आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

753

परिपत्र की तिथि

10/06/1997

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

10/06/1997

 
परिपत्र संख्या : 753
जारी करने की तारिख : 10.6.1997
उल्लिखित अनुभाग : वीडीआर्इएस
संविधी : आयकर अधिनियम

विषय : वित्त अधिनियम 1997, - स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना के प्रावधानों से संबधित विवरणात्मक नोट

परिचय :

संसद द्वारा पारित वित्त अधिनियम, 1997 पर राष्ट्रपति महोदय ने 14 मर्इ 1997 के दिन स्वीकृति की मोहर लगार्इ। और 1997 का अधिनियम 26 बना। वित्त अधिनियम 1997 के अनुभाग 62 से 78 तक स्वैच्छिक आय प्रकटन अधिनियम से संबधित हैं। यह प्रपत्र प्रकटन योजना के प्रावधानों के सार का का ब्यौरा प्रस्तुत करता है।

2. स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना, 1997, 1 जुलार्इ 1997 से लागू होगी। इसके बारे में अधिसूचना 9 जून 1997 को जारी की गर्इ थी। कोर्इ भी व्यक्ति, इस तारीख के बाद अपनी आय का स्वैच्छिक रूप से प्रकटन कर सकता है। आय के प्रकटन का आखरी दिन है 31 दिसंबर 1997।

3. वित्त अधिनियम, 1997 के अनुभाग 64 के प्रावधानों के अनुसार, आयकर अधिनियम के तहत एक व्यक्ति किसी भी निर्धारण वर्ष की कर अदेय आय का स्वैच्छिक प्रकटन कर सकता है।

(अ) जिस वर्ष के लिए उसने आयकर अधिनियम, 1961 के अनुभाग 139 के तहत कर का भुगतान नहीं किया है;

(ब) जिसमे उसने योजना की शुरुआत होने से पहले यानी कि 1 जुलार्इ 1997 में रिटर्न दर्ज करते समय आय का खुलासा करना भूल गया था;

(क) जिस वर्ष का निर्धारण नहीं हुआ था;

इसीलिए, एक व्यक्ति निर्धारण वर्ष 1997 - 1998 को मिलाकर किसी भी निर्धारण वर्ष की आय का प्रकटन कर सकता है, बशर्ते कि उसने आयकर रिटर्न दर्ज नहीं किया था, या उस आय का प्रकटन करना भूल गया था जिसके लिए प्रकटन किया गया था। स्वैच्छिक आय प्रकटन योजना 1997 के तहत, संपत्ति के प्रकटन की अनुमति नहीं है।

कर की दर :

4. किसी भी निर्धारण वर्ष से संबधित प्रकटित आय पर कंपनी के लिए देय कर 35 : की दर पर होगा, और अन्य लोगों के लिए देय कर 30% की दर पर होगा। इस योजना के तहत देय कर, घोषणा दर्ज करने से पहले भुगतान करना आवश्यक होगा। घोषणा, भुगतान किये हुए कर के प्रमाण के साथ जुड़ा होना आवश्यक होगा। अगर कोर्इ व्यक्ति घोषणा दर्ज करने से पहले कर का भुगतान करने में असमर्थ है, तो वह घोषणा दर्ज करने के तीन महीनों के भीतर कर का भुगतान करना चाहिए। ऐसे सीधे सादे मामले में, घोषणा दर्ज करने की तारीख से लेकर, कर भुगतान करने की तारीख तक, की अवधि में कर की दर 2: प्रति माह, या उसके अंश पर वसुका जायेगा। तो भी अगर घोषक, घोषणा दर्ज करने के 3 महीनों के भीतर भी कर का भुगतान नहीं करता तो घोषणा को रद्द किया जायेगा। उपरोक्त स्थिति में, आंशिक रूप से भुगतान किया गया कर, वापस नहीं लौटाया जायेगा। घोषणा के अनुसरण के बाद भुगतान किया कर भी, किसी भी हालात में, लौटाया नहीं जायेगा।

