आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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परिपत्र सं.

747

परिपत्र की तिथि

02/12/1996

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

02/12/1996

 
परिपत्र संख्या 747
जारी करने का दिनांक 2:12:1996
धारा 192ए 80सीसीसी, 80 डी, 80 डीडी, 80 डीडीए, 80 डीडीबी, 80 र्इ, 80 जी, 80 जीजी, 80 यू, 88
कानून आयकर अधिनियम

विषय: आयकर अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 1996-97 के दौरान वेतनों से आय कर कटौतियां

परिपत्र संख्या 724 दिनांक 29 सितंबर 1995 से संदर्भ आमंत्रित किया जाता है जहां पर वित्तीय वर्ष 1995-96 के दौरान आय कर अधिनियम 1961 की धारा 192 के अंतर्गत वेतन मद के अंतर्गत आय के भुगतान की कटौती को आरंभ किया गया है। वर्तमान परिपत्र में वित्तीय वर्ष 1996-97 के दौरान वेतन मद के अंतर्गत आय के भुगतान से आय कर की कटौती की दर संलग्न है तथा आयकर अधिनियम के कुछ निर्धारित प्रावधानों की व्याख्या करता है।

2. वित्त ( संख्या 2 ) अधिनियम 1996:

वित्त ( संख्या 2 ) अधिनियम 1996 के अनुसार आय कर की कटौती आयकर अधिनियम 1961 की धारा 192 के अंतर्गत ही कटौती निम्न दरों पर वित्तीय वर्ष1996-97 (अर्थात आंकलन वर्ष 1997-98) के लिए मद वेतन के अंतर्गत शुल्क योग्य आय से की जानी चाहिए:

      आयकर की दर
1. जहां पर कुल आय 40,000 से अधिक न हो     शून्य
2. जहां पर कुल आय 40,000 से अधिक हो किंतु 60,000 से कम हो     उस राशि का 15 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय 40,000 से अधिक है
3. जहां पर कुल आय 60,000 से अधिक हो किंतु 1,20,000 से कम हो     3,000 रूपए तथा उस राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय 60,000 से अधिक है।
4. जहां पर कुल आय 1,20,000 से अधिक हो     21,000 रूपए तथा उस राशि का 30 प्रतिशत जिसके द्वारा कुल आय 1,2.,000 से अधिक है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि व्यक्तियों के लिए आयकर छूट सीमा को रूपए 40,000 पर निर्धारित किया गया है तथा कोर्इ भी इसमें सरचार्ज लागू नहीं है।

3. आयकर अधिनियम की धारा 192:

3.1 प्रत्येक व्यक्ति जो कि मद वेतन के अंतर्गत किसी भी प्रकार की आय का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, वह वित्तीय वर्ष 1996-97 के लिए मद वेतन के अंतर्गत आंकलनकर्ता की अनुमानित आय पर आयकर की कटौती करेगा। आय कर की गणना को उपरोक्त दिए गए दरों के आधार पर किया जाना चाहिए तथा उसे भुगतान के समय काटा जाना चाहिए। किसी भी प्रकार के कर की कटौती हालांकि किसीभी मामले में तब तक स्रोत में नहीं होगी जब तक कि पूर्व आवश्यकताओं सहित अनुमानित वेतन आय वित्तीय वर्ष के लिए रूपए 40,000 से अधिक न हो जाए। (करों की गणना के कुछ उदाहरण अनुलग्नक 1 में दिए गए है।)

3.2 धारा 192 की उपधारा ( 2 ) में वे स्थितियां होती हैं जब एक व्यक्ति एक से अधिक नियोक्ताओं के साथ काम करताहै तथा साथ ही अपना नियोक्ता बदलता रहता है। यह करों में कटौती ऐसे नियोक्ता द्वारा स्रोत पर कर्मचारी की कुल आय से (एक करदाता के रूप में चुन सकता है ) देता है जो या तो किसी एक नियोक्ता से वेतन हासिल कर चुका है या कर रहा है। कर्मचारी को पूर्व/अन्य नियोक्ता से प्राप्त या बकाया वेतन मद के अंतर्गत आय वर्तमान/चुने हुए नियोक्ता का विवरण तथा साथ ही काटे हुए कर का विवरण लिखित में तथा उसके व पूर्व/अन्य नियोक्ता द्वारा सत्यापित दिया जाना चाहिए। वर्तमान नियोक्ता को वेतन की कुल राशि पर स्रोत में कर की कटौती किए जाने की आवश्यकता होगी (जिसमें पूर्व या अन्य नियोक्ता से प्राप्त वेतन सम्मिलित हो )

3.3 धारा 192 की उप धारा ( 2ए ) प्रदान करती है कि सरकार, कंपनी, कोऑपरेटिव सोसाइटी, स्थानीय प्राधिकरण,विश्वविद्यालय, संस्थान या निकाय के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के संबंध में स्रोत पर कर की कटौती को केवल धारा 89 (1) के अंतर्गत अनुमत राहत को दिखाते हुए ही बनाया जाना चाहिए जहां भी वेतन आदि को एरियर या अग्रिम में चुकाया जा रहा हो।

3.4 उपधारा ( 2 बी ) एक करदाता को वेतन के अतिरिक्त किसी भी मद तथा वर्णित प्रपत्र (संख्या 12 सी ) में स्रोत में किसी भी कर की कटौती के अंतर्गत विवरण को सक्षम करती है। किसी भी अन्य मद के अंतर्गत आय को नुकसान नहीं होना चाहिए। कर्मचारी को ऐसी किसी भी आय या कर की कटौती ऐसी किसी भी आय से स्रोत से आय कर अधिनियम की धारा 192 के अंतर्गत कटौतीयुक्त कर की गणना के उद्देश्य के लिए की जानी चाहिए। हालांकि यदि ऐसे एकत्रीकरण का परिणाम कटौती योग्य कर में होता है जो कि उस मामले में कम है जहां पर मद वेतन को कटौतीयोग्य करों की गणना में लिया जा रहा है तो उपधारा 2 बी के अंतर्गत ऐसे एकत्रीकरण की अनुमति नहीं है। अन्य शब्दों में किसी भी अन्य स्रोत से किसी भी नुकसान को डीडीओ द्वारा वेतन आय से समायोजित नहीं किया जा सकता है। इन प्रावधानों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केन्द्रीय सरकार ने आय कर नियमों में नियम संख्या 26बी को लागू किया गया है। इस संबंध में विस्तृत निर्देश विभागों द्वारा परिपत्र संख्या 504 द्वारा जारी किए गए है।

3.5 धारा 192 की उपधारा ( 3 ) के प्रावधान वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी अधिकता या करों की कटौती में कमी के समायोजन के लिए बनाए गए है।

3.6 पहचाने गए प्रोविडेंट फंड के न्यासी या फंड के निगमनों द्वारा अधिकृत कोर्इ भी व्यक्ति कर्मचारियों के लिए एकत्र बकाया का भुगतान करेगा, चह उन मामलों में जहां पर अधिनियम की चौथी अनूसूची के भाग क के नियम 9 के उप नियम ( 1 ) लागू होता है, उस समय किसी भी कर्मचारी पर एकत्रित बकाए का भुगतान किया जाता है तो उस कटौती को चौथीी अनुसूची के भाग बी के नियम 6 में के अनुसार किया जाता है।

3.7 जहां भी किसी भी प्रकार का कोर्इ योगदान किसी नियोक्ता द्वारा बनाया जाता है जैसे किसी ऐसे योगदान पर ब्याज, तो कोर्इ अनुमोदित सुपरएन्युएशन राशि का भुगतान कर्मचारियों को किया जाता है, ऐसी किसी भी निधि पर भुगतान किया जाता है उसे अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग बी के नियम 6 में प्रदत्त सीमा के लिए निधि के लिए न्यासियों द्वारा कटौती की जानी चाहिए।

3.8 विदेशी मुद्रा में भुगतान योग्य वेतन पर कर की कटौती के उद्देश्य के लिए ऐसे वेतन के लिए रूपयों की कीमत की गणना वर्तमान विनिमय दर के अनुसार की जानी चाहिए।

4. करों की कटौती के लिए उत्तरदायी व्यक्ति तथा उनके दायित्व:

4.1 अधिनियम की धारा 204 के क्लॉज ( 1 ) के अंतर्गत धारा 192 के उद्देश्य के लिए भुगतान के लिए उत्तरदायी व्यक्ति का अर्थ नियोक्ता से होता है या यदि नियोक्ता एक कंपनी है तो कंपनी में मुख्य अधिकारी भी सम्मिलित होगा।

4.2 अनुच्छेद 7 में निर्धारित कर को अधिनियमकी धारा 192 कें अंतर्गत ही वेतन से कटौती की जानी चाहिए।

