आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. Appendix

परिशिष्ट

नियम संख्या.

Appendix

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/12/2025

परिशिष्ट

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 1

[आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 2 देखें]

चूककर्ता को माँग का नोटिस

टीआरओ का कार्यालय...........................

दिनांक .................................................

सेवा में

.............................................(जीआईआर/पैन)

............................................

1.*यह प्रमाणित किया जाता है कि .................................. की धनराशि .................. की स्थिति में .................. को आपसे देय हो गई है, जिसका विवरण पृष्ठ भाग पर दिया गया है।

जबकि प्रमाण पत्र पर क्रमांक ......... दिनांकित ......... कर वसूली अधिकारी ................................................................................. (स्थान का नाम) द्वारा रुपये ................. की राशि की वसूली के लिए अग्रेषित किया गया था। जिसका विवरण पीछे दिया गया है [और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223 की उपधारा (2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को उक्त प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति भेजी है] जिसमें रुपये ................... की राशि निर्दिष्ट की गई है जो आपसे वसूल की जानी है।

2.आपको इस नोटिस की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर उपरोक्त राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है, अन्यथा आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 222 से धारा 232 तथा उक्त अधिनियम की द्वितीय अनुसूची और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार वसूली की जाएगी।

3.उपर्युक्त राशि के अतिरिक्त, आप निम्नलिखित के लिए भी उत्तरदायी होंगे, -

 ()   इस नोटिस के जारी होने के तुरंत बाद प्रारंभ होने वाली अवधि के लिए उक्त अधिनियम की धारा 220 की उपधारा (2) के अनुसार देय ब्याज,

 ()   इस नोटिस की तामील और वारंट तथा अन्य प्रक्रिया तथा बकाया राशि वसूलने के लिए की गई अन्य सभी कार्यवाहियों के संबंध में उपगत सभी लागत, प्रभार और व्यय।

मोहर   कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

बकाया राशि का विवरण

 
रुपए
 
नियमित
अग्रिम
अनंतिम
मूल्यांकन वर्ष
   1.   आय-कर
   2.   अधिभार
   3.   धारा 143 के तहत अतिरिक्त कर
   4.   धारा .....के तहत शास्ति
   5.   धारा .....के तहत ब्याज
   6.   धारा 131 के तहत जुर्माना
   7.   कोई अन्य राशि (विवरण दें)
   8.   धारा 220(2) के तहत उस दिन से ब्याज जिस दिन राशि देय हो जाती है:
   9.   कुल :
 
 
 
 

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 2

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 20 देखें ]

चल संपत्ति की कुर्की का वारंट

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

........................................................................

सेवा में

.............................................

*जबकि प्रमाण पत्र संख्या ........................... दिनांक ................................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार किया गया है], ................................................................................., के विरूद्ध .........................................................................................

[चूककर्ता ]

और नीचे उल्लिखित रूपए ................................. की राशि उक्त प्रमाण पत्र के संबंध में उससे देय है;

*जबकि प्रमाण पत्र संख्या ................................. दिनांक .................................................. [कर वसूली] अधिकारी, ........................ द्वारा [अधोहस्ताक्षरी] ........................................ को ........................................................ के विरूद्ध अग्रेषित किया गया था।

[चूककर्ता ]

रुपये ............... की राशि की वसूली के लिए और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि रुपये .............. की राशि चूककर्ता से वसूल की जानी है और रुपये ................ की राशि, जैसा कि नीचे उल्लेख किया गया है, उक्त प्रमाण पत्र के संबंध में उससे देय है;

 
 
रु.
पैसे
†प्रमाणपत्र राशि/निर्दिष्ट राशि
....
 
 
लागत और शुल्क
....
 
 
ब्याज़
....
 
 
 
कुल
 
 

और जबकि उक्त प्रमाणपत्र की संतुष्टि के लिए उक्त राशि .................................. का भुगतान नहीं किया गया है;

यह आपको निर्देश दिया जाता है कि आप इस वारंट की एक प्रति चूककर्ता को तामील करें और, जब तक कि ऐसी तामील के बाद उक्त चूककर्ता तत्काल उक्त राशि ............. रुपये का भुगतान नहीं कर देता है , साथ ही इस वारंट के जारी होने की तारीख से रुपये ................. पर [डेढ़ प्रतिशत की दर से प्रत्येक महीने या महीने के भाग के लिए] ब्याज और इस प्रक्रिया को निष्पादित करने की लागत के लिए रुपये .................. का भुगतान नहीं कर देता है, उक्त चूककर्ता की चल संपत्ति [और जहाँ आवश्यक हो, चल संपत्ति जो आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है] को कुर्क करने के लिए आगे बढ़ें और नीचे हस्ताक्षरकर्ता के अगले आदेशों तक उसे अपने पास रखें।

आपको यह भी निर्देश दिया जाता है कि आप इस वारंट को दिन ...... 19...... तारीख को या उससे पहले एक पृष्ठांकन के साथ वापस कर दें, जिसमें यह प्रमाणित हो कि यह किस दिन और किस तरीके से निष्पादित किया गया है, या यह कारण भी हो कि इसे निष्पादित क्यों नहीं किया गया है।

मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से आज. .... दिनांक .................. को दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

†अनुचित शब्दों को हटाएँ।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 3

[ आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 26(1)(i) देखें ]

निषेधात्मक आदेश जहाँ संपत्ति में ऐसे ऋण शामिल हैं जो परक्राम्य लिखतों द्वारा सुरक्षित नहीं हैं

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

........................................................................

सेवा में

................................................

*जबकि ................................................................................. [चूककर्ता] प्रमाण पत्र संख्या ........................ दिनांक .................................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार], ......................... के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि , जो .........................रुपये है, तथा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अंतर्गत उक्त तिथि के तुरंत बाद प्रारंभ होने वाली अवधि के लिए देय ब्याज का भुगतान करने में विफल रहा है;

*जबकि ........................................................................[चूककर्ता] [कर वसूली] अधिकारी द्वारा [ अधोहस्ताक्षरी] को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या ........................दिनांक .......................के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि .................रुपये ............... और आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अधीन देय ब्याज का भुगतान करने में विफल रहा है [* * *]; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के अधीन उक्त प्रमाण पत्र की एक प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से ..............रुपये की राशि वसूल की जानी है;

यह आदेश दिया जाता है कि †................................................................................................. [लेनदार का नाम] को, तथा इसके द्वारा, अधोहस्ताक्षरी के अगले आदेश तक, आपसे एक निश्चित ऋण प्राप्त करने से प्रतिबंधित और रोका जाता है, जो अब आपसे †..................................................................;[लेनदार का नाम] को देय माना जाता है।

और यह कि आप, उक्त ................., को, इसके द्वारा, अधोहस्ताक्षरी के अगले आदेश तक, उक्त ऋण या उसके किसी भाग का भुगतान अधोहस्ताक्षरी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को करने से प्रतिबंधित और रोका जाता है।

आज दिनांक .................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

† चूककर्ता का नाम भरें, और जहां ऋण से बनी संपत्ति आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है, उस स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट व्यक्ति का नाम भरें।

फॉर्म संख्या आई. टी. सी. पी. 4

[ आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 26(1)( ii ) देखें

निषेधात्मक आदेश जहाँ संपत्ति में किसी निगम के शेयर शामिल हों

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

.........................................................................

सेवा में

(1) ...............................................

(2) ...............................................

        [प्रधान अधिकारी]

     ...............................................

