आयकर अपीली अधिकरण को अपील
आयकर आयुक्त (अपीलो) प्रथम अपीलीय अधिकारी है और आयकर आपीलीय अधिकरण (आई टी ए टी) द्वितीय अपीलीय अधिकारी है। आई टी ए टी को अपील या तो किसी करदाता द्वारा पीड़ित पक्ष द्वारा या मूल्यांकन अधिकारी द्वारा दाखिल की जा सकती है। इस भाग में आप आई टी ए टी को अपील से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के प्रति अपील
प्रस्तावना
आयकर आयुक्त (अपील) प्रथम अपीलीय प्राधिकरण है तथा आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) द्वितीय अपीलीय प्राधिकरण है। ITAT के प्रति अपील किसी भी शिकायती पक्ष द्वारा करदाता या आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा फाइल की जा सकती है।
ITAT का गठन केन्द्र सरकार द्वारा किया गया है तथा यह विधि मन्त्रालय के अधीन कार्य करता है। ITAT में दो वर्गों के सदस्य होते हैं – न्यायिक तथा लेखापाल। इस भाग में आप ITAT के प्रति अपील से सम्बन्धित विविध प्रावधानों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
करदाता के द्वारा अपील के मामले में अपील-योग्य आदेश
करदाता ITAT को निम्नलिखित आदेशों के सम्बन्ध में अपील दायर कर सकता है :
• संशोधन आदेश, आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा भाग 154 के तहत पारित ; या
• आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा भाग 250, भाग 271, भाग 271क, धारा 271ककख, धारा 271ककग, धारा 271ककघ, धारा 271ञ या भाग 272क के तहत पारित आदेश; या
• धारा 154, धारा 250, धारा 270क, धारा 271, धारा 271क, धारा 271ककग, धारा 271ककघ या धारा 271ञ के तहत एक संयुक्त आयुक्त (अपील) द्वारा पारित आदेश; या
• प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त द्वारा भाग 12कक या धारा कख के तहत पारित आदेश(यह किसी धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्ट द्वारा किये गये पंजीकरण आवेदन से सम्बन्धित है)।
• प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त द्वारा भाग 80छ(5)(vi) के तहत पारित किया गया आदेश (यह किसी धर्मार्थ ट्रस्ट को दिये गये दान के लिए उस ट्रस्ट के अनुमोदन से सम्बन्धित है जो दानकर्ता के हाथों कटौती हेतु पात्र है)।
• प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त द्वारा भाग 263 के तहत पारित किया गया आदेश (यह किसी आंकलनकर्ता अधिकारी के आदेश के पुनरीक्षण से सम्बन्धित है, जो कि राजस्व के हित के लिए पूर्वाग्रहयुक्त माना गया है)।
• प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त द्वारा भाग 263 के तहत पारित आदेश के संशोधन के लिए, भाग 154 के तहत पारित आदेश।
• प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त द्वारा भाग 271 के तहत या भाग 272क के तहत पारित एक जुर्माने संबंधित आदेश।
• धारा 263 के तहत प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान निदेशक या आयकर निदेशक द्वारा पारित एक आदेश (यह निर्धारण अधिकारी के आदेश के संशोधन से संबंधित है जिसे राजस्व का ब्याज के प्रतिकूल माना जाता है) ।
• आदेश में सुधार के लिए धारा 154 के तहत प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान निदेशक या आयकर निदेशक द्वारा पारित आदेश।
• प्रधान आयकर आयुक्त अथवा एक मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक अथवा एक महानिदेशक या प्रधान निदेशक अथवा एक निदेशक द्वारा भाग 272क के तहत पारित जुर्माने संबंधित का आदेश।
• आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा भाग 115फयग (1) के तहत पारित आदेश(अर्थात्, करदाता को टनिज कर योजना (Tonnage Tax Scheme) से अपवर्जित करने का आदेश)।
• आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा भाग 143(3) के तहत या भाग 147 के तहत या भाग 153क के तहत या भाग 153ग के तहत पारित आदेश, जो कि विवाद निपटारा पैनल के निर्देशों के अनुसरण में हो अथवा ऐसे किसी आदेश के सम्बन्ध में भाग 154 के तहत पारित एक संशोधन आदेश।
• आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा भाग 143(3) के तहत या भाग 147 के तहत या भाग 153क के तहत या भाग 153ग के तहत प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त की अनुमति से, जैसा कि भाग 144खक(12) में सन्दर्भित है, पारित आदेश (अर्थात्, सामान्य अवॉइडैन्स विरोधी कानून लगाने के बाद आंकलन) अथवा भाग 154 के तहत या भाग 155 के तहत ऐसे आदेश के सम्बन्ध में पारित आदेश। (01-04-2016 से लागू)
• धारा 10(23ग)(vi) अथवा धारा 10(23ग)(viक) के अंतर्गत आयकर आयुक्त (छूट) द्वारा पारित आदेश [यह क्रमश: धारा 10(23ग)(vi) अथवा धारा 10(23ग)(viक) के अंतर्गत छूट के अनुमोदन के उद्देश्य के लिए शैक्षणिक संस्थान अथवा अस्पताल (उसको छोड़कर जो पूर्णता अथवा आंशिक रुप से सरकार द्वारा वित्त पोषित है अथवा जिनकी कुल वार्षिक प्राप्ति रु. 1 करोड़ से अधिक नहीं होती) द्वारा आवेदन को दाखिल करने से संबंधित है]
आयुक्त के द्वारा अपील के मामले में अपील योग्यआदेश
आदेश यदि प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त, संयुक्त आयकर आयुक्त (अपील) या आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा पारित किये गये आदेश पर भाग 154 या भाग 250 के तहत आपत्ति दर्ज करवाता है, तब वह आंकलनकर्ता अधिकारी को ITAT के प्रति, आयकर आयुक्त (अपील) के आदेश के विरुद्ध अपील करने का निर्देश दे सकता है। इसे विभागीय अपील कहा जाता है, अर्थात्, आयकर विभाग संयुक्त आयकर आयुक्त (अपील) या आयकर आयुक्त (अपील) के आदेश के विरुद्ध ITAT जाना।
विभागीय अपील पर कार्यवाही की अनुमति तभी है, जबकि अपील में सूचीबद्ध कर प्रभाव रु. 50,00,000 से अधिक हो। दूसरे शब्दों में, आयकर आयकर आयुक्त आंकलनकर्ता अधिकारी को ITAT को आयकर आयुक्त (अपील) के आदेश के विरुद्ध अपील करने का निर्देश केवल उन्हीं मामलों में जिनमें कर प्रभाव रु. 50,00,000 से अधिक हो, दे सकता है। [निर्देश सं. 17/2019 दिनांक 08.08.2019 को संदर्भित करें]
प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त, विवाद निपटारा पैनल के निर्देश के अनुसरण में पारित के गये आदेश के विरुद्ध ITAT में अपील करने के लिए, आंकलनकर्ता अधिकारी को निर्देश भी दे सकता है।
कुछ मामलों में विभाग के द्वारा अपील पारित न किया जाना
आयकर आयुक्त आंकलनकर्ता अधिकारी को, आयकर आयुक्त (अपीलें) के विरुद्ध, ITAT के प्रति उन मामलों में अपील दायर करने के लिए निर्देशित नहीं कर सकता, जबकि कर प्रभाव रु. 60,00,000 से अधिक न हो [परिपत्र सं. 9/2024, दिनांक 17.09.2024]
"कर प्रभाव" से आशय है, कुल आय पर आकलित कर तथा वह कर जो कि आरोपित किया जाता यदि कुल आय उस राशि से घटा दी गयी होती, जो उन मुद्दों के सम्बन्ध में है जिनके विरुद्ध अपील दायर की गयी है (इसके बाद "विवादित मुद्दे" के रूप में अभिहित)। यद्यपि, कर में उसपर लगा कोई ब्याज शामिल नहीं होगा, उन मामलों को छोड़कर जिनमें ब्याज की आरोपणीयता ही विवाद का विषय है। उस मामले में जबकि ब्याज की आरोपणीयता ही विवाद का विषय है, ब्याज की राशि कर-प्रभाव होगी। ऐसे मामले जिनमें वापस की गयी हानि घटायी जाती है या आय के रूप में आकलित की जाती है, तब कर-प्रभाव में विवादित योगों पर धारणात्मक कर शामिल होगा। पैनल्टी आदेशों के मामले में, कर-प्रभाव से आशय होगा पैनल्टी का वह परिमाण जो कि मिटाया या घटाया जाना है ताकि उसके विरुद्ध अपील की जा सके।