4.3 धारा 197 करदाताओं को उसके आंकलनकर्ता अधिकारी के लिए उसके फॉर्म संख्या 13 में आवेदन के लिए सक्षम बनाती है तथा यदि आंकलनकर्ता अधिकारी संतुष्ट है कि करदाताओं की कुल आय किसी भी भी निम्न दर पर आय कर की कटौती को न्यायोचित करती है तो इस प्रभाव से एक उचित प्रमाणपत्र जारी कर सकता है जो आरहण तथा वितरण अधिकारी द्वारा स्रोत में कर की कटौती करते समय संज्ञान में लिया जा सकता है।

4.4 धारा 200 के प्रावधानों के अनुसार कोर्इ भी व्यक्ति जो कि धारा 192 के प्रावधानों के अनुपालन में किसी भी राशि की कटौती कर रहा है, निर्धारित समय में केन्द्रीय सरकार के क्रेडिट के लिए निर्धारित तरीके में राशि की कटौती की जाती है। (आयकर नियमों 1962 के नियम 30 के अनुसार)। सरकार द्वारा या सरकार की ओर से की गर्इ कटौती के मामले में भुगतान को कर कटौती के दिन में बनाया जाता है। अन्य मामलों में भुगतान को कटौती के एक सप्ताह के बाद किया जाता है।

4.5 यदि कोर्इ व्यक्ति स्रोत पर कर की कटौती करने में अक्षम होता है या कटौती के बाद कर को केन्द्रीय सरकार को निर्धारित समय में क्रेडिट के लिए कर का भुगतान करने में अक्षम होता है तेा वह धारा 201 के प्रावधानों के साथ अनुपालन में कदम उठाने के लिए बाध्य होता है। धारा 201 की उपधारा (1 ए) बताती है कि ऐसे व्यक्ति उस दिनांक से जिसदिन से ऐसे कर की कटौती उस दिनांक से की जानी है जब उसका वास्तविक भुगतान किया गया था, 15 प्रतिशत सालाना की सरल ब्याज दर पर भुगतान करने के लिए बाध्य होंगे। यदि कोर्इ व्यक्ति स्रोत पर भुगतान करने में अक्षम होता है तो वह एक दंड के रूप में वही राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य होगा जितनी राशि के कर का भुगतान उसने नहीं किया था। और धारा 276 बी यह भी बताती है कि यदि कोर्इ व्यक्ति केन्द्रीय सरकार के ऋण का भुगतान करने में अपने स्रोत में कटौती किए गए कर का निर्धारित समय में अक्षम होता है तो उसे 3 माह से लेकर 7 वर्ष तक दंड सहित कड़ी सजा हो सकती है।

4.6 धारा 203 के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जो स्रोत पर कर की कटौती के लिए उत्तरदायी होता है उसे आदाता को इस प्रभाव से एक प्रमाणपत्र प्रदान करना होता है कि करों की कटौती हो गर्इ है तथा यह बताने के लिए कि कितनी राशि की कटौती की जानी है और कुछ अन्य विवरण। इस प्रमाणपत्र को अक्सर टीडीएस प्रमाणपत्र कहा जाता है और इसे प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के अंत में एक माह की अवधि के अंदर जारी किया जाता है। वेतन आय को पाने वाले कर्मचारियों के मामले में प्रमाणपत्र प्रपत्र संख्या 16 में जारी किया जाता है जो कि आयोग की अधिसूचना संख्या एसओ ( 148 र्इ) दिनांक 28 फरवरी 1991 के अंतर्गत बताया जा चुका है। ऐसे प्रमाणपत्र की एक प्रति को अनुलग्नक 2 मेंं संलग्न किया गया है। इस प्रमाणपत्र को कटौती करने वाले की खुद की स्टेशनरी पर मुद्रित किया जाता है। यदि वह यह प्रमाणपत्र जारी करने में असफल होता है जैसा कि धारा 203 में वर्णित है वह दंड के रूप में धारा 272 ए के अंतर्गत उस राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य होगा जो कि 100 रूपए से कम नहीं होगी और 200 रूपए से अधिक नहीं होगी, जब तक कि यह असफलता चालू रहती है।

4.7 आयकर अधिनियम की धारा 203 ए के प्रावधानों के अनुसार, सभी उत्तरदायी व्यक्तियों के लिए यह बाध्यकारी होगा कि वे स्रोत में कटौती किए गए करों के लिए एक कर कटौती खाता संख्या ( टैन ) चलानों में, टीडीएस प्रमाणपत्रों में, रिटर्न आदि में हासिल करे व उसे बताए। इस संबंध में विस्तृत विवरण इस विभाग के परिपत्र संख्या 497 (एफ संख्या 275/118/87 आर्इटी ( बी ) ) दिनांक 8 अक्टूबर 1987 में उपलब्ध है। यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 204 ए के प्रावधानों का अनुपालन करने में असफल होता है तो वह धारा 272 बीबी के अंतर्गत रूपए 5,000 तक के दंड के भुगतान के लिए बाध्य होगा।

4.8 आयकर अधिनियम की धारा 206 के अनुपालन में, जिसे आयकर नियम 36ए तथा 37 पढ़ा जाए, सरकार के प्रत्येक कार्यालय के मामले में वर्णित व्यक्ति, हर कंपनी के मामले में मुख्य अधिकारी, प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण या अन्य सार्वजनिक निकाय या एसोसिएशन के मामने में वर्णित व्यक्ति के मामले में प्रत्येक निजी नियोक्ता तथा प्रत्येक अन्य व्यक्ति धारा 192 के अंतर्गत करों का भुगतान वेतन से करने के लिए उत्तरदायी है, हर वित्तीय वर्ष के अंत के बाद निर्धारित /संबंधित आंकलनकर्ता अधिकारी के लिए करों की कटौती के सालाना रिटर्न के बाद तैयार किए व प्रदान किए जाते हैं। इस रिटर्न को प्रपत्र संख्या 24 में बताया गया है। यदि कोर्इ व्यक्ति इसे एक निर्धारित समय में प्रदान करने में असफल रहता है तो वह दंड के रूप में धारा 272 ए के अंतर्गत उस राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य होगा जो कि 100 रूपए से कम नहीं होगी और 200 रूपए से अधिक नहीं होगी, जब तक कि यह असफलता चालू रहती है, तो हालांकि यह राशि करों की उस राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए जो कि स्रोत पर कटौती योग्य होगी।

4.9 आरहण तथा वितरण अधिकारी खुद को कर्मचारियों द्वारा किए गए वास्तविक जमाओं/सब्सक्रिप्शन/भुगतानों के बारे में ऐसे विवरणों/जानकारियों को मांग कर संतुष्ट करेगा क्योंकि ऐसा करना उपरोक्त छूट को अनुमत करने से पहले आवश्यक है। यदि डीडीओ कर्मचारी द्वारा किए गए ऐसे किसी भी वास्तविक जमाओं/सब्सक्रिप्शन/भुगतानों की सच्चार्इ के बारे में संतुष्ट नहीं हैं तो उसे इसे अनुमत नहीं करना चाहिए तथा कर्मचारी ऐसी किसी भी आय पर छूट प्राप्त करने के लिए आंकलनकर्ता अधिकारी को संतुष्ट करने के लिए उपयुक्त प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र होगा। यह भी बताया जाता है कर छूट के लिए योग्य मदों के लिए जमाओं/सब्सक्रिप्शन/भूगतानों को कर्मचारियों की कर के लिए योग्य आय पर बनाया जाना चाहिए।

4.10 केन्द्रीय सरकार के ऋण के लिए स्रोत में कटौती हुए कर का भुगतान करते समय, यह सुनिश्चित किया जाए आयकर की सही राशि को संबंधित चलानों में रिकॉर्ड किया गया है। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सही प्रकार का ही चलान का प्रयोग हो। वेतन से स्रोत में कर की कटौती करने का भुगतान करने वाले चलान का सही प्रकार नीले रंग के बैंड के साथ संख्या 9 वाला है। जहां स्रोत में कटौती किए गए कर की राशि को किताब समायोजन के माध्यम से क्रेडिट किया जाता है, यह सुनिश्चित करने के लिए ध्यान रखा जाए कि आय कर की सही राशि वहां पर वर्णित हो।