      [निगम का नाम]

*जबकि ................................................................[चूककर्ता] प्रमाण पत्र संख्या ................. दिनांक ................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार], ........................................ के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि , जो ........................रुपये है और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत उक्त तिथि के तुरंत बाद शुरू होने वाली अवधि के लिए देय ब्याज का भुगतान करने में विफल रहा है;

*जबकि ................................................................................. [चूककर्ता] [कर वसूली] अधिकारी द्वारा .......... [अधोहस्ताक्षरी] को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या .................दिनांक .................के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहा है , जो कि ........................रुपये है और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज है [* * *]; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की एक प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से .................रुपये की राशि वसूल की जानी है;

यह आदेश दिया जाता है कि आप, ऊपर उल्लिखित क्रमांक (1) को, इसके द्वारा, अधोहस्ताक्षरी के अगले आदेश तक, आपके नाम पर पूर्वोक्त निगम में शेयरों का कोई हस्तांतरण करने या उस पर किसी लाभांश का भुगतान प्राप्त करने से प्रतिबंधित और रोका जाता है। † यह ध्यान दिया जा सकता है कि शेयरों से युक्त संपत्ति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है।

और, यह कि आप, ऊपर उल्लिखित संख्या (2), को, नीचे हस्ताक्षरकर्ता के अगले आदेश तक, ऐसे किसी भी हस्तांतरण की अनुमति देने या ऐसा कोई भुगतान करने से प्रतिबंधित और रोका जाता है।

आज दिनांक .........को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मोहर)  कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

†यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 5

[ आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 26(1)(iii) देखें]

निषेधात्मक आदेश, जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति चल संपत्ति है, जिस पर चूककर्ता किसी अन्य व्यक्ति के ग्रहणाधिकार या तत्काल कब्जे के अधिकार के अधीन हकदार है।

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

.......................................................................

सेवा में

.....................................

*जबकि ................................................................................. [चूककर्ता] उसके संबंध में देय बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहा है

प्रमाणपत्र संख्या ..............दिनांक .............. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार], ......................., जिसकी राशि ..................रुपये है तथा आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अधीन उक्त तिथि के तत्काल पश्चात प्रारंभ होने वाली अवधि के लिए देय ब्याज;

*जबकि ................................................................................. [चूककर्ता] [कर वसूली] अधिकारी द्वारा [अधोहस्ताक्षरी] को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या ..................दिनांक .................के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहा है, जिसकी राशि .................रुपये है और आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज है [* * *]; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की एक प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से ..............रुपये की राशि वसूल की जानी है;

यह आदेश दिया जाता है कि †................................................................................................[संपत्ति के हकदार व्यक्ति का नाम] को, और इसके द्वारा, अधोहस्ताक्षरी के अगले आदेश तक, आपसे, अर्थात्, .............., उक्त †............ के कब्जे में निम्नलिखित संपत्ति प्राप्त करने से प्रतिबंधित और रोका जाता है, अर्थात्: जिसके लिए उक्त †.......................हकदार है, इसके तत्काल कब्जे के आपके दावे के अधीन;

और यह कि आपको, नीचे हस्ताक्षरकर्ता के अगले आदेश तक, उक्त .........संपत्ति को किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों को सौंपने से प्रतिबंधित और रोका जाता है।

मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से आज दिनांक ..................को दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

† चूककर्ता का नाम भरें, और जहाँ चल संपत्ति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में सम्मिलित है, वहां उस स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट व्यक्ति का नाम भरें।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 6

[आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 27 देखें ]

सिविल न्यायालय के आदेश की कुर्की की सूचना

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

........................................................................

सेवा में
दिनांकित............................................................

न्यायालय के न्यायाधीश ..................

महोदय,

*जबकि ................................................................. [चूककर्ता] प्रमाणपत्र संख्या ................. दिनांक ................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार],.................. के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि ..................रुपये और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत उक्त तिथि के तुरंत बाद शुरू होने वाली अवधि के लिए देय ब्याज का भुगतान करने में विफल रहा है;

*जबकि ................................................................. [चूककर्ता] [कर वसूली] अधिकारी द्वारा,........, [ अधोहस्ताक्षरी] को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या ....................... दिनांक ....................... के संबंध में उससे प्राप्त बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहा है, ......................... जिसकी राशि ......................... रुपए है और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज [* * *]; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की एक प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से ....................... रुपए की राशि वसूल की जानी है;

और जबकि अधोहस्ताक्षरी उक्त अधिनियम की द्वितीय अनुसूची के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, ............न्यायालय की ...........तारीख ..........की न्यायिक निर्णय की कुर्की के साथ आगे बढ़ना चाहता है, जो ...........के वाद संख्या ...........में की गई थी, जिसमें .....वादी था और † .......................... प्रतिवादी था और जो न्यायिक निर्णय आपके न्यायालय में निष्पादन हेतु लंबित है;

अतः आपसे अनुरोध है कि उक्त न्यायिक निर्णय के क्रियान्वयन पर तब तक रोक लगा दी जाए जब तक कि-

        (i  ) अधोहस्ताक्षरी इस नोटिस को रद्द करता है; या

       (ii)   आयकर अधिकारी, ..................., या उपर्युक्त चूककर्ता डिक्री को निष्पादित करने के लिए आपके पास आवेदन करता है।

भवदीय,

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

† चूककर्ता का नाम भरें, और जहाँ चल संपत्ति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में सम्मिलित है, वहां उस स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट व्यक्ति का नाम भरें।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 7

[आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 28 देखें ]

कुर्की की सूचना जहाँ संपत्ति में चल संपत्ति में हिस्सा या हित शामिल है

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ........................................................................

सेवा में

.....................................................

*जबकि आपने प्रमाण पत्र संख्या ...................... दिनांक .................... [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार],.............................., के संबंध में आपके द्वारा देय रुपये ........................ की बकाया राशि और आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान उक्त तिथि के तुरंत बाद शुरू होने वाली अवधि के लिए नहीं किया है;

*जबकि ................................................................................. [चूककर्ता] ने [ कर वसूली] अधिकारी ....... द्वारा [अधोहस्ताक्षरी] को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या ................................. दिनांक ........................ के संबंध में उसके द्वारा देय रुपये ................................. की बकाया राशि और आयकर अधिनियम, 1961 [***] की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान नहीं किया है; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की एक प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से रुपये ....................... की राशि वसूल की जानी है;

इसके द्वारा यह आदेश दिया जाता है कि आपको .............. , नीचे हस्ताक्षरकर्ता के अगले आदेश तक, चल संपत्ति की नीचे उल्लिखित मदों में अपने हिस्से या हित को किसी भी तरह से हस्तांतरित करने या चार्ज करने से प्रतिबंधित और रोका जाता है, जो आपके और सह-मालिकों के रूप में .................. और ......................... से संबंधित है।

आज दिनांक .................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

† चूककर्ता का नाम भरें, और जहाँ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चल संपत्ति चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है, उस स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट व्यक्ति का नाम भरें।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 8

[ आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 29 देखें ]

सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारियों के वेतन या भत्ते कुर्क करने का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ........................................................................

सेवा में

.....................................................

* जबकि ........................................ [चूककर्ता] ने प्रमाण पत्र संख्या ........................ दिनांक ........................ [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार], ........................, के संबंध में ......................... रुपये की बकाया राशि और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान नहीं किया है [***];

* जबकि ........................................................................ [चूककर्ता] ने [कर वसूली] अधिकारी ........ द्वारा [अधोहस्ताक्षरी] को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या .................................दिनांक ................. के संबंध में रुपये .................की बकाया राशि और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान नहीं किया है [***]; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से रुपये .................की राशि वसूल की जानी है; राशि वसूल की जानी है;

और जबकि उक्त .............. .................................................................................... [चूककर्ता द्वारा धारित पद] है जो आपसे वेतन और भत्ते प्राप्त करता है;

आपसे यह अपेक्षित है कि आप उक्त ................. के वेतन से .........................रुपये की राशि को ......................... की मासिक किस्तों में रोक लें तथा उक्त राशि को मासिक किस्तों में अधोहस्ताक्षरी को प्रेषित करें।

आज दिनांक .................. को मेरे द्वारा हस्ताक्षर एवं मुहर लगाकर दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 9

[आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 30 देखें]

परक्राम्य लिखत की कुर्की का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ........................................................................

सेवा में

(कुर्की अधिकारी).............................