आंकलनकर्ता अधिकारी प्रत्येक आंकलन वर्ष के लिए पृथक् रूप से प्रत्येक करदाता के लिए विवादित मुद्दों के सम्बन्ध में कर-प्रभाव की गणना करेगा। यदि किसी करदाता के मामले में विवादित मुद्दे एक से ज्यादा आंकलन वर्ष में उत्पन्न हों, ऐसे आंकलन वर्ष के मामले में अपील दायर की जा सकती है जिनमें कि विवादित मुद्दों के सम्बन्ध में कर प्रभाव ऊपर निर्दिष्ट की गयी मौद्रिक सीमा से अधिक हो। विभाग के द्वारा ऐसे आंकलन वर्ष या वर्षों के सम्बन्ध में कोई अपील दायर नहीं की जायेगी जिनमें कर प्रभाव ऊपर निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम है।
दूसरे शब्दों में, यहाँ से आगे, अपीलें केवल आयकर आयुक्त द्वारा, सम्बन्धित आंकलन वर्ष में कर प्रभाव के सम्बन्ध में ही दायर की जा सकेंगी। यद्यपि किसी उच्च न्यायालय या अपीलीय प्राधिकरण के मिश्रित आदेश के मामले में जिसमें एक से ज्यादा आंकलन वर्ष शामिल हों तथा एक से ज्यादा आंकलन वर्षों के सामान्य मुद्दे शामिल हों, अपीलें ऐसे सारे आंकलन वर्षों के सापेक्ष दायर की जायेंगी भले ही किसी भी वर्ष में "कर प्रभाव" निर्धारित मौद्रिक सीमा से कम हो, यदि यह निर्णय हुआ हो कि उन वर्षों के सम्बन्ध में अपील दायर की जानी है जिनमें 'कर प्रभाव' निर्धारित मौद्रिक सीमा से अधिक है।
ऐसे मामले में जहाँ मिश्रित आदेश/निर्णय में एक से ज्यादा करदाता शामिल हों, प्रत्येक करदाता को अलग से व्यावहारित किया जायेगा।
निम्नलिखित मुद्दों से सम्बन्धित प्रतिकूल निर्णयों का गुणवत्ता के आधार पर विरोध किया जाना चाहिये, इस बात के बावजूद कि होने वाले कर प्रभाव ऊपर निर्दिष्ट मौद्रिक सीमा से कम हों या कोई कर प्रभाव है ही नहीं।
क) जब कि अधिनियम या नियम के प्रावधानों की सांविधानिक मान्यता पर चुनौती हो, या
ख) जबकि बोर्ड का आदेश, अध्यादेश, निर्देश या परिपत्र अवैध या शक्तियों से बाहर ठहराया गया है।
ग) जबकि राजस्व अंकेक्षण की आपत्ति, उस मामले में, विभाग द्वारा स्वीकार की गयी है।
घ) रिट मामले
ड़) मामले जो कि अन्य प्रत्यक्ष करों से सम्बद्ध हों, अर्थात्, आयकर से इतर
च) जबकि कर प्रभाव परिमाणीकरणीय न हो या शामिल नहीं हो, जैसे ट्रस्ट या संस्था के भाग 12क के तहत पंजीकरण का मामला;
अपील प्रस्तुत करने की समय-सीमा
ITAT को अपील उस दिनांक से जिसमें वह आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की जानी है, 60 दिन की अवधि के भीतर दायर की जानी होती है।
• करदाता अथवा प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त (जो भी स्थिति हो) को सूचित
• भाग 144ग (5) के तहत विवाद निपटारा पैनल के निर्देशों के अनुसरण में पारित किया गया हो,
ITAT 60 दिनों की अवधि के बाद भी अपील को स्वीकार कर सकता है यदि वह सन्तुष्ट हो कि निर्धारित समय के भीतर अपील प्रस्तुत न करने का पर्याप्त कारण था।
फॉर्म तथा हस्ताक्षर
ITAT को अपील फॉर्म क्रमांक 36 में पारित की जायेगी। करदाता द्वारा अपील के मामले में, अपील का फॉर्म, अपील का आधार, तथा सत्यापन का फॉर्म, ऐसे व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित व सत्यापित किया जाना है जो कि भाग 140 के तहत आयकर रिटर्न को हस्ताक्षरित करने के लिए प्राधिकृत है। दूसरे शब्दों में, अपील का फॉर्म निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाना है :
(1) व्यक्तिगत करदाता द्वारा अपील के मामले में, स्वयं करदाता के द्वारा या, उसके द्वारा विधिवत् प्राधिकृत ऐसे व्यक्ति के द्वारा जो कि वैध पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी रखता है।
