आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

751

परिपत्र की तिथि

10/02/1997

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

10/02/1997

 
परिपत्र संख्या : 751
जारी करने की तारिख : 10.2.1997
निर्दिष्ट धारा : 2(47)
संविधी : आयकर अधिनियम

विषय: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की ऋणपत्र उधार देने की योजना

शेअर बाजारमे नकदी सुधार करने के लिए, ऋणपत्रमें संव्यवहार सही समय करने की भुगतान सुविधा और शेअर बाजार मे पूर्ता और माँग का अस्थायी असंतुलन सुधारने के लिए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऋणपत्र उधार देनेकी योजनाका ढाचा तैयार किया है। यह योजना 6 फरवरी 1997 से प्रभावित की गर्इ है।

2. यह योजना विशिष्ट कालावधी के लिए, करारद्वारे शर्ते लगाकर अनुमोदित मध्यवर्ता ऋणकर्ताको ऋणपत्र उधार देनेकी बशर्ते अनुमती देती है। शर्ते ऐसी है की ऋणकर्ता निर्देशित कालावधीके आखीर, उस कंपनीसे ऋणपत्र उधार लेनेसे हुए फायदोंसहित, उसी प्रकार की अथवा उसी श्रेणी की समान ऋणपत्र विशिष्ट कालावधी के बाद वापस करेगी। ऋणपत्र जमा करने के लिए उधार देने वाला, अनुमोदित मध्यवर्ता के द्वारा, एक करार करेगा और ऋणकर्ता ये ऋणपत्र लेने के लिए अनुमोदित मध्यवर्ता द्वारा एक करार करेगा और इसी प्रकार, उधार देनेवाला और ऋणकर्ता के बीच किसी प्रकारका सीधा करार नही होगा। अनुमोदित मध्यवर्ता उधार देनेवाले के पास जमा किये हुए ऋणपत्र, ऋणकर्ताओं को वक्त के अनुरूप उधार देने के लिए पात्र रहेगा। ऋणकर्ता के नामसेही ऐसी ऋणपत्रका हक्क (स्वामित्व हक्क) रहेगा। ऋणकर्ता इसीप्रकार उधार लिए ऋणपत्रका व्यवहार कर सकेगा अथवा ऐसी ऋणपत्रके साथ निपट सकेगा। उधार देनेवाला इसी प्रकारकी ऋणपत्र उधार देनेके बदलेमें, विशिष्ट कालावधी के लिए, जमा करने के लिए सम्मत हुर्इ शुल्क राशी मिलने के लिए पात्र रहेगा। अनुमोदित मध्यवर्ता और उधार देनेवाला अथवा ऋणकर्ता, यथा प्रसंग, के बीच हुए करार मे निम्मलिखित निबंधन और शर्ते लागू होगी।

(अ) ऋणपत्र जमा/उधार देनेका कालावधी।

(ब) जमा करने अथवा उधार देने का शुल्क अथवा प्रभार।

(क) उधार देने के लिए सहवर्ता ऋणपत्र.

(ड) जमा कि हुर्इ अथवा उधार दी हुर्इ ऋणपत्रका समयपूर्व पर्तावा सहित पर्तावा के नियम और -

(इ) विवाचनद्वारा विवाद का खण्डन करने लिए यंत्रणा।

3. ऋणपत्र उधार देनेसंबंधी योजना के अंतर्गत बने हुए व्यवहारसंबंधीत, निम्मलिखित करसंबंधी मामले उभर सकते है।

‘क्या ऋणपत्र उधार देने की योजनाके अंतर्गत, भाग उधार देना यह सिलसिला आयकर अधिनियमके धारा 2(47) के अंतर्गत उधार देनेवालेके हाथों ’स्थानांतर’ समझा जाएगा?’