जबकि अधोहस्ताक्षरी ने दिनांक ..................................19...... 19....को निम्नलिखित संपत्ति की कुर्की हेतु आदेश पारित किया है,* जो आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर ................................................................. [चूककर्ता] की संपत्ति में सम्मिलित है, कर वसूली अधिकारी, ......................................................................... के प्रमाणपत्र संख्या .........................दिनांक .................................[अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार किया गया*/] के संबंध में ................................................................................. [बकायाकर्ता] से देय बकाया की वसूली हेतु कार्यवाही के दौरान, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के अधीन अधोहस्ताक्षरी को अग्रेषित कर दी गई है;

आपको निर्देश दिया जाता है कि आप उक्त संपत्ति को जब्त कर लें, और इसे मेरे सामने लाएँ और इसे मेरे आदेशों के अधीन रखें।

संपत्ति के विवरण

आज दिनांक .................. को मेरे द्वारा हस्ताक्षर एवं मुहर लगाकर दिया गया

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 10

[आय-कर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 31 देखें]

न्यायालय या लोक अधिकारी की अभिरक्षा में चल संपत्ति की कुर्की की सूचना

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ..........................................................................

सेवा में         दिनांक.............................................................

...................................................

महोदय,

जबकि.................................... [चूककर्ता] ने रु ..........................की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है

                        [चूककर्ता]

प्रमाणपत्र संख्या .................दिनांक ................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार/ *कर वसूली अधिकारी द्वारा अग्रेषित],..........................., और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अधीन देय ब्याज [***] के संबंध में, * और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के अधीन उक्त प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा चूककर्ता से ..................... रुपए की राशि वसूल की जानी है; और अधोहस्ताक्षरी धनराशि या अन्य संपत्ति,* जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है , जो अब आपकी अभिरक्षा में है, को कुर्क करना चाहता है;

मेरा अनुरोध है कि आप उक्त धन या संपत्ति और उस पर देय होने वाले किसी भी ब्याज या लाभांश को अधोहस्ताक्षरी व्यक्ति के अगले आदेश के अधीन रखेंगे।

भवदीय,

कर वसूली अधिकारी

नोट्सः

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

†यहां बताएँ कि धन या संपत्ति किस प्रकार न्यायालय या लोक अधिकारी के हाथ में है, किस कारण से है तथा अन्य उपलब्ध विवरण बताएं।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 11

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 32 देखें ]

साझेदारी संपत्ति में हित रखने वाली संपत्ति की कुर्की का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ........................................................................

सेवा में

................................................

जबकि ........................ ने प्रमाणपत्र संख्या .................. दिनांक ................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार/*कर वसूली अधिकारी द्वारा अग्रेषित], ......................., के संबंध में रुपये .................. की बकाया राशि और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान नहीं किया है [***] *और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेज दी है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि रुपये ........................ की राशि चूककर्ता से अधोहस्ताक्षरी द्वारा वसूल की जानी है; और जबकि उक्त ......................... मेसर्स ........................ के रूप में ज्ञात फर्म में भागीदार है;

इसके द्वारा आदेश दिया जाता हैः

        (i)  कि उक्त फर्म की भागीदारी संपत्ति और लाभ में उक्त .................. का हिस्सा उक्त प्रमाणपत्र के अधीन पूर्वोक्त देय राशि के भुगतान के लिए भारित किया जाएगा और इसके द्वारा भारित किया जाता है; और

       (ii)  †कि ..........................

आज दिनांक ...............को मेरे द्वारा हस्ताक्षर एवं मुहर लगाकर दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

नोट्सः

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

यहां किसी भी अन्य आदेश को शामिल किया गया है जिसे परिस्थितियों में आवश्यक माना जा सकता है।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 12

[आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 37 और नियम 52(1) देखें ]

संपत्ति की बिक्री का वारंट

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ..........................................................................

सेवा में

.................................................

ये आपको सार्वजनिक नीलामी द्वारा निम्नलिखित संपत्ति को बेचने का आदेश देते हैं, जिसके लिए आपको .................. दिन का पूर्व नोटिस देने के बाद, उसे अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय में चिपकाकर, तथा विधिवत उद्घोषणा करने के बाद, प्रमाणपत्र संख्या .................. दिनांक ........................................ [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार/*कर वसूली अधिकारी द्वारा अग्रेषित], ................................................................., के विरुद्ध .........................................................................................................................

[चूककर्ता]

के रूप में कुर्क करना होगा। *और जबकि उक्त प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के अधीन उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा अधोहस्ताक्षरी को भेज दी गई है, या उक्त संपत्ति का उतना हिस्सा जितना वसूल किया जाएगा (i) रुपये ................ की राशि, जो उक्त प्रमाणपत्र की राशि/विनिर्दिष्ट राशि और अभी भी अप्राप्त लागतों का योग है, और; (ii) आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अधीन रुपये ................ पर [इस आदेश के जारी होने की तारीख] के तुरंत पश्चात प्रारंभ होने वाली अवधि के लिए देय ब्याज।

2. आपको आगे आदेश दिया जाता है कि आप इस वारंट को दिनांकित ........19......... को वापस कर दें। 19....., जिसमें यह प्रमाणित हो कि इसे किस प्रकार निष्पादित किया गया है या इसका कारण कि इसे निष्पादित क्यों नहीं किया गया है।

संपत्ति का विनिर्देशन

मेरे हस्ताक्षर और मुहर से आज ................ दिन ................................को दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

†अनुचित शब्दों को हटाएँ।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 13

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 38 और नियम 52(2) देखें ]

बिक्री की घोषणा

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            .........................................................................

*जबकि [अधोहस्ताक्षरी ने] ......................................................................................................... से रुपये ................................. की राशि की वसूली के लिए प्रमाण पत्र संख्या .................दिनांक ................. तैयार किया है, जो

[चूककर्ता]

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अनुसार ब्याज सहित राशि वसूली योग्य है [***] और उसकी वसूली के लिए कार्यवाही की लागत, प्रभार और व्यय;

*जबकि [कर वसूली अधिकारी], ............................................ ने प्रमाण पत्र संख्या ............... दिनांक .................................. को [अधोहस्ताक्षरी], ......................... को ......................................... से रुपये ......................... की वसूली के लिए अग्रेषित किया था; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी

                         [चूककर्ता]

ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति दिनांक ........ 19............को अधोहस्ताक्षरी को भेज दी है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से .................. रुपए की राशि वसूल की जानी है, जो राशि उक्त अधिनियम की धारा 220(2) के अनुसार ब्याज सहित वसूलनीय है [***] और इसकी वसूली के लिए कार्यवाही की लागत, प्रभार और व्यय;

और जबकि अधोहस्ताक्षरी ने उक्त प्रमाणपत्र की संतुष्टि में संलग्न अनुसूची में उल्लिखित कुर्क संपत्ति की बिक्री का आदेश दिया है;

और जबकि .......... दिनांक ...... 19.....को (बिक्री के लिए निर्धारित तिथि) इसके अंतर्गत लागत और ब्याज सहित ....... रुपए की राशि देय होगी;

इसके द्वारा सूचना दी जाती है कि, किसी स्थगन आदेश के अभाव में, उक्त संपत्ति को सार्वजनिक नीलामी द्वारा उक्त .........................दिन ................ 19...........को पूर्वाह्न/अपराह्न .................................................................................. पर बेचा 19...........जाएगा। [स्थान]

बिक्री उपर्युक्त चूककर्ता की संपत्ति की होगी/† वह संपत्ति जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में सम्मिलित है, जैसा कि नीचे अनुसूची में उल्लिखित है; और उक्त संपत्ति से जुड़ी देनदारियाँ और दावे, जहां तक ​​उनका पता लगाया गया है, वे हैं जो प्रत्येक लाट के सामने अनुसूची में निर्दिष्ट हैं।