(2) हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में परिवार के कर्ता के द्वारा अथवा यदि कर्ता भारत में अनुपस्थित है या हस्ताक्षर करने में समर्थ नहीं है तो, ऐसे परिवार के किसी अन्य वयस्क सदस्य द्वारा।
(3) कम्पनी के मामले में प्रबन्ध निदेशक द्वारा या यदि प्रबन्ध निदेशक उपलब्ध नहीं है या जहाँ प्रबन्ध निदेशक नहीं है, कम्पनी के किसी भी निदेशक के द्वारा।
(4) फर्म के मामले में, प्रबन्ध साझेदार के द्वारा अथवा यदि प्रबन्ध साझेदार उपलब्ध नहीं है या कोई प्रबन्ध साझेदार नहीं है, तब किसी भी साझेदार के द्वारा (जो अल्पवयस्क न हो)
(5) LLP के मामले में, निर्दिष्ट साझेदार द्वारा या यदि निर्दिष्ट साझेदार उपलब्ध नहीं है या जहाँ कोई निर्दिष्ट साझेदार नहीं है किसी भी साझेदार द्वारा।
(6) स्थानीय प्राधिकरण के मामले में उसके प्रधान अधिकारी के द्वारा
(7) राजनीतिक दल के मामले में, ऐसे दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के द्वारा
(8) किसी अन्य संगठन के मामले में उसके प्रधान अधिकारी के द्वारा या संगठन के किसी अन्य सदस्य के द्वारा।
(9) किसी अन्य व्यक्ति के मामले में उस व्यक्ति के द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी अन्य व्यक्ति द्वारा
प्रतिकूल-आपत्ति का ज्ञापन
करदाता द्वारा या आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा (जैसा भी मामला हो ) ITAT के प्रति अपील दायर करने पर विपक्षी पक्ष को अपील के बारे में सूचना दी जायेगी तथा विपक्षी पक्ष को ITAT को एक प्रतिकूल आपत्ति का ज्ञापन दायर कना होगा।
क्रॉस आपत्ति का ज्ञापन नोटिस मिलने के 30 दिन के अन्दर दायर करना होगा। क्रॉस आपत्ति का ज्ञापन फॉर्म 36A में दायर किया जाना है। प्रतिकूल आपत्ति का ज्ञापन दायर करने का कोई शुल्क नहीं है। ITAT 30 दिन की अवधि के बाद भी प्रतिकूल आपत्ति का ज्ञापन स्वीकार कर सकती है, यदि उसे सन्तुष्टि हो कि निर्धारित समय के भीतर उसे दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
वह व्यक्ति जो फॉर्म 36 (अर्थात्, अपील का फॉर्म) को हस्ताक्षरित करने के लिए सक्षम है उसे प्रतिकूल आपत्ति के ज्ञापन को हस्ताक्षरित तथा सत्यापित करना है। ITAT प्रतिकूल आपत्ति के ज्ञापन का निपटारा फॉर्म 36 में अपील के तौर पर करेगा।
अपील के साथ जमा किये जाने वाले दस्तावेज
• फॉर्म क्रमांक 36 - तीन प्रतियों में।
• आदेश जिसके विरुद्ध अपील है – 2 प्रतियाँ (एक प्रमाणित प्रति को शामिल करके)।
• आंकलनकर्ता अधिकारी का आदेश- 2 प्रतियाँ
• पहले अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील के आधार (अर्थात्, आयकर आयुक्त (अपील) )- 2 प्रतियाँ।
• पेनल्टी आदेश के विरुद्ध अपील के मामले में – सम्बन्धित आंकलन आदेश की 2 प्रतियोँ।
• भाग 144क-2 के साथ पढ़े गये, भाग 143(3) के तहत अपील के मामले में , - भाग 144क के तहत संयुक्त आयुक्त द्वारा दिये गये निर्देशों की 2 प्रतियाँ।
• भाग 147 के साथ पढ़े गये, भाग 143 के तहत दिये गये आदेश के विरुद्ध अपील के मामले में, - मूल आंकलन आदेश, यदि कोई हो, की 2 प्रतियाँ
• शुल्क के भुगतान के लिए चालान की प्रतिलिपि।
1-10-1998 को या उसके बाद ITAT को अपील के मामले में (आंकलन कार्यवाही के शुरू होने की तारीख से असम्बन्धित) , निम्नलिखित शुल्क भुगतान योग्य है :
अपील दायर करने के लिए शुल्क
| जबकि आंकलित आय (*) है : | |
| रु. 1,00,000 तक | रु. 500 |
| रु. 1,00,000 से अधिक, परन्तु रु. 2,00,000 तक | रु. 1,500 |
| रु. 2,00,000 से अधिक | आंकलित आय का 1% ($) |
(*)आंकलित आय का अर्थ है, आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा परिकलित कुल आय।
($) रु. 10,000 की अधिकतम सीमा के अनुसार
अन्य मामलों में अपील दाखिल करने का शुल्क
