आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

748

परिपत्र की तिथि

19/12/1996

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

19/12/1996

 
परिपत्र संख्या 748
जारी करने का दिनांक 19:12:1996
धारा 54र्इए, 54 र्इबी
कानून आयकर अधिनियम

विषय: आयकर अधिनियम की धारा 54र्इए तथा 54 र्इबी के उद्देश्यों के लिए अनुमोदित निवेशों के संबंध में कंपनी और म्युचुअल फंड के लिए दिशानिर्देश

1. आयकर अधिनियम 1961 की धारा 54 र्इए तथा 54 र्इबी को वित्त (संख्या 2) अधिनियम 1996 द्वारा 01.10.1996 के प्रभाव से लाया गया है जो कि इस दिनांक पर या उसके बाद दीर्घ अवधि पूंजी परिसम्पत्तियोंके हस्तांतरण के संबंध में निरंतर रूप से लागू होंगी। पूंजी लाभ कर को उन मामलों मं छूट प्रदान की जाएगी जहां पर छूट विचार (धारा 54 र्इए) या पूंजी लाभ (धारा 43 र्इबी) का निवेश अनुमोदित लिखन मेंं किया गया है। दोनों ही कथित धाराओं में अनुमोदित लिखनों को पृथक रूप से अधिसूचित किया गया है। आयोग ने उपरोक्त धाराओं के उद्देश्य के लिए अनुमोदित निवेशों के लिए निम्न दिशानिर्देश बनाए हैं:

1 क. निवेश लिखनों को अधिसूचित करने के लिए सीबीडीटी के लिए सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों तथा पब्लिक कंपनियों को आवेदन भेजे जाएंगे।

ख. यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया सहित आयकर अधिनियम की धारा 10 (23 डी) में बताए गए म्युच्युअल फंड को इस उद्देश्य के लिए आवेदन बनाना आवश्यक नहीं है।

2. पूंजी का 60 प्रतिशत ( जिसे निवेश योग्य पूंजी कहा जाता है), को उन बॉंड या ऋणपत्रों के माध्यम से उगाहा जाना है और जिसे संरचनागत सुविधाओं में निवेश किया जाना है जो कि आयकर अधिनियम की धारा 80 आर्इ ए की उपधारा (12) में परिभाषित किया गया है या ऊर्जा सृजन करने वाली कंपनियों या ऊर्जा वितरण करने वाली कंपनियों या मूल टेलीफोन सेवाओं में संलग्न कंपनियों या तेल व प्राकृतिक गैसों की खोज/कर्षण में संलग्न हैं।

3 25 प्रतिशत या अधिक की निवेश योग्य पूंजी को उन संरचनाओं में निवेश किया जाना है जो कि धारा 80 आर्इए की उपधारा (12) में निर्धारित हैं, उपरोक्त अनुच्छेद (2 ) में वर्णित हैं, आयोग द्वारा अनुमोदन दिनांक से एक वर्ष के अंत से पूर्व।

4. शेष निवेश योग्य राशि को आयोग द्वारा अनुमोदित दिनांक से तीन वर्ष की अवधि के अंदर ही निवेश किया जाएगा।

5. प्रत्येक सार्वजनिक कंपनी तथा सार्वजनिक वित्त संस्थान एक लेखाकार से एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा जैसा कि धारा 288 की उपधारा ( 2 ) की व्याख्या मेंं आयोग द्वारा अनुमोदित दिनांक से प्रत्येक वर्ष में निवेशित राशि को बताते हुए परिभाषित किया है।

6. आयोग के पास निम्न स्थितियों में अनुमोदित अनुदान को वापस लेने की शक्ति होगी:

क. यदि कोर्इ ऐसी कंपनी या सार्वजनिक वित्त संस्थान उपधारा ( 3 ) या ( 4 ) में वर्णित स्थितियों में निवेश करने में अक्षम होता है तो या

ख. यदि कोर्इ ऐसी सार्वजनिक कंपनी या सार्वजनिक वित्त संस्थान उपधारा ( 5 ) में वर्णित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में अक्षम होता है तो

भवदीय

हस्ताक्षर

कृष्णा सैनी

सचिव

सीबीडीटी

एफसं. 142/58/96 टीपीएल दिनांक 19/12/1996 सीबीडीटी से, नर्इ दिल्ली )

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