संपत्ति को अनुसूची में निर्दिष्ट भूखंडों में बिक्री के लिए रखा जाएगा। यदि बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि संपत्ति के एक हिस्से की बिक्री से पूरी हो जाती है, तो शेष राशि के संबंध में बिक्री तुरंत रोक दी जाएगी। बिक्री तब भी रोक दी जाएगी यदि किसी भूखंड को गिराए जाने से पहले, उक्त प्रमाणपत्र में उल्लिखित बकाया राशि, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के अंतर्गत देय ब्याज और लागत (बिक्री की लागत सहित) बिक्री करने वाले अधिकारी को सौंप दी जाती है या उसकी संतुष्टि के लिए यह प्रमाण दिया जाता है कि ऐसे बकाया, ब्याज और लागत की राशि अधोहस्ताक्षरी को चुका दी गई है।

बिक्री के समय, आम जनता को व्यक्तिगत रूप से या विधिवत अधिकृत एजेंट के माध्यम से बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। हालाँकि, इस बिक्री से संबंधित कोई भी कर्तव्य निभाने वाला कोई भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति, बेची गई संपत्ति में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बोली नहीं लगाएगा, न ही उसे प्राप्त करेगा और न ही उसमें कोई रुचि प्राप्त करने का प्रयास करेगा।

बिक्री आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची और उसके अधीन बनाए गए नियमों में निर्धारित शर्तों और निम्नलिखित अतिरिक्त शर्तों के अधीन होगी:—

( i ) संलग्न अनुसूची में निर्दिष्ट विवरण नीचे हस्ताक्षरकर्ता की सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार बताए गए हैं, लेकिन नीचे हस्ताक्षरकर्ता इस घोषणा में किसी भी त्रुटि, गलत बयान या चूक के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

‡( ii ) आरक्षित मूल्य जिसके नीचे संपत्ति नहीं बेची जाएगी, रु................................. है।

( iii ) बोली की राशि में वृद्धि बिक्री का संचालन करने वाले अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएगी। बोली की राशि या बोली लगाने वाले के संबंध में किसी भी विवाद की स्थिति में, लाट को तुरंत पुनः नीलामी के लिए रखा जाएगा।

(iv ) उच्चतम बोली लगाने वाले को किसी भी लॉट का क्रेता घोषित किया जाएगा, बशर्ते कि वह बोली लगाने के लिए कानूनी रूप से योग्य हो और यह भी बशर्ते कि *उसके द्वारा बोली गई राशि आरक्षित मूल्य से कम न हो* जब प्रस्तावित मूल्य इतना स्पष्ट रूप से अपर्याप्त प्रतीत हो कि ऐसा करना अवांछनीय हो, तो उच्चतम बोली को अस्वीकार करना अधोहस्ताक्षरी के विवेक पर होगा।

(v) दर्ज कारणों से, बिक्री का संचालन करने वाले अधिकारी के विवेक पर यह निर्भर होगा कि वह इसे आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची के प्रावधानों के अधीन रहते हुए स्थगित कर दे।

(vi) चल संपत्ति के मामले में, प्रत्येक लाट की कीमत बिक्री के समय या बिक्री करने वाले अधिकारी के निर्देशानुसार शीघ्र ही अदा की जाएगी, और भुगतान न करने पर संपत्ति को तुरन्त पुनः बेच दिया जाएगा।

(vii) अचल संपत्ति के मामले में, क्रेता घोषित व्यक्ति ऐसी घोषणा के तुरंत बाद, बिक्री का संचालन करने वाले अधिकारी को अपनी क्रय राशि की पच्चीस प्रतिशत राशि जमा करेगा और ऐसी जमा राशि जमा न करने पर, संपत्ति को तुरंत फिर से रखा जाएगा और फिर से बेचा जाएगा। देय क्रय राशि की पूरी राशि क्रेता द्वारा अधोहस्ताक्षरी को संपत्ति की बिक्री की तारीख से 15वें दिन या उससे पहले, उस दिन को छोड़कर, या यदि 15वां दिन रविवार या अन्य अवकाश हो, तो 15वें दिन के बाद पहले कार्यालय दिवस पर भुगतान की जाएगी। ऊपर उल्लिखित अवधि के भीतर भुगतान न करने पर, बिक्री की नई घोषणा जारी होने के बाद संपत्ति को फिर से बेचा जाएगा। बिक्री के खर्चों को चुकाने के बाद, यदि अधोहस्ताक्षरी ठीक समझे, तो जमा राशि सरकार को जब्त कर ली जाएगी और चूक करने वाला क्रेता संपत्ति या उस राशि के किसी भी हिस्से के सभी दावों को जब्त कर लेगा जिसके लिए इसे बाद में बेचा जा सकता है।

संपत्ति की अनुसूची

लॉट की संख्या
बेची जाने वाली संपत्ति का विवरण, अन्य सह-स्वामियों के नामों के साथ, जहां संपत्ति चूककर्ता की है और सह-स्वामियों के रूप में कोई अन्य व्यक्ति।
संपत्ति या उसके किसी भाग पर निर्धारित राजस्व
संपत्ति पर लगने वाले किसी भी भार का विवरण
संपत्ति के संबंध में किए गए दावे, यदि कोई हों, तथा उसकी प्रकृति और मूल्य से संबंधित कोई अन्य ज्ञात विवरण
1
2
3
4
5
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

आज दिनांक .................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर लगाकर दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो अनुच्छेद/भाग लागू न हो उसे काट दें।

†यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

‡यह केवल अचल संपत्ति की नीलामी के मामले में लागू होता है जहां आरक्षित मूल्य तय किया गया है।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी 14

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 44(2) देखें ]

चल संपत्ति की बिक्री का प्रमाण पत्र

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            .........................................................................

यह प्रमाणित किया जाता है कि श्री ............................... ने निम्नलिखित चल संपत्ति रु........................ में खरीदी है, जो ........................................................................................ की संपत्ति में सम्मिलित है।

[चूककर्ता ]

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर , प्रमाण पत्र संख्या .........................दिनांक ......................... के निष्पादन में सार्वजनिक नीलामी द्वारा बिक्री पर [अधोहस्ताक्षरी द्वारा बकाया की वसूली के लिए तैयार किया गया, *या कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार किया गया] ................., जिसकी एक प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को भेजी गई है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि .........................रुपये की राशि ......................... से वसूल की जानी बाकी है।

संपत्ति का विनिर्देशन

आज दिनांक ................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर लगाकर दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई. टी. सी. पी. 15

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 47 देखें ]

वर्तमान सिक्कों और करेंसी नोटों के [मूल्यांकन] अधिकारी को भुगतान का आदेश संलग्न है

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

सेवा में                .

......................................................

जबकि प्रमाण पत्र संख्या ..................दिनांक .................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार किया गया], के निष्पादन में, कर वसूली अधिकारी, ........................., और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेज दी है, निम्नलिखित संपत्ति जिसमें चालू सिक्के/मुद्रा नोट शामिल हैं, कुर्क की गई है:—

(1) वर्तमान सिक्के         (2)करेंसी नोट

इसके द्वारा यह आदेश दिया जाता है कि इस प्रकार कुर्क की गई संपत्ति में से प्रचलित सिक्कों में ............... रुपये तथा करेंसी नोटों में ................. रुपये [केन्द्रीय सरकार के खाते में जमा किए जाएंगे]।

आज दिनांक ................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर लगाकर .

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 16

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 48 देखें ]

अचल संपत्ति की कुर्की का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

सेवा में        ........................................................................

...........................................................