| जहाँ आवेदन भाग 254(2) के तहत हो | रु. 50 |
| जहाँ अपील की विषय-वस्तु किसी अन्य मामले से सम्बद्ध हो | रु. 500 |
| जहाँ आवेदन माँग के स्थगन के लिए हो | रु. 500 |
| जहाँ अपील भाग 253(2) के तहत दायर की गयी हो या भाग 253(4) में सन्दर्भित प्रतिकूल आपत्ति का ज्ञापन | शून्य |
कागज-पुस्तक को जमा करना
अपीलकर्ता या उत्तरदाता, अर्थात्, विपक्षी एक कागज-पुस्तक को जमा कर सकता है। कागज पुस्तक को दो प्रतियों में जमा किया जाना है तथा उसमें शामिल होने चाहिये- दस्तावेज, ब्यौरे, या अन्य कागज जो कि आंकलन आदेश में सन्दर्भित हों या अपीलीय आदेश जिसपर कि अपीलकर्ता/उत्तरदाता आश्रित रहना चाहता है।
कागज-पुस्तक विधिवत् सूचीयुक्त तथा पृष्ठक्रमांकित होनी चाहिये। यह अपील की सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले दायर की जानी चाहिये। यह विपक्षी पक्ष को कम से कम एक सप्ताह पहले कागज-पुस्तक के प्रस्तुत किये जाने के प्रमाण के साथ दायर की जानी चाहिये। कागज-पुस्तक का प्रत्येक कागज, उसे दायर करने वाले पक्ष के द्वारा सत्य प्रतिलिपि के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिये।
कागज-पुस्तक के भरने में होने वाले विलम्ब को विलम्ब के सही मामलों में क्षमा किया जा सकता है।
ITAT स्वयं भी कागज-पुस्तक को तीन प्रतियों में तैयार करने के लिए निर्देश दे सकती है, जो कि अपीलकर्ता या उत्तरदाता के खर्चे पर हो सकता है, जैसा भी वह अपील के निपटारे के लिए जरूरी समझे।
अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, पृथक् रूप से दायर किया जाना चाहिये, तथा कागज-पुस्तक का भाग नहीं होना चाहिये।
ITAT द्वारा अपील की सुनवाई
ITAT अपील की सुनवाई का दिनांक, सुनवाई के स्थान के साथ, तय करेगा तथा पक्षों को सूचित भी करेगा।
अपील के ज्ञापन की एक प्रतिलिपि उत्तरदाता को ऐसी सूचना के पहले या साथ में ही भेजी जानी है। ITAT निर्धारित दिनांक को अपील सुनेगी। अपील को अन्य दिनांकों के लिए स्थगित किया जा सकता है और ऐसे मामले में अपील तत्संगत दिनांकों को सुनी जायेगी।
यदि अपीलकर्ता को ITAT द्वारा बुलाया जाता है, परन्तु वह ITAT के समक्ष व्यक्तिगत रूप से या किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने में असफल रहता है, तब अपील ITAT द्वारा उत्तरदाता को सुनने के बाद गुणवत्ता के आधार पर निपटायी जा सकती है।
एक पक्ष की सुनवाई के बाद, यदि अपीलकर्ता ITAT के समक्ष उपस्थित होता है तथा ITAT के सन्तुष्ट कर देता है कि उसके उपस्थित न होने का पर्याप्त कारण था, तब एक पक्षीय आदेश को निरस्त करें तथा अपील को पुन:स्थापित करें। जब अपील उत्तरदाता की अनुपस्थिति में निपटायी जाती है तब भी समान प्रक्रिया लागू होती है।
अतिरिक्त साक्ष्य को दायर करना
अपील के पक्षों के द्वारा ITAT के समक्ष अतिरिक्त साक्ष्यों के दायर किये जाने की अनुमति नहीं है। दूसरे शब्दों में, अतिरिक्त साक्ष्य जो किसी भी प्रकार का हो, या मौखिक या दस्तावेजी, ITAT के समक्ष दायर नहीं किया जा सकता। यद्यपि, यदि न्यायाधिकरण को किसी दस्तावेज के प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता होती है, या किसी गवाह के परीक्षण अथवा आदेश पारित करने में समर्थ होने के लिए किसी शपथ-पत्र के भरे जाने की आवश्यकता होती है, तब वह ऐसे दस्तावेज के प्रस्तुतीकरण की, गवाह के परीक्षण की, शपथ-पत्र के दायर किये जाने की तथा ऐसे साक्ष्य के रखे जाने की अनुमति दे सकता है।
ITAT का आदेश
ITAT की बेंच का सदस्य अपील सुनता है। अपील सुनने के बाद ITAT अपना आदेश सुनायेगा तथा अपने आदेश को करदाता तथा आंकलनकर्ता अधिकारी को सम्प्रेषित करेगा।