5. अगर एक व्यक्ति को अनुभाग 142 या 148 के तहत नोटिस जारी किया गया है, और 1 जुलार्इ 1997 से पहले रिटर्न दर्ज नहीं किया है, तो वह उस संबधित निर्धारण वर्ष के लिए ऐच्छिक आय का प्रकटन नहीं कर सकता। इसके आगे, एक व्यक्ति गत वर्ष जिसमे अनुभाग 132 के तहत तलाशी की शुरुआत की गर्इ थी, और आयकर अधिनियम के अनुभाग 133ए के तहत सर्वेक्षण किया गया था, उस वर्ष से संबधित आय का प्रकटन करने की मनाही होगी। उस मामले में जहाँ अनुभाग 132 और 133ए के तहत तलाशी की शुरुआत की गर्इ थी, या अधियाचन दायर किया गया था, एक व्यक्ति को किसी भी गत वर्ष या उससे पहले के वर्ष के लिए ऐच्छिक आय का प्रकटन करने से मनाही होगी, जिस वर्ष में तलाशी की शुरुआत की गर्इ थी या अधियाचन दायर किया गया था। (वित्त अधिनियम, 1997 के अनुभाग 64) . तो भी तलाशी के वर्ष से पहले के वर्ष के लिए घोषणा की जा सकती है। अनुभाग 133ए के तहत सर्वेक्षण के मामले में एक व्यक्ति को घोषणा करने की मनाही होगी सिर्फ उस वर्ष के लिए जिसमे सर्वेक्षण किया गया था।

घोषणा का फॉर्म

6. घोषणा, आयकर आयुक्त के नाम, निर्धारित फॉर्म पर करनी होगी। एक व्यक्ति के मामले में, फॉर्म पर दस्तखत व्यक्ति द्वारा ही किये जा सकते हैं। अगर वह व्यक्ति देश से बाहर है, तो दस्तखत उसके नामित व्यक्ति द्वारा किये जा सकते हैं। उस मामले में जहाँ एक व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो घोषणा पर उसके अभिभावक या उसकी तरफ से एक निपुण व्यक्ति दस्तखत कर सकता है। एक हिन्दू संयुक्त परिवार, कंपनी, व्यवसाय संघ, या संगठन वगैरह के मामले में, फॉर्म पर दस्तखत और उसका सत्यापन, वित्त अधिनियम 1997 के अनुभाग 65 में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किये जा सकते हैं, जो व्यक्ति वही हैं जिनका उल्लेख आयकर अधिनियम, 1961 के अनुभाग 140 में किया गया है। एक व्यक्ति विभिन्न हैसियतों में घोषणा कर सकता है, अपनी निजी आय के मामले में, हिन्दू संयुक्त परिवार के कर्ता के रूप में, वगैरह।

जहाँ, स्वैच्छिक रूप से प्रकट की हुर्इ आय का प्रतिनिधित्व आभूषण करते हैं, तो घोषित आभूषण या बुलियन, मूल्यांकक के सर्टिफिकेट द्वारा प्रमाणित करना आवश्यक होगा। अगर घोषित आय निर्धारण वर्ष 1997 - 1998 से पहले के निर्धारण वर्ष में आभूषण घोषित किये जाते हैं, तो घोषणा के मकसद के लिए, आभूषण का मूल्य 01/04/1987 के दिन का मूल्य माना जायेगा। श्आभूषणश् शब्द का मतलब वही होगा जो संपत्ति - कर अधिनियम, 1957 की व्याख्या 1(अ) से संपत्ति - कर, 1957 के अनुभाग 5 के के खंड 2 (र्इए)/व्याख्या 1 से खंड (viii).

7. घोषणा आयकर आयुक्त के समक्ष दर्ज करना आवश्यक होगा। जहाँ कर भुगतान करने वाला, आयुक्त के प्रधान कार्यालय से दूर है, तो घोषणा के साथ भुगतान का चालान आयकर आयुक्त के कार्यालय में भेजना ज़रूरी होगा, जो डाक से घोषणा और भुगतान का सर्टिफिकेट भेज देगा । सर्टिफिकेट, आयकर आयुक्त द्वारा जारी किया जायेगा, बशर्ते कि घोषणा से संबधित पूर्ण कर का भुगतान किया गया हो।

