9/2008 : परिपत्र: सं 9/2008, 29-09-2008 दिनांकित
परिपत्र सं.
9/2008
परिपत्र की तिथि
29/09/2008
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
29/09/2008
सर्कुलर
आयकर अधिनियम
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 192 -- स्रोत पर कर की कटौती -- वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान वेतन से आय कर की कटौती
सर्कुलर संख्या 9/2008, दिनांक 29-9-2008
कृपया ध्यान दें, कि वितीय वर्ष 2007-08 के दौरान आयकर अधिनियम 1961 की धारा 192 के अन्तर्गत वेतन के मद से किये गए आय के भुगतान में से आयकर की कटौती का दर सर्कुलर संख्या 08/2007, दिनांक 5-12-2007 द्वारा सूचित किया गया। वर्तमान सर्कुलर में वितीय वर्ष 2007-08 के दौरान वेतन के मद से भुगतान किये जाने वाले आय पर होने वाले आयकर की कटौती की दरें निहित है तथा आयकर अधिनियम के सम्बंधित प्रावधानों की व्याख्या करता है। सम्बंधित अधिनियम, नियम, आवेदन पत्र तथा अधिसूचनाएं आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov .in पर उपलब्ध है।
वित्त अधिनियम, 2008
2. 2008 के वित्त अधिनियम के अनुसार आयकर विभाग को 1961 की आयकर अधिनियम की धारा 192 की अन्तर्गत वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान (i.e. यानी आंकलन वर्ष 2009-10)) में निम्नलिखित दरों से वेतन मद के अन्तर्गत प्राप्त आय में से आयकर की कटौती करनी होगी :
आयकर की दरें
| क. | कर की सामान्य दरें : | ||
| 1. | जब कुल आय 1,50,000/- रुपये से अधिक ना हो। | नहीं के बराबर | |
| 2. | जब कुल आय 1,50,000/- रुपये से अधिक तथा 3,00,000/- रुपये से कम हो। | 1,50,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर 10% की कटौती । | |
| 3 | जब कुल आय 3,00,000/- रुपये से अधिक तथा 5,00,000/- रुपये से कम हो। | 3,00,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर15,000/- रुपये तथा 20% की कटौती | |
| 4 | जब कुल आय 5,00,000/- रुपये से अधिक हो। | 5,00,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर 55,000/- रुपये तथा 30% की कटौती |
ख. जो महिला भारत में प्रवास कर रही हो तथा जिनकी आयु 65 वर्ष से कम हो, उनके लिए वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय कर की दरें :
| 1 | जब कुल आय 1,80,000/- रुपये से अधिक ना हो। | नहीं के बराबर | |
| 2 | जब कुल आय 1,80,000/- रुपये से अधिक तथा 3,00,000/- रुपये से कम हो. | 1,80,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर 10% की कटौती | |
| 3 | जब कुल आय 3,00,000/- रुपये से अधिक तथा 5,00,000/- रुपये से कम हो. | 3,00,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर 12,000/- रुपये तथा 20% की कटौती | |
| 4 | जब कुल आय 5,00,000/- रुपये से अधिक हो. | 5,00,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर 52,000/- रुपये तथा 30% की कटौती |
ग. जो व्यक्ति भारत में प्रवास कर रहा हो तथा जिनकी आयु 65 वर्ष अथवा उससे अधिक हो, उनके लिए वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय कर की दरें :
| 1 | जब कुल आय 2,25,000/- रुपये से अधिक ना हो। | नहीं के बराबर | |
| 2 | जब कुल आय 2,25,000 /- रुपये से अधिक तथा 3,00,000/- रुपये से कम हो। | 2,25,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर 10% की कटौती | |
| 3 | जब कुल आय 3,00,000/- रुपये से अधिक तथा 5,00,000/- रुपये से कम हो। | 3,00,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर7,500/- रुपये तथा 20% की कटौती | |
| 4 | जब कुल आय 5,00,000/- रुपये से अधिक हो। | 5,00,000/- रुपये से ज्यादा आय की रकम पर47,500/- रुपये तथा 30% की कटौती |
आयकर पर अधिभार
इस अनुच्छेद के पिछले प्रावधानों के अनुसार आयकर की रकम की गणना करते समय आय की रकम पर एक अतिरिक्त 10% का अतिरिक्त अधिभार ऐसे आयकर द्वारा बढाई जाएगी जब कुल आय 10,00,000/- रुपये से अधिक हो।
वैसे अधिभार तथा 10,00,000/- रुपये पर देय आय कर की कुल राशि 10,00,000/- रुपये से ज्यादा होने वाली आय से अधिक नहीं होगी।
आयकर पर अतिरिक्त अधिभार (आयकर पर शिक्षा उपकर)
यदि अधिभार के कारण आय कर की राशि में कोई वृद्धि होती है जैसा कि ऊपर बताया गया है तब आयकर के 2% की दर से अतिरिक्त अधिभार (आयकर पर शिक्षा उपकर) तथा अधिभार में वृद्धि की जाएगी ।
आयकर पर अतिरिक्त अधिभार (आयकर पर उच्च तथा उच्चतर शिक्षा उपकर)
वित वर्ष 2007-08 से 1% का अतिरिक्त अधिभार आयकर तथा अधिभार पर लगाया जायेगा (जिसमे आयकर पर शिक्षा उपकर सम्मिलित नहीं है.)
अधिभार, शिक्षा उपकर तथा माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा उपकर प्रवासी एवं गैर प्रवासी दोनों प्रकार के करदाता को देना होगा।
3. आयकर अधिनियम 1961, की धारा 192 : "वेतन" के मद से स्रोत पर आय कर कटौती की विस्तृत योजना
3.1 आय कर गणना की विधि - प्रत्येक व्यक्ति जो "वेतन" मद के अन्तर्गत आने वाली किसी भी आय पर कर देने का उत्तरदायी है, उसकी अनुमानित आय पर "वेतन" मद के अन्तर्गत वित वर्ष 2008-09 के लिए कर की कटौती की जाएगी। आय कर की गणना उपरोक्त दरों के अनुसार की जाएगी तथा प्रत्येक भुगतान करने के समय इसमें औसत कटौती होगी। वैसे यदि दिए गए वित्त वर्ष में अनुमानित वेतन से आय जिसमे प्राधिकारों के मूल्य सहित 1,50,000/- रुपये अथवा 1,80,000/- रुपये अथवा 2,25,000/- रुपये जो भी कर्मचारी के उम्र तथा लिंग के हिसाब से लागू होता हो, अधिक ना हो तो कर नहीं काटा जायेगा। (आय कर गणना के कुछ विशिष्ट उदहारण अनुच्छेद - I में दिए गए है।)
3.2 प्रवर्तक द्वारा गैर मौद्रिक प्राधिकारों पर कर का भुगतान - प्रवर्तकों को एक विकल्प दिया गया है कि वे कर्मचारियों को दिए गए गैर मौद्रिक प्राधिकारों पर लागू होने वाले कर का भुगतान करे । प्रवर्तक अपनी इच्छा से इन गैर मौद्रिक प्राधिकारों पर लागू होने वाले कर का भुगतान कर्मचारी के वेतन से स्रोत पर ना काटकर स्वयं ही कर का भुगतान कर सकता है। प्रवर्तक को यह कर उस समय देना होगा जब यह देय होगा जिसका मतलब उस समय जब आय का भुगतान वेतन के मद से कर्मचारी को किया जा रहा हो।
3.3 औसत आयकर की गणना - उपरोक्त अनुच्छेद 3.2 में बताये गए कर के भुगतान के लिए कर का निर्धारण " वेतन" मद से प्राप्त आय के औसत पर, उस वित वर्ष के दर के आधार पर किया जाता है जिसमे जिसमे गैर मौद्रिक प्राधिकारों का मूल्य तथा जिनपर प्रवर्तक द्वारा जमा किया गया कर सम्मिलित है।
उदहारण -- यदि मान ले कि 65 वर्ष से कम एक पुरुष कर्मचारी के द्वारा भुगतान किये जाने वाला आयकर वेतन मद के साथ साथ सभी प्राधिकारों के लिए दिए गए वित वर्ष में 4,50,000/- रुपये है जिसमे से 50,000/- रुपये गैर मौद्रिक प्राधिकार के कारण है तथा इस राशि का भुगतान प्रवर्तक द्वारा किया जाता है जैसा कि अनुछेद 3.2 में अंकित है।
चरण :
| वेतन मद के अन्तर्गत सभी प्राधिकारों सहित आय | 4,50,000/- रुपये |
| कुल वेतन पर कर (उपकर सहित) | 46,350/- रुपये |
| आयकर की औसत दर{(46,350/4,50,000) x 100]: | 10.3% |
| 50,000/- रुपये पर लागू दर (10.3% of 50,000): | 5,150/- रुपये |
| प्रत्येक माह जमा करायी जाने वाली राशि (5,150/12) | 430/- रुपये |
इस प्रकार प्रवर्तक के द्वारा अदा किया गया कर कर्मचारी के वेतन मे से स्रोत पर कर की कटौती माना जायेगा ।
3.4 एक से अधिक प्रवर्तकों द्वारा वेतन - धारा 192 के उपधारा (2) उस व्यक्ति से सम्बंधित है जिसके एक से अधिक प्रवर्तक हो अथवा उसका हस्तांतरण एक प्रवर्तक से दूसरे प्रवर्तक के यहाँ हुआ हो। इसमें कर का भुगतान स्रोत द्वारा उस प्रवर्तक (करदाता की इच्छानुसार) से किया जायेगा जिससे कर्मचारी अपना कुल वेतन एक से अधिक प्रवर्तक द्वारा पाता है। अतः अब कर्मचारी को अपने वर्तमान / चुने गए प्रवर्तक का विवरण वेतन मद के विवरण के साथ, पूर्व / अन्य प्रवर्तक से प्राप्त वेतन अथवा बकाया राशि और स्रोत पर काटे गए कर का विवरण स्वयं अथवा पूर्व / अन्य प्रवर्तक द्वारा सत्यापित कर लिखित रूप से प्रस्तुत करना होगा. पूर्व / चुनिंदा प्रवर्तक को स्रोत पर वेतन की कुल रकम पर आय कर काटना होगा (पूर्व / अन्य प्रवर्तक से प्राप्त वेतन सम्मिलित)।
3.5 बकाया वेतन या अग्रिम वेतन की स्थिति में राहत -- धारा 192 के उपधारा (2क) के अनुसार जब करदाता एक सरकारी सेवक अथवा एक कंपनी का कर्मचारी हो, या फिर सहकारी संस्था, स्थानीय प्राधिकरण, विश्वविद्यालय, संस्था, संगठन अथवा निकाय में कार्यरत हो तो उसे धारा 89 के उपधारा (1) के अन्तर्गत राहत दी गयी है, जिसमे उसे अनुच्छेद (3.1) के अनुसार भुगतान करने वाले व्यक्ति को इन विवरणों को प्रारूप 10E के द्वारा सत्यापित कर प्रस्तुत करना होगा और जिसे कर की कटौती करते समय ध्यान में रखा जायगा ।
स्पष्टीकरण -- इस उद्देश्य के लिए "विश्वविद्यालय" का मतलब एक स्थापित विश्वविद्यालय अथवा केंद्रीय, राज्य अथवा प्रांतीय अधिनियम के द्वारा निगमित एक संस्था है जिसमे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 की धारा(3 of 1956) 3 के अनुसार एक संस्थान को विश्वविद्यालय घोषित करने का प्रावधान अधिनियम के उद्देश्यों में सम्मिलित है।
3.6 [आय कर (24va संशोधन ) कानून 2003 द्वारा फॉर्म 12ग को 1-10-2003 के प्रभाव से हटा दिया गया है - (i) धारा 192 की उपधारा 2ख के अन्तर्गत करदाता को वेतन मद के अलावा अन्य स्त्रोतों से प्राप्त आय तथा स्रोत से काटे गए किसी भी कर का विवरण देना होता है। फॉर्म संख्या 12ग, जो ऐसे विवरणों (अनुच्छेद II) को प्रस्तुत करने के लिए विहित था उसे आय कर नियमों से हटा दिया गया है। वैसे अब एक सहज तरीके से विवरणों को प्रस्तुत किया जा सकता है जिसे की करदाता उसी प्रकार सत्यापित करेंगे जिसकी आवश्यकता फॉर्म संख्या 12C के लिए होती थी।
(ii) समान वित्त वर्ष में "घर की सम्पति से प्राप्त आय" मद के अन्तर्गत हुई हानि के अतिरिक्त ऐसी किसी भी मद के अंतर्गत आय में हानि नहीं होनी चाहिए ऐसे अन्य प्रकार की आय तथा कर, यदि आय से कटा गया हो तथा स्रोत पर काटने वाली आय से कोई हानि हुई हो, "घर की सम्पति से प्राप्त आय" मद के अन्तर्गत, हुई हानि को आयकर अधिनियम की धारा 192 के अन्तर्गत टैक्स की गणना करते वक्त ध्यान में रखेगा। वैसे यह उपधारा वेतन मद से प्राप्त आय में होने वाली कर की कटौती को, उस राशि से नीचे जो राशि होंगी उसे प्रभावित नहीं करेगी (सिवाए घर की सम्पति से प्राप्त आय मद के अन्तर्गत हुई हानि को ध्यान में रखते हुए) जब वेतन मद के अन्तर्गत आय की राशि से कम होगी वो भी तब कर देने योग्य होगी जब अन्य आय तथा उनपर काटे गए कर को ध्यान में ना रखा गया हो। दूसरे शब्दों में, केवल "घर की सम्पति से प्राप्त आय" मद के अन्तर्गत प्राप्त हुई राशि से हुए हानि (नकारात्मक आय) तथा किसी अन्य मद को डीडीओ कुल देय कर की गणना करते वक्त ध्यान में रखेंगे.। घरेलू सम्पति पर हुई हानि को ध्यान में रखते हुए डीडीओ यह सुनिश्चित करेगा कि करदाता ने उपरोक्त से सम्बंधित ब्यौरा फाइल कर दिया है तथा घरेलू सम्पति पर हुई ऐसी हानि की गणना के ब्यौरे को संलग्न करेगा ।
(iii) उपधारा 2ग के अनुसार कोई भी व्यक्ति वेतन मद से प्राप्त किसी आय की सूचना उस व्यक्ति को देगा जो कर का भुगतान करता हो एवं उसे दिए जाने वाले वेतन के बदले लाभ अथवा प्राधिकारों का सम्पूर्ण विवरण सही ब्यौरे के साथ फॉर्म संख्या 12खक के द्वारा प्रस्तुत करेगा. (अनुच्छेद - III) आय कर अधिनियम की धारा 139ग के अन्तर्गत प्रवर्तक के द्वारा जारी किये गए फॉर्म संख्या 16 के साथ फॉर्म संख्या 12खक को मूल्यांकन अधिकारप के समक्ष उसे प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
3.7 घरेलू सम्पति से आय की गणना करते वक्त उधार की पूंजी पर ब्याजमें राहत की शर्ते :
(i) स्वंय द्वारा स्वंय के आवासीय घर में रहने के सन्दर्भ में घरेलू सम्पति के आय मद से प्राप्त हुई आय की गणना के लिए करदाता द्वारा ली गयी उधार पर ब्याज में 30,000/- रुपये तक की कटौती की अनुमति है। वैसे ब्याज की राशि पर कटौती की अधिकतम सीमा 1,50,000/- रुपये तक है यदि यह उधार 1-4-1999 या उसके बाद घर की निर्माण के लिए अथवा स्वयं के रहने के लिए घर खरीदने के लिए ली गयी हो और किसी निवास स्थान को खरीदने अथवा निर्माण हेतु वित्त वर्ष के अंत से तीन वर्ष के अंदर ऐसा उधार चुका दिया गया हो जिसमे पूंजी उधार लिया गया हो। इस तरह की उच्चतर कटौती घर की मरम्मत अथवा रेनोवेशन के उद्देश्य से उधार ली गयी पूंजी के सन्दर्भ में करने की अनुमति नहीं है। 1,50,000/- रुपये तक की ब्याज में कटौती का दवा करने के लिए कर्मचारी को उस व्यक्ति से प्रमाण पत्र लेना होगा जिसे लिए गए उधार पर ब्याज देय तथा इसे प्रस्तुत देय ब्याज की राशि को अंकित करते हुए प्रस्तुत करना होगा जिसमे बताना होगा कि यह राशि घर की निर्माण के लिए अथवा स्वयं के रहने के लिए घर खरीदने के हेतु अथवा किसी एक हिस्से या सम्पूर्ण घर को परिवर्तित हेतु उधार ली गयी थी और यह नए उधार चुकाने के लिए देय है।
3.7 (ii) स्वयं के घर हेतु ब्याज की अधिकतम राशि 1,50,000/- रुपये की कटौती पाने के लिए जरुरी शर्त यह है कि पूंजी कि राशि 1-4-1999 को अथवा उसके बाद उधार ली गयी हो तथा जिस वर्ष में घर के निर्माण अथवा अभिग्रहण के लिए पूंजी उधार ली गयी है उसके अंत से तीन वर्ष के अन्तर्गत वो पूरा हो गया हो। यहाँ घर के निर्माण शुरू करने के सन्दर्भ में कोई शर्त नहीं है। परिणामस्वरूप घर का निर्माण कार्य 1-4-1999 से पूर्व शुरू हो सकता है ,लेकिन जब तक इसका निर्माण/अभिग्रहण तीन वर्ष के अंदर पूरा होता है, जिस वित्त वर्ष में पूंजी उधार ली गयी है, के अंत से 1-4-1999 के बाद लिए गए उधार पर अधिकतम कटौती प्राप्त की जा सकेगी। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि घर के निर्माण/अभिग्रहण हेतु सम्पूर्ण राशि 1-4-1999 अथवा उसके बाद उधार पर लेने के सन्दर्भ में ऐसी कोई शर्त नहीं है। 1-4-199 से पूर्व लिए गए उधार पर ब्याज कि राशि पर अधिकतम कटौती केवल 30,000/- रुपये है। फिर भी किसी भी सूरत में उधार की पूंजी पर ब्याज के रकम में कुल कटौती की सीमा एक वर्ष में 1,50,000/- रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती।
3.8 कटौती में अधिकता या कमी में सामंजस्य -- धारा 192 की उपधारा (3) के प्रावधानों में कटौती करने वाले को यह अनुमति है कि वित्तीय वर्ष के दौरान वो कर में की गयी कटौती में कमी या अधिकता को उसी वित्त वर्ष के अंदर आगे होने वाली कटौतियों में उनका समायोजन करे।
3.9 भविष्य निधि तथा सेवा निवृति फण्ड के अन्तर्गत भुगतान की गयी राशि में स्रोत पर कर की कटौती --एक मान्यता प्राप्त भविष्य निधि की न्यासकर्ता अथवा कोई अन्य व्यक्ति जिसे फण्ड की प्रावधानों द्वारा कर्मचारियों को संगृहीत बकाया शेष का भुगतान करने हेतु अधिकृत किया गया हो उसे यह अधिकार है कि वो चौथे अनुसूची के भाग I के धारा 9, उपधारा 1 लागू होता हो वहां कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान करे, तथा उसमे से चौथे अनुसूची धारा 10 भाग 1 में वर्णित प्रावधान के अनुसार कर की कटौती करे।
[केंद्र सरकार ने यूटीआई-सेवानिवृति पेंशन लाभ फण्ड को अधिसूचना क्रम. संख्या 1564(ड.), दिनांक 3-11-2005 द्वारा अधिसूचित किया है].
