आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
सुलभता विकल्प
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

परिपत्र सं.

742

परिपत्र की तिथि

02/05/1996

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

02/05/1996

 
परिपत्र संख्या 742
जारी करने का दिनांक 02.05.1996
धारा 195
कानून आयकर अधिनियम

विषय: विदेशी दूरसंचार कंपनियों के लिए कराधान - आयकर आदि की गणनाके लिए दिशानिर्देश

  1. कर्इ प्रकार के की प्रस्तुतियां विदेशी दूरसंचार कंपनियों के द्वारा उनकी कराधान क्षमता तथा आय की सीमा के बारें की गर्इ हैं जो सही हो सकती हैं तथा वे भारत में अपना परिचालन करना चाहती हैं। उनके भारतीय परिचालनों से लाभ की गणना की पद्धति एक मुद्दा है खास तौर पर उन कंपनियों के मामले में जिनका कोर्इ भी शाखा कार्यालय भारत में नहीं है और वे अपने मूल देश से ही परिचालन कर रहे हैं।

  2. इस मामले की जांच आयोग द्वारा की गर्इ तथा इनमें से कुछ कंपनियों के आंकलन रिकॉर्ड को भी देखा गया है। चूंकि व्यापारिक गतिविधियों के लिए यह एक नया क्षेत्र है तो विदेशी दूरसंचार कंपनियों के देश व्यापी खातों की अनुपस्थिति में उनके विभिन्न केन्द्रों के बीच में आय की गणना करना आंकलन अधिकारी के लिए कठिन रहा है। इस लिए आयोग ने इनके प्रभावी प्रबंधन के आंकलन के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए है।

  3. यह देखा गया है कि विदेशी दूरसंचार कंपनियों द्वारा जो बिल उगाहे गए हैं वह15 प्रतिशत रहा है। इसी प्रकार भारतीय एजेंटों ने भी अपने सुविधा शुल्क को 15 प्रतिशत रखा है। शेष 70 प्रतिशत की राशि उनके देश वापस चली जाती है। तो जहां तक उनके यहां पर विज्ञापन सेवाओं का सवाल है तो वह कर योग्य है। विदेशी दूरसंचार कंपनियों के संबधं में जिनका कोर्इ भी शाखा कार्यालय भारत में नहीं हैं उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 195 के प्रावधानों के अनुसार ही करों का भुगतान करना होगा, उस व्यक्ति द्वारा जो उनके द्वारा भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा।

  4. देश व्यापी खातों की अनुपलब्धता के संबंध मे तथा पूंजी लागतों, स्थापन शुल्कों तथा परिचालन व्यय के संबंध में, परिचालन के आरंभिक वषों के लिए यह स्पष्ट तथा तार्किक होगा कि कर योग्य आय को कुल प्राप्तियों पर 10 प्रतिशत पर गिना जाए। आंकलन अधिकारियों को विदेशी दूरसंचार कंपनियों की तद्नुसार गणना करनी होगी जिनका भारत में शाखा कार्यालय नहीं है या जो देश व्यापी खातों का परिचालन नहीं कर रहे हैं उन्हें कुल प्राप्तियों पर 10 प्रतिशत लाभ कर के रूप में देना होगा या ऐसी कंपनियों को होने वाली आय का 10 प्रतिशत जो भी अधिक हो तथा वह वर्णित दरों पर कर का विषय होगा जो अभी 55 प्रतिशत है।

  5. यह भी निर्णय लिया गया कि उपरोक्त तरीके से आय का आंकलन करते करते समय दंड स्वरूप ब्याज को उन मामलों में शुरू किया जाना चाहिए जहां पर करों को ब्याज के साथ परिपत्र जारी किए जाने के 30 दिनों के अंदर स्वैच्छिक रूप से दिया जा रहा है।

  6. यह स्पष्ट किया जाता है कि ये दिशानिर्देश सभी लंबित मामलों में लागू होंगी, फिर कोर्इ फर्क नहीं पड़ता कि आंकलन वर्ष कौन सा रहा, जिसके बाद ऐसी कंपनियों के लाभों की समीक्षा की जाएगी।

हस्ताक्षर

सिद्धार्थ मुखर्जी

सेके्रटरी

प्रत्यक्ष करों का केन्द्रीय आयोग

एफ सं. 500/50/96 एफटीडी दिनांक 02.051996 सीबीडीटी से, नर्इ दिल्ली )

स्पष्टीकरण i : प्रत्यक्ष करों का केन्द्रीय आयोग अपने एफसं. 500/50/96 आर्इटीबी दिनांक 02.051996 को जारी परिपत्र से विदेशी दूरसंचार कंपनियों के लिए कराधान के लिए दिशानिर्देश जारी करता है। ये दिशानिर्देश 31 मार्च 1998 तक लागू रहेंगी। इस परिपत्र को 31 मार्च 1998 के बाद विस्तारित करने का निर्णय लिया गया है तथा उपरोक्त वर्णित परिपत्र सभी लंबित मामलों में लागू रहेगा, फिर आंकलन वर्ष कुछ भी हो।

 

■■