8. किसी भी निर्धारण वर्ष से संबधित घोषणा, किसी भी संपन्न निर्धारण पर असर नहीं करेगी। एक घोषक के पास किसी भी निर्धारण या पुन रू निर्धारण को वापस खुलवाने का इस कारण से अधिकार नहीं होगा क्यूंकि उसने उस निर्धारण वर्ष के लिए घोषणा अब जाकर की है। ऐच्छिक आय प्रकटन योजना से संबधित किसी भी अपील, संदर्भ या कार्यवाही में प्रतिभार या राहत घोषक द्वारा दावा दायर नहीं किया जा सकता।

9. ऐच्छिक रूप से प्रकटित आय किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए घोषक की कुल आय में सम्मिलित नहीं की जा सकती, अगर घोषक इस राशि को अपने द्वारा बनाये रखे बहीखातों में जमा करता है, और इस जमाराशि के बारे में निर्धारण प्राधिकारी को सूचित करता है। अगर बहीखाते नहीं रखे गए हैं तो घोषक उसे किसी अन्य रिकॉर्ड में जमा कर सकता है। ऐच्छिक रूप से प्रकटित आय को किसी भी निर्धारण वर्ष की कुल आय में सम्मिलित न करने की दूसरी शर्त है कि घोषित आय से संबधित कर, वित्त अधिनियम 1997 के अनुभाग 66 और 67 में उल्लिखित समय के भीतर कर का भुगतान करना।

10. घोषक द्वारा दर्ज किये गए विवरण गुप्त रखे जायेंगे और गोपनीय की तरह व्यवहार किये जायेंगे। कोर्इ भी न्यायालय य अकोर्इ और प्राधिकारी या आयकर विभाग के किसी अफसर या स्वयं घोषक को किसी घोषणा या प्रमाण दर्ज करने की आवश्यकता होगी। दंड लागू करने या आयकर अधिनियम, संपत्ति कर अधिनियम, विदेशी मुद्रा विनियम अधिनियम, 1973 या कंपनी अधिनियम, 1956 से संबधित कार्यवाही के लिए, घोषणा में उल्लिखित कोर्इ भी विषय - वस्तु, घोषक के विरुद्ध प्रमाण के रूप में पेश नहीं की जा सकती है।

11. उस मामले में जहाँ ऐच्छिक रूप से प्रकटित आय का प्रतिनिधित्व नगदी, बुलियन, शेयर या कोर्इ अन्य पूंजी करती है, और जहाँ (1) घोषक ने किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए संपत्ति कर अधिनियम के अनुभाग 14 के तहत रिटर्न दर्ज नहीं किया, (2) ऐसी संपत्ति संपत्ति के रिटर्न में दिखार्इ नहीं गर्इ है; (3) प्रकटन काम बतार्इ गर्इ निवेश की राशि और जहाँ वही संपत्ति के रिटर्न में कम दिखार्इ गर्इ है, तो घोषणा के निर्धारण वर्ष के लिए संपत्ति - कर देय नहीं होगा। तो भी, संपत्ति - कर घोषणा के निर्धारण वर्ष के बाद के वर्षों के लिए कर का भुगतान करना आवश्यक होगा।

12. आयकर अधिनियम के अध्याय गट से संबधित विशेष मामलों में उत्तरदायित्व इस योजना के तहत ऐसी कार्यवाही से संबधित होगा जैसे आयकर अधिनियम के तहत की गर्इ कार्यवाही पर लागू होता है।

13. ऐच्छिक आय प्रकटन योजना की गोपनीयता और उन्मुक्ति के प्रावधान निम्नलिखित व्यक्तियों पर लागू नहीं होंगे :

(अ) ऐसे व्यक्ति पर जिसके नाम, विदेशी मुद्रा और तस्करी निवारण के संरक्षण अधिनियम 1974 के तहत कैद या कारावास का अॉर्डर जारी किया गया है;

(ब) भारतीय दंड संहिता, के अध्याय IX और अध्याय XVII, स्वापक औषधि और मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम (भारत), 1985, आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1987, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 या नागरिक उत्तरदायित्व के अमल से संबधित दंडनीय अपराध के लिए;

(क) किसी ऐसे व्यक्ति को जो अनुभाग 3 के तहत विशेष अदालत (शेयरों के व्यवहार से संबधित अपराध के मुक़दमे) अधिनियम 1992 के द्वारा अधिसूचित हो।

हस्ताक्षर

अनिरुद्ध कुमार,

उपसचिव, भारत सरकार