3.10 यदि कर्मचारी को दिए जाने वाले सेवा निवृति फण्ड में प्रवर्तक द्वारा कोई योगदान जिसमे ऐसे योगदानो पर ब्याज शामिल है वहां अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग ख के नियम 6 में किये गए प्रावधान के अनुसार भुगतान की जाने वाली राशि पर न्यासकर्ता द्वारा कर की कटौती की जाएगी।
3.11 विदेशी मुद्रा में वेतन का भुगतान -- विदेशी मुद्रा में देय वेतन पर कर की कटौती के लिए विहित विनिमय दर पर इस वेतन का मूल्य रुपये में आंकलित किया जायेगा।
4. कर में कटौती करने वाले व्यक्ति तथा उनके कर्तव्य
4.1 अधिनियम की धारा 204 के खंड (i) के अन्तर्गत भुगतान के लिए उत्तरदायी व्यक्ति भाग 192 के उदेश्यो के तहत प्रवर्तक स्वयं, अथवा प्रवर्तक यदि कोई कंपनी है तो उसका प्रमुख अधिकारी हो सकता है।
4.2 अनुच्छेद 6 के अनुसार निर्धारित कर अधिनियम की धारा 192 के अन्तर्गत वेतन से काट लिया जायेगा।
4.3 कम दर पर कर की कटौती -- धारा 197 कर अदाकर्ता को यह अधिकार देता है कि वो अपने कर निर्धारण करने वाले अधिकारी को फॉर्म संख्या 13 के द्वारा एक आवेदन पत्र दे तथा यदि कर निर्धारण करने वाला अधिकारी संतुष्ट हो तो करदाकर्ता की कुल आय पर कटौती या तो कम दर पर होगी अथवा नहीं होगी। इस सम्बन्ध में वह एक उचित प्रमाण पत्र जारी करेंगे जिसे डीडीओ को स्रोत से कटने वाले कर कटौती के समय ध्यान में रखना होगा। यदि कर्मचारी इस प्रमाणपत्र को प्रस्तुत नहीं करता है तब प्रवर्तक को आय कर सामान्य दरों से काटना होगा। (सर्कुलर संख्या 147, दिनांक 28-10-1974)।
4.4 कर कटौती का संग्रहण -- धारा 200 के प्रावधानों के अनुसार कोई व्यक्ति जो धारा 192 के अनुसार कर अदा करता है अथवा गैर मौद्रिक प्राधिकारों पर धारा 192(1क) के अन्तर्गत किसी कर्मचारी के हेतु कर अदा करता है उसे केंद्रीय सरकार द्वारा विहित तरीके से (आयकर अधिनियम 1962 के खंड 30 को देखें) कर की गणना करनी होगी तथा उसे जमा करना होगा। इन कटौतियों की अदायगी सरकार द्वारा निर्धारित तिथि अथवा उससे पूर्व की तिथि पर सरकार को अदा करना होगा। अन्य मामलो में जिस महीने में कर की कटौती होती है उसकी अंतिम तिथि से एक सप्ताह के अंदर कर का भुगतान होना चाहिए।
4.5 कर कटौती की रकम जमा कराने में असफल रहने पर दंड का प्रावधान -- यदि कोई व्यक्ति सम्पूर्ण कर अथवा कर के किसी भाग की स्रोत पर कटौती करने में असफल रहता है अथवा कर की कटौती करने के बाद सम्पूर्ण कर की रकम अथवा उसके किसी भाग को विहित समय में केंद्रीय सरकार के पास जमा कराने में असफल रहता है, तो वह धारा 201 की उपधारा (1क) के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही के लिए उतरदायी होगा जिसके अनुसार उस व्यक्ति को 1% का प्रति माह साधारण ब्याज उस अवधि के लिए देना होगा जब यह कर जमा किया जाना था तथा जब इसे वास्तविकता में जमा किया गया था। अगर ऐसा कोई ब्याज देय है तो प्रत्येक तिमाही के लिए भुगतान किये जाने वाली टीडीएस के लिए तिमाही व्याख्या को भेजने से पहले अदा करना होगा। धारा 271 ग में प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति स्रोत से कर की कटौती करने में असफल रहता है, तो उसे दंड के रूप में स्वयं उस कर की रकम को अदा करना होगा जिसके कटौती उसने नहीं की थी। आगे धारा 276 ख के अंदर प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय के अंदर केंद्रीय सरकार के पास टीडीएस जमा करने में असफल रहता है तो उसे 3 महीने से लेकर 7 वर्ष तक के सश्रम कारावास के साथ अर्थ दंड की सजा हो सकती है।
4.6 कर कटौती के प्रमाण का प्रस्तुतीकरण -- धारा 203 के प्रावधानों के अनुसार जो भी व्यक्ति जो स्रोत पर कर कटौती के लिए उत्तरदायी है, उसे कर अदाकर्ता को एक प्रमाण पत्र देना होता है जिसमे काटे गए कर की राशि तथा अन्य विवरणों को अंकित किया जाता है। इस प्रमाणपत्र को आमतौर पर टीडीएस प्रमाणपत्र कहा जाता है जिसे प्रासंगिक वित्त वर्ष के अंत से लेकर एक महीने की अवधि की अन्तर्गत देना होता है। पेंशन का भुगतान करते समय बैंक जो कर कटौती करते है उन्हें अनिवार्यता ऐसा प्रमाणपत्र देना पड़ता है। उन कर्मचारियों के मामले में जिनकी आय वेतन से प्राप्त होती है (जिसमे पेंशन भी शामिल है) उन्हें फॉर्म संख्या 16 दिया जाता है। वैसे वह कर्मचारी जो भारत के नागरिक है और जिनकी आय 1,50,000/- रुपये से अधिक नहीं है उन्हें कर कटौती का प्रमाण पत्र फॉर्म संख्या 16 एए के द्वारा दिया जाता है (फॉर्म संख्या 16एए का नमूना अनुच्छेद - IV के रूप में संलग्न है)। वैसे यह स्पष्ट है कि जब स्रोत से कर छूट के दावों के कारण देय नहीं है तो टीडीएस प्रमाणपत्र (फॉर्म 16 अथवा फॉर्म 16एए) जारी करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। धारा 192 के अनुसार वेतन के बदले किसी कर्मचारी को दिए जाने वाले लाभों तथा प्राधिकारों का पूर्ण विवरण देने का उत्तरदायित्व उस व्यक्ति का होता है जो स्रोत में कर कटौती के लिए उत्तरदायी है। कुछ ऐसे विवरणों के फॉर्म तथा शैलियों को आयकर अधिनियमों के नियम 26ए, फॉर्म 12 बीए, फॉर्म 16 तथा फॉर्म 16एए में विहित किया गया है ।
यदि वेतन 1,50,000/- से अधिक है तब प्रवर्तक को फॉर्म संख्या 12 बीए के द्वारा प्राधिकारों की प्रकृति तथा मूल्य से सम्बंधित सूचना देनी होगी । दूसरे मामलो में प्रवर्तक को फॉर्म 16 में ही सूचनाये देनी होगी। किसी भी स्थिति में फॉर्म 16 के साथ फॉर्म 12 बीए अथवा सिर्फ फॉर्म 16 को ही सम्बंधित वित्तीय वर्ष के अंत होने पर एक महीने के अंदर प्रस्तुत करना होगा।
एक प्रवर्तक जिसने कर्मचारी की तरफ से अनुच्छेद 3.2 तथा 3.3 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार प्राधिकारों पर कर अदा किया है उसे कर्मचारी को इससे सम्बंधित प्रमाणपत्र देना होगा कि केंद्रीय सरकार को कर की अदायगी कर दी गयी है। अदा की गयी रकम को स्पष्ट रूप से बताना होगा साथ ही अन्य विवरणों के साथ अदा की गयी कर की दरकी जानकारी संशोधित फॉर्म 16 के अनुसार देनी होगी।
धारा 192 (2ग) के अनुसार कर्मचारी को दिए जाने वाले प्राधिकारों के मूल्य को विवरण में लिखित रूप से देना प्रवर्तक का गंभीर उत्तरदायित्व है और उनसे आशा की जाती है कि वे मूल्यांकन से सम्बंधित नियम और कानून के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करे। किसी भी गलत सूचना, झूठे दस्तावेज अथवा आवश्यक सूचना को दबाने के परिणाम कानून के अंतर्गत बहुत गंभीर होंगे। फॉर्म संख्या 16 तथा फॉर्म संख्या 12 खक के द्वारा जारी किये गए प्रमाणपत्र कर कि कटौती करने वाले के अपने लेखन सामग्री में प्रति वर्ष वित्त वर्ष के अंत के एक महीने के अंदर दिए जायेंगे जैसे प्रत्येक वर्ष की 30 अप्रैल। धारा 203 के अनुसार यदि वह सम्बंधित व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र देने में असमर्थ रहता है, तो उसे धारा 272क के अंतर्गत दंडस्वरूप जब तक वह असमर्थ रहता है उसे प्रतिदिन 100/- रुपये देना होगा।
4.7 डिजीटल हस्ताक्षर के द्वारा टीडीएस प्रमाणपत्र जारी करने के विकल्प -- क्योंकि आयकर रिटर्न के साथ टीडीएस प्रमाणपत्र संलग्न कर वितरित करना आवश्यक है, अब टीडीएस प्रमाणपत्र केवल करदाता के निजी रिकॉर्ड के लिए जारी किया जायेगा जिसे वित अधिनियम 2007 की धारा 139 ग के अंतर्गत कर निर्धारण करने वाले अधिकारी के मांगने पर प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। आयकर रिटर्न में किये गए टीडीएस दावों का कटौती करने वाले द्वारा प्रस्तुत किये गए ई- टीडीएस रिटर्न के साथ मेल खाना आवश्यक है। कर निर्धारण करने वाले अधिकारी अफसर यदि आवश्यक समझें तो कटौती करने वाले को लिखकर काटे गए करों की अथवा अन्य विवरणों की सत्यता की जाँच कर सकता है। आयकर अधिनियम के सुचारू सुशासन के लिए यह निर्णय लिया गया है कि कटौती करने वाले के पास यह विकल्प है कि वह वेतन मद के अन्तर्गत कर योग्य आय में स्रोत पर की जाने वाली कर की कटौती के प्रमाणपत्र को अपने अंकित हस्ताक्षर से फॉर्म 16 में प्रमाणित कर सकता है।कटौती करने वाले को यह सुनिश्चित करना होगा कि फॉर्म संख्या 16 में दिए गए टीडीएस प्रमाणपत्र में इसके टैन तथा कर्मचारी के पैन संख्या फॉर्म 16 में अंकित हस्ताक्षर के साथ सही लिखे गए है। कटौती करने वाले को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि एक बार प्रमाणपत्र पर अंकित रूप से हस्ताक्षर होने के बाद फॉर्म 16 की विषेय वस्तु में किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा । आयकर अधिकारी ऐसे अंकित हस्ताक्षर वाले प्रमाणपत्र को आयकर अधिनियम 1962 (सर्कुलर संख्या 2/2007, दिनांक 21-5-2007) के नियम 31 के अनुसार जारी किये गए प्रमाणपत्र की तरह मानेंगें।
4.8 पैन तथा टैन का आवश्यक प्रस्तुतीकरण -- आयकर अधिनियम की धारा 203 क के प्रावधानों के अनुसार वे सभी व्यक्ति जो स्रोत पर कर की कटौती के लिए उत्तरदायी है उनके लिए कर कटौती खाता संख्या. (टैन) को प्राप्त करना तथा इसका उल्लेख टीडीएस प्रमाणपत्र , ब्यौरों तथा अन्य दस्तावेजों में करना आवश्यक है। इस सम्बन्ध में विस्तृत निर्देश विभाग के सर्कुलर संख्या 497 [फ. नं.275/118/87- आईटी (ख), दिनांक 9-10-1987] में दिए गए है। यदि कोई व्यक्ति धारा 203 क के प्रावधानों का पालन नहींकरता है तो उसे धारा 272खख के अन्तर्गत 10,000/- रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा। इसी प्रकार धारा 139क (5ख) के अनुसार किसी व्यक्ति को स्रोत से कर की कटौती के समय उन व्यक्तियों के पैन का उल्लेख करना होगा, जिनके आयकर में धारा 192(2ग) के अंतर्गत कटौती की गयी है। धारा 203 के अंतर्गत प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे तथा सभी रिटर्न्स को तैयार करना होगा और उन्हें 1961, के आय कर अधिनियम की धारा 200(3) के प्रावधानों के अनुसार रिटर्न तैयार करना तथा पहुंचाना होगा।
4.9 सभी कर प्रवर्तकों को फॉर्म संख्या 24थ (वेतन में से कर की कटौती) द्वारा टीडीएस रिटर्न फाइल करना आवश्यक है। चूँकि टीडीएस/टीसीएस प्रमाणपत्रों को फाइल करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गयी है, करदाताओ के पास पैन के अभाव में काटे गए कर को करदाता के खाते में जमा करने में कठिनाईयां हो रही है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि वेतन के लिए टीडीएस रिटर्न यानि फॉर्म संख्या 24थ को 31-3-2008 को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए तथा उसके बाद की अवधि के लिए पैन के 95% आंकड़ों के बिना स्वीकार नहीं किया जायेगाष कर प्रवर्तक तथा कर समाहर्ताओ को सलाह दी गयी है कि वे टीडीएस रिटर्न्स में सभी करदाताओ के सही-सही पैन विवरणों को अंकित करे और ऐसा नहीं करने पर टीडीएस रिटर्न्स को स्वीकार नहीं किया जायेगा और आयकर अधिनियम के अंतर्गत दंडात्मक परिणामो का उन्हें सामना करना पड़ेगा। जिन कर दाता के लिए स्रोत से कर की कटौती होती है उन्हें भी सलाह दी गयी है कि वे अपने पर्वर्तको के साथ सही पैन का उल्लेख करें जिसे नहीं करने पर आयकर अधिनियम के अंतर्गत उन्हें भी दंडात्मक कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा ।
4.10 टीडीएस के तिमाही ब्यौरे -- वह व्यक्ति जो कर में कटौती करता है (वेतन से आय के मामले में प्रवर्तक) को प्रत्येक वित्त वर्ष में हर तिमाही के अंत में 30 जून, 30 सितम्बर, 31 दिसंबर तथा 31 मार्च को टीडीएस के ब्यौरे आयकर (सिस्टम के महानिदेशक और मैसर्स नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल)) को फाइल करने होगे। इन ब्यौरों को वित्त वर्ष के पहले तीन तिमाही के सन्दर्भ में 15 जुलाई, 15 अक्टूबर, 15 जनवरी को या उससे पहले दर्ज करना आवश्यक होगा तथा उसके बाद वित्त वर्ष के अंतिम तिमाही 15 जून को या उससे पहले फाइल करना होगा। टीडीएस के वार्षिक रिटर्न को दर्ज करने की आवश्यकता को 1-4-2006 के प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। अंतिम तिमाही के लिए तिमाही ब्योरे को फॉर्म 24क्यू (अधिसूचना संख्या 704(ई), दिनांक 12-5-2006 द्वारा संशोधित) द्वारा दर्ज किया जायेगा जिसे टीडीएस का वार्षिक रिटर्न माना जायेगा।
अब सभी सरकारी कार्यालयों तथा सभी कम्पनियो के लिए तिमाही टीडीएस ब्योरे को "स्रोत पर कर कटौती के रिटर्न की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग की योजना, 2003" जैसाकि अधिसूचना संख्या S.O.974(ई), दिनांक 26-8-2003 अधिसूचित किया गया है, अनुसार फाइल करना आवश्यक है। (अनुच्छेद - V). ऐसे प्रवर्तको द्वारा तिमाही ब्योरो को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में ई-टीडीएस प्रतिनिधि के साथ किसी भी टीआईएन सुविधा केन्द्रों, से www.incometaxindia.gov.in तथा http://tin.nsdl.com द्वारा दर्ज किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति निश्चित समय में तिमाही ब्योरे को प्रस्तुत करने में असफल रहता है ,तो धारा 272 क (2)(ट) के अंतर्गत तो उसे ऐसा करने तक दंडस्वरूप प्रतिदिन 100/- रुपये के हिसाब से अदा करने होगे। वैसे यह रकम उस कर की रकम से अधिक नहीं हो सकती जो स्रोत से काटा जाना था।
तिमाही ब्यौरे केवल आयकर अधिनियम 1962, के नियम 31क के अनुसार कंप्यूटर के माध्यम से फाइल किये जाते है। इन तिमाही ब्यौरों में कर काटने वाले का (प्रवर्तक) कर कटौती खाता संख्या (टैन) तथा उस कर्मचारी का जिसका कर काटा गया है, स्थायी खाता संख्या (पैन) का उल्लेख करना आवश्यक है। अतः सभी केंद्रीय और राज्य सरकार/विभाग के ड्राइंग और वितरण अधिकारी के लिए जिन्होंने अभी तक टैन प्राप्त नहीं किया है, तुरंत ही इसके लिए आवेदन करें तथा टैन प्राप्त करें। इसी प्रकार से सभी कर्मचारियों (जिसमे गैर प्रवासी कर्मचारी शामिल है) के लिए जिनका कर कटा जाना है, उनसे कहा गया है कि यदि उनके पास पैन नहीं है तो इसे प्राप्त करें और इसका सही-सही उल्लेख करें अन्यथा उनके खाते में कर कटौती जमा नहीं होगी। धारा 272 ख के अंतर्गत जानबूझकर गलत पैन का उल्लेख करने पर 10,000/- रुपये जुर्माने कि रकम निर्धारित की गयी है।
30-9-2007 पर ख़त्म होने वाली तथा वहां से शुरू होने वाली तिमाही के लिए आयकर अधिनियम की धारा 44कख के अंतर्गत टीडीएस रिटर्न को प्रवर्तकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से फाइल करना तथा अपने लेखा ब्यौरों का परीक्षण, पिछले वित्त वर्ष के लिए अथवा जहाँ कर दाताओ की संख्या पिछले वित् वर्ष में 50 या 50 से ज्यादा हो, अनिवार्य है। ऐसे कर प्रवर्तकों से अब टीडीएस रिटर्न कागजी रूप में स्वीकार नहीं किया जायेगा।
4.11 एक विहित पढने योग्य कंप्यूटर माध्यम से फाइल किया गया रिटर्न धारा 200(3) तथा इसके अंदर के नियमों के उद्देश्यों के तहत रिटर्न माना जायेगा तथा किसी भी कार्यवाही के लिए स्वीकार्य होगा, आगे मूल प्रति के सबूत की आवश्यकता नहीं होगी, यह मूल प्रति के विवरणों का सबूत माना जायेगा।
4.12 टीडीएस की जमा रकमों के लिए चालान -- स्रोत से काटे गए कर का भुगतान केंद्रीय सरकार के खाते में करते समय यह आश्वस्त करना होगा कि सम्बंधित चालान में आय कर की सही रकम को दर्ज़ किया गया है। यह भी आश्वस्त करना होगा कि सही चालान का प्रयोग किया गया है। वेतन के स्रोत से काटे गए कर के भुगतान के लिए चालान संख्या आईटीएनएस-281 (आईटीएनएस-281) के प्रयोग करना होगा। जब भी स्रोत द्वारा काटे गए कर को पुस्तक समायोजन के द्वारा केंद्रीय सरकार के खाते में जमा किया जाता है तब यह आश्वस्त करना आवश्यक होगा कि आयकर की सही रकम जमा हुई है।