4. अगर शेअर मार्केट का विचार कर दिया जाए तो, शेअर्स ‘फंजिबल’ परिसंपत्ती है। छोटे अॉक्सफर्ड शब्दकोषकी महत्त्वपूर्ण धारणामे ’फंजिबल’ की व्याख्या है -’एखाद बंधनकारक वस्तू जब उसी प्रकारकी दूसरी वस्तू या दूसरे श्रेणीकी वस्तू उसके बदले मे दी गर्इ हो।’ कोर्इ एक कंपनी का कोर्इ हिस्सा उसी कंपनीके दूसरे कोर्इ हिस्से के बदलेमे एक अच्छी प्रतिस्थापना होती है। विशिष्ट संख्याबलपर मार्केट कतैही महत्व नही देती है। यह सिर्फ विशिष्ट शेअर धारण कालावधी के गिनती करने के लिए है अथवा बोनस शेअर और मूल शेअर के बीच फरक करने के लिए है और आयकर विभाग विशिष्ट संख्या पर बल देता है। बोर्ड को ऐसी सलाह दी जाती है की जब कोर्इ उधार देनेवाला, कंपनीके अलग-अलग संख्या के तुल्यमान शेअर्स प्राप्त करता है तब वह परिसंपत्ती बदली नही होती है। जब कोर्इ परिसंपत्ती फंजिबल होती है, और उधार देनेवाला उसी कंपनीके उतनेही शेअर्स अंकित मूल्यसे प्राप्त करता है और उसे वह उसी हकसे प्राप्त होते है, तभी वह (शेअर्स) अलग अलग संख्या (नंबर) के है या नही है, यह मुद्दा अनावश्यक हो जाता है। इसी प्रकारके शेअर्स बेचना अथवा उसकी किमत प्राप्त करना अथवा ऐसे शेअर्स कंपनीको भेजना और उसके नाम वह शेअर्स हस्तांतरित होना इसके लिए वह तैयार अवस्था मे रहेगा। आयकर अधिनियम धारा 2(47) के तहत ‘विनिमय’ के अर्थसे अलग अलग नंबरके शेअर्स उधार देना और उसके बदले दूसरे नंबरके शेअर्स प्राप्त करना, यह व्यवहार ‘परिसंपत्ती विनिमय’ नही है। ‘विनिमय’ का अर्थ दो अलग अलग आवश्यभावी शामिल परिसंपत्ती का विनिमय है। उपर बताये गये व्यवहार मे वापस प्राप्त हुर्इ परिसंपत्ती जबतक उसी कंपनी के स्वामित्व हक संबंधी हिस्सा है, तबतक वह उधार दी गर्इ वस्तू, वस्तूकी अपेक्षा अलग नही है। किसीभी अवस्थामें उधार देनेवाला अथवा ऋणकर्ता का अलग अलग ‘परिसंपत्ती विनिमय’ का इरादा नही है। इसलिए ऋणपत्र उधार देने की परियोजना के अंतर्गत, शेअर्स उधार देना या दूसरा कौनसाभी ऋणपत्र व्यवहार, यह प्रावधान को आवहान करने के लिए है, ऐसा अर्थ आयकर के पूंजिगत लाभ संबंधी ‘विनिमय’ के अर्थसे नही है।

5. इस परिपत्रकी विषयसूची आपके क्षेत्र के अधिकारीयोंको सूचित कर दी जाए । इसी योजना की एक प्रत यहाँ आबद्ध की है।

[एफ.नं. 149/104/9-टीपीएल दि. 10-2-97 सीबीडीटी से - न्यू दिल्ली]

आबद्ध परिपत्र 750

ऋणपत्र उधार योजना, 1997 (एस.एल.एस. 1997)

1. प्रास्ताविक :

1) यह योजना ऋणपत्र उधार योजना, 1997 के नाम से पुकारा जाएगा।

2. प्रयोज्यता :

1) यह योजना 6 फरवरी 1997 से प्रभावित की जाएगी।

3. व्याख्याए :

(1) इस योजना में, जब तक परस्थिती की दूसरी माँग ना हो -

(अ) ‘अनुमोदित मध्यवर्ता’ का मतलब है की बोर्डने मार्गदर्शा सिद्धांत/योजनाद्वारा पंजीकृत किया हुआ ऐसा व्यक्ती कि जिसे ऋणदाता ऋणपत्र उधार देने के लिए जमा करेगा और ऋणकर्ता ऋणपत्रका ऋण लेगा ।

(ब) ‘बोर्ड’ का अथ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) अॅक्ट 1992 की धार 3 अंतर्गत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ।

(क) ‘ऋणकर्ता’ का अर्थ जो व्यक्ती योजना अंतर्गत अनुमोदित मध्यवर्ताद्वारा ऋणपत्रका ऋण लेता है।

(ड) ‘निगम लाभ’ मे लाभांश (कुल), हक्क, बोनस, विमोचन लाभ, ब्याज, तथा ऋणपत्र उधार देनेसे प्राप्त हुआ अन्य हक्क या लाभ शामील है।

(इ) ‘ऋणदाता’ का अर्थ योजना अंतर्गत उधार देने के लिए कोर्इ भी व्यक्ती जो ऋणपत्र अपने नामपर पंजीकृत जमा करता है या अनुमोदित मध्यवर्ताद्वारा खुदके बदलेमे किसी दूसरी व्यक्ती को प्राधिकृत करता है।