अपीलें, एक बेंच द्वारा सुनी जाती हैं जिसमें एक न्यायिक सदस्य तथा एक लेखापाल सदस्य होता है। अपीलें जिनमें कि आंकलनकर्ता अधिकारी द्वारा परिकलित कुल आय रु. 15 लाख से अधिक न हो। जो एकल सदस्य पीठ द्वारा निपटान की जा सकती है
यदि बेंच के अधिकारी किसी भी बिन्दु पर भिन्न मत रखते हैं, निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है। यदि सदस्य अपने-अपने मत में बराबर-बराबर बँटे हुए हैं, तब मतभेद के बिन्दु प्रत्येक सदस्य द्वारा कथन किये जाते हैं तथा मामले को ITAT के अध्यक्ष के विचारार्थ भेजा जाता है जो कि ऐसे बिन्दुओं की ITAT के एक या अधिक सदस्यों के द्वारा सुनवाई करता है। ऐसा बिन्दु या बिन्दु ITAT के सदस्यों के बहुमत के मत के अनुसार निर्णीत किये जाते हैं, जो कि मामले की सुनवाई कर रहे हों, जिसमें वे भी शामिल हैं जिन्होंने पहले इसकी सुनवाई की।
सामान्यत, बेंच अपने आदेश अदालत में घोषित करती है। यद्यपि, जहाँ आदेश अदालत में घोषित नहीं किये जाते, वहाँ ऐसे आदेशों की सूची, अपील के परिणाम को प्रदर्शित करते हुए तथा सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ, बेंच के सूचना पटल पर लगा दी जाती है।
अपील का निपटारा
जहाँ ऐसा सम्भव हो, ITAT, उस वित्तीय वर्ष के अन्त से जिसमें कि अपील दायर की गयी है, चार वर्ष की अवधि के भीतर अपील का निपटारा करेगी।
स्थगन आवेदन
ITAT, करदाता द्वारा आवेदन किये जाने पर तथा आवेदन की गुणवत्ता पर विचार करने के बाद, एक स्थगन आदेश पारित कर सकती है, जो कि अपील के सम्बन्ध में भाग 253(1) से सम्बन्धित किसी भी कार्यवाही से सम्बन्धित हो। स्थगनादेश, उस आदेश के दिनांक से, 180 दिन से अनधिक अवधि के लिए कार्यशील होगा ITAT उस आदेश में निर्दिष्ट स्थगन की उक्त अवधि के भीतर अपील का निपटारा करेगा।
यदि ऐसी अपील स्थगनादेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर निपटायी नहीं जाती है, तब करदाता द्वारा इस हेतु आवेदन किये जाने पर, ITAT स्थगन अवधि को बढ़ा सकता है, जबकि वह सन्तुष्ट हो कि उक्त अपील के निपटारे में विलम्ब के लिए करदाता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। स्थगन अवधि का विस्तार आगे की अवधि या अवधियों के लिए भी हो सकता है, जैसा कि ITAT उचित समझे, परन्तु मूल रूप से अनुमति-प्राप्त अवधि तथा इस प्रकार विस्तारित या अनुमति-प्राप्त अवधि या अवधियों का कुल योग, किसी भी मामले में, 365 दिनों से अधिक नहीं होगा तथा अपीलीय न्यायाधिकरण, उक्त अपील को इस प्रकार विस्तारित या अनुमति-प्राप्त स्थगन की अवधि के भीतर निपटायेगा।
यदि अपील अनुमति-प्राप्त अवधि के भीतर, या विस्तारित अवधि या अवधियों के भीतर निपटायी नहीं जाती है, जो किसी भी मामले में 365 दिनों से ज्यादा नहीं होगी, तब ऐसी अवधि या अवधियों के अवसान के बाद स्थगनादेश रिक्त हुआ माना जायेगा, भले ही यदि अपील के निपटारे में हुआ विलम्ब के लिए करदाता को जिम्मेदार न ठहराया जा सकता हो।
यदि अपील का निपटारा स्वीकृत अवधि के भीतर या विस्तारित अवधि या अवधि के भीतर नहीं किया जाता है, जो किसी भी स्थिति में 365 दिनों से अधिक नहीं होगा, तो ऐसी अवधि या अवधि की समाप्ति के बाद रोक का आदेश रद्द हो जाएगा, भले ही इसमें देरी हो। अपील का निपटान करदाता पर निर्भर नहीं है।
अपीलीय आदेश का परिशोधन
आईटीएटी, जिस महीने में आदेश पारित किया गया था, उसके अंत से 6 महीने के भीतर किसी भी समय, रिकॉर्ड से स्पष्ट किसी भी गलती को सुधार सकता है, यदि करदाता या मूल्यांकन अधिकारी द्वारा गलती को उसके ध्यान में लाया जाता है, तो उसके द्वारा पारित किसी भी आदेश में संशोधन किया जा सकता है। हालाँकि, जहां इस तरह के संशोधन का प्रभाव मूल्यांकन को बढ़ाने या रिफंड को कम करने या अन्यथा करदाता की देनदारी को बढ़ाने पर होता है, इसे तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलीय न्यायाधिकरण ने ऐसा करने के अपने इरादे के बारे में करदाता को नोटिस नहीं दिया हो और इसकी अनुमति नहीं दी हो। करदाता को एक उचित अवसर.