4.11 पेंशनधारकों के मामले में, जिन्हें सरकारी बैंकों से पेंशन मिल रही है, परिपत्र में सम्मिलित निर्देश उसी तरीके से लागू किए जाने चाहिए जैसे वे वेतन आय में लागू किए जाते हैं। धारा 16 के अंतर्गत मानक कटौती के कारण पेंशन की राशि से कटौती तथा धारा 88बी के अंतर्गत कर छूट (पेंशनधारकों के मामले में, भारत के निवासी हों, जिनकी आयु 65 वर्ष या अधिक हो तथा जिनकी कुल आय 1,20,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए) संबंधित पेंशनधारकों द्वारा ऐसे किसी कर का भुगतान किए से पहले पेंशन से स्रोत में कर कटौती के समय संबंधित बैंक द्वारा अनुमत की जाएगी। जीवन बीमा, प्रोविडेंट फंड, एनएससी आदि के योगदान के संबंध में यदि पेंशनधारक बैंक को संबंधित विवरण प्रदान करता है तो निर्धारित दरों पर कर छूट की अनुमति होगी। इस संबंध में आवश्यक निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारतीय स्टेट बैंक तथा अन्य राष्ट्रीय बैंकों को पेंशन परिपत्र संख्या 7/सीडीआर/ 1992 ( संदर्भ कंपनी: डीजीबीए; जीए (एनबीएस) संख्या 60/जीए, 64 (11 सीवीएल ) 91-92 दिनांक 27 अप्रेल 1992 के माध्यम से प्रदान किए जा चुके हैं तथा इस निर्देशों का पालन बैंक की सभी शाखाओं के द्वारा किया जा रहा है जिन्हें पेंशन प्रदान करने का कार्य दिया गया है।

5. वेतन मद के अंतर्गत आय का अनुमान:

5.1 वेतन मद के अंतर्गत शुल्क योग्य आय (1) निम्न आय 'वेतन' मद के अंतर्गत आय कर के अंतर्गत शुल्क योग्य होंगी:

क. किसी भी नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता से आंकलनकर्ता के लिए पिछले वर्ष के लिए बकाया वेतन, जिसका भुगतान किया गया हो या नहीं';

ख. पिछले वर्ष के लिए कोर्इ भी वेतन जिसका उसे नियोक्ता की ओर से या पूर्व नियोक्ता की ओर से भुगतान किया गया है या अनुमत किया गया है जो उस पर बकाया हो सकता है या नहीं हो सकता है

ग. पिछले वर्ष के लिए कोर्इ भी वेतन या एरियर जिसका उसे नियोक्ता की ओर से या पूर्व नियोक्ता की ओर से भुगतान किया गया है या अनुमत किया गया है यदि किसी भी पिछले वर्ष के लिए आयकर के लिए नहीं प्रभारित नहीं है।

2. संदेहों के निवारण के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि जहां पर भी अग्रिम में भुगतान किए गए वेतन को किसी भी पिछले वर्ष के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित किया गया है तो इसे उस व्यक्ति की कुल आय में दोबारा से सम्मिलित नहीं किया जाएगा जब वेतन देय होगा। कोर्इ भी वेतन, बोनस, कमीशन या प्रतिपूर्ति, किसी भी नाम से कहे जाएं, जो कि फर्म से फर्म के किसी भागीदार द्वारा प्राप्त किए जाते हैं या बकाया होते है उन्हें वेतन के रूप में नहीं माना जाएगा।

3. वेतन में मजदूरी, शुल्क, कमीशन, पूर्वआवश्यकताएं, वेतन के बदले में या उसके अतिरिक्त लाभ, एन्युटी या पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश के तरलीकरण के संबंध में भुगतान आदि सम्मिलित होते हैं। इसमें कर्मचारियों के खाते में जमा होने वाला प्रोविडेंट फंड भी उस सीमा तक सम्मिलित होता है जिस सीमा तक वह आय कर अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 6 के अंतर्गत कर के लिए प्रभारयोग्य नहीं होता। वेतन में सम्मिलित अन्य मदों में वेतन के बदले में वे लाभ तथा अनुलाभ सम्मिलित हैं जो कि आयकर अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत बताए गए है। वेतन के बदले में अवधि लाभ के क्षेत्र को संशोधित किया गया है ताकि इनमें ऐसी नीति पर बोनस के लिए आवंटित राशि सहित मुख्य बीमा नीति के अंतर्गत कोर्इ प्राप्त राशि या योगदान पर ब्याज न सम्मिलित किया जाए। इस उपधारा के उद्देश्य के लिए व्यक्त मुख्य बीमा नीति में धारा 10 के क्लॉज (10घ) में प्रदत्त अर्थ के समान ही होगा। यह ध्यान दिया जाए कि चूंकि वेतन में पेंशन, सम्मिलित होती है, स्रोत में कर को पेंशन से कटौती की जानी चाहिए साथ ही यदि आवश्यक हो। हालांकि पेंशन की गणना की गर्इ मात्रा से किसी भी प्रकार के कर की कटौती की आवश्यकता नहीं है जैसा कि परिपत्र के अनुच्छेद 5.2 के क्लॉज 3 में बताया गया है।

4. नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों को निशुल्क या छूट वाले आवास, या मोटर कार द्वारा अनुलाभ की मात्रा को आय कर नियमों1962 के नियम 3 के अंतर्गत निर्धारित किया जाएगा। यह हालांकि स्पष्ट किया जाता है कि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को कार्यालय से घर व घर से कार्यालय व कार्यालय के कार्य के लिए कहीं और आने जाने के लिए प्रदान किए गए वाहन को किसी भी प्रकार के लाभ या प्रदत्त सुविधा के रूप में नहीं माना जाएगा या उसे निशुल्क या इस उद्देश्य के लिए कम दरों पर प्रदान किया जाएगा।

5. कर्मचारी को नियोक्ता द्वारा प्रदत्त अन्य लाभ तथा सुख सुविधाओं जो कि उन्हें निशुल्क या छूट की दरों पर प्रदान की जाती हैं जैसे गैस की आपूर्ति, विद्युत, घरेलू प्रयोग के लिए जल, शैक्षणिक सुविधाएं आदि, को चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कर्मचारियों की आय की अनुमानित गणना करने के लिए संज्ञान में लेना चाहिए (अनुलग्नक 1 में उदाहरण 3 ऐसी सुख सुविधाओं की गणना को प्रदर्शित करता है)। इसका मूल्यांकन आयकर नियमों के नियम 3 के अनुपालन में किया जाना चाहिए।

6. नियोक्ता द्वारा किसी भी कर्मचारी को प्रदत्त या निशुल्क प्रदत्त सुविधा या छूट की दर पर किसी भी लाभ या सुखसुविधा के मूल्य को (कंपनी के निदेशक न होने के नाते या वह व्यक्ति जिसका कंपनी में कोर्इ हित नहीं हैं) कर्मचारी द्वारा प्राप्त अनुलाभों के रूप में नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि कर्मचारी की आय किसी भी लाभ या सुख सुविधा वेतन मद के अंतर्गत रूपए 24,000 से अधिक न हो जाए।

5.2 वे आय जो कि वेतन में सम्मिलित नहीं की गर्इ हैं (अपवाद)- कोर्इ भी आय जो कि निम्न में से किसी भी क्लॉज में सम्मिलित नहीं हैं उन्हें अधिनियम की धारा 192 के उद्देश्य के लिए वेतन से आय में सम्मिलित नहीं किया जाएगा:

1. किसी भी यात्रा छूट या सहायता जो कि किसी कर्मचारी को उसके नियोक्ता या पूर्व नियोक्ता ने कर्मचारी तथा उसके परिवार को उसकी कार्यवाहियों के संबंध में दी है।

क. भारत में किसी भी स्थान में जाने पर या

ख. सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद या सेवा समाप्ति के बाद भारत में किसी भी स्थान में जाना धारा 10 के क्लॉज 5 के अंतर्गत छूट प्राप्त है हालांकि यह आयकर अधिनियम नियमों 1962 के नियम 2बी में वर्णित स्थितियों के अनुसार है। इस क्लॉज के उद्देश्य के लिए व्यक्ति के लिए परिवार का अर्थ है:

   i. व्यक्ति का जीवनसाथी तथा बच्चे

  ii.  व्यक्ति के अभिभावक, भार्इ तथा बहनें या इनमें से कोर्इ, जो कि उस व्यक्ति पर मुख्य रूप से आश्रित है।

यह भी ध्यान दिया जाए कि इस क्लॉज के अंतर्गत छूट राशि,, उस राशि से अधिक नहीं होगी जो एसी यात्रा के उद्देश्य के लिए उत्पन्न हुआ है।

2. मृत्यु व सेवानिवृत्त ग्रेच्युटी या किसी भी अन्य ग्रेच्युटी के मामले में छूट उसी सीमा तक प्रदान की जाएगी जो कि धारा 10 के क्लॉज 10 के अंतर्गत वर्णित है।