*जबकि *आप/................................ [चूककर्ता] प्रमाण पत्र संख्या ........................ दिनांक ....................................... [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार किया गया], ........................ के संबंध में आपके/उनके द्वारा देय रुपये ................................ की राशि और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान करने में विफल रहे हैं, [***];

*जबकि *आप/.............................. [चूककर्ता] प्रमाण पत्र संख्या ......................... दिनांक ......................... [कर वसूली अधिकारी, .................. द्वारा अधोहस्ताक्षरी को अग्रेषित] के संबंध में आपके/उनके द्वारा देय रुपये ........................ की राशि और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज [***] का भुगतान करने में विफल रहे हैं; और जबकि उक्त कर वसूली अधिकारी ने उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि रुपये ........................ की राशि आपसे/चूककर्ता से वसूल की जानी है;

यह आदेश दिया जाता है कि आप, उक्त ........................ आदेश किया जाता है कि आप उक्त.......................... हों और आप इसके द्वारा, अधोहस्ताक्षरी के अगले आदेश तक, अधोनिर्दिष्ट संपत्ति †जो आय-कर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) की स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है, को किसी भी प्रकार से स्थानांतरित या प्रभारित करने से निषिद्ध और बाधित हैं और सभी व्यक्ति हों और वे इसके द्वारा ऐसे हस्तांतरण या प्रभार के तहत कोई लाभ लेने से निषिद्ध हैं।

संपत्ति का विनिर्देशन

मेरे द्वारा और मुहर के तहत........................ इस...................... दिन को...............................

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो अनुच्छेद/भाग लागू न हो उसे काट दें।

†यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 17

[आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 53 देखें]

बिक्री घोषणा के निपटान के लिए नोटिस

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

सेवा में        .........................................................................

.....................................................

*जबकि प्रमाण पत्र संख्या ..................दिनांक .................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार किया गया], .............................., † कर वसूली अधिकारी, ........................ को निष्पादित करते हुए, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा अधोहस्ताक्षरी को भेज दी गई है, अधोहस्ताक्षरी ने नीचे उल्लिखित अचल संपत्ति की बिक्री का आदेश दिया है;

*जबकि प्रमाणपत्र संख्या ....................... दिनांक ................................ [कर वसूली अधिकारी,.................... द्वारा अधोहस्ताक्षरी को अग्रेषित],.................... के निष्पादन में, जिसकी प्रमाणित प्रति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के अंतर्गत उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा अधोहस्ताक्षरी को भेजी गई है, अधोहस्ताक्षरी ने नीचे उल्लिखित अचल संपत्ति की बिक्री का आदेश दिया है, जो उक्त अधिनियम की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है;

आपकी जानकारी के लिए सूचित किया जाता है कि बिक्री की घोषणा तैयार करने और उसके नियमों को तय करने के लिए................... दिन को....................19.... 19....निर्धारित किया गया है। आपसे अनुरोध है कि आप उक्त संपत्तियों या उसके किसी भाग से जुड़े किसी भी भार, शुल्क, दावे या देनदारी को अधोहस्ताक्षरी के ध्यान में लाएँ।

संपत्ति का विनिर्देशन

मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से आज दिनांक ..................दिनांक ..................को दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

†यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 18

[आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 63(1) देखें ]

अचल संपत्ति की बिक्री की पुष्टि का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ..........................................................................

............................. ने नीचे निर्दिष्ट अचल संपत्ति रुपये ................................. में खरीदी, * जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उप-धारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर ................................................................................ [चूककर्ता] की संपत्ति में शामिल है , जो कि 19........................ के दिन सार्वजनिक नीलामी द्वारा आयोजित बिक्री में 19.................प्रमाणपत्र संख्या ....................... दिनांक ........................, के संबंध में ......................... [अधोहस्ताक्षरी*/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार] .............................. के निष्पादन में हुई थी, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को बकाया राशि की वसूली के लिए भेजी गई थी। खरीद राशि की पूरी राशि ........................ को भुगतान की गई है।

†बिक्री को अलग रखने के लिए आय-कर अधिनियम, 1961 की दूसरी अनुसूची के नियम 60/नियम 61/नियम 62 के तहत कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।

† उक्त अधिनियम की द्वितीय अनुसूची के नियम 60/नियम 61/नियम 62 के अधीन बिक्री को अपास्त करने के लिए .................... द्वारा किया गया आवेदन अधोहस्ताक्षरी द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया है।

तदनुसार, उक्त बिक्री की पुष्टि की जाती है।

संपत्ति का विनिर्देशन

आज दिनांक .................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

अनुचित शब्दों को हटाएँ।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 19

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 63(2) देखें]

इच्छुक पक्षों को कारण बताने के लिए नोटिस कि बिक्री को रद्द क्यों न किया जाए

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

सेवा में        ........................................................................

.....................................................

जबकि नीचे उल्लिखित संपत्ति, * जो ................................. की संपत्ति में सम्मिलित है।

[चूककर्ता ]

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर , प्रमाणपत्र संख्या ....................... दिनांक ........................ [अधोहस्ताक्षरी*/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार], ..................... के निष्पादन में दिनांक ................. को बेचा गया था, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को बकाया राशि की वसूली के लिए भेजी गई थी;

                                                [चूककर्ता ]

और जबकि ................................. ने आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची के नियम 60/नियम 61/नियम 62 के अधीन बिक्री को अपास्त करने के लिए अधोहस्ताक्षरी को आवेदन किया है;

कृपया ध्यान दें कि यदि आपके पास यह दर्शाने का कोई कारण है कि उक्त आवेदन को क्यों स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, तो आप अपने साक्ष्यों के साथ अधोहस्ताक्षरी के समक्ष दिनांक .................. को उपस्थित हों, जब उक्त आवेदन पर सुनवाई की जाएगी तथा उस पर निर्णय लिया जाएगा।

संपत्ति का विवरण

आज दिनांक ..................को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 20

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 65 देखें ]

अचल संपत्ति की बिक्री का प्रमाण पत्र

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ........................................................................

यह प्रमाणित किया जाता है कि श्री .............................. को निम्नलिखित अचल संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी द्वारा बिक्री में क्रेता घोषित किया गया है, ................... *जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर प्रमाणपत्र संख्या ....................... दिनांक ....................... [अधोहस्ताक्षरी*/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार], ............................ के निष्पादन में "चूककर्ता" के रूप में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर [चूककर्ता] के रूप में प्रमाणपत्र संख्या ....................... दिनांक ....................... [अधोहस्ताक्षरी*/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार], ............................, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को बकाया राशि की वसूली के लिए भेजी गई थी, के निष्पादन में, और यह कि उक्त बिक्री की अधोहस्ताक्षरी द्वारा विधिवत पुष्टि की गई है और यह ....................... के दिन ....................... को पूर्ण हो गई है।

संपत्ति का विनिर्देशन

मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से आज दिनांक .................. को दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 20

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 65 देखें ]

चूककर्ता को संपत्ति गिरवी रखने, पट्टे पर देने या बेचने के लिए अधिकृत करने वाला प्रमाणपत्र

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ..........................................................................

*जबकि प्रमाणपत्र संख्या .................. दिनांक ................................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार] ................................. के निष्पादन में .................................. [चूककर्ता] से बकाया की वसूली के लिए ........................दिन ........................को †.................. की नीचे उल्लिखित संपत्ति की बिक्री के लिए आदेश दिया गया था;

*जबकि प्रमाणपत्र संख्या ..................दिनांक .................. [कर वसूली अधिकारी द्वारा अधोहस्ताक्षरी को अग्रेषित] ......................... के निष्पादन में , जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा अधोहस्ताक्षरी को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के अंतर्गत बकाया राशि की वसूली के लिए अग्रेषित की गई है, [चूककर्ता] † ............... की नीचे उल्लिखित संपत्ति की बिक्री के लिए .................................................. दिन ........................................................ को एक आदेश दिया गया था;

और अधोहस्ताक्षरी इस बात से संतुष्ट है कि यह मानने का कारण है कि यदि बिक्री स्थगित कर दी जाती है तो उक्त प्रमाणपत्र की राशि उक्त †....................... द्वारा उक्त संपत्ति या उसके किसी भाग की बंधक/पट्टा/निजी बिक्री द्वारा जुटाई जा सकती है और नीचे उल्लिखित संपत्ति की बिक्री .........................दिन तक स्थगित कर दी गई है, जो कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा ........................दिन को पारित आदेश में उल्लिखित शर्तों के अधीन है;

यह प्रमाणित किया जाता है कि उक्त †.................... को इस प्रमाणपत्र की तारीख से .................. की अवधि के भीतर प्रस्तावित बंधक/पट्टा/बिक्री करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है: बशर्ते कि ऐसे बंधक/पट्टा/बिक्री के तहत देय सभी धनराशि उक्त †.................. को नहीं, बल्कि अधोहस्ताक्षरी को भुगतान की जाएगी और यह भी बशर्ते कि ऐसा कोई बंधक/पट्टा/बिक्री तब तक पूर्ण नहीं होगी जब तक कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा इसकी पुष्टि नहीं कर दी जाती।

संपत्ति का विवरण

आज दिनांक ................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

चूककर्ता का नाम भरें, और जहां संपत्ति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है, उस स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट व्यक्ति का नाम भरें।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 22

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 69 देखें ]

व्यवसाय संलग्न करने का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            .........................................................................