(फ) ‘ऋणपत्र’ का अर्थ सेक्युरिटी कॉन्ट्रक्ट (रेग्युलेशन) अॅक्ट 1956 अंतर्गत धारा 2 मे समनुदेशित है।

(ग) ‘योजना’ का अर्थ योजना उधार योजना, 1997 है। यह अनुमोदित मध्यवर्ताद्वारा ऋणकर्ता को करार से विशिष्ट कालावधी के लिए बशर्ते ऋणपत्र उधार देती है। शर्ते यह है की ऋणकर्ता विशिष्ट कालावधी के उपरांत उसी प्रकार या श्रेणीकी समपतल ऋणपत्र, ऋणपत्र उधार लेनेसे प्रोषभुत हुआ निगम लाभ के साथ वापस करेगा।

(2) उपयोग किये हुए शब्द और विश्लेषण और योजना के हेतू व्याख्यांकित नहीं किए परंतू सेक्युरिटी कॉन्ट्रॅक्टस (रेग्युलेशन) अॅक्ट 1956 मे व्याख्यांकित है तथा सेबी अधिनियम मे क्रमानुसार अर्थ समनुदेशित अधिनियम के कायदे और कानून के अंतर्गत तैयार किए है ।

4. योजना :

(1) ऋणदाता योजनाके अनुसार अनुमोदित मध्यवर्ताद्वारा उधार देने के कारण अनुमोदित मध्यवर्ता के बराबर ऋणपत्र जमा करने के लिए एक करार करेगा और ऋणकर्ता उधार लेनेके लिए अनुमोदित मध्यवर्ता के बरोबर एक करार करेगा और इसी प्रकार ऋणकर्ता और ऋणदाता के बीच ऋणपत्रके उधार देने या उधार लेने के लिए सीधा करार नही रहेगा।

(2) ऋणदाता और अनुमोदित मध्यवर्ता के बीच करार होगा जिसके नियमके अनुसार जब योजना के अंतर्गत ऋणदाता यह अनुमोदित मध्यवर्ताको ऋणपत्र जमा करेगा, ऋणदाताके साथ उसके लाभ आगे चालू रहेंगे और संपूर्ण निगम लाभ ऋणदाताको समनुदेशित किए जाएंगे ।

(3) ऋणदाता सिर्फ उसके खुदके नाम दर्ज किए ऋणपत्र तथा अनुमोदित मध्यवर्ताको दूसरे किसी व्यक्ती की तरफसे दिए हुए हक्कद्वारा ऋण देने के कारण ऋणपत्र जमा कर सकता है।

(4) योजना के अंतर्गत अनुमोदित मध्यवर्ताद्वारा ऋणपत्र उधार देते समय और उसी प्रकारकी और श्रेणीकी समपतल ऋणपत्र वापस करते समय, ऋणकर्ताकी ऋणपत्रकी व्यवस्था नही संसाधित की जाएगी।

(5) अनुमोदित मध्यवर्ता ऋणदाताको ऋणदाताने जमा किए हुए ऋणपत्र की अभिस्वीकृती की तहत प्राप्तीसूचना जारी करेगी।

(6) ऋणदाता के साथ किए हुए करार मे अगर नियम नही है तो, अनुमोदित मध्यवर्ता उसी प्रकारकी और उसी श्रेणीकी समपतल ऋणपत्र उधार लेनेके कालावधीमे अनुमोदित निगम लाभांश के सहित ऋणदाताको वापस करनेकी प्रत्याभूति देगी। अगर ऋणकर्ता उसकी ऋणपत्र या निगम लाभ वापस करनेमे नाकाम हो गया तो ऋणदाताको हुआ नुकसान अनुमोदित मध्यवर्ता उठाएगी।

(7) ऋणदाता ने जमा किए ऋणपत्र, अनुमोदित मध्यवर्ता अपनी हिफाजतमें ऋणदाता के विÜवस्तकी रूपसे रख सकता है ।

(8) ऋणदाता के साथ अनुमोदित मध्यवर्ताने किए हुए करार की बशर्ते, वारंवार ऋणकर्ताके पास ऋणदाताकी तरफसे जमा हुर्इ ऋणपत्र उधार देने के लिए अनुमोदित मध्यवर्ता को हकदार किया जाएगा।

(9) इस योजनाके अंतर्गत, ऋणकर्ताको उधार दि गर्इ ऋणपत्र उपाधी, ऋणकर्ताके साथ रहेगी और ऋणकर्ता जैसा वह चाहे उसी प्रकार ऋणपत्रका सौदा कर सकेगा अथवा उसका निपटारा कर सकेगा।