आईटीएटी के समक्ष फेसलेस कार्यवाही
अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा अपीलों के निपटान के उद्देश्य से अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रदान करने के लिए, केंद्र सरकार एक योजना बना सकती है:
क) तकनीकी रूप से व्यवहार्य सीमा तक अपीलीय कार्यवाही के दौरान अपीलीय न्यायाधिकरण और अपील के पक्षों के बीच इंटरफेस को समाप्त करना;
ख) पैमाने की अर्थव्यवस्था और कार्यात्मक विशेषज्ञता के माध्यम से संसाधनों के उपयोग को अनुकूलित करना;
ग) गतिशील क्षेत्राधिकार के साथ एक अपीलीय प्रणाली का परिचय।
केंद्र सरकार, योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी कर यह निर्देश दे सकती है कि इस अधिनियम का कोई भी प्रावधान लागू नहीं होगा या ऐसे अपवादों, संशोधनों और अनुकूलन के साथ लागू होगा जैसा कि अधिसूचना में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
प्रत्येक अधिसूचना, अधिसूचना जारी होने के बाद जितनी जल्दी हो सके, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
आयकर अपीलीयन्यायाधिकरण को अपील पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. आयकर आयुक्त अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) दूसरी अपीलीय प्राधिकारी है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर आयुक्त अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) दूसरी अपीलीय प्राधिकारी है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 2. आईटीएटी हेतु अपील आंकलन अधिकारी द्वारा नहीं भरी जा सकती
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आईटीएटी को अपील चाहे आंकलन अधिकारी द्वारा अथवा करदाता द्वारा किसी भी असंतुष्ट पार्टी द्वारा दाखिल की जा सकती है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 3. धारा 154 के अंतर्गत आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा पारित आदेश का संशोधन अंतिम आदेश है तथा करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के ऐसे आदेश के विरूद्ध आईटीएटी को अपील दाखिल नही कर सकता
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
एक करदाता कुछ निर्दिष्ट आदेशों के संबंध में आईटीएटी को अपील दाखिल कर सकता है। उसमें से एक धारा 154 के अंतर्गत आयकर आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा पारित संशोधन आदेश है। अन्य शब्दों में एक करदाता धारा 154 के अंतर्गत आयकर आयुक्त (अपील) द्वार पारित संशोधन आदेश के विरूद्ध आईटीएटी को अपील दाखिल कर सकता है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 4. विभागीय अपील का अर्थ है
(क) आईटीएटी को सीआईटी (अपील) के आदेश के विरूद्ध करदाता द्वारा दाखिल अपील
(ख) आईटीएटी को धारा 154 अथवा 250 के अंतर्गत पारित सीआईटी (अपील) या जेसीआईटी (अपील) के आदेश के विस्द्ध आयकर विभाग द्वारा दाखिल अपील
(ग) उच्च न्यायालय को आईटीएटी के आदेश के विरूद्ध करदाता द्वारा दाखिल अपील
(घ) उच्चतम न्यायालय को आईटीएटी के आदेश के विरूद्ध करदाता द्वारा दाखिल अपील
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