4.13 पेंशन से प्राप्त आय पर टीडीएस -- जो पेंशनधारी अपना पेंशन राष्ट्रीयकृत बैंक से प्राप्त करते है उनके लिए दिए गए निर्देश वही है जो वेतन से प्राप्त आय पर लागू होते है। जीवन बीमा, भविष्य निधि, एनएससी इत्यादि के लिए किये गए योगदान पर धारा 80 के अंतर्गत पेंशन की रकम से कटौती होगी यदि पेंशनधारी बैंक को प्रासंगिक विवरण प्रस्तुत करते है। इस सम्बन्ध में जरुरी निर्देश रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा, भारतीय स्टेट बैंक तथा अन्य राष्ट्रीय बैंको को दिए गए है। देखें भारतीय रिजर्व बैंक की पेंशन सर्कुलर (सेंट्रल सीरीज) नो .7 / सी. डी. आर/1992 (रेफ. सीओ: डीजीबीए: जीए (एनबीएस) नो .60 / जीए .64 (11 सी वीएल -/92) दिनांक 27th अप्रैल, 1992। यह निर्देशो का अनुपालन बैंको की सभी शाखाओ को, जिन्हे पेंशन की भुगतान करने का कार्य दिया गया है, करना होगा। धारा 203 के अंतर्गत बैंक की सभी शाखाओ को पेंशनधारियों को प्रमाण पत्र जारी करना होगा देखें (सीबीडीटी सर्कुलर संख्या 761, दिनांक 13-1-1998।
4.14 महत्वपूर्ण सर्कुलर -- जहाँ भारत में अप्रवासियों को काम के लिए नियुक्त किया गया है और प्रवर्तक द्वारा कर का भुगतान किया जाता है वहां यदि कर्मचारी के भारत छोड़ने के बाद कोई रिफंड बकाया है और उसका भारत में मूल्यांकन आदेश पारित होने के समय तक भारत में कोई बैंक खाता नहीं है, तब यह रिफंड प्रवर्तक को दे दिया जायेगा ,क्योंकि उसने कर की रकम अदा की थी। सर्कुलर संख्या 707 दिनांक 11-7-1995।
4.15 जो खाता सामंजस्य के द्वारा रकम अदा करते है, उन केंद्रीय सरकार के विभागों द्वारा जारी किये गए टीडीएस प्रमाण पत्र कर निर्धारण अधिकारियो द्वारा स्वीकार्य होगे ,यदि उनमे उल्लेख है कि जमा राशि आय कर विभाग द्वारा खाता सामंजस्य द्वारा की गयी है। यदि यह स्पष्ट है कि आय कर विभाग के खाते में खाता सामंजस्य द्वारा रकम आंकी गयी है तथा इस सामंजस्य की तारीख का उल्लेख किया हुआ है। ऐसे मामलों में कर निर्धारण अधिकारी सरकारी खाते में रकम की अदायगी की तारीख, चालान संख्या का विवरण इत्यादि प्राप्त करने पर जोर नहीं देंगे बल्कि उन्हें उनके समक्ष प्रस्तुत किये गए प्रमाणपत्रों के खरेपन से संतुष्ट होना होगा: सर्कुलर संख्या 747, दिनांक 27-12-1996।
4.16 प्रवर्तक द्वारा स्रोत पर देय से अधिक कर काटे जाने पर रिफंड की राशि के भुगतान के लिए विशेष प्रक्रिया अधिकथित है कृपया सर्कुलर संख्या 285, दिनांक 21-10-1980 देखें।
4.17 अप्रवासियों के सन्दर्भ में भारत में की गयी सेवा के बदले दिया गया वेतन भारत में प्राप्त आय कहलायेगा । इसका अधिनियम में विशिष्ट रूप से उल्लेख है कि कोई वेतन जो भारत में सेवा के दौरान प्रवास से पहले या बाद में अवकाश अवधि के लिए देय है तथा यह सेवा अनुबंध का हिस्सा है तो इसे भारत में प्राप्त आय समझा जायेगा।
5 "वेतन " मद के अंतर्गत आय का आंकलन
5.1 वेतन मद के अंतर्गत अआदेय आय -
(1) " वेतन" मद के अंतर्गत निम्नलिखित आय आयकर के लिए आदेय होगी:
(क) प्रवर्तक द्वारा या उन की तरफ से अथवा भूतपूर्व प्रवर्तक यधपि बकाया न भी हो अथवा यह बकाया हो गयी हो,
(ख) प्रवर्तक अथवा भूतपूर्व द्वारा पिछले वर्ष में एक करदाता को किसी वेतन का भुगतान किया गया हो अथवा इसकी अनुमति दी गयी हो अथवा भूतपूर्व प्रवर्तक द्वारा देय न हो अथवा पहले ही देय हो गया हो,
(ग) प्रवर्तक द्वारा या उसकी तरफ से वेतन की बकाया रकम का भुगतान किया गया हो अथवा पिछले वर्ष में इसकी अनुमति दी गयी हो अथवा किसी पिछले वर्ष में आयकर भूतपूर्व प्रवर्तक द्वारा नहीं ली गयी हो।
(2) संदेह के निवारण के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि किसी वेतन का अग्रिम रूप से भुगतान किया जाता है तो उसे किसी व्यक्ति के किसी पिछले वर्ष में कुल आय में शामिल किया जाता किया जाता है तथा इसे उस व्यक्ति के कुल आय में जब वेतन बकाया होता है तो दुबारा नहीं जोड़ा जायेगा। किसी व्यावसायिक कम्पनी के हिस्सेदार द्वारा या उनको कंपनी से कोई वेतन, बोनस, कमीशन अथवा आय प्राप्त होती है, तो उसे "वेतन "नहीं माना जायेगा।
(3.) वेतन की परिभाषा --वेतन में मजदूरी, फीस, कमीशन, प्राधिकार, बदले में लाभ, अथवा वेतन में योग, वेतन की प्राप्ति, पेंशन, सेवोपहार, छुट्टी का भुनाने इत्यादि शामिल है। इसमें कर्मचारी के खाते में होने वाली एक सीमा तक मान्य भविष्य निधि में वार्षिक वृद्धि शामिल है। यह आयकर अधिनियम के चौथे अनुच्छेद भाग - 1 नियम 6 के अंतर्गत कर के लिए आदेय है। प्रवर्तक द्वारा कर्मचारी के मान्यता प्राप्त भविष्य निधि खाते में किये गए अंशदान जो कर्मचारी के वेतन का 12% तथा उस पर लागू होने वाले ब्याज को पिछले वर्ष के लिए उसकी कर योग्य आय में शामिल किया जायेगा। केंद्रीय सरकार द्वारा अथवा किसी अन्य प्रवर्तक द्वारा कर्मचारी के खाते में नयी पेंशन योजना के अंतर्गत कोई भी अंशदान जो 10% से अधिक हो जैसा कि अधिसूचना संख्या फ. एन.5/7/2003- ईसीबी & पीआर, दिनांक 22-12-2003 (अनुच्छेद - Vक के रूप में संलग्न) द्वारा अधिसूचित किया जाता है तथा धारा 80गगघ में उल्लेखित [इस सर्कुलर का अनुच्छेद 5.4(ग)] आय को भी वेतन से प्राप्त आय में शामिल किया जायेगा। वेतन में शामिल किये जाने वाले अन्य विषय वेतन की जगह लाभ तथा आयकर अधिनियम की धारा 17 में वर्णित प्राधिकार। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि पेंशन को वेतन में शामिल किया गया है, तो पेंशन से भी स्रोत पर कर की कटौती की जाएगी अन्यथा वापस ले लिया जाये। वैसे इस सर्कुलर के अनुच्छेद 5.2 खंड 3 में जैसा वर्णित है कि पेंशन की राशि में से कर की कटौती करने की आवश्यकता नहीं है।
(4). धारा 17 में "वेतन", "प्राधिकार" तथा" वेतन के बदले लाभ" परिभाषित है।
प्राधिकार में शामिल है:
(क) प्रवर्तक द्वारा कर्मचारी को दिया गया किराया-मुक्त निवास का मूल्य,
(ख) प्रवर्तक द्वारा कर्मचारी को दिए गए किसी निवास से सम्बंधित किराये में दी जाने वाली छूट का मूल्य ,
(ग) निम्नलिखित मामलो में से किसी में भी लाभ, अथवा सुख-सुविधा, अथवा बिना लागत के मुफ्त में सेवाएं अथवा मिलने वाली छूट का मूल्य:
(i) कंपनी द्वारा एक कर्मचारी को जो ऐसी कंपनी का निदेशक है;
(ii) कंपनी द्वारा एक कर्मचारी को जिसका कंपनी में काफी बड़ा अधिकार है;
(iii) एक प्रवर्तक द्वारा (जिसमे कंपनी भी शामिल है), जो उपरोक्त (i) अथवा (ii) की श्रेणी में नहीं आते है तथा जिनकी आय वेतन मद की अंतर्गत (चाहे एक या अधिक प्रवर्तकों
द्वारा दी जाने वाली राशि बकाया हो अथवा भुगतान किया गया हो अथवा भुगतान की अनुमति दी गयी हो), गैर मौद्रिक तरीके से प्राप्त लाभों तथा सुख-सुविधाओ का मूल्य 50,000/- रुपये से अधिक हो ।
भारतीय आयकर कानून, 1961 की धारा 17(2)(ii) की व्याख्या 1 से 4 में किराए पर मिलने वाली छूट के गठन सम्बन्धी जानकारी नीचे दी गयी है। यह भी बताया गया है कि तनख्वाह की एवज़ में मिलने वाले लाभ में, कर-निर्धारण के लिए नौकरी के पहले या उससे छुट्टी के पश्चात एक मुश्त मिलने वाली रकम शामिल होंगी । अनुलाभ का मूल्यांकन करने के नियम नीचे दिए गए हैं:
1. आवास - साज समान रहित आवास के अनुलाभ का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से, सभी कर्मचारियों को दो श्रेणियों में बांटा जाता है: (i) केन्द्रीय सरकार तथा राज्य सरकार के कर्मचारी; व (ii) अन्य ।
केन्द्रीय व राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए अनुलाभ का मूल्य, ऐसे आवास के लिए वसूली जाने वाली लाइसेंस फीस के बराबर होगा जो कर्मचारी द्वारा दिए जाने वाले वास्तविक किराए से कम होगा।
अन्य सभी के लिए यानि उन सभी नौकरी-पेशा करदाताओं के लिए, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, आवास से सम्बंधित अनुलाभ का मूल्यांकन निर्धारित दरों के अनुसार होगा, जैसा कि नीचे दिया गया है:
(क) जहाँ कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाने वाले आवास का मालिक नियोक्ता होता है तो 2001 की जनगणना के अनुसार उन शहरों में जहां की जनसंख्या 25 लाख से अधिक होती है, यह दर तनख्वाह की 15 प्रतिशत (15%) होती है। दस लाख से अधिक पर 25 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में, 2001 जनगणना के अनुसार यह दर तनख्वाह का 10 प्रतिशत होती है। अन्य सभी स्थानों के लिए अनुलाभ का मूल्य तनख्वाह का साढ़े सात प्रतिशत (7.5%) होगा।
(ख) जहाँ ऐसा आवास नियोक्ता द्वारा पट्टे पर/किराए पर उपलब्ध कराया जाता है, वहां यह निर्धारित दर तनख्वाह का 15 प्रतिशत होती है या फिर नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले पट्टे भाड़े का वास्तविक मूल्य, जो भी कम हो, जो कर्मचारी द्वारा भुगतान किए गए कोई भी किराए के मूल्य से कम हो।
सुसज्जित आवास के लिए, ऊपर दिए गए तरीके से निकाले गए अनुलाभ का मूल्य इन दरों से बढ़ा दिया जाएगा-
(i) फर्नीचर, उपकरणों तथा यंत्रों के मूल्य का 10 प्रतिशत, या
(ii) जहां फर्नीचर, उपकरण तथा यंत्र भाड़े पर लिए गए हों, वहां पर दिए जाने वाले वास्तविक शुल्क के अनुसार।
-नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले कोई भी शुल्क के अनुसार घटा दिए जाएंगे ।
"आवास" में एक घर, फ्लैट, फार्म हाउस, होटल आवास, सराय, सर्विस अपार्टमेंट अतिथिगृह, एक कारवां, चलता-फिरता घर, जहाज इत्यादि शामिल हैं। हालाँकि, किसी भी खदान क्षेत्र या तटवर्ती तेल खोज क्षेत्र या फिर परियोजना कार्यान्वन क्षेत्र या एक बांध क्षेत्र या विद्युत् उत्पन्न करने वाले क्षेत्र या फिर अपतटीय क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी को उपलब्ध कराए जाने वाले किसी भी प्रकार के आवास का मूल्य एक अनुलाभ की तरह नहीं माना जाएगा। परन्तु, ऐसा आवास या तो किसी "सुदूरवर्ती क्षेत्र" में स्थित होना चाहिए और जहां यह "सुदूरवर्ती क्षेत्र" में नहीं स्थित है, तो आवास अस्थायी स्वरुप का होना चाहिए व उसके स्तम्भ मूल का क्षेत्र 800 वर्ग मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए तथा वह किसी नगरपालिका व छावनी परिषद की स्थानीय सीमा से आठ किलोमीटर के भीतर स्थित नहीं होना चाहिए। इस उप नियम के लागू होने के लिए, परियोजना कार्यान्वन क्षेत्र का अर्थ उस परियोजना के शुरू होने की स्थिति तक है. "सुदूरवर्ती क्षेत्र" का अर्थ है वह क्षेत्र जो किसी ऐसे शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है, जिसकी आबादी, नवीनतम प्रकाशित देशव्यापी जनगणना के अनुसार बीस हज़ार से कम हो।
यदि नियोक्ता के द्वारा आवास किसी होटल में उपलब्ध कराया जाता है, तो ऐसे मामले में फायदे का मूल्य, उस पूरी अवधि के लिए जिसमें यह आवास उपलब्ध कराया जाता है, वार्षिक वेतन का या फिर होटल को दिए जाने वाले वास्तविक किराए, जो भी कम है, का 24 प्रतिशत होगा जो किसी कर्मचारी द्वारा दिए गए या दिए जाने वाले वास्तविक किराए से कम होगा। परन्तु, उन मामलों में जहाँ कर्मचारी को, एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण के समय, ऐसा आवास पंद्रह दिनों से कम के लिए उपलब्ध कराया जाता है, तो ऐसे होटल में उपलब्ध कराए गए आवास के लिए कोई भी अनुलाभ वसूला नहीं जाएगा। यहां यह स्पष्ट कर दिया जाए कि जो भी सेवाएं आवास का अह्म हिस्सा हैं, उनके लिए कोई भी अलग से अनुलाभ नहीं वसूला जाएगा ,पर किन्हीं अन्य सेवाओं के लिए जिनका मूल्य नियोक्ता चुकता है ,या फिर कर्मचारी को जिनकी प्रतिपूर्ति करता है, तो उन्हें अवशिष्ट परिच्छेद के तहत अनुलाभ के लिए माना जाएगा। दूसरे शब्दों में, आवास के लिए संयुक्त शुल्क सूची इन नियमों के अनुसार मानी जाएगी जबकि होटल द्वारा उपलब्ध कराई गयी अन्य सुविधाओं पर अवशिष्ट परिच्छेद के तहत अलग से विचार किया जाएगा। इसके साथ ही यदि कर्मचारी के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण के कारण, उसको नए पदस्थापन के स्थान पर एक आवास उपलब्ध कराया जाता है और साथ ही वह पुराने आवास को भी रखे रहता है, तो आयकर नियमों के नियम 3 के तहत निर्धारित तालिका के अनुसार 90 दिनों की अवधि के लिए, अनुलाभ का मोल केवल एक ही ऐसे आवास के लिए मान्य होगा, जिसका भी मूल्य कम हो। परन्तु इसके बाद, दोनों ही आवासों के लिए अनुलाभ वसूला जाएगा जैसा कि निर्धारित किया गया है।
II. निजी सेवक इत्यादी - सभी निजी सेवकों, जिनमें स्वीपर, माली तथा चौकीदार शामिल हैं, की सेवाएं निशुल्क ली जाएंगी ,जिनका खर्चा नियोक्ता द्वारा उठाया जाएगा। जहां यह सेवक कर्मचारी के घर पर उपलब्ध कराया जाता है, तो पूरा खर्चा अनुलाभ के रूप में कर्मचारी से वसूला जाएगा, यह विचार किये बिना कि उसे किस प्रकार की निजी सेवा उपलब्ध हो रही है। ऐसी सुविधाओं या सेवाओं के लिए कर्मचारी द्वारा दिए गए कोई भी मोल को उपरोक्त लिखित राशि से घटा दिया जाएगा।
III. गैस, बिजली व पानी - घरेलू उपयोग के लिए गैस, बिजली व पानी की निशुल्क सप्लाई हेतु, नियम के अनुसार यह नियत है कि नियोक्ता द्वारा यह सुविधा मुहैया कराने वाली एजेंसी को दी जाने वाली राशि ही अनुलाभ का मूल्य होगी। जहाँ इनकी सप्लाई नियोक्ता के स्वयं के संसाधनों से होगी, तो वहां नियोक्ता द्वारा वहन किया गया उत्पादन मूल्य प्रति इकाई ही अनुलाभ की राशि होगी। इन सुविधाओं व सेवाओं के लिए कर्मचारी द्वारा अदा की गयी कोई भी राशि, ऊपर दी गयी कुल रकम से घटा दी जाएगी।
IV. निःशुल्क या रियायती शिक्षा - निःशुल्क या रियायती शिक्षा के चलते, अनुलाभ यह मानकर नियत किया जाएगा कि ऐसे सभी खर्चे कर्मचारी द्वारा वहां किए जा रहे हैं, और इसमें वे सभी मामले शामिल किए जाएंगें, जहां नियोक्ता उस शिक्षा संस्थान को चला रहा है, उसका रख रखाव कर रहा है या फिर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसके लिए आर्थिक प्रबंध कर रहा है। इन सुविधाओं व सेवाओं के लिए कर्मचारी द्वारा अदा की गयी कोई भी राशि, ऊपर दी गयी कुल रकम से घटा दी जाएगी। परन्तु जहां ऐसी शिक्षा संस्थानों का मालिक नियोक्ता स्वयं है और वह ही उनका प्रबंधन कर रहा है या फिर उसको यह निःशुल्क शिक्षा सुविधाएं, नियोक्ता के यहां कार्यरत होने के उपलक्ष में दी जा रहीं हैं, तो कर्मचारी के लिए अनुलाभ की राशि, यदि इस शिक्षा या सुविधा पर व्यय होने वाली राशि प्रति बालक 1000/- रूपए प्रति माह से अधिक हो, उस क्षेत्र में या उसके समीप स्थित ऐसी ही संस्थान में शिक्षा पर खर्च हो रही राशि के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
V. ब्याज रहित या रियायती ऋण - कर्मचारियों या उनके परिवार के किसी सदस्य को ब्याज रहित या रियायती ऋण उपलब्ध कराना, एक आम चलन है, विशिष्ट रूप से वित्तीय संस्थाओं में। ऐसे ऋणों से उत्पन्न अनुलाभ की राशि वह होगी जो नियत ब्याज दर के अतिरिक्त देय है व कर्मचारी या उसके परिवारजन द्वारा भुगतान किए जाने वाले वास्तविक ब्याज के मध्य अंतर के बराबर हो। अब यह नियत ब्याज दर वह होगी जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा इस प्रकार के व इसी उद्देश्य से जनसाधारण को उपलब्ध कराए जाने वाले ऋणों पर, उपयुक्त वित्तीय वर्ष के पहले दिन वसूले जाने वाले वार्षिक दर के बराबर होगी। अनुलाभ की राशि, अधिकतम बकाया मासिक शेष भाग तरीके के आधार पर परिकलित की जाएगी। इस नियम के तहत अनुलाभ राशि निकालने के लिए, नियोक्ता द्वारा प्रयोग किया गया परिकलन का कोई अन्य तरीका मान्य नहीं होगा।
हालांकि, 20,000 रूपए से कम कुल योग के छोटे ऋण, इससे मुक्त हैं। नियम 3क में स्पष्ट रूप से बताए गए चिकित्सा व इलाज हेतु लिए गए ऋण भी इससे मुक्त हैं, यदि उस ऋण की राशि की किसी चिकित्सीय बीमा योजना के द्वारा प्रतिपूर्ति नहीं की जा रही हो। जहाँ कोई चिकित्सीय बीमा प्रतिपूर्ति प्राप्त की जाती है, वहां अनुलाभ राशि, नियत दर पर, प्रतिपूर्ति की तारीख से प्रतिपूर्ति की राशि पर लगाई जाएगी, पर इस उद्देश्य से लिए गए ऋण की शेष राशि के एवज़ में चुकायी नहीं जाएगी।