(10) ऋणकर्ता और अनुमोदित मध्यवर्ता के बीच हुए करार मे, साथही साथ ऋणकर्ताको समतुल्य उसी प्रकारकी और उसी श्रेणीकी ऋणपत्र संख्या, अनुमोदित मध्यवर्ताको करारमे निर्देशित किए विशिष्ट कालावधीमे ऋणदाताको वापस करने का बंधन होगा।

(11) ऋणदाता और अनुमोदित मध्यवर्ता के बीच हुआ करार और ऋणकर्ता और अनुमोदित मध्यवर्ता के बीच हुआ करार इसमे निम्मलिखित बशर्ते होगी :-

(अ) ऋणपत्र जमा/उधार देनेका कालावधी।

(ब) जमा करने अथवा उधार देने का शुल्क अथवा प्रभार।

(क) उधार लेने के लिए सहवर्ता ऋणपत्र।

(ड) जमा कि हुर्इ अथवा उधार दी हुर्इ ऋणपत्रका समयपूर्व पर्तावा सहित पर्तावा के नियम और -

(इ) विवाचनद्वारा विवाद का खण्डन करने लिए यंत्रणा।

(12) ऋणकर्ता उसकी देयता की वापसी समपतल ऋणपत्र रोकडा या माल के द्वारा नही कर सकता।

(13) ऋणकर्तासे अनुमोदित मध्यवर्ता को सहवर्ता ऋणपत्र और ऋणपत्र उधार देनेके लिए शुल्क मिलने का अधिकार है।

(14) ऋणकर्ता, अनुमोदित मध्यवर्ताको सहवर्ता ऋणपत्र, बँक गॅरंटी, शासकीय ऋणपत्र या जमा करने का प्रमाणपत्र या दूसरे ऋणपत्र, अनुमोदित मध्यवर्ताके साथ सहमतीसे वापसी की ऋणपत्रकी खातरजमा करनेके लिए जमा कर सकता है।

(15) ऋणदाताको जब अनुमोदित मध्यवर्ता, ऋणपत्र वापस करेगा तब अनुमोदित मध्यवर्ता, ऋणदाता को इसकी रसीद अदा करेगा।

(16) अनुमोदित मध्यवर्ता ऋणदाताकेद्वारा जमा हुर्इ ऋणपत्र, ऋणकर्ताको उधार दि गर्इ ऋणपत्र, ऋणकर्तासे प्राप्त हुर्इ ऋणपत्र और अनुमोदित मध्यवर्ताने ऋणदाताको वापस की हुर्इ ऋणपत्र इसकी संपूर्ण रिकार्ड रखेगा।

(17) करार की बशर्ते अगर ऋणकर्ता ऋणपत्र वापस करनेकी शर्ते पूरी नही कर सका तो, ऋणकर्ता चूककर्ता होगा और अनुमोदित मध्यवर्ताको मार्केटसे ऋणदाताको समपतल ऋणपत्र वापस करनेके लिए उसी प्रकारकी और उसी श्रेणीकी समपतल ऋणपत्र खरीदने के लिए उनके पास होने वाली सहयोगी जमा चुकानेके लिए हक प्राप्त होगा। इसी प्रकार चूककर्ता के उप्पर अनुमोदित मध्यवर्ता उसे हुआ नुकसान समेटनेके लिए योग्य कारवार्इ करने के लिए पात्र होगा।

(18) अनुमोदित मध्यवर्ता किसीभी ऋणकर्ताने ना किया हुआ भुगतान बोर्डको, संबंधित शेअर मार्केटको और संबंधित प्राधिकारीको, चूकनेवालेकी खिलाफ योग्य कारवार्इ करने के लिए निर्देशित करेगा।

5. अनुमोदित मध्यवर्ता के लिए पात्रता निकष :

जब तक बोर्डसे पंजिकृत प्रमाणपत्र नही मिलता तबतक कोर्इभी व्यक्ती अनुमोदित मध्यवर्ता के रूपमें काम नही कर सकेगा।

बोर्ड के द्वारा पंजिकृत प्रमाणपत्र प्राप्त करनेके लिए निम्नलिखित बाते ध्यान मे ली जाएगी।

(अ) अर्जदारकी निवल संपत्ती कम से कम रू. 50 करोड है या नही।

(ब) अर्जदार क्लिअरिंग हौस है या क्लिअरिंग निगम है इसके बारे में शेअर मार्केटसे सलाहमसलत करने के बाद, बोर्डने सुस्पष्ट की हुर्इ निवल संपत्ती है या नही।