सेवा में

*.....................................

.......................................

जबकि आपसे/*.................................................. [चूककर्ता] से बकाया राशि .................................. रुपये की वसूली के लिए प्रमाण पत्र संख्या .................. दिनांक .................. .................. [अधोहस्ताक्षरी*/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार किया गया है], ......................., और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेज दी है ;

इसके द्वारा यह आदेश दिया जाता है कि आपके द्वारा ..................... के नाम और शैली के अंतर्गत ..................... पर चलाया जा रहा कारोबार, जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है ,इसके द्वारा संलग्न किया जाता है और आपको तदनुसार सूचित किया जाता है।

इसके द्वारा यह भी आदेश दिया जाता है कि आप, उपर्युक्त*...................... को किसी भी तरह से उक्त व्यवसाय को हस्तांतरित करने या प्रभारित करने से प्रतिबंधित किया जाता है और सभी व्यक्तियों को ऐसे हस्तांतरण या प्रभार के तहत कोई लाभ लेने से प्रतिबंधित किया जाता है।

आज दिनांक ..................को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

* चूककर्ता का नाम भरें और जहां आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर कारोबार चूककर्ता की संपत्ति में शामिल है, वहां उस स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट व्यक्ति का नाम भरें।

†यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 23

[ आयकर (प्रमाणपत्र कार्यवाही) नियम, 1962 का नियम 26 देखें ]

बॉन्ड (सपुर्दनामा)

श्री .................आयु .................., पुत्र श्री ......................., निवासी ......................... का कथन, मुझे प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 1 [(आयकर नियमों का फॉर्म संख्या 57)] में सूचना प्राप्त हुई है कि प्रमाण पत्र संख्या ....................... दिनांक .................. [अधोहस्ताक्षरी*/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार] ................. के संबंध में मुझ पर ........................ रुपए की बकाया राशि बकाया है, जिसकी प्रमाणित प्रति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा कर वसूली अधिकारी ................. को भेज दी गई है, मैं इसके साथ उक्त बकाया के लिए ................. रुपए की राशि का प्रस्ताव करता हूं। बकाया राशि के ................................. रुपये के साथ-साथ लागत, व्यय और शुल्क के संबंध में, जो कि ................. रुपये है, मैं इसे ....................... रुपये की मासिक किस्तों में भुगतान करने का वचन देता हूं, जो कि प्रत्येक माह के .......................दिन से पहले देय नहीं होगी, जो कि .................. से शुरू होगी। प्रत्येक किस्त के साथ मैं आयकर अधिनियम, 1961 [***] की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज का भुगतान करने का भी वचन देता हूं। मैं किस्तों के भुगतान में कोई चूक नहीं करने का वचन देता हूं। मैं सहमत हूं कि यदि मैं उपरोक्त समय के भीतर किस्तों में से किसी एक का भुगतान करने में कोई चूक करता हूं, तो चूक की तारीख को मुझसे देय पूरी राशि कर वसूली अधिकारी, ..................., द्वारा आवश्यक समझे जाने वाले उपायों द्वारा पूरी तरह से वसूल की जा सकती है। मैं इसमें इस दिन की अपनी संपत्ति निर्दिष्ट करता हूं और मैं सहमत हूं कि जब तक मुझसे देय पूरी राशि कर वसूली अधिकारी, ......................, को पूरी तरह से भुगतान नहीं कर दी जाती है, तब तक मैं इन संपत्तियों को किसी भी तरह से न हीं बेचूंगा, न हीं दूंगा, न हीं हस्तांतरित करूंगा, न हीं गिरवी रखूंगा, न हीं अन्यथा अलग करूंगा या नहीं बांधूंगा। मैं सहमत हूँ कि इस बीच, यदि आवश्यक समझा जाए तो ये संपत्तियाँ कुर्क की जा सकती हैं। मैं दो सॉल्वेंट ज़मानतदार प्रस्तुत करने के लिए भी सहमत हूँ, जो कर वसूली अधिकारी द्वारा अनुमोदित प्रपत्र में ज़मानत बांड निष्पादित करेंगे, जिसके अनुसार मैं उपरोक्त देय राशि का भुगतान किश्तों में करूँगा/करूँगी, जैसा कि यहाँ सहमति हुई है।

आज की तारीख तक परिसंपत्तियों का विवरण

मुझसे पहले

...................... (हस्ताक्षर)
...................... (हस्ताक्षर)
...................... (नाम)
...................... (नाम)
...................... (पद का नाम)
 
दिनांक ................
दिनांक ...............................

(मुहर)

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 24

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 69 या नियम 70 देखें ]

प्राप्तिकर्ता की नियुक्ति

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            .........................................................................

सेवा में

.......................................

जबकि ........................................, *जो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 222 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के आधार पर ................................................. [चूककर्ता] की संपत्ति में शामिल है, आयकर अधिनियम, 1961 की दूसरी अनुसूची के नियम 69/नियम 70 के तहत अधोहस्ताक्षरी द्वारा पारित आदेश के तहत आयकर अधिकारी, ....................... द्वारा कर वसूली अधिकारी, ....................... को भेजे गए प्रमाण पत्र संख्या ................. दिनांक ........................ के निष्पादन के क्रम में कुर्क किया गया है, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी ................. द्वारा अधोहस्ताक्षरी को उक्त अधिनियम की धारा 223(2) के तहत बकाया की वसूली के लिए भेजी गई थी;

आप इसके द्वारा उक्त व्यवसाय/संपत्ति के प्राप्तकर्ता नियुक्त किए गए हैं।

किसी भी आदेश के अधीन जो इस संबंध में अधोहस्ताक्षरित व्यक्ति द्वारा पारित किया जा सकता है, आपके पास उक्त अनुसूची और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उक्त व्यवसाय/संपत्ति के प्रबंधन के लिए आवश्यक सभी शक्तियां होंगी।

आपको आय-कर (प्रमाणपत्र कार्यवाही) नियम, 1962 के भाग VII के अनुसार उक्त व्यवसाय/संपत्ति के संबंध में अपनी प्राप्तियों और संवितरणों का उचित और उचित लेखा प्रस्तुत करना अपेक्षित है।

आप .................. की दर से पारिश्रमिक के हकदार होंगे।

उक्त व्यवसाय/संपत्ति के प्राप्तकर्ता के रूप में आपकी नियुक्ति अधोहस्ताक्षरित व्यक्ति के अगले आदेश तक लागू रहेगी और अधोह्ताक्षरित व्यक्ति के विवेक पर किसी भी समय रद्द या वापस ली जा सकती है।

मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से आज दिनांक ..................को दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 25

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 73 देखें ]

कारण बताओ नोटिस कि गिरफ्तारी वारंट क्यों न जारी किया जाए

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            .........................................................................

सेवा में

...........................................