VI. पूँजी का उपयोग - किसी नियोक्ता की पूँजी का उसके कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा उपयोग किया जाना एक आम बात है। इस मामले में अनुलाभ की राशि उस पूँजी के मूल दाम के 10 प्रतिशत के हिसाब से देय होगी या फिर ऐसे प्रयोग के लिए कर्मचारी से वसूले गए शुल्क के अनुसार कम कर दी जाएगी। परन्तु कंप्यूटर या लैपटॉप के प्रयोग के लिए कोई अनुलाभ नहीं देय होगा।
VII. पूँजी व परिसम्पत्ति का स्थानांतरण - अधिकांशतः एक कर्मचारी या उसके परिवार का कोई सदस्य चल संपत्ति (शेयर्स या बीमा को छोड़कर) के निःशुल्क या फिर उसके बाजारी मूल्य से कम खर्चे में नियोक्ता द्वारा स्थानांतरण से लाभान्वित होता है। उस चल संपत्ति (शेयर्स व बीमा को छोड़कर) की मूल कीमत तथा कर्मचारी द्वारा भुगतान की गयी, यदि की गयी है तो, राशि के अंतर को ही अनुलाभ का मूल्य मान लिया जाएगा। उस चल संपत्ति के मामले में जहाँ उसका पहले से ही प्रयोग किया जा चुका है, उसकी मूल कीमत में से इस्तेमाल किए जाने वाले प्रति वर्ष के अंत में मूल कीमत से उसका 10 प्रतिशत घटा दिया जाएगा। परन्तु कम्प्यूटर्स व विद्युत उपकरणों के मामलों में, उनके अधिक मूल्यह्रास होने के कारण, अनुलाभ का मूल्य निकालने के लिए प्रत्येक वर्ष के अंत में, मूल मूल्य से 50 फीसदी कीमत कम कर दी जाती है। इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का मतलब डाटा संग्रह व संचालन करने वाले उपकरण जैसे कि कंप्यूटर, अंकीय (डिजिटल) डायरीज़ तथा प्रिंटर्स. इनमें घरेलू उपकरण (यानि की सफ़ेद बजाजी सामान- व्हाइट गुड्स) जैसे कि वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव ओवेन्स, मिक्सर्स, गर्म प्लेट्स, ओवेन्स इत्यादि शामिल नहीं हैं। उसी प्रकार से कारों के मामले में, अनुलाभ का मूल्य निकालने के लिए, इस्तेमाल किए जाने वाले प्रत्येक वर्ष के अंत में, उसके मूल मूल्य से 20 फीसदी कीमत, लघुकारक शेष भाग पद्धति के अनुसार, कम कर दी जाती है।
VIII. खंड 17(2)(v) के तहत नियोक्ता द्वारा 15,000 रूपए प्रति वर्ष से अधिक की चिकित्सीय प्रतिपूर्ति को अनुलाभ की तरह माना जाएगा - यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि जो लाभ विशिष्ट रूप से खंड 10 (13क), 10(5), 10 (14), 17 इत्यादि के तहत छूट प्राप्त हैं, वे छूट प्राप्त या अनुलाभ से मुक्त बने रहेंगे। इनमें जो लाभ शामिल हैं, उनमें पर्यटन व स्थानांतरण के लिए यात्रा, छुट्टी की यात्रा, यात्रा का खर्च उठाने के लिए निर्धारित दैनिक भत्ता, कुछ हालात में चिकित्सीय सुविधाएँ आदि प्रमुख हैं।
5.2 मुख्य विषय "वेतन" (छूट) में आमदनी शामिल नहीं हैं- अधिनियम के खंड 192 के उद्देश्य के लिए निम्न किसी भी धारा के अंतर्गत आने वाली आय में वह आय शामिल नहीं होगी, जो वेतन की संगणना से होती है:-
(1) किसी भी कर्मचारी को अपने व अपने परिवार के लिए, उसके नियोक्ता या भूतपूर्व नियोक्ता से उसके (क) भारत में किसी भी स्थान पर छुट्टी पर जाने या (ख) अपनी नौकरी से सेवा-निवृत्ति या भारत में कहीं भी नौकरी से निकाले जाने पर प्राप्त यात्रा में कोई रियायत या मदद, खंड 10 की धारा (5) के तहत प्राप्त छूट का हकदार है, परन्तु आयकर नियमों, 1962 के कानून 2ख में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही।
इस धारा के प्रयोजन हेतु, किसी व्यक्ति के संबंध में "परिवार" का अर्थ है:
(i) उस व्यक्ति का पति/पत्नी तथा बच्चे; व
(ii) उस व्यक्ति के माता-पिता, भाई बहन या इनमें से कोई भी, जो आंशिक रूप से या पूरी तरह से उस व्यक्ति पर आश्रित हो।
यहाँ यह ध्यान देने की बात है कि इस धारा के तहत छूट का मूल्य इन उद्देश्यों के तहत की गयी यात्रा पर वास्तविकता में व्यय की गयी राशि से किसी भी सूरत में अधिक नहीं होना चाहिए।
(2) मृत्यु व सेवा-निवृत्ति आनुतोषिक (ग्रेटूइटी) या कोई अन्य आनुतोषिक, जिसमें खंड 10 की धारा 10 के तहत उस सीमा तक छूट मिलती है जो पूरी आय की गणना में शामिल किए जाने तक छूट के लिए निर्धारित है।
(3) केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य सदृश योजना जो केंद्र की प्रशासनिक सेवाओं के सदस्यों पर लागू हो या केंद्र के अंतर्गत प्रशासनिक पदों/सुरक्षा सेवा के पदों पर या फिर राज्य के प्रशासनिक पदों पर कार्यरत लोगों या फिर अखिल भारतीय सेवाओं/सुरक्षा सेवाओं के सदस्यों या फिर केन्द्रीय, राजकीय या प्रांतीय कानून द्वारा स्थापित किसी स्थानीय प्राधिकरण या नगरपालिका के कर्मचारियों, के नागरिक पेंशन (समपरिवर्तन) नियमों के अंतर्गत पेंशन समपरिवर्तन के एवज़ में प्राप्त कोई भी भुगतान, खंड 10 की धारा (10क) की उपधारा (i) के तहत कर से मुक्त होता है। किसी अन्य नियोक्ता की किसी अन्य योजना के तहत पेंशन के समपरिवर्तन में प्राप्त कोई भी भुगतान, कर में छूट खंड 10 की धारा (10क) की उप-धारा (ii) के प्रावधानों से नियंत्रित होगा। इसके साथ केंद्र की सशस्त्र सेनाओं द्वारा स्थापित किसी भी रेजिमेंट कोष या गैर-नागरिक कोष जो खंड 10 (23ककख) में उल्लेखित है, से पेंशन समपरिवर्तन के एवज़ में प्राप्त कोई भी भुगतान खंड 10 की धारा (10क) की उप-धारा (iii) के अंतर्गत कर से मुक्त है।
(4) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के कर्मचारी द्वारा प्राप्त कोई भी भुगतान, जो उसके सेवा-निवृत्ति के समय उसके नाम पर चढ़ी अर्जित छुट्टियों के एवज़ में प्राप्त नकदी जो छुट्टी के वेतन के समतुल्य हो, चाहे वह सेवा निवर्तन पर हो या ऐसे ही, वह खंड 10 की धारा (10कक) की उप-धारा (i) के तहत कर से मुक्त होता है। अन्य कर्मचारियों के मामले में, यह छूट इस बात से निर्धारित होगी कि मासिक पेंशन के साथ सेवा-निवृत्त होने पर उसके खाते में कितनी छुट्टियाँ हैं जो अधिकतम 10 महीने की छुट्टी के समतुल्य हो सकती हैं। यह छूट, उन कर्मचारियों के सन्दर्भ में जो 1-4-1998 के बाद मासिक पेंशन या ऐसे ही सेवा-निवृत्त होते हैं के लिए, भारत सरकार की 31-5-2002 को जारी की गयी अधिसूचना संख्या एस. ओ 588 (ड.), के तहत निर्धारित अधिकतम मूल्य, जो कि 3,00,000 रूपए है, तक ही सीमित होगी।
(5) खंड 10(10ख) के अंतर्गत, किसी श्रमिक द्वारा प्राप्त छटनी मुआवज़ा, कुछ सीमाओं तक, आयकर से मुक्त है। अधिकतम छटनी मुआवजा जो आयकर से मुक्त है, यह वह राशि है जिसका औद्योगिक प्रतिवाद कानून, 1947 खंड 25च(ख) में उल्लेखित आधार पर आंकलन किया जाता है, या कोई भी अन्य 50,000 रूपए से अधिक की राशि जिसकी केन्द्रीय सरकार के अधिकारिक गज़ट में अधिसूचना जारी की गयी है, इनमें से जो भी कम हो। ये सीमाएं उन मामलों में नहीं लागू होंगी जहाँ मुआवज़ा ऐसी किसी योजना के तहत मिलता है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस विषय के निमित्त स्वीकृत हो तथा जिसे उस उपक्रम में कार्यरत कारीगरों, जिसमें यह स्कीम लागू होती है, को विशेष सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तथा अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों में दिया जाता है। ऐसे भुगतान की अधिकतम सीमा 5,00,000 रूपए है जहाँ छटनी 1-1-1997 को या उसके बाद हो।
(6) खंड 10 (10ग) के तहत, निम्न संस्थाओं के किसी कर्मचारी को अपने स्वैच्छिक सेवा-निवृत्ति या नौकरी से निकाले जाने पर, प्राप्त या प्राप्त होने वाला (चाहे वह किश्तों में ही हो) कोई भी भुगतान जो स्वैच्छिक सेवा-निवृत्ति की किसी योजना के अनुसार प्राप्त हो या फिर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के मामले में स्वैच्छिक अलगाव की किसी योजना के अनुसार प्राप्त हो, वह आयकर से उस सीमा तक मुक्त होता है जब तक ऐसी राशि पांच लाख रूपए से अधिक नहीं पहुँच जाती:
(क) एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी;
(ख) कोई अन्य कंपनी;
(ग) केंद्र, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के अंतर्गत स्थापित प्राधिकरण;
(घ) एक स्थानीय प्राधिकरण;
(ड) एक सहकारी सोसायटी;
(च) केंद्र, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित या शामिल यूनिवर्सिटी या कोई संस्थान जो यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन अधिनियम, 1956 के खंड 3 के तहत यूनिवर्सिटी घोषित किया गया हो;
(छ) कोई भी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलाजी जो इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलाजी कानून 1961 की धारा 3 के नियम (छ) के मायने के भीतर हो;
(ज) वैसे मैनेजमेन्ट इंस्टीट्यूट जिसे केंद्र सरकार ने अधिकारिक गजट की अधिसूचना के तहत अपनी तरफ से स्पष्ट रूप से बताए।
वीआरएस के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कर्मचारियों, देश भार के किसी भी राज्य या राज्यों के अधिसूचित प्रमुख्य संस्थानों के कर्मचारियों को मिलने वाली राशि पर छूट है। यहाँ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जहाँ यह छूट किसी भी कर्मचारी को किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए प्राप्त है, यह उसे यह किसी दूसरे वर्ष में किसी अन्य वर्ष के लिए नहीं मिल सकता है।
(7) जीवन बीमा योजना के अंतर्गत मिलने वाली कोई भी राशि, जिसमें ऐसे किसी भी योजना पर मिलने वाले अधिलाभ भी शामिल है बशर्ते यह
(i) राशि धारा 80घघ की उपधारा(3) या धारा 80घघक की उपधारा(3) के तहत मिली हो या ,
(ii) कीमैन बीमा योजना से मिलने वाली कोई भी राशि या ,
(iii) दिनांक 1-4-2003 के बाद जारी कोई भी बीमा योजना के तहत मिलने वाला धन जिसके लिए साल भर में भुगतान किया जाने वाली क़िस्त वास्तविक बीमित राशि के 20 फीसदी से ज्यादा हो। हालाँकि बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाने की स्थिति में मिलने वाली राशि पर छूट मिलेगी ।
(8) भविष्य निधि कोष से मिलने वाली कोई भी राशि, बशर्ते यह निधि प्रोविडेंट फण्ड एक्ट, 1925(1925 की 19वीं) के अंतर्गत जारी हो, या फिर केंद्र सरकार द्वारा स्थापित हो और उसकी तरफ से गजट में अधिघोषित हो।
(9) आयकर कानून की धारा 10(13क)13 के तहत, निधारित व्यक्ति को उसके नियोक्ता द्वारा मिलने वाला कोई भी विशेष वृत्ति खास कर किराये( चाहे इसे कुछ भी नाम से कहा जाये) के रूप में दी जाती हो। उस स्थान के लिए जहाँ वो कर्मचारी रहता हो आयकर से छूट के लिए स्वीकृत है, इसके लिए उसे स्वीकृत क्षेत्र और इलाके में होना चाहिए या फिर अन्य मान्य सीमाओं के भीतर होना चहिये। आयकर कानून 1962, की धारा 2क के अंतर्गत किराये के रूप में मिलने वाले विशेष वृत्ति पर छूट की सीमा निम्नलिखित होगी -
(a) कर्मचारी द्वारा इस अवधि में ऐसे किसी वृत्ति के रूप में मिलने वाली मूल राशि के ऊपर, या
(b) किराया देने के मद में इस पूरी अवधि में पूरे वेतन के दसवें हिस्से से ज्यादा खर्च हुए राशि पर, या
(c) अगर यह किराये की जगह बॉम्बे( मुंबई), कलकत्ता (कोलकाता), दिल्ली या मद्रास (चेन्नई) में हो तो कर्मचारी को इस पूरे अवधि के लिए वेतन की 50 प्रतिशत राशि पर , या
(d) अगर ये स्थान अन्य किसी शहर में हो तो इस पूरे अवधि के लिए वेतन के 40 फीसदी पर मिलेगा, इनमे से जो सबसे कम हो।
इस काम के लिए "वेतन" का मतलब है मूल वेतन और मंहगाई भत्ता का जोड़, अन्य कोई भी अतिरिक्त राशि या वृत्ति इसमें शामिल नहीं हों।
यहाँ यह ध्यान में रखना है कि कर निर्धारण के द्वारा वास्तव में किराये के रूप में खर्च हुए रकम पर जो नियम 2 क 2, के अंदर हो पर ही यह छूट लागू होगी। इस तरह किसी कर्मचारी को किराये के रूप में मिलने वाली राशि पर आयकर में यह छूट नहीं मिलेगी अगर वो खुद के घर में रह रहा हो। यह राशि देने वाले अधिकारी को वास्तविक किराये के सबूत को देख कर खुद संतुष्ट होंना है कि यह इसी मद में खर्च हुआ है और इसके बाद ही यह कर्मचारी के वेतन से कर के छूट के रूप में शमिल करना है।
किराये के रूप में वास्तविक रूप से दिए गए धन की आयकर गणना के लिए वेतन से कटौती की सीमा धारा 10(13क) के तहत पहले से अपेक्षित है, मगर अधिकारिक रूप से यह तय किया गया है कि वेतनभोगी कर्मचारियों को जिनकी एक महीने के किराये की रकम 3000 रूपये से कम है कोई रसीद पेश करने की जरुरत नहीं होगी। मगर यह सिर्फ कर युक्त वेतन के निर्धारण के लिए है, अगर कर की जाँच करने वाला अधिकारी चाहे तो खुद को संतुष्ट करने के लिए वो ऐसी किसी भी रसीद की मांग कर सकता है।
(10) धारा 10 का खंड (14) निम्नलिखित वृत्तियों पर भी छूट का प्रावधान देता है -
(i) धारा 2खख के अंतर्गत अपना काम सही ढंग से निपटने के लिए दिया जाने वाली कोई भी वृत्ति जब तक यह खर्च उसी मद में किया गया हो।
(ii) किसी भी कर्मचारी को उसके व्यक्तिगत खर्चे के लिए दी जाने वाली वृत्ति जो नियुक्ति के स्थान या फिर उसके रहने के स्थान के हिसाब से बढ़े हुए खर्चों को ध्यान में रखते हुये दिए जातें हों।
हालाँकि (ii) में वर्णित वृति कर्मचारी को उसके काम के मद में वेतन की क्षतिपूर्ति के तौर पर व्यक्तिगत वृति के रूप में नहीं दिए जाने चाहिए, यह सिर्फ उसकी नियुक्ति की या रहने की जगह के आधार पर ही दिया जाना चाहिए।
सीबीडीटी (केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर विभाग) ने अधिसूचना संख्या एसओ 617(ई) दिनांक 7 जुलाई 1995 (एफ संख्या 142/9/96-टीपीएल) के तहत खंड (i) और (ii) के लिए नियम निर्धारित किये हैं। इन नियमों को अधिसूचना संख्या एसओ संख्या 403(ई) दिनांक 24-4-2000(एफ संख्या 142/34/99-टीपीएल) के द्वारा संशोधित किया गया। एक कर्मचारी को अपने निवास स्थान से अपने कार्यस्थल जाने में होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए दिया जाने वाला परिवहन भत्ता, देखें अधिसूचना एस.ओ.संख्या 395(ई), दिनांक 13-5-1998 के तहत आयकर से मुक्त होता है, जब तक यह 800 रूपए प्रति महीने से अधिक न हो।
(11) किसी केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या फिर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के कर्मचारी के द्वारा अपने सेवा-निवृत्ति के लाभों से मिली राशि को जमा करने पर उसपर मिलने वाले ब्याज पर आयकर कानून के खंड 10(15)(iv)(i) के तहत, आयकर से मुक्त होगा। नोटिफिकेशन सं एफ 2-14-89- एन एस -II दिनांक 7-6-1989, को संशोधित किया गया । 2/14/89- एन एस -II 12-10-1989 को , केन्द्रीय सरकार ने एक योजना को नोटीफाईड किया है 1989 में जिसे सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए डिपोजिट योजना को इसी अधिसूचना को लक्षित करने के लिए बनाया गया ।
(12) धारा 10 की खंड (18)) के तहत वह व्यक्ति आता है ,जो केंद्र सरकार या राज्य सरकार की सेवा में था,उस की पेंशन से होने वाली आय होती हो और जिसे परम वीर चक्र, महावीर चक्र या वीर चक्र जैसे वीरता पुरस्कार उसे या उसके परिवार के लोगों को मिले हों। इस सन्दर्भ में परिवार के आशय कानून की धारा 10(5)के भीतर होगीA यह अधिघोषणा अधिघोषणा संख्या एसओ 1948(ई) दिनांक 24-11-2000 और 81(ई), दिनांक 29-1-2001 के तहत किया गया और जो संलग्नक VI-क & VI-B के रूप में संलग्न है ।
(13) कानून की धारा 17 के अंतर्गत निम्नलिखित पर भी कर में छूट मिलेगा—
(a) कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य को नियोक्ता के किसी अस्पताल में दिए जाने वाली चिकित्सा के लिये खर्च पर;
(b) नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य के इलाज पर हुए वास्तविक खर्च पर ;
(i) सरकार या फिर स्थानीय प्रशासन द्वारा संचालित अस्पताल या फिर सरकार द्वारा स्वीकृत अस्पताल में ही कर्मचारी का इलाज होना चाहिए;
(II) आयकर कानून 1962 के नियम 3क(2) में बतायी गई बीमारियों, मुख्य आयुक्त द्वारा आयकर कानून 1962 के नियम 3(क) (1) द्वारा स्वीकृत किसी अस्पताल में इलाज होना चाहिए:
(c) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी की स्वास्थ्य बीमा की किस्त (योजना केन्द्र सरकार या फिर बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत होनी चाहिए) या फिर कर्मचारी द्वारा अपने और या अपने परिवार के लिए कराये गए चिकित्सा बीमा की किस्त के पुनःभुगतान पर;
(d) किसी कर्मचारी द्वारा खुद या अपने परिवार की चिकित्सा के लिए किसी डाक्टर की फीस के रूप में खर्च की गई राशि पर जब यह राशि एक साल में 15,000 से ज्यादा न हो ।
(e) रिजर्व बैंक द्वारा स्वीकृत सीमा तक विदेश में कराये गए चिकित्सा में कर्मचारी द्वारा खुद पर या अपने परिवार के किसी सदस्य के ऊपर खर्च की गई वास्तविक राशि जिसमें आने जाने का खर्च, ठहरने और इलाज की राशि भी शामिल हो ।पऱ यहाँ ध्यान देने योग्य बात ये है कि विदेश यात्रा जिसमें मरीज और उसके साथ एक तीमारदार का खर्च तभी इससे मुक्त होगा जब उस कर्मचारी की आमदनी दो लाख से ज्यादा न हो।
चिकित्सा पर मिलने वाली छूट के सन्दर्भ में अस्पताल का मतलब डिस्पेंसरी, क्लिनिक या नर्सिंग होम से भी है और परिवार का आशय पत्नी, बच्चों से है। परिवार में माता-पिता, भाई और बहन भी शामिल हैं अगर वे कर्मचारी पर ही मुख्य रूप से आश्रित हों।
कानून की धारा 16 के तहत छूट
5.3 मनोरंजन भत्ता - धारा 16 के खंड (ii) के तहत नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को अगर वो सरकारी सेवा में है तो मनोरंजन के नाम पर दिया जाने वाला कोई भी भत्ता, जो उसकी वेतन के पांचवें हिस्से के बराबर हो ( जिसमे ऐसी सभी सुविधाएँ शामिल हो) या पांच हजार रूपये जो भी कम हो पर छूट लागू है। गैर सरकारी कर्मचारियों को ऐसी कोई भी छूट नहीं उपलब्ध है।
नियोजन पर कर
भारतीय संविधान की धारा 276 खंड (2) के अनुसार नियोजन (व्यवसायिक कर) पर लगने वाला कर किसी भी कानून के तहत होने वाली आमदनी गणना के लिए 'वेतन' की श्रेणी में रखा जायेगा।
यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कुल तनख्वाह पर मिलने वाला 'मौलिक छूट' (स्टैंडर्ड डिडक्शन) जो वर्ष 2004-05 तक उपलब्ध था वो वित्तीय वर्ष 2005 से नहीं लागू रहेगा।
5.4 कानून के अध्याय VI-ए के तहत छूट - कर्मचारी की कर योग्य आमदनी की गणना करते समय अध्याय VI-ए के तहत निम्नलिखित छूट लागू हैं। यह छूट कुल आमदनी पर लागू हैं :
A. धारा 80ग के अंतर्गत कर्मचारी चालू वित्त वर्ष में एक लाख रूपये तक निम्नलिखित योजनाओं में जमा किये गए रकम पर कर की छूट का हक़दार है:
(1) बीमा की किस्त के रूप में भुगतान की गई राशि चाहे वो खुद के लिए हो या अपनी पत्नी या बच्चों के लिए
(2) बाद में एकमुश्त मिलने वाले किसी बीमा की योजना के किस्त के रूप में जमा की गयी रकम चाहे वो खुद के लिए हो या अपनी पत्नी या फिर बच्चों के लिए हो। यह योजना संख्या 7 में बताई गई योजना नहीं होनी चाहिये और इसका भुगतान नगद में नहीं होना चाहिए।
(3) कोई भी राशि जो उसे मिलने वाले वेतन से तय नियमों के तहत काटी गयी हो, चाहे सरकार द्वारा या फिर किसी व्यक्ति द्वारा उसके लिए या फिर उसके बच्चों के नाम से भविष्य में मिलने वाले बीमा योजना के लिए हो, मगर ये राशि उसकी कुल वेतन की पांचवें हिस्से से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
(4) कोई भी भुगतान जो निन्मलिखित मद में किया गया हो:
(क) किसी व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रोविडेंट फंड में जिस पर प्रोविडेंट फंड कानून 1925 लागू होता हो ।
(ख) केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित किसी प्रोविडेंट फंड में जिसे अधिकारिक गजट में अधिसूचित किया गया हो,और जो उस व्यक्ति, उसकी पत्नी या फिर बच्चों के नाम से हो ( केन्द्र सरकार ने अधिसूचना संख्या एसओ 1559(ई) दिनांक 3-11-2005, के जरिये पब्लिक प्रोविडेंट फंड को अधिसूचित किया है)
(ग) किसी कर्मचारी द्वारा किसी स्वीकृत प्रोविडेंट फंड में।
(घ) किसी कर्मचारी द्वारा किसी भी स्वीकृत सालाना लाभ देने वाली योजना में( ध्यान देने वाली बात ये है कि यह भुगतान किसी कर्ज की किस्त की नहीं होनी चाहिए)
(5) कोई भी भुगतान जो:
(क) केन्द्र सरकार की किसी भी सेक्यूरिटी योजना में या ऐसे किसी जमा योजना में जिसकी घोषणा अधिकारिक गजट में किया गया हो
(ख) केन्द्र सरकार के सेविंग सर्टिफिकेट कानून 1959 की धारा 2(ग) के तहत परिभाषित किसी भी सेविंग सर्टिफिकेट जिसकी घोषणा सरकारी गजट में किया गया हो, में किया गया निवेश (केन्द्र सरकार ने अधिसूचना संख्या एस ओ 1560(ई) दिनांक 3-11-2005 द्वारा नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट को नोटिफाई किया)
(6) किसी व्यक्ति द्वारा खुद के लिए या अपनी पत्नी या बच्चों के लिए भुगतान की गई राशि पर
(क) यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के यूनिट लिंक्ड प्लान 1971 में
(ख) एलआईसी म्चुअल फंड के किसी भी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंश प्लान में जो धारा 10 की उपखंड (23घ) के तहत हो (केन्द्र सरकार ने एलआईसी म्चुअल फंड के यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंश प्लान ( जिसे पहले धनरक्षा, 1989 के नाम से जाना जाता था) को अधिसूचना संख्या 1561(ई) दिनांक 3-11-2005 से गजट में अधिसूचित किया)
(7) जीवन बीमा निगम की किसी भी योजना या फिर किसी अन्य बीमाकर्ता कंपनी की योजना मैं लगाया गया धन जिसकी अधिसूचना सरकारी गजट में की गई हो ( केन्द्र सरकार ने न्यू जीवन धारा, न्यू जीवन धारा-I, न्यू जीवन अक्षय , न्यू जीवन अक्षय-I और न्यू जीवन अक्षय-II को अधिसूचना संख्या 1562(ई) 3-11-2005 के जरिये और जीवन अक्षय - III अधिघोषणा संख्या 847(ई), 1-6-2006 अधिघोषित किया) ।
8. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के म्चुअल फंड में निवेश किया गया धन धारा 10 के नियम (23घ) के किसी भी योजना में किया गया कोई भी निवेश छूट लागू होगा ये योजनाएं केन्द्रीय सरकार द्वारा गजट में अधिघोषित होना चाहिए ( केन्द्रीय सरकार ने अधिघोषणा संख्या एसओ 1563(ई) 3-11-2005 में इक्युटी लिंक्ड सेविंग स्कीम को घोषित किया गया था) 1-4-2006 के बाद इक्युटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में किया गया निवेश भी धारा 80ग के तहत छूट के लिए स्वीकृत किया है।
9. किस व्यक्ति द्वारा किसी भी म्चुअल फंड जो धारा 10 के नियम 23घ के तहत अधिशासी या किसी विशेष कंपनी द्वारा जारी म्चुअल फंड में किया गया हो या फिर यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया की किसी योजना में जो केन्द्र सरकार द्वारा ट्रांसफर ऑफ अंडरटेकिंग एंड रिपिल कानून 2002 के तहत हो (केन्द्र सरकार ने यूटीआई- रिटायरमेंट बेनीफिट पेंशन फंड को अधिसूचना संख्या अधिघोषित किया)
10. किसी भी जमा योजना या पेंशन फंड में किया गया निवेश जिसे नेशनल हाऊसिंग बैंक ने स्थापित किया हो , जिसे केन्द्र सरकार ने गजट में अधिघोषित किया हो ।
11. किसी भी ऐसी योजना के किस्त के रूप में जमा किया गया धन जिसे सरकार ने गजट में अधिघोषित किया हो, जिसके द्वारा कोई सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनी लंबे समय के लिए घर बनाने या फिर खरीदने के लिए कर्ज उपलब्ध कराती हो या फिर भारत में स्थापित कोई ऐसा प्राधिकरण चाहे वो किसी कानून के तहत हो जो आवास उपलब्ध करने के काम या उसकी योजना बनाने, विकास करने या शहरों, गांवों आदि के बेहतरी के लिए कार्यरत हो.(केन्द्र सरकार ने हुडको के पब्लिक डिपाजिट स्कीम को अधिघोषणा संख्या एसओ 37(ई) 11-1-2007 से धारा 80C(2)(xiv)(क) के लिए अधिघोषित किया)
12. किसी भी करदाता द्वारा घर बनाने या खरीदने के लिए दिया गया हो, जिससे होने वाली आमदनी को, जायदाद से होने वाली कमाई की श्रेणी में रखा जा सके( या जिस करदाता द्वारा खुद के रहने के लिए न इस्तेमाल किया जा रहा हो) जहाँ इस काम के लिए भुगतान किस्तों में किया जा रहा हो और यह राशि स्वपोषित या फिर दूसरी योजना के तहत किस विकास प्राधिकरण या हाऊसिंग बोर्ड आदि से ली गई हो।
यह कटौती करदाता को उस हाल में भी हासिल है जब यह सरकार, किसी बैंक, जीवन बीमा निगम या राष्ट्रीय आवास बैंक या फिर ऐसे ही श्रेणी के किसी संस्थान से लिए गये कर्ज के किस्त के रूप चुकी जा रही हो। नियोक्ता से इस उद्देश्य के लिया गया कर्ज की किस्त भी इसी श्रेणी में होगा, अगर नियोक्ता सरकारी संस्थान हो या फिर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हो या फिर कोई विश्वविद्यालय हो, कोई सहकारी संस्थान हो या कोई प्राधिकरण हो, या कोई निगम हो या फिर केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा स्थापित कोई अन्य संस्थान हो।
इस मद में लगने वाला स्टाम्प डियूटी, पंजीयन फीस और अन्य खर्चे भी इस मे शामिल हैं, हालाँकि ऐसे घर के विस्तार, बदलाव के खर्च इसमें शामिल नहीं है, जो इसके पूर्ण होने के प्रमाण पत्र जारी होने के बाद किया गया हो। आयकर कानून की धारा 24 के तहत नहीं मिलने वाली कटौती जो मकान के खरीद या निर्माण पर नही मिलती हो वो इस मामले में भी लागू नहीं होगी।
करदाता द्वारा कोई भी ऐसी जायदाद जिस पर ऐसी कटौती मिल रही को पांच साल से पहले हस्तांतरित कर दिया गया हो और जिस कर्ज को लौटा दिया गया हो जो आयकर की धारा 80ग(2)(xviii) में उल्लेखित, ऐसे मामले में कोई कटौती नहीं मान्य होगी। जिस पर पिछले सालों में कटौती दी जा चुकी हो और जिसे करदाता की पिछले सालों की आमदनी में शामिल किया जा चुका हो।
(13). ट्यूशन फीस, चाहे वह नामांकन के समय या उसके बाद बच्चों को पूर्ण-कालिक शिक्षा प्रदान करने का मकसद भारत में स्थित किसी यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल या अन्य शैक्षणिक संस्थान भुगतान किया गया हो, तो कर्मचारी के किसी दो बच्चों को इसमें छूट दी जा सकती है।
पूर्ण-कालिक शिक्षा में किसी यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल या अन्य शैक्षणिक संस्थान द्वारा प्रस्तावित शैक्षणिक पाठ्यक्रम शामिल होगा, जिसमें छात्र का पूर्ण-कालिक नामांकन होना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि पूर्ण-कालिक शिक्षा में प्ले-स्कूल संबंधी गतिविधियां, प्री-नर्सरी और नर्सरी कक्षा भी शामिल मानी जाएगी।
यह स्पष्ट किया जाता है कि ट्यूशन फी के तौर पर मंजूर की गई रकम का भुगतान भारत में किसी यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल या अन्य शैक्षणिक संस्थान को किए गए भुगतान के संबंध में होगा, जिसमें डेवलपमेंट फी या डोनेशन या केपिटेशन फी आदि को शामिल नहीं किया जाएगा।
(14). इक्विटी शेयर्स या डिबेंचर्स का सब्सक्रिप्शन को पब्लिक कंपनी द्वारा पूंजी के वैध तौर पर जारी होने का हिस्सा तभी ही बनाया जाएगा, जो किसी बोर्ड या पब्लिक फाइनेंस इंस्टिट्यूशन द्वारा मान्यता प्राप्त हो।
(15). धारा 10 के खंड (23घ) में वर्णित और बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त किसी म्यूचुअल फंड के किसी यूनिट के सब्सक्रिप्शन के संबंध में यदि उस यूनिट की रकम केवल किसी कंपनी की पूंजी के वैध तौर पर जारी होगी।
(16). किसी अनुसूचित बैंक में बतौर टर्म डिपोडिज किया गया निवेश जो पांच साल से कम का नहीं होना चाहिए और जिसका उल्लेख भारत सरकार के आधिकारिक गजट में इसी मकसद से किया गया हो।
(केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना संख्या 122 ई, दिनांक 28-7-2008 को बैंक टर्म डिपोजिट स्कीम, 2006 जारी कर रखी है)
(17). नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट द्वारा जारी किए गए ऐसे बॉन्ड, जिनके संबंध में केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक गजट में अधिसूचना जारी की गई हो।
(18). सीनियर सीटिजेंस सेविंग्स स्कीम रूल्स, 2004 के तहत खोले गए खाते में किया गया निवेश।
(19). पोस्ट ऑफिस टर्म डिपोजिट रूल्स, 1981 के तहत किया गया पांच वर्षीय टाइम डिपोजिट में निवेश।
यह स्पष्ट किया जाता है कि किसी इंशोरेंस पॉलिसी के संबंध में प्रीमियम या कोई अन्य भुगतान केवल एक्चुअल पेमेंट सम एश्योर्ड का 20 फीसदी कटौती के लिए (सब-पारा 2 में वर्णित किए गए डेफर्ड एन्यूटि के लिए किए गए कॉन्ट्रेक्ट के अलावा) वैध माना जाएगा। किसी तरह के वास्तविक पूंजी की गणना करते समय, निम्नलिखित को नहीं जोडा जाएगाः
(i) किसी प्रीमियम की कीमत जिसे लौटाने पर सहमति बनी हो या
(ii) बोनस या अन्य किसी तरीके का फायदा, जिसे पॉलिसी के तहत हासिल किया गया हो।
B. धारा 80 गगग के मुताबिक, जहां एक करदाता ने बतौर व्यक्तिगत करदाता पिछले साल लाइफ इंशोरेंस कॉरपोरेशन आफ इंडिया या किसी अन्य बीमा से धारा 10 के क्लाउज (23 ककख) पेंशन फंड की रकम हासिल की हो और अपनी आमदनी पर टैक्स की रकम का भुगतान किया हो या जमा किया हो तो इस धारा के पूर्व के प्रावधानों के मुताबिक उसके द्वारा पिछले साल जमा की गई एक लाख की रकम तक (करदाता के खाते में यदि किसी तरह का ब्याज या बोनस अर्जित किया गया है तो उसे छोडकर ) उसे कुल आय की गणना करते समय छूट दी जा सकती है।
जहां करदाता द्वारा इस मकसद से किसी तरह की रकम का भुगतान या जमा किया गया हो, तो उस रकम के संबंध में धारा 88 के तहत कर निर्धारण वर्ष 2005-06 और धारा 80 ग के तहत कर निर्धारण वर्ष 2006-07 के लिए छूट/ कटौती नहीं दी जाएगी।
C. धारा 80 गगघ के मुताबिक, जहां एक करदाता 1 जनवरी, 2004 या उसके बाद केंद्र सरकार का कर्मचारी बना हो और विगत वर्ष अधिसूचना संख्या एफ एन 5/7/2003ई-इसीबी एंड पीआर, दिनांक 22-12-2003 के तहत पेंशन स्कीम में किसी रकम का भुगतान या जमा किया हो, तो कुल आय की गणना करते समय उसे उसके द्वारा पिछले साल में उसके वेतन से 10 प्रतिशत तक इस मद में जमा किए गए रकम पर टैक्स में छूट दी जाएगी।
जहां, इस तरह के मामलों में कर्मचारी के खाते में ऐसी पेंशन स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने यदि किसी तरह का निवेश किया है तो कर्मचारी को उसकी कुल आमदनी की गणना करते समय पिछले साल केद्र सरकार द्वारा दिए गए अंशदान को मिलाकर ही अधिकतम 10 फीसदी की रकम पर ही छूट देय होगी।
जहां इस तरह की कोई रकम करदाता को पेंशन स्कीम के तहत हासिल हुई हो, तो इस संबंध में दी जाने वाली छूट उपरोक्त वर्णित प्रावधानों के मुताबिक की जाएगी, जितनी रकम का उसे फायदा हुआ है। यदि करदाता या उसके उत्तराधिकारी को समग्र या आंशिक तौर पर कोई रकम हासिल हुई है, चाहे वह किसी भी वित्तीय वर्ष का हो तो:
(ए) उस रकम के समापन या उसके द्वारा ऐसे पेंशन स्कीम को चुनने पर, या
(बी) एन्यूटी प्लान खरीदने से हासिल पेंशन या ऐसे खाते के समापन पर,
खंड (क) या खंड (ख) में वर्णित ऐसी समूची रकम को करदाता या उसके उत्तराधिकारी की आमदनी के तौर पर समझा जाएगा। जिस वित्तीय वर्ष में यह रकम हासिल होगी उसे संबंधित वित्तीय वर्ष की आय के तौर पर समझा जाएगा और उसी के मुताबिक टैक्स लगाया जाएगा।
धारा 80 गगघ के तहत कटौती के मकसद से, 'वेतन' में वेतन भत्ता भी जोडा जाएगा, यदि कर्मचारी के सेवा-शर्तें में इसका उल्लेख है, लेकिन अन्य सभी भत्ते और सुविधाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
धारा 80 ग, 80 गगग और 80 गगघ के तहत कटौती की कुल रकम 1,00,00 से अधिक नहीं होगी (धारा 80 गगड)
D. आय-कर अधिनियम की धारा 80 घ के प्रावधानों के अनुसार एक करदाता को 15,000 रूपये तक की छूट दी जा सकती है यदि वह हिंदू अविभाजित परिवार या व्यक्तिगत करदाता है। इस संबंध में बीमा के तौर पर किए गए भुगतान के लिए छूट इस प्रकार दी जा सकती हैः
(ए) करदाता के हेल्थ या उसकी पत्नी या पति, अथवा करदाता पर आश्रित माता-पिता या आश्रित बच्चा, जहां करदाता एक व्यक्तिगत करदाता हो,
(बी) परिवार के किसी भी सदस्य के हेल्थ संबंधी जहां करदाता एक हिंदू अविभाजित परिवार हो.
