्यक्ति है, न ही पैराग्राफ 3 अथवा 4 के तहत लाभों का हकदार है, तो फिर भी दूसरे संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी जिसमें इस अनुच्छेद के पहले वाले उपबंधों के तहत लाभों से मना किया गया है, इस अभिसमय के ध्येय एवं उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, इस अभिसमय के लाभ अथवा विशिष्ट आय से सम्बंधित लाभ प्रदान कर सकते हैं, परंतु केवल तभी यदि ऐसा निवासी ऐसे सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि तक यह दर्शाता है कि न तो उसके संस्थान, अधिग्रहण अथवा अनुरक्षण, और न ही इसके प्रचालनों के संचालन का उसके प्रमुख उद्देश्यों में से एक उद्देश्य इस अभिसमय के तहत लाभों की प्राप्ति था। संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी, जिसको दूसरे संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा इस पैराग्राफ के अंतर्गत अनुरोध किया गया है, या तो अनुरोध मंजूर करने से पूर्व अथवा मना करने से पूर्व उस दूसरे संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी के साथ विचार विमर्श करेगा।
6. इसके और इस अनुच्छेद के पिछले पैराग्राफ के प्रयोजनार्थ:
| (क) | "मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज' से तात्पर्य है: |
| (i) | किसी भी संविदाकारी राज्य के कानूनों के तहत इस प्रकार स्थापित एवं विनियमित कोई भी शेयर बाज़ार; तथा | |
| (ii) | संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा सहमत कोई अन्य शेयर बाज़ार, |
| (ख) | उन सस्थाओं के सम्बंध में जो कम्पनियां नहीं हैं, " शेयर" शब्द का तात्पर्य हितों से है जो शेयरों के साथ तुलनीय हैं; | |
| (ग) | "शेयरों का प्रमुख वर्ग' से तात्पर्य किसी उस कम्पनी अथवा सत्ता के शेयरों के वर्ग अथवा वर्गों से है जो उस कम्पनी अथवा सत्ता के कुल वोट तथा मूल्य के बहुमत का प्रतिनिधित्व करते हों; | |
| (घ) | दो व्यक्ति "संबद्ध व्यक्ति" होंगे यदि कोई एक व्यक्ति, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, दूसरे में कम से कम 50 प्रतिशत के लाभकारी हित का मालिक हो (या, किसी कंपनी के मामले में, कंपनी के शेयरों के कुल वोट और मूल्य का कम से कम 50 प्रतिशत) या वह दूसरा व्यक्ति, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, प्रत्येक व्यक्ति में लाभप्रद हित के कम से कम 50 प्रतिशत (या, किसी कंपनी के मामले में, कंपनी के शेयरों के कुल वोट और मूल्य का कम से कम 50 प्रतिशत) का मालिक हो । किसी भी मामले में, कोई व्यक्ति दूसरे से जुड़ा माना जाएगा यदि सभी संगत तथ्यों तथा परिस्थितियों के आधार पर एक का दूसरे पर नियंत्रण हो अथवा दोनों ही किसी एक व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के नियंत्रण में हो । | |
| (ड़) | "समतुल्य लाभार्थी" शब्द का अर्थ है - कोई भी व्यक्ति जो एक संविदाकारी राज्य के घरेलू कानून के तहत उस संविदाकारी राज्य द्वारा दत्त आय के मद के संबंध में लाभ, इस अभिसमय या किसी भी अन्य अंतरराष्ट्रीय करार जो इसके समकक्ष हैं या इससे अधिक अनुकूल हैं, इस अभिसमय के तहत आय की उस मद को दिए जाने वाले लाभ का हकदार होगा। यह निर्धारित करने के प्रयोजनार्थ कि क्या कोई व्यक्ति किसी कंपनी द्वारा प्राप्त लाभांश के संबंध में एक समतुल्य लाभार्थी है, उस व्यक्ति को कंपनी समझा जाएगा और लाभांश अदा करने वाली कंपनी की उतनी ही पूंजी धारित करेगा जितनी पूंजी लाभांश के सम्बंध में लाभ का दावा करने वाली कंपनी धारित करती |
7. संविदाकारी राज्यों के सक्षम प्राधिकारी इस अनुच्छेद के अनुप्रयोग की विधि परस्पर सहमति द्वारा तय कर सकते हैं।
8.