जबकि आप प्रमाण पत्र संख्या ........................ दिनांक ................. [अधोहस्ताक्षरी/*कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार], ...........................में निर्दिष्ट बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहे हैं, जिसकी प्रमाणित प्रति उक्त कर वसूली अधिकारी द्वारा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत आपसे बकाया राशि और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय ब्याज की वसूली के लिए अधोहस्ताक्षरी को भेजी गई है [***] और आपको गिरफ्तार करके और कारावास देकर उपरोक्त प्रमाण पत्र निष्पादित करने का प्रस्ताव है;

आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप नीचे हस्ताक्षरकर्ता के समक्ष दिनांक .................. को ................. पूर्वाह्न/अपराह्न उपस्थित हों तथा कारण बताएं कि उक्त प्रमाण पत्र के निष्पादन में आपको सिविल जेल में क्यों न भेज दिया जाए।

आज दिनांक ..................को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 26

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का भाग V देखें ]

गिरफ्तारी का वारंट

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ..........................................................................

सेवा में

...............................

जबकि प्रमाणपत्र संख्या ..................दिनांक .................. [अधोहस्ताक्षरी/कर वसूली अधिकारी द्वारा ......................................... [चूककर्ता] से बकाया की वसूली के लिए तैयार किया गया था], [पता] : ........................., और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत उक्त प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को भेजी है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से ................. रुपये की राशि वसूल की जानी है, और नीचे उल्लिखित ................. रुपये की राशि उक्त प्रमाणपत्र के संबंध में उक्त चूककर्ता से देय है:—

 
 
रु.
पैसे
†प्रमाणपत्र राशि/निर्दिष्ट राशि
...
 
 
लागत और शुल्क
...
 
 
इस वारंट के जारी होने की तिथि तक ब्याज
...
 
 
 
कुल
 
 

और जबकि उक्त प्रमाणपत्र की संतुष्टि के लिए उक्त राशि .................. रुपए का का भुगतान नहीं किया गया है;

ये आपको आदेश देते हैं कि आप उक्त चूककर्ता को यथाशीघ्र गिरफ्तार करें और उसे अधोहस्ताक्षरी के समक्ष प्रस्तुत करें, तथा किसी भी स्थिति में उसकी गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर (यात्रा के लिए अपेक्षित समय को छोड़कर) उपस्थित करें, जब तक कि चूककर्ता आपको उक्त राशि .................................. रुपये पर अतिरिक्त ब्याज ................... रुपये [डेढ़ प्रतिशत प्रति माह या किसी माह के भाग की दर से] इस वारंट के जारी होने की तारीख के तुरंत बाद प्रारंभ होने वाली अवधि के लिए और इस प्रक्रिया को निष्पादित करने की लागत के लिए ................................. रुपये का भुगतान न कर दे।

आपको इसके अतिरिक्त आदेश दिया जाता है कि आप वारंट को ..................दिनांक .................. को या उससे पूर्व एक पृष्ठांकन के साथ लौटा दें, जिसमें यह प्रमाणित हो कि इसे किस दिन और किस प्रकार निष्पादित किया गया है या इसका कारण यह हो कि इसे निष्पादित क्यों नहीं किया गया। यदि चूककर्ता अधोहस्ताक्षरी के अधिकार क्षेत्र में नहीं पाया जाता है, तो आपको इस वारंट के निष्पादन हेतु उस कर वसूली अधिकारी के पास जाने के लिए प्राधिकृत किया जाता है जिसके अधिकार क्षेत्र में चूककर्ता उस समय पाया जाता है।

आज दिनांक .................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

कर वसूली अधिकारी

(मुहर)

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

†अनुचित शब्दों को हटाएँ।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 27

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का भाग V देखें ]

सिविल जेल में नजरबंदी का वारंट

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ...........................................................................

सेवा में

सिविल जेल के प्रभारी अधिकारी ..................................................................................................................

*जबकि ...................को उससे बकाया राशि की वसूली के लिए प्रमाण पत्र संख्या .................दिनांक ................................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा तैयार किया गया] के निष्पादन में वारंट के तहत अधोहस्ताक्षरी के समक्ष लाया गया है ;

*जबकि ............... को प्रमाण पत्र संख्या ...............दिनांक .................. [कर वसूली अधिकारी द्वारा अधोहस्ताक्षरी को अग्रेषित] के निष्पादन में वारंट के तहत अधोहस्ताक्षरी के समक्ष लाया गया है , ताकि उससे बकाया राशि की वसूली की जा सके, जिसकी प्रमाणित प्रति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को भेजी गई है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि उससे .................. रुपए की राशि वसूल की जानी है;

और जबकि उसने अधोहस्ताक्षरी को इस बात से संतुष्ट नहीं किया है कि वह हिरासत से मुक्त होने का हकदार है और उसने नीचे दिए गए विवरण के अनुसार उससे देय राशि का भुगतान नहीं किया है: -

 
 
रु.
पैसे
†प्रमाणपत्र राशि/निर्दिष्ट राशि
...
 
 
लागत और शुल्क
...
 
 
ब्याज
...
 
 
 
कुल
 
 

और जबकि अधोहस्ताक्षरी इस बात से संतुष्ट है कि उक्त ................... को सिविल कारागार को सौंप दिया जाना चाहिए और इस आशय का आदेश अधोहस्ताक्षरी द्वारा .................... तारीख को पारित कर दिया गया है;

आपको इसके द्वारा आदेश दिया जाता है और अपेक्षित किया जाता है कि आप उक्त ................... को सिविल कारागार में ले जाएं और उसे वहां ................... की अवधि के लिए कैद रखें या जब तक कि पूर्वोक्त रकम के साथ-साथ रुपये ....................... पर अतिरिक्त ब्याज [डेढ़ प्रतिशत प्रति माह या किसी माह के भाग की दर से] आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 220(2) के तहत देय इस वारंट के जारी होने की तारीख के तुरंत बाद शुरू होने वाली अवधि के लिए आपको भुगतान नहीं किया जाता है या जब तक कि आप नीचे हस्ताक्षरकर्ता से रिहाई का आदेश प्राप्त नहीं करते हैं।

अधोहस्ताक्षरी इसके द्वारा उक्त व्यक्ति के इस वारंट के अधीन कारावास के दौरान निर्वाह भत्ते की दर के रूप में रु. .................पैसे .................. प्रतिदिन (उक्त अधिनियम की द्वितीय अनुसूची के नियम 90(2) के अधीन परिकलित) नियत करता है।

आज दिनांक .................को मेरे हस्ताक्षर और मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

†अनुचित शब्दों को हटाएँ।

प्रपत्र संख्या आईटीसीपी 28

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची के नियम 77, 78 और 79 देखें ]

रिहाई का आदेश

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

.........................................................................

सेवा में

सिविल जेल के प्रभारी अधिकारी ..................................................................................................................................

आज पारित आदेशों के तहत, आपको निर्देश दिया जाता है कि आप ....................................... को तत्काल रिहा करें, जो कि .........................................दिनांक ........................................को नीचे हस्ताक्षरकर्ता द्वारा जारी किए गए हिरासत वारंट के परिणामस्वरूप अब आपकी हिरासत में है।

आज दिनांक .................. को मेरे हस्ताक्षर एवं मुहर से दिया गया।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 29

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 85 देखें ]

कानूनी प्रतिनिधि को नोटिस

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            .........................................................................

सेवा में

.....................................