3. केन्द्रीय सरकार के नियमों के अंतर्गत प्राप्त सिविल पेंशन या यूनियन सिविल सेवाओं के सदस्यों के लिए लागू नियमों के अंतर्गत या सिविल पदों/रक्षा संबंधी पदों, संघ के अंतर्गत या किसी राज्य के अंतर्गत या अखिल भारतीय सेवाओं/रक्षा सेवाओं के सदस्यों या केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या आंचलिक अधिनियम द्वारा स्थापित कॉरपोरेशन से प्राप्त पेंशन की रियायतों में किसी भी भुगतान के लिए धारा 10 के क्लॉज 10 क के उपक्लॉज 1 के अंतर्गत छूट प्राप्त है। किसी भी अन्य कर्मचारी के लिए किसी भी अन्य योजना के अंतर्गत प्राप्त पेंशन की रियायत में भुगतान के संबंध में छूट धारा 10 के क्लॉज 10ए के उपक्लॉज के प्रावधानों द्वारा संचालित होंगे।

4. किसी भी केन्द्र या राज्य सरकार के कर्मचारी द्वारा प्राप्त कोर्इ भी भुगतान जो कि सुपरएनुएशन पर उसकी सेवानिवृत्ति के समय उसकी अवकाश तरलीकरण के समान है, उसे धारा 10 के क्लॉज 10एए के उपक्लॉज 1 के अंतर्गत छूट है। अन्य कर्मचारियों के संबंध में इस छूट का निर्धारण सुपरएनुशन पर सेवानिवृत्ति के समय उनके अवकाश के के्रडिट के संदर्भ के साथ निर्धारित किया जाएगा। यह छूट फिर भारत सरकार की अधिसूचना संख्या एसओ 553 ( र्इ ) ( एफ संख्या 142/11/88 - टीपीएल ) दिनांक 8 जून 1988 के माध्यम से रू. 79,920 पर निर्धारित की गर्इ है।

5. धारा 10 ( 10 बी ) के अंतर्गत किसी श्रमिक द्वारा प्राप्त काट प्रतिपूर्ति को कुछ सीमाओं तक आयकर से छूट प्राप्त होती है। काट प्रतिपूर्ति छूट की अधिकतम राशि की गणना औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25 (एफ ) बी में प्रदान आधारों पर गिनी गर्इ राशि होती है या कोर्इ 50,000 से कम कोर्इ भी राशि जैसा कि भारत सरकार के आधिकारिक गजट में में वर्णित है, जो भी कम हो। ये सीमाएं उन मामलों में लागू नहीं होगी जहां पर प्रतिपूर्ति का भुगतान उस योजना में किया जाना है जो कि केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है और जिसे उस उपक्रम में श्रमिक के विशेष संरक्षण की आवश्यकता के संबंध में योजना लागू होती है तथा अन्य प्रासंगिक स्थितियों में।

6. धारा 10 (10सी ) के अंतर्गत जैसा कि वित्त अधिनियम 1994 के द्वारा संशोधित है कोर्इ भी भुगतान जो कि निम्न निकायों के कर्मचारियों द्वारा प्राप्त हुआ है उसे 5 लाख रूपए तक आय कर से छूट प्राप्त है बशते स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना को आयकर नियम 1962 के नियम 2बीए के अंतर्गत दिशानिर्देशों के अनुसार बनाया गया है।

 क. एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी

 ख. कोर्इ और कंपनी

 ग. किसी केन्द्र, राज्य या आंचलिक अधिनियम के अंतर्गत स्थापित प्राधिकरण

 घ. कोर्इ स्थानीय प्राधिकरण

 च. कोर्इ कोऑपरेटिव सोसाइटी

 छ. कोर्इ विश्वविद्यालय जो किसी केन्द्र, राज्य या आंचलिक अधिनियम के अंतर्गत या द्वारा स्थापित या निगमित संस्थान या कोर्इ संस्थान जिसे विश्वविद्यालय अनुदान संस्थान 1956 की धारा 3 के अंतर्गत एक विश्वविद्यालय घोषित संस्थान

 ज. कोर्इ भी तकनीकी संस्थान जो कि तकनीकी संस्थान अधिनियम 1961 की धारा 3के क्लॉज ( जी ) के अंतर्गत स्थापित

 झ. प्रबंधन का कोर्इ भी संस्थान जिसे केन्द्र सरकार ने आधिकारिक गजट के माध्यम से इस हेतु अधिसूचित किया हो;

यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि जहां यह छूट किसी भी कर्मचारी को किसी भी आंकलन वर्ष के लिए अनुमत की गर्इ है वह किसी अन्य आंकलनकर्ता वर्ष के लिए प्रदान नहीे की जाएगी। यह भी आगे नोट किया जाए कि उपरोक्त बी के संबंध में कंपनी के संबंध में केार्इ भी योजना तथा एक उपरोक्त ( च ) में वर्णित कोऑपरेटिव सोसाइटी को मुख्य आयुक्त द्वारा अनुमोदित होना चाहिए या कोर्इ भी मामला हो, आयकर का महा निदेशक।

7. कोर्इ भी राशि जो कि जीवन बीमा के अंतर्गत प्राप्त की गर्इ है जिसमें बोनस या ऐसी किसी नीति पर आवंटित राशि जो कि धारा 80डीडीए की उपधारा (3 ) के अंतर्गत हासिल की गर्इ है

8. किसी भी प्रोविडेंट फंड से कोर्इ भी भुगतान जिसके लिए प्रोविडेंट फंड 1925 लागू होता है (या कोर्इ भी अन्य प्रोविडेंट फंड जो कि केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित हो व आधिकारिक गजट द्वारा अधिसूचित हो )

9. आयकर अधिनियम 1962 की धारा 10 ( 13ए ) के अंतर्गत कोर्इ भी खास अनुमति जो कि आंकलनकर्ता द्वारा उसके कर्मचारी को किराए के भुगतान की पूर्ति करने के लिएप्रदानकी गर्इ है, उसमें आयकर में उतनी ही छूट प्रदान की गर्इ है जितना कि वर्णित है। आयकर नियमों 1952 के नियम 2 क के अनुसार किराए के भुगतान की पूर्ति करने के लिए विशेष अनुमति प्रदान करने के लिए छूट की मात्रा होगी:

 क. प्रासंगिक अवधि के संबंध में किसी कर्मचारी द्वारा प्राप्त ऐसी कोर्इ अनुमति या

 ख. प्रासंगिक अवधि के दौरान वेतन के दसवें भाग से अधिक यदि किराए का भुगतान किया गया हो या

 ग. यदि ऐसा आवास मुंबर्इ, कोलकता, दिल्ली या चेन्नर्इ में स्थित है तो प्रासंगिक अवधि में कर्मचारी के बकाया वेतन का 50 प्रतिशत

 घ. यदि ऐसा आवास कहीं और स्थित है तो प्रासंगिक अवधि में कर्मचारी के बकाया वेतन का 40 प्रतिशत

इस उद्देश्य के लिए वेतन में किराया भत्ता सम्मिलित होता है अर्थात यदि नौकरी की शर्तें इसे प्रदान करती हैं किंतु इसमें अन्य भत्ते व अनुलाभ सम्मिलित नहीं होते हैं।

यहां यह भी ध्यान दिया जाए कि आवास के किराए में जो भी व्यय हुआ है वह नियम 2क में लिखी गर्इ सीमाओं के अनुसार ही हुआ है जो आयकर में छूट को दिखाती है। इस प्रकार किसी भी कर्मचारी को जिसे किराया भत्ता मिल रहा है उसे आयकर से छूट प्रदान नहीं की जाती है। वितरण अधिकारी को इस संबंध में किराए का भुगतान करने से पहले खुद ही संतुष्ट होना होगा।

हालांकि किराए पर भुगतान पर वास्तविक व्यय धारा 10 (13 ए ) के अंतर्गत छूट पाने के लिए एक पूर्व आवश्यकता है, प्रशासनिक उपायों से यह निर्धारित किया गया है कि उन वेतनभोगी व्यक्तियों को किराए की रसीद दिखाने में छूट मिलेगी जिन्हें प्रति माह 600 रूपए का घर किराया भत्ता मिल रहा है। यह हालांकि नोट किया जाए कि यह छूट केवल स्रोत पर ही कर की कटौती करने के लिए है तथा कर्ममचारी के नियमित आंकलन के लिए आंकलनकर्ता अधिकारी के पास यह अधिकार होगा कि वह खुद को संतुष्ट करने के लिए यह पूछताछ कर सके कि कर्मचारी का किराए पर कितना व्यय हुआ है।

10. धारा 10 का क्लॉज ( 14 ) निम्न भत्तों में छूट का अधिकार देता है:

क. किसी भी कर्मचारी को नियम 2बीबी में वर्णित उसके कार्यों को करने में होने वाले व्यय की पूर्ति करने के लिए प्रदत्त लाभ या विशेष भत्ता, उस सीमा तक जिस सीमा तक ऐसे व्यय उस उद्देश्य के लिए हुए है।