यदि आयकर आयुक्त धारा 154 अथवा धारा 250 के अंतर्गत आयकर आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयकर आयुक्त (अपील) द्वारा पारित आदेश पर विरोध जताता है तो वह आयकर आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयुक्त (अपील) के आदेश के खिलाफ आईटीएटी को अपील करने के लिए आंकलन अधिकारी को निर्देश दे सकता है। इसे विभागीय अपील कहते है अर्थात् आयकर विभाग आयकर आयुक्त (अपील)/या संयुक्त आयुक्त (अपील) के आदेश के विरूद्ध आईटीएटी में जा सकता है।
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 5. विभागीय अपील केवल उन मामलों में बढ़ाई जाती है जहां अपील में शामिल कर प्रभाव ................. से अधिक हो
(क) रू. 1,00,000 (ख) रू. 2,00,000
(ग) रू. 10,00,000 (घ) रू. 60,00,000
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
विभागीय अपील केवल उन मामलों में बढ़ाई जाती है जहां अपील में शामिल कर चालान रू. 60,00,000 से अधिक हो। अन्य शब्दों में आयकर आयुक्त केवल उन मामलों में जहां कर प्रभाव रू. 60,00,000 से अधिक हो, में आयकर आयुक्त (अपील) के आदेश के विरूद्ध आईटीएटी का अपील दाखिल कर सकते हैं
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 6. आईटीएटी हेतु अपील तिथि जिस पर विरूद्ध अपील को मांगे जाने हेतु आदेश करदाता अथवा आयकर आयुक्त (जैसी भी स्थिति हो) को सूचित की जाती है से 60 दिनों की अवधि के भीतर दाखिल की जानी चाहिए
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
• आईटीएटी हेतु अपील तिथि जिस पर विरूद्ध अपील को मांगे जाने हेतु आदेश करदाता अथवा प्रधान आयकर आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त (जैसी भी स्थिति हो) को सूचित की जाती है से 60 दिनों की अवधि के भीतर दाखिल की जानी चाहिए
• आईटीएटी हेतु अपील तिथि जिस पर विरूद्ध अपील को मांगे जाने हेतु आदेश धारा 144ग(5) के अंतर्गत आपराधिक विवाद पैनल के निर्देशों के अनुसार आंकलन अधिकारी द्वारा पारित किया जाता है।
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 7. आईटीएटी को अपील प्रपत्र सं..............में दाखिल की जाएगी
(क) 28 (ख) 35
(ग) 36 (घ) 34ड
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता:
आईटीएटी को अपील प्रपत्र सं. 36 में दाखिल की जाएगी
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 8. करदाता अथवा आंकलन आधिकारी (जो भी स्थिति हो) द्वारा आईटीएटी को अपील दाखिल करने पर विरोधी पक्ष को अपील के बारे में सूचित किया जाएगा तथा विरोधी पक्ष को आईटीएटी के साथ प्रतिकूल आपत्ति का ज्ञापन दाखिल किया जाना है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
करदाता अथवा आंकलन आधिकारी (जो भी स्थिति हो) द्वारा आईटीएटी को अपील दाखिल करने पर विरोधी पक्ष को अपील के बारे में सूचित किया जाएगा तथा विरोधी पक्ष को आईटीएटी के साथ प्रतिकूल आपत्ति का ज्ञापन दाखिल किया जाना है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 9. जहां आंकलन आय रू. 2,00,000 से अधिक है वहां आईटीएटी को अपील दाखिल करने का शुल्क............. है
(क) रू. 500 (ख) रू. 1,000
(ग) रू. 1,500 (घ) अधिकतम रू. 10,000 के अनुसार आंकलन आय का 1 प्रतिशत
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
जहां आंकलन आय रू. 2,00,000 से अधिक है वहां आईटीएटी को अपील दाखिल करने का शुल्क अधिकतम रू. 10,000 के अनुसार आंकलन आय का 1 प्रतिशत है
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
प्रश्न 10. आईटीएटी वित्त वर्ष, जिसमें अपील की गई है, की समाप्ति से चार वर्ष की अवधि के भीतर अपील को निरस्त करेंगे
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आईटीएटी वित्त वर्ष जिसमें अपील की गई है की समाप्ति से चार वर्ष की अवधि के भीतर अपील को निरस्त करेंगे
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