*जबकि प्रमाणपत्र संख्या ........................दिनांक .................................. [अधोहस्ताक्षरी द्वारा] .................................................................. [चूककर्ता] से ..................................................................रुपये की बकाया राशि की वसूली के लिए तैयार किया गया है।

*जबकि प्रमाणपत्र संख्या .................दिनांक ................................. [कर वसूली अधिकारी, ................................................., द्वारा अधोहस्ताक्षरी को] रुपये ................................................................. [चूककर्ता] से बकाया राशि ................................................. की वसूली के लिए अग्रेषित किया गया है और उक्त कर वसूली अधिकारी ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत 19......उक्त प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति अधोहस्ताक्षरी को दिनांक .......................दिन .......................को भेज दी है, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि चूककर्ता से रुपये .................................की राशि वसूल की जानी है;

और जबकि उक्त ........................ की मृत्यु हो चुकी है।

आपको इसके द्वारा सूचित किया जाता है कि आयकर अधिनियम, 1961 की दूसरी अनुसूची के सभी या किसी भी प्रावधान के अंतर्गत आपसे उक्त राशि, उस अधिनियम की धारा 220(2) के अंतर्गत देय ब्याज सहित वसूलने के लिए कदम उठाए जाएंगे [***] और जारी किए गए वारंटों और अन्य प्रक्रियाओं के संबंध में किए गए खर्च, प्रभार और व्यय तथा बकाया/निर्दिष्ट राशि की वसूली के लिए की गई अन्य सभी कार्यवाहियां, जब तक कि प्रमाण पत्र के संबंध में ................................. रुपए की राशि, लागत, प्रभार और व्यय सहित अब तक ................................. रुपए की राशि और पूर्वोक्त ब्याज का भुगतान आपके द्वारा इस नोटिस की तामील की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर नहीं कर दिया जाता है।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

नोट- आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची के नियम 16 ​​की ओर ध्यान आकृष्ट किया जाता है, जो नीचे पुन: प्रस्तुत है:-

"16."16. (1) जहां नियम 2 के तहत किसी चूककर्ता को नोटिस दिया गया है, वहां चूककर्ता या उसके हित में प्रतिनिधि कर वसूली अधिकारी की अनुमति के बिना उसके स्वामित्व वाली किसी भी संपत्ति को बंधक, भार, पट्टे या अन्यथा सौदा करने के लिए सक्षम नहीं होगा, और न ही कोई सिविल कोर्ट धन के भुगतान के लिए डिक्री के निष्पादन में ऐसी संपत्ति के खिलाफ कोई आदेश जारी करेगा।

(2) जहां इस अनुसूची के अधीन कुर्की की गई है, वहां कुर्क की गई संपत्ति या उसमें किसी हित का कोई निजी अंतरण या परिदान तथा ऐसी कुर्की के प्रतिकूल किसी ऋण, लाभांश या अन्य धनराशि का चूककर्ता को किया गया कोई भुगतान, कुर्की के अधीन प्रवर्तनीय सभी दावों के विरुद्ध शून्य होगा।"

*जो पैराग्राफ लागू न हो उसे काट दें।

†अनुचित शब्दों को हटाएँ।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 29क

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 86(1) [***] देखें ]

[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] से अपील करें

            .......................................

            [मुख्य

             [आयुक्त या आयुक्त का पद]]

संख्या....................की........19.........- 19 ............ 19......... - 19 ............

[ मुख्य आयुक्त या आयुक्त के कार्यालय में भरा जाना है ]

1.
अपीलकर्ता का नाम और पता
................................
2.
जी.आई.आर. संख्या।
................................
3.
प्रमाण पत्र सं.
................................
4.
वह कर निर्धारण वर्ष जिसके संबंध में अपील प्रस्तुत की गई है [ फुटनोट 4 देखें ]
................................
5.
कर वसूली अधिकारी द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील की गई
................................
6.
आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम और उपनियम, जिसके अंतर्गत कर वसूली अधिकारी ने वह आदेश पारित किया जिसके विरुद्ध अपील की गई है
................................
7.
जिस आदेश के विरुद्ध अपील की गई है उसकी तिथि
................................
8.
†अपील में राहत का दावा
................................
9.
वह पता जिस पर अपीलकर्ता को नोटिस भेजा जा सकता है
................................

हस्ताक्षर किए गए

(अपीलकर्ता)

†तथ्यों का विवरण

†अपील के आधार

हस्ताक्षर किए गए

(अपीलकर्ता)

सत्यापन का प्रारूप

मैं, ......................................, अपीलार्थी, एतद्द्वारा घोषणा करता हूँ कि ऊपर जो कुछ कहा गया है वह मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य है।

जगह : ....................
हस्ताक्षर..............
दिनांक:..............
अपीलकर्ता की स्थिति .....................

नोट्सः

1. अपील का प्रारूप, अपील के आधार और उससे संलग्न सत्यापन प्रारूप पर आई.टी.सी.पी. नियमों के नियम 55ए(2) के प्रावधानों के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे ।

2.  अपील का प्रारूप, तथ्यों का विवरण और अपील के आधार दो प्रतियों में होने चाहिए।

3.  यदि तथ्यों और अपील के आधारों के विवरण के लिए यहां उपलब्ध कराया गया स्थान अपर्याप्त है, तो इस प्रयोजन के लिए अलग संलग्नक का उपयोग किया जा सकता है।

4.  यदि अपील धारा 195(1) के अंतर्गत कटौती/भुगतान किए जाने वाले कर की वसूली के लिए प्रमाणपत्र कार्यवाही से संबंधित है तो मद 4 नहीं भरी जाएगी।

प्रपत्र संख्या आई.टी.सी.पी. 30

[ आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची का नियम 88 देखें ]

ज़मानतदार को नोटिस

कर वसूली अधिकारी का कार्यालय,

            ..........................................................................

            दिनांक ................................................................

सेवा में

.............................................

जबकि आप प्रमाण पत्र संख्या ........................दिनांक ........................ [अधोहस्ताक्षरी/कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार] ...................... के संबंध में ........................ से देय रुपये ........................ की बकाया राशि के लिए जमानतदार हैं , जिसकी प्रमाणित प्रति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 223(2) के तहत अधोहस्ताक्षरी को भेज दी गई है; और जबकि आपसे उक्त बकाया राशि वसूल करना आवश्यक हो गया है, इसलिए आपको इसके द्वारा सूचित किया जाता है कि आयकर अधिनियम, 1961 की दूसरी अनुसूची के सभी या किसी भी प्रावधान के अधीन आपसे उक्त राशि उस अधिनियम की धारा 220(2) के अधीन देय ब्याज सहित वसूल करने के लिए कदम उठाए जाएंगे [***] और जारी किए गए वारंटों और अन्य प्रक्रियाओं तथा बकाया राशि वसूलने के लिए की गई अन्य सभी कार्यवाहियों के संबंध में किए गए खर्च, प्रभार और व्यय, जब तक कि प्रमाण पत्र के संबंध में बकाया रकम ..................... रुपये तथा अब तक किए गए खर्च, प्रभार और व्यय सहित ................... रुपये और पूर्वोक्त ब्याज का भुगतान आपके द्वारा इस नोटिस की तामील की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर नहीं कर दिया जाता है।

(मुहर)
कर वसूली अधिकारी

नोट- आयकर अधिनियम, 1961 की द्वितीय अनुसूची के नियम 16 ​​की ओर ध्यान आकृष्ट किया जाता है, जो नीचे पुन: प्रस्तुत है:-

"16."16. (1) जहां नियम 2 के तहत किसी चूककर्ता को नोटिस दिया गया है, वहां चूककर्ता या उसके हित में प्रतिनिधि कर वसूली अधिकारी की अनुमति के बिना उसके स्वामित्व वाली किसी भी संपत्ति को बंधक, भार, पट्टे या अन्यथा सौदा करने के लिए सक्षम नहीं होगा, और न ही कोई सिविल कोर्ट धन के भुगतान के लिए डिक्री के निष्पादन में ऐसी संपत्ति के खिलाफ कोई आदेश जारी करेगा।

(2) जहां इस अनुसूची के अधीन कुर्की की गई है, वहां कुर्क की गई संपत्ति या उसमें किसी हित का कोई निजी अंतरण या परिदान तथा ऐसी कुर्की के प्रतिकूल किसी ऋण, लाभांश या अन्य धनराशि का चूककर्ता को किया गया कोई भुगतान, कुर्की के अधीन प्रवर्तनीय सभी दावों के विरुद्ध शून्य होगा।"

*यदि लागू न हो तो इटैलिक में लिखे गए भाग को काट दें।

  

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