ख. कोर्इ भी अन्य भत्ता जो कि कर्मचारी को उसके स्थानांतरण पर व्यक्तिगत व्यय की पूर्ति करने के लिए प्रदान किया गया है या उस स्थान पर जहां पर वह रहता है या उसके जीवनयापन की लागत में वृद्धि करने के लिए जो कि वर्णित हो सकती है।

हालांकि ख में वर्णित व्यय को व्यक्तिगत व्यय नहीं माना चाहिए, कर्मचारी को प्रतिपूर्ति प्रदान करनी चाहिए या उसे उसके कार्यालय या नौकरी के संबंध में विशेष प्रवृत्ति में उत्तरदायित्व करने चाहिए जब तक कि ऐसा भत्ता उसके स्थानांतरण या आवास से संबंधित है।

सीबीडीटी ने धारा 10 ( 14 ) के क्लॉज क तथा ख के उद्देश्यों के लिए कुछ दिशानिर्देश अधिसूचना संख्या एसओ 617 ( र्इ ) दिनांक 7 जुलार्इ 1995 (एफ संख्या 142/9/95 टीपीएल) के लिए बनाए हैं। ये दिशानिर्देश 1 जुलार्इ 1995 से प्रभावी हैं। इन्हें अनुलग्नक 3 में वर्णित किया गया है।

11. आयकर अधिनियमकी धारा 10 ( 15 ) ( 4 ) ( । ) के अंतर्गत सेवानिवृत्ति पर किसी भी केन्द्रीय कर्मचारी या राज्य कर्मचारी या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के कर्मचारी द्वारा जमा पर सरकार द्वारा देय ब्याज पर आयकर में छूट केन्द्र सरकार द्वारा बनार्इ गर्इ ऐसी किसी भी योजना के अनुसार ही होगा जिसकी अधिसूचना आधिकारिक गजट के माध्यम से की गर्इ होगी। अधिसूचना संख्या एफ 2/14/89-एनएस2 दिनांक 7 जून द्वारा, जिसे अधिसूचना संख्या एफ 2/14/89-एनएस2 दिनांक 12 अक्टूबर 1989 द्वारा संशोधित किया गया है, केन्द्र सरकार ने उपरोक्त क्लॉज के लिए सेवानिवृत्ति सरकारी कर्मचारियों के लिए जमा योजना के नाम से एक योजना को आरंभ किया है।

12. अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत करों में छूट निम्न में उपलब्ध होगी:

क. किसी भी कर्मचारी या उसके परिवारीजनों को किसी भी अस्पताल में चिकित्सा सुविधा

ख. किसी भी कर्मचारी या उसके परिवारीजन के इलाज में वास्तविक रूप से चिकित्सा सुविधा पर उत्पन्न व्यय

  i. सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण या सरकार द्वारा अनुमोदित कोर्इ भी अन्य अस्पताल जो कि उसके कर्मचारी के इलाज के लिए अनुमोदित है

 ii. वर्णित बीमारियों के संबंध में कोर्इ भी अस्पताल जो कि मुख्य आयुक्त द्वारा अनुमोदित है जिसमें वर्णित दिशानिर्देश है:

बशर्ते कि यदि कोर्इ मामला उपक्लॉज 2 में आ रहा है कर्मचारी को अस्पताल से बीमारी का प्रमाणपत्र प्रदान करना होगा जिसके लिए उसने इलाज कराया था तथा उसने जिस राशि का भुगतान अस्पताल को किया था।

ग. नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों के इलाज के लिए प्रीमियम का भुगतान करना ( केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किसी भी योजना के अंतर्गत) या उन कर्मचारियों के लिए बीमा प्रीमियम की प्रतिपूर्ति जो अपने परिवार के लिए जीवन बीमा लिए हैं (केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित किसी भी योजना के अंतर्गत )

घ. किसी भी नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उसके इलाज के लिए व्यय की प्रतिपूर्ति जो कि एक वर्ष में 10,000 से अधिक न हो।

च. विदेश में किसी भी चिकित्सीय उपचार के संबंध में कर्मचारी या उसके परिवारी जन के बाहर रूकने और उपचार में जितना भी वास्तविक व्यय हुआ है उसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमत सीमाओं के लिए अनुलाभों से अलग माना जाएगा। रोगी/सहायक के बाहर यात्रा करने में उत्पन्न व्यय को अनुलाभों से अलग माना जाएगा यदि कर्मचारी की कुल आय उक्त व्यय की गणना के साथ 2 लाख से अधिक नहीं है।

5.3 अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत कटौती:

आयकर अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत कटौती निम्न है:

।. यदि निर्धारिती जिसकी वेतन से आय, इस क्लॉज के अंतर्गत कटौती की अनुमति के बाद 60,000 से अधिक नहीं है तो, या तो वेतन का तैंतीस प्रतिशत या रूपए 18,000, जो भी कम हों।

क. अन्य मामले में तैंतींस या एक तिहार्इ प्रतिशत या पन्द्रह हजार रूपए जो भी कम हो।

बशर्ते यदि निर्धारिती के मामले में यदि एक महिला है जिसकी कुल आय इस क्लॉज के अंतर्गत किसी भी प्रकार की कटौती करने से पहले सैंतीस हजार रूपए से अधिक नहीं होती है तो इस क्लॉज के प्रावधानों पर प्रभाव होगा क्योंकि पन्द्रह हजार तथा अट्ठारह हजार वैकल्पिक माने गए है।

व्याख्या: संदेहों को मिटाने के लिए यह आवश्यक है कि जहां पर भी निर्धारिती का वेतन एक से अधिक नियोक्ताओं द्वारा बकाया है या चुकाया जाना है या अनुमत है, तो इस क्लॉज में कटौती की गणना कुल बकाया वेतन, भुगतान हुए वेतन या अनुमत वेतन के संदर्भ में नहीं होगी तथा किसी भी मामले में यह उपरोक्त क्लॉज से अधिक नहीं होना चाहिए।

।।. धारा 16 के क्लॉज के अंतर्गत कुछ सीमाओं तक नियोक्ता द्वारा निर्धारिती को मनोरंजन भत्ता भी दिया जाता है। सरकारी कर्मचारी के मामले में वेतन का एक तिहार्इ या पांच हजार रूपए जो भी कम हो, कटौती के रूप में अनुमत है। किसी भी गैरसरकारी कर्मचारी के मामले में मनोरंजन भत्ते के लिए कटौती धारा 16 के क्लॉज 2 में उपक्लॉज ख में वर्णित सीमाओं के अनुसार होगी यदि भत्ता उसके वर्तमान नियोक्ता के माध्यम से 1 अप्रेल 1955 से लगातार मिला है।

(।।।) भारतीय संविधान की धारा 276 के क्लॉज 2 के अंतर्गत नौकरी पर कर केवल वेतन के अंतर्गत आय मद की गणना करने के लिए ही अनुमत होगा।

5.4. इस अधिनियम के अध्याय 6ए के अनुसार कटौती:

(1) 80 गगग के अंतर्गत एक नर्इ श्रेणी को वित अधिनियम (सं. 2) 1996 में लाया गया है, जिसे निम्न रूप से पढ़ा जाए:

जहां एक निर्धारिती ने कर के लिए प्रभावी आय से कोर्इ राशि जमा की है या जीवन बीमा लिया है या पेंशन पाने के लिए किसी तरह के म्युच्युअल फंड में निवेश किया है तो उसे उसकी कुल आय की गणना में जो उसने कुल राशि का भुगतान किया है या जमा की है, जो कि पिछले वर्ष रूपए 10,000 से अधिक नहीं हैं तो धाराओं के प्रावधानों के अनुसार छूट मिलेगी।

जहां पर निर्धारिती द्वारा कोर्इ राशि जमा की गर्इ है या भुगतान की गर्इ है, उसे धारा के उद्देश्यों के लिए संज्ञान में लिया जाएगा, ऐसी किसी भी राशि के लिए छूट धारा 88 के अंतर्गत अनुमत नहीं है।

2. धारा 80 डी के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को 10,000 रूपए तक की कटौती उसकी कर प्रभारित आय में से अनुमत होती है जिसमे वह उपरोक्त वर्णित व्यक्तियों के लिए जीवन बीमा में निवेश करता है, जो योजनाएं केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित बीमा योजनाएं होती हैं व उन्हें मेडीक्लेम के नाम से जाना जाता है।

व्यक्तियों की श्रेणियां निम्न होती हैं:

क. जहां पर निर्धारिती एक व्यक्ति होता है, कोर्इ भी राशि जो कि निर्धारिती के स्वास्थ्य, उसके जीवनसाथीके स्वास्थ्य, आश्रित अभिभावकों या बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हो