| (क) | जहां | |
| (i) | सम्मिलित कर के संविदाकारी राज्य का उपक्रम दूसरे संविदाकारी राज्य से आय प्राप्त करता है तथा प्रथमोल्लिखित राज्य ऐसी आय को तीसरे क्षेत्राधिकार में स्थित उपक्रम के स्थायी संस्थापन को आरोप्य के रूप में माना जाता है, और | |
| (ii) | उस स्थायी संस्थापन को आरोप्य लाभों को प्रथमोल्लिखित संविदाकारी राज्य में कर से छूट है, |
इस अभिसमय के लाभ आय की किसी मद को लागू नहीं होंगे जिन पर तीसरे क्षेत्राधिकार में कर उस आय के मद की राशि के निचले 15 प्रतिशत से कम हो और उस कर के 60 प्रतिशत से कम है जिसे आय की उस मद पर प्रथमोल्लिखित राज्य में लगाया जा सकेगा यदि वह स्थायी संस्थापन प्रथमोल्लिखित राज्य में स्थित थे। ऐसे मामले में कोई आय, जिस पर इस पैराग्राफ के उपबंध लागू होते हैं, इस अभिसमय के किसी अन्य उपबंध के होते हुए भी दूसरे राज्य के घरेलू कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेंगे।
| (ख) | इस पैराग्राफ के पहले के उपबंध लागू नहीं होंगे यदि दूसरे राज्य से अर्जित आय स्थायी संस्थापन के जरिए किए गए बिजनेस के सक्रिय चलाने से प्राप्त की गई है अथवा प्रासंगिक है (निर्माण, प्रबंधन अथवा साधारणतः उपक्रम के स्वयं के खाते के लिए निवेश धारण करने के बिजनेस को छोड़कर जब तक कि ये कार्यकलाप बैंक, बीमा उपक्रम अथवा पंजीकृत प्रतिभूति वितरकों द्वारा चलाए गए क्रमश: बैंकिंग, बीमा अथवा प्रतिभूति कार्यकलाप हैं) । | |
| (ग) | यदि इस अभिसमय के तहत संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा प्राप्त आय की मद के बारे में इस पैराग्राफ के पहले के उपबंधों के अनुसार इस अभिसमय के अन्तर्गत लाभों को मना किया जाता है तो दूसरे संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी फिर भी, आय की उस मद के बारे में इन लाभों को प्रदान कर सकते हैं यदि ऐसे निवासी द्वारा अनुरोध की प्रतिक्रिया में ऐसे सक्षम प्राधिकारी निर्धारित करते हैं कि ऐसे लाभ प्रदान करना उन कारणों को देखते हुए तर्कसंगत है कि ऐसे निवासी ने इस पैराग्राफ की जरूरतों (हानियों का होने जैसी) की संतुष्टि नहीं की । संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी, जिसको दूसरे संविदाकारी राज्य के निवासी द्वारा पूर्व वाक्य के अंतर्गत अनुरोध किया गया है, या तो अनुरोध मंजूर करने से पूर्व अथवा मना करने से पूर्व उस दूसरे संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी के साथ विचार विमर्श करेगा। |
9. इस अभिसमय के अन्य उपबंधों के बावजूद, इस अभिसमय के अंतर्गत आय के किसी मद के संबंध में कोई लाभ नहीं दिया जाएगा यदि सभी संगत तथ्यों तथा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह मानना समुचित हो कि इस प्रकार का लाभ हासिल करना ही किसी समझौते अथवा संव्यवहार के मुख्य उद्देश्यों में से एक उद्देश्य ही था जिसके परिणामस्वरूप प्रत्यक्षतः अथवा अप्रत्यक्षतः वह् लाभ हुआ है, जब तक कि यह सिद्ध नहीं होता हो कि इन परिस्थितियों में उस लाभ का प्रदान किया जाना इस अभिसमय के संगत उपबंधों के लक्ष्य तथा उद्देश्यों के अनुरूप है।