यदि करदाता या परिवार को कोई अन्य सदस्य, जिसके स्वास्थ्य का बीमा कराया गया हो तो वह भी प्रभावी होता है और यदि वह सीनियर सिटीजन है तो उसके लिए 25,000 रूपये तक की छूट दी जाएगी. वर्तमान प्रावधानों के तहत यह भी आवश्यक है कि इस संबंध में किए गए भुगतान का प्रमाण होना चाहिए यानी यह नकद नहीं होना चाहिए।
चूंकि अधिक उम्र के लोगों की स्वास्थ्य बीमा के लिए ज्यादा भुगतान करना होता है, इसलिए यह जरूरी है कि उन्हें अपने माता-पिता को बीमा के दायरे में लाने के लिए इस तरह का प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही, यह भी प्रस्तावित है कि बतौर व्यक्तिगत करदाता कोई व्यक्ति यदि अपने माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा को लागू कराने के लिए यदि किसी तरह की रकम का भुगतान करता है तो इस अवस्था में उसे 15,000 रूपयों तक की अतिरिक्त कर छूट का फायदा दिया जाए। 'आश्रित' के संदर्भ में वर्तमान शर्त के संबंध में माता-पिता को भी उससे दूर रखा गया है. व्यक्तिगत करदाता के स्वास्थ्य बीमा को यह कटौती मौजूदा उपलब्ध छूटों के अलावा के लिए उसकी पति या पत्नी और आश्रित बच्चों को ही दिया जाएगा।
आगे यह भी प्रस्तावित है कि व्यक्तिगत करदाता के माता-पिता, जिनका स्वास्थ्य बीमा कराया गया है और वे सिनियर सिटीजेन हैं, उन्हें 20,000 रूपये तक कर में छूट दी जा सकेगी ।
उदाहरण के तौर पर, बतौर व्यक्तिगत करदाता (नकद के अलावा अन्य किसी भी प्रकार से) विगत वर्ष स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को भुगतान इस प्रकार करता है:
(i) किसी बीमा पॉलिसी को 12,000 रूपये चुका कर अपनी पत्नी या आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य के लिए रख सकता है।
(ii). अपने माता-पिता के लिए 17,000 रूपये चुका कर स्वास्थ्य के लिए बीमा पॉलिसी ले सकता है।
नये प्रस्तावित प्रावधानों के तहत इस संबंध में उसे कुल मिलाकर 27,000 रूपये (12,000 रूपये एवं 15,000 रूपये) की रकम पर छूट दी जाएगी, भले ही उसके माता-पिता सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आते हों या नहीं उन्हें29,000 रूपये( 12000+17000) की कटौती मान्य है । नये प्रस्तावित धारा के तहत कर में कटौती देने के लिए इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाएगा कि माता-पिता आश्रित हैं या नहीं।
उपरोक्त उदाहरण में, यदि माता-पिता के स्वास्थ्य बीमा की लागत 30,000 रूपये है, जिसमें से 17,000 रूपये (नकद के अलावा अन्य किसी भी प्रकार से) का भुगतान पुत्र द्वारा किया जा चुका है और 13,000 रूपये का भुगतान पिता द्वारा किया गया है, जो उनकी कर योग्य आमदनी के संदर्भ में है, तो पुत्र को 17,000 रूपये की कटौती मिलेगी और पिता को 13,000 रूपये की कटौती मिलेगी।
(E). धारा 80 घघ के तहत, जहां एक करदाता, जो भारत का निवासी है, जिसने विगत वर्ष -
(ए) शारीरिक अशक्त व्यक्ति को मेडिकल इलाज (नर्सिंग समेत) प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए किसी तरह के खर्चे के लिए,
(बी) लाइफ इंशोरेंस कॉरपोरेशन या अन्य कोई बीमा या प्रशासक या निर्दिष्ट कंपनी जो इस संबंध में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करती हो और बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त हो तो बतौर शारीरिक अशक्त आश्रित की देखभाल के लिए स्कीम के दायरे में खर्च या जमा की गयी रकम।
करदाता को उस वर्ष उसकी कुल सकल आमदनी से 50,000 रूपयों तक की छूट दी जाएगी।
हालांकि, जहां आश्रित व्यक्ति गंभीर रूप से शारीरिक तौर पर अक्षम हो, तो निर्दिष्ट शर्तां के अनुसार 75,000 रूपयों तक की छूट दी जाएगी।
इस धारा के तहत दी जाने वाली छूट केवल निम्नलिखित शर्तों के आधार पर दी जाएगी:-
(ए) (i) व्यक्तिगत करदाता की मृत्यु होने की दशा में जिसमें नाम से सब्सिक्रिप्शन हो, और वह शारीरिक अशक्त व्यक्ति हो तो ऐसी स्थिति में आश्रित को एन्यूटि या एकमुश्त रकम के भुगतान के संबंध में उपरोक्त खंड (बी) में संदर्भित स्कीम के तहत प्रावधान लागू होंगे।
(ii) बतौर शारीरिक अशक्त एक करदाता या तो आश्रित को नामांकित कर सकता है या किसी अन्य न्यासी अथवा व्यक्ति को बतौर शारीरिक अशक्त आश्रित के फायदे के लिए अपने बदले भुगतान पाने का हकदार बना सकता है।
हालांकि, यदि आश्रित बतौर शारीरिक अशक्त व्यक्ति, कर निर्धारक की पूर्व मृत्यु की दशा में, उपरोक्त सब-पैरा बी के तहत भुगतान की गई रकम या जमा की गई रकम के समान रकम के बराबर समझा जाएगा और पिछले साल के लिए करदाता की आय का मूल्यांकन करते समय यह देखा जाएगा कि करदाता ने पिछले साल इस एवज में कितने रकम की कर की कटौती का फायदा लिया था और उसी के मुताबिक कर निर्धारित किया जाएगा।
(बी) इस धारा के तहत कटौती के लिए क्लेम करते समय करदाता को जिस कर निर्धारण साल के लिए कटौती हेतु क्लेम कर रहा हो, उसके पिछलें साल के लिए धारा 139 के तहत रिटर्न ऑफ इनकम के प्रमाण पत्र के साथ निर्धारित फॉर्म के तहत मेडिकल अथॉरिटी द्वारा जारी प्रमाणपत्र की कॉपी संलग्न करनी होगी।
उस स्थिति में, जहां अशक्तता की स्थिति को दोबारा से मूल्यांकन करने की जरूरत हो तो ऐसे में प्रमाण पत्र में उसका जिक्र होना चाहिए, किसी भी हालत में कटौती नहीं दी जाएगी यदि वह प्रमाण पत्र वैध तय अवधि के बाद को होगा और यदि वह सक्षम मेडिकल अधिकारी की ओर से जारी नहीं होगा या निर्धारित फॉर्मेट के अनुसार जारी नहीं किया गया होगा।
धारा 80 घघ के मकसद के लिए -
(ए) 'एडमिनिस्ट्रेटर' का मतलब यूनिट ट्रस्ट आफ इंडिया (ट्रांसफर आफ अंडरटेकिंग एंड रिपील) अधिनियम, 2002 (2002 के 58) की धारा 2 के खंड 'ए' में उद्धृत किया गया है।
(बी) 'आश्रित' का मतलब-
(i) व्यक्तिगत होने की दशा में, व्यक्ति का पति या पत्नी, बच्चे, माता- पिता भाई और बहन या इनमें से कोई भी,
(II) अविभाजित हिंदू परिवार की दशा में, अविभाजित हिंदू परिवार का एक सदस्य, ऐसे व्यक्तिगत या अविभाजित हिंदू परिवार का पूर्णकालिक आय मुख्य आश्रित, जिससे उसे मदद और देखभाल होती है, और पिछले साल के कर निर्धारण के लिए आय की गणना करते समय धारा 80 प के तहत कर में कटौती का दावा नहीं किया हो।
(सी) 'डिजेबिलिटी' यानी अशक्तता को पर्सन्स विद डिजेबिलिटिज की धारा 2 के खंड आई में संदर्भित (इक्वल अपॉर्चुनिटीज, प्रोटेक्शन आफ राइट्स एंड फुल पार्टिशिपेशन) अधिनियम, 1995 (1996 के 1) और 'ऑटिजम', 'सेरेब्रल पालसी', 'मल्टीपल डिजेबिलिटिज' समेत नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफेयर आफ पर्सन्स विद ऑटिज्म, सेरेब्रल पालसी, मेंटल रिटार्डेशन और मल्टीपल डिजेसिबिलिट एक्ट, 1999 (1999 के 44) में प्रावधान किए गए संबंधित क्लाउज के अनुसार माना जाएगा।
(डी) 'लाइफ इंशोरेंस कॉरपोरेशन' का अर्थ धारा 88 की उप-धारा 8 के खंड तीन में दी गई व्याख्या के मुताबिक माना जाएगा ।
(ई) 'मेडिकल अथॉरिटी' का अर्थ पर्सन्स विद डिजेबिलिटिज की धारा 2 के खंड पी में संदर्भित (इक्वल अपॉर्चुनिटीज, प्रोटेक्शन आफ राइट्स एंड फुल पार्टिशिपेशन) अधिनियम, 1995 (1996 के 1) या 'ऑटिजम', 'सेरेब्रल पालसी', 'मल्टिपल डिजेबिलिटिज', 'पर्सन्स विद डिजेबिलिटिज' और 'सीवेयर डिजेबिलिटिज' को प्रमाणित करने के संबंध में नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफेयर आफ पर्सन्स विद आटिज्म, सेरेब्रल पालसी, मेंटल रिटार्डेशन और मल्टिपल डिसेबिलिटिज को प्रमाणित करने में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सक्षम मेडिकल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत संबंधित क्लाउज के मुताबिक माना जाएगा।
(एफ) 'पर्सन्स विद डिजेबिलिटी' का मतलब पर्सन्स विद डिजेबिलिटिज (इक्वल अपॉर्चुनिटीज, प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स एंड फुल पार्टिशिपेशन) अधिनियम, 1995 (1996 के 1) की धारा 2 के क्लाउज त में संदर्भित या 'ऑटिजम', 'सेरेब्रल पालसी', 'मल्टिपल डिजेबिलिटिज' समेत नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफेयर ऑफ पर्सन्स विद ऑटिज्म, सेरेब्रल पालसी, मेंटल रिटार्डेशन और मल्टीपल डिजेसिबिलिट एक्ट, 1999 (1999 के 44) में धारा 2 के क्लाउज जे में उद्धृत व्याख्या के अनुरूप माना जाएगा।
(जी) 'पर्सन्स विद सिवेयर डिजेबिलिटी' का मतलब-
(i) पर्सन्स विद डिजेबिलिटीज (इक्वल अपॉर्चुनिटीज, प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स एंड फुल पार्टिशिपेशन) अधिनियम, 1995 (1996 के 1) की धारा 56 की उप-धारा 4 में उद्धृत किए गए प्रावधानों के अनुरूप किसी व्यक्ति के 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा अक्षम होने की अवस्था में, या
(ii) नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफेयर ऑफ पर्सन्स विद ऑटिज्म, सेरेब्रल पालसी, मेंटल रिटार्डेशन और मल्टीपल डिजेसिबिलिट एक्ट, 1999 (1999 के 44) में धारा 2 के क्लाउज 'ण' में उद्धृत व्याख्या के अनुरूप माना जाएगा।
(एच) 'निर्दिष्ट कंपनी' का मतलब यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (ट्रांसफर ऑफ अंडरटेकिंग एंड रिपील) अधिनियम, 2002 (2002 के 58) की धारा 2 के क्लाउज 'ज' में उद्धृत किया गया है।
एफ. अधिनियम की धारा 80 ड के तहत उच्चतर शिक्षा हासिल करने हेतु लिए गये लोन की रकम के ब्याज भुगतान की दशा में कर में कटौती निम्नलिखित शर्तों के मुताबिक की जाएगीः
(i) बतौर व्यक्तिगत करदाता, किसी करदाता की कुल आय की गणना करते समय इस धारा में किए गए प्रावधानों के मुताबिक कटौती की अनुमति दी जाएगी। स्वयं या पति अथवा पत्नी या बच्चों की उच्चतर शिक्षा के लिए किसी वित्तीय संस्थान या मान्यता प्राप्त चेरिटेबल संस्थान से लोन हासिल की हो और कर के लिए चार्ज की जाने वाली किसी तरह की आमदनी पर पिछले साल जमा की गई रकम, जिसे लोन के ब्याज के तौर पर चुकाया गया हो।
(ii) इस संबंध में दी जाने वाली कटौती के संदर्भ में आय की गणना करते समय मौजूदा कर निर्धारण वर्ष और ब्याज के संबंध में लगातार अगले सात वर्ष तक उसके भुगतान करने में से जो भी पहले होगा, उसी के अनुरूप इसे माना जाएगा।
इस मकसद से-
(ए) 'मान्यता प्राप्त चेरिटेबल संस्थान' का मतलब उस संस्थान से है जो निर्दिष्ट प्राधिकरण द्वारा क्लाउज धारा 10 के '2ग' अथवा धारा 80 छ की उप-धारा '2' के क्लाउज 'क' में वर्णित नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त और इसी मकसद से गठित किया गया है।.
(बी) 'वित्तीय संस्थान' का मतलब उस कंपनी से है जो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 (1949 के 10) के तहत (इस अधिनियम की धारा 51 में उद्धृत किसी बैंक या बैंकिंग संस्थानों समेत) मान्य हो या कोई अन्य वित्तीय संस्था जो केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक गजट में जारी की गई अधिसूचना के तहत निर्दिष्ट हो,
(सी) 'उच्चतर शिक्षा' का मतलब इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेंट में कोई पूर्णकालिक ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स अथवा गणित और सांख्यिकी समेत विशुद्ध विज्ञान या एप्लाइड साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स से है,
(डी) 'इनीशियल एसेसमेंट इयर' का मतलब पिछले साल के संदर्भ में मूल्यांकन वर्ष, जिस में करदाता लोन पर ब्याज का भुगतान करना शुरू कर देता है।
(जी). चैरिटी के मकसद से दिए जाने वाले किसी प्रकार के दान की रकम को वेतन मद में हुई आमदनी पर डीडीओ की ओर से किसी तरह के छूट की अनुमति नहीं होगी। ऐसी दान की रकम पर करदाता द्वारा कर में छूट के दावे को आय कर अधिनियम की धारा 80 छ के तहत कर में कटौती से छूट दी जा सकती है। हालांकि, निम्नलिखित संगठनों/ निकायों में दी गई दान की रकम के सत्यापन के बाद डीडीओ 50 फीसदी तक के योगदान पर छूट दे सकता हैः
(i). जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड
(ii). प्रधानमंत्री सूखा राहत कोष
(iii). द नेशनल चिल्ड्रेन्स फंड
(iv). इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट
(v). राजीव गांधी फाउंडेशन
और इन संगठनों/ निकायों में दी गई दान की रकम के मामले में 100 फीसदी योगदान पर छूट मिल सकती हैः
(i). नेशनल डिफेंस फंड या प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष
(ii). प्रधानमंत्री के आर्मेनिया भूकंप राहत कोष
(iii). द अफ्रीका (पब्लिक कंट्रीब्यूशंस- इंडिया) फंड
(iv). द नेशनल फाउंडेशन फॉर कम्यूनल हारमनी
(v). चीफ मिनीस्टर्स अर्थक्वेक रिलीफ फंड, महाराष्ट्र
(vi). नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल
(vii). स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल
(viii). आर्मी सेंट्रल वेलफेयर बोर्ड
(ix). इंडियन नेवी बीनिवोलेंट फंड
(x). एयर फोर्स सेंट्रल वेलफेयर फंड
(xi). द आंध्र प्रदेश चीफ मिनीस्टर्स साइक्लोन रिलीफ फंड- 1996
(xii). द नेशनल इलनेस असिस्टेंस फंड
(xiii). किसी भी राज्य या संघ शासित प्रदेश के मामले में कुछ तय परिस्थितियों के संदर्भ में मुख्यमंत्री राहत कोष या लेफ्टिनेंट गवर्नर राहत कोष
(xiv). निर्धारित प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्राप्त किसी राष्ट्रीय महत्व के शिक्षण संस्थान या यूनिवर्सिटी को दिया गया दान.