ख. जहां पर निर्धारिती एक हिंदू अविभाजित परिवार है तो कोर्इ भी राशि जो उसके परिवार के किसी भी सदस्य के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए है।

ग. जहां पर निर्धारिती व्यक्तियों की एक संस्था है या इकार्इ है तो उसके केवल सम्पत्ति के समुदाय द्वारा पति या पत्नी द्वारा जो कि गोवा राज्य, दमन व दीव व गागरा नगरहवेली में संचालित होते हैं, इसमें कोर्इ भी राशि का भुगतान ऐसी किसी भी इकार्इ या संस्था या आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य पर बीमा पर किया जाता है।

2. धारा 80डीडी के अंतर्गत उस व्यक्ति को 15,000 रूपए की कटौती की जाती है जो कि अपने ऐसे किसी आश्रित की चिकित्सा, नर्सिंग व प्रशिक्षण पर व्यय करता है जो स्थार्इ रूप से विकलांग है जिसमें अंधापन भी सम्मिलित है या आयकर अधिनियम 1962 के नियम 11ए में वर्णित मानसिक बीमारी। यह कटौती उनकी कुल आय की सीमाओं से परे होगी। ऐसे किसी व्यक्ति की स्थार्इ विकलांगता या मानसिक विकलांगता की जांच किसी सर्जन, फिजिशियन आदि से करार्इ जानी चाहिए जो कि किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत हो। तथा ऐसी किसी भी कटौती के लिए उपयुक्त दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने चाहिए ताकि उसकी वास्तविकता की जांच की सके।

3. धारा 80डीडीए के अंतर्गत कर के लिए प्रभारित आय में 20,000 रूपए तक की कटौती के लिए व्यक्ति एलआर्इसी तथा यूटीआर्इ की कुल योजनाओं में निवेश करने पर पात्र होता है। यह योजना किसी व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में एक विकलांग आश्रित के लाभ के लिए एक एन्युटी या एकमुश्त राशि प्रदान करती है।

4. धारा 80डीडीबी चिकित्सीय उपचार आदि के संबंध में कटौती- जहां प एक आंकलनकर्ता हो कि भारत का निवासी है, उसके पिछले वर्ष आयोग द्वारा अनुमत कुछ बीमारियों में इलाज में व्यय हुआ है:

क. यदि निर्धारित एकमात्र व्यक्ति है तो उसके द्वारा या आश्रित संबंधी द्वारा

ख. यदि निर्धारिती एक हिंदु अविभाजित परिवार है तो परिवार का कोर्इ भी सदस्य।

निर्धारिती को उसके पिछले वर्ष व्यय के संबंध में 15,000 की कटौती की अनुमति होगी।

बशर्ते किस ऐसी कोर्इ भी कटौती तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि इस संबंध में निर्धारिती कोर्इ प्रमाणपत्र प्रदान नहीं करता।

व्याख्या: इस धारा के उद्देश्यों के लिए आश्रित से मतलब उस व्यक्ति से है जो निर्धारिती के अतिरिक्त किसी और व्यक्ति पर आश्रित नहीं है।

5. इस अधिनियम की धारा 80र्इ के अंतर्गत निम्न स्थितियों में उच्च शिक्षा के लिए करों में कटौती प्रदान की जा सकती है:

क. अपनी उच्च शिक्षा के लिए या ऐसे किसी ऋण के ब्याज की पूर्ति के लिए निर्धारिती की कुल आय में से धारा के प्रावधानों के अनुसार ऋण के ब्याज के लिए छूट प्रदान की जाएगी।

बशर्ते कि यह राशि रूपए 25,000 से अधिक न हो।

ख. यह कटौती प्रथम आंकलन वर्ष में आय की गणना में अनुमत होगी तथा आरंभिक आंकलन वर्ष के बाद के तुरंत सात वर्ष या जब तक कि निर्धारिती द्वारा ऋण चुकाया नहीं जा रहा है, जो भी जल्दी हो। इस उद्देश्य के लिए:

क. अनुमोदित कल्याणकारी संस्थान से अर्थ है एक ऐसा संस्थान जो कि कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए स्थापित किए गए हैं तथा उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा धारा 10 के क्लॉज 23सी के अंतर्गत या धारा 80 जी के अंतर्गत क्लॉज क में अधिसूचित किया है।

ख. वित्तीय संस्थान से अर्थ एक बैंकिंग कंपनी जिसमें बैंकिंग निगमन अधिनियम 1949 लागू होता है; या कोर्इ वित्तीय संस्थान जो कि केन्द्र सरकार अपने आधिकारिक गजट द्वारा अधिसूचित कर चुकी है।

ग. उच्च शिक्षा से अर्थ है कि कोर्इ भी स्नातक या परास्नातक पाठ्यक्रम इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबबंधन या सम्बद्ध अध्ययन में परास्नातक पाठ्यक्रम जैसे गणित व सांख्यकीय;

घ.आरंभिक आंकलन वर्ष से अर्थ है पिछले वर्ष से प्रासंगिक जिसमें निर्धारिती ने ऋण या ब्याज का भुगतान करना आरंभ किया था।

6. डीडीओ द्वारा किसी भी प्रकार की कटौती की अनुमति किसी भी कल्याणकारी उद्देश्य के लिए नहीं की जाएगी। ऐसे दानों पर कर की कटौती की अनुमति केवल धारा 80जी के अंतर्गत ही अनुमत है। हालांिक जहां पर योगदान राष्ट्रीय डिफेंस लीग, जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड, राजीव गांधी तथा इंंिदरा गांधी मेमोरियल फंड में किया गया है तो कर्मचारी की कुल आय की गणना करते समय ऐसे योगदानों की भी गणना की जा सकती है। इसी प्रकार यदि प्रधानमंत्री राहत कोष, प्रधानमंत्री भूकंप फंड, अफ्रीका फंड, साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए फंड तथा मुख्यमंत्री राहत कोष, राज्य रक्त दान परिषद, आर्मी कल्याण कोष आदि को दिया गया दान छूट के लिए शतप्रतिशत योग्य होता है। यह भी ध्यान दिया जाए कि बिना किसी सीमा के सभी पात्र दान धारा 80जी के प्रावधानों के अंतर्गत छूट योग्य होंगे।

7. धारा 80जीजी के अनुसार निर्धारिती को आयकर नियमों के नियम 11बी के अंतर्गत वर्णित स्थानों के लिए किराए का भुगतान करने के संबंध में कटौती का हक है। ऐसी कटौतियां निम्न स्थितियों में अनुमत होंगी:

क. निर्धारिती को किसी भी प्रकार का मकान किराए का भत्ता नहीं मिला है जो कि उसे इस अधिनियम की धारा 10 ( 13 ए ) के लिए पात्र बनाता है।

ख. उसे 25 प्रतिशत सीमा तक कुल आय के 10 प्रतिशत घर के किराए के रूप में मिलेगा, या फिर रूपए 2000 जो भी कम हो। धारा 80जीजी के अंतर्गत किसी भी प्रकार की गणना के लिए इन प्रतिशतों पर काम करना होगा।

ग. निर्धारिती के पास निम्न नहीं है:

अ. उसके या उसके जीवनसाथी द्वारा कोर्इ भी आवासीय आवास जहां पर ऐसा निर्धारिती हिंदु अविभाजित परिवार का एक सदस्य है, एक ऐसे परिवार द्वारा ऐसे स्थान पर जहां पर वह आम तौर पर रहता है या अपना व्यापार चलाता है

आ. कोर्इ भी ऐसा स्थान जो कि निर्धारिती द्वारा प्रयोग किया जा रहा हो जो कि क्लॉज ए के उपक्लॉज ( । ) के अंतर्गत निर्धारित हो, या कुछ भी मामला हो

घ. उसका निवास स्थान निम्न शहरों में होना चाहिए:

अ. आगरा, अहमदाबाद, अमृतसर, बंगलुरू, भोपाल, कोलकाता, कोयंब्टूर, दिल्ली, फरीदाबाद, ग्वालियर, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कानपुर, लुधियाना शहर, मदुरर्इ, नागपुर, पटना, पुणे, श्रीनगर, सूरत, बड़ौदा या बनारस या ऐसे स्थानों में शहरी स्थान या

आ. मुंबर्इ, कालीकट, कोचिन, गाजियाबाद, हुबल धारावर, मद्रास, सोलापुर, त्रिवेंद्रम या विशाखापत्तनम

व्याख्या: शहरी स्थानों से तात्पर्य उन स्थानों से हैं जो कि केन्द्रीय सरकार द्वारा समय समय पर अपने कर्मियों को किराए पर स्थान देने के लिए स्थान को अनुमोदित होते रहते हैं।