(क) अर्जदार के पास कार्यालय की जगह, साधन-सामुग्री तथा परिणामकारक रीत से ऋणपत्र सौदा करनेके लिए अनुभवी मनुष्यबल है या नही।

6. अनुमोदित मध्यवर्ता की कर्तव्य और जिम्मेवारीयाँ।

मान्यताप्राप्त अनुमोदित मध्यवर्ता आदेश के अनुसार निम्नलिखित कर्तव्य और जिम्मेवारी निभाएगा।

(1) अनुमोदित मध्यवर्ता योजना का पालन करेगा और ऋणपत्र उधारीसंबंधी बोर्डद्वारा अलग अलग वक्त जारी की गर्इ मार्गदर्शक सिद्धांतके अनुसार क्रिया करेगा।

(2) अगर बोर्ड निर्धारित करे तो ऋणदाता और ऋणकर्ता के लिए दी गइ पात्रता निकष आवशकता के अनुसार अनुमोदित मध्यवर्ता पात्रता निकषके लिए आदेश के अनुसार काम करेगा।

(3) अनुमोदित मध्यवर्ता संबंधित करार के अनुसार ऋणदाता को देय शुल्क और ऋणकर्ता को लगाए जाने वाले शुल्कसंबंधी शर्त रखेगा।

(4) अनुमोदित मध्यवर्ता किमत के अनुसार विशेष ब्योरा देगा और ऋणपत्र उधारी के लिए माने गये सहयोगीका प्रकार तथा ऋणपत्रकी किमतके बारेमे मापदंड रखेगा। ऋणकर्ता के साथ सहयोगी आय के हिस्सेके बारेमे यंत्रणासंबंधी विशेष ब्योरा देगा।

(5) ऋणदाता कि बिनतीनुसार अनुमोदित मध्यवर्ता ऋणदाताने दिये ऋणपत्र जमा करने हेतू रसीद देगा। ऋणपत्र जमा का सारा ब्योरा उस रसीदमे समाविष्ट होगा - उदा. ऋणपत्रका नाम, संख्या, अंकित मूल्य, प्रमाणपत्र क्रमांक, ऋणदाताका फोलिओ नंबर और जिस तारीखसे ऋणदाताको ऋणपत्रका पंजिकृत धारक किया गया हो। इसी प्रकार अनुमोदित मध्यवर्तासे जब ऋणदाताको ऋणपत्र वापस किया जाएगा, उसी समय एक रसीद दी जाएगी जिसमे उपरांत उल्लेखित ब्योरा होगा और ऋणदाता उसका निरंतर साक्ष के रूपमे उपयोग कर सकेगा।

(6) अनुमोदित मध्यवर्ता ऋणदाताके ऋणपत्र तथा ऋणकर्ताको उधार दी गर्इ ऋणपत्र, ऋणकर्तासे प्राप्त हुर्इ ऋणपत्र और अनुमोदित मध्यवर्तासे ऋणदाताको वापस की गर्इ ऋणपत्रका संपूर्ण रिकार्ड रखेगा। बोर्ड अथवा बोर्डने शिफारीस की हुर्इ अन्य कोर्इभी व्यक्ती अनुमोदित मध्यवर्ता ने रखा हुआ रिकार्ड जाच के लिए खुला रखेगा।

(7) अनुमोदित मध्यवर्ता बोर्डके लिए किसीभी वक्त, जानकारी, दस्तावेज, विवरण और रिपोर्ट बनाए रखेगा और उपलब्ध करेगा।

(8) बोर्डने निर्देशित कि हुर्इ आचार-संहितासे अनुमोदित मध्यवर्ता बंधा रहेगा।

(9) इस योजना के तहत किसीभी कायदे, नियम और मार्गदर्शनसे अनुमोदित मध्यवर्ताके उपर जतायी गर्इ अनिवार्य बंधन से मुक्त नही होगा।

7. अनुमोदित मध्यवर्ताके लिए मार्गदर्शन:

पंजिकरण का कालावधी

(अ) शुरवातमें पहिले 3 बरसके लिए यह पंजिकरण होगा।

(ब) पंजिकरणकी शर्तके अनुसार अनुमोदित मध्यवर्ता, बोर्डने निर्देशित की हुर्इ रकम अदा करेगा।

(क) इस परियोजनाकी शर्तोका उल्लंघन हुआ तो बोर्डको अनुमोदित मध्यवर्ताका पंजिकरण रोकने/रद करनेका अधिकार होगा।

(ड) उपरान्त किसीभी बात के बावजूद, नैसर्गिक न्याय के खिलाफ, बोर्ड किसीभी प्रकारकी कार्यवाही नही कर सकता।