(xv). केंद्र सरकार द्वारा स्थापित नेशनल स्पोट्र्स फंड
(xvi). केंद्र सरकार द्वारा स्थापित नेशनल कल्चरल फंड
(xvii). केंद्र सरकार द्वारा स्थापित फंड फॉर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एंड एप्लीकेशन
(xviii). नेशनल ट्रस्ट फॉर वेलफेयर ऑफ पर्सन्स विद ऑटिज्म, सेरेब्रल पालसी, मेंटल रिटार्डेशन और मल्टीपल डिजेसिबिलिट
(xix). गुजरात सरकार द्वारा स्थापित गुजरात में भूकंप पीडितों के राहत के लिए स्थापित कोष में दिया गया योगदान
(xx). साक्षरता और साक्षरता-उपरांत गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के मकसद से किसी जिले के गांवों में प्राथमिक शिक्षा में सुधार के उद्देश्य से संबंधित जिले के कलक्टर की अध्यक्षता में चलाई जा रही किसी तरह की जिला साक्षरता समिति में दिया गया योगदान।
(xxi). राज्य सरकार द्वारा गरीबों को मेडिकल सहायता मुहैया कराने के मकसद से स्थापित की गई किसी प्रकार की निधि, अथवा
(एच). अधिनियम की धारा 80 छछ के तहत, यदि करदाता अपने रहने के आवास का किराया चुकाता है तो वह कर में छूट पाने का हकदार है। इस तरह की छूट निम्नलिखित स्थितियों में दी जाती है:-
(ए) आयकर अधिनियम की धारा 10 '13क' से छूट के लिए क्वालिफाई होने की अवस्था में करदाता ने यदि उसे दिए जाने वाले मकान किराया भत्ता को हासिल नहीं किया है,
(बी) करदाता फॉर्म संख्या 10बीए में अपनी ओर से घोषणा करता है (संलग्नक 7)
(सी) करदाता अपनी ओर से मकान किराया भत्ता के संबंध में उसकी कुल आमदनी के संबंध में अधिकतम 10 फीसदी तक कटौती के लिए दावा करेगा, दो हजार रूपये प्रतिमाह या नियमानुसार 25 फीसदी तक, जो भी कम होगा उसके मुताबिक, इस प्रतिशत के तहत कुल आमदनी निकालने के लिए धारा 80 छछ के तहत किसी तरह की कटौती से पहले इसकी गणना की जाएगी।
(डी) करदाता के पास नहीं होना चाहिएः
(i) उसका किसी तरह का स्वयं का आवास या उसकी पत्नी या पति या अवयस्क बच्चा या जहां करदाता अविभाजित हिंदू परिवार का सदस्य हो या ऐसा परिवार, जहां वह साधारण तौर पर निवास करता है या अपने ऑफिस संबंधी कार्यों का निबटारा करता हो अथवा अपने बिजनेस या प्रोफेशन के कामकाज निबटाता हो, या
(ii) कोई ऐसा स्थान, कोई आवासीय स्थल जिसे करदाता अपने इस्तेमाल के लिए लाता हो, तो उसका आंकलन उप-धारा '2' के खंड 'क' के तहत निर्धारित किया जाएगा या धारा 23 की उप-धारा '4' के क्लाउज 'क' में उद्धृत नियमों के मुताबिक किया जाएगा।
इस संबंध में ड्राइंड एंड डिसबर्सिंग अधिकारी को इस बात से संतुष्ट हो जाना चाहिए कि कर में कटौती की अनुमति करदाता को उपरोक्त वर्णित नियमों के मुताबिक दी गई हो। साथ ही उन्हें इस बात से भी संतुष्ट हो जाना चाहिए कि किराया के वास्तविक भुगतान के साक्ष्य के तौर पर दिए गए प्रमाण सही हों।
(आई). धारा 80 प के तहत, किसी व्यक्तिगत करदाता की कुल आमदनी की ऐसी गणना बतौर निवासी, जिसे पिछले साल किसी भी समय मेडिकल अधिकारी द्वारा शारीरिक रूप से अशक्त प्रमाणित किया गया हो, तो उसे 50,000 रूपयों तक कर में छूट की सुविधा दी जाएगी।
हालांकि, जहां ऐसा व्यक्ति गंभीर शारीरिक अशक्तता का शिकार हो, तो ऐसी अवस्था में उसे 75,000 रूपयों तक कर में छूट की सुविधा दी जाएगी।
इस धारा के तहत किसी भी तरह के छूट के व्यक्तिगत दावे को हासिल करने के लिए मेडिकल अधिकारी द्वारा निर्धारित फार्म और प्रारूप के अनुरूप जारी किये गये प्रमाण पत्र की कॉपी लगानी होगी, जिस वर्ष के लिए कर के निर्धारण से छूट का दावा किया जा रहो हो।
उस तरह के मामले में जहां शारीरिक अशक्तता की शर्तों के लिए दिए गए प्रमाणपत्र को एक तय अवधि के बाद पुनर्मूल्यांकन की जरूरत हो तो ऐसी स्थिति में यदि मेडिकल अथॉरिटी की ओर से हासिल किए गए प्रमाणपत्र के संदर्भ में केवल उसी अवधि के कर में कटौती की अनुमति दी जाएगी, जिसका उस प्रमाणपत्र में जिक्र होगा, अन्यथा इस धारा के तहत कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस धारा के तहत, 'अशक्तता', 'मेडिकल अथॉरिटी', 'शारीरिक तौर पर अशक्त व्यक्ति', और 'गंभीर रूप से शारीरिक अशक्त व्यक्ति' की परिभाषा धारा 80 घघ 'इस सर्कुलर के पैरा 5.4 के सब-पैरा ई' में दिए गए के अनुसार मानी जाएगी।
ड्राइंड एंड डिसबर्सिंग अधिकारी को दावे की सत्यता के संबंध में स्वयं को संतुष्ट करने के लिए।
(21) ड्राइंड एंड डिसबर्सिंग अधिकारी को कर्मचारियों द्वारा किए गए वास्तविक जमा/ सब्सक्रिप्शन/ भुगतान के संबंध में स्वयं संतुष्ट होना चाहिए, जिसके बाद ही संबंधित मद में कटौती देनी चाहिए। इसके लिए उन्हें जो उचित बन पड़े वह करना चाहिए। यदि ड्राइंड एंड डिसबर्सिंग अधिकारी कर्मचारियों की ओर से किए गए वास्तविक जमा/ सब्सक्रिप्शन/ भुगतान दावे के सत्यापन में संतुष्ट नहीं हो रहा है, तो ऐसे में उसे कटौती की अनुमति नहीं देनी चाहिए, और कर्मचारी ऐसी रकम के भुगतान पर कटौती/ छूट पाने के लिए जरूरी साक्ष्यों आदि के साथ इनकम रिटर्न पाने के लिए आवेदन कर सकता है, जिसके लिए उसे एसेसिंग ऑफिसर को पूरी तरह से नियमों के अनुकूल संतुष्ट करना होगा।
6. आयकर की गणना के कटौती के संदर्भ में
6.1 धारा 192 के मकसद से वेतन से आमदनी की गणना इस प्रकार की जाएगीः-
(ए) सबसे पहले पैरा 5.1 में उद्धृत के अनुसार सकल वेतन की गणना की जाएगी, जिसमें पैरा 5.2 में वर्णित आमदनी नहीं जोडा जाएगा,
(बी) हासिल किए गए उपरोक्त 'ए' के आंकडे से पारा 5.3 के अनुसार कटौती की अनुमति दी जाएगी,
(सी) उपरोक्त 'बी' से हासिल आंकडे से पैरा 5.4 कटौती की अनुमति दी जाएगी, यह तय करते हुए कि पारा 5.4 में वर्णित कटौती उपरोक्त 'बी' से हासिल आंकडे से ज्यादा नहीं हो, इस संबंध में रकम की सीमा तय की गई है।
यह रकम वेतन से प्राप्त आमदनी मानी जाएगी जिस पर आयकर काटने की जरूरत होगी। इस आमदनी को दहाई के नजदीकी अंक यानी दस रूपये के गुणक के मुताबिक रखा जाएगा।
6.2 इस आमदनी पर आयकर की गणना कर्मचारी की उम्र और लिंग के मुताबिक पैरा 2 में दिए गए दरों के मुताबिक की जाएगी ।
6.3 कर के रूप में चुकाने योग्य जो रकम आएगी उस में अधिभार (यदि लागू हो ) और अतिरिक्त अधिभार (एजुकेशन सेस) को जोडने पर उसमें बढोतरी हो सकती है।
6.4 पैरा 6.3 में आई चुकाने वाली कर की रकम को समान किस्तों में प्रत्येक माह कटौती की जानी चाहिए। इस रकम को चुकाने में किसी तरह की कमी या बढोतरी होने की दशा में उसे समान वित्तीय वर्ष में समायोजित किया जा सकता है।
7. विविध
7.1 ये निर्देश सर्वांग नहीं है और वेतन से आमदनी पर टैक्स में कटौती के संदर्भ में कर्मचारियों को समझने में मददगार बनाने के दृष्टिकोण से विविध प्रावधानों के बारे में यहां बताया गया है। इस संबंध में जहां कहीं भी कोई शंका हो, तो आयकर अधिनियम, 1961, आयकर नियम, 1962 और वित्तीय अधिनियम, 2008 में किए गए प्रावधानों से इसे समझा जा सकता है।
7.2 यदि किसी अवस्था में मदद की जरूरत हो, तो आयकर विभाग के एसेसिंग ऑफिसर/ स्थानीय पब्लिक रिलेशन ऑफिसर से संपर्क किया जा सकता है।
7.3 केंद्र/ राज्य सरकारों के नियंत्रण में आने वाली सभी उपक्रमों समेत सभी डिस्बर्सिंग ऑफिसरों से ये निर्देश प्राप्त किए जा सकते हैं।
7.4 इस सर्कुलर की कॉपी इस पते पर उपलब्ध हैः डायरेक्टर ऑफ इनकम टैक्स (रिसर्च, स्टेटिस्टिक्स एंड पब्लिकेशंस एंड पब्लिक रिलेशंस )ए छठा फ्लोर, मयूर भवन, नई दिल्ली- 110001
इसके अलावा इस वेबसाइट से भी ये निर्देश प्राप्त किए जा सकते हैं:
wwwf.inmin.nic.in
www.incometaxindia.gov.in
छठे वेतन आयोग की सिफारिशों में लागू किए गए सरकारी कर्मचारी के वेतन भुगतान के एरियर के टीडीएस के संबंध में स्पष्टीकरण
डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर, मिनिस्ट्री ऑफ फाइनांस के इम्प्लीमेंटेशन सेल के कार्यालय आदेश एफ नंबर 1/ 1/ 2008-आईसी, दिनांक 30 अगस्त, 2008 को पैरा 2 (5) में दर्शाया गया है।
''एक जनवरी, 2006 से 31 अगस्त, 2008 की अवधि के लिए वेतन के एरियर और भत्तों के संबंध में अलग-अलग बिल लगाए जाएंगे। सभी तरह के सब्सिक्रिप्शन को घटाने के बाद कुल बकाया की गणना होगी, जो जीपीएफ और एनपीएस के संदर्भ में संशोधित वेतन के अनुसार ब़ढ़ा होगा, जिसे दो किस्तों में भुगतान किया जा सकता है, जिसमें पहली किस्त कुल बकाया के 40 प्रतिशत तक होनी चाहिए। डीडीओ/ पीएओ को यह तय करना होगा कि बढी हुई दर के अनुसार सरकार द्वारा किया जाने वाला योगदान उसी अनुरूप किया गया है अथवा नहीं। बकाया की दूसरी किस्त के भुगतान के संदर्भ में आदेश अलग से जारी किया जाएगा।''
इस संबंध में सीबीडीटी के कई प्रतिनिधियों की ओर से जानकारी मांगी गई है कि क्या 2008-09 के दौरान भुगतान किए गए सरकारी कर्मचारियों के एरियर्स की 40 प्रतिशत रकम पर ही टीडीएस काटा जाएगा या बकाए की पूरी रकम के लिए यह भुगतान योग्य होगा। बोर्ड इस मामले की जांच कर रहा है और इस मामले इस प्रकार स्पष्ट किया जा रहा है।
वेतन को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 15 के तहत परिभाषित किया गया हैः-
(ए) नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता द्वारा पिछले वर्ष में का बकाया वेतन का भुगतान किया गया है या नहीं,
(बी) कर्मचारी के नियोक्ता या उसके पूर्व नियोक्त द्वारा पिछले वर्ष में कोई वेतन भुगतान किया गया है या अनुमति दी गई है, जो अब तक बकाया है,
(सी) कर्मचारी के नियोक्ता या उसके पूर्व नियोक्त द्वारा पिछले वर्ष में कोई एरियर भुगतान किया गया है या अनुमति दी गई है, जो अब तक बकाया है, और यदि उस पर किसी पिछले वर्ष आयकर नहीं लगाया गया है।
2. व्यय विभाग के कार्यालय के ज्ञापन से यह स्पष्ट है कि60 प्रतिशत वेतन का बकाया ना तो देय और ना ही मान्य की श्रेणी में रखा गया है ।आयकर नियम के सेक्शन 192 ,1961, अन्य विषयों के साथ किसी भी व्यक्ति को "वेतन" के मद में आने वाली आदेय आय के लिए जिम्मेदार मानता है जो भुगतान के समय पहले से तयशुदा रकम पर काटी गयी आयकर की रकम होती है ।इसलिए यह स्पष्ट है कि आयकर स्रोत से केवल सेक्शन 192 के अंर्तगत की गई कटौती स 2008-09 के वित्तीय वर्ष में वेतन का बकाया होगा । जिन वित्तीय वर्षो में बकाया चुका दिया गया था उन वर्षो में बैलेंस कटौती की जाएगी ।
अनुच्छेद - I
उदाहरण 1
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
पुरूष कर्मचारी के सकल वेतन के आयकर की गणना करने के मामले में -
(i) 2,00,000 रू.
(ii) 5,00,000 रू. और
(iii) 10,00,000 रू.
| ब्यौरा | रू. (i) | रू.(ii) | रू.(iii) | ||
| सकल वेतन आय( सभी भत्ते) | 2,00,000 | 5,00,000 | 10,00,000 | ||
| जी.पी.एफ. में योगदान | 20,000 | 50,000 | 1,00,000 | ||
| कुल आयकर और देय कर की गणना | |||||
| सकल वेतन | 2,00,000 | 5,00,000 | 10,00,000 | ||
| कम किया गया : यू/एस 80 ग | 20,000 | 50,000 | 1,00,000 | ||
| करयुक्त आय | 1,80,000 | 4,50,000 | 9,00,000 | ||
| दिया गया कर | 3,000 | 45,000 | 1,75,000 | ||
| जोड़ें : | |||||
| अधिभार | कुछ नहीं | कुछ नहीं | कुछ नहीं | ||
| 2 प्रतिशत पर एजुक्शन सेस | 60 | 900 | 3,500 | ||
| 1 प्रतिशत पर माध्यमिक और उच्चतर एजुक्शन सेस | 30 | 450 | 1,750 | ||
| कुल देय कर | 3,090 | 46,350 | 1,80,250 |
नोट 1- अगर कर देय आय रू. 10,00,000 से अधिक हो तो अधिभार की दर 10 प्रतिशत होगी ।
नोट 2- अगर कोई अधिभार या आयकर हो तो अतिरिक्त अधिभार ( आयकर पर एजुक्शन सेस )2 प्रतिशत की दर से लिया जाएगा ।
नोट 3- अगर कोई (आयकर पर एजुक्शन सेस को बिना जोड़े) अधिभार या आयकर हो तो अतिरिक्त अधिभार( आयकर पर माध्यमिक और उच्चतर एजुक्शन सेस) 1 प्रतिशत की दर से लिया जाएगा ।
नोट 4-निवासी और अनिवासी कर निर्धारिती द्वारा अधिभार , एजुक्शन सेस और माध्यमिक और उच्चतर एजुक्शन सेस देय है ।
उदाहरण 2
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
पुरूष कर्मचारी के साथ विकलांग आश्रित होने पर सकल वेतन के आयकर की गणना करने के मामले में -
ब्यौरा
| 1 | सकल वेतन | 3,20,000 रू. |
| 2 | विकलांग आश्रित के उपचार पर होने वाले खर्च(गंभीर विकलांगता के मामले में नही), | 7,000 रू. |
| 3 | जीवन बीमा को देय रकम के साथआश्रित की देखभाल का वार्षिक भत्ता (गंभीर विकलांगता के मामले में नही), | 50,000 रू |
| देय टैक्स | 6,500 रुपये | |
| जोड़ें : | ||
| अधिभार | शून्य | |
| शिक्षा उपकर@ 2% | 130 | |
| माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर@1% | 65 | |
| कुल देय आयकर | 6,695 रूपये | |
| समाप्त किया गया | 6,700 रुपये तक | |
| साधारण भविष्य निधि | 25,000 रू. | |
| जीवन बीमा पॉलिसी भुगतान | 10,000रू. |
आयकर की गणना
| सकल वेतन | 3,20,000रू. | |
| कटौती : धारा 80घघ के अंतर्गत कटौती (केवल 50,000/- रू.तक सीमित) | 50,000 रू. | |
| कर योग्य आय | 2,70,000रू. | |
| घटाए : धारा 80C के अंतर्गत कटौती : | 35,000 रू. | |
| साधारण भविष्य निधि | 25,000रू. | |
| जीवन बीमा पॉलिसी | 10,000रू. | |
| कुल | 35,000 रू. | |
| कुल आय | 2,35,000 रू. | |
| कुल आय पर देय आय कर | 8,500रू. | |
| जोड़ें : | ||
| अधिभार | कुछ नहीं | |
| शिक्षा शुल्क @2% | 170रू. | |
| उच्च तथा उच्चतर शिक्षा शुल्क @1% | 85रू. | |
| कुल कर योग्य देय आय | 8,755रू. | |
| कुल | 8,760रू. | |
उदाहरण 3
मूल्यांकन वर्ष 2009-10
पुरुष कर्मचारी के मामले में आय कर की गणना जहाँ चिकित्सा / उपचार व्यय प्रवर्तक द्वारा किया जाता है.