वितरण अधिकारियों को इस बात से खुद को संतुष्ट कर लेना चाहिए कि ऐसी कोर्इ भी कटौती करने से पहले सभी स्थितियों की पूर्ति हो रही है।

8. धारा 80यू के अंतर्गत उस व्यक्ति को 45,000 रूपए की कटौती की जाती है जिसमें किसी कर्मचारी को पिछले वर्ष में चिकित्सा, नर्सिंग व प्रशिक्षण पर व्यय करना पड़ा है जो स्थार्इ रूप से विकलांग है जिसमें अंधापन भी सम्मिलित है या आयकर अधिनियम 1962 के नियम 11डी में वर्णित मानसिक बीमारी। यह कटौती उनकी कुल आय की सीमाओं से परे होगी। ऐसे किसी व्यक्ति की स्थार्इ विकलांगता या मानसिक विकलांगता की जांच किसी सर्जन, फिजिशियन आदि से करार्इ जानी चाहिए जो कि किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत हो। तथा ऐसी किसी भी कटौती के लिए उपयुक्त दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने चाहिए ताकि उसकी वास्तविकता की जांच की सके जैसा कि धारा 80डीडी धारा मे व्याख्या में दिया गया है।

6. कर छूट:

एक निर्धारिती को अधिनियम के अध्याय 8 के अंतर्गत कर में छूट का अधिकार है:

1. जीवन बीमा के प्रीमियम का भुगतान जो कि एक व्यक्ति या उसके पति/पत्नी के जीवन तक चालू रहता है (यह ध्यान दिया जाए कि पॉलिसी में कोर्इ भी भुगतान व प्रीमियम सम एश्योर्ड से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। )

2. कोर्इ भी भुगतान जो कि प्रभाव में हैं या एक टाली एन्युटी के लिए अनुबंध में हैं जो कि किसी व्यक्ति, उसकी पत्नी या पति या व्यक्ति के किसी भी बच्चे के जीवन के लिए वर्णित मद 8 के संदर्भ में एक एन्युटी योजना नहीं है बशर्ते ऐसे किसी भी अनुबंध में एन्युटी के भुगतान के बदले में नकद का भुगतान नहीं किया गया है।

3. किसी भी भुगतानयोग्य वेतन से कोर्इ भी कटौती या सरकार द्वारा किसी व्यक्ति के लिए उसकी एन्युटी को सुरक्षित रखने के लिए एक राशि की कटौती की जाती है। तथा ऐसी राशि वेतन के पांचवे हिस्से से अधिक नहीं होनी चाहिए।

4. कोर्इ भी बनाया गया योगदान:

क. किसी भी प्रोविडेंट फंड में जिसमें प्रोविडेंट फंड 1925 लागू होता है

ख. केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित कोर्इ भी प्रोविडेंट फंड तथा आधिकारिक गजट द्वारा अधिसूचित जहां पर किसी व्यक्ति या अवयस्क के नाम पर कोर्इ योगदान किया है

ग. किसी प्रतिष्ठित प्रोविडेंट फंड के कर्मचारी द्वारा

घ. किसी अनुमोदित सुपर एन्युएशन फंड के कर्मचारी द्वारा

यहां पर यह ध्यान दिया जाए कि किसी भी फंड में योगदान का अर्थ ऋण का भुगतान नहीं होता है।

5. डाकखाना बचत बैंक नियम 1959 के अंतर्गत दस या पन्द्रह सालों के लिए कोर्इ भी जमा जैसा कि समय समय पर संशोधित हो रहा है जहां पर ऐसी जमा किसी व्यक्ति या किसी अवयस्क के नाम पर की गर्इ है जिसका वह अभिभावक है।

6. कोर्इ भी सब्सिक्रिप्शन:

क. केन्द्र सरकार द्वारा ऐसी किसी भी प्रतिभूति के लिए या किसी बचत योजना के लिए जैसा कि केन्द्र सरकार आधिकारिक गजट में बता सकती है।

ख. किसी भी ऐसे प्रमाणपत्र के लिए जो कि सरकार अपनी ओर से सरकारी बचत प्रमाणपत्र की धारा 2 के अंतर्गत बताती है। जो कि आधिकारिक गजट में अधिसूचना द्वारा बताए गए है। एनएससी ( 6ठें संस्करण ) तथा एनएससी (8वें संस्करण ), जो भी निवेश के लिए सही हो।

7. योगदान के रूप में भुगतान की गर्इ कोर्इ राशि:

क. यूनिट लिंक्ड बीमा योजना 1971 में प्रतिभागिता

ख. केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित एलआर्इसी म्युच्युअल फंड की किसी भी यूनिट लिंक्ड योजना में प्रतिभागिता

8. कोर्इ भी सब्सिक्रिप्शन जो कि जीवन बीमा निगम की किसी भी एन्युटी योजना को बनाए रखने के लिए किया जाएगा जो कि आधिकारिक गजट द्वारा बताया जा चुका है।

9. कोर्इ भी सब्सिक्रिप्शन जो कि 10,000 से अधिक नहीं होना चाहिए और धारा 10 के क्लॉज के अंतर्गत किसी भी म्युच्युअल फंड की इकार्इ को किए गए है। कोर्इ भी योजना जो कि केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित हो सकती है।

10. कोर्इ भी योगदान जो कि किसी व्यक्ति द्वारा किसी भी म्युच्युअल फंड में स्थापित पेंशन फंड में धारा 10 के क्लॉज 23घ के अंतर्गत किया गया है, जो कि केन्द्र सरकार ने अपनी ओर से आधिकारिक गजट में अधिसूचना से वर्णित किया है

11. कोर्इ भी सब्सिक्रिप्शन जमा योजना या ऐसे किसी भी पेंशन फंड में कोर्इ भी योगदान जो कि केन्द्र सरकार अपनी ओर से आधिकारिक गजट के अनुसार कर सकती है।

12. किसी भी जमा योजना के अंतर्गत बनाया गया कोर्इ भी सब्सिक्रिप्शन (एक ऐसी योजना न होना जो कि धारा 80एल के अंतर्गत कटौती के लिए पात्र होता है) जैसा कि केन्द्रीय सरकार आधिकारिक गजट में अधिसूचित कर सकती है और भारत में उन कंपनियों के लिए उद्देश्य प्रदान कर सकता है जो कि घर बनाने के लिए या आवासीय योजनाओं के लिए लंबी अवधि के लिए ऋण प्रदान करती हैं या ख. भारत में निर्मित कोर्इ भी प्राधिकरण या किसी भी कानून के अंतर्गत जो कि आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बना हो या शहरी, ग्रामीण या गांवों के नियोजन, विकास या सुधार के लिए आवश्यकताओं के लिए नियम बनाना।

13. निर्धारिती द्वारा किसी भी आवासीय सम्पत्ति के निर्माण या खरीद के उद्देश्य के लिए भुगतान की गर्इ कोर्इ भी राशि, वह आय जो कि 'आवास सम्पत्ति से आय' मद के अंतर्गत आय जो कर प्रभारित है ( या जो कि निर्धारिती की खुद की सम्पत्ति के रूप में प्रयोग नहीं की जा रही है, इस मद के अंतर्गत कर प्रभारित है) जहां पर ऐसे भुगतान किसी भी किश्त या आंशिक भुगतान के माध्यम से किए जाते हैं किसी भी स्वपोषित योजना के अंतर्गत या किसी भी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत। यह कटौती निर्धारिती द्वारा किसी बैंक से ऋण लिए जाने पर या जीवनबीमा निगम से किसी ऋण को लिए जाने पर या भारत में आवास के लिए लंबी अवधि के लिए ऋण प्रदान करने वाले संस्थानों पर लागू होगी। कर्मचारी द्वारा लिया गया कोर्इ और भी ऋण सम्मिलित किया जाएगा यदि उसने किसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी या कानून द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय से लिया है। स्टैंप कर, पंजीकरण शुल्क तथा अन्य व्यय जो कि स्थानांतरण के लिए हुए हैं वे सम्मिलित किए जाएंगे। किसी भी आवासीय सम्पत्ति के लिए लागतों के लिए भुगतान को हालांकि सम्मिलित नहीं किया जाएगा जिनमें प्रवेश शुल्क, या शेयाों की लागत या आरंभिक जमा की लागत, या किसी भी अतिरिक्त मरम्मत की लागत सम्मिलित है जो कि सक्षम अधिकारी के पूर्णता प्रमाणपत्र प्रदान करने के बाद की गर्इ है। किसी भी व्यय में कटौती केवल आयकर अधिनियम की धारा 24 के अनुसार ही देय होगी। जिसमें किसी भी आवासीय लागतों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। जहां आवास संपत्ति जिसमें इन प्रावधानों के संबंध में कटौती की गर्इ है, करदाता को वित्त वर्ष आरंभ होने के पाचं वर्ष के अंदर हस्तांतरित किया गया है जिसमें ऐसी सम्पत्ति का अधिकार उसने हासिल किया है या उसने रिफंड के जरिए वापस पाया है या कोर्इ भी राशि जो कि धारा 88 ( 2 ) में वर्णित है, कोर्इ भी कटौती इन प्रावधानों में अनुमत नहीं होगी, ऐसे भुगतान की गर्इ राशियों के संबंध में जहां पर हस्तांतरण हुआ है तथा आयकर की मात्रा मे ंकटौती की गर्इ है, निर्धारिती की कुल आय पर करों को जोड़ा गया है। यह ध्यान दिया जाए कि इस मद में कर छूट के लिए राशि रूपए 10,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। नर्इ आवासीय सम्पत्ति के निर्माण के संबंध में ऋण के भुगतान के संबंध में जो कि वित्तीय वर्ष 1996-97 तक पूर्ण नहीं हुए हैं, कर्मचारियों को कर में कोर्इ भी छूट नहीं मिलेगी।