अनुच्छेद 27
राजनयिक अभिकर्ता एवं वाणिज्य दूत अधिकारी
इस समझौते में कुछ भी अंतर्राष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के अंतर्गत या विशेष समझौतों के प्रावधानों के अंतर्गत राजनयिक एजेंटों या कांसुलर अधिकारियों के राजकोषीय विशेषाधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 28
प्रभाव में आने की तिथि
1.इस कन्वेंशन का अनुसमर्थन किया जाएगा तथा अनुसमर्थन के दस्तावेजों का आदान-प्रदान यथाशीघ्र ब्रासीलिया में किया जाएगा।
2.यह कन्वेंशन अनुसमर्थन के दस्तावेजों के आदान-प्रदान पर लागू होगा और इसके प्रावधान पहली बार प्रभावी होंगे:
| (क) | ब्राजील मेंः |
| i. | स्रोत पर रोके गए करों के संबंध में, उस कैलेंडर वर्ष के तुरंत बाद के कैलेंडर वर्ष के जनवरी के पहले दिन या उसके बाद भुगतान या जमा की गई राशि तक, जिसमें कन्वेंशन लागू होता है; | |
| ii. | कन्वेंशन द्वारा शामिल किए गए अन्य करों के संबंध में, कन्वेंशन के लागू होने के तुरंत बाद वाले कैलेंडर वर्ष के जनवरी के पहले दिन या उसके बाद शुरू होने वाले कर योग्य वर्ष के लिए; |
| (ख) | भारत में: | |
| कन्वेंशन के लागू होने के कैलेंडर वर्ष के तुरंत बाद अप्रैल के पहले दिन या उसके बाद शुरू होने वाले किसी भी पिछले वर्ष में उत्पन्न होने वाली आय के संबंध में। |
अनुच्छेद 29
समापन
कोई भी संविदाकारी राज्य इस कन्वेंशन के लागू होने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के पश्चात् दूसरे संविदाकारी राज्य को राजनयिक माध्यम से लिखित समाप्ति नोटिस देकर इसे समाप्त कर सकता है, बशर्ते कि ऐसी कोई भी सूचना किसी भी कैलेंडर वर्ष में जून की तीसवीं तारीख को या उससे पहले ही दी जाएगी।
ऐसे मामले में, कन्वेंशन प्रभावी नहीं रहेगा:
| (क) | ब्राजील मेंः |
| i. | स्रोत पर रोके गए करों के संबंध में, समाप्ति की सूचना दिए जाने के तुरंत बाद वाले कैलेंडर वर्ष के जनवरी के प्रथम दिन या उसके बाद भुगतान की गई या जमा की गई राशि तक: | |
| ii. | अन्य करों के संबंध में, समाप्ति की सूचना दिए जाने के तुरंत बाद वाले कैलेंडर वर्ष के जनवरी के पहले दिन या उसके बाद शुरू होने वाले कर योग्य वर्षों के लिए; |
| (ख) | भारत में: | |
| नोटिस दिए जाने के कैलेंडर वर्ष के तुरंत बाद अप्रैल के पहले दिन या उसके बाद शुरू होने वाले किसी भी पिछले वर्ष में उत्पन्न होने वाली आय के संबंध में। |
जिसके साक्ष्य स्वरूप अधोहस्ताक्षरी ने विधिवत् कन्वेंशन होकर इस अभिसमय पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह नई दिल्ली में 26 अप्रैल, 1988 को हिन्दी, पुर्तगाली और अंग्रेजी भाषाओं में दो प्रतियों में सम्पन्न हुआ, तीनों पाठ समान रूप से प्रामाणिक हैं। व्याख्या में किसी भी प्रकार का मतभेद होने पर अंग्रेजी पाठ मान्य होगा।
1 [प्रोटोकॉल
इस बात पर सहमति है कि निम्नलिखित प्रावधान अभिसमय का एक अभिन्न हिस्सा