| ब्यौरा: | ||
| 1. | सकल आय | 3,00,000रू. |
| 2. | स्वयं तथा अपने आश्रित परिवार के सदस्यों के उपचार पर व्यय की प्रवर्तक द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति | 30,000रू. |
| 3. | साधारण भविष्य निधि | 20,000रू. |
| 4. | जीवन बीमा क़िस्त | 20,000रू. |
| 5. | गृह निर्माण की अग्रिम राशि का पुनः भुगतान | 25,000रू. |
| 6. | दो संतानो की शिक्षा शुल्क | 60,000रू. |
| 7. | यूनिट लिंक्ड बीमा योजना में निवेश | 20,000रू. |
कर की गणना
| सकल वेतन | Rs. 3,00,000 | |
| जोड़े : चिकित्सा व्यय के सन्दर्भ में अनुलाभ की प्रतिपूर्ति धारा 17(2) (च) को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सीमा 15,000 रू. | 15,000 रू. | |
| कर योग्य आय | 3,15,000 रू. | |
| घटाए : धारा 80ग के अंतर्गत कटौती | ||
| जीपीएफ | 20,000 | |
| एलआईसी | 20,000 | |
| एचबीए का का पुनः भुगतान | 25,000 | |
| अध्यापन शुल्क | 60,000 | |
| यूनिट –लिंक्ड बीमा योजना में | 20,000 | |
| निवेश | ||
| कुल | 1,45,000 | |
| 1,00,000 रू. तक सीमित | 1,00,000 रू. | |
| कुल देय आय | 6,500 रू. | |
| जोड़ें : | ||
| अधिभार | कुछ नहीं | |
| शिक्षा शुल्क @2% | 130रू. | |
| उच्च तथा उच्चतर शिक्षा शुल्क @1% | 65रू. | |
| कुल कर योग्य देय आय | 6,695रू. | |
| कुल | 6,700रू. | |
उदाहरण 4
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
दिल्ली में एक महिला कर्मचारी के आवासीय समायोजन हेतु सेक्शन 10(131A) के अंतर्गत गृह किराया भत्ते की व्याख्यात्मक गणना
ब्यौरा
| 1 | वेतन | 2,50,000 रुपये | |
| 2 | मंहगाई भत्ता | 1,00000 रुपये | |
| 3 | गृह किराया भत्ता | 1,40000 रुपये | |
| 4 | भुगतान (हो गया) गृह किराया | 1,44000 रुपये | |
| 5 | जेनेरल प्रोविडेंट फण्ड | 36,000 रुपये | |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम | 4,000 रुपये | |
| 7 | यूनिट लिंक्ड बीमा योजना हेतु सब्सक्रिप्शन | 50, 000 रुपये |
अब यहां से आगे कुल देय आय और कर की संगणना
| 1 | वेतन + डीए + सीसीए गृह किराया भत्ता | 3,50,000 रुपये | |
| 2 | कुल वेतन आय | 1,40,000 रुपये | |
| = 4,90,000 रुपये | |||
| 3 | कम किया गया : गृह किराया भत्ता में छूट यू/एस 10(13 क): कम से कम की गई | ||
| A | एचआरए की प्राप्त हुई वास्तविक राशि 1.40,000 रुपये | ||
| b. | वेतन के 10% से अधिक वृद्धि पर किराए का खर्चा (डीए सहित ये मानते हुए कि डीए सेवा निवृत्ति लाभ हेतु लिया गया है) (1,44,000 - 35,000) 1,09,000 रुपये | ||
| C | वेतन का 50% (बेसिक+डीए) 1,75,000 रुपये | ||
| 1,09,000 रुपये | |||
| आय का सकल योग | 3,81,000 रुपये |
कम किया गया : सेक्शन 80ग के अंतर्गत छूट :
| 1 | जीपीएफ | 36,000 | |
| 2 | एलआईसी | 4,000 | |
| लिंक्ड यूनिट की सब्सक्रिप्शन बीमा योजना | 50,000 | ||
| कुल | 90,000 | 90,000 रुपये | |
| कुल आय | रुपये 2 ,91,000 | ||
| कुल आय पर देय कर रुपये | 11,000 रुपये | ||
| जोड़ें : | |||
| अधिभार | |||
| शिक्षा उपकर@ 2% | 222 | ||
| माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर@1% | 111 | ||
| कुल देय आयकर | 11,433 रूपए | ||
| समाप्त किया गया | 11,430 रूपए तक |
उदाहरण 5
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
मुंबई की एक निजी कंपनी के पुरुष कर्मचारी (जिसे एक होटल में दो महीनों के लिए और एक फ्लैट में छूट वाले किराए की दर पर दस महीनों के लिए आवास की व्यवस्था की गई थी), हेतु आवास कर के प्राधिकार और गणना के मूल्यांकन का विवरण
| 1 | वेतन | 7,00,000 रुपये |
| 2 | भत्ता | 1,40,000 रुपये |
| 3 | फ्री गैस, बिजली, पानी, आदि (कंपनी द्वारा असली बिलों का भुगतान होता है) | |
| 4 ख | होटल का किराया कर्मचारी द्वारा भुगतान किया जाएगा (दो महीनो के लिए | 1,00,000 रुपये |
| 4 ग. | कर्मचारी से वसूला गया किराया | 60,000 रुपये |
| 4 घ. | फर्नीचर का खर्चा | 2,00,000 रुपये |
| 5 | लिंक्ड यूनिट की सब्सक्रिप्शन बीमा योजना | 50,000 रुपये |
| 6 | जीवन बीमा प्रीमियम | 10,000 रुपये |
| 7 | मान्यताप्राप्त पीऍफ़ के लिए योगदान | 42,000 रुपये |
अब यहां से आगे कुल देय आय और कर की संगणना
| 1 | वेतन | 7,00,000 रुपये |
| 2 | भत्ता. | 1,40,000 रुपये |
| प्राधिकार के मूल्यांकन हेतु कुल वेतन जैसे रुपये 70,000 प्रति माह | 8.40,000 रुपये |
प्राधिकारों का मूल्यांकन
| क | फ्लैट का प्राधिकार वेतन का 15% दस महीनो के लिए = रुपये 1,05,000 और वास्तविक भुगतान किये हुए किराए रुपये 3,60,000 से कम | 1,05,000 रुपये | ||
| ख | होटल हेतु प्राधिकार वेतन का 24% दो महीनो के लिए = रुपये 33,000 और वास्तविक भुगतान किये हुए किराए रुपये 1,00,000 से कम | 33,600 रुपये | ||
| ग. | फर्नीचर का प्राधिकार @10% मूल्य | 20,000 रुपये | ||
| 1,58,600 रुपये | ||||
| कम किया गया : कर्मचारी से वसूला गया किराया | 60,000 रुपये | |||
| 98,6000 रुपये | ||||
| मुफ्त गैस, बिजली, पानी हेतु प्राधिकार | 40,000 रुपये | |||
| कुल प्राधिकार | 1,38,600 रुपये | |||
| सकल योग आय (8,40,000+1,38,600) | 9,78,600 रुपये |
कमी की गई : सेक्शन 80ग के अंतर्गत छूट :
| प्रोविडेंट फण्ड | 42,000 रुपये | ||
| एलआईसी | 10,000 रुपये | ||
| यूनिट लिंक्ड बीमा योजना का सब्सक्रिप्शन | 50,000 रुपये | ||
| कुल | 1,02,000 रुपये | ||
| कुल आय | 1,00,000 रुपये | ||
| 8,78,600 रुपये | |||
| देय कर | 1,68,580 रुपये | ||
| जोडें | |||
| अधिभार | शून्य | ||
| शिक्षा उपकर@2% | 3,372 रुपये | ||
| माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर@1% | 1,686 रुपये | ||
| कुल देय आयकर | 1,73,638 रुपये | ||
| समाप्त कर दिया गया | 1,73,640 रुपये |
उदाहरण 6
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
एक निजी कंपनी की महिला कर्मचारी हेतु दिल्ली में नियुक्ति पर गृह-निर्माण ऋण को चुकता करते हुए आवास कर के प्राधिकार और गणना के मूल्यांकन का विवरण
| 1 | वेतन | 3,00,000 रुपये | |
| 2 | महंगाई भत्ता | 1,0,000 रुपये | |
| 3 | गृह किराया भत्ता | 1,80,000 रुपये | |
| 4 | विशेष कार्यभार भत्ता | 12,000 रुपये | |
| 5 | प्रोविडेंट फंड | 60,000 रुपये | |
| 6 | एलआईपी | 10,000 रुपये | |
| 7 | एनएससी VIII अंक में जमा | 30,000 रुपये | |
| 8 | महिला कर्मचारी द्वारा चुकाया जाने वाला किराया | 1,20,000 रुपये | |
| 9 | गृह-भवन ऋण (मूलधन) का पुनर्भुगतान | 60,000 रुपये | |
| 10 | तीन बच्चों के लिए ट्यूशन फीस (प्रति बच्चा रुपये 10,000) | 30,000 रुपये |
यहां से देय आय और कर की संगणना
| कुल वेतन (बेसिक+डीए+एचआरए+एसडीए) | 5,92,000 रुपये | ||
| कम : | गृह किराया भत्ता छूट सेक्शन 10(13क) के अंतर्गत | ||
कम से कम :
|
क प्राप्त एचआरए की वास्तविक राशि | 1,80,000 | |
ख वेतन के दस प्रतिशत से अधिक पर किराए का खर्चा (महंगाई भत्ते समेत) यह मानते हुए कि महंगाई भत्ते में सेवा निवृत्ति के लाभ जुड़े हुए हैं (1,20,000-40,000) |
80,000 | ||
| ग महंगाई भत्ता मिलाकर पचास प्रतिशत वेतन | 2,00,000 | (-) 80,000 | |
| कर योग्य आय का कुल योग | 5,12,000 | ||
| सेक्शन 80C के अंतर्गत छूट : | |||
| I. | . प्रोविडेंट फण्ड | 60,000 | |
| II | एलआईपी | 10,000 | |
| III | एनएससी VIII अंक | 30,000 | |
| IV. | एचबीए का पुनर्भुगतान | 60,000 | |
| V. | ट्यूशन फीस (दो बच्चों के लिए प्रतिबंधित) | 20,000 | |
| कुल | 1,80,000 | ||
| सीमित | 1,00,000 तक | ||
| कुल आय | 4,12,000 | ||
| देय कर | 34,400 | ||
| जोड़ें : | |||
| अधिभार | शून्य | ||
| शिक्षा उपकर@2% | 688 | ||
| माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर@1% | 344 | ||
| कुल देय आयकर | रुपये 35,432 | ||
| समाप्त किया गया 35,430 तक |
टिप्पणी : महंगाई भत्ते का हिस्सा बेसिक वेतन में मिला कर 'महंगाई वेतन' के रूप में दिखाया गया और वह भी 'वेतन' की परिभाषा के अंतर्गत रखा गया ताकि सेक्शन 10(13क) के तहत छूट वाली राशि का निपटान किया जा सके ।
उदाहरण 7
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
एक पुरुष कर्मचारी के आयकर की गणना जो कि स्व-अधिकृत घर की जायदाद से
'आय' शीर्षक के अंतर्गत नुकसान का दावा करता है।
ब्यौरा :
| 1 | कुल वेतन | 4,00,000 | |
| 2 | पुनर्भुगतान किया गया गृह-ऋण (मूलधन) | 50,000 | |
| 3 | गृह ऋण पर देय ब्याज (1-4-1999 के पश्चात ऋण लिया गया) |
1,60,000 | |
| 4 | नेशनल चिल्ड्रन फण्ड को दिया गया अनुदान | 5,000 | |
| 5 | खरीदी गई एनएससी | 10,000 | |
| 6 | जीपीएफ | 30,000 |
यहां से आगे कर योग्य आय और कर का संगणन
| 1 | वेतन आय | 4,00,000 | |
| 2 | घर की जायदाद से आय का वार्षिक मूल्यांकन | शून्य | |
| सेक्शन 24 के अंतर्गत ऋण पर देय ब्याज | 1,50,000 | ||
| (अधिकतम अनुमति के योग्य) | (-) रुपये 1,50,000 | ||
| कुल सकल आय | रुपये 2,50,000 | ||
| कमी की गई : | सेक्शन 80छ के अंतर्गत छूट रुपये 5000 का 50% | 2,500 | |
| कमी की गई : | सेक्शन 80ग के अंतर्गत छूट : | ||
| जीपीएफ | 30,000 | ||
| एनएससी | 10,000 | ||
| पुर्नभुगतान किया गया गृह ऋण | 50,000 | ||
| कुल | रुपये 90,000 | ||
| अध्याय VI- क के अंतर्गत कुल छूट | रुपये 92,500 | ||
| कुल आय | रुपये 1,57,500 | ||
| देय कर | रुपये 750 | ||
| जोड़ें | |||
| अधिभार | शून्य | ||
| शिक्षा उपकार@2% | 15 | ||
| माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर@1% | 8 | ||
| कुल देय आयकर | रुपये 773 | ||
| समाप्त किये गए 770 |
उदाहरण - 8
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
एक पुरुष कर्मचारी के आयकर की गणना जो कि स्व-अधिकृत घर की जायदाद से
'आय' शीर्षक के अंतर्गत नुक्सान का दावा करता है और जिसने 01-04-1999 के पहले गृह निर्माण ऋण लिया है ।
ब्यौरा :
| 1 | कुल वेतन | 4,00,000 |
| 2 | पुनर्भुगतान किया गया गृह-ऋण (मूलधन | 30,000 |
| 3 | गृह ऋण पर देय ब्याज (1-4-1999 से पहले ऋण लिया गया) |
1,00,000 |
| 4 | नेशनल चिल्ड्रन फण्ड को दिया गया अनुदान | 6,000 |
| 5 | खरीदी गई एनएससी | 10,000 |
| 6 | जीपीएफ | 20,000 |
यहां से आगे कर योग्य आय और कर का संगणन
| 1 | वेतन आय | 4,00,000 | |
| 2 | घर की जायदाद से आय का वार्षिक मूल्यांकन | शून्य | |
| सेक्शन 24 के अंतर्गत देय ब्याज | 30,000 | ||
| (1-4-1999 से पहले लिए गए ऋण हेतु अधिकतम अनुमति के योग्य) | (-) रुपये 30,000 | ||
| कुल सकल आय | रुपये 3,70,000 | ||
| कमी की गई : | सेक्शन 80छ के अंतर्गत छूट रुपये 6000 का 50% | रुपये 3000 | |
| कमी की गई : | सेक्शन 80ग के अंतर्गत छूट जीपीएफ | 20,000 | |
| एनएससी | 10,000 | ||
| पुनर्भुगतान किया गया गृह ऋण | 30,000 | ||
| कुल | 60,000 | ||
| अध्याय VI-A के अंतर्गत कुल छूट | 63,000 | ||
| कुल आय | रुपये 3,07,000 | ||
| देय कर | रुपये 16,400 | ||
| जोड़ें | |||
| अधिभार | शून्य | ||
| शिक्षा उपकार@2% | 328 | ||
| माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर@1% | 164 | ||
| कुल देय आयकर | रुपये 16,892 | ||
| समाप्त किये गए रुपये 16,890 |
उदाहरण - 9
आकलन वर्ष 2009-10 हेतु
एक सेवा निवृत्त पुरुष कर्मचारी के आयकर की गणना जो कि 65 वर्ष से अधिक आयु के हैं.
ब्यौरा :
| 1 | सर्विस पेंशन | 2,40,000 |
| 2 | इंफ्रास्ट्रक्चर बांड | 30,000 |
| 3 | खरीदी गई एनएससी | 20,000 |
यहां से आगे कर योग्य आय और कर का संगणन
| आय /पेंशन से प्राप्त रुपये | 2,40,000 | ||
| कमी की गई | सेक्शन 80ग के अंतर्गत | ||
| इंफ्रास्ट्रक्चर बांड | 30,000 | ||
| एनएससी | 20,000 | ||
| कुल | 50,000 | ||
| कुल आय | 1,90,000 | ||
| देय कर | शून्य |
टिप्पणी ; पैंसठ वर्ष या इससे अधिक आयु वाले करदाताओं को कुल रुपये 2,25,000 तक की आय पर कोई कर नहीं देना है.
अनुच्छेद - II
सेक्शन 192 -2 ख के अंतर्गत 31 मार्च 2002 को समाप्त हो रहे वर्ष हेतु आय का ब्यौरा देने हेतु फॉर्म
1. कर्मचारी का नाम और पता …………………..
2. परमानेंट अकाउंट नंबर ……………………
3. आवासीय स्थिति ……………………
4. वेतन के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से आ रही आय का ब्यौरा (जो कि सिर्फ 'मकान की जायदाद से आ रही आय' - इस शीर्षक के अंतर्गत ही नुकसानदेह सिद्ध हो रही हो और इस तरह के किसी अन्य शीर्षक के अंतर्गत नुकसानदेह न सिद्ध हो रही हो) जो इस वित्त वर्ष में प्राप्त हुई हो।
i. मकान की जायदाद से प्राप्त आय ………………….
(नुकसान की स्थिति में वहां का संगणन लगाएं )
ii. व्यापार या व्यवसाय के लाभ या उपलब्धियां …………………
iii. पूंजीगत लाभ .............................
iv. अन्य स्रोतों से आय
(a) लाभांश
(b) ब्याज
(c) अन्य आय (कृपया बताएं)
कुल ..........................
5. मद -४ के उप-मदों (i)से (iv) का कुल योग
6. स्रोत पर आयकर (सेक्शन 203 के अंतर्गत प्रमाणपत्र लगाएं)
स्थान ............
दिनांक ..............
.....................................
कर्मचारी के हस्ताक्षर
सत्यापन
मैं ,................................ एतद्द्वारा घोषित करता हूँ कि उपरोक्त तथ्य मेरी जानकारी और विश्वास में सत्य हैं।
आज दिनांक.................... 2002, को सत्यापित
दिनांक ................................
स्थान ..............................
....................................................
कर्मचारी के हस्ताक्षर
अनुच्छेद -III
फॉर्म क्रमांक 12खक : कथन द्वारा वेतन के बदले प्राधिकारों, अन्य अनुषंगी लाभों या सुविधाओं और लाभों का ब्यौरा दर्शाया जा रहा है. देखें (2002) 124 टैक्समैन 64 (St.)
अनुच्छेद -IV
फॉर्म क्रमांक 16कक : 'वेतन' शीर्षक के अंतर्गत आने वाली आय पर कर माफी का प्रमाणपत्र जिसे 'सैलरी कम रिटर्न ऑफ़ इनकम' माना जा सके . देखें (2004) 134 टैक्समैन 128 (St.)
अनुच्छेद -V
अधिसूचना क्रमांक SO974 (ई), दिनांकित 26-8-2003. देखें(2003) 131 टैक्समैन 34 (St.)
अनुच्छेद -VA
अधिसूचना (फ़ाइल क्रमांक 5/7/2003 - ईसीबी & पीआर) दिनांकित 22-12-2003
शासन ने 23 अगस्त 2003 को 2003 -04 बजट घोषणा के प्रभावीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार की सेवा में नए आये हुए कर्मचारियों हेतु एक नवगठित निर्धारित योगदान वाले पेंशन की व्यवस्था को लागू किया जाएगा। इसमें सेना-कर्मियों को प्रथम चरण में स्थान प्रदान नहीं किया गया है और इस तरह इस व्यवस्था को लाकर वर्तमान निर्धारित लाभ पेंशन योजना हटा दी जायेगी :
(i) 1 जनवरी, 2004 से यह व्यवस्था केंद्र सरकार के सभी नवागन्तुक कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगी जो कि प्रथम चरण में सेना-कर्मियों पर लागू नहीं होगी। वेतन और डीए का दस प्रतिशत मासिक योगदान के तौर पर कर्मचारी को देना होगा जिसका मिलान केंद्र सरकार के द्वारा होगा। तो भी जो कर्मचारी सरकारी सेवा में नहीं है उनके लिए सरकार की तरफ से कोई योगदान नहीं दिया जाएगा। ये योगदान और इन्वेस्टमेंट रिटर्न्स को नॉन-विथड्राएबल पेंशन टायर- 1 खाते में डाला जाएगा । निर्धारित लाभ पेंशन और जीपीएफ के वर्तमान प्रावधान केंद्र सरकार के नए कर्मचारियों के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।
(ii) उपरोक्त पेंशन खाते के अतिरिक्त, प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक स्वैच्छिक टायर -II विथड्राएबल खाता विकल्प के तौर पर उपलब्ध होगा। इस विकल्प के अंतर्गत केंद्र सरकार के नए कर्मचारियों के लिए जीपीएफ वापस ले लिया जाएगा। सरकार इस खाते में कोई योगदान नहीं देगी। यह संपत्ति सीधे ही उपरोक्त प्रक्रिया द्वारा प्रबंधित की जायेगी। तो भी ये कर्मचारी सभी 'सेकण्ड टायर' के अपने खाते को कभी भी आंशिक तौर पर या सारा ही वापस लेने के लिए स्वतंत्र होंगे। इस वापस लिए जाने योग्य खाते से पेंशन निवेश नहीं निर्मित होगा और इस पर कोई भी विशेष कर सुविधा लागू नहीं होगी।
(iii) आमतौर पर प्रत्येक व्यक्ति साठ वर्ष की आयु पर या इसके बाद टायर - 1 पेंशन व्यवस्था के तहत सेवा निवृत्त हो सकता है। इस सेवा निवृत्ति के समय व्यक्ति को अपनी पेंशन निधि का चालीस प्रतिशत एक आईआरडीए चालित जीवन बीमा कंपनी से एन्नुईटी खरीदने में लगाना अनिवार्य होगा। अगर शासकीय कर्मचारी है तो एन्नुईटी के माध्यम से कर्मचारी और उस पर निर्भर अभिभावकों और उसकी पत्नी/पति को सेवा निवृत्ति के बाद आजीवन पेंशन मिलनी चाहिए। कर्मचारी को बची हुई पेंशन निधि एक मुश्त अदा कर दी जायेगी जिसे वह अपनी इच्छानुसार उपयोग कर सकेगा. कर्मचारी को यह स्वतंत्रता रहेगी कि वह इस पेंशन व्यवस्था को साठ वर्ष क़ी आयु के पूर्व भी छोड़ सकता है। फिर भी इस मामले में अनिवार्य वार्षिकी पेंशन निधि क़ी अस्सी प्रतिशत राशि नियत क़ी गई है।
नयी पेंशन योजना क़ी संरचना
(IV) इसमें सेन्ट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एंड एकाउंटिंग (सीआरए) क़ी संरचना के साथ कुछ पेंशन फण्ड मैनेजर्स (पीएफएमएस) क़ी भी व्यवस्था है जो तीन विकल्पों वाली योजनाएं उपलब्ध कराते हैं जैसे विकल्प एक, दो या तीन।
(V) इसमें हिस्सेदार दोनों घटक (पीएफएमएस & सीआरए) पूर्व कार्य-प्रदर्शन क़ी आसान से समझी जा सकने वाली जानकारी देंगे ताकि व्यक्ति जानकारी के अनुसार अपने अनुरूप सही विकल्प का चयन कर सके।
2. नई पेंशन योजना को लागू करने हेतु प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2004 से होगी।
अनुच्छेद - VIA
अधिसूचना क्रमांक एस.ओ. 1048 (ई), दिनांक 24-11-2000 : देखें (2000) 113 टैक्समैन 52 (St.)
अनुच्छेद - VIB
अधिसूचना क्रमांक एस.ओ.1048 (ई), दिनांक 29-01-2001 : देखें (2001) 115 टैक्समैन 183 (St.)
अनुच्छेद - VII
फॉर्म क्रमांक 10BA : जिस व्यक्ति का कर निर्धारण हो रहा है जो कि सेक्शन 80छछ -आय कर (19 वां संशोधन) क़ानून, 1998, के अंतर्गत छूट का दावा कर रहा है, यह घोषणापत्र उसी के हांथों भरा जाए - देखें (1998) 100 टैक्समैन 110 (St.)
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