14. इक्विटी शेयर या ऋणपत्रों के लिए सब्सक्रिप्शन जो कि आयोग द्वारा अनुमोदित पूंजी इश्यु का हिस्सा बनाते हैं

बशर्ते कि यहां पर एक कटौती का दावा हो तथा इस क्लॉज के अंतर्गत किसी इक्विटी शेयर या ऋणपत्रों का हिस्सा हो, ऐसे शेयरों या ऋणपत्रों को धारा 54र्इए तथा 54र्इबी के उद्देश्य के लिए संज्ञान में नहीं लिया जाएगा।

व्याख्या: (1) पूंजी का पात्र इश्यु से अर्थ है कि एक सार्वजनिक कंपनी जो कि भारत में गठित व पंजीकृत है तथा इश्यु पूरी तरह से ऊर्जा के सृजन, वितरण सृजन के लिए संरचनागत सुविधा का संचालन तथा विकास का उद्देश्य है।

2. संरचनागत सुविधा से अर्थ है धारा 80 ए की उपधारा 12 के क्लॉज ( क ) में प्रदत्त अर्थ

3 सार्वजनिक कंपनी का अर्थ है कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 3 में प्रदत्त अर्थ

15. किसी भी म्युच्युअल फंड में किसी भी यूनिट का सब्सक्रिप्शन धारा 10 के क्लॉज 23 डी में दिया गया है तथा एक निर्धारित प्रपत्र में ऐसे किसी म्युच्युअल फंड द्वारा आवेदन किए एग है।

बशर्ते कि यहां पर इन इकाइयों की लागत के संबंध के साथ क्लॉज के अंतर्गत एक कटौती अनुमत हो, इन इकाइयों की लागत धारा 54र्इए तथा 54र्इबी के उद्देश्यों के लिए संज्ञान में नहीं ली जाएगी।

बशर्ते कि यह एक क्लॉज है जो कि ऐसी इकाइयों के सब्सक्रिप्शन पर तब लागू होता है जब किसी कंपनी में पात्र सब्सक्रिप्शन आते हैं।

व्याख्या: इस खंड के उद्देश्य के लिए- पूंजी का योग्य इश्यु' से मतलब है एक इश्यु जिसे व्याख्या के खंड 1 से धारा 88 के उपखंड (2) में खंड (16) में बताया गया है

16. विविध मदों में वर्णित सीमाओं के विषय पर कर छूट की गणना कुल बचत आदि के 20 प्रतिशत की दर से होगी, यदि व्यक्ति है तो यह दर 25 प्रतिशत होगी। यदि कोर्इ लेखक या नाटककार या कलाकार या खिलाड़ी है, जिसकी आय उसके पेशे से आती है तो ऐसे लेखक/नाटककार/कलाकार/खिलाड़ीके लिए उसकी आय का 25 प्रतिशत या अधिक बनाया जाएगा।

करों में छूट की अधिकतम सीमा 12,000 है तथा लेखक या नाटककार या कलाकार या खिलाड़ी के मामले में यह 17,500 होती है। बचत की कुल सीमा होती है जो कि कर छूट की पात्र होती है। व्यक्तियों के मामले में यह सीमा 60,000 होती है तो लेखक या नाटककार या कलाकार या खिलाड़ी आदि के मामले में यह 70,.000 होती है। प्रति अनुच्छेद 14 तथा 15 के अनुसार 10,000 रूपए का निवेश करने पर अतिरिक्त 2,000 रूपए की छूट मिलती है। इसलिए इस धारा में अधिकतम छूट होगी 12,000 रूपए तथा 2000 रूपए।

17.धारा 88 बी वरिष्ठ नागरिकों के लिए खास छूट प्रदान करती है ( वे व्यक्ति जो कि 65 या अधिक आयु वर्ग के है।) यह छूट 40 प्रतिशत होती है तथा कुल आय इसाके लिए 1,20,000 होनी चाहिए। तो 65 वर्ष की आयु से अधिक लोगों के लिए आयकर के लिए योग्य आय में 40 प्रतिशत की छूट मिलती है, बशर्ते कि उनकी आय 1,20,000 से अधिक न हो।

7. कटने वाले आयकर की गणना:

7.1 धारा 192 के उद्देश्य के लिए वेतन आय का अनुमान निम्नानुसार होगा:

क. पहले अनुच्छेद 5..2 में वर्णित आयको हटाकर 5.1 में वर्णित कुल वेतन की गणना करें।

ख. क में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 5.3 में वर्णित कटौतियों को अनुमत करें।

ग. ख में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 5.4 में वर्णित कटौतियों को अनुमत करें सुनिश्चित करें कि अनुच्छेद 5.4 में वर्णित सभी कटौतियां आंकड़े ख से अधिक न हों और यदि ऐसा होता है तो इसे इसी राशि पर रोका जाना चाहिए। यह वेतन के अंतर्गत की राशि होगी जिसमें आयकर की कटौती करनी होगी। इस आय को निकटतम शून्य तक राउंडऑफ कर दें।

7.2 अनुच्छेद 7.1 में दिखाए गए वेतन से अनुमानित आय की गणना अनुच्छेद 2 में दी गर्इ दरों में होगी:

7.3 अनुच्छेद 6 में गणना की गर्इ कर छूट की राशि को अनुच्छेद 7.2 के अनुसार आयकर से कटौती की जाएगी। हालांकि यह सुनिश्चित किया जाए कि अनुच्छेद 6 मेंं दी गर्इ कर की कटौती की गणना अनुच्छेद 7.2 के अनुसार हो।

7.4 यह भी ध्यान दिया जाए अधिनियम के अध्याय 6ए के अंतर्गत कटौतियां जो कि अनुच्छेद 5.4 में बतार्इ गर्इ हैं तथा अनुच्छेद 6 में अनुमत कर छूट केवल तभी अनुमत हैं जब निवेश या भुगतानों को वित्तीय वर्ष 1996-97 के दौरान करयोग्य आय से बनाया गया हो।

7.5 करों की राशि जो कि अनुच्छेद 7.3 में बतार्इ गर्इ है उसे समान किश्तों में हर माह काटा जाना चाहिए। इस राशि को निकटतम शून्य तक राउंडऑफ किया जाना चाहिए।

8. विविध:

8.1 ये निर्देश विशिष्ट नहीं हैं तथा आय से कर की कटौती करने के संबंध में विविध प्रावधानों को समझने में कर्मचारियों की मदद के लिए बनाए गए है। जहां पर भी संदेह हो, आयकर अधिनियम 1961, आयकर नियम 1962 तथा वित्त अधिनियम 1966 को देंखें।

8.2 यदि किसी सहायता की आवश्यकता हो तो आंकलन अधिकारी/आयकर के संपर्क अधिकारी के साथ संपर्क किया जा सकता है।

8.3 इन निर्देशों को प्रत्येक वितरण अधिकारी कें संज्ञान में लायाजाएगा जो केन्द्र/राज्य सरकारों के नियंत्रण में प्रमाणपत्र जारी करते हें।

8.4 इस परिपत्र की प्रतियां आयकर निदेशक (अनुसंधान, सांख्यकीय तथा प्रकाशन व सार्वजनिक संबंधों ), 6 तल, मयूर भवन, इंदिरा चौक कनॉट सर्कस, नर्इ दिल्ली 110001 के पास उपलब्ध है।

हस्ताक्षर

वार्इ पी वशिष्ठ

अंडर सेके्रटरी

प्रत्यक्ष करों का केन्द्रीय आयोग

(एफ सं. 275/216/96-II(बी) दिनांक 2-12/1996 सीबीडीटी से, नर्इ दिल्ली)

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