1. अभिसमय के संदर्भ में
इस माना गया है कि इस अभिसमय के प्रावधान किसी भी मामले में किसी संविदाकारी राज्य को घरेलू कानूनों के उपबंधों को लागू करने और कर परिहार या अपवंचन, चाहे इस तरह वर्णित हों या नहीं, के संबंध में उपाय करने से नहीं रोकेंगे।
2. अनुच्छेद 2 के संदर्भ में
यह माना जाता है कि ब्राज़ील के मामले में 15 दिसंबर 1988 के कानून 7,689 द्वारा सृजित शुद्ध लाभ पर सामाजिक योगदान (Contribuição Social sobre o Lucro Liquido, CSLL) अनुच्छेद 2 के पैराग्राफ 2 के उप-पैराग्राफ क) में निर्दिष्ट करों में शामिल है।
3. अनुच्छेद 3 के संदर्भ में
यह माना गया है कि अनुच्छेद 3 के पैराग्राफ 1 के उप-पैराग्राफ ञ) में "कर" शब्द में ऐसी कोई रकम शामिल नहीं होगी, जो उन करों के संबंध में किसी भूल अथवा चूक के संदर्भ में देय हो, जिन पर यह अभिसमय लागू होता हो अथवा उन करों के संबंध में लगाए गए अर्थदंड अथवा जुर्माने का द्योतक हो । इसके अतिरिक्त, पूर्वोक्त कमी, चूक, शास्ति अथवा आर्थिक दंड के लिए देय राशि की कर क्रेडिट देने के लिए गणना नहीं की जाती ।
4. अनुच्छेद 9 और 25 के संदर्भ में
यह समझा जाता है कि एक उचित अनुरुप समायोजन करने के लिए एक संविदाकारी राज्य की बाध्यता का प्रावधान करने वाले खंड की अनुपस्थिति में यह नहीं माना जाएगा कि यह एक संविदाकारी राज्य को इस तरह के एक उपयुक्त समायोजन करने में बाधा उत्पन्न करने के लिए किया गया है, यदि आपसी समझौते की प्रक्रिया के दौरान इस पर सहमति हो गई हो।
5. अनुच्छेद 11 के संदर्भ में
यह समझा जाता है कि, अनुच्छेद 11 के पैराग्राफ 4 के संबंध में, ब्राज़ील के कर कानून के अनुसार "कंपनी की इक्विटी पर ब्याज" के रूप में अदा किया गया ब्याज (पुर्तगाली में "juros sobre o capital proprio") भी अनुच्छेद 11 के पैराग्राफ 4 के प्रयोजनों के लिए ब्याज माना जाता है।
6. अनुच्छेद 12-क के संदर्भ में
यह समझा जाता है कि अनुच्छेद 12-क के पैराग्राफ 3 के प्रावधान तकनीकी सहायता के प्रतिपादन के लिए प्रतिफल के रूप में प्राप्त किसी भी प्रकार के भुगतान पर लागू होंगे।
7. अनुच्छेद 20 के संदर्भ में
यह समझा जाता है कि शब्द "संग्रहालय या अन्य सांस्कृतिक संस्थान" केवल ऐसे संगठनों को संदर्भित करेगा, जिन्हें संबंधित संविदाकारी राज्य के सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में अनुमोदित किया गया है।
8. अनुच्छेद 24 के संदर्भ में
| (क) | यह समझा जाता है कि अनुच्छेद 10 के पैराग्राफ 5 के प्रावधान का अनुच्छेद 24 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के साथ कोई टकराव नहीं हैं। | |
| (ख) | यह समझा जाता है कि अनुच्छेद 12 के पैराग्राफ 3 में यथा परिभाषित रॉयल्टी की कटौती के परिसीमन पर ब्राज़ील के कर कानून के प्रावधान का अनुच्छेद 7 के पैराग्राफ 3 के तहत एक स्थायी संस्थापन की कर योग्य आय का निर्धारण करते समय वर्तमान अभिसमय के अनुच्छेद 24 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के साथ टकराव नहीं है। |

